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04-06-2020
आईएनएक्स मीडिया मामला: पी.चिदंबरम को राहत,सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की सीबीआई की पुनर्विचार याचिका

नई दिल्ली। आईएनएक्स मीडिया मामले में जमानत पर रिहा कांग्रेस के वरिष्ठ्र नेता और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी.चिदंबरम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की उस समीक्षा याचिका को खारिज कर दिया,जिसमें पी.चिदंबरम की जमानत को चुनौती दी गई थी। बता दें कि सीबीआई ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट से पी.चिदंबरम के जमानत के फैसले पर फिर से विचार करने की अपील की थी। इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आईएनएक्स मीडिया धनशोधन मामले पी.चिदंबरम के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। विशेष न्यायाधीश अजय कुमार कुहार की अदालत में चिदंबरम, उनके बेटे कार्ति और अन्य के खिलाफ सोमवार को एक पासवर्ड से संरक्षित ई-आरोपपत्र दायर किया गया। इस पर विशेष न्यायाधीश ने संस्थान को निर्देश दिया कि देशव्यापी लॉकडाउन के बाद जब अदालत का कामकाज समान्य रूप से शुरू हो जाए तो आरोपपत्र को कागजी दस्तावेज के रूप में पेश किया जाए। बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय के आरोप पत्र में पी.चिदंबरम, कार्ति चिदंबरम और चार्टर्ड अकाउंटेंट एसएस भास्कररमन समेत कई लोगों के नाम भी हैं। बता दें कि 15 मई, 2017 को ईडी ने आईएनएक्स मीडिया मामला दर्ज किया था, जिसमें आईएनएक्स मीडिया पीवीटी लिमिटेड ने 4.62 करोड़ रुपये की स्वीकृत एफडीआई राशि के मुकाबले लगभग 403.07 करोड़ रुपये का विदेशी निवेश प्राप्त करने का मामला सामने आया था। ईडी ने अपनी जांच में पाया कि कंपनी की निदेशक इंद्राणी मुखर्जी और पीटर मुखर्जी, पी.चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम समेत कई अधिकारियों की मिलीभगत थी। गौरतलब है कि आईएनएक्स मीडिया केस मामले में 18 अक्टूबर को सीबीआई ने पी.चिदंबरम,उनके बेटे कार्ति चिदंबरम और उनकी दो कंपनियों समेत कुल 15 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई थी। सीबीआई ने उनकी जमानत याचिका का विरोध किया था। दिल्ली हाईकोर्ट में सीबीआई ने चिदंबरम की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि इस मामले में भ्रष्टाचार की जांच जारी है ऐसे में उन्हें जमानत न दी जाए।

 

18-12-2019
आरोपियों की अगली सुनवाई 7 जनवरी को, मोहलत पर रो पड़ीं निर्भया की मां

नई दिल्ली। दिल्ली के बसंत विहार गैंगरेप और हत्या मामले में निर्भया के माता-पिता की याचिका पर सुनवाई करते हुए पटियाला हाउस कोर्ट ने बुधवार को तिहाड़ जेल प्रशासन को निर्देश देते हुए कहा कि वो चारों दोषियों को एक नया नोटिस जारी करें। कोर्ट ने कहा कि तिहाड़ जेल प्रशासन निर्भया के दोषियों को एक हफ्ते का समय देते हुए नोटिस जारी कर पूछे कि क्या वो दया याचिका दाखिल करना चाहते हैं या नहीं। कोर्ट ने कहा कि मामले की अगली सुनवाई 7 जनवरी को होगी। सुनवाई के दौरान दोषियो को और मोहलत दिए जाने की बात सुनकर निर्भया की मां कोर्ट रूप में ही रोने लगीं।

