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25-03-2020
नवरात्रि के पहले दिन राम जन्मभूमि के अस्थाई मंदिर में विराजमान हुए रामलला

नई दिल्ली। श्री राम जन्मभूमि में विराजमान रामलला अस्थाई मंदिर में शिफ्ट हो गए।  नवरात्रि के पहले दिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भगवान श्री राम लला को टेंट से लेकर अस्थायी फाइबर मंदिर में विराजमान कराया। बीते 28 सालों से टेंट में विराजमान रामलला की शिफ्टिंग से पहले अस्थायी मंदिर का शुद्धिकरण किया गया। नए मंदिर में शिफ्टिंग के बाद अब मूल गर्भगृह पर राम मंदिर का निर्माण कार्य शुरू होगा। भगवान श्री रामलला को जिस सिंहासन पर विराजमान कराया गया है, वह चांदी का है, और उसका वजन 9.5 किलोग्राम है। रामलला तीनों भाइयों भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न और हनुमान जी के साथ अस्थायी मंदिर में विराजमान हुए। वैदिक मंत्रोउच्चरण के साथ रामलला अस्थाई भवन में विराजमान हुए। श्री रामलला की भव्य आरती हुई। योगी आदित्यनाथ ने रामलला को 11 लाख रुपए का चेक सौंपा।

25-03-2020
राष्ट्रपति कोविंद और प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को दी नवरात्रि की शुभकामनाएं

 नई दिल्ली। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को देशवासियों को हिन्दू नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए इस वर्ष की अपनी साधना को मानवता की उपासना करने वाले तथा काेरोना वायरस के फैलाव को रोकने में लगे सभी नर्स, डॉक्टर, मेडिकल स्टॉफ, पुलिसकर्मी और मीडियाकर्मी के उत्तम स्वास्थ्य के लिए समर्पित की। मोदी ने ट्वीट कर कहा,“सभी देशवासियों को नववर्ष विक्रम संवत 2077 की हार्दिक शुभकामनाएं। यह नववर्ष आप सबके जीवन में समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य लेकर आए।” तो वहीं राष्ट्रपति कोविंद ने देशवासियों को चैत्र शुक्लादि, उगादी, गुडी पड़वा, चेती चाँद, नवरेह और साजिबु चेरोबा की बधाई देते हुए कोरोना वायरस (कोविड-19) के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। कोविंद ने ट्वीट कर कहा,“चैत्र शुक्लादि, उगादी, गुडी पड़वा, चेती चाँद, नवरेह और साजिबु चेरोबा के शुभ अवसर पर सभी देशवासियों को बधाई। मेरी कामना है कि ये त्यौहार सबके जीवन में स्वास्थ्य, शांति और समृद्धि का संचार करें। साथ ही, सभी देशवासी कोविड-19 का मुकाबला करने में निर्देशों का पालन करें।”

25-03-2020
पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा, कोरोना के खिलाफ जंग लड़ने वालों के लिए करुंगा प्रार्थना

नई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस के संक्रमित मामलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को पीएम मोदी ने 21 दिन तक संपूर्ण लॉकडाउन का एलान किया है। आज यानि बुधवार को संपूर्ण लॉकडाउन का पहला दिन है, वहीं आज से चैत्र नवरात्रि भी शुरू हो गई, ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा है कि वह कोरोना के खिलाफ जंग लड़ने वाले लोगों के लिए प्रार्थना करेंगे। उन्होंने मेडिकल स्टाफ, पुलिस, मीडिया आदि का नाम लिया। उन्होंने कहा कि देशभर में इन दिनों त्योहार मनाए जाते थे। इस बार उन्हें पहले की तरह नहीं मनाया जाएगा लेकिन ये हमें संकट से निकलने का हौसला देंगे। पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा कि आज से नवरात्रि शुरू हो रही है। वर्षों से मैं मां की आराधना करता आ रहा हूं। इस बार की साधना मैं मानवता की उपासना करने वाले सभी नर्स, डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ, पुलिसकर्मी और मीडियाकर्मी, जो कोरोना के खिलाफ लड़ाई में जुटे हैं के उत्तम स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं सिद्धि को समर्पित करता हूं।

25-03-2020
कोरोना से बचने के लिए सामाजिक दूरी जरूरी, घर पर रहकर करे माता की पूजा : डॉ. मीरा बघेल

