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02-06-2020
 महाराष्ट्र के तटीय क्षेत्रों से बुधवार को टकराएगा तूफान ‘निसर्ग’, लहरे दिखा सकती है रौद्र रूप

नई दिल्ली। महाराष्ट्र और गुजरात के ऊपर चक्रवाती तूफान ‘निसर्ग’ का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। मौसम विभाग ने अनुमान लगाया है कि चक्रवाती तूफान निसर्ग बुधवार को महाराष्ट्र के तट पर टकरा सकता है। बुधवार को यह तूफान गंभीर चक्रवाती तूफान की श्रेणी में बदल सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक तूफान की वजह से समुद्र में 2 मीटर तक ऊंची लहरें भी उठ सकती है और तटीय क्षेत्रों में आंधी चल सकती है। मौसम विभाग के मुताबिक मंगलवार रात को ही यह तूफान गंभीर चक्रवाती तूफान की श्रेणी में बदल सकता है। बुधवार को इसके महाराष्ट्र और गुजरात के तटीय क्षेत्रों से टकराने की आशंका है और उस समय भी इसके गंभीर चक्रवाती तूफान की श्रेणी में बने रहने की आशंका है। मौसम विभाग के मुताबिक महाराष्ट्र में बुधवार को अलीबाग से लगे तट पर यह तूफान टकराएगा और उस समय 120 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से आंधी चल सकती है। मौसम विभाग ने मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक चक्रवाती तूफान निसर्ग की वजह से गुजरात और महाराष्ट्र में कई क्षेत्रों में आंधी चल सकती है। विभाग ने कई क्षेत्रों के लिए आंधी की चेतावनी जारी की हुई है। मुंबई, रायगढ़, ठाणे, पालघर,रत्नागिरी तथा सिंधुदुर्ग में तेज आंधी चलने की संभावना हैं।

 

02-06-2020
दो लाख के करीब पहुंचा कोरोना पॉजिटिव का आंकड़ा, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली अभी भी नियंत्रण से बाहर

दिल्ली/रायपुर। लॉक डाऊन 4 के बाद से कोरोना की रफ्तार और तेज हो गई थी और अब जबकि अनलॉक डाउट शुरू हो चुका है तो भी इसकी रफ्तार कम होती नजर नहीं आ रही है। यह चिंता का बहुत बड़ा कारण है। दिल्ली मैं तो कोरोना की रफ्तार डराने वाली नजर आ रही है। यही हाल महाराष्ट्र तमिलनाडु गुजरात का है। तसल्ली की बात यह है कि रिकवरी रेट हमारा बहुत अच्छा है। लेकिन सिर्फ रिकवरी रेट के भरोसे कोरोना से लड़ाई नहीं जीती जा सकती। यह खुश रहने के लिए ख्याल अच्छा है कि हमारा रिकवरी रेट अच्छा है लेकिन कोरोना के संक्रमण की रफ्तार पर ब्रेक लगाना बहुत जरूरी है। कोरोना का संक्रमण अगर नहीं रुकता तो स्थिति धीरे-धीरे भयानक हो सकती  है। अब अनलॉकडाउन में मिली छूट पता नहीं कोरोना की रफ्तार को कितना नियंत्रित करती है या फिर कोरोना अपनी रफ्तार से आगे बढ़ कर खतरनाक स्थिति की ओर बढ़ता जाएगा।

पूरी दुनिया में कोरोना वायरस से हाहाकार मचा हुआ है। भारत भी कोविड-19 से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। देश में जारी लॉक डाउन के बाद भी कोरोना वायरस संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में 8,171 नए मामले सामने आए हैं और 204 लोगों की मौत हुई है। इसके बाद देश भर में कोरोना पॉजिटिव मामलों की कुल संख्या 1,98,706 हो गई है, जिनमें से 97,581 सक्रिय मामले हैं, 95,527 लोग ठीक हो चुके हैं या उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है और अब तक 5,598 लोगों की मौत हो चुकी है।

01-06-2020
क्वारेंटाइन सेंटर में रूके प्रवासियों ने पौधारोपण कर कोरोना काल को दी स्मृतियां

