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18-09-2020
भूपेश बघेल ने कहा-केन्द्र सरकार का एक राष्ट्र-एक बाजार अध्यादेश किसानों के लिए अहितकारी

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि, केन्द्र सरकार का एक राष्ट्र-एक बाजार अध्यादेश किसानों के हित में नहीं है। इससे मंडी का ढांचा खत्म होगा, जो किसानों और व्यापारियों दोनों के लिए लाभप्रद नहीं है। अधिकांश कृषक लघु सीमांत है, इससे किसानों का शोषण बढ़ेगा। उनमें इतनी क्षमता नहीं कि राज्य के बाहर जाकर उपज बेच सके। किसानों को उनकी उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिलेगा। केन्द्र सरकार की ओर से आवश्यक वस्तु अधिनियम में किए गए संशोधन से आवश्यक वस्तुओं के भंडारण और मूल्य वृद्धि के विरुद्ध कार्यवाही करने मे कठिनाई होगी। कान्ट्रैक्ट फार्मिंग से निजी कंपनियों को फायदा होगा। सहकारिता में निजी क्षेत्र के प्रवेश से बहुराष्ट्रीय कंपनिया, बड़े उद्योगपति सहकारी संस्थाओं पर कब्जा कर लेंगे और किसानों का शोषण होगा।  मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शुक्रवार को अपने निवास कार्यालय से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले को 332.64 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात देने के बाद कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरण दास महंत ने की। कार्यक्रम में सभी मंत्री, लोकसभा सांसद ज्योत्सना महंत और अन्य जनप्रतिनिधि कार्यक्रम में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि, आम जनता के हितों का संरक्षण और उनकी खुशहाली हमारी सरकार की प्राथमिकता है।

यह प्रेरणा हमें विरासत में मिली है। देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू से लेकर लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी की नीतियों और आदर्शों का अनुसरण करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार गरीबों, मजदूरों, किसानों और आदिवासियों के बेहतरी के लिए कार्य कर रही है। कोरोना आपदा काल में छत्तीसगढ़ सरकार ने लोगों को अपने जनहितैषी कार्यक्रमों और योजनाओं के जरिए 70 हजार करोड़ रुपए की सीधे मदद दी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि,आज देश और दुनिया कोरोना संकट से जूझ रही है। बहुत से देशों की राष्ट्रीय सरकारों ने किसानों, गरीबों और आपदा पीड़ितों के प्रति सहानुभूति का रवैया रखते हुए बीमारी के नियंत्रण में अच्छी सफलता हासिल की है,लेकिन हमारे देश ने जिस तरह से सर्जिकल स्ट्राइक के तरीके से नोटबंदी, जीएसटी और लॉकडाउन किया गया, उससे लगातार हालत खराब होती गई और सबका मिला-जुला असर कोरोना काल में राष्ट्रीय आपदा के रूप में सामने आया है। यदि केन्द्र सरकार रचनात्मक और सहानुभूतिपूर्ण रवैया रखती तो देश को आज जैसे दिन नहीं देखने पड़ते। मुुख्यमंत्री ने कहा कि आज केन्द्र सरकार की ओर से विश्वव्यापी कोरोना संकट के समय के अवसर को अच्छा अवसर मानते हुए कृषकों के शोषण के लिए चार अध्यादेश लाया गया है। इसके तहत एक राष्ट्र- एक बाजार के तहत एक्ट में संशोधन किया गया है। इसमें किसानों को देश के किसी भी हिस्से में अपनी उपज बेचने की छूट दी गई है।

