GLIBS
13-10-2020
ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरूकता लाने महिला समूह, मितानिन और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने लिया संकल्प

रायपुर/जांजगीर-चांपा। ब्रेस्ट कैंसर के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से प्रति वर्ष अक्टूबर को स्तन कैंसर जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। स्तन कैंसर के प्रति जागरूकता के लिए ग्रामीण स्तर पर महिला संगठनों में स्वसहायता समूह, मितानिन व आंगनबाडी कार्यकर्ता भी आगे बढ़कर अभियान चला रही हैं। 13 अक्टूबर से स्तन कैंसर माह को मनाने के लिए जाजंगीर-चांपा जिले के पामगढ़ ब्लॉक स्थित ग्राम पंचायत मेंऊ की महिलाओं ने नरसिंह चौक मुहल्ले की चौपाल में एक बैठक का आयोजन किया। आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 3 नरसिंह चौक मेंऊ की कार्यकर्ता सावित्री दिनकर ने बताया, स्तन कैंसर पुरुषों और महिलाओं दोनों को हो सकता है, परन्तु यह महिलाओं में अधिक होता है। कई कारणों से स्ततनों में बढ़ने वाली असामान्य  कोशिकाएं कभी कभी गांठ का रूप ले लेती हैं जो आगे चलकर कैंसर में परिवर्तित हो सकती हैं। उन्होंने कहा, ब्रेस्ट में गांठ या स्थानीय चमड़ी मोटी होना जो आसपास से अलग दिखना, ब्रेस्ट के आकार या स्वरूप में बदलाव, ब्रेस्ट त्वचा में परिवर्तन, जैसे कि डिंपलिंग, उल्टां निप्पल, निप्पल के आस-पास की त्वचा का छिलना, स्केलिंग, क्रस्टिंग या फ्लेकिंग लाल होना या निप्पल खड़ा होना ब्रेस्टं कैंसर के लक्षण हो सकते हैं।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने महिलाओं को बताया, यदि बीमारी के लक्षण के बारे में समय रहते पता चल जाए तो इसका उपचार हो सकता है। ऐसी स्थिति में मितानिन और एएनएम से लक्षण के बारे में चर्चा कर नजदीक के अस्पताल में चिकित्सकीय परामर्श व इलाज कराया जा सकता है |इसके हेतु समुदाय में जागरुकता लाने के लिए मितानिन व स्वसहायता समूहों की महिलाएं मुहल्ले में लगभग 250 घरों में पहुंच कर परिवार के महिला सदस्यों से भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित करेंगी। इस मौके पर मितानिन शशी बंजारे व रमशीला टंडन ने बताया, नरसिंह चौक मुहल्ले में लगभग 15 से 50 साल तक 200 से अधिक महिलाओं व किशोरियों को माहवारी स्वच्छता अभियान से जोड़ा जाएगा। स्वस्थ्य नारी–स्वस्थ्य परिवार बनाने को मितानिन दीदी ने स्वच्छ माहवारी के लिए सेनेटरी पेड का इस्तेमाल करने की शपथ दिलाई । अब हर बेटी,बहु व महिला के सम्मान के लिए हर नारी को एक कदम आगे बढ़ाने की जरुरत है। वहीं बैठक में बी स्माइल फाउंडेशन सोसाइटी के ब्लॉक समन्वयक संजय कुमार साहू ने बताया, उनकी संस्था महिलाओं को बी स्माइल फाउंडेशन के माध्यम से 12 महीने के लिए 300 रुपए में 72 सेनेटरी पेड का सेट उपलब्ध कराएगी। 

अनिल कुमार साहू ने बताया महिलाओं में जागरुकता की कमी के कारण माहवारी के दौरान सैनेटरी पेड का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। इसलिए यह करने के लिए महिलाओं व युवतियों को समूह की महिला गृहभेंट कर प्रेरित कर रहीं हैं। इस दौरान  माहवारी के समय परंपरागत संसाधनों के बदले सेनेटरी पेड को स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित एवं ज्यादा हितकारी होने की जानकारी भी दी गई। बैठक में कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए स्वच्छता पर ध्यान देने के बाद महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर जैसे बीमारियों और सवाइकल कैंसर के बारे में भी बताया गया। इस मौके पर नरसिंह चौक आंगनबाड़ी केंद्र की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सावित्री दिनकर, सहायिका तीजमती दिनकर और जय माँ चंद्रहासिनी महिला स्वसहायता समूह की अध्यक्ष मैना बाई लहरे, सम्मेबाई लहरे, तीज बाई दिनकर, मालती दिनकर, सचिव उषा रोही दास और कल्याणी महिला स्वसहायता समूहकी अध्यक्ष नन्दनी खांडे, सचिव दामिनी जांगड़े, मनीषा बंजारे, रामकुमारी बंजारे, कुमारी रोहिदास, मुकनी सोनवानी व कांति सोनवानी भी उपस्थित रही।