इस पर कोर्ट ने कहा, 'हमें आपके साथ पूरी हमदर्दी है। हम जानते हैं कि किसी की मौत हो चुकी है, लेकिन दोषियों के भी कुछ अधिकार हैं। हम यहां आपकी बात सुनने के लिए ही हैं, लेकिन हम भी कानून से बंधे हुए हैं।' सुनवाई पूरी होने के बाद निर्भया की मां ने बाहर आकर मीडिया से बात करते हुए कहा, 'कोर्ट ने दोषियों को दया याचिका के लिए और मोहलत दी है। कोर्ट केवल उन लोगों के अधिकार देख रहा है, हमारे अधिकारों का क्या? इस बात की भी कोई गारंटी नहीं है कि सुनवाई की अगली तारीख पर कोई फैसला सुनाया जाएगा। मैं इस बात से खुश हूं कि सुप्रीम कोर्ट ने दोषी अक्षय की पुनर्विचार याचिका को ठुकरा दिया है।' निर्भया के पिता ने सुप्रीम कोर्ट में दोषी अक्षय की पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद कहा, 'आज सुप्रीम कोर्ट ने इस केस में दोषी अक्षय कुमार सिंह की पुनर्विचार याचिका को ठुकरा दिया है। हम अभी भी पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। जब तक पटियाला हाउस कोर्ट की तरफ से दोषियों के खिलाफ डेथ वारंट जारी नहीं होता, हम तब तक संतुष्ट नही होंगे।' बता दें कि निर्भया मामले में चारों दोषियों में से केवल अक्षय सिंह ने ही पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने ठुकरा दिया। 

 

18-12-2019
खारिज हुई निर्भया के दोषी अक्षय की पुनर्विचार याचिका, सजा-ए-मौत बरक़रार

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के निर्भया गैंगरेप मामले में दोषी अक्षय सिंह की सज़ा-ए-मौत बरकरार है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने अक्षय के वकील एपी सिंह की ओर से तमाम दलील सुनने के बाद अक्षय की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी। इससे पहले अक्षय के वकील ने कहा था कि अक्षय को मौत की सज़ा न दी जाए, यह मानवाधिकार के खिलाफ है। अक्षय की याचिका पर जस्टिस आर भानुमति, अशोक भूषण और ए एस बोपन्ना की बेंच ने सुनवाई की थी। जस्टिस भानुमति ने फैसला पढ़ते हुए कहा, ''याचिकाकर्ता ने मुकदमे पर ही सवाल उठाए। इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती। जांच में कमी की बात पर ट्रायल कोर्ट, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर चुका। रिव्यू में उन्हीं बातों की नए सिरे से सुनवाई नहीं हो सकती। दोषी यह बातें पहले भी कह चुका है। इसलिए हम ये पुनर्विचार याचिका खारिज करते हैं। बड़ी बात यह है कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट इस मामले में तीन दोषियों की पुनर्विचार याचिका खारिज कर चुका है। तब अक्षय सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर नहीं की थी। तीन दोषियों की दया याचिका खारिज करने वाली बेंच में भी जस्टिस आर भानुमति, अशोक भूषण और ए एस बोपन्ना ही शामिल थे।

सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखी थी सभी दोषियों की फांसी

बता दें कि वारदात को अंजाम देने वाले 6 लोगों में से राम सिंह की जेल में मौत हो गयी थी। एक नाबालिग दोषी बाल सुधार गृह में तीन साल बिता कर रिहा हो गया. ऐसे में निचली अदालत और हाई कोर्ट में चार लोगों पर मुकदमा चला। दोनों अदालतों ने चारों को फांसी की सज़ा दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे बरकरार रखा था। पांच मई 2017 को दिए फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, "ये घटना इस दुनिया की लगती ही नहीं। ये ऐसी दुनिया की घटना लगती है जहां इंसानियत मर चुकी हो। दोषियों की नज़र में पीड़िता इंसान नहीं, सिर्फ एक मज़े का सामान थी।"

