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13-01-2021
स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने निजी स्कूलों को जारी किए 101 करोड़ रुपए

रायपुर। स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत बुधवार को प्रदेश के 4 हजार 473 निजी स्कूलों के शिक्षण शुल्क की प्रतिपूर्ति राशि 101 करोड़ रुपए जारी किए हैं। यह राशि सीधे उनके खाते में आनलाइन ट्रांसफर की गई है। विभाग के अधिकारियों ने कहा कि छत्तीसगढ़ ऐसा पहला राज्य है जहां सिर्फ कोरोना काल में 51,985 बच्चों को प्रवेश दिलाकर व्यवस्थित तरीके से ऑनलाइन राशि भेजी गई है। अब तक शिक्षा के अधिकार के तहत 33 लाख 65 हजार 552 विद्यार्थी लाभांवित हुए हैं।शिक्षा के अधिकार के मामले में छत्तीसगढ़ के इस मॉडल को ओडिशा, झारखंड और आसाम राज्यों में भी अपनाया जा रहा है। स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पहली बार शिक्षा के अधिकार की राशि ऑनलाइन स्कूलों को प्रदान की गई है। लंबे समय से यह मांग बार बार आ रही थी कि निजी स्कूलों में शिक्षा के अधिकार के तहत आने वाले वंचित वर्ग के बच्चों की फीस समय पर नहीं मिल पा रही है। इसलिए राशि राज्य से सीधे खाते में भुगतान की व्यवस्था की गई है। इस पहल से पूरी व्यवस्था पारदर्शी होगी। उन्होंने बताया कि कोरोना काल के बावजूद वर्तमान शैक्षणिक सत्र में जनवरी 2021 की स्थिति में 51 हजार 985 बच्चे प्रवेश ले चुके हैं। वर्ष 2019. 20 में प्रदेश के निजी विद्यालयों को शिक्षण स्कूल की प्रतिपूर्ति के लिए भुगतान योग्य 5 हजार 403 विद्यालय थे। इनमें से 759 विद्यालयों ने कोई दावा नहीं किया। 16 ऐसे विद्यालय हैं, जिनका बैंक विवरण नहीं हैं। 143 विद्यालयों का बैंक खाता व्यक्ति विशेष के नाम से हैं। परीक्षण के बाद वास्तविक भुगतान योग्य विद्यालयों की संख्या 4 हजार 473 है। वर्ष 2018.19 एवं 2019.20 के शेष भुगतान के लिए आवश्यक राशि 7 करोड़ 67 लाख 455 रूपए है। वर्ष 2020.21 में 51 हजार 985 बच्चों ने प्रवेश लिया। शिक्षा के अधिकार के तहत अध्ययनरत छात्रों की संख्या 33 लाख 65 हजार 552 है। वर्ष 2020.21 के लिए आवश्यक राशि 159 करोड़ रुपए हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री के आवास कार्यालय में कार्यक्रम के दौरान संचालक लोक शिक्षण एवं समग्र शिक्षा के प्रबंध संचालक जितेन्द्र कुमार शुक्ल, कार्यक्रम के सहायक संचालक व नोडल अधिकारी अशोक कुमार बंजारा, सहायक संचालक प्रशांत पाण्डेय, बैंक के अधिकारी और इन्डस एक्शन संस्था के पदाधिकारी उपस्थित थे।

 

15-09-2020
प्रदेश सरकार निजी स्कूलों के लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही : बृृजमोहन अग्रवाल

रायपुर। भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने प्रदेश के निजी स्कूलों के बच्चों को स्कूल प्रारंभ होने के 5 माह बाद भी निशुल्क पुस्तक उपलब्ध नहीं होने को  गंभीर लापरवाही बताया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि, प्रदेश सरकार निजी स्कूलों के लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। उन्होंने पूछा है कि क्या प्रदेश के निजी स्कूलों के बच्चे इस प्रदेश के बच्चे नहीं। बृजमोहन ने कहा है कि, शासकीय स्कूल के भी 50 प्रतिशत बच्चों को अभी तक पुस्तक नहीं मिल पाई है। जब कोरोना काल में स्कूल ही नहीं खुल रहे हैं और ऑनलाइन पढ़ाई की बात की जा रही है, तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि, बिना पुस्तक के ऑनलाइन पढ़ाई कैसे हो रही होगी। बच्चे क्या पढ़ रहे होंगे। शासकीय व अशासकीय छोटे-छोटे स्कूलो में पढ़ रहे गरीब बच्चों के पालक इस कोरोना काल में जब आर्थिक मार से गुजर रहे है बाजार से पुस्तक कैसे खरीद पाएंगे।

