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एसबीआई हटा सकता है मिनिमम बैलेंस की शर्त 

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के दवाब और ग्राहकों की आलोचना के बाद एसबीआई बचत खातों के लिए न्यूनतम जमा राशि रखने की शर्त को हटा सकता है। फिलहाल, एसबीआई के बचत खाते में कम से कम तीन हजार रुपए रखना जरूरी है, अन्यथा ग्राहक को बतौर जुर्माना कुछ रकम का भुगतान करना पड़ता है। एक अंग्रेजी अखबार की खबर के अनुसार बैंक न्यूनतम जमा राशि की सीमा एक हजार रुपए कर सकता है। साथ ही खाते में हर माह एक निश्चित रकम बनाए रखने की शर्त को भी बदल सकता है। बता दें, कि स्टेट बैंक द्वारा न्यूनतम जमा और एवरेज क्वाटर्ली बैलेंस न रखने पर जो रकम बतौर जुर्माना ली जाती है वो देश में सबसे ज्यादा है। यदि एसबीआई यह राहत लागू करता है तो इसका फायदा देश के एक बड़े तबके को मिलेगा। 

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02-11-2017
 एसबीआई ने होम लोन पर ब्याज दर घटाई, कार लोन भी हुआ सस्‍ता

नई दिल्ली |  अपने सपनों के घर की चाहत रखने वालों के लिए अच्‍छी खबर है| देश के सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने गुरुवार को अपने होम लोन पर ब्याज दर 0.05 प्रतिशत घटाकर 8.30 प्रतिशत कर दी है|  इस कटौती के बाद बैंक के होम लोन पर ब्याज दर बैंकिंग उद्योग में सबसे कम हो गई है| एसबीआई ने इसके साथ ही कार लोन पर भी ब्याज दर को 0.05 प्रतिशत घटाकर 8.70 प्रतिशत कर दिया है|  ये नई दरें एक नवंबर 2017 से प्रभावी होगी|  एसबीआई ने अपने बयान में कहा, “इस कटौती के साथ एसबीआई अब बाजार में सबसे कम ब्याज दर पर आवास ऋण की पेशकश कर रहा है|  नई दरें एक नवंबर से प्रभावी होंगी| ” एसबीआई ने कोष की सीमांत लागत पर आधारित ऋण ब्याज दर में कटौती करने के बाद ब्याज दरों में यह कमी की है| 

एमसीएलआर दर में 10 महीने बाद एसबीआई ने यह कटौती की है|  इससे पहले एक जनवरी को इसमें कटौती की गई थी| दरों में कटौती पर एसबीआई के खुदरा बैंकिंग प्रबंध निदेशक पी के गुप्ता ने कहा, “दरों में कमी के साथ, हम खुदरा ऋणों में हमारे अधिकांश उत्पाद के लिए सबसे कम दर की पेशकश कर रहे हैं|  व्यापक वितरण तंत्र के साथ कम दरों और बेहतर ग्राहक अनुभव के लिए डिजिटल तकनीक का उपयोग किसी भी खुदरा ऋण ग्राहक के लिए एक आदर्श पैकेज है| ”

सभी पात्र वेतनभोगी तबके के लिये 30 लाख रुपये तक के होम लोन पर 8.30 प्रतिशत सालाना दर से ब्याज की प्रभावी दर होगी|  वक्तव्य में कहा गया है, ‘‘होम लोन पर 8.30 प्रतिशत की ब्याज दर के ऊपर, पात्र होम लोन ग्राहक प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 2.67 लाख रुपये की ब्याज सब्सिडी भी प्राप्त कर सकते हैं| ’’

बैंक ने अन्य सभी ऋण खंड में भी दरों में 0.05 प्रतिशत की कमी की है| कार लोन लेने वाले ग्राहकों के लिए ब्याज दर का दायरा 8.70 से 9.20 प्रतिशत के बीच होगा, जो पहले 8.75-9.25 प्रतिशत था| सही दर कर्ज की राशि और कर्ज लेने वाले के क्रेडिट स्कोर पर निर्भर करेगी| 

इंस्टॉल करें ‘NO QUEUE APP’- नहीं पड़ेगी बैंकों में लाइन लगाने की जरूरत

नई दिल्ली । बैकों में लाइन लगाकर खड़े होना और देर तक लाइन लगाने के बावजूद काम सही से ना होना, ये बेहद ही परेशानी वाला होता है। 5 मिनट के काम के लिए कई बार 5 घंटे भी बर्बाद हो जाते हैं। इसकी वजह है कि काफी समय हमें कतार में गुजारना पड़ता है।  