16 दिसंबर 2012 को हुआ था निर्भया के साथ गैंगरेप

16 दिसंबर, 2012 की रात दक्षिण दिल्ली में एक चलती बस में छह लोगों ने 'निर्भया' (23) के साथ मिलकर दुष्कर्म किया था। सामूहिक दुष्कर्म इतना विभीत्स था कि इससे देशभर में आक्रोश पैदा हो गया था और सरकार ने दुष्कर्म संबंधी कानून और सख्त किए थे। छह दुष्कर्म दोषियों में से एक नाबालिग था।

 

 

03-12-2019
अयोध्या मामलाः जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने वकील राजीव धवन को से केस हटाया

नई दिल्ली। अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद में मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश होने वाले वरिष्ठ वकील राजीव धवन को जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने इस मामले से हटा दिया है। जमीयत द्वारा दाखिल की गई पुनर्विचार याचिका में राजीव धवन को वकील नहीं बनाया गया है। राजीव धवन ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर इस बारे में बताया है। उन्होंने ने फेसबुक पोस्ट पर लिखा कि मुझे ये बताया गया कि मुझे केस से हटा दिया गया है, क्योंकि मेरी तबीयत ठीक नहीं है। ये बिल्कुल बकवास बात है। जमीयत को ये हक है कि वो मुझे केस से हटा सकते हैं लेकिन जो वजह दी गई है वह गलत है। उन्होंने कहा कि अब वे इस मामले में शामिल नहीं होंगे। इस बाबत राजीव धवन ने एजाज मकबूल को एक चिट्ठी भी लिखी है। इस मामले पर वकील एजाज मकबूल ने कहा कि मुद्दा यह है कि मेरे क्लाइंट यानी की जमीयत सोमवार को रिव्यू पिटिशन दाखिल करना चाहते थे। यह काम राजीव धवन को करना था। वह उपलब्ध नहीं थे इसलिए मैं पिटिशन में उनका नाम नहीं दे पाया। यह कोई बड़ी बात नहीं है। बता दें कि सोमवार को अयोध्या रामजन्मभूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट में पहली पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई। पक्षकार एम.सिद्दीकी ने 217 पन्नों की पुनर्विचार याचिका दाखिल की। एम. सिद्दीकी की तरफ से मांग की गई कि संविधान पीठ के आदेश पर रोक लगाई जाए, जिसमें कोर्ट ने विवादित जमीन को राम मंदिर के पक्ष दिया था।

 

26-11-2019
सुन्नी वक्फ बोर्ड अयोध्या फैसले पर दायर नहीं करेगा पुनर्विचार याचिका

लखनऊ। अयोध्या मामले पर सुन्नी वक्फ बोर्ड ने मंगलवार को हुई बैठक में अहम फैसला किया है। बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं करने का निर्णय लिया है। उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ  बोर्ड की बैठक में सात में से छह सदस्य पुनर्विचार याचिका दाखिल करने के पक्ष में नहीं थे। बोर्ड के सदस्यों में से अकेले अब्दुल रज्जाक खान चाहते थे कि पुनर्विचार याचिका दाखिल की जाए। इस बैठक में सुप्रीम कार्ट द्वारा दिए गए फैसले पर विचार-विमर्श किया गया। इसके बाद बोर्ड के चेयरमैन जुफर फारुकी ने मीडिया के सामने इस बात की जानकारी दी कि फैसले का विरोध नहीं किया जाएगा। वहीं, पांच एकड़ जमीन लेने के फैसले पर बोर्ड ने कहा कि जब हमें ऑफर की जाएगी तब निर्णय लेंगे। अभी इस बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। बता दें कि इससे पहले बोर्ड अध्यक्ष ने कहा था कि यह बैठक पहले 13 नवंबर को होने वाली थी लेकिन इसे 26 तक के लिए टाल दिया गया। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने हमें सलाह दी थी कि मस्जिद के लिए जमीन न लेने से नकारात्मकता बढ़ेगी जो कि ठीक नहीं है, जबकि कुछ लोगों ने कहा कि जमीन लेकर यहां शिक्षा संस्थान और साथ में मस्जिद बनाइए।

