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29-11-2019
प्रधानमंत्री की मौजूदगी में रामनवमी पर होगा अयोध्या में राम मंदिर का शिलान्यास!

अयोध्या। अयोध्या विवाद पर 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट से फैसला आने के बाद अब राम मंदिर निर्माण को लेकर कवायद शुरू हो गई है। अब राम मंदिर के शिलान्यास की तारीख का ऐलान अयोध्या मामले के पक्षकार एवं दिगम्बर अखाड़े के महंत सुरेश दास ने किया है। महंत सुरेश दास ने कहा कि अगले साल रामनवमी के मौके पर मंदिर का शिलान्यास किया जाएगा। महंत ने दावा किया कि शिलान्यास के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहेंगे। राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर महंत सुरेश दास ने दावा किया कि इसमें विश्व हिन्दू परिषद, निर्वाणी अखाड़ा, निर्मोही अखाड़ा और दिगंबर अखाड़ा भी शामिल रहेगा। महंत सुरेश दास ने कहा कि 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट से राम जन्मभूमि का फैसला आया वह बहुत प्रशंसनीय है। सैकड़ों वर्षों की समस्या का समाधान सुप्रीम कोर्ट ने कर दिया। राम मंदिर के लिए बनने वाले न्यास में विहिप के साथ निर्मोही अखाड़ा रहेगा, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े को शामिल करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही दिगंबर अखाड़ा भी इस न्यास में शामिल होगा, क्योंकि हमारे महंत परमहंस दास ने 1949 से इस लड़ाई को लड़ा है। 

10-11-2019
दिग्गी ने पूछा-बाबरी मस्जिद तोड़ने वालों को कब मिलेगी सजा?

नई दिल्ली। अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के बहुप्रतीक्षित फैसले को लेकर मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने टिप्पणी करते हुए एक नया सवाल उठाया है। उन्होंनेे एक तरफ शीर्ष अदालत के फैसले का स्वागत किया तो दूसरी तरफ सवाल भी उठाया कि बाबरी मस्जिद तोड़ने वालों को कब सजा मिलेगी? दिग्विजय सिंह ने फैसले के एक दिन बाद चुप्पी तोड़ते हुए ट्वीट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि फैसले में बाबरी मस्जिद को तोड़ने के कृत्य को गैरकानूनी व अपराध माना है। क्या दोषियों को सजा मिल पाएगी? इसके साथ ही उन्होंने कोर्ट के फैसले को लेकर कहा कि कांग्रेस हमेशा संविधान के दायरे में समाधान की पक्षधर रही है। राम जन्मभूमि के निर्णय का सभी ने सम्मान किया, हम आभारी हैं। कांग्रेस ने हमेशा से यही कहा था, हर विवाद का हल संविधान द्वारा स्थापित कानून व नियमों के दायरे में ही खोजना चाहिए। विध्वंस और हिंसा का रास्ता किसी के हित में नहीं है। उच्चतम न्यायालय ने राम जन्म भूमि फैसले में बाबरी मस्जिद को तोडऩे के कृत्य को गैर कानूनी अपराध माना है। क्या दोषियों को सजा मिल पायेगी? देखते हैं। 27 साल हो गये। बता दें कि अयोध्या में जमीन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है लेकिन बाबरी मस्जिद हिंसा का मामला अब भी लखनऊ में सीबीआई की विशेष अदालत में लंबित है। विशेष सीबीआई अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा सबूत और गवाही पेश करने की आखिरी तारीख 24 दिसंबर तय की है। ऐसे में इस आपराधिक मामले में फैसला अप्रैल 2020 तक आने की संभावना है।  

 

09-11-2019
अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ओवैसी की राय क्यो ली गई? है कौन वो? क्या उसका कमेंट अवमानना नही?