बैंक शाखा में समय लगने की वजह से दूसरे काम भी फंस जाते हैं, लेकिन आप बैंक की इस लंबी कतार में खड़े रहने से बच सकते हैं। अगर आप मोबाइल यूज करते हैं, तो आपको इससे बचने के लिए सिर्फ एक ऐप को डाउनलोड करने की जरूरत है और एसबीआई की किसी भी शाखा में आपको लाइन में खड़े रहने की जहमत नहीं उठानी पड़ेगी।

दरअसल भारतीय स्टेट बैंक ने एक ऐप तैयार किया है, जिसका नाम है - नो क्यू ऐप... आप इस ऐप की मदद से किसी भी नजदीकी एसबीआई बैंक की ब्रांच का वर्चुअल कूपन हासिल कर सकते हैं। यह सर्विस सिर्फ एसबीआई ग्राहकों के लिए नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए है जो किसी भी वजह से एसबीआई ब्रांच में जाना चाहता है। हालांकि इसके लिए आपके मोबाइल में इस ऐप का होना जरूरी है।

आप इस ऐप के जरिये एकबार में अधिकतम  5 टास्क के लिए वर्चुअल कूपन बुक कर सकते हैं। यह ऐप एंड्रॉयड और आईफोन दोनों प्लैटफॉर्म पर चलता है।यह ऐप न सिर्फ आपको वर्चुअल टोकन देगा, बल्कि आपको यह भी जानकारी देगा कि आपका नंबर आने में कितना समय रह गया है या फिर मौजूदा समय में कौन सा टोकन नंबर चल रहा है। अगर आपको लगता है कि आप किसी वजह से ब्रांच में नहीं जा पाएंगे, तो आप वर्चुअल टोकन को रद्द कर सकते हैं और नया टोकन बुक कर फिर से अपना नंबर लगा सकते हैं।

ठेकेदार की गड़बड़ी सभी बैंक में एसबीआई की पर्ची

रायपुर। सरकारी एवं प्राइवेट बैंकों के चेक जमा करने वाली मशीनों में ठेकेदार एसबीआई की पर्ची डाल दिए हैं। इस वजह से सभी बैंकों में चेक जमा करने वालों को स्कैन कॉपी एसबीआई की मिल रही है। ऐसे में लोगों को पता नहीं चलता है कि कौन से बैंक में चेक लगाया गया है।

बैंक खाताधारकों ने शिकायत किया था कि बैंकों स्कैन कॉपी पर्ची में ठेकेदार गड़बड़ी कर रहे है। एसबीआई से रोल लेकर सभी बैंक के मशीन में एक ही पर्ची डाला जा रहा है। शिकायत पर पड़ताल की गई इसमें खुलासा हुआ कि रायपुर के सभी बैंकों के मशीन में यह गड़बड़ी किया जा रहा है। ठेकेदार पैसा बचाने के चक्कर में एक ही बैंक एसबीआई का पर्ची प्रिंट कराकर सभी बैंकों के मशीन में सप्लाई कर रहा है। जबकि यह नियम गलत ही ऐसे करने पर बैंक प्रबंधन ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं। इस मामले को लेकर यूनियन बैंक एम्पलाइज संघ सह महाप्रबंधक नलगुड़िवार से बात की गई तो उन्होंने बताया कि ठेकेदार के लापरवाही पर उनके खिलाफ बैंक प्रबंधन को कार्रवाई करना चाहिए। क्योंकि यह गंभीर लापरवाही है। इसका खामियाजा आम खातेधारकों को भुगतना होता है लोगों को यही लगता है कि एसबीआई में चेक लगया गया जबकि चेक सरकारी समेत प्राइवेट बैंक में लगाया गया है। इधर पंजाब बैंक शाखा प्रबंधन का कहना है कि लापरवाही करने वाले ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ताकि दोबारा दूसरे बैंक का पर्ची हमारे शाखा में न डाले।

 

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वित्त मंत्रालय एसबीआई की तर्ज पर बैंकों को करेगा मर्ज

नई दिल्ली। केंद्र सरकार भारतीय स्टेट बैंक की तर्ज पर कुछ और बैंक बनाने की कोशिश फिर से कर रहा हैं। सरकार चाहती है कि एसबीआई के आकार के कम से कम तीन से चार बैंक और होना चाहिए, ताकि देश के हर हिस्से में एक बड़ा बैंक मौजूद रहे। इसके लिए वित्त मंत्रालय ने कुछ बैंकों से संभावनाएं टटोलने को कहा है। देश में एसबीआइ के अतिरिक्त बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक और बैंक ऑफ इंडिया को इस काम के लिए चुना जा सकता हैं।

