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21-10-2020
हवाई सेवा शुरू करने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

रायपुर/बिलासपुर। शहर में हवाई सेवा शुरू करने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है। बता दें कि इससे पहले हाईकोर्ट ने असिस्टेंट सालिसिटर जनरल के गोलमोल जवाब पर नाराजगी जताई थी। साथ ही मामले में अब सैन्य अफसरों को तलब करने की चेतावनी भी दी है। बीते दिन इस मामले की सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा ने बताया कि 5 अक्टूबर को राज्य सरकार ने आपरेशन एरो स्टैंडर्ड के डायरेक्टर को पत्र लिखकर बिलासपुर में टू सी केटगरी एयरपोर्ट को फोर-सी में परिवर्तित करने की अनुमति मांगी है। 12 अक्टूबर को दिल्ली के सिविल एविएशन ने राज्य शासन को पत्र लिखकर बताया कि फोर सी कैटगरी के लाइसेंस के लिए जरूरी दस्तावेज अनिवार्य है। इसके बाद 19 अक्टूबर को सभी पक्षों की बैठक हुई। इसमें फोर सी कैटगरी एयरपोर्ट बनाने को लेकर चर्चा की गई। इसके लिए बहुत सारे निर्माण कार्य व जमीन की जरूरत है।

महाधिवक्ता ने बताया कि वर्तमान में थ्री-सी केटगरी एयरपोर्ट के लिए काम चल रहे हैं। सेना को प्रबंधन के लिए दी गई 78.22 एकड़ जमीन को जिला प्रशासन ने वापस ले लिया है। याचिकाकर्ता कमल दुबे के वकील आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि थ्री-सी कैटगरी एयरपोर्ट शुरू होने के बाद फोर-सी कैटगरी के लिए भी काम शुरू किया जा सकता है। बहस के दौरान हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार व रक्षा मंत्रालय की तरफ से उपस्थित असिस्टेंट सालिसिटर जनरल से पूछा कि आप की ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई है। पिछले आदेश के संबंध में उन्होंने बताया कि राज्य शासन ने जो फाइल की है उसकी कापी नहीं मिली है। कॉपी एक दिन पहले ही दे दी गई है। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की। साथ ही चेतावनी दी कि अगली पेशी में सैन्य अधिकारियों को तलब कर पूछताछ की जाएगी। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है।

15-10-2020
हाथरस के सामूहिक दुष्कर्म मामले की मॉनिटरिंग करे इलाहाबाद हाईकोर्ट : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि एक दलित युवती के साथ कथित गैंगरेप और बर्बरता के चलते हुई उसकी मौत को लेकर हाथरस केस की इलाहाबाद हाईकोर्ट को मॉनिटर करने की इजाजत दी जाती है। एक जनहित याचिका और वकीलों और कार्यकर्ताओं की तरफ से दायर कई याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत को यह कहा गया कि उत्तर प्रदेश में निष्पक्ष ट्रायल संभव नहीं है क्योंकि कथित तौर पर जांच को भटका दिया गया है।
मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस आशंका को खारिज करते हुए कहा,"उच्च न्यायालय को इससे निपटने देना चाहिए। यदि कोई समस्या है तो हम यहां हैं।" सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अलावा सुनवाई के दौरान हरीश साल्वे, इंदिरा जयसिंह और सिद्धार्थ लूथरा जैसे वकील कई पक्षों की तरफ से पेश हुए थे। कोई वकील इसके विरोध में बहस नहीं करना चाहते थे लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा- "हमें पूरी दुनिया की सहायता की जरूरत नहीं है।" सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि किसी भी मामले में पीड़ित की पहचान का खुलासा नहीं किया जाता है और उसके परिवार के सदस्यों और गवाहों को पूरी सुरक्षा और सुरक्षा दी जाती है।

पीड़ित परिवार की तरफ से पेश हुए वकील ने हाथरस केस को उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय राजधानी में ट्रांसफर किए जाने की मांग की। कार्यकर्ता और वकील इंदिरा जयसिंह ने राज्य में निष्पक्ष ट्रायल होने पर शंका जताते हुए गवाहों की सुरक्षा को लेकर दलीलें दी। शुरुआत में, सॉलिसिटर जनरल ने हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दायर हलफनामे का उल्लेख किया,जिसमें मामले में पीड़ित परिवार और गवाहों को प्रदान की गई सुरक्षा और सुरक्षा के बारे में विवरण दिया गया था। राज्य सरकार जिसने पहले ही केस सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया है और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच को सहमति दे दी है, उसने सुप्रीम कोर्ट की तरफ से गवाहों की सुरक्षा और पीड़ित के परिवार को वकील दिए जाने के बारे में मांगे गए ब्यौरे पर हलफनामा दायर किया था। अनुपालन हलफनामे का उल्लेख करते हुए तुषार मेहता ने कहा कि पीड़ित के परिवार ने सूचित किया है कि उन्होंने वकील रख ली है और उन्होंने यह भी अनुरोध किया है कि सरकारी वकील को भी उनकी तरफ से इस मामले को देखना चाहिए।

