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08-01-2020
महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा, ठाकरे और फडणवीस के बीच हुई गुपचुप तरीके से मुलाक़ात  

मुंबई। मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और मनसे प्रमुख राज ठाकरे की गुपचुप मुलाकात के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार फडणवीस और राज ठाकरे की मुलाकात मुंबई के लोअर परेल की इंडिया बुल्स इमारत में हुई। इस बीच एक घंटे तक उनके बीच बातचीत चली। इस मुलाकात में राज्य की वर्तमान स्थिति और भविष्य की रणनीति पर चर्चा हुई। 23 जनवरी को मुंबई में मनसे का सम्मलेन है और उससे पहले यह भेंट अहम मानी जा रही है। सूत्रों की मानें तो शिवसेना के कांग्रेस-एनसीपी से हाथ मिलाने के बाद भाजपा राज्य में अपने हिंदुत्व के मुद्दे को धारदार बनाए रखने के लिए मनसे को अपने साथ लेने की तैयारी में है। खबर है कि मनसे अपने सम्मलेन में झंडे को बदलने की घोषणा भी करेगी, जो पूरी तरह केसरिया होगा और उस पर छत्रपति शिवाजी महाराज की तस्वीर बनी होगी। जानकारों के अनुसार अगर भाजपा-मनसे साथ आते हैं तो यह देखना रोचक होगा कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव से पहले राज ठाकरे द्वारा पीएम मोदी पर किए हमलों पर भाजपा क्या कहेगी और राज ठाकरे भी मोदी को लेकर क्या नया रुख अपनाएंगे।

 

05-01-2020
महाराष्ट्र सरकार में हुआ मंत्रालयों का बंटवारा, जाने किसे मिले कौन से विभाग

मुंबई। महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने 30 दिसंबर को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया। शनिवार शाम को मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा कर दिया है। देर रात राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को उद्धव ठाकरे की तरफ से मंत्रालयों के बंटवारे की सूची मंजूरी के लिए भेजी गई थी। जिस पर आज सुबह उन्होंने हस्ताक्षर कर दिए हैं। सूत्रों के हवाले से जो जानकारी सामने आ रही है उसके मुताबिक राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार को वित्त मंत्रालय सौंपा गया है। इसके अलावा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अनिल देशमुश को गृह मंत्री बनाया गया है। यहां जानिए कौन सी पार्टी को कौन-कौन से मंत्रालय मिले

एनसीपी को मिले ये विभाग

अनिल देशमुख- गृह विभाग
अजित पवार- वित्त व नियोजन
जयंत पाटिल- सिंचाई विभाग
छगन भुजबल- खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति
दिलीप वल्से पाटिल- आबकारी और श्रम मंत्रालय
जीतेंद आव्हाद- आवास
राजेश टोपे- स्वास्थ्य
राजेंद्र शिंगणे- खाद्य एवं औषधि प्रशासन
धनंजय मुंडे- सामाजिक न्याय

कांग्रेस की झोली में आए ये विभाग

नितिन राउत- ऊर्जा
बालासाहेब थोराट- राजस्व
वर्षा गायकवाड़- स्कूली शिक्षा
यशोमति ठाकुर- महिला और बाल कल्याण
केसी पाडवी - आदिवासी विकास
सुनील केदार- डेयरी विकास व पशुसंवर्धन
विजय वड्डेटीवार- ओबीसी कल्याण
असलम शेख- कपड़ा, बंदरगाह
अमित देशमुख- स्वास्थ्य, शिक्षा और संस्कृति
शिवसेना के हिस्से आए ये विभाग
आदित्य ठाकरे- पर्यावरण, पर्यटन
एकनाथ शिंदे- नगरविकास
सुभाष देसाई- उद्योग
संजय राठोड़- वन
दादा भुसे- कृषि
अनिल परब- परिवहन, संसदीय कार्य
संदीपान भुमरे- रोजगार हमी (ईजीएस)
शंकरराव गडाख- जल संरक्षण
उदय सामंत- उच्च व तकनीकी शिक्षा
गुलाब राव पाटिल- जलापूर्ति

शनिवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने राज्य में मंत्रियों के विभागों के वितरण को लेकर चर्चा की थी। उद्धव ठाकरे ने नवंबर में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उनके साथ कांग्रेस के दो विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली थी। 

04-01-2020
मंत्रिमंडल बना नही और नाराज़गी का खेल शुरू, सावरकर पर भी विवाद जारी

रायपुर। मंत्रिमंडल बना नहीं विभाग बटे नहीं और नाराजगी भी शुरू हो गई है। शिवसेना कांग्रेस और एनसीपी की मिली जुली सरकार में पोर्टफोलियो को लेकर एक मंत्री अब्दुल सत्तार की नाराजगी सामने आ गई है। हालांकि उनके इस्तीफे की भी खबरें सामने आई लेकिन खुद अब्दुल सत्तार ने उससे इनकार कर दिया मगर वे नाराजगी में छुपा नहीं पाए। और उनकी नाराजगी संभवत कल शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे से मिलने के बाद खत्म हो पाए। नाराजगी अगर खत्म होती भी है तो भी यह गठबंधन की सरकार के लिए शुभ संकेत तो नहीं कहा जा सकता। इतनी जल्दी नाराजगी सामने आना कोई बहुत अच्छी बात नहीं माना जा सकता हैं। फिर सावरकर को लेकर भी पार्टियों के बीच खींचतान जारी है। इधर अजित पवार फिर से उपमुख्यमंत्री पद पा गए हैं और साथ ही वित्त विभाग जैसा महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो भी। फडणवीस के साथ भी उपमुख्यमंत्री और उद्धव ठाकरे के साथ भी उपमुख्यमंत्री याने कुल मिलाकर उपमुख्यमंत्री रहना बनना ज्यादा जरूरी। सिद्धांत की बात बहुत पीछे हो जाती है। ऐसे में 3 चक्के वाला ऑटो कितनी रफ्तार से और कितनी दूर तक चलेगा इस पर इसलिए भी शक किया जा रहा है क्योंकि तीनों चक्के अलग-अलग दिशा मैं भागने वाले हैं। बहरहाल सत्तार की नाराजगी ने पहले ही कदम पर छींक मार कर अपशकुन कर दिया है।

02-01-2020
मुंबई नहीं दिल्ली की 'मातोश्री' से मिलते है उद्धव सरकार को आदेश : देवेंद्र फडणवीस

मुंबई। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महाविकास आघाड़ी की सरकार के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर बुधवार को जोरदार हमला किया। मुंबई से लगे पालघर में भाजपा कार्यकर्ताओं के एक सम्मेलन में उन्होंने कहा, 'उद्धव ठाकरे ने अपने पिता बाला साहब ठाकरे को वचन दिया था कि वह राज्य में शिवसेना का मुख्यमंत्री कुर्सी पर बैठाएंगे। मगर, क्या उन्होंने यह भी कहा था कि कांग्रेस-एनसीपी की मदद से अपनी पार्टी का मुख्यमंत्री बनाएंगे?' फडणवीस ने नाम लिए बिना इशारों में कहा कि अब महाराष्ट्र में सरकार को मातोश्री (ठाकरे निवास) से निर्देश नहीं मिलते बल्कि दिल्ली की 'मातोश्री' से आदेश आते हैं। उन्होंने कहा कि आज बाला साहब की आत्मा को दुख होता होगा।

शिवसेना पर लगाया विश्वासघात का आरोप

देवेंद्र फडणवीस ने शिवसेना पर विश्वासघात करने का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य की जनता ने भाजपा-शिवसेना गठबंधन को सरकार बनाने का बहुमत दिया था। मगर शिवसेना ने उसे ठुकरा कर, दूसरों के साथ सरकार बना ली। फडणवीस ने कहा कि राज्य की सरकार में आने के बाद शिवसेना ने किसानों से भी धोखा किया। सभी किसानों को पूर्ण कर्ज माफी का वादा किया गया था। मगर कुछ किसानों को ही एक तय रकम की माफी दी गई।

