GLIBS
01-05-2020
कोर्ट में वीडियो कान्फ्रेसिंग के जरिए हुई न्यायालयीन प्रकरणों की सुनवाई 

दुर्ग। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के दिशा निर्देश के अनुसार और जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्ग जीके मिश्रा के मार्गदर्शन एवं दिशा निर्देश में द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रामजीवन देवांगन, शुभ्रा पचौरी, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम फास्ट ट्रेक स्पेशल कोर्ट दुर्ग, गरिमा शर्मा, चतुर्थ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्ग के द्वारा न्यायालयीन प्रकरण की सुनवाईं वीडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से की गई। विडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से की गई जमानत प्रकरण की सुनवाई में पैरवी किये जाने वाले अधिवक्ता अपने आफिस से मोबाईल के माध्यम से जुड़े हुए थे तथा शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता भी अपने मोबाइल के माध्यम से जुड़े हुए थे। दोनों पक्षों के तर्क सुना गया और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए जमानत आवेदन की सुनवाई पूर्ण कर निराकरण किया गया।

29-02-2020
भूपेश बघेल ने कानूनी सलाह देने के लिए निःशुल्क हेल्प लाइन का किया शुभारंभ

रायपुर। छत्तीसगढ़ में आज एक नया इतिहास रचा गया, जब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने देश की पहली निःशुल्क ’नालसा’ विधिक सहायता हेल्प लाईन नम्बर 15100 का शुभारंभ किया। जिला न्यायालय परिषद रायपुर के परिसर में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय विधिक सहायता प्राधिकरण (नालसा) की इस हेल्प लाईन की शुरूआत की गई। यह हेल्प लाईन कानूनी सलाह देने के लिए पूरी तरह से निःशुल्क हेल्प लाईन होगी। मुख्यमंत्री ने न्यायालय परिसर में एडीआर भवन और न्याय सदन का भूमिपूजन भी किया। सर्व सुविधायुक्त एडीआर (आल्टरनेटिव डिस्प्यूट रिसालुशन) भवन का निर्माण 2 करोड़ 42 लाख रूपए की लागत से और न्याय सदन का निर्माण एक करोड़ 28 लाख रूपए की लागत से किया जाएगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति न्यायमूर्ति पीआर रामचंद्र मेनन ने की। छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के कार्यपालक अध्यक्ष और छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा एवं न्यायमूर्ति गौतम भादुड़ी विशेष अतिथि के रूप में कार्यक्रम में उपस्थित थे। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर के संयुक्त तत्वाधान में कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री बघेल और मुख्य न्यायाधीश मेनन ने हेल्प लाईन नम्बर पर फोन लगाकर बात की और हेल्प लाईन के शुभारंभ के लिए बधाई दी।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि देश की पहली नालसा विधिक सहायता हेल्प लाईन की शुरूआत छत्तीसगढ़ से हो रही है, यह हमारे लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि जरूरतमंद लोगों को जल्द, सस्ता और सुलभ न्याय दिलाने में यह हेल्प लाईन बड़ी मददगार होगी। सीएम बघेल ने कहा कि इस हेल्प लाईन की जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार के विज्ञापनों में भी इसका प्रचार-प्रसार किया जाएगा। उन्होंने न्यायिक प्रशासन में रिक्त पदों की पूर्ति के लिए भी राज्य शासन के स्तर से उचित पहल का आश्वासन दिया। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति न्यायमूर्ति पीआर रामचंद्र मेनन ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि यह विधिक सहायता हेल्प लाईन गरीबों में सबसे गरीब जरूरतमंद लोगों के लिए प्रारंभ की गई है। इसका लाभ अधिक से अधिक लोग उठा सके इसके लिए जरूरी है कि प्रिंट और विजुअल मीडिया और सिनेमा के माध्यम से इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। जिससे लोग इस हेल्प लाईन के प्रति जागरूक हो सके और इस सुविधा का अधिक से अधिक लाभ उठा सके। उन्होंने रिक्त पदों की पूर्ति की ओर भी मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित किया। न्यायमूर्ति मेनन ने कहा कि न्यायिक मामलों के त्वरित निराकरण के लिए न्यायिक सेवा के अधिकारी और अधिवक्ता प्राथमिकता तय कर लोगों को त्वरित न्याय दिलाने की पहल करें। छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के कार्यपालक अध्यक्ष और छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा एवं न्यायमूर्ति गौतम भादुड़ी और अमन सत्या कचरू ट्स्ट के संस्थापक प्रोफेसर  राजेन्द्र कचरू ने भी कार्यक्रम को सम्बोधित किया। जिला न्यायाधीश और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर के अध्यक्ष राम कुमार तिवारी ने स्वागत भाषण दिया और कार्यक्रम की रूपरेखा पर प्रकाश डाला।  

