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28-11-2020
शहरी गौठान में जैविक खेती से लहलहा रही है भाजी, आर्थिक रूप से समृद्ध होने की राह पर महिलाएं

भिलाई। एक समय था जब भिलाई नगर रेलवे स्टेशन के पास की जमीन कचरा डंप करने के कार्य आती थी, पूरी तरह से यह स्थल कचरों से भरा पड़ा रहता था। इस स्थल का कुछ भी उपयोग नहीं हो रहा था। कारण था कि पूरी तरह से जमीन के अंदर कचरा भरा होना। जब भी किसी कार्य की यहां पर शुरूआत करने की बात होती तो स्थल पर 5 फीट तक केवल झिल्ली, पन्नी का कचरा ही नजर आता था। परन्तु अब इस स्थल का बेहद सदउपयोग हो रहा है, सब्जियों की फसलें लहलहा रही है और यह सब संभव हुआ है। महापौर एवं भिलाई विधायक देवेन्द्र यादव एवं आयुक्त ऋतुराज रघुवंशी के नेतृत्व में! स्थल का सदउपयोग करने के लिए सर्वप्रथम भूमि को तैयार किया गया। कचरा को हटाकर शहरी गौठान का निर्माण किया गया और धीरे धीरे आज यह स्थल स्व. सहायता समूह की महिलाओं के लिये वरदान साबित हो रहा है। आज महिलाएं यहां पर सब्जियों की खेती कर रही है। छत्तीसगढ़ी सब्जियां एवं भाजी जैसे पालक, चैलाई, गोभी, टमाटर, मिर्ची, खट्टा भाजी, जरी भाजी, लाल भाजी इत्यादि सब्जियों का उत्पादन कर विक्रय कर रही है। तरह-तरह की सब्जियां उगा रही है और वो भी जैविक खेती से। सब्जियों में किसी भी रसायनिक खाद का उपयोग नहीं किया जा रहा है। निगम ने अगस्त 2019 को शहरी गौठान प्रारंभ किया और गोधन न्याय योजना योजना की शुरूआत होते ही स्थल का स्वरूप बदलते गया।

शहरी गौठान में पशुओं के लिये चारा, पानी, घास, हरी सब्जियां, पोषक तत्व से भरपूर चारा की व्यवस्था की गई। छाया देने के लिए शेड निर्माण किया गया। महिलाओं ने अपनी आजीविका के साधन बढ़ाने के लिये छत्तीसगढ़ी व्यंजन बनाना प्रारंभ किया, सब्जियों की खेती की गई, मछली पालन प्रारंभ किया गया। अब इस स्थल परिसर पर गोबर खरीदी केन्द्र भी प्रारंभ हो गया है। इससे महिलाओं को रोजगार के साधन के साथ ही आय की भी प्राप्ति हो रही है। गोबर से दिया, लकड़ी, कंडे, प्रतिमा, गमला तैयार कर विक्रय किया जा रहा है। और अब वृहद मात्रा में सब्जियों की खेती की जा रही है। एक पूरी फसल सब्जियों की लेने के बाद दूसरी फसल ली जा रही है, सब्जियों का उत्पादन कर महिलाये विक्रय कर रही है। 2019 से पूर्व जो स्थल डंपिंग साईट था स्व सहायता समूह की महिलाओं ने निगम के सहयोग से इसका कायाकल्प कर दिया। 

 

08-11-2020
महिला स्व सहायता समूह के लिए आमदनी का जरिया बना शहरी गौठान

भिलाई। गोधन न्याय योजना एवं शहरी गौठान, किसानों, गौपालकों के साथ-साथ गौठानों से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं की आमदनी में इजाफे का सबब बन गई है। इस योजना के तहत गौठानों में गोबर बेचने वाले पशुपालकों, चरवाहों को हर पखवाड़े में अच्छी खासी आमदनी हो रही है। इसके कारण उनकी दैनिक जीवन की जरूरतें सहजता से पूरी होने लगी है। प्रदेश सरकार की इस बहुआयामी एवं लाभकारी योजना ने देश-दुनिया को आकर्षित किया है।
नगर निगम भिलाई के जोन 1 सुनील अग्रहरि ने बताया कि जोन 1 अंतर्गत कोसानगर स्थित शहरी गौठान ने शासन की योजना को मूर्त रूप देने दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ सभी आयामों में कार्य कर रही है। परित्यक्त गोवंश जो की पशुपालकों के कोई लाभकारी काम नहीं आती और सड़कों पर दुर्घटना का कारण बनती है। ऐसी लाचार, अस्वस्थ गौवंश के बेहतर पालन का कार्य शहरी गौठान के माध्यम के नई उड़ान क्षेत्र स्तरीय संगठन की महिलाएं कर रही है। लगभग 7 एकड़ के परिक्षेत्र में फैला यह गौठान राष्ट्रीय राजमार्ग में भिलाई नगर स्टेशन केे पास स्थित है। यह स्थान ना सिर्फ शासन की शहरी गौठान योजना के मापदंडों को पूरा कर रहा है बल्कि महत्वपूर्ण योजना गोधन न्याय योजना के आयामों की भी पूर्ति कर रहा है।

