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10-05-2020
हाथियों का तांडव जारी, घर को किया क्षतिग्रस्त, दीवार गिरने से मां बेटी घायल

अंबिकापुर। वन परिक्षेत्र प्रतापपुर में लगातार हाथी अपना तांडव मचा रहे हैं। बीती रात बहरादेव में हाथी ने धरमपुर पुरानी बस्ती के समीप एक घर को गिरा दिया। इस दौरान घर के अंदर एक महिला और उसकी बेटी मौजूद थी, जो दीवार गिरने की वजह से दब गई। जानकारी मिलते ही पड़ोसियों ने पहुंचकर दोनों को सुरक्षित बाहर निकाला। हाथी के हमले से गिरा मकान, बाल-बाल बची मां-बेटी को पड़ोसियों ने अंबिकापुर अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनकी हालत ठीक बताई जा रही है। इधर ग्रामीणों ने घटना के दौरान वन विभाग के कर्मचारियों की गैरमौजदूगी को लेकर जमकर हंगामा किया। हंगामे के बाद रेंजर और स्टाफ घटनास्थल पर पहुंचे। ग्रामीणों ने वन कर्मचारियों पर हाथी आने के बाद भी गांव में इसकी खबर नहीं देने पर जमकर आक्रोश व्यक्त किया। हाथी पिछले कुछ दिनों से कनकनगर,धरमपुर,गणेशपुर क्षेत्र में घूम रहा है।. यह हाथी आसपास क्षेत्र में लगातार घूमते हुए फसल को नुकसान पहुंचा रहा है। जिसकी जानकारी वन विभाग को लगातार दी जा रही है, लेकिन इसकी कोई जानकारी वन विभाग की तरफ से ग्रामीणों को नहीं दी जा रही है। इसे लेकर लोगों में नाराजगी है। 

 

02-05-2020
राजिम के नजदीक पहुंचा 23 हाथियों का दल, इस वक्त महानदी में मौजूद

गरियाबंद। महासमुंद से हाथियों का दल गरियाबंद जिले में प्रवेश कर गया है। आज यानि शनिवार सुबह हाथियों के दल को राजिम के पास धमनी-कुम्ही गांव के खार में देखा गया है। हाथियों की संख्या दो दर्जन के करीब बताई जा रही है। सबसे अहम बात यह है कि हाथियों का ये दल बड़ी तेजी से आगे बढ़ रहा है। राजिम एसडीएम जीडी वाहिले के अनुसार 23 हाथियों का दल है जो जिले की सीमा में प्रवेश किया है। कल शाम 6 बजे इनके दल को महासमुंद के बम्हनी गांव में देखा गया था और आज सुबह ये जिले की सीमा में प्रवेश किए है। अभी इनकी लोकेशन राजिम के नजदीक अरण्ड और कुम्ही गांव के बीच बताई जा रही है।

उन्होंने बताया कि हाथी का दल बड़ी तेजी से आगे बढ़ गया है। किसानों की फसल के नुकसान की जानकारी भी सामने आई है। वे अपनी पूरी टीम के साथ इस पर निगरानी रखे हुए है। हाथियों के दल की जानकारी मिलते ही वन अमला भी सतर्क हो गया है। आसपास सभी गांवों में हाथी के आने की जानकारी दे दी गई है। मुनादी के जरिए लोगों को सतर्क रहने की जानकारी दी गई है। डीएफओ मंयक अग्रवाल ने बाताया कि अमला पूरी तरह सतर्क है और लोगों से घरों में रहने की समझाईश दी गई है। उन्होंने बताया कि महासमुंद से हाथियों को कैसे निकाला गया। इसका अनुभव उनके पास है। इसलिए गरियाबंद जिले से भी हाथियों को जल्द ही आगे बढ़ा दिया जाएगा।

28-04-2020
हाथियों ने बुरी तरह कुचलकर दो लोगों को उतारा मौत के घाट, प​ढ़े पूरी खबर...