महाराष्ट्र सरकार में पवार के दखल से शिवसैनिक नाराज

महाराष्ट्र सरकार में एनसीपी प्रमुख शरद पवार के दखल से शिवसैनिक नाराज हैं। उन्होंने नाराजगी खुलकर व्यक्त करनी शुरू कर दी है। सरकार बनने के एक महीने बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मंत्रिमंडल विस्तार किया था, जिसके बाद हर तरफ नाराजगी के स्वर उठने लगे। खासतौर पर शिवसेना के नाराज विधायकों को समझाना उद्धव के लिए समस्या है। खबर है कि इन विधायकों ने उद्धव से मिलने का समय मांगा है। सूत्रों का कहना है कि मंत्रिमंडल विस्तार में शरद पवार के हस्तक्षेप ने शिव सैनिकों को खास तौर पर नाराज किया। उनमें इस बात की भी नाराजगी है कि पवार ने अपनी जोड़ तोड़ की ताकत से अहम मंत्रालय एनसीपी नेताओं को दिला दिए। शिवसेना सांसद संजय राउत की नाराजी पहले ही सामने आ चुकी है। अब प्रताप सरनाईक, भास्कर जाधव और भावना गवली भी खुल कर बोल रहे हैं।   

 

30-12-2019
महाराष्ट्र : उद्ध‌व ठाकरे सरकार का पहला मंत्रिमंडल विस्तार, अजित और आदित्य ने ली शपथ

नई दिल्ली। महाराष्ट्र की उद्ध‌व ठाकरे की सरकार मंत्रिमंडल का सोमवार को पहला विस्तार हुआ है। शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी सभी मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। एनसीपी के अजित पवार, शिवसेना के आदित्य ठाकरे, कांग्रेस के अशोक चव्हाण ने मंत्री पद की शपथ ली है। अजित पवार राज्य के डिप्टी सीएम नियुक्त किए गए। नियम के मुताबिक, महाराष्ट्र सरकार में मुख्यमंत्री के अलावा 42 मंत्री हो सकते हैं।

इनमें शिवसेना के 16 मंत्री हैं। एनसीपी के 14 और कांग्रेस के 12 मंत्री हैं। सोमवार को शिवसेना से आदित्य ठाकरे, अनिल परब, उदय सामंत, बच्चू कडू, संजय राठोड, शंभुराजे देसाई, अब्दुल सत्तार, गुलाबराव पाटील, दादा भुसे ने मंत्री पद की शपथ ली है। कांग्रेस से पूर्व सीएम अशोक चव्हाण, केसी पडवी, विजय वडेट्टिवर, अमित देशमुख, सुनील केदार, यशोमती ठाकुर, वर्षा गायकवाड़, असलम शेख, सतेज पाटिल और विश्वजीत कदम मंत्री बने। एनसीपी से अजित पवार, धनंजय मुंडे, जीतेंद्र अव्हाड, नवाब मलिक, दिलीप वलसे पाटील, हसन मुश्रीफ, बालासाहेब पाटील, दत्ता भरणे, अनिल देशमुख, राजेश टोपे, शंकरराव, अदिति टटकरे, संजय बनसोड़े, प्राजक्त तनपुरे और डॉ. राजेंद्र शिंगणे ने मंत्री पद की शपथ ग्रहण की।

 

30-12-2019
36 मंत्रियों के साथ आज उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते है अजित पवार

मुंबई। महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में बनी महा अघाड़ी सरकार के गठन के करीब एक महीने बाद सोमवार को पहला कैबिनेट विस्तार होने वाला है। इसी बीच खबर है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के वरिष्ठ नेता अजित पवार उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। उनके नाम को लेकर काफी समय से चर्चा चल रही थी हालांकि किसी भी पार्टी ने स्पष्ट तौर पर उनके नाम की घोषणा नहीं की थी। इससे पहले माना जा रहा था कि अजित उद्धव ठाकरे के साथ पद एवं गोपनीयता की शपथ लेंगे मगर ऐसा नहीं हुआ। उनके अलावा 36 नए मंत्रियों को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। इससे पहले एनसीपी प्रवक्ता नवाब मलिक ने यह कहकर मुद्दे को हवा देना का काम किया था कि एनसीपी कार्यकर्ता अजित पवार को राज्य के उप मुख्यमंत्री के तौर पर देखना चाहते हैं। उद्धव ने 28 नवंबर को शिवाजी पार्क में मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ग्रहण की थी। उस समारोह में छह मंत्रियों की छोटी सी कैबिनेट ने भी शपथ ग्रहण की थी जिसमें तीनों ही दलों की तरफ से दो-दो मंत्री शामिल थे।