कोरबा। तिलकेजा के हायर सेकेण्डरी स्कूल में क्वारेंटाइन में रह रहे प्रवासी श्रमिकों ने अपने घर जाने से पहले अपनी चिन्हारी इस स्कूल में प्रेरणा स्वरूप रोप दी है। इन मजदूरों ने अपनी मातृभूमि लौटने के लिए कोरोना के कारण जिस संकट का सामना किया है उस संकट से आगे लोगों को बचाने के लिए उसकी याद स्वरूप अपनी चिन्हारी पौधों के रूप  में क्वारेंटाइन सेंटर में छोड़ दी है। तिलकेजा के इस क्वारेंटाइन सेंटर में महाराष्ट्र, तेलंगाना, राजस्थान, उड़ीसा, सहित अन्य राज्यों में काम करने गये प्रवासी मजदूरों को वापस कोरबा लौटने पर प्रशासन ने सभी सुविधाओं के साथ ठहराया है। सेंटर में ठहरे प्रवासी श्रमिक शिव सिंह गोंड़ ने बताया कि वे अपने गांव सरईडीह से काम-काज की तलाश में तेलीबहाली उड़ीसा गए थे। वहां वे रोजी-मजदूरी का काम करते थे। कोरोना के कारण लाॅक डाउन हुआ तो कामकाज ठप्प पड़ गया। बड़ी मुश्किलों से वापस कोरबा लौटे हैं। शिव सिंह गोंड ने बताया कि अपनी मातृभूमि लौटकर आने पर प्रशासन ने 14 दिन के लिए तिलकेजा के हायर सेकेण्डरी स्कूल में क्वारेंटाइन किया। क्वारेंटाइन सेंटर में 14 दिन तक रूकने की बात सुनकर मन में आया कि हम कहां आकर फंस गये, यहां खाने-पीने की, रहने की व्यवस्था होगी की नहीं, बाहरी प्रदेश में लाॅक डाउन के दौरान फंसे होने के समय जो दुख-दर्द सहें उसका अंत अभी भी नहीं होगा क्या..? यह सब बातें सोचकर मन बहुत विचलित हो गया था। शिव सिंह गोंड ने आगे बताया कि मन में आने वाली चिन्ता, व्याकुलता से पर्दा उठना उस समय प्रारंभ हो गया जब क्वारेंटाइन सेंटर में आते ही हम सबको तथा हमारे सभी सामानों को दवाई से सेनेटाइज किया गया, परिसर में बने भवन में ठहरने का जगह दिखाया गया। भवन के कमरे में प्रवेश करते ही एक पल के लिए सुखद अनुभव हुआ क्योंकि दूसरे प्रदेश से भटकते हुए आते समय भोजन के साथ छाया भी नसीब नहीं हुआ था। साफ फर्श वाले कमरे में अपना सामान रखे, गर्मी का मौसम था, पसीना से तरबतर थे। यहां कमरे में आने के बाद पंखें की हवा ने परेशानी के पसीना को गायब कर दिया। प्रवासी श्रमिकों ने क्वारेंटाइन सेंटर की व्यवस्थाओं से संतुष्टि जताई है।

01-06-2020
अम्‍फान के बाद अब गुजरात और महाराष्ट्र में निसर्ग चक्रवात तूफान का खतरा, अलर्ट जारी

नई दिल्ली। ओडिशा और पश्चिम बंगाल में अम्फान तूफान से मची तबाही के बाद एक और चक्रवाती तूफान का खतरा मंडराने लगा है। भरतीय मौसम विभाग ने सोमवार को निसर्ग नाम के एक और चक्रवाती तूफान की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग ने महाराष्ट्र और गुजरात में तूफान की आशंका जताई है। मौसम विभाग ने कहा है कि 3 जून को निसर्ग चक्रवाती तूफान उत्तरी महाराष्ट्र और दक्षिण गुजरात तट को पार करने की संभावना है। उन्होंने कहा कि अरब सागर और लक्षद्वीप पर कम दबाव का क्षेत्र बना है जो आगे बढ़ते हुए चक्रवाती तूफान में बदल रहा है। आईएमडी ने ट्वीट कर कहा है कि दक्षिण पूर्वी और आसपास के पूर्वी मध्य अरब सागर तथा लक्षद्वीप क्षेत्र के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। अगले 24 घंटे में निसर्ग चक्रवाती तूफान के पूर्वी मध्य और आसपास के दक्षिण पूर्वी अरब सागर के ऊपर दबाव के रूप में मजबूत होने की संभावना है। इसके उत्तर की तरफ आगे बढ़ने और तीन जून तक उत्तरी महाराष्ट्र तथा गुजरात तटों के पास पहुंचने की काफी संभावना है। मौसम विभाग ने चक्रवात निसर्ग के कारण मछुआरों को ऐतिहातन समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि जो मछुआरे अभी अरब सागर में गए हैं, वे तुरंत वापस तटों पर लौटें। इस चक्रवाती तूफान की लाइव ट्रैकिंग संभव है और आईएमडी वेबसाइट के माध्यम से किया जा सकता है।