रायपुर/सूरजपुर। अंबिकापुर-बनारस मार्ग पर ग्राम बंशीपुर से लगे कोरंधा जंगल में नदी किनारे गांव की सीता राजवाड़े 50 वर्ष और रतन राजवाड़े 48 वर्ष की क्षत-विक्षत लाश मंगलवार सुबह लोगों ने देखी। प्रथम दृष्टया में हाथियों ने कुचल कर मार देने की पुष्टि होने पर वन और पुलिस विभाग के अधिकारियों को सूचना दी गई। बता दें कि जिले के प्रतापपुर वन परिक्षेत्र के बंशीपुर से लगे कोरंधा जंगल में हाथियों के हमले से दो ग्रामीणों की मौत हो गई। घटना से बंशीपुर, कोरंधा व आसपास के इलाके में भय का माहौल निर्मित हो गया है। सोमवार की रात हुई घटना को लेकर अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि रात के अंधेरे में ग्रामीण हाथी विचरण क्षेत्र में क्यों गए थे।

वन संरक्षक वन्य प्राणी के नेतृत्व में वन विभाग का अमला मौके पर पहुंच चुका है। घटना के कारणों की जांच की जा रही है। अंबिकापुर से वन संरक्षक वन्य प्राणी एसएस कवर के नेतृत्व में वन विभाग का अमला मौके पर पहुंच गया। प्रारंभिक पूछताछ में जो जानकारी निकल कर सामने आई है उसके मुताबिक सोमवार की रात कोरंधा के कुछ लोग लकड़ी लेने के लिए रात के अंधेरे में जंगल गए थे। इस इलाके में हाथियों की मौजूदगी की जानकारी उन्हें नहीं थी। जंगल में नदी किनारे हाथियों का दल मौजूद था। अचानक सीता राजवाड़े और रतन राजवाड़े का सामना हाथियों से हो गया। हाथियों ने बुरी तरीके से कुचल कर दोनों को मार डाला। सीता राजवाड़े के धड़ का हिस्सा पूरी तरीके से कुचल दिया गया था।

19-04-2020
हाथियों का दल सिकासार जलाशय, ताराझर के जंगल पहुंचा, ग्रामीण कर रहे रतजगा

गरियाबंद। टाइगर रिजर्व के बफर जोन कुल्हाडीघाट वन परिक्षेत्र के आमामोरा ओंड, अमलोर, हथौडाडीह, ताराझर, कुर्वापानी क्षेत्र में पिछले कई दिनो से हाथियों के दलों ने आंतक मचा रखा है। आए दिन ग्रामीणों की झोपडियों को तोड़फोड़ के साथ फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे है। दो झुंड में हाथियों का दल घूम रहा है। यह दल पहाडी के नीचे सिकासार जलाशय के ढलान दलदलीय क्षेत्र में देखा गया। हाथियों के दल के सिकासार जलाशय के पास पहुंचने से इस क्षेत्र में अब दहशत देखने को मिल रही है। पहाडी से हाथियों का एक दल सिकासार जलाशय के आसपास लगातार घुम रहा है तो दूसरा दल,जिसमें 6 से 8 हाथियों का झुण्ड है और उसमें दो शावक भी शामिल है यह दल पहाडी के उपर कुल्हाडीघाट ग्राम के आश्रित ग्राम ताराझर, कुर्वापानी के बीच बांस के जंगल में अपना डेरा डाल दिए है और लगातार गांव की तरफ प्रवेश करने की कोशिश कर रहे हैं। इन ग्रामों के ग्रामीण अब गांव में बैठक कर यह निर्णय लिया कि हाथियों से बचाव के लिए ग्रामीण रात भर अलाव और मशाल जलाकर गांव के सीमा में रातभर जागकर टोली बनाकर रखवाली करेंगे। ग्रामीणों ने हाथियों से गांव को बचाने व लोगों की सुरक्षा के लिए वन विभाग से कई बार गुहार लगा चुके है। लेकिन वन विभाग सिर्फ मुनादी करवाकर अपना कर्तव्य का इति श्री कर लिया है। ग्रामीणों ने बताया गांव में रात में मशाल जलाकर हाथियों से सुरक्षा कर रहे हैं। उनके पास टार्च व बिजली की सुविधा नहीं है। वन विभाग से टार्च व रोशनी की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग ग्रामीणों ने की है।