रायपुर। कोरोना वायरस का दिन प्रतिदिन बढ़ता दायरा और मरीज चिंता का विषय बने हुए है। ऐसे स्थिति में बिना जन सहयोग से इस बीमारी के प्रसार पर रोक नही लग सकती है। इसके लिए सामजिक दूरी बनाये रखना भी ज़रूरी हैं। नवरात्रि ऐसा ही समय है जब भक्तगण मंदिरों में बड़ी संख्या में जाते हैं जिसके कारण कोरोना वायरस का प्रसार हो सकता है। नवरात्रि की शुरुआत बुधवार से होने जा रही है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मीरा बघेल ने नवरात्रि पर सभी से अपील की है वह इस संकट के समय माता की पूजा अर्चना घर पर ही करें और मंदिरों में एकत्रित न हो। उन्होने कहा``सामाजिक दूरी समाज को वायरस के प्रकोप से बचा सकती है। अगर हम अपने आप से प्यार करते हैं तो हमें सामाजिक दूरी बनानी होगी। यही हमारी तरफ से समाज को भगवान को सच्ची भेंट होगी। मन से बड़ा कोई मंदिर नहीं घर पर बैठकर मां दुर्गा को प्रसन्न कर उनकी कृपा पा सकते हैं। नवरात्रि के अवसर पर यह बहुत जरूरी है कि हम सामाजिक दूरी बनाएं सामाजिक दूरी के महत्व को समझें और मंदिरों में भीड़ ना लगाएं’’।   

डॉ. बघेल ने कहा लोग जागरूक हैं सबको पता है कोरोना एक संक्रामक बीमारी है जिसका प्रसार एक दूसरे के संपर्क में आने से फैलता है। स्वास्थ्य विभाग इसके प्रसार को रोकने के लिए दिन रात मेहनत कर रहा है बीमारी के प्रति जो सबसे तीन प्रमुख बातें हैं, अभी तक इसका कोई इलाज नहीं है । यह एक दूसरे के संपर्क में आने से फैलती है। इसके लक्षण सामान्य सर्दी-जुकाम जैसे ही हैं। यह बहुत जरूरी है कि सभी लोग अपने घर में खुद ही सुरक्षित रहें और बाहर न निकलकर दूसरों को भी सुरक्षित रखें। कोरोना वायरस से बचाव के चार प्रमुख संदेश हाथों को साबुन और पानी से धोते रहें। खाँसते और छीकते समय अपने नाक और मुंह को टिशु या रुमाल से ढके। चेहरे, आँख, नाक, मुंह को बार बार न छुएं। ज्यादा भीड़ भाड़ वाली जगह न जाएं, खांसी जुकाम वाले मरीजों से तीन फुट की दूरी बनाए रखे।

19-03-2020
माँ बंजारी मंदिर में नवरात्रि तक दर्शनार्थियों के प्रवेश पर लगा प्रतिबंध

रायपुर। राजधानी में पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय परिसर में स्थित मां बंजारी देवी मंदिर में नवरात्रि समाप्त होने तक दर्शनार्थियों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से यह प्रतिबंध लगाया गया है। कुलसचिव के हस्ताक्षर से जारी आदेश में कहा गया है कि कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम के मद्देनजर यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया जाता है। मंदिर में प्रतिदिन दैनिक पूजा पाठ यथावत जारी रहेगा।

 

24-10-2019
सामने दिवाली और शिक्षा कर्मियों को अब तक नही मिला वेतन

कवर्धा। पिछली सरकार की तरह कांग्रेस सरकार में भी शिक्षा कर्मियों को वेतन के लिए तरसना पड़ रहा है। जी हां नवरात्रि, दशहरा भी निकल गया, अब सामने दिवाली है लेकिन अब तक शिक्षा कर्मियों को वेतन नही मिला है। इस महंगाई में भी दिवाली सामने है और अब तब वेतन उनके खाते में नही आया है। जबकि राज्य सरकार ने राज्य के कर्मचारियों को एरियास, सहित अक्टूबर माह का भी वेतन देने के निर्देश दिए है। लेकिन जिले के शिक्षा कर्मियों को सितम्बर माह का ही वेतन नही मिल सका है। कल व परसो में वेतन नही आया तो उनके सामने दिवाली मनाने की समस्या आ जायेगी। लेकिन वेतन देने अब तक कोई अधिकारी इस ओर ध्यान नही दे रहा है। ऐसे में सैकड़ों घरों में दिवाली की रोशनी दिखाई नही देगी।