रायपुर। अयोध्या में राम जन्मभूमि पर आए फैसले पर ओवैसी का बयान बेहद चौंकाने वाला है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुन्नी वक्फ बोर्ड को 5 एकड़ जमीन देने के फैसले पर ओवैसी का यह कहना खैरात लेने की क्या जरूरत है, बेहद चौंकाने वाला बयान है। कायदे से तो यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना भी नजर आता है। सारी बातों को दरकिनार कर भी दिया जाए तो भी ओवैसी जैसे नेताओं को तवज्जो देना मीडिया की टीआरपी की भूख का प्रमाण है। मीडिया ना जाने क्यों ओवैसी जैसे मौकापरस्त नेताओं को मौका देता है भड़काऊ बयान देने का। ऐसे संवेदनशील समय में जब सोशल मीडिया पर नजर रखी जा रही थी तब ओवैसी जैसे गैर जिम्मेदार नेताओं से बयान लेकर मीडिया ना जाने कौन सा विवाद खड़ा करने के मूड में नजर आया। मीडिया का ओवैसी जैसे नेताओं को अयोध्या जैसे संवेदनशील मामले में तवज्जो देना हैरानी सबब है।

09-11-2019
अयोध्या मामला : इन 5 अहम मुद्दों पर फैसला सुनाएगा सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट आज अयोध्या विवाद पर फैसला सुनाएगा। संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर पांच जजों की पीठ ने 16 अक्टूबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पांच सदस्यीय संविधान पीठ सुबह साढ़े दस बजे फैसला सुनाएगी। इसे देखते हुए पूरे देश में सुरक्षा चाक चौबंद कर दी गई है। अब अयोध्या मामले पर आज फैसला आ जाएगा तो आइए जानते हैं कि इस मामले में कौन-कौन से पक्ष हैं और क्या सूट है जिनपर सुप्रीम कोर्ट फैसला सुनाएगा।

दरअसल अयोध्या मामले पर हिन्दू पक्ष की मांग है कि विवादित जगह पर मंदिर बने तो वहीं मुस्लिम पक्ष का कहना है कि उन्हें भी जगह चाहिए। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि विवादित जगह पर राम के जन्म स्थान होने का सबूत नहीं है। कोर्ट फैसले में सूट संख्या का जिक्र कर सकता है। इसका मतलब है वाद संख्या, इसलिए सूट यानी वाद संख्या इस केस में कौन-कौन से है इसको जान लेना जरूरी है।

चार सूट जिनपर फैसला सुनाएगा सुप्रीम कोर्ट

इस केस में पहला सूट गोपाल सिंह विशारद का है जो 1950 में दाखिल हुआ था। इसमें गोपाल सिंह विसारत जो उस वक्त स्थानीय हिन्दू महासभा के नेता थे। उन्होंने राम की पूजा का अधिकार मांगा था. ऐसे में सूट नंबर एक में मांग है कि उसी जगह पर राम विराजमान रहें और पूजा का अधिकार मिले।

सूट नंबर दो परमहंस रामचंद्र दास ने 5 दिसंबर 1950 में किया था। परमहंस रामचंद्र दास ने मुकदमें में क़रीब-क़रीब वही मांगें रखी थीं जो विशारद के मुक़दमे में थीं। हालांकि इस मुकदमें में केवल एक अंतर था कि  इसमें सीपीसी के सेक्शन 80 के तहत नोटिस दिया गया था. बाद में इसे विशारद के मुक़दमे के साथ ही जोड़ दिया गया।

सूट नंबर तीन है निर्मोही अखाड़ा है। इसका मतलब यह हुआ कि सूट नंबर दो के वापस लेने के बाद कोर्ट में सूट नंबर एक के बाद तीन है। निर्मोही अखाड़ा का कहना है कि मंदिर बने लेकिन कंट्रोल हमारा रहे।

सूट नंबर चार सुन्नी वक्फ बोर्ड और तमाम मुस्लिम पक्षों का है। इसमें कहा गया है कि विवादित जगह पर मस्जिद थी और वही रहनी चाहिए। अगर मंदिर को जगह दी भी गई तो उन्हें पूरी तरह से बाहर नहीं किया जा सकता है।

सूट नंबर पांच काफी महत्वपूर्ण है. यह साल 1989 में दाखिल किया गया और इसने पूरे केस का परिदृश्य बदल दिया। यह सूट रामलला विराजमान के नाम से है। इसमें कहा गया है कि रामलला शिशु के रूप में विराजमान है और उनके अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता है। विवादित जगह पूरी तरह राम की है। इसी केस में यह भी दावा किया गया है कि श्रीराम जन्मस्थान भी एक व्यक्ति है और उसका भी बंटवारा नहीं कर सकते हैं। इससे अब आपको साफ हो गया होगा कि आज जो सुप्रीम कोर्ट फैसला सुनाने वाला है वो इन्ही चार सूट यानी वाद पर सुनाएगा।

