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13-10-2019
12 लाख से ज्यादा दर्शनार्थियों ने किए बम्लेश्वरी देवी के दर्शन, 44 लाख से ज्यादा आया दान

डोंगरगढ़। राजनांदगांव जिले की धर्मनगरी डोंगरगढ़ में इस वर्ष क्वांर नवरात्रि पर्व के दौरान मां बम्लेश्वरी देवी के दर्शन करने देश-विदेश से 12 लाख से भी ज्यादा माता के भक्त आए थे। उन्होंने बम्लेश्वरी देवी के दर्शन कर आशीर्वाद लिया, मनोकामना की और अपनी-अपनी श्रद्धा के अनुसार दान दिया। चढ़ावे की गिनती मंदिर ट्रस्ट समिति द्वारा की गई । अभी तक कुल 44 लाख रुपए की गिनती की गई है। मंदिर ट्रस्ट समिति के मंत्री नवनीत तिवारी ने बताया कि 12 लाख से भी ज्यादा  भक्तों ने नवरात्रि के दौरान 44 लाख से भी ज्यादा का दान देकर पुण्य लाभ लिया। अभी कुछ जोत कक्ष की दानपेटी की जानकारी लेने के बाद आय-व्यय की जानकारी दी जाएगी।

 

09-10-2019
बंगाली समाज

कोंडागांव। नवरात्रि के नौ दिन पूजा-पाठ के बाद बंगाली समाज की महिलाएं दशमी के दिन एक-दूसरे के साथ सिंदूर की होली खेलती हैं। इसी तारतम्य में जिले के बोरगांव में शारदीय दुर्गोंत्सव के दशमी के दिन गांव के सुहागन महिलाएं मातारानी को सिंदूर चढ़ाकर आपस में सिंदुर खेलकर अपने सुहाग की लंबी उम्र की कामना की।

पौराणिक मान्यता के अनुसार

दशहरे के दिन बंगाली समाज में सिंदूर खेलने की परंपरा है, इसे "सिंंदूर खेला" के नाम से जाना जाता है। नवरात्रि के नौ दिन पूजा-पाठ के बाद दशमी के दिन शादीशुदा महिलाएं एक-दूसरे के साथ सिंदूर की होली खेलती हैं। ऐसा करने के पीछे मान्यता है कि नवरात्रि में मां दुर्गा 10 दिन के लिए आपने मायके आती हैं। इसलिए जगह-जगह उनके पंडाल सजते हैं। इन नौ दिनों में मां दुर्गा की पूजा और आराधना की जाती है और दशमी पर सिंदूर की होली खेलकर मां दुर्गा को विदा किया जाता है।

 खुब सजाया संवारा जाता है देवी मां को

नवरात्रि पर जिस तरह लड़की के अपने मायके आने पर उसकी सेवा की जाती है, उसी तरह मां दुर्गा की भी खूब सेवा की जाती है। दशमी के दिन मां दुर्गा के वापिस ससुराल लौटने का वक्त हो जाता है तो उन्हें खूब सजा कर और सिंदूर लगा कर विदा किया जाता है। आपस में सिंदूर की होली खेलने से पहले पान के पत्ते से मां दुर्गा के गालों को स्पर्श किया जाता है। फिर उनकी मांग और माथे पर सिंदूर लगाया जाता है। इसके बाद मां को मिठाई खिलाकर भोग लगाया जाता है। फिर सभी महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर लंबे सुहाग की कामना करती हैं।

नम आंखों से देवी मां को देते हैं विदाई

वैसे तो सिंदूर खेला की रस्म केवल शादीशुदा महिलाओं के लिए ही होती है मगर कुंवारी लड़कियां भी अब इस रस्म को निभाती हैं ताकि उन्हें अच्छा और मन पसंद वर मिल सके । इस रस्म को निभाते वक्त पूरा माहौल उमंग और मस्ती से भर जाता है। इसके थोड़ी देर बाद मां को विसर्जित करने का वक्त आ जाता है और सभी नम आंखों से ‘मां चोले छे ससुर बाड़ी’ अर्थात मां चली ससुराल गीत गाने लगते हैं और अगले वर्ष उनके आने की कामना करते हुए विसर्जित कर देते हैं।