25-11-2019
देश का आम मुसलमान पुनर्विचार याचिका के पक्ष में नहीं : गेयरुल हसन रिजवी

नई दिल्ली। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने कहा है कि अयोध्या मसले पर पुनर्विचार याचिका दायर करना मुसलमानों के हित में नहीं होगा। आयोग के अध्यक्ष गेयरुल हसन रिजवी ने रविवार को कहा कि इससे हिंदू-मुस्लिम एकता को नुकसान पहुंचेगा। रिजवी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने एक बैठक की। उसमें सभी सदस्यों ने एक स्वर में कहा कि फैसले को स्वीकार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को अयोध्या में मंदिर के निर्माण के लिए आगे आना चाहिए। वहीं हिंदुओं को मस्जिद के निर्माण में मदद करनी चाहिए। यह दोनों समुदायों में सामाजिक सौहार्द की मजबूती की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। रिजवी ने कहा कि फैसले के खिलाफ याचिका दायर करने से हिंदुओं में गलत संदेश जाएगा और ऐसा माना जाएगा कि मंदिर बनाने में मुसलमान रोड़े अटका रहे हैं। यह हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए कतई अच्छा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि पुनर्विचार याचिका इसलिए भी दाखिल नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलेमा-ए-हिंद सहित सभी पक्षों ने वादा किया था कि सुप्रीम कोर्ट जो भी फैसला देगा, उसे माना जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत जैसे मुस्लिम पक्ष अब अपने वादे से मुकर रहे हैं। वह वर्षों से कहते आ रहे हैं कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला मानेंगे, तब पुनर्विचार याचिका दायर करने की क्या जरूरत है?
 
देश का आम मुसलमान पुनर्विचार याचिका के पक्ष में नहीं

रिजवी ने इस बात पर हैरानी जताई कि जब मुस्लिम पक्षकार कह रहे हैं कि यह याचिका सौ फीसदी खारिज होगी, तब इसे दायर करने का क्या औचित्य है। भारत का आम मुसलमान पुनर्विचार याचिका के पक्ष में नहीं है, क्योंकि वह नहीं चाहता कि जो मसला हल हो गया है, उसे फिर से उठाया जाए।

17-11-2019
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड फिर जाएगा सुप्रीम कोर्ट, इस फैसले को देगा चुनौती