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के निर्देश पर रायपुर में प्रारंभ की गई यह विधिक सहायता हेल्प लाईन भारत की पहली समेकित और प्रतिनिधित्व प्रणाली पर आधारित निःशुल्क विधिक सहायता हेल्प लाईन है, जिसकी मदद लेने वाले सभी व्यक्तियों को बेहतर ढ़ंग से विधिक सलाह और सहायता उपलब्ध करायी जाएगी। यह हेल्प लाईन प्रदेश के अन्य सभी हेल्प लाईन नंबर और विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर जरूरतमंद लोगों को यथाशीघ्र सहायता उपलब्ध कराएगी। यह हेल्प लाईन वर्तमान में सखी वन स्टॉप सेंटर और 181 महिला हेल्प लाईन के साथ संयोजित है और उनके द्वारा उपलब्ध सुविधा एवं सेवा लोगों को तुरंत उपलब्ध करायी जा सकती है। प्रस्तावित एडीआर भवन और न्याय सदन का निर्माण हो जाने के बाद न्यायालय आने वाले पक्षकारों को अतिरिक्त सुविधाएं उपलब्ध हो सकेगी। ‘न्याय सदन’ में निःशुल्क विधिक सेवा व सलाह एवं सहायता, लोक अदालत का आयोजन, विभिन्न प्रकार के विधिक साक्षरता शिविर आदि आयोजित किए जा सकेंगे। इस बिल्ड़िग में गरीब, असहाय, मजदूर वर्ग, तथा समाज के पिछड़ा वर्ग के लोगों के लिए तथा दूर-दराज से आने वालों लोगों के लिए रात्रिकालीन रहने की व्यवस्था रहेगी।कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के सदस्य सचिव  सिद्धार्थ अग्रवाल ने आभार प्रकट किया। इस अवसर पर जिला न्यायालय रायपुर के न्यायाधीश, अधिवक्ता व कर्मचारीगण तथा नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

 

28-02-2020
29 फरवरी से शुरू होगी कानूनी सलाह देने के लिए हेल्प लाईन नंबर

रायपुर। भारत की पहली निःशुल्क लीगल एड हेल्प लाईन नंबर 15100 जिला न्यायालय परिसर रायपुर में 29 फरवरी को प्रारंभ होगी। यह हेल्प लाईन कानूनी सलाह देने के लिए पूरी तरह से निःशुल्क हेल्प लाईन होगी। जिला न्यायालय में प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति न्यायमूर्ति पीआर रामचंद्र मेनन, छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के कार्यपालक अध्यक्ष और छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा एवं न्यायमूर्ति गौतम भादुड़ी द्वारा इस हेल्प लाईन को प्रारंभ किया जाएगा। साथ ही न्यायालय परिसर में एडीआर भवन और न्याय सदन का भूमि पूजन किया जाएगा। जिला न्यायालय परिसर रायपुर में यह कार्यक्रम प्रातः 10 बजे प्रारंभ होगा। इस कार्यक्रम में रायपुर जिला न्यायालय के समस्त न्यायाधीश, अधिवक्ता, अधिकारी, कर्मचारी उपस्थित रहेंगे। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर के संयुक्त तत्वाधान में कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के निर्देश पर रायपुर में प्रारंभ हो रही यह हेल्प लाईन भारत की पहली समेकित और प्रतिनिधित्व प्रणाली पर आधारित निःशुल्क विधिक सहायता हेल्प लाईन है, जिसकी मदद लेने वाले सभी व्यक्तियों को बेहतर ढ़ंग से विधिक सलाह और सहायता उपलब्ध करायी जाएगी। यह हेल्प लाईन प्रदेश के अन्य सभी हेल्प लाईन नंबर और विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर जरूरतमंद लोगों को यथाशीघ्र सहायता उपलब्ध कराएगी। यह हेल्प लाईन वर्तमान में सखी वन स्टॉप सेंटर और 181 महिला हेल्प लाईन के साथ संयोजित है और उनके द्वारा उपलब्ध सुविधा एवं सेवा लोगों को तुरंत उपलब्ध करायी जा सकती है। प्रस्तावित एडीआर भवन और न्याय सदन का निर्माण हो जाने के बाद न्यायालय आने वाले पक्षकारों को अतिरिक्त सुविधाएं उपलब्ध हो सकेगी। ‘न्याय सदन’ में निःशुल्क विधिक सेवा व सलाह एवं सहायता, लोक अदालत का आयोजन, विभिन्न प्रकार के विधिक साक्षरता शिविर आदि आयोजित किए जा सकेंगे। इस बिल्डि़ग में गरीब, असहाय, मजदूर वर्ग, तथा समाज के पिछड़ा वर्ग के लोगों के लिए तथा दूर-दराज से आने वालों लोगों के लिए रात्रिकालीन रहने की व्यवस्था रहेगी।