भारी बारिश की आशंका :

राष्ट्रीय मौसम पूर्वानुमान केंद्र की प्रमुख सती देवी ने कहा है कि चार जून के लिए तटवर्ती महाराष्ट्र, गोवा और पूरे गुजरात को लेकर रेड अलर्ट जारी किया गया है। चक्रवाती तूफान के चलते इन क्षेत्रों में भारी बारिश होने की संभावना है। तीन जून के लिए तटवर्ती महाराष्ट्र और गोवा के लिए रेड अलर्ट और गुजरात के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

31-05-2020
महाराष्ट्र में पिछले 24 घंटे में 91 पुलिसकर्मी हुए कोरोना संक्रमित, अब तक 26 की मौत

मुंबई। कोरोना वायरस महामारी का सामना इन दिनों भारत समेत पूरी दुनिया कर रही है। भारत में कोरोना वायरस का कहर तेज गति से और बढ़ता ही जा रहा है। इसके पॉजिटिव मामलों की संख्या 1 लाख 82 हजार के करीब हो गई है। वहीं महाराष्ट्र में शनिवार को कोरोना वायरस के 2,940 नए मामले सामने आए, जिससे राज्य में मामलों की संख्या 65,168 तक पहुंच गई। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि 99 और रोगियों की बीमारी के कारण मृत्यु हो गई, जिससे राज्य में मृतकों की संख्या 2,197 तक पहुंच गई। दिन भर में 1,084 मरीज ठीक हुए और उन्हें अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई। महाराष्ट्र में अब तक 28,081 मरीज वायरस के संक्रमण से स्वस्थ चुके हैं। प्रदेश में तेजी से फैल रहे कोरोना वायरस के संक्रमण का असर महाराष्ट्र पुलिस पर भी देखने को मिल रहा है। लोगों की सुरक्षा के लिए सड़कों पर तैनात महाराष्ट्र पुलिस के जवान कोरोना वायरस के शिकार हो रहे हैं।

पिछले 24 घंटों की बात करें तो 91 पुलिसकर्मी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं जबकि अब तक 2416 पुलिसकर्मी कोरोना संक्रमण का शिकार हो चुके हैं। पिछले तीन दिनों का रिकॉर्ड देखें तो हर दिन 100 से अधिक पुलिसकर्मी कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। जानकारी के मुताबिक महाराष्ट्र में ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी तेजी से कोरोना वायरस के संक्रमण का शिकार हो रहे हैं। महाराष्ट्र में पिछले 24 घंटे में 91 पुलिसकर्मी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। बता दें कि महाराष्ट्र में अबतक 26 पुलिसकर्मियों की कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से मौत हो चुकी है। पिछले तीन दिनों में पुलिसकर्मियों के कोरोना पॉजिटिव होने का आंकड़ा 100 को पार कर गया था। गुरुवार को 131 पुलिसकर्मी कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे जबकि शुक्रवार को 116 और शनिवार को 114 मामले सामने आए थे।

30-05-2020
मोदी सरकार 2.0 का पहला एक साल विफलता,नाकामी का काला अध्याय : मोहन मरकाम