अग्रवाल ने कहा है कि, प्रदेश में स्कूली बच्चों को निशुल्क पुस्तकों का वितरण की ओर कोई देखने वाला भी नही है। कोई मॉनिटरिंग का सिस्टम नहीं है। डिपों में पुस्तकें पड़ी हुई है, जहां से स्कूलों को पुस्तक वितरण ही नहीं किया जा रहा है। स्कूलों के संचालक लगातार विभाग व डिपो के चक्कर काटते-काटते थक चुके हैं। अभी भी सितंबर माह में स्कूलों से दुबारा दर्ज संख्या मांगी जा रही है। पुस्तक वितरण की बात तो दूर अभी विभाग दर्ज संख्या को लेकर ही उलझी हुई है और लाखों विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। अग्रवाल ने कहा कि, यह स्थिति प्रदेश में पहली बार पैदा हुई है कि स्कूली बच्चों को 5-5 माह बाद भी निशुल्क पुस्तक ही नहीं मिल पा रही है, सरकार की इच्छा शक्ति होती तो डाक या कोरियर से भी प्रत्येक बच्चो के घर में पुस्तक पहुंचाया जा सकता था। अगर बच्चों को पुस्तक उपलब्ध करा दिया जाता तो कम से कम बच्चे स्कूल प्रारम्भ न हो पाने की स्थिति में अपने घरों में पढ़ाई कर पाते। पूरे प्रदेश के 28 जिलों में अमूमन यही स्थिति है और विभाग का इस ओर ध्यान ही नहीं है।

 

17-06-2020
ऑनलाइन क्लास से बच्चों की आंखों पर बुरा असर, रोक लगाने की मांग

रायपुर। निजी स्कूलों की ओर से चलाई जा रही ऑनलाइन क्लासेस और ली जा रही फीस पर तत्काल रोक लगाने की मांग छत्तीसगढ़ सेवा कल्याण परिषद ने की है। परिषद के संयोजक राहुल हरितवाल के साथ पालकों के प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और अतिशीघ्र कार्यवाही का आग्रह किया है।राहुल हरितवाल ने बताया कि कोरोना संकट के चलते स्कूल नहीं लग रहे हैं परंतु शाला प्रबंधन नर्सरी से लेकर क्लास 12 तक के सभी बच्चों की पूरी फीस ले रहा है,जिस पर रोक लगाने का निवेदन हमने किया है। उन्होंने बताया कि छोटे-बड़े सभी स्कूली बच्चों की ऑनलाइन क्लास चल रही है। बच्चे कई घण्टे निरंतर कम्प्यूटर और  मोबाइल का  उपयोग कर रहे हैं,जिसके चलते उनके स्वस्थ पर विपरीत असर पड़ रहा है। नन्हें बच्चों की ऑनलाइन क्लासेस तो उनकी सेहत के साथ पूर्णत: खिलवाड़ है,जिस पर अविलंब रोक प्रशासन को लगाना चाहिए। राहुल ने कहा कि निजी स्कूलों द्वारा पालकों को लगातार मैसेज भेज कर फीस की मांग कर रहे है जिस पर भी रोक लगनी चहिए। ज्ञापन देने वाले पालकों में सचिन पटेल,करण पटेल, हितेन पटेल, अजय पाठक, अविनाश गुनी आदि उपस्थित थे।

 

04-05-2020
निजी स्कूलों की फीस विनियमन प्रारूप पर 15 मई तक मांगे गए सुझाव, मंत्रिपरिषद उप समिति की हुई बैठक

