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08-04-2020
खाताधारक सोशल डिस्टेंसिंग की उड़ा रहे धज्जियां,जनधन राशि निकालने बैंकों में लगी लंबी कतारें

लखनपुर। प्रधानमंत्री जन धन योजना की राशि निकालने लखनपुर के सेंट्रल एवं ग्रामीण बैंकों में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा है। सोशल डिस्टेंसिंग की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है। लखनपुर पुलिस एवं राजस्व अमला के समझाईश देने के बाद भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन  खाताधारकों के द्वारा नहीं किया जा रहा है। कोविड-19 नोबेल कोरोना वायरस के संकट को देखते हुए केंद्र सरकार द्वारा देश के गरीब परिवारों को आर्थिक मदद पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री जनधन खातों के माध्यम से सहायता राशि दे रही है। प्रधानमंत्री जनधन राशि को पाने के लिए बैंकों के सामने लोगों की कतार भी लग रही है।

जल्दी रुपए लेने के चक्कर में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर रहे हैं। वही सेंट्रल एवं ग्रामीण बैंक के शाखा प्रबंधक  भी इसे लेकर सख्त नहीं हो पा रहे हैं। लिहाजा बैंकों के सामने सोशल डिस्टेंसिंग बनाए बिना रुपए लेने के लिए अपनी बारी का इंतजार खाताधारक कर रहे हैं। इस कारण लॉक डाउन की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। देश में फैले कोविड-19 नोबेल कोरोनावायरस से गरीबों के सामने उत्पन्न आर्थिक संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार की ओर से प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत माह तक 500 रुपये प्रत्येक महिला खाताधारकों को दिया जायेगा। घोषणा के बाद प्रथम किस्त खाते में आना शुरू हो गई।

 

12-03-2020
एसबीआई ने लिया बड़ा फैसला, खाताधारकों को मिलेगी जीरो बैलेंस की सुविधा

नई दिल्ली। भारतीय स्टेट बैंक ने बचत खाते में औसत मासिक न्यूनतम राशि रखने की अनिवार्यता समाप्त कर दिया है। इससे अब बैंक के सभी बचत खाताधारकों को जीरो बैलेंस की सुविधा मिलने लगेगी। एसबीआई ने एक बयान जारी कर कहा कि देश में वित्तीय समावेशन को आगे बढ़ाने के लिए उसने औसत मासिक न्यूनतम राशि रखने की अनिवार्यता खत्म की है। एसबीआई ने अपने 44.51 करोड़ बचत खाताधारकों को गुरुवार को दो बड़े फैसले दिए है। पहले फैसले में एसबीआई ने बचत खाते पर जीरो बैलेंस की सुविधा दी है, जबकि दूसरे फैसले में बचत खातों पर मिलने वाली ब्याज दर घटा दी है। इसके तहत बचत खातों में न्यूनतम बैलेंस बनाए रखने की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है। ऐसे में अब ग्राहकों के खाते में रकम नहीं होने पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। जबकि दूसरे फैसले के तहत बैंक ने बचत खातों पर अब तक मिल रही 3.25 फीसदी की ब्याज दर को घटाकर फ्लैट 3 फीसदी कर दिया है। एसबीआई ने उपरोक्त दोनों फैसलों के अलावा एक और निर्णय लिया है। इसके तहत अब उसके ग्राहकों को एसएमएस सेवा के लिए त्रैमासिक आधार पर लगने वाला शुल्क नहीं चुकाना होगा। इसे भी खत्म कर दिया गया है।

 

06-03-2020
यस बैंक पर लगी आरबीआई की रोक, अब ग्राहक नहीं निकाल सकेंगे 50 हजार से ज्‍यादा रुपए