 

13-10-2019
12 लाख से ज्यादा दर्शनार्थियों ने किए बम्लेश्वरी देवी के दर्शन, 44 लाख से ज्यादा आया दान

डोंगरगढ़। राजनांदगांव जिले की धर्मनगरी डोंगरगढ़ में इस वर्ष क्वांर नवरात्रि पर्व के दौरान मां बम्लेश्वरी देवी के दर्शन करने देश-विदेश से 12 लाख से भी ज्यादा माता के भक्त आए थे। उन्होंने बम्लेश्वरी देवी के दर्शन कर आशीर्वाद लिया, मनोकामना की और अपनी-अपनी श्रद्धा के अनुसार दान दिया। चढ़ावे की गिनती मंदिर ट्रस्ट समिति द्वारा की गई । अभी तक कुल 44 लाख रुपए की गिनती की गई है। मंदिर ट्रस्ट समिति के मंत्री नवनीत तिवारी ने बताया कि 12 लाख से भी ज्यादा  भक्तों ने नवरात्रि के दौरान 44 लाख से भी ज्यादा का दान देकर पुण्य लाभ लिया। अभी कुछ जोत कक्ष की दानपेटी की जानकारी लेने के बाद आय-व्यय की जानकारी दी जाएगी।

 

09-10-2019
बंगाली समाज

कोंडागांव। नवरात्रि के नौ दिन पूजा-पाठ के बाद बंगाली समाज की महिलाएं दशमी के दिन एक-दूसरे के साथ सिंदूर की होली खेलती हैं। इसी तारतम्य में जिले के बोरगांव में शारदीय दुर्गोंत्सव के दशमी के दिन गांव के सुहागन महिलाएं मातारानी को सिंदूर चढ़ाकर आपस में सिंदुर खेलकर अपने सुहाग की लंबी उम्र की कामना की।

पौराणिक मान्यता के अनुसार

दशहरे के दिन बंगाली समाज में सिंदूर खेलने की परंपरा है, इसे "सिंंदूर खेला" के नाम से जाना जाता है। नवरात्रि के नौ दिन पूजा-पाठ के बाद दशमी के दिन शादीशुदा महिलाएं एक-दूसरे के साथ सिंदूर की होली खेलती हैं। ऐसा करने के पीछे मान्यता है कि नवरात्रि में मां दुर्गा 10 दिन के लिए आपने मायके आती हैं। इसलिए जगह-जगह उनके पंडाल सजते हैं। इन नौ दिनों में मां दुर्गा की पूजा और आराधना की जाती है और दशमी पर सिंदूर की होली खेलकर मां दुर्गा को विदा किया जाता है।

 खुब सजाया संवारा जाता है देवी मां को

नवरात्रि पर जिस तरह लड़की के अपने मायके आने पर उसकी सेवा की जाती है, उसी तरह मां दुर्गा की भी खूब सेवा की जाती है। दशमी के दिन मां दुर्गा के वापिस ससुराल लौटने का वक्त हो जाता है तो उन्हें खूब सजा कर और सिंदूर लगा कर विदा किया जाता है। आपस में सिंदूर की होली खेलने से पहले पान के पत्ते से मां दुर्गा के गालों को स्पर्श किया जाता है। फिर उनकी मांग और माथे पर सिंदूर लगाया जाता है। इसके बाद मां को मिठाई खिलाकर भोग लगाया जाता है। फिर सभी महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर लंबे सुहाग की कामना करती हैं।

नम आंखों से देवी मां को देते हैं विदाई

वैसे तो सिंदूर खेला की रस्म केवल शादीशुदा महिलाओं के लिए ही होती है मगर कुंवारी लड़कियां भी अब इस रस्म को निभाती हैं ताकि उन्हें अच्छा और मन पसंद वर मिल सके । इस रस्म को निभाते वक्त पूरा माहौल उमंग और मस्ती से भर जाता है। इसके थोड़ी देर बाद मां को विसर्जित करने का वक्त आ जाता है और सभी नम आंखों से ‘मां चोले छे ससुर बाड़ी’ अर्थात मां चली ससुराल गीत गाने लगते हैं और अगले वर्ष उनके आने की कामना करते हुए विसर्जित कर देते हैं।