इस शहरी गौठान के संचालन की विशेषता यह है की नगर निगम के जोन स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बाजारों के निकलने वाले हरी सब्जी, फलों के छिलके को संकलित कर गौठान में पहुंचाने का बीड़ा उठाया है। यह ग्रीन वेस्ट गौवंश के चारे में प्रयुक्त होता है। महिला समूह पौष्टिक दाना क्रय कर गौवंश का लालन-पालन करती है। आज लगभग 150 के अधिक परित्यक्त गौवंश का लालन-पोषण शहरी गौठान बखूबी कर रही है। इन गायों के स्वास्थ्य, जांच व उपचार के लिए जिला पशु चिकित्सालय ने पशु चिकित्स नियुक्त है। इन देसी गौवंश से निकलने वाले गोबर से महिला समूह विभिन्न उत्पाद तैयार कर गौठान को स्वावलंबी बनने तथा स्वंय का जीवन विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य कर रही है। आगामी दीपावली पर्व को दृष्टिगत रखते शहरी उड़ान सीएलएफ (सिटी लेवल फेडरेशन) की महिलाएं आकर्षक परंपरागत गोमय दीपक तैयार कर रही है। यह दीपक अब तक लगभग 25 हजार की संख्या में निर्मित हो चुका है। इसके अलावा गोबर के कंडे, धूप, सुगंधित अगरबत्ती, दंत मंजन, लक्ष्मी गणेश की मूर्तिया, मच्छर अगरबत्ती, गमले आदि तैयार कर स्थानीय बाजारों में विक्रय कर रही है। इसके अलावा इन उत्पादों की प्रसिद्धी यहां तक है कि अब जनमानस के कदम शहरी गौठान तक पहुंचने लगे हैं। गौठान में पहुंचने वाले लोग उत्पाद को खरीद ही रहे हैं साथ ही गौ सेवा का आनंद भी लेते हैं।
शहरी गौठान में भूमि जो एक समय कचरे के डम्पिंग के कार्य आती थी। आज भूखण्ड को जैविक खेती के लिए उपयोगी बनाया जा रहा है। यहां गौवंश के चारे के लिए नेपियर घास, यशवंत घास उगाई जा रही है। इसके अलावा केला व पपीते की खेती के लिए भूमि तैयार की गई है। जैविक खेती के माध्यम से यहां साग - सब्जी भी तैयार की गई है जो कि आम नागरिकों के विक्रय के लिए उपलब्ध है।

09-10-2020
ताम्रध्वज साहू ने रिसाली में किया शहरी गौठान का लोकार्पण और नवनियुक्त सात एल्डरमैन को दिलाई शपथ