रायपुर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने मोदी सरकार के 2.0 के पहले एक साल को विफलता और नाकामी का काला अध्याय कहा है। मरकाम ने कहा है कि कोरोना से निपटने से लेकर अर्थव्यवस्था तक हर मामले में मोदी सरकार विफल साबित हुई है। 40 करोड़ भारतीयों के गरीबी रेखा के नीचे जाने की स्थिति बनने के लिए मोदी सरकार 2.0 का पहला साल जिम्मेदार है। साम्प्रदायिक दंगे भड़कने और नागरिकता के काले कानून के लिए मोदी के इस एक वर्ष को याद किया जाएगा। महाराष्ट्र बंद, दिल्ली और हरियाणा के चुनावों में भाजपा की हार हुई। हरियाणा में भाजपा अनैतिक गठबंधन करके सरकार बना पाई। यातायात का काला कानून लाया गया,जिसमें भारी भरकम जुर्माने का प्रावधान है। पूरा देश आज नोटबंदी और गलत तरीके से जीएसटी लागू करने की गलती को भुगत रहा है। अर्थव्यवस्था मांग की बड़ी भारी कमी से जूझ रही है और जिस तरह से सरकार ने 20 लाख करोड़ के जुमले की घोषणा की है, उससे मांग की सृजन की कोई उम्मीद भी नहीं है। आंकड़ों से ये बात स्पष्ट हो गया है कि कोरोना संक्रमण के फैलने के पूर्व ही अर्थव्यवस्था स्लोडाउन फेज में थी। जिस तिमाही के आंकड़े आये हैं उसमें लॉक डाउन सिर्फ एक हफ्ता ही था।

मोहन मरकाम ने केंद्र सरकार से इन सवालों का जवाब मांगा है। पिछले 4 साल से लगातार गिरती जीडीपी का जिम्मेवार कौन है? बड़े विज्ञापनों के बावजूद मेक इन इंडिया स्कीम धराशायी क्यों हुई? 20 लाख करोड़ के पैकेज गरीबों, मध्यमवर्ग, किसान, मजदूर, छोटे व्यापारी, निजी नौकरी करने वालों किसी को भी क्यों कुछ नहीं मिला? आर्थिक मामले में ट्रिलियन इकानॉमी की बात करने वाली मोदी सरकार की अर्थव्यवस्था की चिंताजनक बातों को उजागर करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा है कि 1.4 (माइनस 1 प्वाइंट 4) प्रतिशत की मैन्यूफेक्चरिंग ग्रोथ ये स्पष्टतया दशार्ती है कि अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो चुकी है। 2020 की मैन्यूफेक्चरिंग विकास दर 0 प्रतिशत ने सरकार के मेक इन इंडिया प्रोग्राम की पूरी पोल खोल दी। फैक्ट्री आउटपुट का 16 प्रतिशत पर पहुंचना स्पष्टतया एमएसएमई सेक्टर की व्यथा को बयान करता है और किस तरह इस सेक्टर से रोजगार के अवसर खत्म हुए, उसकी कहानी बताता है। 0.6 (माईनस 0 प्वाइंट 6) प्रतिशत की औद्योगिक विकास दर स्पष्टतया ये दशार्ती है कि समस्या इकोनॉमी के सारे सेक्टर में है। क्वार्टर आन क्वार्टर जिस तरह से सर्विस सेक्टर नीचे गिरता जा रहा है,जो कि किसी समय में भारतीय अर्थव्यवस्था की शान हुआ करता था, स्पष्टतया सरकार की गलत नीतियों एवं अपेक्षा की ओर, और लगातार अपेक्षा का चिन्हित करता है। 2.2 (माईनस 2 प्वाइंट 2) प्रतिशत की विकास दर कंस्ट्रक्शन सेक्टर में स्पष्टतया ये दशार्ती है कि लॉकडाउन के अनाउंसमेंट के पहले ही प्रवासी मजदूरों एवं कामगारों के मध्य भयानक बेरोजगारी उपस्थित थी।

30-05-2020
महाराष्ट्र से आए थे कांकेर जिले में मिले कोरोना पॉजिटिव

कांकेर। जिले के पखांजूर क्षेत्र में शनिवार को 3 नए एवं दुर्गुकोंदल से एक कोरोना पॉजिटिव  मिला है। ये सभी मजदूर महाराष्ट्र से लौटे थे और क्वारेंटाइन में रखे गए थे। इस प्रकार जिले में अब तक कुल 19 पॉजिटिव केस है।

29-05-2020
Video: कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे ने किया पदभार ग्रहण