नई दिल्ली। संकट में फंसे यस बैंक की मुश्किलें बढ़ गई है। भारतीय रिजर्व बैंक ने गुरुवार को नकदी संकट से जूझ रहे निजी क्षेत्र के यस बैंक पर रोक लगाते हुए उसके निदेशक मंडल को भंग कर दिया है। इसके तहत खाताधारक अब यस बैंक से 50 हजार रुपये से ज्यादा रकम नहीं निकाल सकेंगे। निकासी की यह सीमा तीन अप्रैल, 2020 तक लागू रहेगी। आरबीआई के आदेश के बाद इस बैंक के खाताधारकों में डर का माहौल है। इसके अलावा केंद्रीय बैंक ने यस बैंक के निदेशक मंडल के अधिकारों पर रोक लगाते हुए एक महीने के लिए एसबीआई के पूर्व डीएमडी और सीएफओ प्रशांत कुमार की प्रशासक के रूप में नियुक्ति भी कर दी है। रिजर्व बैंक ने सरकार के साथ विचार विमर्श के बाद जमाकर्ताओं के हितों के संरक्षण के लिए यह कदम उठाया है।

आरबीआई ने कहा कि यस बैंक लगातार एनपीए की समस्या से जूझ रहा है, जिसके चलते यह फैसला लेना पड़ा है। आरबीआई द्वारा जारी दिशानिर्देशों के मुताबिक, यस बैंक में बचत, चालू या किसी अन्य जमा खाते से एक महीने के दौरान 50 हजार रुपए से ज्यादा धनराशि नहीं निकाली जा सकेगी। इसके अलावा यदि किसी के बैंक में एक से ज्यादा खाते हैं तो भी 50 हजार से ज्यादा धनराशि नहीं निकाली जा सकेगी। दूसरी ओर एसबीआई बोर्ड ने येस बैंक में निवेश के लिए ‘सैद्धांतिक’ स्वीकृति दे दी है। सरकार ने कहा है कि बैंक के खिलाफ सभी कार्रवाई और 50,000 रुपए से अधिक की निकासी पर 3 अप्रैल तक रोक लगा दी गई है। इसमें बैंक को 50,000 रुपए से अधिक का भुगतान नहीं करने का आदेश दिया गया है। 50,000 हजार रु से अधिक की निकासी पर रोक सभी बैंक खातों-सेविंग, डिपॉजिट और चालू खातों के लिए है। इस आदेश के बाद यस बैंक कोई लोन रिन्यू नहीं कर पाएगा और ना कोई निवेश कर पाएगा।

30-01-2020
प्रीमियम नहीं कटने से बीमा दावा से वंचित हुई महिला, उपभोक्ता फोरम ने लगाया 2.16 लाख का जुर्माना  

दुर्ग। बैंक द्वारा प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के अंतर्गत अपने खाताधारक का वार्षिक प्रीमियम काटकर बीमा कंपनी को प्रेषित नहीं किया गया, इसे उपभोक्ता के प्रति सेवा में निम्नतापूर्ण आचरण मानते हुए जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने बैंक ऑफ इंडिया की इंदिरा मार्केट दुर्ग शाखा पर 2 लाख 16 हजार रुपये हर्जाना लगाया।

ग्राहक की शिकायत

परिवाद के मुताबिक गया नगर दुर्ग निवासी परिवादी महेश्वरी सोनी के पति दिनेश कुमार सोनी का बैंक खाता बैंक ऑफ इंडिया की इंदिरा मार्केट दुर्ग शाखा में संचालित था, इस खाते से बैंक द्वारा पहले तो 12 रुपये वार्षिक प्रीमियम की कटौती की, लेकिन अगली बार 01 मई 2017 से 30 जून 2018 की अवधि के लिए वार्षिक प्रीमियम की कटौती नहीं की जबकि बैंक खाते में पर्याप्त राशि उपलब्ध थी और इसी बीच कार दुर्घटना में दिनांक 15 अक्टूबर 2017 को महिला के पति की मृत्यु हो गई। बीमा क्लेम किए जाने पर महिला को जानकारी दी गई कि ऑटो डेबिट प्रक्रिया के तहत खाते से प्रीमियम कटौती नहीं हुई। प्रीमियम राशि बीमा कंपनी को नहीं मिली, इस कारण उसे बीमा क्लेम नहीं दिया जा सकता।

