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16-09-2020
फूलोदेवी नेताम ने केन्द्रीय इस्पात मंत्री को लिखा पत्र, नगरनार स्टील प्लांट के संबंध में पुनर्विचार करने किया आग्रह

रायपुर। सांसद फूलोदेवी नेताम ने नगरनार इस्पात संयंत्र के संबंध में इस्पात मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को पत्र लिखा है। सांसद ने लिखा है कि, भारत सरकार इस्पात मंत्रालय के अधीन नवरत्न सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम एनएमडीसी लिमिटेड की ओर से लगभग 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की लागत पर बस्तर में नगरनार स्टील प्लांट लगाया जा रहा है। अभी यह प्रोजेक्ट पूरा भी नहीं हुआ है, लेकिन केन्द्र सरकार ने बस्तर के इस स्टील प्लांट का निजीकरण करने का निर्णय कर लिया है।

यह अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है कि, छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचल में सार्वजनिक क्षेत्र के प्रस्तावित स्टील प्लांट का निजीकरण किया जा रहा है। इससे लाखों आदिवासियों की उम्मीदों और आकांक्षाओं को गहरा आघात पहुंचा है। आदिवासी समुदाय आंदोलित हो रहे हैं। सांसद ने सरकार से आग्रह किया है कि, केन्द्र सरकार नगरनार स्टील प्लांट के निजीकरण के निर्णय पर पुन: विचार करें और इसे सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम के रूप में ही बनाए रखा जाए।

27-08-2020
भूपेश बघेल ने कहा-नगरनार स्टील प्लांट के निजीकरण के निर्णय पर पुनर्विचार करें केंद्र सरकार

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने बस्तर के नगरनार स्टील प्लांट के निजीकरण के निर्णय पर पुनः विचार करने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री बघेल ने पत्र में लिखा है कि, इस औद्योगिक इकाई के शुभारंभ होने से क्षेत्र में हजारों लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर उपलब्ध होने की संभावनाओं से गौरान्वित महसूस कर रहे थे। विगत दिनों जानकारी प्राप्त हुई है कि केन्द्र सरकार बस्तर के नगरनार स्टील प्लांट को निजी लोगों के हाथों में बेचने की तैयारी में है। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण होगा कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचल में सार्वजनिक क्षेत्र के प्रस्तावित स्टील प्लांट का निजीकरण किया जाए। केन्द्र सरकार के इस कदम से लाखों आदिवासियों की उम्मीदों और आकांक्षाओं को गहरा आघात पहुंचेगा। भारत सरकार के इस प्रकार फैसले से आदिवासी समुदाय आंदोलित हो रहे हैं। इनके मध्य शासन-प्रशासन के विरुद्ध असंतोष की भावना व्याप्त हो रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री को लिखा कि, आप इस बात से भली-भांति अवगत होंगे कि राज्य शासन काफी अथक प्रयासों से नक्सल गतिविधियों पर अंकुश लगाने में सफल हुई है। इन परिस्थितियों में नगरनार स्टील प्लांट का निजीकरण होने से नक्सलियों की ओर से आदिवासियों के असंतोष का अनुचित लाभ उठाने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने अवगत कराया है कि नगरनार स्टील प्लांट के लिए लगभग 610 हेक्टेयर निजी जमीन अधिग्रहित की गई है, जो ’सार्वजनिक प्रयोजन’ के लिए ली गई है।

इसके साथ ही नगरनार स्टील प्लांट में लगभग 211 हेक्टेयर सरकारी जमीन आज भी छत्तीसगढ़ शासन की है। इसमें से केवल 27 हेक्टेयर जमीन 30 वर्षों के लिए सशर्त एनएमडीसी को दी गई है, बाकी पूरी शासकीय जमीन छत्तीसगढ़ शासन के स्वामित्व की है और राज्य शासन ने जो जमीन उद्योग विभाग को हस्तांतरित की है। उसकी पहली शर्त यही है कि उद्योग विभाग की ओर से भूमि का उपयोग केवल एनएमडीसी स्टील प्लांट स्थापित किए जाने के प्रयोजन के लिए ही करेगी। मुख्यमंत्री बघेल ने यह भी अवगत कराया है कि विगत माह ही राज्य शासन की ओर से एनएमडीसी का बैलाडिला स्थित 4 लौह अयस्क के खदानों को आगामी 20 वर्ष की अवधि के लिए विस्तारित किया गया है। इससे कि बस्तर क्षेत्र में रोजगार के नित नए अवसर सृजित होते रहें। इस क्षेत्र के चहुंमुखी विकास को बढ़ावा मिले और यहां की जनता विकास की मुख्य धारा से जुड़ सकें। मुख्यमंत्री बघेल ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है कि,केन्द्र सरकार निर्णय पर पुनः विचार करें और इसे सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम के रूप में यथावत प्रारंभ कर कार्यरत रहने दें। ताकि बस्तर क्षेत्र के आदिवासियों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में आधारभूत मदद मिल सके।

 

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