GLIBS
31-07-2021
मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर हुई संगोष्ठी, जितेंद्र सुकुमार साहिर कृत एक और सूरज पर की गई चर्चा  

राजिम। स्थानीय प्रयाग साहित्य समिति के तत्वाधान में मुंशी प्रेमचंद जयंती के अवसर पर जितेंद्र सुकुमार साहिर कृत एक और सूरज पर चर्चा संगोष्ठी हुई। इसमें अंचल के कवि, साहित्यकार, पत्रकार बड़ी संख्या में उपस्थित हुए। इस मौके पर मुख्यअतिथि पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं महासमुंद लोकसभा क्षेत्र के पूर्व सांसद चंदूलाल साहू ने अपने उद्बोधन में कहा कि एक और सूरज मुक्तक संग्रह निकट भविष्य में इतिहास रचेगा। इस पुस्तक में गागर में सागर भरने वाली कहावत को चरितार्थ किया गया है। यह पुस्तक नहीं बल्कि जीवन की सच्चाई है देश प्रेम का जज्बा पाठकों को पढ़ने मिल रही है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जिला पंचायत सदस्य चंद्रशेखर साहू ने कहा कि राजिम साहित्य की उर्वरा भूमि है। यहां पंडित सुंदरलाल शर्मा से लेकर अभी तक लगभग 240 वर्षों में अनेक कवि एवं साहित्यकार जन्म लिए हैं। इन्होंने माटी की सुगंध को सात समंदर पार पहुंचाया है। विशिष्ट अतिथि जिला पंचायत सदस्य रोहित साहू ने कहा कि कहानीकार मुंशी प्रेमचंद ने पंच परमेश्वर, बूढ़ी काकी, पूस की रात लिखकर समाज को जीवन की सच्चाई से रूबरू कराया है। ठीक उसी भांति एक और सूरज जीवन की अनछुए पहलुओं को छूता है। इस व्हाट्सएप और फेसबुक के जमाने में चार पंक्ति लिखना बहुत मुश्किल होता है ऐसे समय में पूरे पुस्तक को आकार देना जिम्मेदारी का काम है। शायर जितेंद्र सुकुमार साहिर ने कहा कि रचना का जब लिखने के लिए कलम उठाता है तो पहले वह दिल की बात पन्ने पर उकेरता है।

धीरे से समाज में व्याप्त बुराइयों को उठाता है और इस तरह से देश को दिशा देने का काम करता है एक और सूरज जीवन की सच्चाई को उजागर करती है। युवा पीढ़ी रास्ते से भटक रहे हैं उन्हें आईना दिखाने का काम कर रहे हैं। वक्ता के रूप में पहुंचे उर्दू तंजीम के मेंबर पूरन जायसवाल पलारी ने कहा कि मुक्तक 4 पंक्तियों में पूरी होती है और इन्हीं में अपने विचार को पूरा करना पड़ता है यह एक खुद में मुकम्मल कविता होती है। एक और सूरज में सभी रंग मौजूद है। जनसंपर्क विभाग गरियाबंद के सहायक अधिकारी एवं साहित्यकार पोषण साहू ने कहा कि शब्दों का समुच्चय पुस्तक का रूप लेती है राजिम शुरू से ही साहित्यिक नगरी रहा है। साहित्य के पुरोधा ने जिले का नाम लेखनी के जरिए दूर अंचल में पहुंचाया है।

छंदकार एवं जिला रत्नाचल साहित्य परिषद के अध्यक्ष वीरेंद्र साहू ने कहा कि लगातार जिले में कवि साहित्यकार के अलावा शायर भी जन्मे हैं। दिन की लेखनी से जिला गौरवान्वित हो रहा है। इस मौके पर उपस्थित अंचल के पत्रकारों को सम्मानित किया गया तथा साहित्यकारों कवियों को श्रीफल एवं पुस्तक भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन संतोष कुमार सोनकर मंडल ने किया। इस अवसर पर प्रयाग साहित्य समिति के अध्यक्ष टीकमचंद सेन, पार्षद महेश यादव, तुकाराम संसारी, गोकुल सेन, नूतन साहू, अशोक शर्मा, राजेंद्र मनु, पुरुषोत्तम चक्रधारी, रमेश टंडन, पवन निषाद, थानुराम निषाद,तुलाराम साहू, सरोज कंसारी, कल्याणी कंसारी, कमलेश कौशिक, भारत साहू, रोहित साहू, रविंद्र साहू, पुरुषोत्तम दीवान, आशीष पांडे आदि मौजूद थे।

 

Advertise, Call Now - +91 76111 07804