अनावेदकगण का बचाव

अनावेदक बैंक ने यह बचाव लिया कि संबंधित योजना के तहत बीमा प्रीमियम की राशि की कटौती ऑटो डेबिट से बीमा कंपनी द्वारा की जानी थी इसीलिए बीमा कंपनी उत्तरदायी है उसे ही बीमा प्रीमियम कटौती के संबंध में कार्यवाही करनी होती है। अनावेदक बीमा कंपनी दि न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने बचाव लेते हुए कहा कि प्रीमियम कटौती के संबंध में ऑटो डेबिट की प्रक्रिया बैंक को करनी होती है, बीमा कंपनी मृतक के बचत खाते से राशि डेबिट नहीं कर सकता। बैंक द्वारा प्रीमियम राशि प्रदान नहीं की गई। जब तक बैंक, बीमा कंपनी के खाते में प्रीमियम राशि ट्रांसफर नहीं कर देता तब तक बीमा पॉलिसी जारी नहीं होती है।

फोरम का फैसला

जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने प्रकरण में प्रस्तुत साक्ष्य एवं दस्तावेजों की विवेचना से यह निष्कर्ष निकाला कि प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना की नियमावली तहत बीमा प्रीमियम कटौती के लिए बैंक को ही प्रीमियम कटौती के लिए उत्तरदायी बनाया गया है इसीलिए ऑटो डेबिट द्वारा प्रीमियम कटौती करना बैंक की ही जिम्मेदारी है। फोरम ने यह भी कहा कि बैंकिंग ट्रांजैक्शन की प्रक्रिया में ऑटो डेबिट सुविधा बैंकों द्वारा अपने ग्राहकों को दी जाने वाली एक विशेष प्रकार की सुविधा है जिसके अंतर्गत जब ग्राहक द्वारा किसी भुगतान हेतु ऑटो डेबिट का विकल्प लिया जाता है तो इस परिप्रेक्ष्य में ग्राहक द्वारा बैंक को निर्देशित किया जाता है कि वह तय समय में उसके खाते से राशि ऑटो डेबिट कार्ड संबंधित तीसरे पक्ष को उसका भुगतान करें ऐसे में खाताधारक द्वारा ऑटो डेबिट का निर्देश बीमा कंपनी को प्रदान किए जाने का प्रश्न ही उत्पन्न नहीं होता। फोरम ने बैंक के बचाव को खारिज कर दिया और उसे प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना का प्रीमियम ऑटो डेबिट कर कटौती नहीं करने के लिए सेवा में निम्नता का जिम्मेदार माना साथ ही बीमा कंपनी को उन्मुक्त करते हुए उसके विरुद्ध प्रकरण खारिज कर दिया।

जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने कहा कि यदि बैंक ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन उचित प्रकार से करते हुए खाताधारक का बीमा प्रीमियम ऑटो डेबिट किया होता तो वह बीमित श्रेणी में शामिल होता इसलिए मृतक को बीमित ही माना जाएगा और अब प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत दी जाने वाली बीमा राशि 2 लाख रुपये परिवादिनी को भुगतान करने का उत्तरदायित्व बैंक का है।
अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने बैंक ऑफ इंडिया इंदिरा मार्केट दुर्ग शाखा के मैनेजर को सेवा में निम्नता के लिए जिम्मेदार मानते हुए 2 लाख 16 हजार रुपये हर्जाना लगाया, जिसमें बीमा राशि 200000 रुपये मय ब्याज, मानसिक क्षतिपूर्ति स्वरूप 15000 रुपये तथा वाद व्यय 1000 रुपये देने का आदेश दिया गया।