21-09-2020
’मोर घर मोर बाड़ी’ विषय पर ऑनलाइन वेबिनार सम्पन्न

रायपुर। चल रहे पोषण माह के दौरान डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से विभिन्न गतिविधियों का आयोजन कर जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन का प्रयास किया जा रहा है। इसी कड़ी में 21 सितम्बर को डिजिटल मीट के माध्यम से ’मोर घर मोर बाड़ी’ विषय पर ऑनलाइन वेबिनार आयोजित किया गया। इसमें विभागीय संचालक दिव्या उमेश मिश्रा,नेहरू युवक केन्द्र के संचालक श्रीकान्त पाण्डे सहित तकनीकी विशेषज्ञ डॉ. मंजीत बल कौर ने अपने विचार साझा किये। वेबमीट में सभी जिलों के विभागीय मैदानी अमले ने भी भाग लिया। दिव्या मिश्रा ने कहा कि सर्वांगीण विकास के लिए स्वास्थ वातावरण का होना आवश्यक है। राज्य में किये जा रहे प्रयास से कुपोषण में कमी आई है,लेकिन इसमें तेजी से बदलाव के लिए इसके विरूद्ध जन आंदोलन के रूप में मिशन मोड में काम करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पोषण माह के दौरान हमें जनभागीदारी को विकसित करने का एक सुअवसर मिला है।

कुपोषित मां से कुपोषित बच्चे की संभावना बढ़ जाती है। बालिका कुपोषित होती है तो यह चक्र चलता रहता है। इसे दूर करने के लिए जरूरी है कि हमारी थाली पौष्टिकता और पोषक तत्वों के विभिन्न रंगों से भरी हो। इसके लिए व्यक्तिगत जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन जरूरी है। पोषण के लिए लोगों को जागरूक करने साथ लोगों को समर्थ बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की ओर से शुरू की गई नरवा गरवा घुरवा बारी योजना का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। योजना से लोग आर्थिक रूप से ही नहीं शारीरिक रूप से सशक्त हो रहे हैं और इससे जनसमुदाय भी आपस में जुड़ रहे हैं। नेहरू युवक केन्द्र के संचालक श्रीकान्त पाण्डे ने कहा कि फूड हैबिड को बदले बिना कुपोषण से लड़ना मुश्किल है। इसके लिए युवक युवतियों को पेड़-पौधे लगाने के लिए आगे आना होगा। वह नेहरू युवक केन्द्र के साढ़े चार हजार युवक-युवती क्लब के माध्यम से कुपोषण के विरूद्ध काम करेंगे।

उन्होंने 5 पौधे प्रत्येक युवक-युवतियों को लगाने का भी लक्ष्य दिया है। वंचित तबकों के लिए काम कर रहीं रहीं डॉ.मनजीत कौर बल ने कहा कि कोविड कुपोषण को प्रभावित कर रहा है, इसलिए कुपोषण के विरूद्ध हमें दोगुनी ताकत से आना पड़ेगा। बाड़ी का उद्देश्य बेचने के उद्देश्य से ही नहीं उपभोग के उद्देश्य से भी होना चाहिए। उन्होंने पारे-मोहल्ले में पोषण बाड़ी का पुर्नजीवन और लाभ को प्रात्साहित करने पर बल दिया। इसके साथ ही सालों से सामाजिक क्षेत्र में काम कर रहे सरोज महापात्र ने सिंचाई व प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन और स्वसहायता समूहों को मोटिवेट करने पर प्रकाश डाला। अनुसंधान आधारित काम कर रहे परेश कुमार ने सामाजिक संप्र्रेक्षण और लोगों में गतिशीलता लाने के बारे में समझाया। यूनिसेफ के अभिषेक सिंह ने व्यवहार परिवर्तन पर लोगों को प्रेरित करने पर अपने विचार रखे।

 

18-09-2020
राष्ट्रीय पोषण माह: व्यवहार और जागरूकता से ही स्वस्थ समाज की परिकल्पना होगी साकार

