GLIBS
25-10-2020
नवरात्रि में कन्याभोज के लिए हलवा पूरी के साथ बनाए प्रसाद वाले सूखे काले चने प्रोटीन फाइबर से भरपूर और स्वादिष्ट भी

रायपुर। नवमी का पर्व युवा लड़कियों की 'कन्या पूजा' के साथ मनाया जाता है, जिन्हें देवी के नौ अवतार के रूप में पूजा जाता है। कन्या भोज के मौके पर ये सूजी के हलवे और पूरी के साथ प्रसाद वाले सूखे काले चने बनाए जाते हैं। बिना टमाटर-प्याज वाली इस सब्जी को भोग के रूप माता को प्रसाद भी चढ़ाया जाता है। सूखे काले चने खाने में बड़े स्वादिष्ट, प्रोटीन और फाइबर से भरपूर पौष्टिक होते हैं। 

ऐसे बनाए प्रसाद वाले सूखे काले चने :
-साफ पानी से काले चने दो से तीन बार धोएं और पानी में रातभर या कम से कम 4-5 घंटे के लिए भिगोकर रख दे। 
- फिर चने को उबाल ले, एक बड़ी कड़ाही में दो बड़े चम्मच तेल या घी डालें।
- इसमें जीरा डाल दे , जैसे ही यह चटकना बंद करें, वैसे ही अदरक और हरी मिर्च डाल दे। 
- अब इसमें धनिया पाउडर, हल्दी और लाल मिर्च डालें।
- अब चने इस मसाले में डालें और अच्छी तरह मिक्स कर लें। 
- करीब दो मिनट तक धीमी आंच पर इसे पकने दें। 
- इसके बाद अमचूर, चाट मसाला और गरम मसाला डालें और अच्छी तरह मिक्स करने के बाद कुछ देर धीमी आंच पर पकने के लिए छोड़ दें। 
- अगर हल्के नम चने बनाने हों तो 5 मिनट में गैस बंद कर दें। 
- एकदम सूखे चने बनाने के लिए गैस को मध्यम आंच पर रखें और चने अच्छी तरह सुखाए। 
- अब हरा धनिया डाल दे। लीजिए चने तैयार है।

21-10-2020
नवरात्रि के उपवास में अतिरिक्त ऊर्जा चाहिए तो ट्राई कीजिए मखाने की खीर, बनाने में आसान, स्वादिष्ट भी और गुणकारी भी

रायपुर। नवरात्रि के व्रत में मखाने की खीर बना सकते हैं। मखाने प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर है जो स्वास्थ के लिए लाभ होता है। मखाने की खीर विशेष रूप से उपवास के दिनों में बनाई जाती है। यह खीर बड़ी स्वादिष्ट होती है। बिना अधिक मेहनत किए हुए और आसानी से इस रेसिपी को घर पर बनाया जा सकता है। इस डिश को घर वाले भी चाव से खाना पसंद करेंगे।

मखाने की खीर बनाने की विधि : -
-कड़ाही में घी गर्म करके, उसमें मखानों को डालकर भून लें।
-भूने हुए मखानों को प्लेट में निकालकर ठंडा कर लें।
-ठंडा होने पर मोटा-मोटा कूट लें।
-दूध को उबलने दें जब दूध उबल जाये तो उसमें कुटे हुए मखाने डालकर पकाये और चीनी भी डालदे। गाढ़ा होने तक पकाते रहे।
-बादाम, सूखा नारियल, काजू और किशमिश डालकर सर्व करें।

21-10-2020
वात्सल्य की मूर्ति निसन्तानो को सन्तान का वर देने वाली स्कंदमाता को समर्पित है नवरात्रि का पांचवा दिन

रायपुर। आज शारदीय नवरात्रि का पांचवा दिन जो स्कंदमाता को समर्पित है। स्‍कंदमाता को वात्‍सल्‍य की मूर्ति माना जाता है। स्कंदमाता की पूजा करने से नि:संतान दंपत्तियों को संतान की प्राप्ति होती है। स्कंदमाता मोक्ष प्रदान करने वाली भी हैं। स्‍कंदमाता की चार भुजाएं है। दाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा से उन्‍होंने स्कंद को गोद में पकड़ा हुआ है। नीचे वाली भुजा में कमल का पुष्प ही। बाईं तरफ ऊपर वाली भुजा वरदमुद्रा में है और नीचे वाली भुजा में कमल पुष्प है। इनका वर्ण एकदम गौर है। ये कमल के आसन पर विराजमान है और इनकी सवारी शेर है।  स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता के कारण इन्हें स्कंदमाता नाम से अभिहित किया गया है। इनके विग्रह में भगवान स्कंद बालरूप में इनकी गोद में विराजित हैं।

माता स्कंदमाता के मंत्र  :-
 -या देवी सर्वभू‍तेषु मां स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता.
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

-ओम देवी स्कन्दमातायै नमः॥

-सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया.
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

संतान प्राप्ति हेतु जपें स्कन्द माता का मंत्र  :-
'ॐ स्कन्दमात्रै नम:..'