दुर्ग। जिले के नवनियुक्त कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे ने आज पदभार ग्रहण किया। उन्होंने निवर्तमान कलेक्टर अंकित आनंद से पदभार ग्रहण किया। डॉ. भूरे इससे पूर्व मुंगेली जिले में कलेक्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। डॉ. भूरे वर्ष 2011 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। डॉ. भूरे मूल रूप से महाराष्ट्र से हैं। उन्होंने अपनी एमबीबीएस की डिग्री महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंस नाशिक से ली है।

27-05-2020
तीन जिलों से छत्तीसगढ़ में प्रवेश कर सकता है टिड्डी दल, अलर्ट जारी होते ही रायपुर सहित सभी जिलों में तैयारियां तेज

रायपुर। टिड्डी दल राजस्थान होते हुए मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र राज्य तक पहुंच गया है। छत्तीसगढ़ में प्रवेश की संभावना को देखते हुए कृषि विभाग ने अलर्ट जारी किया है। कृषि विभाग के अधिकारियों को टिड्डी दल के प्रकोप की रोकथाम के लिए किसानों को आवश्यक मार्गदर्शन और दवाओं के छिड़काव के बारे में भी जानकारी देने के कहा गया है। संचालक कृषि टामन सिंह सोनवानी ने बताया कि 27 मई को सुबह सवा 4 बजे टिड्डी दल सिंगरौली की तरफ बढ़ा है, जो छत्तीसगढ़ राज्य के सीमावर्ती जिले कोरिया, सूरजपुर और बलरामपुर की ओर से छत्तीसगढ़ राज्य में प्रवेश कर सकता है। उन्होंने सभी जिला कलेक्टरों को टिड्डी दल के नियंत्रण के लिए आपदा प्रबंधन मद से आवश्यक व्यवस्था करने को कहा है। टिड्डी दल के संबंध में सूचनाओं के आदान-प्रदान और इनके नियंत्रण के लिए कृषकों को आवश्यक सलाह दिए जाने के लिए जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष भी स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।

रायपुर में जिला स्तरीय दल का गठन, नंबर जारी
रायपुर जिले के प्रभारी कलेक्टर एवं नगर निगम रायपुर के आयुक्त सौरभ कुमार के निर्देश पर जिले में टिड्डी दल के प्रकोप से बचाव के लिए जिला स्तरीय दल का गठन किया गया है। इसी तारतम्य में बुधवार को जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ.गौरव कुमार सिंह ने कृषि विभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर जिले में टिड्डी दल के प्रकोप से सुरक्षा के व्यापक व्यवस्था के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिले में भी  टिड्डियों के समूह आने की संभावना है। पेस्टीसाइड और स्प्रेयर की व्यवस्था के संबंध में जिले में समन्वय स्थापित करने कहा है। टिड्डी दल के प्रकोप से बचाव के लिए जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। जिला स्तर पर नोडल अनुविभागीय कृषि अधिकारी दीपक कुमार नायक को नियुक्त किया गया है। इसी तरह विकासखंड स्तर पर धरसींवा विकासखंड के लिए बीआर धृतलहरे,आरंग के लिए एमएल थावरे, अभनपुर के लिए एचसी साहू और तिल्दा के लिए जीएस यादव को नोडल अधिकारी बनाया गया है। टिड्डी दल के किसी भी प्रकार की जानकारी या सूचना नियंत्रण कक्ष के दूरभाष नंबर 0771-2439497 या टोल फ्री नंबर 1800-233-1850  पर दिया जा सकता है।

टिड्डी दल को नियंत्रित करने किसान कर सकते हैं ये प्रयास
उप संचालक कृषि आरएल खरे ने बताया कि टिड्डी दल नियंत्रण के लिए किसान दो प्रकार के साधन अपना सकते हैं। इसमें भौतिक साधन से किसान टोली बनाकर विभिन्न प्रकार के परंपरागत उपयोग शोर मचाकर,ध्वनि वाले यंत्रों को बजाकर,डराकर भगाया जा सकता है। इसके लिए ढोलक,ट्रैक्टर,मोटर साइकल का साइलेंसर, खाली टीन डिब्बे, थाली इत्यादि से ध्वनि की जा सकती है। टिड्डी दल के उपचार के लिए ट्रेक्टर स्प्रेयर धारक किसानों से ट्रेक्टर स्प्रेयर की व्यवस्था की जा रही है। इसके अतिरिक्त सभी छोटे स्प्रेयर वाले किसानों को फसलों के बचाव करने  के लिए सभी किसानों को तैयार रहने की जानकारी दी गई है।