शक्ति बढ़ाने के लिए धुनुची नृत्य

बंग समुदाय में दुर्गापूजा में धुनुची नृत्य खास है। धुनुची मिट्टी से बना बर्तन होता है जिसमें नारियल के छिलके जलाकर उसमें धुप डालकर मां की आरती की जाती है। धुनुची नृत्य असल में शक्ति नृत्य है। बंगाल पूजा परंपरा में यह नृत्य मां भवानी की शक्ति और ऊर्जा बढ़ाने के लिए किया जाता है। धुनुची में नारियल की जटा व रेशे (कोकोनट कॉयर) और हवन सामग्री (धुनी) रखी जाती है। उसी से आरती की जाती है। धुनुची नृत्य सप्तमी से शुरू होता है और नवमी तक चलता है।

 

07-10-2019
सीएम भूपेश बघेल ने किया स्व.कोदूराम वर्मा की प्रतिमा का अनावरण

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोमवार को बेरला ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम भिंभौरी का दौरा कर स्व. कोदूराम वर्मा की प्रतिमा का अनावरण किया। सीएम बघेल ने लोगों को नवरात्रि की बधाई दी। उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि स्व. कोदूराम वर्मा से वे बचपन से ही मिलते आ रहे है। सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र में उनकी विशेष पकड़ रही है। वे सहज, सरल एवं मिलनसार व्यक्तित्व के धनी थे। स्व.वर्मा छत्तीसगढ़ अस्मिता के प्रबल प्रवर्तक भी रहे हैं। कर्मा नृत्य का संयोजन वे बखूबी करते थे। कबीर के भजन भी उन्हें प्रिय थे। स्व.वर्मा की संगीत-नृत्यकला में विशेष रूचि थी। वे पूर्व विधायक स्व. महेश तिवारी के करीबी संगवारी भी थे। किसानों के हित के लिए वे लगातार प्रयासरत रहे। उनके काम को आगे बढ़ाने का कार्य प्रदेश सरकार कर रही है। इस अवसर पर पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू, कृषि मंत्री रवीन्द्र चौबे, राज्यसभा सांसद छाया वर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष कविता साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष रायपुर शारदा वर्मा, कलेक्टर शिखा राजपूत तिवारी, पुलिस अधीक्षक प्रशांत ठाकुर, प्रेमलाल वर्मा, भारती वर्मा, बुलाकी वर्मा सहित बड़ी संख्या ग्रामवासी उपस्थित थे। 

07-10-2019
सीएम ने भिलाई स्थित अपने निवास में कराया कन्याभोज, परोसा भोजन

दुर्ग। सीएम भूपेश बघेल ने अपने भिलाई स्थित निवास में नवरात्रि के अवसर पर कन्याभोज का आयोजन किया। इसमें  मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने देवी स्वरूपा कन्याओं की पूजा कर उन्हें भोजन परोसा।

06-10-2019
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. महंत ने शिवरीनारायण में की मां अन्नपूर्णा की पूजा-अर्चना 

जांजगीर-चाम्पा। छत्तीसगढ़ राज्य विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने नवरात्रि के पावन अवसर पर आज जांजगीर जिले के शिवरीनारायण स्थित मां अन्नपूर्णा गौरी मंदिर गए। और वहां मां अन्नपूर्णा देवी के दर्शन कर उनकी पूजा-अर्चना की। उन्होंने राज्य की जनता की समृद्धि, शांति और और सुखमय जीवन के लिए आशीर्वाद मांगा। इस अवसर पर कलेक्टर जनक प्रसाद पाठक, जिला पंचायत सीईओ तीर्थराज अग्रवाल, जांजगीर एसडीएम के एस पैंकरा, जिला पंचायत के पूर्व सदस्य दिनेश शर्मा, जांजगीर-नैला नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष रमेश पैगवार, रघुराज पांडेय सहित गणमान्य नागरिक, बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