20-10-2020
अरबी यानी कोचई को कुछ लोग इस्तेमाल करते हैं फलाहार में, पौष्टिक तत्वों से भरपूर सेहत ले लिए फायदेमंद है कोचई

रायपुर। अरबी जिसे छत्तीसगढ़ में कोचई के नाम से जाना जाता है। नवरात्रि के व्रत में कई लोग खाने में अरबी का इस्तेमाल करते हैं। अरबी की फलाहारी डिश व्रत के समय खाना लाभदायक हो सकता है। अरबी फायदेमंद होती है क्योंकि इससे कई प्रकार के पौष्टिक तत्व और फाइबर भरपूर मात्रा में मिलते हैं।

विधि :
पहले अरबी को कूकर में एक सीटी देकर ऊबाल लें और छीलकर ठंडा होने के लिए छोड़ दें।
अब अरबी को हथेलियों से दबाकर थोड़ा चपटा कर लें और उसपर आमचूर, अज्वाइन, मिर्च,  सेंधा नमक छिड़ककर मिलाएं। इसे डीप फ्राइ करें जब तक अरबी गोल्डन ब्राउन कलर की न हो जाएं। फिर निकालकर टिशू पर रख लें और गमर्गगर्म परोसें।

19-10-2020
नवरात्रि पर शक्ति और भक्ति के बीच पूर्व सीएम कमलनाथ का महिला के साथ दुर्व्यवहार निंदनीय : सरोज पांडेय

रायपुर। बिहार विधानसभा चुनाव में जिम्मेदारी संभाल रही बीजेपी राज्यसभा सांसद सरोज पाण्डेय ने मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की भाजपा प्रत्याशी इमरती देवी पर की गई अभद्र टिप्पणी की निंदा की है। सोमवार को बिहार प्रदेश भाजपा की महिलाओं के साथ पटना में प्रेस कांफ्रेंस लेकर सांसद सरोज पांडेय ने कहा है कि आज आपके बीच में बहुत पीड़ा के साथ उपस्थित हुई हूं। जो अभद्र टिप्पणी एमपी के पूर्व मुख्यमंत्री सार्वजनिक सभा में करते हैं, उन्हें इसका थोड़ा सा भी अफसोस नहीं है। अभी नवरात्रि का पर्व चल रहा है, शक्ति और भक्ति के बीच एक महिला के साथ ऐसा दुर्व्यवहार निंदनीय है। उन्होंने सोनिया गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा है कि कांग्रेस की अध्यक्ष महिला हैं। मगर वो कुछ नही कहती हैं। ऐसे मसले पर राजनीति नहीं होना चाहिए। कांग्रेस का ऐसा इतिहास रहा है। चाहे वो नैना साहनी कांड हो या बिहार में कांग्रेस ने जिस ब्रजेश पांडे को टिकट दिया जिन पर पोस्को एक्ट लगा है। सांसद सरोज पांडेय ने बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि राजद ने भी अरूण यादव और राजबल्लभ यादव की पत्नी को टिकट दिया गया है। कांग्रेस पार्टी की नेता जो महिला है, राजद की नेता राबड़ी देवी हैं अब ये देखना है कि वो इस मसले पर क्या कहेंगी।  उन्होंने  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने बेटियों के लिए कई योजनाएं शुरू की। इससे ऐसी परिस्थितियों से निपटा जा सकें। आज एक अभद्र टिप्पणी जो कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री ने की, उससे महिला न्याय की मांग कर रही हैं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उपवास कर रहे हैं।  अब इस मंच पर बैठी हम 5 महिलाएं भी अभी से 4 घंटे का उपवास करेंगी। बता दें कि 18 अक्टूबर को मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ डबरा विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने बात-बात में कैबिनेट मंत्री इमरती देवी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की। पूर्व सीएम कमलनाथ ने बीजेपी प्रत्याशी इमरती देवी को आइटम कहा था।

 

