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11-09-2020
चौपाल सहित फल,अनाज व सब्जियों की रंगोली और चित्रकारी से समझाया जा रहा सुपोषण का महत्व

रायपुर। बच्चे, गर्भवती व शिशुवती महिलाओं को कुपोषण से निजात दिलाने के लिए राज्य शासन नए-नए प्रयास कर रही है। सुपोषण के बारे मे जागरुकता लाने और बच्चों, महिलाओं को कुपोषण से बचाने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विशेष निर्देश दिए हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान सुपोषण के बारे में जागरुकता लाने के लिए गांवो मे सुपोषण चौपाल लगाई जा रही है। सुपोषण चौपाल में लोगों को पौष्टिक आहार का महत्व बताने के साथ चित्रकारी, स्लोगन और रंगोली से भी संदेश दिया जा रहा है। कोरोना महामारी के दौर मे कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही है।

सुपोषण चौपाल में अभिभावकों को विभिन्न पौष्टिक आहारों का महत्व के साथ-साथ उसके सेवन करने के तरीके को भी बताया जा रहा है। इसके साथ ही स्थानीय फल, सब्जियों और अनाज में मौजूद पोषक तत्वों के बारे में बताया जा रहा है। मौसमी फलों के उपयोग की भी जानकारी दी जा रही है। महिलाओं को बच्चों के शुरुआती 1 हजार दिन तक विशेष देखभाल और स्तनपान के महत्व को बताया जा रहा है। आंगनबाड़ी केन्द्रों में फल,अनाज और सब्जियों से बनाई रचनात्मक चित्रकारी से बच्चों के साथ बड़े भी रूचि लेकर सुपोषण का महत्व समझ रहे हैं। केन्द्र के साथ साथ कार्यकर्ताओं और समूह की महिलाओं की ओर से अपने घरों मे पोषण संबंधी आकर्षक रंगोली और चित्रकारी बनाई जा रही है। इससे महिलाओं और बच्चों मे सुपोषण के बारे मे जागरुकता आ रही है।

 

11-09-2020
सुपोषण का महत्व समझाने दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में पहुंच रहे पोषण रथ

रायपुर। जागरुकता और सही पोषण के प्रति जानकारी के अभाव के कारण कुपोषण एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है। इसके प्रति जनजागरुकता के लिए राष्ट्रीय पोषण माह 2020 का आयोजन किया जा रहा है। इस माह के दौरान छत्तीसगढ़ में पोषण रथ गांव-गांव पहुंचकर लोगों को सुपोषण का महत्व समझाा रहे हैं। रायपुर,बालोद सहित दंतेवाड़ा,बलरामपुर,कोरबा जैसे दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में ये रथ ऑडियो के माध्यम से पोषण और स्वच्छता का संदेश पहुंचा रहे हैं। पोषण रथ के माध्यम से राज्य शासन की सुपोषण संबंधी योजनाओं और महत्वपूर्ण जानकारियों का प्रचार किया जा रहा है। पोषण रथ से बच्चे के पहले 1 हजार दिवस में सही पोषण के महत्व का संदेश गांव-गांव में समझाया जा रहा है। इस दौरान एनिमिया, डायरिया, स्वच्छता तथा पौष्टिक आहार, साफ-सफाई पर आधारित संदेशों का भी प्रचार किया जा रहा है।

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