06-10-2019
कवर्धा में आज मध्यरात्रि निकलेगा खप्पर,  70 हजार लोग करेंगे दर्शन

कवर्धा। देश में कोलकाता के बाद छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और कवर्धा में खप्पर निकालने की परंपरा रही है। अब यह परपंरा देशभर में केवल कवर्धा में बची हुई है। कवर्धा में दो सिद्धपीठ मंदिर और एक देवी मंदिर से परम्परानुसार खप्पर निकाला जाता है। भारत वर्ष में देवी मंदिरों से खप्पर निकालने की परंपरा वर्षों पुरानी है। धार्मिक आपदाओं से मुक्ति दिलाने व नगर मेंं विराजमान देवी-देवताओं का रीतिरिवाज के अनुरूप मान मनव्वल कर सर्वे भवन्तु सुखिन: की भावना स्थापित करना है। प्रत्येक नवरात्रि पक्ष के अष्टमी के मध्य रात्रि ठीक 12 बजे दैविक शक्ति से प्रभावित होते ही समीपस्थ बह रही सकरी नदी के नियत घाट पर स्नान के बाद द्रुतगति से पुन: वापस आकर स्थापित आदिशक्ति देवी की मूर्ति के समक्ष बैठकर उपस्थित पंडों से श्रृंगार करवाया जाता है। स्थान के पूर्व लगभग 10.30 बजे से ही माता की सेवा में लगे पण्डों द्वारा परंपरानुसार 7 काल 182 देवी देवता और 151 वीर बैतालों की मंत्रोच्चारणों के साथ आमंत्रित कर अग्नि से प्रज्ज्वलित मिट्टी के पात्र(खप्पर) में विराजमान किया जाता है। पूर्व की परंपरा में थोड़ा पृथक कर 108 नीबू काटकर रस्में पूरी की जाती है। इसके बाद खप्पर मंदिर से निकाला जाता है। खप्पर की वेशभूषा वीर रूपी एक अगुवान भी निकलता, जो दाहिने हाथ में तलवार लेकर खप्पर के लिए रास्ता साफ  करता है। मान्यता है कि खप्पर के मार्ग अवरुद्ध होने पर तलवार से वार करता है। खप्पर के पीछे-पीछे पण्डों का एक दल पूजा अर्चना करते हुए साथ रहता है, ताकि शांति बनी रहे।

पूर्व में काफी रौद्ररूप था 
चण्डी मंदिर के समीप रहने वाले 75 वर्षीय बद्री देवांगन ने बताया कि पांच दशक से भी पूर्व जो खप्पर का स्वरूप था वह काफी रौद्ररूप था। दर्शन करना तो बहुत दूर की बात थी, उनकी किलकारी की गूंज मात्र से बंद कमरे में लोग दहशत में आ जाते थे। बावजूद इसके धार्मिक भावना से प्रेरित होकर दरवाजों व खिड़कियों की पोल से पलभर के लिए दर्शन लाभ उठाते थे। वयोवृद्ध बद्री ने बताया कि पहले हमारे पूर्वजों के अनुसार खप्पर जमीन से कुछ फुट ऊपर व छाती तक लंबा जीभ लिए नगर भ्रमण को निकलता था जिसका दर्शन करना वर्जित था।

आज मध्यरात्रि में निकलेगा खप्पर
आज रविवार अष्टमी को नगर के दो सिद्धपीठ और एक आदिशक्ति देवी मंदिर से परम्परानुसार खप्पर निकलेगा। देवांगन पारा स्थित मां चण्डी मंदिर, मां परमेश्वरी मंदिर और सत्ती वार्ड स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर से खप्पर निकलेगा। मध्यरात्रि 12.20 बजे मां दंतेश्वरी मंदिर से पहला खप्पर अगुवान की सुरक्षा में निकलेगा। इसके 10 मिनट बाद ही मां चण्डी से और फिर 10 मिनट के अंतराल में मां परमेश्वरी से खप्पर नगर भ्रमण को निकलेगा। विभिन्न मार्गों से गुरजते हुए मोहल्लों में स्थापित 18 मंदिरों के देवी-देवताओं का विधिवत आह्वान किया जाता है।

दूर-दूर से आते लोग
अष्टमी की रात्रि शहर में मेला का माहौल रहता है। यहां पर खप्पर देखने के लिए स्थानीय के अलावा गावों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। इसके अलावा रायपुर, बिलासपुर, राजनांदगांव, दुर्ग, मुंगेली और मंडला जैसे अन्य जिलों से भी लोग खप्पर देखने के लिए पहुंचते हैं। अलग अलग जगहों में खप्पर का दर्शन करने हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ एकत्र होती है। 

06-10-2019
एक मंच पर आए कई संगठन के कार्यकर्ता, राजेन्द्र पार्क चौक पर लगाया पंडाल, श्रद्धालुओं को बांटी प्रसाद