शक्ति बढ़ाने के लिए धुनुची नृत्य

बंग समुदाय में दुर्गापूजा में धुनुची नृत्य खास है। धुनुची मिट्टी से बना बर्तन होता है जिसमें नारियल के छिलके जलाकर उसमें धुप डालकर मां की आरती की जाती है। धुनुची नृत्य असल में शक्ति नृत्य है। बंगाल पूजा परंपरा में यह नृत्य मां भवानी की शक्ति और ऊर्जा बढ़ाने के लिए किया जाता है। धुनुची में नारियल की जटा व रेशे (कोकोनट कॉयर) और हवन सामग्री (धुनी) रखी जाती है। उसी से आरती की जाती है। धुनुची नृत्य सप्तमी से शुरू होता है और नवमी तक चलता है।

 

07-10-2019
सीएम भूपेश बघेल ने किया स्व.कोदूराम वर्मा की प्रतिमा का अनावरण

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोमवार को बेरला ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम भिंभौरी का दौरा कर स्व. कोदूराम वर्मा की प्रतिमा का अनावरण किया। सीएम बघेल ने लोगों को नवरात्रि की बधाई दी। उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि स्व. कोदूराम वर्मा से वे बचपन से ही मिलते आ रहे है। सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र में उनकी विशेष पकड़ रही है। वे सहज, सरल एवं मिलनसार व्यक्तित्व के धनी थे। स्व.वर्मा छत्तीसगढ़ अस्मिता के प्रबल प्रवर्तक भी रहे हैं। कर्मा नृत्य का संयोजन वे बखूबी करते थे। कबीर के भजन भी उन्हें प्रिय थे। स्व.वर्मा की संगीत-नृत्यकला में विशेष रूचि थी। वे पूर्व विधायक स्व. महेश तिवारी के करीबी संगवारी भी थे। किसानों के हित के लिए वे लगातार प्रयासरत रहे। उनके काम को आगे बढ़ाने का कार्य प्रदेश सरकार कर रही है। इस अवसर पर पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू, कृषि मंत्री रवीन्द्र चौबे, राज्यसभा सांसद छाया वर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष कविता साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष रायपुर शारदा वर्मा, कलेक्टर शिखा राजपूत तिवारी, पुलिस अधीक्षक प्रशांत ठाकुर, प्रेमलाल वर्मा, भारती वर्मा, बुलाकी वर्मा सहित बड़ी संख्या ग्रामवासी उपस्थित थे। 

07-10-2019
सीएम ने भिलाई स्थित अपने निवास में कराया कन्याभोज, परोसा भोजन

दुर्ग। सीएम भूपेश बघेल ने अपने भिलाई स्थित निवास में नवरात्रि के अवसर पर कन्याभोज का आयोजन किया। इसमें  मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने देवी स्वरूपा कन्याओं की पूजा कर उन्हें भोजन परोसा।

06-10-2019
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. महंत ने शिवरीनारायण में की मां अन्नपूर्णा की पूजा-अर्चना 

जांजगीर-चाम्पा। छत्तीसगढ़ राज्य विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने नवरात्रि के पावन अवसर पर आज जांजगीर जिले के शिवरीनारायण स्थित मां अन्नपूर्णा गौरी मंदिर गए। और वहां मां अन्नपूर्णा देवी के दर्शन कर उनकी पूजा-अर्चना की। उन्होंने राज्य की जनता की समृद्धि, शांति और और सुखमय जीवन के लिए आशीर्वाद मांगा। इस अवसर पर कलेक्टर जनक प्रसाद पाठक, जिला पंचायत सीईओ तीर्थराज अग्रवाल, जांजगीर एसडीएम के एस पैंकरा, जिला पंचायत के पूर्व सदस्य दिनेश शर्मा, जांजगीर-नैला नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष रमेश पैगवार, रघुराज पांडेय सहित गणमान्य नागरिक, बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