 

14-07-2020
स्कूलों की जमीन पर निर्माण के खिलाफ जनहित याचिका पर फैसला सुरक्षित

रायपुर/बिलासपुर। स्कूलों की जमीन पर शासन द्वारा निर्माण कार्य कराने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सोमवार को हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर दिया। शासन व याचिकाकर्ता की ओर से अपना अपना पक्ष रखा गया।
सुनवाई के दौरान शासन की ओर से बताया गया कि स्कूलों में काम नहीं चल रहा है। बल्कि जो अन्य काम होना है, उसका टेंडर 15 जुलाई को ओपन होगा। इस पर याचिकाकर्ता ने आपत्ति की कि जो काम चल रहे हैं, उनको बिना टेंडर कैसे शुरू कर दिया गया। शासन की ओर से मामले को राजनीति से प्रेरित बताया गया।

गौरतलब है कि रायपुर के दानी गर्ल्स स्कूल व कॉलेज, सप्रे बॉयज स्कूल की जमीन पर निगम व प्रशासन द्वारा निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। इसके खिलाफ वहां के निवासी डॉ अजीत आनंद डेगवेकर, राजेश कदम व अन्य ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि स्कूलों व कॉलेज के खेल मैदान, लैब, गार्डन की जमीन को सुरक्षित किया जाए। जमीन हथियाने के लिए इसे खाली व आम उपयोग की जमीन बताया जा रहा है। यह सब रोक कर स्कूल की जमीन पर 1 मई 2020 की स्थिति बहाल की जाए।

03-03-2020
स्थानीय लोगों की उपेक्षा को लेकर दायर जनहित याचिका की अगली सुनवाई 6 मार्च को

बिलासपुर। हाइकोर्ट में दायर जनहित याचिका में शिक्षक भर्ती में स्थानीय लोगों की उपेक्षा को लेकर समयाभाव के कारण अगली सुनावाई 6 मार्च को होगी। खंडपीठ ने तय की है कि प्रारंभिक सुनवाई के बाद बस्तर व सरगुजा संभाग के अलावा कोरबा जिले में नियुक्ति आदेश पर रोक लगा दी है। राज्य सरकार ने शिक्षकों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसके बाद राज्य सरकार द्वारा राजपत्र में संशोधन कर नियमित शिक्षक भर्ती में स्थानीय लोगों को लाभ न दिए जाने का खुलासा कर दिया है। शासन के इस निर्णय के खिलाफ बस्तर व सरगुजा संभाग के उम्मीदवारों ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर दी है। प्रारंभिक सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश जारी करते हुए नियुक्ति आदेश जारी करने पर रोक लगा दी थी। जनहित याचिका की बीते दिन सुनवाई होनी थी लेकिन समयाभाव होने के कारण अगली सनुवाई 6 मार्च की तिथि खंडपीठ ने तय कर दी है।


 

03-03-2020
अरपा नदी को बचाने के लिए हाइकोर्ट में दायर की जनहित याचिका

रायपुर। अरपा नदी के रेत को बचाने के लिए जनहित याचिका हाइकोर्ट में लगाई गई हैै। याचिका में कहा गया है कि भवन निर्माण व अन्य कार्य इसमें रेत की जरूरत होती है। इसकी जगह कृत्रिम रेत के उपयोग की अनुमति देने की बात कही है। इसके जरिए नदी के रेत को संरक्षित रखा जा सकता है। साथ ही अवैध उत्खनन पर भी प्रभावी तरीके से रोक लगाई जा सकती है। अरपा अर्पण महाभियान ने वकील अंकित पांडेय के जरिए हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। याचिका में अरपा के अस्तित्व को खनिज विभाग और रेत माफियाओं से खतरा की ओर इशारा भी किया है। याचिका में खनिज विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाया है। याचिका के अनुसार जिस विभाग के जिम्मे अरपा को सुरक्षित और संरक्षित रखने का जिम्मा है वही विभाग के अधिकारी रेत माफियाओं के साथ सौदेबाजी कर अरपा को मिटाने पर तुले हुए हैं। विभागीय सिस्टम पूरी तरह फेल हो गया है। अफसर सब कुछ जानते हुए भी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहा है। इसके चलते माफियाओं का दबदबा बढ़ता ही जा रहा है। अवैध उत्खनन के कारण तेजी के साथ अरपा नदी से रेत कम होते जा रही है। प्राकृतिक रेत का इस तरह बेहिसाब दोहन से नदी के लिए बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया है। नदी का स्वरूप भी तेजी के साथ बदल रहा है।

