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29-02-2020
चिंतामणि चंद्राकर की याचिका पर अगली सुनवाई 19 मार्च को

 

रायपुर। भाजपा शासनकाल में नागरिक आपूर्ति निगम में करोड़ों रुपए के घोटाले में आरोपी चिंतामणि चंद्राकर ने एसआईटी द्वारा उसके खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर में किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं करने की गुहार लगाई है। याचिकाकर्ता ने कहा है कि 30 जनवरी 2019 को एसआईटी की टीम ने उन्हें जबरिया दफ्तर में रोके रखा। 15 सितंबर 2019 को गिरफ्तार कर संबंधित कोर्ट में पेश करने ले जाया गया बावजूद उन्हें कोर्ट में पेश नहीं किया गया। राज्य शासन के इशारे पर एसआईटी के अधिकारियों द्वारा दबाव बनाकर कार्रवाई की जा रही है। उन्हें इस बात की आशंका है कि किसी भी मामले में फंसाया जा सकता है और कार्यवाही की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने हाईकोर्ट की एकलपीठ के समक्ष पैरवी करते हुए राज्य शासन की इस मंशा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता चिंतामणि चंद्राकर पर एसआईटी टीम लगातार दबाव डाल रही है कि वे नागरिक आपूर्ति निगम नान घोटाले में पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह के खिलाफ गवाही दे। जेठमलानी की बहस के बाद हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को तिथि कर दी है।

 

25-02-2020
धान खरीदी को लेकर किसान ने लगाई जनहित याचिका

रायपुर। पेंड्रा जिले के किसान शंभू नाथ शर्मा ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर राज्य शासन की ओर से वादाखिलाफी करने की शिकायत दर्ज कराई है। इसके साथ ही समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की व्यवस्था को जारी रखने की गुहार भी लगाई है। याचिकाकर्ता ने कहा कि जिन किसानों को धान बेचने के लिए समितियों की ओर से टोकन जारी किया गया है। उनके धान की खरीदी करने शासन को निर्देशित किया जाए। याचिकाकर्ता ने कहा है कि राज्य शासन ने पहले 20 फरवरी तक धान खरीदी करने का समय तय किया था, जिसके बाद 5 दिन समय बढ़ाते हुए 25 फरवरी डेडलाइन तय की थी। जिले की कई समितियों में किसानों को 20 फरवरी तक धान बेचने टोकन भी जारी किया गया है। याचिकाकर्ता ने इस बात की भी शिकायत दर्ज कराई है कि राज्य शासन ने धान खरीदी की तिथि 5 दिन बढ़ा दी थी। समितियों में किसानों को 20 फरवरी के बाद टोकन देना बंद कर दिया था।

 

18-02-2020
स्पीड ब्रेकर्स हटाने को लेकर लगाई याचिका में फैसला सुरक्षित

रायपुर। राज्य की सड़कों पर बनाए गए स्पीड ब्रेकर्स को हटाने की मांग को लेकर दायर की गई जनहित याचिका पर बीते दिन चीफ जस्टिस पी आर रामचंद्र मेनन व जस्टिस पीपी साहू की खंडपीठ में सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। याचिकाकर्ता ने स्टेट व नेशनल हाईवे इंडियन रोड कांग्रेस के मापदंडों का उल्लंघन करते हुए बनाए गए स्पीड ब्रेकर्स के कारण आए दिन होने वाले दुर्घटनाओं का उल्लेख करते हुए ब्रेकर्स को हटाने की मांग की थी।याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में पीडब्ल्यूडी और नेशनल हाईवे के अधिकारियों द्वारा बिना मापदंड ब्रेकर्स बनाने की शिकायत भी की थी। लापरवाही पूर्वक बनाए गए ब्रेकर्स के कारण होने वाली दुर्घटनाओं का हवाला भी दिया है। प्रदेश की प्रमुख सड़कों का जिक्र भी किया गया है। याचिकाकर्ता द्वारा पेश शपथ पत्र और शासन की तरफ से जवाब देने के बाद जनहित याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है।



 