06-10-2019
कवर्धा में आज मध्यरात्रि निकलेगा खप्पर,  70 हजार लोग करेंगे दर्शन

कवर्धा। देश में कोलकाता के बाद छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और कवर्धा में खप्पर निकालने की परंपरा रही है। अब यह परपंरा देशभर में केवल कवर्धा में बची हुई है। कवर्धा में दो सिद्धपीठ मंदिर और एक देवी मंदिर से परम्परानुसार खप्पर निकाला जाता है। भारत वर्ष में देवी मंदिरों से खप्पर निकालने की परंपरा वर्षों पुरानी है। धार्मिक आपदाओं से मुक्ति दिलाने व नगर मेंं विराजमान देवी-देवताओं का रीतिरिवाज के अनुरूप मान मनव्वल कर सर्वे भवन्तु सुखिन: की भावना स्थापित करना है। प्रत्येक नवरात्रि पक्ष के अष्टमी के मध्य रात्रि ठीक 12 बजे दैविक शक्ति से प्रभावित होते ही समीपस्थ बह रही सकरी नदी के नियत घाट पर स्नान के बाद द्रुतगति से पुन: वापस आकर स्थापित आदिशक्ति देवी की मूर्ति के समक्ष बैठकर उपस्थित पंडों से श्रृंगार करवाया जाता है। स्थान के पूर्व लगभग 10.30 बजे से ही माता की सेवा में लगे पण्डों द्वारा परंपरानुसार 7 काल 182 देवी देवता और 151 वीर बैतालों की मंत्रोच्चारणों के साथ आमंत्रित कर अग्नि से प्रज्ज्वलित मिट्टी के पात्र(खप्पर) में विराजमान किया जाता है। पूर्व की परंपरा में थोड़ा पृथक कर 108 नीबू काटकर रस्में पूरी की जाती है। इसके बाद खप्पर मंदिर से निकाला जाता है। खप्पर की वेशभूषा वीर रूपी एक अगुवान भी निकलता, जो दाहिने हाथ में तलवार लेकर खप्पर के लिए रास्ता साफ  करता है। मान्यता है कि खप्पर के मार्ग अवरुद्ध होने पर तलवार से वार करता है। खप्पर के पीछे-पीछे पण्डों का एक दल पूजा अर्चना करते हुए साथ रहता है, ताकि शांति बनी रहे।

पूर्व में काफी रौद्ररूप था 
चण्डी मंदिर के समीप रहने वाले 75 वर्षीय बद्री देवांगन ने बताया कि पांच दशक से भी पूर्व जो खप्पर का स्वरूप था वह काफी रौद्ररूप था। दर्शन करना तो बहुत दूर की बात थी, उनकी किलकारी की गूंज मात्र से बंद कमरे में लोग दहशत में आ जाते थे। बावजूद इसके धार्मिक भावना से प्रेरित होकर दरवाजों व खिड़कियों की पोल से पलभर के लिए दर्शन लाभ उठाते थे। वयोवृद्ध बद्री ने बताया कि पहले हमारे पूर्वजों के अनुसार खप्पर जमीन से कुछ फुट ऊपर व छाती तक लंबा जीभ लिए नगर भ्रमण को निकलता था जिसका दर्शन करना वर्जित था।

आज मध्यरात्रि में निकलेगा खप्पर
आज रविवार अष्टमी को नगर के दो सिद्धपीठ और एक आदिशक्ति देवी मंदिर से परम्परानुसार खप्पर निकलेगा। देवांगन पारा स्थित मां चण्डी मंदिर, मां परमेश्वरी मंदिर और सत्ती वार्ड स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर से खप्पर निकलेगा। मध्यरात्रि 12.20 बजे मां दंतेश्वरी मंदिर से पहला खप्पर अगुवान की सुरक्षा में निकलेगा। इसके 10 मिनट बाद ही मां चण्डी से और फिर 10 मिनट के अंतराल में मां परमेश्वरी से खप्पर नगर भ्रमण को निकलेगा। विभिन्न मार्गों से गुरजते हुए मोहल्लों में स्थापित 18 मंदिरों के देवी-देवताओं का विधिवत आह्वान किया जाता है।

दूर-दूर से आते लोग
अष्टमी की रात्रि शहर में मेला का माहौल रहता है। यहां पर खप्पर देखने के लिए स्थानीय के अलावा गावों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। इसके अलावा रायपुर, बिलासपुर, राजनांदगांव, दुर्ग, मुंगेली और मंडला जैसे अन्य जिलों से भी लोग खप्पर देखने के लिए पहुंचते हैं। अलग अलग जगहों में खप्पर का दर्शन करने हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ एकत्र होती है। 

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