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर अशासकीय शालाओं के लिए छत्तीसगढ़ फीस विनियमन अधिनियम 2020 बनाने का निर्णय लिया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से फीस विनियमन के प्रारूप की विभिन्न धाराओं पर बिन्दुवार सुझाव सर्वसाधारण से विभाग के ई-मेल पर आमंत्रित किए गए हैं। इस संबंध में कोई भी व्यक्ति अपने सुझाव स्कूल शिक्षा विभाग के ई-मेल पर 15 मई को अपरान्ह 3 बजे तक भेज सकता हैं। संचालक लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा आज इस संबंध में सर्वसाधारण के लिए सूचना जारी कर दी गई है।समिति ने निर्देश दिए कि विभाग से तैयार किया गया अधिनियम प्रारूप, विभाग की वेबसाइट पर अपलोड किया जाए और जनसामान्य से इस प्रारूप पर 10 दिन के भीतर ई-मेल से सुझाव आमंत्रित किए जाए। प्राप्त सुझावों को परीक्षण करके विभाग से प्रस्तावित अधिनियम के प्रारूप में आवश्यक संशोधन किया जाए। परीक्षण के उपरान्त तैयार किए गए विधेयक के प्रारूप को मंत्री मंडलीय उप-समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। यह कार्य यथा संभव तीन सप्ताह में पूर्ण किया जाए।उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य शासन ने राज्य में संचालित अशासकीय/निजी शालाओं की फीस विनियमन के लिए विभिन्न पहलुओं पर विचार कर अपनी अनुसंशा देने के लिए स्कूल शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय मंत्रिपरिषद उप समिति का गठन किया है। इस संबंध में स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद उप समिति की बैठक में सोमवार को यह निर्णय लिया गया। बैठक में समिति के सदस्य गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे सहित स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला, संचालक लोक शिक्षण जितेन्द्र शुक्ला, उपस्थित थे। बैठक में समिति के निर्णय लिया गया कि सर्वसाधारण से सुझाव के लिए संचालक लोक शिक्षण संचालनालय के उप संचालक एके बंजारा को नोडल अधिकारी बनाया गया है।

03-01-2020
कड़ाके की ठण्ड की वजह से 4 जनवरी तक बढ़ा अवकाश

कोरबा। जिले के सभी शासकीय एवं निजी स्कूलों में कल 4 जनवरी को भी छुट्टी रहेगी। कड़ाके की ठण्ड के कारण जिला प्रशासन द्वारा यह निर्णय लिया गया है और कलेक्टर किरण कौशल के निर्देष पर जिला शिक्षा अधिकारी ने आदेश भी जारी कर दिया है। सतीष पाण्डेय ने बताया कि कोरबा जिले में विगत दिनों से पड़ रही कड़ाके की ठण्ड और बारिश से विद्यार्थियों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका के चलते 4 जनवरी को भी अवकाश घोषित किया गया है। पहले यह अवकाश तीन जनवरी तक था। उन्होंने बताया कि 4 जनवरी को घोषित अवकाश तथा 5 जनवरी को रविवार होने के कारण इस कड़कड़ाती ठण्ड में स्कूली बच्चों को दो दिन का अवकाश मिलेगा। लेकिन हाई और हायर सेकेंडरी स्कूल की अर्धवार्षिक परीक्षा अपने पूर्ववत टाइम टेबल के अनुसार ही होंगी।

 

14-10-2019
रायगढ़ जिले के निजी स्कूलों की मान्यता पर खतरा

रायगढ़। रायगढ़ जिले में 90 प्राइवेट स्कूलों पर मान्यता रद्द होने का खतरा मंडरा रहा है। इन स्कूलों के नवीनीकरण संबंधी दस्तावेजों में त्रुटि होने के कारण पाए के कारण नोटिस भेजा गया है। उसके बावजूद त्रुटियां नहीं सुधारी जाती हैं तो इन स्कूलों की मान्यता खतरे में पड़ सकती है। इस बारे में विस्तार से बताते हुए रायगढ़ के जिला शिक्षा अधिकारी मनिंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में कुल 462 अशासकीय स्कूल हंै। इनमें से 90 स्कूलों के नवीनीकरण के लिए आए आवेदनों में त्रुटि पाई गई है। इनके लिए उन्हें नोटिस भेजा गया है। अगर वह कमी की पूर्ति करते हैं तो उनका नवीनीकरण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अगर इसके बाद भी वह समय पर नवीनीकरण नहीं कराते हैं तो उन्हें मान्यता समाप्ति की नोटिस भेजी जाएगी। उसके बावजूद भी अगर पूरी नहीं होती है तो उनका प्रकरण मान्यता संबंधी समिति है उसमें भेजा जाएगा।