 

27-03-2020
जंगल मे दिखा हाथियों का झुंड, वनांचल में दहशत का माहौल

कवर्धा। पंडरिया पूर्व वन परिक्षेत्र अंतर्गत कोदवा सर्किल के अजवाईनबाह बीट में लगभग 10 जंगली हाथियों का झुंड दिखाई दिया है। इससे गांव में दशहत का माहौल बना हुआ है। अजवाईनबाह निवासी एक बैगा युवक फिरतु राम ने ये जानकारी दी है। स्थानीय वनकर्मियों को भी ये सूचना भेज दी गई है। चूंकि ये इलाका प्रदेश का सीमावर्ती है तथा एक ओर कान्हा राष्ट्रीय उद्यान और दूसरी ओर अचानकमार टाइगर रिज़र्व को जोड़ने वाला कॉरिडोर भी है। अतः सम्भावना है कि इनमें से ही किसी इलाके से भटककर ये हाथी इधर आए हैं। लेकिन पहली बार इतने अधिक संख्या में हाथी के दिखने से वनांचल में सनसनी फैल गई है। वन विभाग के अफसर जंगल की और पहुंच गए हैं।

 

20-02-2020
शहर के पास हाथी दल ने मचाया उत्पात, लोगों में दहशत

रायगढ़। शहर के वार्ड क्रमांक चार के ईशानगर मुहल्ले में छह हाथियों ने धावा बोला। घरों की बाड़ियों और बरामदे में तोड़ फोड़ मचाया। बाड़ी में लगेे प्याज, टमाटर की फसलों को नुकसान पहुंचाया। मुहल्लेवासियों ने फटाके फोड़ कर किसी तरह हाथियों को भगाया। दरअसल सुबह करीब छः बजे जब हाथी दल मुहल्ले को छोड़ कर अन्यत्र गए तब मुहल्लेवासियों ने पास में ही स्थित कृष्णापुर, भगवानपुर और उर्दना बस्तियों से फटाखे की आवाज सुनी। इस तरह जब लोगों की सूचना पर प्रेसकर्मी घटना स्थल पर पहुंचे तो पाया कि वाकई हाथियों के झुण्ड ने दो अलग-अलग घरों में हमला किया था। दोनों घरों के लोग घटना के बाद से काफी डरे हुए है। इधर मीडियाकर्मियों के फोन पर रेंजर राजेश्वर मिश्रा घटना स्थल पर पहुंचे उन्होंने मौका मुआयना किया। प्रेस को बताया कि कल रात 11 बजे से ही हाथियों का एक झुंड जिसमे चार वयस्क हाथी तथा 2 शावक हाथी शामिल है शहर के नजदीक आ गए थे। वन विभाग की रेस्क्यू टीम लोकेशन ट्रेस करने में लगी थी कि अचानक सुबह हाथीयों ने ईशानगर का रुख कर लिया। हम पूरी तरह से सतर्क है हमारे रहते मुहल्लेवासियों को परेशानी नही होगी आगे से हम अतिरिक्त सतर्कता रखेंगे।

 

05-01-2020
गांव में घुसा हाथियों का दल, ग्रामीणों में दहशत का माहौल, एक गंभीर रूप से घायल  

कोरबा। केन्दई वन परिक्षेत्र के कोरबी रेंज में शनिवार रात 8:00 बजे के लगभग 40से 45 हाथियों का झुंड गांव के अंदर घुस आए है, जिसके कारण पूरे गांव में अफरा तफरी का माहौल है। ग्रामीण अपना घर छोड़कर इधर-उधर भागने को मजबूर हैं। ग्रामीण इन्द्रपाल ने बताया कि शुक्रवार लगभग 3:00 बजे प्रभारी डी एफ ओ जितेंद्र उपाध्याय के पूरी टीम को खुरुडाड के मोहल्ले में दिनदहाड़े हाथियों के झुंड ने घेर लिया था, जिसमें केंदई रेंजर की मुश्किल से जान बची।