दुर्ग। मां दुर्गा की आराधना में पूरा शहर डूबा हुआ है। ऐसे में मां बम्लेश्वरी देवी के दर्शन के लिए डोंगरगढ़ जाने वाले पदयात्रियों की सेवा में कोई भी पीछे नहीं रहना चाहता है। फलस्वरुप पदयात्रियों की सेवा में शहर में कई संगठनों के कार्यकर्ता एक मंच पर आए है। संगठन में व्यापारियों के अलावा धार्मिक व समाजसेवी कार्यकर्ता शामिल है। जिनके सेवाभावी कार्यों को काफी सराहना मिल रही है। इस संगठन द्वारा नवरात्रि के तीसरे दिन से छठे दिन तक स्थानीय राजेन्द्र पार्क चौक में पंडाल लगाकर पदयात्रियों व माता के भक्तों की सेवा की गई। पंडाल में संगठन के सदस्यों ने पदयात्रियों को महाप्रसादी के साथ-साथ अन्य सेवाएं उपलब्ध करवाई।

वहीं श्रद्धालुओं को भी महाप्रसादी का वितरण किया गया। जहां प्रतिदिन हजारों की संख्या में पदयात्री व श्रद्धालु जुटे। महाप्रसादी के इस व्यवस्था में व्यापारिक संगठन कैट, लॉयन क्लब ऑफ दुर्ग मिडटाउन, हरिओम ग्रुप, बोलबम सेवा समिति एवं कोटवानी परिवार ने योगदान दिया। इस सेवाभावी कार्य में कैट अध्यक्ष प्रहलाद रुंगटा, लॉयन क्लब ऑफ दुर्ग मिडटाउन अध्यक्ष अरविंद खंडेलवाल, सचिव सुधीर खंडेलवाल, कैट प्रदेश उपाध्यक्ष पवन बडज़ात्या, संजीव गोधा, अमर कोटवानी, महेन्दी भाई समनानी, मनीष रुंगटा, आशीष निमजे, पंकज राय, दिनेश अग्रवाल, राजू उजाला, रघुनंदन उजाला, सिद्धू कोटवानी, अरुण अग्रवाल, हरविंदर भाटिया, शारदा बोथरा, ललिता निमजे, मीना खंडेलवाल, मनीषा रुंगटा, अनुराधा खंडेलवाल एवं अन्य उपस्थित थे।

05-10-2019
'विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य' विषय पर कार्यशाला का हुआ आयोजन

रायगढ़। नवरात्रि के अवसर पर कलेक्टोरेट के सृजन सभाकक्ष में 'विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य' विषय पर कार्यशाला एवं बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ विषय पर वाद-विवाद, प्रश्नोत्तरी एवं चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कलेक्टर यशवंत कुमार ने कहा कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान में जिले का प्रदर्शन अच्छा रहा है। जिले में बाल लिंगानुपात बेहतर हो इस दिशा में जिला प्रशासन द्वारा निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बेटियों को अपने अधिकारों का ज्ञान होना चाहिए, जिसकी वे हकदार है। बालिकाओं के साथ जो भेदभाव होता है, उसके प्रति बालकों को भी जागरूक किया जाना जरूरी है। यह खुशी कि बात है कि इस कार्यशाला में बालक भी बड़ी संख्या में उपस्थित हैं। उन्होंने कहा कि आज के परिवेश में बालिकाएं अध्ययन कर आत्मनिर्भर बन रही है।

ऐसे में यह जरूरी है कि पुरूषों की सोच में महिलाओं के प्रति सकारात्मक परिवर्तन लाया जाये कि वे घरेलू कार्यो में महिलाओं को सहयोग करें। उन्होंने बालिकाओं से कहा कि अपने अधिकारों के लिए जागरूक रहें और जरूर आवाज उठायें। उन्होंने कहा कि यौन-शोषण एवं अन्य कोई गंभीर बात हो तो अपने अभिभावकों को जरूर अवगत करायें, माता-पिता अपने बच्चों के हित के प्रति हमेशा सजग रहते है। महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यक्रम अधिकारी टी.जाटवर ने कहा कि कार्यशाला में जेण्डर एवं इससे संबंधित मुद्दों पर चर्चा की जा रही है एवं मार्गदर्शन दिया जा रहा है जो सभी के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। कई बार हम जीवन में छोटी-छोटी बातों को नजर अंदाज कर देते हैं। इस कार्यशाला के माध्यम से हमें जो कारगर परामर्श मिले है, उन्हें हम जीवन में उतार पायेंगे और जीवन में आने वाली अनायास समस्याओं को दूर करेंगे।