रायपुर। गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने शुक्रवार को दुर्ग जिले के प्रवास के दौरान रिसाली में शहरी गौठान का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि रिसाली का गौठान बहुत अच्छा बना है। खेती के साथ पशुपालन पर भी पूरा फोकस रखें तो तेजी से आर्थिक तरक्की की दिशा में बढ़ सकते हैं। इसके लिए ही गौठान को आजीविकामूलक गतिविधियों का केंद्र बनाकर कार्य किया जा रहा है। गृह मंत्री साहू ने रूआबांधा भिलाई में पुलिस सहायता केंद्र का भी शुभारंभ किया। गृह मंत्री ने नगर निगम कार्यालय रिसाली में नवनियुक्त सात एल्डरमैन को शपथ भी दिलाई। इस अवसर पर मंत्री साहू ने कहा कि रिसाली निगम बनने के बाद यहां अब तक पंद्रह करोड़ रुपए के कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इसके विकास के लिए लोगों को बुनियादी सुविधाएं तथा आधुनिक सुविधाओं के अनुरूप अधोसंरचना उपलब्ध कराने की दिशा में कार्ययोजना बनाई गई है। इसके लिए भूमि की उपलब्धता के संबंध में बीएसपी प्रबंधन से चर्चा की गई है। शहर की जरूरतों के मुताबिक महाविद्यालय, अस्पताल, खेल मैदान, ऑडिटोरियम आदि सभी तरह की अधोसंरचनाओं पर कार्य किया जाएगा। मंत्री साहू ने इस अवसर पर निगम प्रशासन को कहा कि नागरिक सुविधाओं का ख्याल रखना बेहद अहम जिम्मेदारी है। नागरिक सुविधाओं में सबसे जरूरी होता है, सर्विस ओरिएंटेट कार्य, इसके लिए निगम के प्रवेशद्वार में ही रिसेप्शन बनायें। यहां नागरिकों से पूछें कि आपकी निगम प्रशासन से किस तरह की जरूरत है। इसके बाद उसे संबंधित शाखा में भेजें। समस्या को ध्यान से सुनें। इसे दर्ज करने ऐप बनाएं। नागरिकों को आवेदन पर कार्रवाई के लिए समयसीमा बता दें। तय समय पर इसका निराकरण करें और ऐप में इसे दर्ज कर दें।  उन्होंने कहा कि निगम के लिए सर्वसुविधायुक्त कार्यालय बनाने की दिशा में भी शीघ्र ही कार्य होगा। इस मौके पर कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे भी उपस्थित थे। उन्होंने भी एल्डरमैन को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी।

 

 

08-10-2020
शहरी गौठानों के करीब बनेंगी डबरी, हाइटेक तरीके से होगा मत्स्य पालन

दुर्ग। शहरी गौठानों के करीब हाइटेक तरीके से मत्स्यपालन को बढ़ावा देने के लिए डबरी बनाई जाएंगी। यहां अत्याधुनिक तरीके से मत्स्यपालन होगा। इसके लिए विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि फिशरीज में आए हाईटेक तरीकों के अनुरूप मत्स्यपालन को बढ़ावा दिया जा सके और इस संबंध में विपुल संभावनाओं का लाभ उठाया जा सके। इस संबंध में आयोजित बैठक में कलेक्टर डाॅ.सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने कहा कि जिले में मत्स्यपालन को लेकर बड़ी संभावनाएं हैं। यहां पर मछलियों की डिमांड काफी ज्यादा है और अभी सप्लाई बाहर से भी करनी होती है। यदि हाइटेक तरीके से मत्स्यपालन के लाभों के संबंध में अत्याधिक प्रचार किया जाए तो आय की बड़ी संभावनाएं पैदा होंगी। कलेक्टर ने कहा कि इसके लिए नगरीय निकायों के गौठानों के निकट संभावना देखी जाए। उन्होंने कहा कि इसके लिए विशेषज्ञों की भी मदद ली जाए क्योंकि मत्स्यपालन के लिए जो टैंक तैयार होता है उसके फलीभूत होने में जमीन की स्थिति अर्थात टोपोग्राफी की बड़ी भूमिका होती है। जहां पर ऐसी डबरी प्लान की जा रही है वहां पर यह सफल होगी की नहीं। इसके बाद विशेषज्ञों के साथ यह देखें कि कौन-कौन सी प्रजाति की मछलियों का पालन किया जा सकता है। इनमें पूरी तरह से हाइटेक मछलीपालन होगा जैसा जिले के प्रगतिशील मत्स्यपालक कर रहे हैं। पानी में आक्सीजन की स्थिति, तालाब की गहराई जैसी छोटी-छोटी बारीकियों पर काम  होगा। इस मौके पर जिले के प्रगतिशील मत्स्यपालक बेलचंदन भी उपस्थित थे। उन्होंने हाइटेक मत्स्यपालन की बारीकियों से भी अधिकारियों को परिचित कराया। इस मौके पर जिला पंचायत सीईओ सच्चिदानंद आलोक ने इस संबंध में ग्रामीण क्षेत्रों में हाइटेक मत्स्यपालन की वर्तमान स्थिति के संबंध में अधिकारियों को अवगत कराया।  इस मौके पर नगर निगम कमिश्नर भिलाई ऋतुराज रघुवंशी, रिसाली प्रकाश सर्वे एवं अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।

