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31-10-2020
भूपेश बघेल ने राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण के कर्मचारियों को दिया तोहफा,2.65 करोड़ रुपए जारी

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य स्थापना दिवस पर राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण के जिला और ब्लॉक स्तरीय कर्मचारियों को एक साल के लंबित वेतन की स्वीकृति का तोहफा दिया है। मुख्यमंत्री की पहल पर वित्त विभाग की स्वीकृति पर दिवाली पूर्व कर्मचारियों को भुगतान करने के लिए 2 करोड़ 65 लाख की राशि जारी कर दी है।  उल्लेखनीय है कि राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण के राज्य, जिले और ब्लॉक स्तरीय कर्मचारी जिनकी कुल संख्या 125 है, का वेतन एक वर्ष से लंबित था। मुख्यमंत्री की पहल पर वित्त विभाग की ओर से दीपावली त्यौहार को दृष्टिगत रखते हुए उनके एक वर्ष के वेतन के भुगतान के लिए राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण और जिला लोक शिक्षा समिति के कार्यालय संचालन के लिए स्थापना व अन्य अनुदान अंतर्गत आबंटन की स्वीकृति प्रदान कर दी है। 
वर्तमान में भारत सरकार के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की ओर से पढ़ना-लिखना अभियान को स्वीकृति प्रदान की गई है। इसमें आगामी 5 वर्षों में प्रदेश के एक तिहाई असाक्षरों (लगभग 60 लाख) को साक्षर किया जाना है। इस वर्ष कोविड-19 के चलते 2 लाख 50 हजार असाक्षरों को साक्षर किए जाने का लक्ष्य है। प्रदेश में पढ़ना-लिखना अभियान के क्रियान्वयन के लिए वर्तमान में कार्यरत अमले की नितांत आवश्यकता है। स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से जिला साक्षरता समिति जांजगीर-चांपा को 17 लाख 60 हजार रुपए, जशपुर को 18 लाख 20 हजार रुपए, कबीरधाम को 12 लाख 20 हजार रुपए, कोरबा को 13 लाख 10 हजार रुपए, कोरिया को 10 लाख 70 हजार रुपए, महासमुंद को एक लाख 60 हजार रुपए, रायपुर को 7 लाख रुपए, बलौदाबाजार-भाटापारा को 7 लाख 70 हजार रुपए, गरियाबंद को 5 लाख 30 हजार रुपए, सरगुजा को 17 लाख 20 हजार रुपए, सूरजपुर को 16 लाख 10 हजार रुपए, बलरामपुर-रामानुजगंज को 14 लाख 20 हजार रुपए, बस्तर-जगदलपुर को 2 लाख रुपए, नारायणपुर को 4 लाख 5 हजार रुपए, कोंडागांव को 5 लाख 80 हजार रुपए, मुंगेली को 2 लाख 75 हजार रुपए, दंतेवाड़ा को 13 लाख 10 हजार रुपए, बीजापुर को 10 लाख 80 हजार रुपए, सुकमा को 9 लाख 90 हजार रुपए, रायगढ़ को 15 लाख रुपए और राजनांदगांव जिला साक्षरता समिति को 17 लाख रुपए की राशि आबंटित की गई है।

21-10-2019
बाल वैज्ञानिकों ने किया चम्पारण, मुक्तांगन और नवा रायपुर का भ्रमण

रायपुर। 46वीं जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय विज्ञान गणित और पर्यावरण प्रदर्शनी का आयोजन राजधानी रायपुर के शंकर नगर स्थित बीटीआई मैदान में किया गया। प्रदर्शनी का समापन लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी और ग्रामोद्योग मंत्री गुरु रुद्रकुमार ने 19 अक्टूबर को किया। प्रदर्शनी में देशभर से आए 400 से अधिक बच्चों और शिक्षकों ने 20 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के धार्मिक और आध्यात्मिक स्थल चम्पारण, पुरखौती मुक्तांगन, अंतरराष्ट्रीय वीर नारायण सिंह क्रिकेट स्टेडियम और नवा रायपुर में मंत्रालय, संचालनालय (इन्द्रावती भवन) का अवलोकन किया। बाल वैज्ञानिक इन स्थलों को देखकर काफी प्रफुल्लित हुए और वे छत्तीसगढ़ से मीठी यादें लेकर लौट रहे हैं। रविवार को सभी बाल वैज्ञानिकों और उनके मार्गदर्शक शिक्षकों को शैक्षणिक भ्रमण कराया गया। 400 से अधिक बाल वैज्ञानिक और उनके मार्गदर्शक शिक्षकों को चम्पारण में हाई सेकेण्डरी स्कूल में देखकर गांव बच्चे वहां पहुंचे और सुआ नृत्य की प्रस्तुति देकर मन मोह लिया। चम्पारण में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व.श्री रूपधर दीवान शासकीय उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय में सभी बच्चों और शिक्षकों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई थी। चम्पारण स्कूल पहुंचने पर शिक्षकों का स्वागत अभनपुर के बीईओ मोहम्मद इकबाल, बीआरसी चम्पारण और सीएसीसी ने किया। बाल विज्ञान प्रदर्शनी का पांच दिन में 30 हजार से अधिक नागरिकों ने अवलोकन किया। इनमें 24 हजार से अधिक स्कूली बच्चे और 6 हजार से अधिक कॉलेज के विद्यार्थी शामिल है। बाल विज्ञान प्रदर्शनी के अंतिम दिन सुकमा, बीजापुर एवं रायपुर जिले के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनी में बस्तर संभाग से आए हुए सुकमा और बीजापुर के छात्रों में प्रदर्शनी को लेकर काफी उत्साह दिखाई दिया। छात्र-छात्राओं ने बताया कि वे इसके अलावा विज्ञान भवन विधानसभा भवन का भ्रमण करेंगे। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा विभाग, एससीईआरटी के संयुक्त संचालक योगेश शिवहरे, राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण के सहायक संचालक प्रशांत पाण्डेय, एससीईआरटी के सहायक प्राध्यापक दीपांकर भौमिक,  संजय गुहे,  ज्योति चक्रवर्ती भी उपस्थित थीं। 