     

25-12-2019
राष्ट्रीय लघु फिल्म समारोह व प्रतियोगिता, सीजन-3 का आयोजन 15 और 16 फरवरी को

रायपुर। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के कार्यपालक अध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायाधीश प्रशांत कुमार मिश्रा के निर्देश पर 15 एवं 16 फरवरी 2020 को कानूनी जागरूकता पर आधारित फिल्मों का राष्ट्रीय लघु फिल्म समारोह व प्रतियोगिता (शूट फॉर लीगल अवेयरनेस 2020 सीजन-3) का आयोजन बिलासपुर में किया जा रहा है। उक्त आयोजन के लिए देश भर से शॉर्ट फिल्म की प्रविष्टियां मंगाई जाएगी। उक्त आयोजन में गत वर्ष 116 से ज्यादा शॉर्ट फिल्म प्राप्त हुई थी। उक्त महत्वपूर्ण जानकारी प्रेसक्लब रायपुर में आयोजित पत्रकारवार्ता में विधिक सेवा प्राधिकरण के रायपुर के सचिव उमेश कुमार उपाध्याय एवं सिद्धार्थ अग्रवाल सदस्य सचिव छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर ने संयुक्त रूप से दी। पत्रकारवार्ता में वार्ताकारों ने बताया कि हमारे देश में कानून का राज है। ऐसे में हर व्यक्ति को कानून की जानकारी देने का प्रयास प्राधिकरण द्वारा किया जा रहा है। लघु फिल्मों के माध्यम से आम लोगों को कानून के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से ही उक्त लघु फिल्मों का उत्सव आयोजित किया जाता है। विगत दो आयोजनों में शॉर्ट फिल्मों के जरिए लोगों में विधिक ज्ञान का प्रचार-प्रसार किया गया है। इस वर्ष शॉर्ट फिल्मों के निर्माण के लिए दिए गए विषयों में मानव तस्करी, बच्चों के अधिकार-बाल श्रम/बाल शिक्षा, नशा उन्मूलन एवं नशा पीडि़तों का पुर्नवास एवं सायबर क्राइम से संबंधित फिल्मों के जरिए समाज एवं विद्यार्थियों के बड़े हिस्से को विधिक ज्ञान से सम्पन्न बनाने के लिए प्रविष्टियां मंगाई गई हैं। अग्रवाल एवं उपाध्याय ने बताया कि सुपर शॉर्ट्स फिल्म की अवधि 45 सेंकड होगी। उक्त श्रेणी में विषयों की बाध्यता नहीं होगी। फिल्मों का निर्माण भारतीय भाषाओं, छत्तीसगढ़ी एवं अंग्रेजी में स्वीकार किया जाएगा। प्रविष्टियां भेजने की अंतिम तिथि 31 जनवरी 2020 तय की गई है। फिल्में भेजने के लिए पंजीयन 29 दिसंबर 2019 से प्रारंभ होगा। 

 

12-12-2019
Breaking : आरक्षक भर्ती से हटी रोक, हाईकोर्ट ने ख़ारिज की याचिकाएं

बिलासपुर। आरक्षकों के 2259 पदों पर होने वाली भर्ती पर लगी रूक को हाईकोर्ट ने हटा दिया है। इस मामले में 30 से ज्यादा लोगों ने भर्ती को रोकने के लिएहाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थी। इन सभी याचिकाओं को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया है। 

11-12-2019
अजीत जोगी जाति मामले में हाईकोर्ट ने हाई पावर कमेटी से मांगी जानकारी

रायपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की जाति के मामले में हाई पावर कमेटी से लिखित में सारे दस्तावेज पेश करने के बारे में जानकारी देने को कहा है। जोगी की याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति आरसीएस सामंत ने मंगलवार को इस मामले में जोगी के अधिवक्ता राहुल त्यागी की इस आपत्ति के बाद यह आदेश दिया कि हाई पावर कमेटी के पूरे रिकॉर्ड उन्हें दिए नहीं गए हैं, रिपोर्ट से कई चीजें गायब हैं। इस दौरान त्यागी एवं महाधिवक्ता सतीश चंद्र मिश्रा के बीच जोरदार नोकझोंक और कहासुनी भी हुई अदालत ने कहा कि सोमवार तक सरकार पुनः सोच समझकर लिखित में अदालत को बताएं कि उसने सभी रिकॉर्ड प्रस्तुत किए हैं या नहीं। 