दो बार डिप्टी सीएम रह चुके हैं अजित

शरद पवार के भतीजे अजित 2014 से पूर्व कांग्रेस-एनसीपी सरकार में भी उपमुख्यमंत्री थे। इस विधानसभा चुनाव के बाद अजित 23 नवंबर को अचानक भाजपा के साथ चले गए थे और देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार में डिप्टी सीएम बने थे। हालांकि 80 घंटे के अंदर ही अजीत ने इस्तीफा दिया और फडणवीस सरकार गिर गई। ठाकरे के नेतृत्व में 28 नवंबर को शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस के छह मंत्रियों ने भी शपथ ली थी।

36 मंत्री ले सकते हैं शपथ

कैबिनेट विस्तार में लगभग 36 मंत्री शपथ ले सकते हैं। फिलहाल मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के मंत्रिमंडल में उनके अलावा छह मंत्री हैं। शिवसेना, एनसपी और कांग्रेस के बीच हुए सत्ता साझेदारी के तहत शिवसेना के पास मुख्यमंत्री के अलावा 16 मंत्री हो सकते हैं, इसके अलावा एनसीपी के 14 और कांग्रेस के 12 मंत्री होंगे। कांग्रेस ने 12 मंत्री होने की पुष्टि कर दी है। 

29-12-2019
30 दिसंबर को महाराष्ट्र मंत्रिमंडल का विस्तार,अजित पवार सहित कांग्रेस के विधायक लेंगे शपथ

नई दिल्‍ली। महाराष्ट्र सरकार का पहला मंत्रिमंडल विस्तार सोमवार को होगा। बता दें कि शिवसेना-कांग्रेस और एनसीपी के बीच पेंच फंसा हुआ था। रविवार को तीनों पार्टियों के बीच मंत्रिमंडल का बंटवारा हो गया है। एनसीपी की ओर से अजित पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इसके साथ ही कांग्रेस 12 मंत्री भी शपथ लेंगे। उद्धव ठाकरे मंत्रिमंडल का विस्तार सोमवार दोपहर 12 बजे होगा। महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता बालासाहेब थोरात ने कहा कि सोमवार को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह के लिए सूची को अंतिम रूप दे दिया गया है। उन्होंने बताया कि एनसीपी नेता अजित पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। पीएमओ के तर्ज पर महाराष्ट्र में सीएमओ (चीफ मिनिस्टर ऑफिस) होगा। शिवसेना विधायक अनिल परब राज्यमंत्री सीएमओ होंगे। 

15-12-2019
सावरकर कांग्रेस के लिए गद्दार तो शिवसेना के लिए महान, ये हाल है कॉमन मिनिमम प्रोग्राम का

रायपुर। तेल और पानी के मेल के खेल की पोल आखिर खुल ही गई। शिवसेना कांग्रेसऔर एनसीपी महागठबंधन सावरकर के मुद्दे पर बंटता नजर आ रहा है। राहुल गांधी का बयान कि मैं राहुल सावरकर नहीं हूं शिवसेना के गले की फांस बन गया है। वह शिवसेना के गले उतर नहीं रहा है। शिवसेना की राजनीति सिर्फ और सिर्फ महाराष्ट्र तक ही सीमित है और महाराष्ट्र में सावरकर को स्वातंत्र्य वीर कहा जाता है। ऐसे में राहुल का सावरकर पर हमला कांग्रेस एनसीपी शिवसेना के कॉमन मिनिमम प्रोग्राम की धज्जियां उड़ाता नजर आता है। वैसे भी इस महागठबंधन के अस्तित्व में आने से पहले ही इसके खत्म हो जाने की आशंकाओं पर ज्यादा बात हुई है। सिर्फ और सिर्फ भाजपा को रोकने के लिए इस तरह का गठबंधन कांग्रेस ने कर्नाटक में भी किया था जहां उन्हें मुंह की खानी पड़ी। आज वहां भाजपा की सरकार है। कमोबेश ऐसी ही स्थिति महाराष्ट्र में थी। जहां विपरीत विचार विपरीत ध्रुव की पार्टियां आपस में मिल गई कि उन्हें नरेंद्र मोदी शाह की जोड़ी को रोकना था।भाजपा को सरकार बनाने से रोकना था। देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री बनने से रोकना था। और खुद शिवसेना के सुप्रीमो को मुख्यमंत्री बनाना था। बहरहाल सरकार बने गिनती के दिन बीते हैं और विवाद शुरू हो गया है। यह बता देता है कि पानी और तेल का मेल हो नहीं सकता। और अगर हुआ भी तो उस मेल के खेल की पोल खुलनी तो तय ही है।