जांजगीर-चांपा। स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए पोषण व्यवहार में परिवर्तन आज एक आवश्यकता बन गई है। जीवन शैली के बदलाव से सामने आई कई बीमारियां हमारे लिए चुनौतियां बन गई हैं। कई देशों में मोटापा खान-पान की व्यवहारगत कमियों की वजह से तेजी से बढ़ रहा है। भोजन में पोषक तत्वों के अभाव ने लोगों की प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर दिया है। पोषण के प्रति जागरूकता की कमी और समुचित पोषण का अभाव या उपेक्षा हमारे सामने कई प्रकार की बीमारियों के रूप में सामने आता है। इसका सबसे बड़ा दुष्प्रभाव कुपोषण का एक विश्वव्यापी समस्या बनकर उभरना है। कोरोना काल में लोगों को इसका महत्व गहराई से समझ आने लगा है। आहार के प्रति सही व्यवहार और जागरूकता से ही एक स्वस्थ समाज की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है।

स्वस्थ बच्चे के लिए मां का भी स्वस्थ होना जरूरी


रिसर्च में महिलाओं और बच्चों में कुपोषण का अधिक प्रभाव पाया गया है। राष्ट्रीय परिवार एवं स्वास्थ्य सर्वे-4 के अनुसार छत्तीसगढ़ के 5 वर्ष से कम उम्र के 37 प्रतिशत बच्चे कुपोषित और 15 से 49 वर्ष की 47 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा 2 अक्टूबर 2019 गांधी जयंती के दिन से मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान की शुरूआत कर गर्भवती महिलाओं और 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए गर्म भोजन की व्यवस्था की गई है, जिससे महिलाओं और बच्चों में पोषक तत्वों की कमी को पूरा किया जा सके। स्वस्थ बच्चा स्वस्थ समाज की आधारशिला होता है। इस आधारशिला को मजबूत बनाने के लिए समुदाय स्तर पर सभी की सहभागिता और जन-जागरूकता बहुत जरूरी है। एक स्वस्थ जीवन के लिए तैयारी गर्भावस्था के दौरान ही शुरू कर देनी चाहिए। स्वस्थ बच्चे के लिए मां का भी स्वस्थ होना उतना ही जरूरी है। इसमें पोषण के पांच सूत्र- पहले सुनहरे 1000 दिन, पौष्टिक आहार, एनीमिया की रोकथाम, डायरिया का प्रबंधन और स्वच्छता और साफ-सफाई स्वस्थ नए जीवन के लिए महामंत्र साबित हो सकते हैं।        

 पहले सुनहरे 1000 दिन पहले

1000 दिनों में तेजी से बच्चे का शारीरिक एवं मानसिक विकास होता है। इनमें गर्भावस्था के 270 दिन और जन्म के बाद पहले और दूसरे वर्ष के 365-365 दिन इस प्रकार कुल 1000 दिन शामिल होते हैं। इस दौरान उचित स्वास्थ्य, पर्याप्त पोषण, प्यार भरा व तनाव मुक्त माहौल और सही देखभाल बच्चों का पूरा विकास करने में मदद करते हैं। इस समय मां और बच्चे को सही पोषण और खास देखभाल की जरूरत होती है। इस समय गर्भवती की कम से कम चार एएनसी जांच होनी चाहिए। गर्भवती और धात्री महिला को कैल्शियम और आयरन की गोलियों का सेवन कराया जाना चाहिए। इसके साथ ही संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जिससे मां और बच्चे का जीवन सुरक्षित हो सके। परिवार के लिए भी यह जानना और व्यवहार में लाना जरूरी है कि जन्म के एक घंटे के भीतर बच्चे को मां का पहला पीला गाढ़ा दूध देना बहुत जरूरी है,यह बच्चे में रोगों से लड़ने की शक्ति लाता है। 6 माह से बड़े उम्र के बच्चे को स्तनपान के साथ ऊपरी आहार दिया जाना चाहिए। इसके साथ बच्चे को सूची अनुसर नियमित टीकाकरण और बच्चे 9 माह होने पर उसे नियमित विटामिन ए की खुराक दी जानी चाहिए।