06-02-2020
एनआईए एक्ट को लेकर दायर याचिका की सुनवाई 5 मार्च को

रायपुर। एनआईए को चुनौती देते हुए छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव डॉ. विवेक बाजपेयी और दौलत रोहरा की रिट पर दूसरे दिन भी सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद 5 मार्च को अगली सुनवाई की तिथि कोर्ट ने दी है। चीफ जस्टिस पी रामचंद्र मेनन व जस्टिस पीपी साहू की खंड पीठ में रिट की सुनवाई हुई, जिसमें कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में राज्य शासन का वर्तमान स्टेटस पूछा था। चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली खंड पीठ ने याचिकाकर्ता के एडव्होकेट से फिर पूछा कि राज्य शासन की याचिका सुप्रीम कोर्ट में लगी हुई है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बारे में कोर्ट को जानकारी उपलब्ध कराएं।

02-02-2020
शिक्षकों और व्याख्याताओं की रिकवरी आदेश पर रोक

रायपुर। प्रदेश के कोंडागांव जिले के केशकाल विकासखंड में कार्यरत 6 शिक्षकों और व्याख्याताओं की रेट पर सुनवाई करते हुए बिलासपुर हाईकोर्ट ने बीते दिन जिला शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी रिकवरी आदेश पर रोक लगा दी है। ब्लॉक के कई स्कूलों में कार्यरत किशोरी टोप्पो दशरू राम मंडावी, आनन्द राम नाग एवं अन्य शिक्षकों ने एडव्होकेट अनिल तावड़कर के माध्यम से  रिट लगाकर कर कहा है कि सभी कोंडागांव शिक्षा जिला विभाग के अंतर्गत आने वाले केशकाल विकासखंड के भिन्न-भिन्न गांवों के स्कूलों में कार्यरत हैं। रिट के मुताबिक जिला पंचायत के माध्यम से पंचायत विभाग में शिक्षाकर्मी के पदों पर हुई थी। सरकार ने निर्देश जारी कर बाद में शिक्षा विभाग में संविलियन कर दिया है। याचिकाकर्ता ने कहा है कि जिला शिक्षा अधिकारी ने पत्र में इस बात की जानकारी नहीं दी है कि व्याख्याताओं और शिक्षकों को अधिक भुगतान करने का आधार क्या है।

31-01-2020
हाईकोर्ट का आदेश केंद्रीय राज्य मंत्री और 15 आईएएस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करे

रायपुर। बिलासपुर हाईकोर्ट की खंड पीठ ने राज्य स़्त्रोत निशक्त जन संस्था के नाम पर 1000 करोड़ के घोटाले के मामले में आज बड़ा फैसला सुनाया है। पीठ ने सीबीआई को केंद्रीय राज्य मंत्री रेणुका सिंह, पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांढ और सुनील कुमार कुजूर केअलावा पूर्व एसीएस समेत 13 अधिकारियों के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध करने का आदेश जारी किया है। मामले में रायपुर के कुशालपुर निवासी कुंदन सिंह ठाकुर ने अपने अधिवक्ता के ​जरिए से हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसमें प्रदेश के रिटायर्ड और वर्तमान में कार्यरत आईएएस अधिकारियों पर राज्य स्रोत निशक्त जन संस्थान नामक संस्थान बनाकर सरकारी विभागों से प्रत्येक माह लाखों रुपए कर्मचारियों का भुगतान समेत अन्य कार्यों के लिए लाखों रुपए निकाले जाने की बात का उल्लेख किया था। याचिकाकर्ता ने अपील की थी कि मामले की जांच  होनी चाहिए और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्यवाही की जानी चाहिए। याचिकाकर्ता की अपील पर हाईकोर्ट की खंड पीठ ने सुनवाई के बाद फैसला अपने पास सुरक्षित रख लिया था।

14-01-2020
आरक्षक भर्ती मामले में हाईकोर्ट ने कहा सभी याचिकाओं की सुनवाई एक साथ होगी

रायपुर। राज्य में पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा रद्द करने को लेकर हाई कोर्ट में दायर याचिका के खारिज होने के बाद चुनौती याचिका दायर की गई है। लगातार इस मामले में चुनौती याचिकाएं दायर हो रही हैं। सोमवार को हाईकोर्ट ने यह कहते हुए मामले को 21 जनवरी तक के लिए आगे बढ़ा दिया है कि जितनी भी याचिकाएं पेश हो रही हैं सभी आ जाएं तो एक साथ सभी की सुनवाई की जाएगी। प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी सरकार के समय निकली 2259 आरक्षक पदों की भर्ती पर रोक बरकरार रहेगी। हाईकोर्ट के एकलपीठ से याचिका खारिज होने के बाद याचिकाकर्ता प्रकाश तिवारी ने चुनौती याचिका हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में पेश की है।