02-11-2019
इस महीने 12 दिन बंद रहेंगे बैंक, जल्द निपटा ले अपने काम

नई दिल्ली। अगर आपको बैंक का कोई भी कार्य करना है तो आपके लिए ये खबर बहुत महत्वपूर्ण है। ऐसा इसलिए क्योंकि आरबीआई की वेबसाइट से प्राप्त जानकारी के अनुसार, नवंबर में बैंक एक नहीं, दो नहीं, बल्कि 12 दिन बंद रहेंगे। बता दें कि इन आठ छुट्टियों में अलग-अलग राज्यों में होने वाली छुट्टियां भी शामिल हैं। इस दौरान खाताधारकों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए अगर बैंक से जुड़ा कोई भी कार्य शेष है तो उसे समय पर पूरा कर लीजिए। इस महीने छठ पूजा, गुरु नानक जयंती,  कन्नड राज्योत्सव, वांग्ला फेस्टिवल, आदि के चलते बैंक बंद रहेंगे। आइए जानते हैं नवंबर में किस दिन बैंक बंद रहेंगे। 

 

16-10-2019
पीएमसी बैंक घोटाला : महिला खाताधारक ने की खुदकुश़ी? पुलिस जुटी जांच में

मुंबई। पीएमसी बैंक के एक खाताधारक की दिल का दौरा पड़ने से मौत के 24 घंटे के भीतर ही एक अन्‍य महिला खाताधारक ने आत्महत्या कर ली। महिला का नाम निवेदिता बिजलानी (39) है। निवेदिता मुंबई के अंधेरी इलाके में रहती थीं और पेशे से डॉक्‍टर थीं। निवेदिता का पीएमसी बैंक में अकाउंट जरूर था लेकिन पुलिस इस मामले को पीएमसी घोटाले की वजह से आत्महत्या नहीं मान रही है। पुलिस की मानें तो निवेदिता काफी संपन्न घर से थीं और आर्थिक रूप से काफी मजबूत थीं। इस मामले की जांच कर रही वर्सोवा पुलिस के मुताबिक निवेदिता ने पीएमसी बैंक की वजह से आत्महत्या नहीं की हैं। निवेदिता ने नींद की गोलियों का ओवरडोज़ लिया था। दरअसल निवेदिता की पहली शादी साल 2001 में हुई थी। इसके बाद उनकी दूसरी शादी साल 2017 में एक अमेरिकी नागरिक से हुई थी। पहली शादी से निवेदिता को एक 17 साल की बेटी है। निवेदिता खुद एक डॉक्टर थीं और अमेरिका में प्रैक्टिस करती थीं। निवेदिता के पिता ने पुलिस को दिए गए बयान में कहा है कि मार्च 2018 में उसने अमेरिका में भी आत्महत्या करने की कोशिश की थी। उसके बाद वो डिप्रेशन का शिकार हो गई थीं। इस घटना के बाद वो भारत आकर रहने लगीं और एक डॉक्टर से डिप्रेशन का इलाज करवाने लगीं थी। 

 

13-10-2019
कहीं इस बैंक में तो नहीं आपका खाता, यहां भी हुआ है घोटाला

मुंबई। हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक ने पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक पर छह महीने का प्रतिबंध लगा दिया था। अब देश के एक और को-ऑपरेटिव बैंक पर इसका खतरा मंडरा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि पीएमसी के बाद अब इस बैंक में भी घोटाला सामने आया है। इस बैंक का नाम है शिवाजीराव भोसले सहकारी बैंक। शिवाजीराव भोसले सहकारी बैंक के कामकाज में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। इसके मद्देनजर बैंक के निदेशक मडंल को भी बर्खास्त कर दिया है, जिसके बाद प्रशासक की नियुक्ति की गई है। बता दें कि बैंक के प्रमोटर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता और महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य अनिल शिवाजीराव भोसले हैं।