सूत्रों के मुताबिक इन बैंकों से फिलहाल अनौपचारिक तौर पर छोटे बैंकों की तलाश करने को कहा गया है। कुछ छोटे बैंकों को मर्ज  कर ये बैंक एसबीआइ के आकार के हो सकते हैं। दरअसल सरकार चाहती है कि देश के सभी क्षेत्र में कम से कम एक बड़ा बैंक हो, ताकि बैंकिंग में सभी सुविधाओं को असानी से समान रूप में बांटा जा सके। बैंकों को यह सलाह भी दी गई है कि मर्जर के लिए कमजोर बैंकों को नजरअंदाज किया जाए, ताकि बाद में प्रदर्शन पर कोई असर नहीं पड़े। नीति आयोग ने छोटे बैंकों को मर्ज करने के दूसरे दौर के बारे में रिपोर्ट तैयार कर रहा है।

पिछले दौर में भारतीय स्टेट बैंक के पांच सहयोगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक का एसबीआइ में मर्जर किया गया था। यह मर्जर 1 अप्रैल, 2017 से लागू हुआ था। इसके बाद एसबीआइ दुनिया के 50 बड़े बैंकों में शामिल हो गया। इन सहयोगी बैंकों में स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला और स्टेट बैंक ऑफ त्रवणकोर शामिल थे।

होम लोन दर में कटौती का एलान 

नई दिल्ली । रिजर्व बैंक के कदम के बाद अब देश के दिग्गज बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने कर्ज सस्ता करने की पहल की  है। बुधवार को होम लोन की दर में कटौती का एलान किया। बैंक अब घर बनाने और खरीदने के लिए 9.45 फीसद की सालाना दर पर कर्ज देगा।

महिलाओं के लिए होम लोन 9.40 फीसद की दर पर मिलेगा। नई दरें पहली अप्रैल से लागू हो गई हैं। एसबीआई पहले पुरुषों से होम लोन पर 9.55 और महिलाओं से 9.5 फीसद सालाना ब्याज वसूलता था। केंद्रीय बैंक ने बीते मंगलवार को अपनी नीतिगत ब्याज दर (रेपो रेट) में चौथाई फीसद की कटौती की थी।आरबीआई के निर्देश पर बैंक की ओर से फंड की मार्जिनल कॉस्ट आधारित उधारी दर (एमसीएलआर) व्यवस्था अपनाए जाने की वजह से यह कर्ज दर में यह कमी संभव हुई है। एसबीआई के नक्शेकदम पर जल्द ही अन्य बैंक भी कर्ज दरों में कमी का एलान कर सकते हैं।
 

बैंकों की मनमानी रोकने के लिए दखल दे सकता है RBI

नई दिल्ली | जब एसबीआई ने पिछले महीने मिनिमम बैलेंस मेंटेन नहीं करने वाले ग्राहकों पर पेनल्टी लगाने का ऐलान किया, तब सोशल मीडिया पर यह बहस शुरू हुई कि हमारे बैंक हमें 'डराने' लगे हैं। सोशल मीडिया पर उठने वाले कई तूफान की तरह यह मामला भी शांत हो गया, लेकिन पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। अभी तक बैंकों को ग्राहकों की नाराजगी का सामना नहीं करना पड़ा है, लेकिन इस मामले ने रिजर्व बैंक और सरकार का ध्यान भी खींचा है।

यह ऐसा मामला है, जिसमें सरकार और कन्ज्यूमर एक तरफ हैं। सरकार नोटबंदी के चलते टैक्स कंप्लायंस बेनिफिट के बने मौके को गंवाना नहीं चाहती। इसमें बैंकों का बड़ा रोल है और वे अपने हिस्से की मलाई चाहते हैं। कन्ज्यूमर्स को लग रहा है कि बैंक उनके साथ ज्यादती कर रहे हैं, जबकि उनका डिपॉजिट बैंकों के बिजनस की बुनियाद है। इस मामले से वे वेंडर्स भी जुड़े हैं, जो तकनीक मुहैया कराते हैं और जिनकी वजह से कई सेवाएं संभव हुई हैं। 

कई पक्ष

बैंक ग्राहकों से कई तरह की फीस वसूलते हैं। इसमें से एक मिनिमम बैलेंस मेंटेन नहीं करने पर लगने वाला जुर्माना है। वहीं, जब भी हम किसी मर्चेंट के यहां डेबिट कार्ड स्वाइप करते हैं तो उस पर भी एक चार्ज देना होता है। वहीं, एटीएम से तय सीमा से अधिक बार पैसा निकालने पर भी आप पर जुर्माना लगता है। अगर आप अपने अकाउंट से पैसा ट्रांसफर करते हैं तो बैंक उस पर फी वसूलते हैं। क्रेडिट कार्ड हो या डेबिट कार्ड, बैंक इनसे या तो कस्टमर से चार्ज वसूलते हैं या दुकानदार से। इन इन्फ्रास्ट्रक्चर को तैयार करने पर पैसा खर्च किया गया है।