दो हाथियों के मौत के बाद से हाथी आक्रामक हैं और इस क्षेत्र में हाथियों के झुंड ने डेरा बना रखा हैं। लगभग एक दर्जन गांवो के लोग दहशत मैं है, ग्राम कुल्हरीया से हटने के बाद कोरबी के ओडारबहरा जंगल मे डेरा जमाए हुए है जबकि जंगल में निवासरत दो तीन ग्रामीणों के मकानों को शुक्रवार रात को तोड़फोड़ करते हुए शनिवार रात को 8:00 बजे हाथियों के झुंड ने कोरवी पारा ग्राम में धावा बोल दिया हैं जिस कारण महिला पुरुष अपने छोटे-छोटे बच्चो को लेकर ठंडी में ठिठुरते हुए इधर-उधर भागने लगे, उसी बीच रतीराम सारथी उम्र 30 वर्ष हाथियों के झुंड के सामने आ पहुंचा, जिसे दंतैल हाथी ने अपने सुड से  पकड़ के पटक दिया, जिसके कारण उसे गंभीर चोटें आई हैं। जिसे ग्रामीणों की मदद से पोड़ीउपरोडा स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया है। ग्रामीणों का कहना है कि हाथी 40 से 45 की संख्या में दो झुंड में हैं एक झूंड झोरखीपारा मे है तो दूसरा झुंड खजूरपारा की ओर होने की बात कही जा रही है। उड़नदस्ता हाथी मित्र की टीम मौके में पहुंची हुई है। ग्रामीणों के साथ हाथियों पर नजर रखी जा रही है। कोरबी रेंज के बिट गार्ड नागेंद्र जयसवाल ने बताया कि हाथियों पर निगरानी रखी गई है। साथ ही ग्रामीणों से अपील की जा रही है कि सावधानी बरतते हुए अपना ध्यान रखें, घायल रतिराम को उपचार के लिए पोड़ीउपरोडा के हॉस्पिटल भेज दिया   गया है। वन कर्मियों का टीम हाथी प्रभावित क्षेत्र में तैनात है।

22-12-2019
गांव की गलियों में घूम रहे तीन हाथियों से दहशत, ग्रामीण चढ़े घर की छतों पर

गरियाबन्द। तीन हाथियों का समूह भीरालाट और केराबहरा गांव की गलियों में आतंक मचा रहा है। जान बचाने ग्रामीण छतों पर चढ़ गए हैं। हाथियों का झुंड लगभग 25 किलोमीटर दूर भीरालाट गांव पहुंच गया और गांव में दहशत फैला रहे है। खास बात यह है कि यह स्थान जिला मुख्यालय से महज 15 किलोमीटर दूर है। वन विभाग इन हाथियों के सामने बेबस नजर आ रहा है। इन्हें भगाने कुछ नहीं कर पा रहा है। वहीं ग्रामीण दहशत के मारे घरों में दुबक हैं। 35 हाथियों के झुंड से अलग हुआ तीन हाथियों का समूह आज सुबह एक ग्रामीण की जान लेने के बाद गरियाबंद जिला मुख्यालय से महज 15 किलोमीटर दूर भीरालाट गांव पहुंच गया। इस बीच आज दिन में हाथियों ने 25 किलोमीटर का सफर करते हुए 10 गांवों के जंगल को पार किया और रात 9:30 बजे के करीब भीरालाट गांव पहुंचे। यहां हाथी पहले रामकुमार के बाडे में रखे धान को खाए फिर वह ग्रामीण के घर के बाड़े में घुसे। इसके बाद गांव में दहशत और आतंक फैलाते हुए हाथी केरा बाहर गांव पहुंच गए। ग्रामीण जान बचाने छत पर चढ़ गए। सबसे अधिक दहशत कच्चे मकान वालों को है कहीं घर में सोते रहे और हाथी उनका घर ना ढहा दे। फिलहाल वन विभाग के कर्मचारी बेबस नजर आ रहे हैं और हाथी को भगाने कुछ कर नहीं पा रहे हैं। हाथी हर रात किसी गांव में पहुंचकर धान की फसल खाने का प्रयास कर रहे हैं क्योंकि बीती रात हाथी पोटिया के पास एक घर के बाडे में घुसकर फसल खा चुके थे और आज रात भी वे वही कर रहे हैं।