16-12-2019
जामिया हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट ने की टिप्पणी, कहा - आप स्टूडेंट हैं, इसलिए आपको हिंसा करने का अधिकार नहीं मिलता

नई दिल्ली। जामिया हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की है। चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने कहा कि आप स्टूडेंट हैं, इसलिए आपको हिंसा करने का अधिकार नहीं मिल जाता है। अब इस मामले में मंगलवार को सुनवाई होगी, लेकिन हम चेतावनी देते हैं कि अगर प्रदर्शन, हिंसा और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया जाता है तो हम सुनवाई नहीं करेंगे। याचिकाकर्ता ने रिटायर जजों की जांच कमेटी बनाने की मांग की है, ताकि पुलिस कोई कार्रवाई न करे। इस पर सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को सुनवाई करेगा।

चीफ जस्टिस ने कहा, हम वीडियो (कोर्ट को एक वकील ने जामिया हिंसा के वीडियो की जानकारी दी) नहीं देखना चाहते। अगर हिंसा जारी रहेगी और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाता रहेगा तो हम सुनवाई नहीं करेंगे। चीफ जस्टिस बोबडे ने कहा, हम अधिकार सुनिश्चित करेंगे लेकिन हिंसा के माहौल में नहीं। यह सब कुछ थमने दीजिए उसके बाद स्वतः संज्ञान लिया जाएगा। हम अधिकारों और शांतिपूर्प प्रदर्शन के खिलाफ नहीं हैं।

बता दें, रविवार को दक्षिण दिल्ली में नाराज भीड़ ने पुलिसकर्मियों, आम नागरिकों व मीडिया को निशाना बनाया था। नाराज भीड़ ने दक्षिणी दिल्ली को कब्जे में ले लिया। प्रदर्शनकारियों के हिंसक होने व पुलिस के साथ झड़प के पांच घंटे बाद पुलिस ने जामिया नगर में फ्लैग मार्च किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले भी दागे। हिंसक भीड़ ने पुलिसकर्मियों की बड़ी टुकड़ी से संघर्ष किया और मीडिया पर भी पथराव किया।

18-05-2019
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा: मोदी को पक्षकार क्यों बनाया?

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय रजिस्ट्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा चुनावी हलफनामे में सम्पत्ति का ब्योरा छिपाए जाने की शिकायत संबंधी याचिका में फिर से कुछ सवाल खड़े किए हैं। याचिकाकर्ता साकेत गोखले ने सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री की ओर से दूसरी बार पूछे गए सवालों के बारे में पोस्ट साझा किया है। उन्होंने लिखा है, ह्यसुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने मुझसे यह स्पष्ट करने को कहा है कि याचिका में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पक्षकार क्यों बनाया गया है?


याचिकाकर्ता ने कहा कि जनहित याचिका दायर किए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने याचिका में कुछ त्रुटियों को लेकर उन्हें एक सूची सौंपी थी, मसलन पृष्ठ संख्या और अन्य सामान्य जानकारियां, लेकिन वह उस वक्त हतप्रभ रह गए जब रजिस्ट्री ने त्रुटियों के संबंध में दोबारा पत्र भेजकर यह स्पष्ट करने को कहा कि प्रधानमंत्री को इस याचिका में पक्षकार क्यों बनाया गया है। याचिकाकर्ता ने अपनी जनहित याचिका में आरोप लगाया है कि पीएम मोदी ने अपने चुनावी हलफनामों में अपनी सम्पत्ति का सही ब्योरा नहीं दिया है। प्रधानमंत्री पर आरोप है कि उन्होंने गुजरात में मिले भूखंड की सही जानकारी छिपायी है।

29-01-2019
केंद्रीय विद्यालय के छात्र रहे हैं याचिकाकर्ता

नई दिल्ली। याचिकाकर्ता विनायक शाह खुद केंद्रीय विद्यालय में पढ़े हुए हैं। याचिका के मुताबिक जब स्कूल में हर धर्म के बच्चे पढ़ने आते हैं तो किसी एक धर्म से जुड़ी प्रार्थना क्यों कराई जाती है। शाह के अलावा, मुस्लिम संस्था, जमीयत उलेमा ए हिंद ने भी इस मामले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी है। जमीयत ने साझा प्रार्थना के अनिवार्य गायन से संबंधित केवी संगठन के संशोधन शिक्षा कोड को चुनौती दी है।

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