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31-07-2021
उन्मुक्त अभियान : सरकार की नीति के अनुसार पात्र दोषसिद्ध सजायाफ्ता बंदियों को किया जाएगा रिहा

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर एवं जेल विभाग रायपुर के संयुक्त तत्वाधान में एक अभियान उन्मुक्त शुरू किया गया है। इसके अंतर्गत उन दोषसिद्ध सजायाफ्ता बंदियों को रिहा किया जाएगा,जो राज्य शासन की ओर से बनाए गए नीति के अनुसार समय-पूर्व रिहाई के लिए पात्र हैं। यह अभियान उच्चतम न्यायालय की ओर से एसएलपी प्रकरण क्र. 529/2021, पक्षकार सोनाधर विरुद्ध छत्तीसगढ़ राज्य में दिए गए निर्देश के आधार पर प्रारंभ किया गया है। उच्चतम न्यायालय की ओर से छत्तीसगढ़, उत्तरप्रदेश एवं बिहार राज्य को यह दायित्व सौंपा गया है कि वह 1 अगस्त 2021 से पायलट प्रोजेक्ट को लागू कर पात्र दोषसिद्ध बंदियों को रिहा किए जाने बाबत आवश्यक कार्यवाही करना तय करेंगे। 


छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव सिद्धार्थ अग्रवाल ने बताया कि न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा, कार्यपालक अध्यक्ष, सालसा की ओर से इस अभियान की बारिकी से निगरानी की जा रही है। इस बाबत राज्य के समस्त जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष को यह आदेश दिया गया है कि वे जेल प्रशासन की आवश्यक मदद करें। यह अभियान 4 प्रमुख चरणों से गुजरेगा। इसमें प्रथम चरण के अंतर्गत पात्र दोषसिद्ध बंदियों की पहचान करते हुए उनकी ओर से आवेदन प्रस्तुत कराकर और आवश्यक दस्तावेज संकलित कर उन्हें रिहा किए जाने बाबत कार्यवाही की जाएगी। यदि किसी पात्र बंदी का आवेदन निरस्त किया जाता है, तब राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से ऐसे बंदियों की ओर से विधिक सहायता उपलब्ध कराकर अपील की कार्यवाही तय की जाएगी। 


इसके पूर्व न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा, कार्यपालक अध्यक्ष, सालसा की ओर से रिट पीटिशन क्रं. 78/2017, पक्षकार-अमरनाथ विरुद्ध छत्तीसगढ़ राज्य के अंतर्गत  जिला न्यायालयों में पदस्थ न्यायिक अधिकारियों को पूर्व से ही यह निर्देश दिए जा चुके हैं। कहा गया है कि वह दोषसिद्ध बंदियों को धारा 432(2) दं.प्र.सं. के अंतर्गत रिहा किए जाने के संबंध में  अपना अभिमत देने की कार्यवाही 3 माह के भीतर पूर्ण करेंगे।

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