30-10-2019
पदोन्नति आरक्षण रोस्टर में संशोधन के संबंध में राज्य शासन ने जारी किए निर्देश

रायपुर। राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा आज यहां मंत्रालय (महानदी भवन) से छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा छत्तीसगढ़ लोक सेवा (पदोन्नति) नियम-2003 के अपास्त किए गए नियम-5 के स्थान पर प्रतिस्थापित नए नियम-5 एवं नियम-9 की अनुसूची-3 में निर्धारित 100 बिन्दु आरक्षण रोस्टर में संशोधन संबंधी अधिसूचना के संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं।  जारी निर्देशानुसार प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों के लिए निर्धारित 100 बिन्दु मॉडल आरक्षण रोस्टर को भी संशोधित आरक्षण के अनुसार संशोधित किया गया है। राजपत्र में प्रकाशित 22 अक्टूबर 2019 द्वारा छत्तीसगढ़ लोक सेवा पदोन्नति नियम-2003 में न्यायालय द्वारा अपास्त किए गए नियम-5 के स्थान पर नया नियम-5 प्रतिस्थापित किया गया है। संशोधित नियम-5 में पदोन्नति में अनुसूचित जाति को 13 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति के लिए 32 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा शासन के समस्त विभाग प्रमुखों से कहा गया है कि संशोधित पदोन्नति नियम-5 के अनुसार पदोन्नति की कार्यवाही करने के पूर्व विभाग द्वारा प्रत्येक संवर्ग में पूर्व में संधारित किए जा रहे आरक्षण रोस्टर में वर्तमान में कार्यरत अधिकारियों-कर्मचारियों के नाम नए आरक्षण रोस्टर में उसी क्रम में उनके प्रवर्ग के बिन्दुओं पर अंतरित कर लिए जाए। नए आरक्षण रोस्टर में नाम अंतरण के दौरान कोई भी अनारक्षित बिन्दु रिक्त नहीं रखा जाए। अनारक्षित रिक्त बिन्दु के विरुद्ध आरक्षित प्रवर्ग के आगामी अधिकारी-कर्मचारी का नाम दर्शाया जाए एवं ऐसे आरक्षित प्रवर्ग के अधिकारियों-कर्मचारियों को भविष्य में उनके प्रवर्ग के अधिकारी-कर्मचारी की पदोन्नति, सेवानिवृत्ति या अन्य कारण से रिक्त होने वाले बिन्दु के विरुद्ध समायोजित किया जाए। अधिकारियों-कर्मचारियों के नाम नए रोस्टर में अंतरित होने के पश्चात ही नए रोस्टर के आगामी रिक्त बिन्दु से पदोन्नति की आगामी कार्यवाही संशोधित 'छत्तीसगढ़ लोक सेवा (पदोन्नति) नियम-2003' के प्रावधानों के अनुसार की जाए।
 

23-10-2019
15 दिन के भीतर एनआईए को सौंपें भीमा मंडावी के मौत की फाइल  

रायपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने नक्सली हमले में मारे गए भाजपा विधायक भीमा मंडावी की फाइल 15 दिन के भीतर एनआईए को सौंपने का आदेश दिया है। बता दें कि अपने विधायक की मौत के बाद भारतीय जनता पार्टी ने इसकी जांच  सीबीआई से कराने की मांग की थी। चूंकि राज्य में सीबीआई जांच पर प्रतिबंध है इसलिए केन्द्र सरकार ने 17 मई को एनआईए को जांच का आदेश दिया था। इधर राज्य सरकार ने केन्द्र सरकार को पत्र लिखकर एनआईए जांच पर फिर से विचार करने का आग्रह इस आधार पर किया था कि  मामले में विशेष न्यायिक आयोग का गठन कर जांच कराई जा रही है। उधर एनआईए मामला फाइल कर राज्य सरकार से भीमा मंडावी की मौत से जुड़ी फाइल मांग रही थी। सरकार ने वह फाइल  आयोग द्वारा जांच किये जाने की वजह से एनआईए को नहीं सौंपी थी। एनआईए ने इस पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में राज्य सरकार के खिलाफ  याचिका दाखिल की थी। जस्टिस आरसी सामन्त की बेंच ने याचिका की सुनवाई करते हुए 15 दिन के भीतर एनआईए को फाइल सौंपे जाने का आदेश सरकार को दिया है। ज्ञात हो कि दंतेवाड़ा में लोकसभा चुनाव के दौरान माओवादियों ने विधायक भीमा मंडावी के काफिले पर ब्लास्ट कर दिया था। इस हमले में विधायक भीमा मंडावी सहित पांच पुलिस के पांच जवानों की मौत हो गई थी। भाजपा ने इसे राजनीतिक षडय़ंत्र करार दिया था। 