कार्यशाला में अपने विचार व्यक्त करते हुए एसोसिएट प्रोफेसर, मनोरोग विभाग, मेडिकल कालेज डॉ. राजेश कुमार अजगले ने कहा कि स्कूलों में बच्चों को गुड टच, बैड टच की जानकारी दी जा रही है, ताकि वे सजग रहे। शिक्षकों का यह दायित्व है कि वे बच्चों को समझायें। उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि बालिकाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें। उन्होंने कहा कि बालिकाओं में मासिक चक्र के दौर में कई हार्मोनल परिवर्तन आते हैं, ऐसे समय में माता को अपने बच्चों को अच्छी तरह समझने एवं देखभाल की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को अपने बच्चों से कैरियर के संबंध में आवश्यकता से अधिक अपेक्षा नहीं रखना चाहिए। यह जरूरी नहीं कि हर बच्चा डॉक्टर या इंजीनियर बने, हर बच्चे की अपनी अलग विशेषताएं होती हैं।  समाज में बालक को घर का चिराग माना जाता है, ऐसी मानसिकता को दूर करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के अलावा सभी खेलकूद एवं अन्य गतिविधियों में भी हिस्सा लें।

सखी वन स्टाप सेंटर की परामर्शदात्री किरण कश्यप ने कहा कि जिस तरह एक सच्चा मित्र अच्छी सलाह देता है उसी अवधारणा को ध्यान में रखते हुए बालिकाओं एवं महिलाओं की मदद के लिए सखी वन स्टाप सेंटर की स्थापना प्रदेश के हर जिले में की गई है, जहां महिलाएं त्वरित मदद ले सकती है। उन्होंने बताया कि चाइल्ड हेल्प लाइन नं. 1098 है एवं महिला हेल्प लाइन नं. 181 है। इस अवसर पर चित्रकला प्रतियोगिता में शास.कन्या उ.मा.वि.रायगढ़ की प्रेरणा जांगड़े ने प्रथम, शालिनी कान्वेंट स्कूल रायगढ़ की अमिषा पटेल ने द्वितीय, इंडियन स्कूल रायगढ़ के अमर सिदार तृतीय, गार्जियन एण्ड गाईड स्कूल के सरिता राठिया चतुर्थ, बाल मंदिर विद्यालय रायगढ़ की जुही सिंह ने पांचवा स्थान प्राप्त किया। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में शालिनी कान्वेंट स्कूल रायगढ़ के शशांक शेखर एवं स्वराज महापात्र ने प्रथम, शास.कन्या.उ.मा.विद्यालय रायगढ़ के काजल एवं पूजा मानिकपुरी ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। वाद-विवाद प्रतियोगिता में इंडियन स्कूल की प्रीति भट्टाचार्य ने प्रथम, बाल विद्या मंदिर के चंचल डालमिया ने द्वितीय, शास.कन्या.उ.मा.वि.की मेघा यादव ने तृतीय, इसी तरह शास.कन्या.उ.मा.वि.की ज्योति सिंह ने प्रथम, बाल विद्या मंदिर की अंकिता शर्मा ने द्वितीय, इंडियन स्कूल की श्रुति पाल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इस अवसर पर बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान की बीना पुरसेठ एवं अन्य अधिकारी तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।  

03-10-2019
शिवसेना ने निकाली माता रानी की विशाल चुनरी यात्रा

रायगढ़। शिवसेना द्वारा नवरात्रि के उपलक्ष्य में माता रानी की विशाल चुनरी यात्रा निकाली गई। चुनरी यात्रा स्थानीय शहीद चौक से निकली गयी। रास्ते में श्रद्धालुओं ने चुनरी चढ़ाई जिसे जोड़ते गए जो बूढ़ी मां मन्दिर पहुंचते तक काफी लंबी हो गयी। लगभग सौ मीटर लंबी चुनरी माता को चढ़ाकर भक्तों ने पूजा-अर्चना की। चुनरी यात्रा शहीद चौक से निकलकर शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए बूढ़ी मां मंदिर पहुंचकर समाप्त हुई। चुनरी यात्रा की जगह-जगह महिलाओं ने पूजा की। बता दें कि शिवसेना द्वारा साल की दोनों नवरात्रि की पंचमी के दिन चुनरी यात्रा निकाली जाती है। शिवसेना के पदाधिकारियों का कहना है कि पार्टी भले ही राजनीतिक है, लेकिन शिवसेना द्वारा राजनीति के साथ ही सामाजिक और धार्मिक कार्य भी किए जाते हैं। यह चुनरी यात्रा भी पार्टी के धार्मिक कार्यक्रम के अंतर्गत निकाली गई।