नई दिल्ली। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती देने का निर्णय किया है। बोर्ड के सदस्य सैयद कासिम रसूल इलियास ने इस बात की जानकारी देते हुए बताया कि बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करने का फैसला किया है। लखनऊ में हुई बोर्ड की बैठक में यह फैसला किया गया। बोर्ड ने कहा कि एक महीने में समीक्षा याचिका दायर की जाएगी। साथ ही बोर्ड ने अयोध्या में 5 एकड़ जमीन लेने से भी इनकार कर दिया है जिसका सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था। बोर्ड के सचिव जफरयाब जीलानी ने बोर्ड की वर्किंग कमेटी की बैठक में लिये गये निर्णयों की जानकारी देते हुए प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि बैठक में फैसला लिया गया है कि अयोध्या मामले पर गत नौ नवम्बर को दिये गये उच्चतम न्यायालय के निर्णय पर पुनर्विचार याचिका दाखिल की जाएगी। उन्होंने कहा कि बोर्ड का मानना है कि मस्जिद की जमीन अल्लाह की है और शरई कानून के मुताबिक वह किसी और को नहीं दी जा सकती। उस जमीन के लिये आखिरी दम तक कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। जीलानी ने कहा कि 23 दिसंबर 1949 की रात बाबरी मस्जिद में भगवान राम की मूर्तियां रखा जाना असंवैधानिक था तो उच्चतम न्यायालय ने उन मूर्तियों को आराध्य कैसे मान लिया? वे तो हिंदू धर्म शास्त्र के अनुसार भी आराध्य नहीं हो सकते। जीलानी ने यह भी बताया कि बोर्ड ने मस्जिद के बदले अयोध्या में पांच एकड़ जमीन लेने से भी साफ  इनकार किया है। बोर्ड का कहना है कि मस्जिद का कोई विकल्प नहीं हो सकता। मुस्लिम पक्षकारों ने अयोध्या मामले पर हाल में आये सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील दाखिल किये जाने की इच्छा जताते हुए शनिवार को कहा था कि मुसलमानों को बाबरी मस्जिद के बदले कोई जमीन भी नहीं लेनी चाहिये। इन पक्षकारों ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना वली रहमानी से नदवा में मुलाकात के दौरान यह ख्वाहिश जाहिर की थी। बोर्ड के सचिव जफरयाब जीलानी ने बताया था कि मौलाना रहमानी ने रविवार को नदवा में ही होने वाली बोर्ड की वर्किंग कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक से पहले रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले से जुड़े विभिन्न मुस्लिम पक्षकारों को राय जानने के लिये बुलाया था। उन्होंने बताया कि मामले के मुद्दई मुहम्मद उमर और मौलाना महफूजुर्रहमान के साथ-साथ अन्य पक्षकारों हाजी महबूब, हाजी असद और हसबुल्ला उर्फ  बादशाह ने मौलाना रहमानी से मुलाकात के दौरान कहा कि उच्चतम न्यायालय का निर्णय समझ से परे है, लिहाजा इसके खिलाफ अपील की जानी चाहिए।

14-11-2019
Breaking : सबरीमाला मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला, जारी रहेगा महिलाओं का प्रवेश

नई दिल्ली। केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के फैसले पर दाखिल की गई पुनर्विचार याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सूना दिया है। सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश जारी रहेगा। बता दें कि सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर सर्वोच्च अदालत ने पिछले साल फैसला दिया था। अदालत ने 10 से 50 साल की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की इजाजत दे दी थी, अदालत के इसी फैसले पर कई पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गई थी। गुरूवार को सुप्रीम कोर्ट कुल 65 याचिकाओं पर अपना निर्णय सुनाएगा, इनमें 56 पुनर्विचार याचिका, 4 नई याचिका और 5 ट्रांसफर याचिकाएं हैं।

इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस आर.एफ. नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा कर रहे हैं। पीठ ने 6 फरवरी को अपने फैसले को सुरक्षित रख लिया था। पुनर्विचार याचिकाओं में फैसला देते समय पांच जजों की बेंच में से 3 जजों का मानना था कि इस मामले को सात जजों की बेंच को भेज दिया जाए। लेकिन जस्टिस नरीमन और जस्टिस चंद्रचूड़ ने इससे अलग विचार रखे। अंत में पांच जजों की बेंच ने 3:2 के फैसले इसे 7 जजों की बेंच को भेज दिया।  हालांकि, सबरीमाला मंदिर में अभी महिलाओं की एंट्री जारी रहेगी। जस्टिस नरीमन ने फैसला पढ़ते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला ही अंतिम होता है। फैसला अनुपालन करना कोई विकल्प नहीं है। संवैधानिक मूल्यों की पूर्ति करना सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए।

14-11-2019
राफेल और सबरीमाला मामले में दाखिल पुनर्विचार याचिकाओं पर फैसला आज

नई दिल्ली। सबरीमाला और राफेल सौदे पर दाखिल पुनर्विचार याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट बृहस्पतिवार को फैसला सुनाएगा। सीजेआई रंजन गोगोई की नेतृत्व वाली पीठ इन दोनों अहम मामलों पर फैसला सुनाएगी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा पिछले साल 28 सितंबर को सबरीमाला मंदिर में सभी आयुवर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने वाले फैसले पर दोबारा विचार की मांग वाली 65 पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल हुईं थीं। धार्मिक संगठनों ने शीर्ष कोर्ट के फैसले को वर्षों से चली आ रही परंपरा का उल्लंघन करार देते हुए विरोध जताया था। सीजेआई के नेतृत्व वाली पांच सदस्यीय पीठ गुरूवार को इन याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाएगी।

