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05-12-2019
टीएस सिंहदेव ने कहा, सभी अस्पतालों में मरीजो को मिले दवाईयां  

रायपुर। स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने गुरूवार को मंत्रालय में स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सा शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कार्पोरेशन (सीजीएमएससी), डीकेएस सुपरस्पेशियालिटी अस्पताल और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने बैठक में इन सभी विभागों की वित्तीय एवं नई व्यवस्थागत जरूरतों के बारे में विभागाध्यक्षों से जानकारी ली। स्वास्थ्य मंत्री ने सीजीएमएससी को दवाईयों की खरीदी प्रक्रिया शीघ्र पूरी कर सभी अस्पतालों को पर्याप्त मात्रा में दवाईयां उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने डीकेएस सुपरस्पेशियालिटी अस्पताल में दुकानों के संचालन के लिए जल्द नया टेंडर जारी करने कहा। उन्होंने वहां विद्युत के साथ ही सौर ऊर्जा का भी उपयोग कर बिजली के खर्चों में कमी लाने का सुझाव दिया।

बैठक में बताया गया कि छत्तीसगढ़ में एंटी-रैबीज के 50 हजार टीके हाल ही में पहुंचे हैं, जिन्हें अस्पतालों को उनकी मांग के अनुसार उपलब्ध कराया जा रहा है। जल्द ही एक लाख टीके और आने वाले हैं। स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव ने अधिकारियों को इस टीके का निर्माण करने वाली कंपनी इंडियन इम्युनोलॉजिकल लिमिटेड (आआईएल) के चेयरमैन से बात कर प्रदेश की जरूरत के मुताबिक पर्याप्त संख्या में टीकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने मेडिकल कॉलेजों के प्राध्यापकों और स्टॉफ का उपयोग जिला चिकित्सालयों एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के स्टॉफ को प्रशिक्षित एवं उपचार की नई तकनीकों को साझा किए जाने पर भी चर्चा की गई। सिंहदेव ने स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने विभागीय बजट के साथ ही सीएसआर और डीएमएफ राशियों के सदुपयोग के निर्देश दिए। समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य विभाग की सचिव निहारिका बारिक सिंह, आयुक्त एवं सीजीएमएससी के प्रबंध संचालक भुवनेश यादव, संचालक स्वास्थ्य सेवाएं नीरज बंसोड़, संचालक चिकित्सा शिक्षा डॉ. एसएल आदिले और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला सहित अनेक वरिष्ठ विभागीय अधिकारी मौजूद थे

06-11-2019
डॉ. रेणुका गहिने होंगी राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज की नई डीन

रायपुर। प्रदेश के चिकित्सा महाविद्यालय में बुधवार को डीन बदले गए है। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अवर सचिव केके मोटवानी के जारी आदेश के अनुसार राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज का नया डीन डॉ. रेणुका गहिने को बनाया गया है। फिलहाल डॉ. रेणुका रायपुर मेडिकल कॉलेज में पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष है। अम्बिकापुर मेडिकल कॉलेज का नया डीन आरके सिंह हो बनाया है। अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. विष्णु दत्त का प्रभार बदला गया है उन्हें चिकित्सा शिक्षा संचालनालय में पदस्थ किया गया है।  

 

16-10-2019
8 नर्सिंग कॉलेजों पर कार्रवाई, विभाग ने जांच के बाद किया जीरो ईयर घोषित

अम्बिकापुर। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने नर्सिंग कॉलेजों पर कार्रवाई की है। अमूमन अब तक इन संस्थानों पर कोई कर्रावाई नहीं होती थी नतीजन मनमाने ढंग से नर्सिंग कालेज संचालित किये जा रहे थे। लेकिन पहली बार चिकित्सा शिक्षा विभाग ने नर्सिंग कॉलेजों की जांच कराई और जांच में कमियां पाये जाने पर कालेजों को ज़ीरो ईयर घोषित कर दिया है। सरगुजा संभाग में कुल 8 निजी नर्सिंग कालेजों पर यह कार्रवाई की गई है।