 

03-10-2019
महापौर दुबे ने कहा- छत्तीसगढ़ में रामलीला मंचन की प्राचीन परंपरा, तीन दिवसीय आयोजन 4 से

रायपुर। नवरात्रि पर्व के पावन अवसर पर राजधानी के शहीद स्मारक भवन में 4 से 6 अक्टूबर तक रात्रि 7 से 10 बजे तक रामलीला का मंचन किया जाएगा। स्वामी राघवेन्द्र देव चतुर्वेदी मथुरा वाले के निर्देशन में मथुरा एवं छत्तीसगढ़ के कलाकारों की ओर से प्रस्तुति दी जाएगी। उक्त जानकारी आज गुरुवार को महापौर प्रमोद दुबे ने पत्रकारवार्ता में दी। उन्होंने कहा कि शहरवासियों को कौशल्या के राम  के भव्य आयोजन पर रामलीला मंचन की शानदार प्रस्तुति देखने को मिलेगी। महापौर प्रमोद दुबे ने कहा कि छत्तीसगढ़ में रामलीला मंचन की प्राचीन परम्परा रही है। मंदिरहसौद के निकट चंदखुरी में मां कौशल्या का मंदिर है, मां कौशल्या की जन्मभूमि छत्तीसगढ़ है। भगवान श्रीराम हमारी संस्कृति से आदिकाल से जुड़े ये हैं। रावणभाठा में दूधाधारी मठ के महंत राजेश्री श्रीराम सुन्दर दास द्वारा प्रतिवर्ष रामलीला का मंचन वर्षों से होता आ रहा है। संतकवि पवन दीवान भी मां कौशल्या एवं भगवान राम के ननिहाल से प्रभावित होकर कौशल्या के राम शीर्षक से ही रामलीला का मंचन करवाया करते थे।

महापौर ने कहा कि राम हमारी संस्कृति के प्रबल धरोहर है, उन्हीं की लीलाओं का प्रभाव आज भी हमारे छत्तीसगढ़ में विद्यमान है। इसी क्रम की निरंतरता को बनाये रखने के उद्देश्य से इस वर्ष रामलीला का आयोजन किया जा रहा है,जिसमें मथुरा के प्रतिष्ठित आदर्श रामलीला मंडली के कलाकार और स्थानीय कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। महापौर ने कहा कि यह आयोजन पूर्व सांसद एवं संत कवि पवन दीवान के स्वर्गवास के बाद टूटी हुई परंपरा को जीवंत करने का एक छोटा सा प्रयास है। अगर प्रभु कृपा से यह छोटा सा प्रयास सफल होता है तो संत कवि पवन दीवान के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी। कार्यक्रम का आयोजन 4 से 6 अक्टूबर को शहीद स्मारक भवन में किया जाएगा। रामलीला का मंचन रात्रि 7 बजे से 10 बजे तक स्वामी राघवेन्द्र देव चतुवेर्दी, मथुरा वालों के निर्देशन में मथुरा एवं छत्तीसगढ़ के कलाकारों द्वारा आदर्श राम लीला मंडल के तहत प्रस्तुति दी जाएगी।

महापौर ने कहा कि 4 अक्टूबर को  श्रीराम जन्म, ताड़का वध, मारीच वध, पुष्प वाटिका, श्रीराम सीता प्रथम मिलन दिवस का मंचन होगा। 5 अक्टूबर  को धनुष यज्ञ, कैकयी दशरथ संवाद, राम वनवास, सीता हरण का मंचन होगा। 6 अक्टूबर को कुंभकरण वध, मेघनाथ वध, रावण वध और श्रीराम का राजतिलक का मंचन होगा। कार्यक्रम के आयोजक हमर राम सांस्कृतिक समिति, रायपुर (छ.ग.) है। आयोजक समिति के सदस्य महापौर प्रमोद दुबे,विधायक सत्यनारायण शर्मा,विधायक कुलदीप जुनेजा,विधायक विकास उपाध्याय,राजेश्री महंत राम सुन्दर दास,गिरीश देवांगन,कन्हैया अग्रवाल,आरपीसिंह और विकास तिवारी हैं।

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