18-02-2020
स्पीड ब्रेकर्स हटाने को लेकर लगाई याचिका में फैसला सुरक्षित

रायपुर। राज्य की सड़कों पर बनाए गए स्पीड ब्रेकर्स को हटाने की मांग को लेकर दायर की गई जनहित याचिका पर बीते दिन चीफ जस्टिस पी आर रामचंद्र मेनन व जस्टिस पीपी साहू की खंडपीठ में सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। याचिकाकर्ता ने स्टेट व नेशनल हाईवे इंडियन रोड कांग्रेस के मापदंडों का उल्लंघन करते हुए बनाए गए स्पीड ब्रेकर्स के कारण आए दिन होने वाले दुर्घटनाओं का उल्लेख करते हुए ब्रेकर्स को हटाने की मांग की थी।याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में पीडब्ल्यूडी और नेशनल हाईवे के अधिकारियों द्वारा बिना मापदंड ब्रेकर्स बनाने की शिकायत भी की थी। लापरवाही पूर्वक बनाए गए ब्रेकर्स के कारण होने वाली दुर्घटनाओं का हवाला भी दिया है। प्रदेश की प्रमुख सड़कों का जिक्र भी किया गया है। याचिकाकर्ता द्वारा पेश शपथ पत्र और शासन की तरफ से जवाब देने के बाद जनहित याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है।



 

18-02-2020
प्रमोशन में आरक्षण मामले में अगली सुनवाई 5 मार्च को

रायपुर। हाईकोर्ट ने प्रमोशन के मामले में आरक्षण के खिलाफ लगी जनहित याचिका पर सुनावई कर ली है। बीते दिन चीफ जस्टिस पी आर रामचंद्र मेनन व जस्टिस पीपी साहू की खंडपीठ ने सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। वहीं शासन ने जवाब पेश करने के लिए मोहलत मांग ली है। खंडपीठ ने अगली सुनवाई के लिए 5 मार्च की तिथि तय की है। बीते सुनवाई के दौरान खंडपीठ के समक्ष महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा ने पैरवी की थी। इन्होंने माना था कि अधिसूचना जारी करने में अधिकारियों ने गलती की है। खंडपीठ से सप्ताहभर का समय मांगा है। शासन ने राज्य में प्रमोशन में आरक्षण देने के लिए 22 अक्टूबर को अधिसूचना जारी की थी। सरकार के अधिसूचना के खिलाफ वकील योगेश्वर शर्मा ने जनहित याचिका पेश की। आदेश को चुनौती देने वाली याचिका में कहा गया है कि आरक्षण के मामले में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देशों का राज्य शासन पालन नहीं कर रही है।

 

 

07-02-2020
हजार करोड़ रूपए घोटाले के मामले में हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा, दो आईएएस की याचिका खारिज

रायपुर। छत्तीसगढ़ में समाज कल्याण विभाग में एनजीओ के नाम पर  एक हजार करोड़ रूपए के घोटाले के मामले में राज्य शासन की तरफ दायर की गई रिव्यू पीटिशन पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। जस्टिस प्रशांत मिश्रा और जस्टिस पीपी साहू की खंड पीठ में मामले की सुनवाई हुई। राज्य के सात भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों समेत 12 अफसर्स व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री पर हजार करोड़ रुपए के घोटोले का आरोप है। समाज कल्याण विभाग में घोटाले को लेकर कुंदन सिंह ठाकुर ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका लगाई थी। जिस पर फैसला सुनाते हुए 30 जनवरी को न्यायालय ने पूरे मामले की जांच की जिम्मेदारी सीबीआई को सौंप दी थी। साथ ही मामले में 7 दिनों के भीतर एफआईआर दर्ज करने का भी आदेश हाईकोर्ट ने सीबीआई को दिया था। मामले में 7 आईएएस अधिकारियों के नाम सामने आए हैं। जिनमें से दो अधिकारियों ने हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका लगाई थी। आईएएस बीएल अग्रवाल और सतीश पांडेय की पुनर्विचार याचिका को आज न्यायालय ने खारिज कर दी है। आज मामले पर जस्टिस प्रशांत मिश्रा व पीपी साहू की डिवीजन बेंच ने अपना आदेश जारी किया है।

 

28-01-2020
राज्य व केंद्र की एजेंसियों से हाईकोर्ट ने मांगी रिपोर्ट

रायपुर। बिलासपुर में हवाई सेवा शुरू होने में देरी को लेकर दायर की गई जनहित याचिका पर  बीते दिन सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकार की एजेंसियों से 7 फरवरी तक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। याचिका पर अगली सुनवाई 10 फरवरी को होगी। हाईकोर्ट की संयुक्त पीठ की सुनवाई में राज्य सरकार की तरफ से पैरवी करते हुए महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा ने बताया कि अभी टू सी हवाई सेवा का सेटअप चकरभाटा एयरपोर्ट पर उपलब्ध है। एक माह के भीतर इसे 3 सी एयरपोर्ट में तब्दील किया जा सकता है। राज्य शासन ने एक डीड जारी किया है। जिसमें विमानन कंपनियों से रुचि की अभिव्यक्ति भी मांगी गई है, जो 3 सी हवाई सेवा के लिए हैं। याचिकाकर्ता ने वकील ने कहा कि वर्ष 2017 में केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ सरकार के तत्कालीन सीएस विवेक ढांड को पत्र लिखकर 3 सी कैटेगरी का एयरपोर्ट विकसित करने के लिए भेजा था। फिलहाल तब कोई जवाब केंद्र को नहीं भेजा गया एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने 2015 की बैठक में प्रस्ताव भी पास किया था।

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