दरसल बगैर साधन-सुविधा के संचालित हो रहे सरगुजा संभाग के 8 निजी नर्सिंग कॉलेजों को शिक्षा सत्र 2019-20 के लिए जीरो ईयर घोषित कर दिया गया है। संचालक चिकित्सा शिक्षा कार्यालय की उच्च स्तरीय समिति के निर्णय अनुसार छत्तीसगढ़ नर्सेज रजिस्ट्रेशन कौंसिल द्वारा पहली बार निजी नर्सिंग कॉलेजों में नकेल कसने जीरो ईयर घोषित करने से दूसरे कॉलेज प्रबंधनों में भी खलबली मची हुई है। सरगुजा संभाग से जिन निजी नर्सिंग कॉलेजों को शिक्षा सत्र 2019-20 के लिए जीरो ईयर घोषित किया गया है, उसमें एके इंस्टीट्यूट आफ नर्सिंग मनेंद्रगढ़, अशर्फी देवी इंस्टीट्यूट आफ नर्सिंग बलरामपुर, डिवाइन कॉलेज आफ नर्सिंग वाड्रफनगर, लक्ष्य कॉलेज आफ नर्सिंग सीतापुर, लवकुश इंस्टीट्यूट आफ नर्सिंग पत्थलगांव, संस्थान कॉलेज आफ नर्सिंग बैकुंठपुर, पुष्पेंद्र कॉलेज आफ नर्सिंग वाड्रफनगर, इंस्टीट्यूट आफ जनरल ट्रेनिंग सेंटर केदारपुर अंबिकापुर शामिल हैं।

05-10-2019
आदेश के बाद भी नहीं किया गया रिलीव, स्वास्थ्य सचिव ने इन्हें लिखी चिट्ठी

रायपुर। वर्ष 2019 में स्थानांतरित किए गए अधिकारियों व कर्मचारियों को अब तक भारमुक्त नहीं किया गया है। इस कारण स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की सचिव निहारिका बारिक सिंह ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों को पत्र लिखकर 9 अक्टूबर तक अनिवार्य रूप से भारमुक्त करने का निर्देश दिया है। पत्र में कहा गया है, सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी स्थानांतरण नीति 2019 के तहत 15 जुलाई से 23 अगस्त की अवधि में विभाग द्वारा विभिन्न श्रेणियों के अधिकारी कर्मचारियों को स्थानांतरित किया गया है। स्थानांतरण के बाद संबंधित नियंत्रणकर्ता अधिकारी से 12 सितंबर तक भारमुक्ति, कार्य मुक्ति का पालन प्रतिवेदन मांगा गया था, लेकिन विभाग को जानकारी मिली है कि अनेक जिलों में स्थानांतरित अधिकारियों व कर्मचारियों को नवीन पदस्थापना के लिए भारमुक्त नहीं किया गया है। इस कारण स्वास्थ्य सचिव ने सभी कलेक्टरों को भेजी चिट्ठी में 9 अक्टूबर तक रिलीव करने का आदेश दिया है।