19-10-2020
शेरो पर सवार माथे पर चंद्रमा धारण करने वाली चंद्रघंटा माता को समर्पित होता है नवरात्रि का तीसरा दिन

रायपुर। नवरात्रि का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित है। मां चंद्रघंटा शेर पर सवारी करती हैं और इनके दसों हाथों में अस्त्र-शस्त्र हैं। मां के माथे पर चंद्रमा विराजमान है जो उनका रूप और सुंदर बनाता है। मां की पूजा करने से मन के साथ घर में भी शांति आती है और व्यक्ति के परिवार का कल्याण होता है। मां की पूजा करते समय उनको लाल फूल अर्पित करें। मां दुर्गा की तृतीय शक्ति का नाम चंद्रघंटा है। नवरात्रि के तीसरे दिन इनका पूजन किया जाता है। असुरों के विनाश हेतु मां दुर्गा से देवी चन्द्रघण्टा तृतीय रूप में प्रकट हुई। देवी चंद्रघंटा ने भयंकर दैत्य सेनाओं का संहार करके देवताओं को उनका भाग दिलवाया। देवी चंद्रघंटा मां दुर्गा का ही शक्ति रूप है। जो सम्पूर्ण जगत की पीड़ा का नाश करती हैं। देवी चंद्रघंटा की पूजा करने से भक्तों को वांछित फल प्राप्त होता है।

मां चंद्रघंटा के मंत्र : -
-‘या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नसस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:‘
ये मां का महामंत्र है जिसे पूजा पाठ के दौरान जपना होता है
मां चंद्रघंटा का बीज मंत्र है- ‘ऐं श्रीं शक्तयै नम:’

- पिंडजप्रवरारुढ़ा चन्दकोपास्त्रकैर्युता!
प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघंटेति विश्रुता

18-10-2020
Video: डोंगरगढ़ में इस बार नहीं लगेगा मेला, ट्रेनों का स्टापेज भी बंद

राजनांदगांव। नवरात्रि पर डोंगरगढ़ में मेला नहीं लगेगा। ट्रेनों के स्टापेज पर रोक लगा दी गई है। माँ बम्लेश्वरी माई के दरबार में हर साल नवरात्रि पर बड़े पैमाने पर मेला लगता ​है। लेकिन इस बार कोरोना संकट काल के कारण रोक लगा दी गई हैं। इस बार नवरात्रि के दौरान डोंगरगढ़ में ट्रेनों का विशेष स्टापेज नहीं होगा। दर्शनार्थियों को बम्लेश्वरी मंदिर में प्रवेश नहीं मिलेगा। वहीं डोंगरगढ़ के लिए बिलासपुर से चलने वाली स्पेशल ट्रेनें भी नहीं चलेंगी।

कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने बिलासपुर, रायपुर, जांजगीर चांपा, कोरबा और रागयढ़ के कलेक्टरों को पत्र लिखकर सूचित कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि कोविड-19 के कारण मंदिर में मेला और बड़े पैमाने पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। इसे रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन ने कुछ कड़े फैसले किए हैं। इसे अमल में लाने के लिए अन्य जिलों के अधिकारियों से सहयोग की अपील की गई है। बता दें कि हर साल नवरात्रि में रेल और अन्य माध्यमों से दर्शनार्थी मां बम्लेश्वरी का दर्शन करने डोंगरगढ़ पहुंचते हैं। इनकी संख्या लाखों में होती है। इस बार कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए कलेक्टर ने सरकारी निर्देशों का हवाला देते हुए इस बार सारी गतिविधियों पर रोक लगाने की बात कही है।

18-10-2020
व्रत के फलाहार के लिए सबकी पसन्द फटाफट तैयार होने वाला विटामिन कैल्शियन ऑयरन फास्फोरस से भरपूर आलू

रायपुर। नवरात्रि शुरू हो चुकी है। इन दिनों भक्त माता के लिए व्रत रखते हैं। ऐसे में अगर आप झटपट बनने वाली फलाहारी के लिए रेसिपी ढूंढ रहे हैं तो आपका रुख आलू की तरफ जरूर जाएगा। आलू मे विटामिन, बी, कैल्शियम, आयरन और फास्फोरस की मात्रा अधिक होती है आलू में बहुत से गुण होते हैं। 