12-12-2019
शिवसेना, कांग्रेस, एनसीपी के कामन मिनिमम प्रोग्राम की धज्जियां उड़ा दी नागरिकता संशोधन बिल ने

रायपुर। महाराष्ट्र में कांग्रेस शिवसेना व एनसीपी की मिली जुली सरकार बने ज्यादा समय नहीं हुआ और पहली ही परीक्षा में उनके कॉमन मिनिमम प्रोग्राम की धज्जियां उड़ा दी नागरिकता संशोधन बिल ने। नागरिकता संशोधन बिल पर एनसीपी और कांग्रेस ने जहां लोकसभा में बिल के खिलाफ मतदान किया तो शिवसेना बिल के समर्थन में खड़ी नजर आई। शिवसेना के बदले रुख से नाराज एनसीपी और कांग्रेस ने जब दबाव बनाया तो 2 दिन बाद ही राज्यसभा में नागरिकता संशोधन बिल पेश होने पर शिवसेना ने यु टर्न मार लिया। लोकसभा में बिल के समर्थन में मतदान करने वाली शिवसेना राज्यसभा में मतदान ना कर वाकआउट करते नजर आई। यानी यहां भी उसने इस बिल का समर्थन तो नहीं किया लेकिन बिल का विरोध कर रही कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर विरोध में मतदान भी नहीं किया। कट्टर हिंदुत्व और कथित धर्मनिरपेक्षता की चक्की में शिवसेना बुरी तरह पिस गई है। और महाराष्ट्र की महाआघाड़ी की सरकार का न्यूनतम साझा प्रोग्राम साफ दम तोड़ता नज़र आया। एनसीपी कांग्रेस और शिवसेना के लिए ये बुरा सपना है तो महाराष्ट्र में भाजपा के लिए उम्मीद की किरण बनाता नज़र आ रहा है।

11-12-2019
कभी हां कभी ना, में उलझ गई शिवसेना, न कट्टर हिंदूवादी रहे न ही धर्मनिरपेक्ष बन पाए

रायपुर। नागरिकता संशोधन बिल के मामले में उलझ कर रह गई है शिवसेना। कभी हां तो कभी ना। लोकसभा में समर्थन किया तो राज्यसभा में वाक आउट। एक बिल पर दो रवैया शिवसेना के कन्फ्यूजन को आम जनता के बीच स्थापित कर गया। शिवसेना नागरिकता संशोधन बिल को ना उगल पाई ना निगल पाई। उलझ कर रह गई शिवसेना। लोकसभा में समर्थन कर के उसने अपनी कट्टर हिंदुत्व वाली छवि को बचाए रखने की कोशिश की लेकिन महाराष्ट्र में सरकार बचाने के लिए कांग्रेस का दबाव झेल कर उसे राज्यसभा में वाक आउट करना पड़ा। अब शिवसेना पर यह आरोप आ रहा है कि वह ऐसे बिल का लोकसभा में तो समर्थन करती है लेकिन राज्यसभा में उसका विरोध करती है। किसी भी राजनीतिक पार्टी के लिए यह दुविधा की स्थिति बहुत खतरनाक है। क्योंकि उसका जो वोट बैंक है वह तो खिसकता ही है दूसरे जिस वोट बैंक के लिए वह जा रही है वह भी उसके भरोसे में नहीं आता। बहरहाल नागरिकता संशोधन बिल पर शिवसेना का जो दोहरा रवैया रहा वह महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार के गले की फांस बनता जा रहा है। अब देखना यह है की नागरिकता संशोधन बिल का समर्थन करने वाली शिवसेना को कांग्रेस और एनसीपी स्वीकार करती है या फिर राज्यसभा में उसका विरोध ना कर वाकआउट करने वाली शिवसेना का वह विरोध करती है। कुल मिलाकर देखा जाए तो मिलीजुली खिचड़ी की हांडी फूटती नजर आ रही है।

 

08-12-2019
देवेंद्र फडणवीस ने तोड़ी चुप्पी, अजित पवार को लेकर कही ये बात...