27-09-2019
फर्जी जाति प्रमाण पत्र के 96 प्रकरणों में आदेश पारित

रायपुर। छत्तीसगढ़ में गठित उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति द्वारा जाति प्रमाण पत्र संबंधी फर्जी प्रमाण पत्रों की जांच और छानबीन कर प्रकरणों के निराकरण की कार्यवाही की जा रही है। फरवरी से अगस्त 2019 तक की विभिन्न तिथियों में समिति द्वारा 213 प्रकरणों में सुनवाई और विचारण उपरांत यथोचित निर्णय लेते हुए 96 प्रकरणों में आदेश पारित किए गए हैं। इनमें विभिन्न विभागों के 42 व्यक्तियों के जाति प्रमाण पत्र फर्जी या गलत पाए जाने के फलस्वरूप निरस्त किए गए और 25 व्यक्तियों के जाति प्रमाण पत्र सही पाए गए। 19 व्यक्तियों के प्रकरणों को धारक की मृत्यु हो जाने एवं अन्य कारणों से नस्तीबद्ध किया गया। उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति से प्राप्त जानकारी के अनुसार जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाने के कारण विभागवार निरस्त किए गए प्रकरणों में कृषि विभाग के छह, चिकित्सा शिक्षा विभाग का एक, पशु चिकित्सा विभाग के चार, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के दो, राजस्व विभाग का एक, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के तीन, तकनीकी शिक्षा विभाग के एक, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के दो, जल संसाधन, लोक अभियोजन (गृह विभाग), लोक निर्माण विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, उद्यानिकी, वन, नगरीय प्रशासन, खादी ग्रामोद्योग बोर्ड, उद्योग विभाग, भारतीय जीवन बीमा निगम और भिलाई स्टील प्लांट के एक-एक प्रकरण निरस्त किए गए। इसी प्रकार स्कूल शिक्षा विभाग के छह, जनप्रतिनिधि के तीन और दो अन्य प्रकरण निरस्त किए गए हैं।

 

08-08-2019
नए भर्ती नियम से मेडिकल कॉलेजों में संविदा पर नियुक्त डॉक्टर हो सकेंगे नियमित

राजनांदगांव। चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालयों के लिए तैयार नए आदर्श सेवा नियम से संविदा पर नियुक्त डॉक्टरों की नियमित पदस्थापना की जा सकेगी। शासकीय मेडिकल कॉलेजों में शैक्षणिक संवर्ग के पदों पर भर्ती में तेजी लाने चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा आदर्श सेवा नियम बनाया गया है। शैक्षणिक पदों पर जरूरी स्टॉफ की नियुक्ति से मेडिकल कॉलेजों में अध्यापन के स्तर में सुधार के साथ ही इलाज की सुविधाओं का विस्तार होगा। 

आदर्श सेवा नियम के अनुसार मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टर की नियुक्ति एक वर्ष के लिए अनुबंध आधार पर परिवीक्षा पर की जाएगी। ऐसे डॉक्टर यदि कॉलेज में सीनियर रेसीडेंट या अन्य वरिष्ठ चिकित्सा शिक्षक के रूप में एक वर्ष या इससे अधिक अवधि के लिए कार्य किया है, तो उसे नियमित सेवा में नियुक्ति दी जा सकेगी। चयन समिति परिवीक्षा अवधि के दौरान डॉक्टर द्वारा किए गए अध्यापन एवं चिकित्सीय कार्यों के आधार पर उन्हें नियुक्त करने की अनुशंसा करेगी। इसके आधार पर उन्हें नियमित पद पर नियुक्ति का आदेश जारी किया जाएगा। नया आदर्श सेवा नियम राज्य शासन द्वारा स्थापित स्वशासी चिकित्सा एवं दंत चिकित्सा महाविद्यालयों में लागू होंगे।

इन नियमों को छत्तीसगढ़ स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालयीन शैक्षणिक आदर्श नियम, 2019 नाम दिया गया है। कार्यकारिणी समिति द्वारा संकल्प पारित कर इन नियमों को अंगीकृत करने वाले महाविद्यालयों में ये नियम लागू होंगे। नया आदर्श सेवा नियम स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालयों के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा सृजित शैक्षणिक पदों पर लागू होगा। इसके तहत अधिवार्षिकी आयु 70 वर्ष निर्धारित की गई है। इन नियमों के लागू होने के पहले से नियुक्त चिकित्सा प्राध्यापकों को उपयुक्त पदों पर समायोजित किया जाएगा। ऐसे प्राध्यापक जिनकी नियुक्ति छत्तीसगढ़ चिकित्सा शिक्षा (राजपत्रित) सेवा भर्ती नियम, 1987 के तहत हुई है, उनकी सेवाएं राज्य शासन के नियमों द्वारा शासित होगी और वे स्वशासी समिति में प्रतिनियुक्ति पर माने जाएंगे।

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