05-10-2019
संचार क्रांति के युग में डिजिटल साक्षरता जरूरी: स्कूल शिक्षा मंत्री डा.टेकाम 

रायपुर। स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री शहरी कार्यत्मक साक्षरता कार्यक्रम के अन्तर्गत जिला परियोेजना अधिकारियों और स्त्रोत व्यक्तियों के लिए आयोजित तीन दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला के समापन अवसर पर कहा कि संचार क्रांति के युग में डिजिटल साक्षरता बहुत जरूरी है। कार्यशाला का आयोजन ठाकुर प्यारेलाल ग्रामीण विकास संस्थान निमोरा रायपुर के सभागार में राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण द्वारा किया गया है। स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. टेकाम ने कहा कि आज का युग संचार क्रांति का युग है, जिसमें सभी को आगे आना है। आज के समय में सभी को डिजिटल पैंमेट के माध्यम से रेल्वे टिकट बुकिंग, बिजली बिल भुगतान, मोबाईल, डीटीएच रिचार्ज जैसी अनेक सुविधाओं का उपयोग करना होता है। इन सभी हितग्राहियों को ई-साक्षरता केन्द्र के माध्यम से डिजिटल साक्षर करने की अविनव पहल छत्तीसगढ़ राज्य में की जा रही है। उन्होंने ई-साक्षरता केन्द्र में श्रेष्ठ पालकत्व, आत्मरक्षा, जीवन मूल्य, कौशल विकास, चुनावी, वित्तीय एवं विधिक साक्षरता की जानकारी भी साथ में दिए जाने को सराहनीय कदम बताया।
  स्कूल शिक्षामंत्री ने कहा कि राज्य में स्कूली बच्चों को भी ब्लैकबोर्ड की जगह की-बोर्ड से परिचित कराया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री की परिकल्पना 'गढ़बो डिजिटल छत्तीसगढ़' के विषय में भी अपनी बात रखते हुए कहा कि समाज के वंचित वर्ग की महिलाएं डिजिटल शिक्षा से पीछे न रहे इस बात का भी विशेष तौर पर ख्याल रखा जाए। डॉ. टेकाम ने कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी जिलों को अपनी शुभकामनाएं दीं। समापन समारोह के अवसर पर सहायक संचालक प्रशिक्षण एवं प्रशासन प्रशांत कुमार पांडेय ने नवाचारी पहल 'गढ़बो डिजिटल छत्तीसगढ़' कार्यक्रम के लक्ष्य,उद्देश्य व प्रगति को पॉवरपॉइंट प्रेजेंटेशन दिया। स्कूल शिक्षामंत्री डॉ.प्रेमसाय सिंह टेकाम इस अवसर पर राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकारण द्वारा श्रेष्ठ पालकत्व और आखर अंजोर पर तैयार पोस्टर एवं फोटो का विमोचन किया। इस अवसर पर सहायक संचालक योजना एवं वित्त दिनेश कुमार टांक, राज्य स्तरीय स्त्रोत सदस्य मदन उपाध्याय, उमेश कुमार जायसवाल, लोक अभियोजक उत्तम सिन्हा, चुन्नीलाल शर्मा, डॉ.कामिनी बावनकर, निधि अग्रवाल के अलावा ज़िला परियोजना अधिकारी गिरीश कुमार गुप्ता, रेखराज शर्मा, रश्मि सिंह, आईपी यादव, पीआर चंद्राकर और जाटवर उपस्थित थे।

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