मामले में बैंकों के खाताधारकों के मामलों को बढ़ाने वाले ग्रुप के सदस्य मिहिर थाटे ने कहा कि फर्जी कर्जदारों को 300 करोड़ रुपए का कर्ज वितरित करने की वजह से यह मुसीबत आई है। इसकी वजह से बैंक के करीब एक लाख खाताधारकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। खाताधारक बैंक से अपने पैसे नहीं निकाल पा रहे हैं। सहकारिता आयुक्त सतीश सोने ने आदेश जारी कर कहा है कि अप्रैल 2019 में आरबीआई द्वारा एक स्पेशल जांच की गई थी। जांच के दौरान बैंक के कामकाज में भारी अनियमितताएं पाई गईं थीं। आदेश में यह भी कहा गया था कि निदेशक मंडल के स्थान पर उप-जिला रजिस्ट्रार नारायण आघव को प्रशासक नियुक्त किया गया है। 

08-06-2019
जोखिम में फंसे ऋण पर संशोधित दिशा-निर्देश

मुंबई। रिजर्व बैंक ने जोखिम में फंसे ऋण की समस्या से निपटने के लिए शुक्रवार को संशोधित दिशा-निर्देश जारी किया है जिसके अनुसार, यदि ऋणदाता को लगता है कि कोई खाताधारक ऋण भुगतान में चूक कर सकता है तो वह चूक से पहले भी ऋण समाधान प्रक्रिया शुरू कर सकता है। उच्चतम न्यायालय ने रिजर्व बैंक द्वारा इस संबंध में पिछले साल 12 फरवरी को जारी दिशा-निर्देश को खारिज करते हुये उसे इसके स्थान पर संशोधित दिशा-निर्देश जारी करने का आदेश दिया था। रिजर्व बैंक ने कहा कि अब ऋण नहीं चुकाने वालों के खिलाफ ऋण समाधान प्रक्रिया ऋण चूक से पहले भी शुरू की जा सकेगी और ऋण देने में चूक होने पर 30 दिन के भीतर समाधान प्रक्रिया की रूपरेखा तथा उसे लागू करने के तरीके तय कर लिये जायेंगे। यह 30 दिन की अवधि समीक्षा अवधि के रूप में जानी जायेगी।

रिजर्व बैंक ने गत 04 अप्रैल को इस संबंध में एक एक बयान जारी किया था जिसमें कहा गया था कि इस दिशा में आवश्यक कदम उठाये जायेंगे जिसमें संशोधित दिशा-निर्देश जारी करना भी शामिल था। इसी को ध्यान में रखते हुये केन्द्रीय बैंक ने आज नये दिशा-निर्देश जारी किए। रिजर्व बैंक ने जोखिम में फँसे ऋण को पहले की तरह ही तीन श्रेणियों में रखा है। विशेष उल्लेखित खाता (एसएमए)-शून्य में बैंक उन ऋण खातों को दिखायेंगे जिनकी किस्त 30 दिन या उससे कम अवधि के लिए बकाया है। यदि ऋण की किस्त 31 से 60 दिन तक बकाया है तो उसे एसएमए-1 श्रेणी में और 61 से 90 दिन की अवधि तक किस्त नहीं चुकाने पर खाते को एसएमए-2 श्रेणी में दिखाना होगा।

केंद्रीय बैंक ने कहा गया है कि जोखिम में फँसे ऋण की पहचान मूल धन या ब्याज भुगतान या कोई अन्य आंशिक या पूर्ण भुगतान उपरोक्त अवधि के दौरान बकाया रहेगा तब बैंकों को समाधान प्रक्रिया शुरू करनी होगी। इसके साथ नकद ऋण जैसे रिवोल्विंग ऋण के मामलों के लिए भी एसएमए-1 और एसएमए-2श्रेणी भी बनायी गयी है। केन्द्रीय बैंक ने कहा कि सभी बैंकों को जोखिम में फँसे ऋण के लिए बोर्ड अनुमोदित समाधान प्रक्रिया बनानी होगी। सभी बैंकों को पाँच करोड़ रुपये या इससे अधिक के कर्जदरों के बारे में जानकारी देने के लिए कहा गया है। बैंकों को पाँच करोड़ रुपये या इससे अधिक के सभी कर्जदरों के ऋण भुगतान से चुकने वालों के बारे में साप्ताहिक रिपोर्ट देनी होगी।

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