पौष्टिक आहार

6 महीने के बच्चे और उससे बड़े सभी लोगों को भी पर्याप्त मात्रा में तरह-तरह का पौष्टिक आहार आवश्यक लेना चाहिए। पौष्टिक आहार में विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थ जैसे कि अनाज, दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां और मौसमी फल लेने चाहिए। हरी सब्जियों में पालक, मेथी, चौलाई और सरसों, पीले फल जैसे आम व पका पपीता खाए जा सकते हैं। यदि मांसाहारी हैं तो, अंडा, मांस और मछली आदि भोजन में लिया जा सकता है। खाने में दूख, दूध से बने पदार्थ और मेवे आदि शामिल करें। अपने खाने में स्थानीय रूप से उत्पादित पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करें। आंगनबाड़ी से मिलने वाला पोषाहार अवश्य खाएं। यह निश्चित मात्रा में पौष्टिक पदार्थों को मिला कर तैयार किया जाता है। जब बच्चा 6 महीने का हो जाए तो मां के दूध के साथ घर का बना मसला और गाढ़ा ऊपरी आहार भी शुरू कर देना चाहिए जैसे- कद्दू, लौकी, गाजर, पालक तथा गाढ़ी दाल, दलिया, खिचड़ी आदि। यदि मांसाहारी हैं तो अंडा, मांस व मछली भी देना चाहिए। बच्चे के खाने में ऊपर से 1 चम्मच घी, तेल या मक्खन मिलाएं।बच्चे के खाने में नमक, चीनी और मसाला कम डालें। प्रारंभ में बच्चे का भोजन एक खाद्य पदार्थ से शुरू करें, धीरे-धीरे खाने में विविधता लाएं। बच्चे का खाना रूचिकर बनाने के लिए अलग-अलग स्वाद व रंग शामिल करें। बच्चे को बाजार का बिस्कुट, चिप्स, मिठाई, नमकीन और जूस जैसी चीजें न खिलाएं। इससे बच्चे को सही पोषक तत्व नहीं मिल पाते।

एनीमिया की रोकथाम

स्वस्थ शरीर और तेज दिमाग के लिए एनीमिया की रोकथाम करें। सभी उम्र के लोगों में एनीमिया की जांच और पहचान किया जाना महत्वपूर्ण होता है, ताकि व्यक्ति की हीमोग्लोबिन के स्तर के अनुसार उपयुक्त उपचार प्रारंभ किया जा सके। एनीमिया की रोकथाम के लिए आयरन युक्त आहार खाएं जैसे- दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां, पालक, मेथी, फल, दूध, दही, पनीर आदि। यदि मांसाहारी है तो अंडा, मांस व मछली का भी सेवन करें। खाने में नींबू, आंवला, अमरूद जैसे खट्टे फल शामिल करें, जो आयरन के अवशोषण में मदद करते हैं। साथ ही आयरन युक्त पूरक लें।  आयरन युक्त पूरक प्रदान करने के लिए 6-59 माह के बच्चे को हफ्ते में 2 बार 1 मिली. आईएफए सिरप, 5-9 वर्ष की उम्र में आईएफए की एक गुलाबी गोली, 10-19 वर्ष तक की उम्र में हफ्ते में एक बार आईएफए की नीली गोली,गर्भवती महिला को गर्भावस्था के चौथे महीने से रोजाना 180 दिन तक आईएफए की एक लाल गोली, धात्री महिला को 180 दिन तक आईएफए की एक लाल गोली और कृमिनाश के लिए कीड़े की दवा (एल्बेण्डाजोल) की निर्धारित खुराक दी जाती है। आंगनबाड़ियों और स्वास्थ्य केन्द्रों के माध्यम से यह खुराक बच्चे को दिलाई जानी चाहिए।
इसके साथ ही प्रसव के दौरान कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं जैसे  कि स्वास्थ्य संस्थाएं जन्म के पश्चात बच्चे की गर्भनाल 3 मिनट बाद ही काटें। इससे नवजात बच्चे के खून में आयरन की मात्रा बनी रहती है।


डायरिया का प्रबंधन

स्वस्थ शरीर और कमजोरी से बचाव के लिए डायरिया का प्रबंधन जरूरी है। इसके लिए व्यक्तिगत साफ-सफाई, घर की सफाई, आहार की स्वच्छता का ध्यान रखें और डायरिया से बचाव के लिए हमेशा स्वच्छ पानी पिएं। माताएं 6 माह तक बच्चे को केवल स्तनपान ही करवाएं। कोई और खाद्य पदार्थ यहां तक पानी भी नही दें क्योंकि वह भी बच्चे में डायरिया का कारण बन सकता है। डायरिया होने पर भी मां स्तनपान नहीं रोके बल्कि बार-बार स्तनपान करवाएं। शरीर को दोबारा स्वस्थ बनाने के लिए 6 माह से बड़े बच्चे को ऊपरी आहार के साथ बार-बार स्तनपान करवाएं। बच्चे को डायरिया होने पर तुरंत ओआरएस तथा अतिरिक्त तरल पदार्थ दें और जब तक डायरिया पूरी तरह ठीक न हो जाए तब तक जारी रखें। डायरिया से पीड़ित बच्चे को डॉक्टर की सलाह पर 14 दिन तक जिंक दें, अगर दस्त रूक जाए तो भी यह देना बंद नहीं करें।