16-06-2019
निजी स्कूलों में अब यूनिफॉर्म और किताबों की बिक्री नहीं, सरकार ने बरती सख्ती

चंडीगढ़। पंजाब के निजी स्कूलों के परिसर में किताबें और ड्रेस बेचने पर पंजाब सरकार ने रोक लगा दी है। इसके साथ ही स्कूलों की ड्रेस के रंगों और डिजाइनों में तीन वर्ष तक बदलाव नहीं करने का आदेश दिया है। स्कूलों को अपनी वेबसाइट पर किताबों और ड्रेस के बारे में जानकारी अपलोड करने का आदेश दिया गया है। आदेश का उल्लंघन करने वाले निजी स्कूलों की एनओसी रद्द कर दी जाएगी। यदि यह आदेश अगले सत्र तक प्रभावी रहा तो अभिभावकों को बड़ी राहत होगी। राज्य में कुछ निजी स्कूलों द्वारा पेरेंट्स के आर्थिक शोषण संबंधी रिपोर्टों पर कार्रवाई करते हुए शिक्षा विभाग ने राज्य में स्थित सीबीएसई, आईसीएसई और पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त सभी स्कूलों को निर्देश जारी किए हैं कि वह मां-बाप को स्कूल द्वारा सुझाई गई दुकान या फर्म से किताबें या वर्दियां खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। बता दें कि शिक्षा सत्र के दौरान सिलेबस बदलने के नाम पर बेजा किताब खरीदने पर जोर दिया जाता है। केवल प्रकाशक बदलता है लेकिन कंटेंट में कोई बदलाव नहीं होता। 

 

15-05-2019
मध्यप्रदेश ने इस कारण से रद्द कर दी 2600 प्राइवेट स्कूलों की मान्यता 

भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने करीब 2600 निजी स्कूलों की मान्यता निरस्त कर दी है। ये वे स्कूल हैं जिनमें रजिस्टर्ड किरायानामा का उल्लेख नहीं है। सबसे अधिक राजगढ़ जिले में 370 स्कूलों की मान्यता निरस्त की गई हैं। हालांकि राज्य शिक्षा केंद्र के आदेश में रजिस्टर्ड किरायानामा का कोई उल्लेख नहीं है, इसके बावजूद इन स्कूलों की मान्यताएं निरस्त कर दी गईं। इस बारे में मध्य प्रदेश के प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन की ओर से राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक को ज्ञापन सौंपकर यह मांग की गई है कि इन स्कूलों में कई हजार विद्यार्थी वर्तमान समय में अध्ययनरत हैं। एसोसिएशन ने अपने आवेदन में इस बात का भी उल्लेख किया है कि नि:शुल्क प्रवेशित छात्रों की संख्या भी हजारों में हैं। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अजीत सिंह ने बताया कि आरटीई यानी शिक्षा के अधिकार के तहत इन स्कूलों में विद्यार्थी नए सत्र में प्रवेश लेने से भी वंचित हो रहे हैं। वहीं आरटीई के तहत वर्ष 2016-17 में प्रवेशित विद्यार्थियों के शुल्क का भुगतान नहीं किया गया है। अजीत सिंह ने यह मांग की है कि जिन स्कूलों की मान्यता निरस्त की गई हैं, उन्हें तत्काल बहाल की जाए। उन्होंने यह भी मांग की है कि इन निजी विद्यालयों में आरटीई की प्रवेश तिथि बढ़ाई जाए और वर्ष 2016-17 की फीस प्रतिपूर्ति का भुगतान किया जाए। सभी समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया तो एसोसिएशन प्रदेश में धरना-आंदोलन प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होगा।

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