इन्हें तैयार करने और मेंटेन करने में कई पक्ष लगे हुए हैं। वीजा और मास्टर कार्ड जैसी कंपनियां भी इसमें स्टेकहोल्डर हैं। अगर उन्हें इन सेवाओं के बदले भुगतान नहीं मिलेगा तो उनका बिजनस बंद हो जाएगा। देश की सबसे बड़ी पेमेंट गेटवे कंपनी बिलडेस्क के डायरेक्टर एम एन श्रीनिवासु ने कहा, 'अगर एमडीआर जीरो हो जाता है तो इस बिजनस में रहने का कोई मतलब नहीं होगा। हमें वजूद बचाए रखने के लिए कस्टमर डेटा से पैसा बनाने के बारे में सोचना पड़ेगा। अभी तक हम डेटा को एनक्रिप्टेड और सेफ रखते आए हैं।'

बैंकिंग की नई दुनिया

बैंकों के कामकाज में क्रांतिकारी बदलाव हुए हैं। ऐतिहासिक रूप से एक रिटेल कस्टमर एक बैंक का इस्तेमाल सैलरी रखने, बचत जमा करने और चेक बुक के लिए करता था, जो कई साल तक चलता था। कभी-कभार यूनिवर्सिटी ऐप्लिकेशन फॉर्म या सरकारी सेवाओं के भुगतान के लिए डिमांड ड्राफ्ट भी बनवाना पड़ता था। ऐसा समय भी था, जब आपको बिजली बिल चुकाने के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ता था।

बैंक आज आपको 24x7 ऑनलाइन पेमेंट्स की सुविधा दे रहे हैं। एचडीएफसी बैंक के एमडी आदित्य पुरी ने कहा था, 'आप ओबरॉय होटल जाकर महेश लंच होम के रेट्स के बारे में पूछताछ नहीं कर सकते। हम यहां कस्टमर से फालतू का पैसा नहीं ले रहे हैं। अगर आप प्रीमियम सर्विस मांग रहे हैं तो उसके लिए फी लेने में क्या बुराई है।'

बैंकों पर अनफेयर प्रैक्टिस के आरोप लगते रहे हैं। लोन अग्रीमेंट का पलड़ा कस्टमर की तरफ नहीं झुका होता था। आम बॉरोअर्स से अधिक ब्याज लेकर बैंक कॉर्पोरेट क्लायंट्स को कम दर पर लोन देते थे। आरबीआई ने बैंकों की इन गलतियों को दूर करने के लिए दखल दिया। उसे एक बार फिर दखल देना पड़ सकता है, लेकिन मामला उससे अलग होगा। फी की लड़ाई भी बराबर की नहीं है। बैंक इसमें अपना हिस्सा तो मांग रहे हैं, लेकिन जो रूरल इंडिया में वैसी ही सर्विस दे रहे हैं, बैंक उन्हें फी देने में दरियादिली नहीं दिखा रहे।

डिजिटाइजेशन के चलते माइक्रो एटीएम की संख्या बढ़ी है, जो मिनी बैंक का काम करते हैं और ये सस्ते भी हैं। माइक्रो एटीएम ऑपरेटर्स फी के बदले ये सेवाएं देते हैं। बैंक चाहते हैं कि वे अपने कमीशन में 90% की कटौती करें। इस वजह से इस मामले में सरकार को दखल देना पड़ा है। इलेक्ट्रॉनिक मिनिस्ट्री ने इंडियन बैंक्स असोसिएशन को लिखा था, 'माइक्रो एटीएम फी में कमी ठीक नहीं होगी। इससे पेमेंट, स्मॉल फाइनैंस बैंकों पर बुरा असर पड़ेगा, जो माइक्रो एटीएम इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहे हैं।'

आरबीआई से मिलेगी राहत?

बैंकों को फी मिलनी चाहिए, लेकिन यह कितनी होनी चाहिए? 0.5% से अधिक चार्ज ठीक नहीं है क्योंकि कुछ साल पहले की तुलना में महंगाई आधी रह गई है। डिजिटाइजेशन से ऑनलाइन ट्रांजैक्शंस बढ़ने पर बैंकों की आमदनी और मुनाफे में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।
 

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