पीठ ने इस साल छह फरवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। शीर्ष कोर्ट ने 4:1 के मत से 28 सितंबर को 10 की बच्चियों से लेकर 50 साल तक की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर प्रतिबंध को खत्म कर दिया था। वहीं 58 हजार करोड़ रुपये के 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीद मामले में मोदी सरकार को क्लीन चिट देने वाले फैसले के खिलाफ दाखिल पुनर्विचार याचिकाओं पर सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ फैसला सुनाएगी। इन याचिकाओं में कुछ पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और वकील प्रशांत भूषण की याचिकाएं भी हैं। याचिका में राफेल सौदे की एसआईटी से जांच कराने की मांग की गई थी जिसे शीर्ष कोर्ट ने पिछले साल 14 दिसंबर को खारिज कर दिया था। उसके बाद कुछ और तथ्यों के साथ पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर दिया। शीर्ष कोर्ट ने 10 मई को अपना फैसला सुरक्षित रखा था। इस पीठ में जस्टिस एसके कॉल और जस्टिस केएम जोसेफ भी शामिल हैं।

राहुल पर मानहानि मामले में भी फैसला

राफेल विवाद मामले में भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी द्वारा कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दाखिल मानहानि मामले में भी सुप्रीम कोर्ट फैसला सुना सकती है। मीनाक्षी लेखी ने पीएम नरेंद्र मोदी के लिए ‘चौकीदार चोर है’ के नारे के प्रयोग को सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जोड़ने के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल की थी।

 

13-11-2019
सुप्रीम कोर्ट 14 नवंबर को सुनाएगा सबरीमाला और राफेल मामले में  फैसला

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय सबरीमाला और राफेल सौदा मामलों में दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर गुरुवार को फैसला सुनायेगा। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर बुधवार को दो अलग-अलग नोटिस जारी करके दोनों मामलों को फैसले के लिए कल सूचीबद्ध किए जाने की जानकारी दी गई है। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की अनुमति के आदेश के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका पर फैसला सुनाएगी। संविधान पीठ में न्यायमूर्ति गोगोई के अलावा न्यायमूर्ति रोहिंगटन फली नरीमन, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति इंदू मल्होत्रा शामिल हैं। मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व वाली तीन सदस्यीय पीठ राफेल लड़ाकू विमान करार मामले की स्वतंत्र जांच न कराये जाने के फैसले के खिलाफ पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा एवं अन्य की पुनर्विचार याचिका पर फैसला देगी। इस पीठ में न्यायमूर्ति संजय किशन कौल एवं न्यायमूर्ति केएम जोसेफ शामिल हैं।

09-11-2019
पुनर्विचार याचिका पर मुस्लिम बोर्ड की बैंठक के बाद करेंगे फैसला : जफरयाब जिलानी

नई दिल्ली। अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष के वकील जफरयाब जिलानी ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। मुस्लिम पक्ष की ओर से पीसी करते हुए जिलानी ने कहा कि फैसले के बाद शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखें। यह किसी की जीत या हार नहीं है। हम आगे की कार्रवाई पर फैसला लेंगे। हालांकि फैसला हमारी उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा। उन्होंने आगे कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का कार्यकारी बोर्ड की बैठक के बाद फैसला लिया जाएगा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस पर पुनर्विचार याचिका दाखिल की जाए या नहीं। हालांकि अभी के आधार पर मुझे लगता है कि पुनर्विचार याचिका दाखिल की जानी चाहिए।

 

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