कीट नाशक दवाओं के छिड़काव से रूकता है टिड्डों का प्रकोप
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि टिड्डा कीट लगभग दो से ढाई इंच लंबा होता है। टिड्डा कीट हमेशा समूह में रहते हैं। टिड्डी दल जब भी समूह में खेत के आसपास आकाश में उड़ते दिखाई दे, तो उनको उतरने से रोकने के लिए तुरंत खेत के आसपास मौजूद घास-फूस को जलाकर धुंआ करना चाहिए। इससे टिड्डी दल खेत में न बैठकर आगे निकल जाएगा। कृषि विभाग ने टिड्डी दल के प्रकोप की रोकथाम के लिए किसानों को रासायनिक उपचार के बारे में भी आवश्यक जानकारी दी है। टिड्डी दल शाम को 6 से 7 बजे के आसपास जमीन में बैठ जाता है और सुबह 8 से 9 बजे के करीब उड़ता है। रासायनिक यंत्रों के लिए इस अवधि में इनके ऊपर ट्रेक्टर चलित स्पेयर की मदद से कीट नाशक दवाईयों का छिड़काव करके इनकों मारा जा सकता है। दवाओं का छिड़काव का सबसे उपयुक्त समय रात्रि 11 बजे से सुबह 8 बजे तक होता है। टिड्डी के नियंत्रण के लिए डाईफ्लूबेनज्यूरान 25 प्रतिशत घुलनशील पावडर 120 ग्राम या लैम्बडा-साईहेलोथ्रिन 5 प्रतिशत ईसी 400 मिली या क्लोरोपायरीफॉस 20 ईसी 200 मिली प्रति हेक्टेयर कीटनाशक का छिड़काव किया जाना चाहिए। कृषि विभाग ने किसानों से टिड्डी दल के दिखाई देते ही तत्काल अपने इलाके के कृषि विभाग के अधिकारी, किसान मित्रों, सलाहकारों या कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ.चंद्रमणी साहू अथवा किसान हेल्प लाईन टोल फ्री नंबर 18002331850 पर संपर्क किया जा सकता है।

 

27-05-2020
वाहनों में पशु तस्करी करते 4 व्यक्तियों को पुलिस ने किया गिरफ्तार

 राजनांदगांव। थाना लालबाग को मुखबिर से सूचना मिली कि दो वाहनों में पशुओं की तस्करी करके जंगल के रास्ते महाराष्ट्र ले जाने की तैयारी है,जो कि सुकुलदैहान होते हुए जंगल के रास्ते सीमा पार करेंगे। प्रशिक्षु उपपुलिस अधीक्षक मयंक रणसिंह ने सूचना के आधार पर घेराबंदी करते हुए अपने स्टाफ के साथ चंडी मंदिर के पास दो बोलेरो वाहनों को रोककर देखा तो उनमें 10-10 मवेशियों को भरा गया था। इसमें महाराष्ट्र निवासी 4 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया। उनके खिलाफ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत कार्यवाही की गई। मवेशियों को गौशाला भेज दिया गया।

26-05-2020
भिलाई में प्रवासी मृत युवक की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव

भिलाई। देश भर में प्रवासी मजदूरों का अपने घर लौटने का सिलसिला लगातार जारी है। इसी क्रम में दुर्ग जिले में 24 मई को बस में सवार श्रमिक महाराष्ट्र से झारखंड जा रहा था। लेकिन रास्ते में ही भिलाई 3 के समीप एक श्रमिक बीमार हो गया और उसे दुर्ग शासकीय अस्पताल ले जाया गया।यहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। यहां उसके सैंपल लिए गए थे और उसके सभी सैंपल कोरोना पॉजिटिव आए। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने अपने ट्विटर में उक्त मजदूर के स्वास्थ्य संबंध में जानकारी दी।

26-05-2020
Video: छत्तीसगढ़ पर मंडरा रहा टिड्डियों का खतरा, फसलों का कर देती हैं सफाया, बचाव दल बनाए गए