स्वच्छता और साफ-सफाई


स्वास्थ्य और सफाई का हमेशा साथ रहा है। गंदगी कई बीमारियों का खुला निमंत्रण होती है। इसलिए अपनी स्वच्छता सुनिश्चित करें।हमेशा साफ बर्तन में ढक कर रखा हुआ शुद्ध पानी पिएं, बर्तन को ऊंचे स्थान पर लंबी डण्डी वाली टिसनी के साथ रखें। हमेशा खाना बनाने, स्तनपान से पहले, बच्चे को खिलाने से पहले, शौच के बाद और बच्चे के मल के निपटान के बाद साबुन और पानी से हाथ आवश्य धोएं। बच्चे को खाना खिलाने से पहले बच्चे के हाथों को साबुन और पानी से जरूर धोएं। शौच के लिए हमेशा शौचालय का उपयोग ही करें। किशोरियां और महिलाएं माहवारी के दौरान व्यक्तिगत साफ-सफाई का ध्यान रखें।

 

04-09-2020
हस्त शिल्प गतिविधियों के प्रचार प्रसार के साथ शिल्पियों में जागरूकता लाने शिल्पी चौपालों का आयोजन

रायपुर/जगदलपुर। वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार कार्यालय विकास आयुक्त हस्तशिल्प की ओर से विभागीय गतिविधियां प्रचार-प्रसार के साथ-साथ शिल्पियों में जागरूकता लाने शिल्पी चौपालों का आयोजन किया जा रहा है। इस के तहत बस्तर जिले के ग्राम एर्राकोट में तृतीय शिल्पी चौपाल का आयोजन किया गया। शिल्पी चौपाल का मुख्य उद्देश्य हस्तशिल्प का प्रचार-प्रसार कर शिल्प के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करना है। हस्तशिल्प से तात्पर्य हाथों से बनाई गई कलात्मक कलाकृति से है। जिसमें मुख्यतः हाथ की चूड़ियां, लकड़ी पर नक्काशी, मिट्टी के कलात्मक बर्तन, पत्थर शिल्प, बांस शिल्प, पेंटिंग, टॉयस एवं डॉल्स, धातु कि मूर्तियाँ इत्यादि हैं। इस अवसर पर सहायक निदेशक (ह) लाखन सिंह मीणा ने विभाग अंतर्गत संचालित हस्तशिल्प योजनाओं, उन्नत शिल्प डिजाईनों, शिल्पी के लिए पहचान पत्र, जी.आई. रजिस्ट्रेशन एवं मार्केटिंग से संबंधित जानकारियों दी गई। इस चैपाल के अंतर्गत शिल्पियों को हस्तशिल्प योजनाओं, मुद्रा लोन, हस्तशिल्प हेल्पलाइन, जेम पोर्टल, पहचान पत्र वितरण व शिल्पियों के पंजियन फॉर्म भरे गए और इम्प्रूव्ड टूल किट्स की जानकारी भी प्रदान की गई। कार्याक्रम के दौरान हस्त शिल्पीयों को जेम पोर्टल में पंजीकृत किया गया व जेम पोर्टल के इस वर्चुअल माध्यम से उत्पादों के विक्रय के संबंध में जानकारी दी गई। इस अवसर पर सरपंच एर्राकोट पालकी बाई सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

 

06-08-2020
सरगुजा संभाग के सभी जिलों में कोरिया में सबसे कम एक्टिव केस, कलेक्टर ने कहा - सतर्कता और जागरूकता से होंगे कामयाब

कोरिया। सरगुजा संभाग के अंतर्गत कोरिया जिले में कोविड-19 केस अन्य की अपेक्षा कम हैं। वर्तमान में सबसे कम 22 एक्टिव केस हैं जबकि आज की स्थिति में अंबिकापुर में 25 एक्टिव केस, सूरजपुर में 34 केस, जशपुर 37 केस और बलरामपुर में 34 एक्टिव केस हैं। साथ ही आज जिले में एक भी पॉजिटिव केस नहीं मिला है।सरगुजा संभाग के अंतर्गत अम्बिकापुर मेडिकल कॉलेज के बाद कोरिया जिले में ही दूसरा कोविड केअर हॉस्पिटल प्रारंभ किया गया गया। यहां जिले में ही कोरोना के मरीजों का इलाज किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त सरगुजा संभाग में कोरिया पहला जिला है जहां ट्रू-नाट टेस्टिंग लैबोरेट्री प्रारंभ की गई।