ग्रामीण क्षेत्रों में होगा हजार हितग्राहियों का चिन्हांकन

मत्स्यपालन को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में भी विशेष पहल की जाएगी। इसके लिए ऐसे हितग्राहियों को तैयार किया जाएगा जिनके पास लगभग दस डिसमिल जमीन हो। इनकी जमीन पर डबरी खुदाई जाएगी, इसके खर्च का वहन जिला प्रशासन करेगा। डबरी मत्स्यपालन के लिए तकनीकी रूप से बनी डिजाइन के अनुसार बनेगी। यहां पर मत्स्यपालन किया जाएगा। हाइटेक मत्स्यपालन के लिए प्रशिक्षण विशेषज्ञों द्वारा दिया जाएगा। जिला पंचायत सीईओ ने कहा कि इसके लिए सभी जनपद सीईओ को हितग्राही चिन्हांकन के लिए कहा जाएगा ताकि समुचित रूप से सभी जगहों में बेहतर तरीके से मत्स्यपालन हो सके।

खरपतवार वाले तालाबों में विशेष तरह से मत्स्यपालन

कई तालाबों में बेतरतीब जलीय खरपतवार विकसित हो गए हैं। इसके कारण इन तालाबों का विशेष उपयोग नहीं हो पा रहा है। यहां पर ऐसी मछलियों का उत्पादन होगा जिनका मूल आहार खरपतवार होता है। एक बार खरपतवार की समाप्ति के बाद तालाब के शुद्धिकरण का कार्य हो जाएगा और फिर नये तरीके से मत्स्यपालन शुरू हो पाएगा। कलेक्टर ने विशेषज्ञों से एनीकट आदि में भी मत्स्यपालन की संभावनाओं के विषय में जानकारी ली।

 

14-08-2020
शहरी गौठान में पशुओं के उत्तम चारा के लिए यशवंत घास का किया जा रहा है रोपण

भिलाई। नगर पालिक निगम भिलाई क्षेत्र अंतर्गत निर्मित शहरी गौठान में पशुओं के उत्तम चारा के लिए यशवंत घास एवं नेपियर ग्रास लगाने का कार्य स्व सहायता समूह की महिलाओं के द्वारा किया जा रहा है, लगभग 1/2  एकड़ क्षेत्रफल में घास लगाया जा चुका है। पशुओं के लिए पौष्टिक माने जाने वाले यशवंत घास की खासियत एवं गुणवत्ता को देखते हुए इसे रोपित किया जा रहा है।मांग के अनुसार सब्जियों का उत्पादन महिलाओं द्वारा छत्तीसगढ़ में प्रचलित भाजी एवं सब्जियों का उत्पादन मांग के अनुरूप किया जा रहा है। एक फसल पूर्ण होने के उपरांत अब महिलाओं ने दूसरी फसल लेने की तैयारी प्रारंभ कर दी है। छत्तीसगढ़ में प्रचलित चना भाजी एवं अन्य भाजी का उत्पादन महिलाएं करेंगी इसके लिए उन्होंने लेआउट तैयार कर लिया है! जगह का पूरा-पूरा उपयोग करने के लिए फलदार पौधे रोपित किए जाएंगे, बाजार में आने से पूर्व वाली फसल का भी चयन किया जा रहा है! फूलदार पौधों में गेंदा इत्यादि का उत्पादन किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि शहरी गौठान में सब्जियों की जैविक खेती की जाती रही है, क्रेता स्वयं यहां पहुंच कर सब्जी क्रय करते हैं।