इसमें किसान और व्यापारी को उपज खरीदी-बिक्री के लिए राज्य की मंडी के बाहर टैक्स नहीं देना होगा अर्थात मंडी में फसलों की खरीदी-बिक्री की अनिवार्यता समाप्त हो जाएगी और निजी मंडियों को बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि, इसी तरह आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 में संशोधन, खाद पदार्थों के उत्पादन और बिक्री को नियंत्रण मुक्त किया गया है। तिलहन, दलहन, आलू, प्याज जैसे उत्पादों से स्टाक सीमा हटाने का फैसला लिया गया है। कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग और सहकारी बैंकों में निजी इक्विटी की अनुमति का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा स्पष्ट मत है कि कोरोना आपदा के समय में केन्द्र सरकार की ओर से जो अध्यादेश लाए गए हैं, उसका बहुत बुरा असर होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम पुरजोर तरीके से केन्द्र सरकार के किसान विरोधी कानूनों का विरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि आज देश के सामने दो मॉडल स्पष्ट हैं कि आपदा में जनसेवा के माध्यम से विश्वास जगाते हुए सबको साथ लेकर चलने वाला छत्तीसगढ़ी मॉडल और दूसरा आपदा को मनमानी करने का अवसर मानने वाला केन्द्र सरकार का मॉडल। उन्होंने कहा कि हमें अपने छत्तीसगढ़ी मॉडल पर भरोसा है, जिसने आपदा के समय में जरुरतमंदों को सीधे मदद पहुंचाने के साथ ही नवगठित जिला गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही के विकास को नया आयाम दिया है।

 

 

16-09-2020
लॉक डाउन के दौरान 90 प्रतिशत से अधिक बच्चों को मिला मध्यान्ह भोजन का लाभ, सर्वेक्षण में छत्तीसगढ़ टॉप पर 

रायपुर। कोरोना संकट काल में भी मध्यान्ह भोजन योजना के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल रहा है। प्रदेश में लॉक डाउन के दौरान 90 प्रतिशत से अधिक बच्चों को मध्यान्ह भोजन का लाभ मिला है, जबकि इस दौरान अन्य राज्यों में मध्यान्ह भोजन वितरण की स्थिति काफी खराब रही। आक्सफैम इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार स्कूल बंद होने से देश के 27 करोड़ बच्चे प्रभावित हुए हैं, जबकि नेशनल फूड सिक्यूरिटी एक्ट 2013 के तहत मध्यान्ह भोजन प्रत्येक बच्चे का अधिकार है। लोकसभा में विगत 14 सितंबर को एक प्रश्न के उत्तर में केन्द्र सरकार ने यह माना कि, मध्यान्ह भोजन योजना के लाभ से बहुत से बच्चों को वंचित रहना पड़ा। आक्सफैम इंडिया के सर्वेक्षण में छत्तीसगढ़ का देश में सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा है। छत्तीसगढ़ में 90 प्रतिशत से अधिक बच्चों को मध्यान्ह भोजन योजना का लाभ मिला है।

जबकि उत्तर प्रदेश में 92 प्रतिशत बच्चों को मध्यान्ह भोजन से वंचित रहे। सर्वेक्षण में यह भी बताया गया है कि, उत्तर प्रदेश में जहां खाद्यान्न सुरक्षा भत्ता प्रदान करने पर ध्यान केन्द्रित किया गया। छत्तीसगढ़ में राशन की होम डिलिवरी पर ध्यान केन्द्रित किया गया। लॉक डाउन के दौरान पिछले मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में स्कूलों के बंद होने के बीच मध्यान्ह भोजन की आपूर्ति तय करने के निर्देश दिए थे। इसके तारतम्य में छत्तीसगढ़ ने तत्काल कदम उठाते हुए स्कूली बच्चों को स्कूलों और बच्चों के घरों तक पहुंचाकर मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराने के इंतजाम किए। 

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 21 मार्च को सभी कलेक्टरों और जिला शिक्षा अधिकारियों मध्यान्ह भोजन योजना के तहत स्कूली बच्चों को सूखा राशन वितरण के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए थे। गांव-गांव में इसकी मुनादी कराई गई। देश के अन्य राज्यों में सूखा राशन वितरण की प्रक्रिया काफी बाद में शुरू कराई गई। छत्तीसगढ़ में लॉक डाउन के पहले 40 दिनों के लिए स्कूली बच्चों को सूखा राशन दिया गया। इसके बाद एक मई से 15 जून तक 45 दिनों के लिए, 16 जून से 10 अगस्त तक 45 दिन का सूखा राशन वितरित किया गया। इस प्रकार अब तक 130 दिन का सूखा राशन वितरण किया जा चुका है। इस योजना से राज्य के लगभग 43 हजार स्कूलों में 29 लाख बच्चों को मध्यान्ह भोजन योजना के तहत सूखा राशन वितरण से लाभ मिला है। मध्यान्ह भोजन योजना के तहत सूखा राशन के घर-घर वितरण की व्यवस्था स्कूल शिक्षा विभाग के माध्यम से किया गया।