ऐसे बनाए व्रत के लिए आलू :-
-आलू का छिलका उतारकर उसको टुकड़ों में काट लें। 
-अब हरी मिर्च को बारीक काट लें। 
-एक कड़ाही में घी गरम करिए, इसमें कटी हुई हरी मिर्चें डालकर कुछ सेकेंड्स के लिए भूनें। 
-अब आँच को धीमा कर दें और कटे हुए आलू डालें, सेंधा नमक डालकर अच्छे से मिलाएँ। 
-अब 2 -3 मिनट के लिए आलू को मध्यम आँच पर भूनें। 
-अब नीबू का रस डालें, आँच को बंद कर दे। 
-व्रत के आलू को बारीक कटी हुई हरी धनिया से सजाएँ। 
-आप व्रत के आलू को कूटू की पूड़ी या दही के साथ भी सर्व कर सकते हैं।

18-10-2020
लौह नगरी बचेली में दशहरा उत्सव-रावण दहन हुआ स्थगित

रायपुर/दंतेवाड़ा। जिले के लौह नगरी बचेली में कोरोना संक्रमण के कारण इस वर्ष दशहरे में रावण दहन का आयोजन नहीं किया जाएगा। इस वर्ष नवरात्रि में कोरोना संक्रमण के कारण कई स्थानों में दुर्गा प्रतिमा स्थापित नहीं की जा रही है। छत्तीसगढ़ सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा समिति ने दशहरा उत्सव एवं रावण दहन स्थगित कर दिया है। गौरबतल है कि नगर में नवरात्रि उत्सव को लेकर अच्छा खासा माहौल देखने को मिलता था। बचेली नगर में रावण दहन एवं मेले का आनंद लेने अन्य जिलों से भी लोग शिरकत करने आते थे। आकर्षक दुकाने एवं खाने पीने की विभिन्न प्रकार के स्टाल लगाए जाते थे। लेकिन इस बार आयोजन नहीं होने को लोगों में निराशा है। इसी कड़ी में  बचेली नगर पालिका परिषद के सभा कक्ष में एक बैठक की गई, जिसमें दंतेवाड़ा कलेक्टर दीपक सोनी के दिशा निर्देश अनुसार कोविड-19 को देखते हुए इस वर्ष दशहरा उत्सव नहीं मनाने का निर्णय लिया है। बैठक में मुख्य रूप से नगर पालिका अध्यक्ष पूजा साव, उपाध्यक्ष उस्मान खान, नगर पालिका अधिकारी आई एल पटेल, इंजीनियर प्रवीण साहू एवं छत्तीसगढ़ सांस्कृतिक एवं कीड़ा समिति के सदस्य उपस्थित थे।

17-10-2020
माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों का पूजा करने और माता रानी की भक्ति में डूब जाने का महापर्व शारदीय नवरात्रि शुरू

रायपुर। मातारानी को स्मरण करने वाला पर्व है नवरात्रि। इन नौ दिनों को बेहद पवित्र माना जाता है। नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के सभी नौ रूपों की पूजा की जाती है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार यह नवरात्रि शरद ऋतु में अश्विन शुक्ल पक्ष से शुरू होती हैं और पूरे नौ दिनों तक चलती हैं। इस बार शारदीय नवरात्रि 17 अक्टूबर से शुरू होकर 25 अक्टूबर तक है। 26 अक्टूबर को विजयदशमी या दशहरा मनाया जाएगा। नवरात्रि से जुड़े कई रीति-रिवाजों के साथ कलश स्थापना का विशेष महत्व है। कलश स्थापना को घट स्थापना भी कहा जाता है। नवरात्रि की शुरुआत घट स्थापना के साथ ही होती है। घट स्थापना शक्ति की देवी का आह्वान है।

कलश स्थापना का महत्व :
हिंदू सनातन धर्म में कलश की स्थापना का बहुत महत्व है। किसी भी शुभ और मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृहप्रवेश आदि में कलश पूजन किया जाता है। कलश को सुख- समृद्धि, ऐश्वर्य देने वाला तथा मंगलकारी माना जाता है। कलश के मुख में भगवान विष्णु, गले में रुद्र, मूल में ब्रह्मा तथा मध्य में देवी शक्ति का निवास माना जाता है। नवरात्रि के समय ब्रह्मांड में उपस्थित शक्तियों का घट में आह्वान करके उसे कार्यरत किया जाता है। इससे सभी विपदादायक तरंगें नष्ट हो जाती हैं तथा घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। नवरात्रि में मां के सभी नौ स्वरूपों की चौकी सजाकर विशेष पूजा की जाती है। नवरात्रि के प्रथम दिन मां शैलपुत्री के पूजन के साथ घटस्थापना करने का प्रावधान है। मां की चौकी लगाते समय घटस्थापना अवश्य की जाती है।

 

Advertise, Call Now - +91 76111 07804