GLIBS
24-10-2020
दशहरा मनाया जाएगा सादगी से, मैदान में 50 से ज्यादा लोग नहीं रहने का आदेश

धमतरी। हर साल की तरह इस साल भी धमतरी शहर में नगर निगम द्वारा दशहरा पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। लेकिन कोरोना संक्रमण के खतरे के कारण सारे कार्यक्रम बहुत सादगी से होंगे। कार्यक्रम स्थल रामबाग मैदान में 50 से ज्यादा लोग नहीं रहेंगे। दहन के लिए बनाए जाने वाले रावण के पुतले की ऊंचाई दस फीट से अधिक नहीं होगी। इसके अलावा घंटेभर से ज्यादा समय तक चलने वाली रामलीला भी इस बार सिर्फ पांच मिनट की ही होगी। कार्यक्रम स्थल पर सीसी कैमरे भी लगेंगे और कोविड गाइडलाइन का सख्ती के साथ पालन किया जाएगा।

रामबाग मैदान के अलावा जहां जहां दशहरा और रावण दहन के कार्यक्रम होते हैं, वहां भी इन्हीं दिशा-निर्देशों का पालन आयोजकों करना पड़ेगा। दशहरा पर्व के आयोजन की तैयारियों जायजा लेने महापौर विजय देवांगन,सभापति अनुराग मसीह,आयुक्त आशीष टिकरिहा अन्य अधिकारियों कर्मचारियों के साथ रामबाग मैदान का निरीक्षण के लिए पहुचे थे। मैदान में गाइडलाइन के अनुरूप की जा रही व्यवस्था को घूम घूमकर देखने के बाद उन्होंने आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए। इस दौरान एमआईसी सदस्य राजेश ठाकुर, केंद्र कुमार पेंदरिया, अवैश हाशमी, राजेश पांडे,ईई राजेश पदमवार, एई एसआर सिन्हा,रवि सिन्हा आदि भी मौजूद थे।

 

21-10-2020
तीन दिनों से जारी है धरना प्रदर्शन,अधिकारियों को उनकी सुध लेने की फुर्सत तक नहीं

धमतरी। राजीव ग्राम दुगली के पास वसुंधरा में रहने वाले आदिवासियों ने जमीन के पट्टे की मांग को लेकर जिला मुख्यालय धमतरी में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। शहर के रामबाग मैदान में उनका धरना प्रदर्शन पिछले तीन दिनों से जारी है, पर अधिकारियों को उनकी सुध लेने की फुर्सत नहीं मिल रही है। परिवार समेत राशन पानी लेकर धरने पर बैठे इन आदिवासियों ने बताया कि वे सभी भूमिहीन हैं और दुगली के पास वसुंधरा धोबाकछार की आबादी जमीन पर झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं और यहीं जमीन पर खेती कर गुजर बसर कर रहे हैं। काबिज जमीन के पट्टे की मांग वे वर्ष 1993 से लगातार कर रहे हैं। इस बीच 6-7 लोगों की मौत भी हो चुकी है, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उल्टे कब्जा करने के आरोप में उन्हें दो बार जेल भेजा जा चुका है।

इनमें से एक प्रकरण में अदालत से सभी बरी हो चुके हैं और दूसरा प्रकरण लंबित है। इस बीच वन विभाग और ग्रामवासियों ने तीन साल पहले उनकी झोपड़ियों को तोड़कर अंदर रखे सारे सामानों को नष्ट कर दिया था और उनके साथ मारपीट भी की थी। इस अत्याचार के बावजूद वे सभी न्याय के लिए न्यायालय के चक्कर काट रहे हैं। उनका साफ कहना है कि वे सभी पिछले 27 सालों से वसुंधरा धोबाकछार की जमीन पर काबिज हैं और इसका पट्टा हासिल करने के इंतजार में उनके साथियों की एक एककर मौत भी हो रही है। इसलिए अब पट्टा हासिल करने के लिए सभी लोग मरते दम तक संघर्ष करते रहेंगे।

 

Advertise, Call Now - +91 76111 07804