वर्मी टैंक बनाने जोन क्षेत्रों में तेजी से हो रहा काम

आयुक्त ऋतुराज रघुवंशी ने सभी जोन कमिश्नरों को हर दिन गोबर खरीदी और इसके पेमेंट की स्थिति की नियमित मानिटरिंग करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्होंने वर्मी टैंक बनाने के काम में तेजी लाने के निर्देश भी जोन कमिश्नरों को दिए हैं ताकि गोबर की आवक के मुताबिक वर्मी टैंक तैयार रहें। भिलाई के शहरी गौठान में हर दिन हितग्राही लगभग सात हजार किलोग्राम के आसपास गोबर का विक्रय कर रहे हैं। यहां स्वसहायता समूहों की महिलाएं वर्मी कंपोस्ट बनाने में जुट गई हैं। गोबर की तेजी से आ रही आवक को देखते हुए वर्मी टैंक बनाने की कार्यवाही भी तेजी से की जा रही है। यहां कार्य कर रही आर्य समूह की सुशीला जंघेल ने बताया कि जिस प्रकार से गोबर की तेजी से आवक हो रही है, उससे बड़े पैमाने पर वर्मी कंपोस्ट के लिए कच्चा माल तैयार हो रहा है। हम लोग इसे प्रोसेस करने में लगे हैं। सुशीला ने बताया कि गोधन न्याय योजना में तेजी से भुगतान होने का बड़ा सकारात्मक असर दिखा है। पशुपालकों के लिए सरकार की यह योजना आर्थिक अवसर लेकर आई है। इससे लोग पशुधन को सहेजेंगे भी और पशुपालन को बढ़ावा भी मिलेगा! उल्लेखनीय है कि भिलाई में जिन जगहों पर गोबर की खरीदी की जा रही है वहां पर अतिरिक्त वर्मी कंपोस्ट बनाये जा रहे हैं। गोबर की आवक की संभावना के दृष्टिकोण से इन्हें तैयार किया जा रहा है।

01-08-2020
शहरी गौठान में समन्वय समिति की महिलाओं को दिया गया प्रशिक्षण

भिलाई। गोधन न्याय योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए नगर पालिक निगम के कोसानगर स्थित शहरी गौठान में समन्वय समिति की महिलाओं को दो चरण में प्रशिक्षण दिया गया। पहले सत्र में मौखिक प्रशिक्षण के अंतर्गत निगम उपायुक्त अशोक द्विवेदी और पीआईयू हरीश ठाकुर ने स्व सहायता समूह/ समन्वय समिति के सदस्यों को शासन की गोधन न्याय योजना के तहत गोबर खरीदी और भुगतान के बारे में विस्तार से जानकारी दी। पशुपालकों का पंजीयन, सेंटर में गोबर की खरीदी, हर दिन की खरीदी का रिकाॅर्ड पंजी बनाने और पंजीकृत हितग्राहियों को बैंकों के माध्यम से भुगतान की प्रक्रिया को विस्तार से बताया। दूसरे सत्र में प्रायोगिक प्रशिक्षण हुआ। इसमें दुर्ग जिला के वरिष्ठ कृषि अधिकारी एलबी जैन, कामधेनु कृषि विज्ञान केन्द्र अंजोरा के कार्यक्रम समन्वयक व वैज्ञानिक डाॅ.एसके थापक, सहायक संचालक सुष्मिता पाठक और एडीओ सुचित्रा दरबारी की टीम ने वर्मी कंमोस्ट और वर्मी वाॅश बनाने के तरीके बताएं। कृषि अधिकारी जैन ने बताया कि गोबर और केंचुआ खाद बनाने के दौरान पानी निकलता है। उसमें कई तरह के माइक्रो तत्व होते हैं, जिसका फसल में छिड़काव कर अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है। उन्होंने वर्मी वाॅश को पाइप के जरिए एक टैंक में एकत्र करने, कम समय में वर्मी कंपोस्ट बनाने के लिए कचरे और गोबर को जल्द डी कंपोज करने के तरीके भी बताएं। शहरी गौठान के शेड का निरीक्षण कर गोबर से केंचुआ खाद बनने की प्रक्रिया तक जरूरी सावधानी जैसे टंकी की सतह को जमीन से निर्धारित ऊंचाई पर रखने की बात कही। टंकी में पर्याप्त छाया, केंचुए की सुरक्षा के लिए टंकी के चारो तरफ नाली बनाकर पानी भरने कहा। ताकि चींटी आदि केंचुएं को नुकसान न पहुंचा सके! जोन-1 आयुक्त सुनील अग्रहरि ने वित्तीय व्यवस्था के बारे में बताया। सहकारी साख समिति के माध्यम से शहरी गौठान के उत्पाद, जैविक खाद सहित अन्य वस्तुओं का मार्केटिंग और सेलिंग करना बताया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में जोन-2 की आयुक्त पूजा पिल्ले, जोन-3 की आयुक्त प्रीति सिंह, जोन-4 के आयुक्त अमिताभ शर्मा, जोन-5 के आयुक्त महेन्द्र पाठक, लेखा अधिकारी जितेन्द्र ठाकुर, सूडा के अभिनव ठोकने, एआरओ शरद दुबे, संजय वर्मा, परमेश्वर चंद्राकर, मलखान सिंह शोरी और स्वच्छता निरीक्षक मौजूद रहे।

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