09-11-2019
प्रधानमंत्री ने देशवासियों से शांति बनाए रखने की अपील की, उन्होंने कहा कि फैसला किसी की हार जीत नहीं

अयोध्या में राम जन्मभूमि विवाद पर आने वाले फैसले को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि यह अदालत का फैसला है किसी की हार जीत का सवाल नहीं है। हमें न्यायपालिका का सम्मान करना चाहिए। फैसला चाहे जो भी आए उसे स्वीकार किया जाना चाहिए। उसका स्वागत किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा है शांति व्यवस्था बनाए रखना हर देशवासी का कर्तव्य है। और उन्हें विश्वास है कि देशवासी इस अवसर पर भारत की परंपरा को कायम रखेंगे।

09-11-2019
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य के लोगों से शांति और सद्भाव बनाये रखने की अपील की

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अयोध्या में राम जन्मभूमि मामले में आने वाले फैसले को देखते हुए राज्य की जनता से शांति और सौहार्द्र बनावए रखने की अपील की है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि न्यायालय का सभी को सम्मान करना चाहिए और न्यायालय का फैसला सर आंखों पर होगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सुप्रीम कोर्ट के आने वाले फैसले को देखते हुए प्रशासन से भी सारे एहतियाती कदम उठाने के लिए कहा है। सभी को सख्त हिदायत दी है कि राज्य में शांति व्यवस्था में किसी प्रकार का खलल ना पड़े। छत्तीसगढ़ अपने साम्प्रदायिक सौहार्द्र के लिए सारे देश में जाना जाता है और उसकी यह पहचान बनी रहनी चाहिए।

18-09-2019
अयोध्या मामला : सीजेआई ने तय की सुनवाई की तिथि, इस तारीख तक तय होगा, राम मंदिर बनेगा या नहीं....

नई दिल्ली। राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले की उच्चतम न्यायालय में नियमित सुनवाई हो रही है। इस मुद्दे पर मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई का बड़ा बयान आया है। उन्होंने कहा है कि सभी को संयुक्त प्रयास करना होगा और पक्षकार समझौता कर अदालत को बताए। इस केस की सुनवाई 18 अक्टूबर तक पूरी होने की उम्मीद भी जताई। 27 सितंबर तक मुस्लिम पक्षकार अपनी बहस पूरी कर लेंगे। मुस्लिम पक्षकारों की तरफ से राजीव धवन ने कहा, 'अगले हफ़्ते तक हम अपनी बहस पूरी कर लेंगे।' इस पर सीजेआई ने कहा, 'आप अपनी बहस इस महीने तक पूरी कर लेंगे।' इस पर रामलला विराजमान ने कहा कि उन्हें जवाब देने के लिए 2 दिनों का वक्त चहिए। सीजेआई ने कहा, 'हमें उम्मीद है कि हम अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में 18 अक्टूबर तक सुनवाई पूरी कर लेंगे। इसके लिए हम सभी को संयुक्त प्रयास करना होगा।

इसके बाद जजमेंट लिखने के लिए जजों को चार हफ्तों का वक्त मिलेगा।' सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'अगर पक्षकार इस मामले को मध्यस्थता समेत अन्य तरीके से सैटल करना चाहते हैं तो कर सकते हैं। पक्षकार समझौता कर अदालत को बताएं।' चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा, 'मध्यस्थता को लेकर पैनल का पत्र मिला। अगर पक्ष आपसी बातचीत कर मसले का समझौता करना चाहते है तो कर के कोर्ट के समक्ष रखे। मध्यस्थता कर सकते हैं। मध्यस्थता को लेकर गोपनीयता बनी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि इस दौरान सुनवाई चलती रहेगी। सुनवाई काफी आगे तक बढ़ चुकी है इसलिए सुनवाई भी चलेगी। यानी 17 नवंबर तक फैसला आएगा। बता दें कि कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई इसी दिन रिटायर भी होंगे।

 

16-09-2019
अयोध्या विवाद : उच्चतम न्यायालय ने लाइव स्ट्रीमिंग पर कोर्ट रजिस्ट्री को जारी किया नोटिस