इस विधि से एक से डेढ़ घण्टे में ही कोरोना संक्रमण की रिपोर्ट प्राप्त हो जाती है। आम जनता को कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए जिला प्रशासन की ओर से जागरूक किया जा रहा है। साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वालों पर चालानी कार्यवाही भी राजस्व व पुलिस टीम के साथ की जा रही है। कलेक्टर ने जिले की समस्त जनता से अपील करते हुए कहा है कि प्रशासन की सतर्कता और जनता की जागरूकता से ही कोरिया जिला जरूर ही यह जंग जीतने में कामयाब होगा। सभी बचाव नियमों का पालन अवश्य करें।

10-06-2020
गांव-गांव पहुंच कर कोरोना से बचाव के लिए जागरूकता ला रही चाइल्ड लाइन की टीम

रायपुर। कोरोना वायरस की रोकथाम और उसके संक्रमण से बचाव के उपाय बताने के लिए चाइल्ड लाइन की टीम गांव-गांव पहुँच रही है। चाइल्ड लाइन 1098 और आस्था समिति कबीरधाम की ओर से जिले में विभिन्न स्थानों में जाकर नोवल कोरोना वायरस के संक्रमण से बच्चों की सुरक्षा के लिए जन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस संकट काल में चाइल्ड लाइन की टीम जरूरतमंद बच्चों की मदद कर रही है। चाइल्ड लाइन 1098 की टीम पुलिस, महिला एवं बाल विकास और स्वास्थ्य विभाग टीम के साथ मिलकर काम रही है।

जिले में अब तक 35 गांवों में जन जागरूकता कार्यक्रम कर जगरूकता अभियान में 720 बच्चों, 410 पुरुषों एवं 450 महिलाओं को सीधे जोड़ा गया। इस दौरान बच्चों, महिलाओं और ग्रामीणों को सोशल, फिजिकल डिस्टेंस, डब्लूएचओ के मानक अनुसार 6 चरणों में हाथ धुलाई का अभ्यास,हाथों को सैनिटाइज करने के लिए जागरूकता लाने की कोशिश की गई है। नियमित मास्क लगाकर एक दूसरे से बात करने के लिए जागरूक किया गया। जिले के अति जरूरतमन्द 35 परिवारों को खाद्य सुरक्षा, राहत सामाग्रियों का वितरण भी किया गया है।

बच्चों को खास सावधानी बरतने किया जागरूक

चाइल्ड लाइन ने बच्चों को कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए खास सावधानी बरतने के लिए जागरूक कर रही है। इसके तहत बच्चों को घर से बाहर न खेलने,बच्चों का हाथ साबुन से 40 सेकण्ड तक हर 2 घण्टे में धोते रहने,बच्चों को किसी भी परेशानी पर निशुल्क चाइल्ड हेल्पलाईन 1098 पर फोन कर मदद लेने  को कहा जा रहा है । इसके साथ ही बच्चों में  रचनात्मक विकास के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा संचालित चकमक अभियान से जुड़कर पेंटिंग्स,चित्रकला,गीत में सहभागिता के लिए प्रेरित करने के साथ बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई के लिए संचालित ‘पढ़ई तुंहर द्वार‘ से घर पर ही रहकर पढ़ाई करने कहा गया है।

क्वारेंटाइन सेंटर में मनोवैज्ञानिक परेशानियों से बचने विशेष सलाह

चाइल्ड लाइन 1098 के केंद्र समन्वयक चन्द्रकांत यादव ने बताया कि कबीरधाम चाइल्ड लाइन टीम द्वारा जिला प्रशासन के निर्देशानुसार विशेष सेवाएं दी जा रही हैं। टीम ने प्रवासी श्रमिकों को मनोसामाजिक परामर्श, स्वास्थ्य एंव पोषण सलाह दी। लोगों को तनाव, हताशा और मनोवैज्ञानिक परेशानी के लिए टीम के परामर्शदाता से परामर्श दिया जा रहा है। अब तक सेन्टर में रह रहे 10 किशोरियों, 15 गर्भवती, 5 शिशुवती माताओं को सेवाएं प्रदान की गई है।

04-05-2020
कोंडागांव पुलिस ने तैयार किया ‘जागरूकता रथ‘,कोरोना वॉरियर्स की दिखाई झलक

