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02-08-2020
पंच गव्य से बनी वैदिक राखियों से ग्रामीणों की आय में वृद्धि

राजनांदगांव। बाजार में पंचगव्य से बनी राखियां लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। राजनांदगांव के  समीपस्थ ग्राम लिटिया में चाइना की बनी राखियों को बाजार से हटाया गया। गोधन योजना की शासन की महत्वाकांक्षी योजना को फलीभूत करने पंच गव्य से निर्मित राखियों ने बाजार में लोगों को आकर्षित करना शुरू कर दिया है। यहाँ की बनी राखियां देश के अन्य प्रदेशों में भी जाती हैं , हालांकि इस त्योहारी सीजन में कोरोना की मार के चलते इनका व्यापार कम जरूर हुआ है। यहाँ महिला समूहों द्वारा इन राखियों का निर्माण किया जाता है। पूरे प्रदेश में इस वर्ष प्राकृतिक संसाधनों से राखियां बनाने की नई शुरूआत हुई है जो ग्रामीण के लिए भविष्य में अच्छा आय का साधन बनेगा।

26-07-2020
बृजमोहन ने कहा, गायों की मौत नहीं यह गौ हत्या है, गौठान रोका छेका से लेकर गोधन योजना को बताया सुपर फ्लॉप

रायपुर। विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने बिलासपुर जिले के तखतपुर ब्लाक में मेडापार गांव में गायों की दम घुटने से हुई दर्दनाक मौत को सीधा सीधा गौ हत्या करार दिया है। बृजमोहन ने कहा कि सरकार के रोका छेका के निर्देश के बाद बिना किसी तैयारी के इनके धरातल पर लाने प्रशासनिक आतंक के चलते रोका छेका के नाम पर गांव गांव में यही हाल है। ये तो एक गांव है हाल सामने आया है,पूरे प्रदेश के गांवों का यही हाल है। जिस गांव में गौठान नहीं है, जहां कांजी हाउस नहीं है, वहां रोका छेका का निर्देश किसका था।  चारे की कहीं व्यवस्था नहीं है पानी की कहीं व्यवस्था नहीं है बरसात में गायों को रखने की व्यवस्था नहीं है वहां पर सैकड़ों गायों को कमरे में ठूंसकर रखा गया। भोजन, पानी, हवा न होने के कारण, गायों की मौत दम घुटने से तड़प तड़प कर हुई है। यह मौत नहीं सीधा सीधा गौ हत्या है।

सरकार स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर एफआरआई कराकर गौ हत्या के इस पाप से बच नहीं सकती।अग्रवाल ने कहा कि सरकार की सभी योजनाएं एक एक कर सुपर फ्लॉप रही है। गोधन न्याय योजना गोधन अन्याय योजना में परिवर्तित हो गई है। सरकार ने रोका छेका के तहत रखने वाले गायों के चारे की व्यवस्था ही नहीं की,गांव में गायों को रोका छेका कर रखने की उचित जगह ही नहीं है, गांव गांव में जो आदर्श गौठान बनाये गए हैं,उसमें ज्यादातर तो कागजों में बने हैं।अग्रवाल ने मांग की है कि सरकार को गौठान से लेकर रोका छेका व गोधन न्याय योजना की एक बार हर स्तर पर समीक्षा होनी चाहिए। जब तक गायों की रखने की व्यवस्था, चारे की समुचित व्यवस्था,पानी की समुचित व्यवस्था न हो इस योजना को तब तक के लिए स्थगित कर देना चाहिए।

 

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