 

25-02-2019
जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू को दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर

महासमुंद। जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू का प्रथम आधिकारिक दौरा महासमुंद में सोमवार को हुआ। उन्होंने महासमुंद में स्थापित जिला एवं सत्र न्यायालय भवन का निरीक्षण किया तथा प्रत्येक न्यायालय के कामकाजों की समीक्षा की। उन्हें स्थानीय सर्किट हाउस में गार्ड ऑफ आनर दिया गया। उनके साथ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार संजय जायसवाल का भी आगमन हुआ। निरीक्षण बाद जस्टिस श्री साहू ने महासमुंद के अधिवक्ताओं के साथ व्यक्तिगत मुलाकात की और उन्होंने न्यायालय से संबंधित समस्याओं के बाबत जानकारी ली। उनसे मुलाकात के लिए पिथौरा, बसना तथा सरायपाली के अधिवक्ता भी उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि जस्टिस श्री साहू छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में व्यवसाय कर रहे थे, वे जून 2018 में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में अधिवक्ता से सीधे न्यायाधीपति के पद पर पदासीन हुए।

20-02-2019
पुलिस विभाग में आरक्षकों के पदोन्नति के लिए जारी विज्ञापन पर रोक

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने पुलिस विभाग में आरक्षकों की पदोन्नति के लिए जारी विज्ञापन पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति पी सैम कोशी की एकलपीठ याचिकाकर्ता शरद कुमार सिंह एवं अन्य की याचिका पर मंगलवार को सुनवाई के बाद आरक्षकों की पदोन्नति के लिए जारी विज्ञापन पर रोक लगाने के आदेश दिए। न्यायालय ने राज्य सरकार से भी इस संबंध में अपना जवाब पेश करने के लिए कहा है। राज्य सरकार ने गत जनवरी में आरक्षकों की पदोन्नति को लेकर विज्ञापन जारी किया था। याचिका में कहा गया है कि पिछली सरकार ने वर्ष 2018 में विज्ञापन जारी कर पदोन्नति के लिए इच्छुक आरक्षकों की परीक्षा ली थी, जिसका अभी तक परिणाम घोषित नहीं किया गया है।

07-12-2018
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री में स्टेनोग्राफर के पदों पर भर्ती, लिखित और कौशल परीक्षा 16 दिसम्बर को

रायपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर की रजिस्ट्री में स्टेनो ग्राफर एवं स्टेनोग्राफर (द्विभाषी) के पदों पर भर्ती के लिए 16 दिसम्बर 2018 को लिखित परीक्षा और कौशल परीक्षा आयोजित की गई है। इन दोनों पदों के लिए लिखित परीक्षा 16 दिसम्बर को सुबह 9 बजे से 10 बजे तक तथा कौशल परीक्षा उसी दिन सुबह 10.45 बजे से होगी। दोनों परीक्षाएं छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी उच्च न्यायालय परिसर बोदरी बिलासपुर में ली जाएंगी। पात्र एवं अपात्र अभ्यर्थियों की सूची, परीक्षा पद्धति तथा परीक्षा की सूचना उच्च न्यायालय की वेबसाईट (www.cghighcourt.nic.in) पर अपलोड कर दी गई है।          

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के रजिस्टार (विजिलेन्स) चेयरमैन, सब-कमेटी से प्राप्त जानकारी के अनुसार इन दोनों परीक्षाओं के पात्र अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्र लिखित परीक्षा और मौखिक परीक्षा की तिथि के एक सप्ताह पूर्व उच्च न्यायालय की वेबसाईट पर अपलोड कर दिया जाएगा। आवेदक अपना प्रवेश पत्र उच्च न्यायालय की वेबसाईट से डाउनलोड कर सकते हैं, जो अभ्यर्थियों की लिखित एवं कौशल परीक्षा के लिए अधिकृत प्रवेश पत्र होगा। इस संबंध में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी अभ्यर्थी को अन्य किसी माध्यम से प्रवेश पत्र जारी नहीं किया जाएगा।

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