रायपुर/कोंडागांव। कोरोना से बचाव के लिए किए गए लॉक डाउन का तीसरा चरण भी शुरू हो गया है। लेकिन देश में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में जन-जन तक कोरोना के प्रति जागरूकता का प्रसार करना आवश्यक हो गया है ताकि 17 मई तक किये गए लॉक डाउन में ही हम कोरोना संक्रमण को नियंत्रित कर सकें ताकि दोबारा लॉक डाउन ना करना पड़े। इसे ध्यान में रखकर कोण्डागांव पुलिस की ओर से निर्मित इस कोरोना ‘जागरूकता रथ‘ को पुलिस अधीक्षक बालाजी राव ने हरी झंडी दिखा कर रवाना किया। यह रथ जिले  भर में घूमता हुआ ऑडियो मैसेज से  कोरोना के बचाव और उपायों के विषय मे जागरूकता प्रसारित करने का काम करेगा। यह जनता को ऑडियो मैसेज से सामाजिक दूरी का पालन करने, समय-समय पर हाँथ धोने, भीड़-भाड़ इलाकों से बचने और मास्क पहनने जैसे बचाव के उपायों का ज्ञान देगा।

रथ में कोरोना वॉरियर्स की दिखाई गई है झलक

इस ‘जागरूकता रथ‘ में कोरोना से लड़ने वाले मैदानी रूप में कार्य करते पुलिसकर्मी, यातायात पुलिस, डॉक्टर, सफाईकर्मी को आम आदमी और वायरस के बीच दीवार बनकर कोरोना वॉरियर के रूप में कार्य करते झांकी में दिखाया गया है। ज्ञात हो कि पुलिस प्रशासन दिन-रात लोगों को कोरोना के प्रति जागरूक करने, सभी को घरों में रहने और सारी व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए दिन हो या रात हमारे लिए सड़कों पर धूप हो या बरसात बिना किसी परवाह के अपनी चिंता बिना किये खड़े हुए हैं।इस पर पुलिस अधीक्षक ने बताया कि कोण्डागांव पुलिस की ओर से  समय-समय पर नवाचार के माध्यम से जागरूकता लाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि ग्रामीण अंचल एवं ऐसे इलाके जहां संचार साधनों की कमी रही है, उन इलाकों में जनता को कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए जागरूक किया जाए।

ऐसा ही सराहनीय प्रयोग पूर्व में बाँसकोट में भी किया गया था जहाँ प्रोजेक्टर के माध्यम से स्थानीय भाषा मे जागरूकता का प्रसार किया गया था। कोण्डागांव थाना प्रभारी ने बताया कि ऐसे नवाचारी प्रयोग जिले में निरन्तर किये जा रहे हैं, यह रथ भी ऑडियो एवं झांकी के माध्यम से कोरोना जागरूकता का प्रचार-प्रसार का उत्तम साधन सिद्ध होगा।इस मौके पर जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनंत साहू, उप पुलिस अधीक्षक यातायात निकिता तिवारी मिश्रा, अनुविभागीय अधिकारी पुलिस कोण्डागांव कपिल चंद्रा , उप पुलिस अधीक्षक मुख्यालय अंजलि गुप्ता,कोतवाली थाना प्रभारी नरेंद्र पुजारी और यातायात प्रभारी रवि पांडे समेत अन्य पुलिसकर्मी भी उपस्थित रहे।

04-05-2020
Video: कोरोना वायरस से जागरूकता के लिए बॉलीवुड का सहारा

रायगढ़। लॉक डाउन 3.O में रायगढ़ पुलिस शहर के प्रमुख चौक-चौराहों में बॉलीवुड फिल्मों के मशहूर डॉयलॉग वाले पोस्टर चिपका रही है। इस पोस्टर में डॉयलॉग को रीक्रिएट कर कोरोना वायरस के संक्रमण से खुद को और दूसरे को कैसे बचाएं ऐसे छोटे जागरूकता वाले संदेश है। एसपी रायगढ़ संतोष कुमार सिंह ने बताया कि ऐसे पोस्टर लोगों को आकर्षित करेंगे,जिससे इसे रीक्रिएट कराकर इसे कोरोना वायरस के प्रति जागरूकता संदेश देने वाला बनवाया गया। आगे भी लोगों को अन्य तरीकों से जागरूक करने का हमारा प्रयास जारी रहेगा। लोग हमारी बातों को समझ रहे हैं। रायगढ़ पुलिस द्वारा लोगों को जागरूक करने के इस अनोखे कार्य की सभी उम्र के लोग प्रशंसा कर रहे हैं।

 

 