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद की सुनवाई के सीधे प्रसारण के मसले पर कोर्ट रजिस्ट्री को नोटिस जारी करके इस संबंध में रिपोर्ट मांगी है। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एसए बोबडे, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर की संविधान पीठ ने रजिस्ट्री ऑफिस से रिपोर्ट मांगी है कि अगर अभी आदेश दिया जाए तो कितने दिनों में सीधे प्रसारण की शुरुआत की जा सकती है। संविधान पीठ ने सोमवार को कहा कि वह इस रिपोर्ट के बाद ही लाइव स्ट्रीमिंग पर फैसला लेगी। गौरतलब है कि अयोध्या विवाद की सुनवाई के सीधे प्रसारण संबंधी याचिका पूर्व संघ विचारक के एन. गोविंदाचार्य ने की है। उन्होंने याचिका में यह भी कहा है कि अगर अयोध्या मामले की कार्यवाही का सीधा प्रसारण करना संभव नहीं हो तो कम से कम इस सुनवाई की ऑडियो रिकार्डिंग या लिपि तैयार की जानी चाहिए।

12-07-2019
पाक परस्त ताकतें लगा रहीं है अयोध्या विवाद के समाधान में अड़ंगा : वेदांती

लखनऊ। अयोध्या में विवादित राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर के निर्माण को लेकर केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार पर विश्वास जताते हुये राम जन्म भूमि न्यास के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. रामविलास वेदांती ने कहा कि पाकिस्तान परस्त कुछ कट्टरपंथी ताकतें इस मसले को लटकाये रखकर देश का सांप्रदायिक सदभाव बिगाड़ने का प्रयास कर रही है लेकिन उन्हे मालुम होना चाहिये कि रामजन्मभूमि परिसर में दुनिया की कोई भी ताकत मस्जिद नहीं बनवा सकती। डा वेंदाती ने शुक्रवार को यहां पत्रकारों से कहा कि देश के 80 फीसदी मुसलमान इस विवाद के जल्द समाधान के पक्ष में है। वे भी जन्मभूमि पर राम मंदिर देखना चाहते है लेकिन सुन्नी वक्फ बोर्ड इस मसले को उलझाये रखना चाहता है जिससे देश के अमन चैन को नुकसान पहुंचाया जा सके। इसके लिये उसे पाकिस्तान परस्त आतंकवादियों से धन मिलता है। शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी इस बारे में पहले ही बयान दे चुके हैं।

उन्होने कहा कि काशी,मथुरा और अयोध्या समेत देश भर में 30 हजार से अधिक मंदिर तोड़ कर मस्जिद बनायी गयी लेकिन संत समाज ने कभी 30 हजार मंदिर की मांग नहीं की। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गुरू महंत अवैद्यनाथ समेत देश के संतों ने केवल तीन मंदिरों की मांग का प्रस्ताव रखा था जिसमे काशी में विश्वनाथ मंदिर, मथुरा की कृष्ण जन्मभूमि और राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण शामिल है। इस प्रस्ताव पर विहिप के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष अशोक सिंहल और रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष रहे रामचन्द्र परमहंस दास के हस्ताक्षर है। उस समय सुन्नी वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सैयद शहाबुद्दीन ने कहा था कि अगर यह साबित हो जाये कि विवादित भूमि पर मंदिर के अवशेष है तो उन्हे मंदिर निर्माण पर कोई आपत्ति नहीं है। सैयद शहाबुद्दीन आज जीवित नहीं है लेकिन सुन्नी वक्फ बोर्ड को प्रमाण मिलने के बाद उच्च न्यायालय से अपना दावा वापस लेना चाहिये था लेकिन उसने ऐसा नहीं किया।

उन्होने कहा कि शिया वक्फ बोर्ड पहले ही इच्छा जता चुका है कि अयोध्या में मंदिर और लखनऊ के शिया बहुल इलाके में मस्जिद बनवा दी जाए। हां, यह बाबर के नाम पर न हो। बाबर कभी अयोध्या नहीं आया। वह सबसे पहले हरियाणा के बाबरपुर पहुंचा था, इसलिए मस्जिद वहीं बनवाई जाए। डा वेंदाती ने विश्वास व्यक्त किया कि केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार के मौजूदा कार्यकाल में रामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण का रास्ता साफ होगा। संत समाज चाहता है कि आपसी सुलह समझौते से विधि संगत तरीके से इस विवाद का समाधान हो ताकि देश में शांति और भाइचारा बना रहे।