 

02-12-2019
लेमरू एलीफैंट रिजर्व के विरोध में प्रभावित ग्रामीणों की जीवलिया में हुई बैठक

उदयपुर। लेमरू एलिफैंट रिजर्व के विरोध में अब लोगों का विरोध खुलकर सामने आ रहा है । इसी कड़ी में इससे प्रभावित सरगुजा जिले के लखनपुर तहसील के  जीवलिया  में एक बैठक रखी गई। बैठक में उदयपुर तथा लखनपुर ब्लॉक के लोग शामिल हुए। लेमरू एलिफैंट रिजर्व को ग्रामीणों ने  सुनियोजित लूट की शुरुआत बताया । दरअसल ये पूरा इलाका जंगलों से भरा-पूरा है। इन्हीं जंगलों के गर्भ में जहां एक ओर वनोपज का भंडार है वहीं दूसरी तरफ  अकूत कोयले की सम्पदा है। ग्रामीणों ने इसे सुनियोजित कोयले की लूट की पटकथा कहा। ग्रामीण यह मानते हैं कि हाथियों और इंसानों का साथ रहना नामुमकिन है तो इस तरह की परिस्थिति निर्मित की जा रही है जिससे इंसान यह जगह छोड़ दें। बाद में कोयले की लूट में भागीदारों को विरोध का सामना न करना पड़े, लेकिन गांववाले अब जाग चुके हैं। मनबहार ने कहा कि यदि हम अपनी जगह छोड़ देंगे तो हम कहां जाएंगे। रोनहा मिंज ने बताया कि जंगल ही हमारी रोजी रोटी है। सोमार साय ने कहा कि ये अफवाह फैलाई जा रही है कि हमारा पुनर्वास नहीं होगा और हमें जंगल छोड़कर कहीं दूसरी जगह जाना नहीं होगा, जबकि वास्तविकता इससे अलग है,  दूसरी जगहों पर जब पुनर्वास किया गया है तो उनका जंगल भी छीन गया और ग्रामीण किसी काम के लायक भी नहीं रहे।  समाजसेवी जावेद खान ने कहा कि यह बहुत मुश्किल है हाथियों के साथ सामंजस्य बनाकर जंगल में रह पाना, तो यदि यह एलीफैंट रिज़र्व अस्तित्व में आता है तो बेशक यह जंगल के निवासियों के साथ एक छलावा होगा । यह अटल सत्य है कि जंगली हाथियों के साथ मनुष्य रह नहीं सकता क्योंकि हर साल हाथियों द्वारा बहुतेरे लोग मार दिए जाते हैं, फिर एक और बात है कि अभी की घोषणा पर ध्यान दिया जाए तो घासीदास टाइगर रिजर्व घोषित किया गया है, फिर हाथी और शेर को  एक ही जगह क्यों न बसाया जाए। बैठक में राजनाथ तिग्गा, बरातू तिर्की, जयाराम मिंज, निर्मल एक्का, बोधनराम पैकरा,  जगलाल मिंज, डीआर पैकरा, सगराम तिर्की, आनंद मझवार, दिनेश कुजूर, बब्लू दास, प्रभात खलखो, बाबूलाल किंडो, रत्तू एक्का, मनबहाल मिंज, दधेश्वर एक्का, ठुठुआ तिर्की, सोमार साय, पीआर तिर्की, मनोज खेस, बनस राम आदि उपस्थित थे।