01-05-2020
सीआरपीएफ बटालियन ने कोरोना से बचाव के लिए किया जागरूकता कार्यक्रम

बीजापुर। कोरोना वायरस संक्रमण के बीच लाक डाउन के दौरान सीआरपीएफ 170 बटालियन द्वारा मददेड व संगमपल्ली के आस पास के इलाकों में कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए मशीन के द्वारा सोडियम हाइड्रोकलोराइड के घोल का छिड़काव किया गया। इस अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम में 170 बटालियन के  मुख्य चिकित्सक अधिकारी एमएल गगटे ने ग्रामीणों को कोरोना  संक्रमण से बचाव के उपाय बताकर जागरूक  किया। कमांडेंट आलोक भट्टाचार्य के द्वारा कार्यक्रम में उपस्थित ग्रामीणों को सैनिटाइजर, फिनाइल,बाथरूम सफाई का एसिड,मास्क,ब्लीचिंग पाउडर इत्यादि का वितरण किया गया। इस दौरान मद्देड स्वास्थ्य उपकेंद्र के चिकित्साधिकारी द्वारा मौके पर जब कहा गया कि उनके अस्पताल में थर्मल स्कैनर नहीं है तो कमांडेंट आलोक भट्टाचार्य ने  उनको तुरंत उन्हें अपनी बटालियन में उपलब्ध थर्मल स्कैनर भी मद्देड अस्पताल के लिए प्रदान किया। कमांडेंट आलोक भट्टाचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि संक्रमण से दूरी ही बचाव का सही उपाय है। एक दूसरे से एक मीटर की दूरी बनाये रखे साथ ही अपने हाथों को बार बार डेटाल या साबुन से धोते रहिए। जवानों ने ग्रामीणों की सहयोग से गांव की गली व कूचों में ब्लीचिंग  पाउडर का छिड़काव तथा घर घर जाकर सोडियम हाइपोकलोराइड सल्यूशन का छिड़काव भी किया  गया। इस मौके पर D/170वी.वाहिनी  के उप कमान अधिकारी अश्विनी मिश्रा,कम्पनी कमांडर जैक्विन सैनो,मददेड थाना प्रभारी धर्माराम तिर्की, थाना स्टाफ मददेड सहित आसपास के ग्रामीण उपस्थित थे।

 

17-04-2020
मोबाइल टावर में लगी आग, स्थानीय लोगों की जागरूकता से नहीं हुई जनहानि 

रायपुर/सूरजपुर। शहर के सघन आबादी वाले मस्जिद पारा में आज सुबह निजी परिसर में लगे मोबाइल टावर के कन्ट्रोल पैनल रूम में आग लग जाने के कारण हड़कंप की स्थिति निर्मित हो गई। लोगों की जागरूकता के कारण किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई लेकिन टावर ट्रासंमिशन पैनल कक्ष में लगे सभी इलेक्ट्रानिक उपकरण, आप्टिकल फाईवर और केबल पूरी तरह जलकर खाक हो गए। नगर पालिका की दमकल टीम ने मौके पर पहुंचकर करीब एक घंटे में आग पर काबू पाने में सफलता हासिल की। सूरजपुर के जामा मस्जिद के सामने एक निजी परिसर में मोबाइल टावर लगा हुआ है। आबादी क्षेत्र में लगे इस टावर क्षेत्र से सुबह करीब 8 बजे धुंआ उठते हुए देखकर इसकी सूचना स्थानीय नागरिकों ने पूर्व पार्षद सुनील अग्रवाल, पार्षद संजय डोसी, अशविनी सिंह, मंजूलता गोयल समेत अन्य को दी।

सूचना के बाद जब तक दमकल व बचाव दल वहां पहुंचता तब तक तो कन्ट्रोल पैनल कक्ष और केबल पूरी तरह जलकर राख हो चुका था। आग की लपटों ने बगल के एक विद्युत पोल को भी अपने आगोश में ले लिया। जिसे स्थानीय नागरिकों में अकरम खान, बिहारी प्रजापति समेत अन्य ने सूझबूझ के साथ बालू फेंक-फेंक कर नियंत्रित की और विद्युतकर्मियों ने कनेक्शन विच्छेद कर राहत पहुंचाई। एक घंटे तक तो ऐसा अफरा-तफरी का माहौल रहा कि आग पूरे मोहल्ले में फैल गई तो न जाने क्या होगा। घनी आबादी वाला क्षेत्र होने के कारण आसपास रहने वाले लोग घरों से बाहर निकल आए थे।

Advertise, Call Now - +91 76111 07804