11-07-2019
सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले पर आज होगी सुनवाई

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले की सुनवाई की तारीख जल्द लगाने की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को सुनवाई करेगा। यह आवेदन मामले के एक हिंदू पक्षकार गोपाल सिंह विशारद की ओर से दिया गया है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एसए बोबडे, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पांच सदस्यीय संविधान पीठ आवेदन पर गुरुवार सुबह 10:30 बजे सुनवाई करेगी। मंगलवार को विशारद की ओर से चीफ जस्टिस के समक्ष इस मामले का उल्लेख करते हुए सुनवाई की तारीख जल्द लगाने की मांग की गई थी। उनका कहना है कि विवाद निपटाने में मध्यस्थता प्रक्रिया से खास प्रगति नहीं है, लिहाजा इसे मेरिट के आधार पर सुना जाए और निपटारे के लिए तारीख लगाई जाए। इस पर चीफ जस्टिस ने उन्हें आवेदन दाखिल करने को कहा था। 

मालूम हो कि कोर्ट ने इस मामले का आपसी बातचीत से हल निकालने के लिए पूर्व जज एफएमआई कलीफुल्ला की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय मध्यस्थता पैनल का गठन किया था। गौरतलब है कि कोर्ट ने बातचीत से समाधान की संभावना तलाशने के लिए पूर्व जज एफएमआई कलीफुल्ला की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय मध्यस्थता पैनल का गठन किया है।

विशारद की ओर से पेश वरिष्ठ वकील पीएस नरसिंहा ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि मध्यस्थता प्रक्रिया के पहले चरण में खास प्रगति नहीं हुई है। इसलिए वह चाहते हैं कि मामले का निपटारा करने के लिए तारीखें लगाई जाएं। जिसके बाद पीठ ने उन्हें आवेदन दाखिल करने की इजाजत दी।

मध्यस्थता के लिए 15 अगस्त तक समय
सुप्रीम कोर्ट ने इसी वर्ष 10 मई को मध्यस्थता पैनल को मामले सुलझाने के लिए 15 अगस्त तक का वक्त दिया था। पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष पेश रिपोर्ट में मध्यस्थता पैनल ने सकारात्मक परिणाम को लेकर आशा जताते हुए कुछ और वक्त मांगा था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था। पीठ ने कहा था कि यह मामला वर्षों से लंबित है, ऐसे में पैनल को और वक्त देने में कोई हर्ज नहीं है।

18-06-2019
राम जन्मभूमि पर हमला करने वाले चार आरोपियों को उम्रकैद, एक बरी

 

अयोध्या। उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि परिसर में 2005 में हुए आतंकी हमले के मामले में इलाहाबाद की स्पेशल ट्रायल कोर्ट ने मंगलवार को फैसला सुनाते हुए चार आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने पांचवें आरोपी मोहम्मद अजीज को बरी कर दिया है। स्पेशल जज एससी-एसटी दिनेश चंद्र ने फैसला सुनाते हुए चारों आरोपियों पर 20-20 हजार का जुर्माना भी लगाया है। आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने इस हमले को अंजाम दिया था, जिसमें एक टूरिस्ट गाइड रमेश चंद्र पांडेय और शांति देवी समेत 7 लोगों की मौत हो गई थी। इनमें 5 आतंकी भी शामिल थे, जिन्हें पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए मार गिराया था।  इस हमले में सीआरपीएफ  और पीएसी के 7 जवान गंभीर रूप से जख्मी भी हुए थे। मारे गए आतंकियों के पास से बरामद मोबाइल सिम की जांच के बाद पांच अभियुक्तों आसिफ  इकबाल उर्फ फारुक, मो. शकील, मो. अजीज और मो. नसीम का नाम सामने आया था, जिन्हें 28 जुलाई 2005 को गिरफ्तार किया गया था। इनके एक अन्य साथी डा. इरफान को इससे 6 दिन पहले 22 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि इन सभी ने मिलकर हमले की साजिश रची थी और हथियार जुटाए थे। बता दें कि 5 जुलाई 2005 में अयोध्या में हुए आतंकी हमले में 2 बेगुनाहों की मौत हो गई थी। घटना के डेढ़ घंटे बाद की जवाबी कार्रवाई में 5 आतंकी भी मारे गए थे।

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