रायपुर/मुंबई। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एनसीपी नेता अजित पवार के साथ अचानक सरकार बनाने पर अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने खुलासा किया कि एनसीपी प्रमुख शरद पवार की रजामंदी से अजित ने सरकार बनाने के लिए हमसे संपर्क किया था। उन्होंने 54 विधायकों के समर्थन की भी बात कही थी और कई से बात भी कराई थी। साथ ही भाजपा नेता ने स्वीकार किया कि हमारा यह दांव उल्टा पड़ गया। फडणवीस ने कहा कि अजित पवार ने कहा था कि हम शिवसेना और कांग्रेस साथ तीन पार्टियों की सरकार नहीं चला सकते हैं। इसलिए हमें मिलकर सरकार बनानी चाहिए। अजित ने यह भी कहा था कि शरद पवार से सरकार बनाने को लेकर पूरी बात हो गई है और उनकी इजाजत है। भाजपा नेता ने दावा किया कि अजित ने एनसीपी के कई विधायकों से उनकी बात भी कराई थी। इसी भरोसे पर हमने सरकार बनाई थी लेकिन हमारा यह कदम गलत साबित हुआ। एनसीपी प्रमुख शरद पवार के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से प्रस्ताव पर उन्होंने कहा कि इस बारे में हम वक्त आने पर जवाब देंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा किसी से डील नहीं करती है। अगर करती तो किसी भी पार्टी के साथ ढाई साल के फार्मूले पर राजी हो जाते और हमारी सरकार बन जाती। शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे के साथ रिश्तों पर उन्होंने कहा कि उनसे निजी संबंध जैसे पहले थे, वैसे ही अब भी हैं। 

 

07-12-2019
सीएम बनने के बाद प्रधानमंत्री से पहली बार मिले ठाकरे

मुंबई। भाजपा के साथ गठबंधन तोड़कर कांग्रेस-एनसीपी की मदद से महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बर शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। ठाकरे शुक्रवार शाम को पीएम मोदी का स्वागत करने के लिए पुणे एयरपोर्ट पर पहुंचे। पीएम यहां होने जा रहे पुलिस महानिदेशकों व महानिरीक्षकों के राष्ट्रीय सम्मेलन में शिरकत करने के लिए पहुंचे हैं। राज्य सरकार के अधिकारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री का स्वागत करने के बाद ठाकरे मुंबई के लिए रवाना हो गए। हालांकि इस बात की जानकारी नहीं मिल सकी है कि दोनों के बीच एयरपोर्ट पर क्या बातचीत हुई। एयरपोर्ट पर पीएम मोदी का स्वागत करने वालों में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी और भाजपा नेता व पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी शामिल रहे।
 
भाजपा और शिवसेना ने पिछले महीने हुए राज्य विधानसभा चुनावों में एक गठबंधन के तौर पर शिरकत की थी, लेकिन चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद दोनों पार्टियों में तल्खी पैदा हो गई थी। शिवसेना चुनाव से पहले तय की गई शर्तों का हवाला देते हुए अपने लिए ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद मांग रही थी, जबकि भाजपा ने ऐसा कोई समझौता होने से इनकार करते हुए उसे उपमुख्यमंत्री पद देने का प्रस्ताव रखा था। बाद में दोनों दलों ने अपना गठबंधन तोड़ दिया था। परिणाम घोषित होने के बाद नाटकीय घटनाक्रमों के बीच आखिरकार उद्धव ने एनसीपी व कांग्रेस के समर्थन से मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी और इसी के साथ वह ठाकरे परिवार से सरकार में कोई पद संभालने वाले पहले सदस्य बन गए थे।

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