05-11-2019
छत्तीसगढ़ के हाथियों का आतंक मध्यप्रदेश में, ट्रेनों की रफ्तार रोकी

शहडोल। शहडोल के ब्यौहारी वन रेंज से सटे गांवों में हाथियों के आतंक से ग्रामीण परेशान हैं। लगभग 40 की संख्या में हाथियों के इस झुंड ने गांव में धान की खड़ी फसल को काफी नुकसान पहुंचा दिया है। इससे न सिर्फ ग्रामीणों में दहशत का माहौल है बल्कि वे रातभर जागकर अपनी फसल और जान माल की पहरेदारी कर रहे हैं। रेल ट्रैक के आसपास हाथियों के विचरण से इस मार्ग से गुजरने वाली ट्रेनों की भी रफ्तार कम कर दी गई है। बता दें कि हाथियों के इस झुंड की महिला हथिनी ने एक दिन पहले एक शिशु को जन्म दिया था, जिसके बाद उस नवजात की मौत हो गई। दरअसल पिछले एक साल से छत्तीसगढ़ में मरवाही क्षेत्र से आया हाथियों का झुंड बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व  को अपना ठिकाना बनाए हुए है। हाथियों ने अब फसलों को नुकसान पहुंचाना चालू कर दिया है। फसलों के पकते ही हाथियों का झुंड खेतों में पहुंच गया है और जगह-जगह धान की खड़ी फसल को नुकसान पहुंचा रहा है। रात होते ही हाथियों का झुंड गांव में घुस जाता है और फसलों के साथ ही खाने की तलाश में ग्रामीणों के घरों को भी नुकसान पहुंचा रहा है। शहडोल रेंज के सीसीएफ डॉ. अशोक जोशी ने बताया कि ये हाथी लगातार बफर जोन में देखने को मिल रहे थे और बरसात खत्म होने के बाद अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी घुस रहे हैं। फिलहाल वन विभाग का प्रयास है कि इन्हें न सिर्फ  ग्रामीण अंचलों में घुसने से रोका जाए बल्कि किसी को भी जानमाल की हानि न होने पाए। 

 

06-10-2019
हाथियों को भा गया कटघोरा वनमंडल,  60 सदस्यीय दल कर रहा लगातार विचरण

कोरबा। लगता है कोरबा के बाद अब हाथियों को कटघोरा वनमंडल रास आ गया है। यहां कुछ महीनों से हाथियों का दल विचरण कर जानमाल की क्षति पहुंचा रहा है। इन दिनों लगभग 60 हाथियों का दल ग्रामीण इलाकों के आसपास जंगलों में विचरण करते देखे जा रहे हैं जो किसानों के खेतों में लगी धान फसलों को रौंदकर बुरी तरह नष्ट कर रहे हैं। वर्तमान में अलग-अलग झुंड में 40 हाथियों का समूह केंदई रेंज में मंडरा रहा है। वे पोड़ीखुर्द एवं कोरबी इलाके के समीप जंगल में डेरा जमाए हुए है तथा खेतों में लगी फसल को नुकसान पहुंचा चुके हैं। इन हाथियों की आमद से प्रभावित ग्रामीण काफी भयभीत हैं। वनअमला भी हाथियों पर लगातार नजर रखे हुए हैं तथा ग्रामीणों को सावधानी बरतने सतर्क किया जा रहा है। केंदई परिक्षेत्राधिकारी अश्वनी चौबे ने बताया कि मौजूदा समय में जिन हाथियों का दल विचरण कर रहा है वह दिन में जंगल तथा सांझ ढलते ही जंगल के आसपास बसे रहवासी इलाके की ओर रुख कर रहे हैं। खेतों में धान फसल को भी नुकसान पहुंचाया गया है। प्रभावित किसानों की क्षति का आंकलन किया जा रहा है। साथ ही उन्हें जंगल की ओर न जाने की हिदायत दी जा रही है एवं सावधानी बरतने लगातार सतर्क किया जा रहा है। दूसरी ओर इन हाथियों के जटगा रेंज के सीमा में दस्तक को लेकर रेंजर मोहरसिंह मरकाम ने वनअमला के माध्यम से हाथी प्रभावित इलाकों में अलर्ट जारी कर लोगों को सावधान रहने कहा है। फिलहाल हाथियों का दल अभी केंदई रेंज में विचरण करने के साथ जटगा रेंज की सीमा में भी पहुंच चुका है। वे कभी भी जटगा रेंज की सीमा लांघ सकते हैं।  

 

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