रायपुर। फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले टिड्डी दल का प्रकोप राजस्थान होते हुए महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश राज्य तक पहुंच गया है। सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण छत्तीसगढ़ और रायपुर सहित राजनांदगांव जिले पर भी खतरा मंडरा रहा है। केन्द्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केन्द्र के सहायक निदेशक ने सीमावर्ती जिले के कृषि अधिकारियों, कर्मचारियों और किसानों को सचेत रहने कहा है। किसान डेजर्ट एरिया के लिए कीटनाशक मालाथियोन, फेनवालरेट, क्विनालफोस और फसलों व अन्य वृक्षों के लिए क्लोरोपायरीफोस, डेल्टामेथ्रिन, डिफ्लूबेनजुरान, फिप्रोनिल, लामडासाइहलोथ्रिन कीटनाशक का प्रयोग कर सकते हैं। उपसंचालक कृषि आरएल खरे ने बताया कि टिड्डी दल शाम 6 से 9 बजे खेतों में स्वार्म करते है। इनकी गति 80-150 किलोमीटर प्रतिदिन होती है। तदनुसार कृषकों,के माध्यम से तत्काल जानकारी प्राप्त करके नियंत्रण के लिए कृषि विभाग की ओर से पूर्ण तैयारी कर ली गई है। इसके रोकथाम के लिए जिले के प्राइवेट डीलर्स के यहां प्रभावशील अनुसंशित दवाइयां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।

इधर राजनांदगांव जिले में लाखों की संख्या में टिड्डियों के समूह की दो दिन बाद आने की संभावना व्यक्त की जा रही है। टिड्डी दल की वर्तमान में अमरावती (महाराष्ट्र) व मंडला (मध्यप्रदेश) में आमद दर्ज हो गई है। टिड्डी दल के संभावित हमले को लेकर प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है। किसानों के फसलों को टिड्डी दल के हमले से बचाने के उपाय भी बताए जा रहे हैं। टिड्डी दल के हमले से बचाने के लिए कृषि वैज्ञानिक सलाह दे रहे है। राजनांदगांव जिले में टिड्डी दल के प्रकोप से बचाव के लिए कलेक्टर ने जिला स्तरीय दल का गठन किया है। कृषि विभाग के उप संचालक ने बताया कि टिड्डी दल नियंत्रण के लिए किसान दो प्रकार के साधन अपना सकते हैं। इसमें भौतिक साधन से किसान टोली बनाकर विभिन्न प्रकार के परंपरागत उपयोग शोर मचाकर, ध्यनि वाले यंत्रों को बजाकर, डराकर भगाया जा सकता है। इसके लिए ढोलक, ट्रैक्टर, मोटर साइकल का साईलेंसर, खाली टीन डब्बे, थाली इत्यादि से ध्वनि की जा सकती है।

टिड्डी दल के उपचार के लिए जिले के ट्रेक्टर स्प्रेयर धारक किसानों से चर्चा कर 20 ट्रेक्टर स्प्रेयर की व्यवस्था की जा रही है। इसके अतिरिक्त सभी छोटे स्प्रेयर वाले किसानों को फसलों के बचाव करने के लिए सभी किसानों को तैयार रहने की जानकारी दी गई है। राजनांदगांव जिले में टिड्डी दल के प्रवेश की सम्भावित चेतावनी के अनुसार पेस्टीसाइड एवं स्प्रेयर की व्यवस्था को लेकर जिले में समन्वय स्थापित करने के लिए निर्देश दिए गए है। कृषि विज्ञानियों के अनुसार, टि़ड्डियों को उनके चमकीले पीले रंग और पिछले लंबे पैरों से उन्हें पहचाना जा सकता है। टिड्डी जब अकेली होती है तो उतनी खतरनाक नहीं होती है,लेकिन, झुंड में रहने पर इनका रवैया बेहद आक्रामक हो जाता है। फसलों को एकबारगी सफाया कर देती हैं। दूर से ऐसा लगेगा, मानों आपकी फसलों के ऊपर किसी ने एक बड़ी-सी चादर बिछा दी हो। कुछ समय पहले अफ्रीकी देशों में इन्होंने फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया हैं।

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