वितरित किए गए सूखा राशन पैकेट में चावल, तेल, सोयाबीन, दाल, नमक और अचार शामिल हैं। राज्य सरकार ने स्थानीय स्तर पर स्कूली बच्चों और पालकों की सुविधा को देखते हुए यह व्यवस्था भी की गई कि, यदि माता-पिता पैकेट लेने के लिए स्कूल नहीं जा सकते हैं तो स्व-सहायता समूह और स्कूल स्टाफ के माध्यम से घर घर जाकर सूखा राशन के पैकेटों की होम डिलवरी की जाए। खाद्य सुरक्षा भत्ता के रूप में बच्चों को सूखा चावल और कुकिंग कास्ट की राशि से अन्य आवश्यक सामग्री दाल, तेल, सूखी सब्जी इत्यादि वितरित की गई। मध्यान्ह भोजन योजना की गाइडलाइन के अनुसार कक्षा पहलीं से आठवीं तक के उन बच्चों को जिनका नाम शासकीय शाला, अनुदान प्राप्त अशासकीय शाला अथवा मदरसा-मकतब में दर्ज है, उन्हें मध्यान्ह भोजन दिया गया।

12-09-2020
प्रयास और एकलव्य के विद्यार्थियों का जेईई मेंस प्रवेश परीक्षा में शानदार प्रदर्शन,मंत्री डॉ. टेकाम ने दी बधाई

रायपुर। आदिम जाति कल्याण विभाग की ओर से प्रदेश में संचालित प्रयास आवासीय और एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय के विद्यार्थियों ने आईआईटी, एनआईटी और केन्द्र सरकार से वित्त पोषित इंजीनियरिंग संस्थाओं में प्रवेश के लिए प्रतिष्ठित जेईई मेन्स परीक्षा के शुक्रवार को घोषित परिणामों में शानदान प्रदर्शन किया है। गत वर्ष सफलता का प्रतिशत 48.6 था, जो इस वर्ष बढ़कर 49.7 प्रतिशत हो गया है। मंत्री आदिम जाति कल्याण विभाग डॉ.प्रेमसाय सिंह टेकाम ने सभी सफल विद्यार्थियों को बधाई दी है। उज्जवल भविष्य की कामना की है।इस वर्ष जेईई मेन्स परीक्षा में प्रयास आवासीय विद्यालयों के कुल 316 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए, जिनमें से 157 सफल हुए हैं। इनमें सर्वाधिक 67 विद्यार्थी प्रयास आवासीय बालक विद्यालय रायपुर के हैं। इसके अलावा प्रयास कन्या आवासीय विद्यालय रायपुर की 25 छात्राएं, प्रयास आवासीय विद्यालय दुर्ग के 29 छात्र, प्रयास अंबिकापुर के 14 छात्र, प्रयास जगदलपुर के 10 छात्र, प्रयास बिलासपुर के 8 छात्र और प्रयास कांकेर के 4 छात्र सफल हुए हैं।इसी प्रकार एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय के कुल 117 छात्र परीक्षा में शामिल हुए, जिसमें से 53 छात्र सफल हुए हैं।

इनमें जशपुर जिले के सन्ना से 8, दंतेवाड़ा-कटेकल्याण से 3, सूरजपुर के शिवप्रसाद नगर से 7, सरगुजा के मैनपाट से एक, रायगढ़ के छोटेमुड़पार से 2, जगदलपुर के करपावण्ड से 7, कबीरधाम के तरेगांव से 2, राजनांदगांव के पेण्ड्री से 7, कांकेर के अंतागढ़ से 4, कोरिया के पोड़िडीह से 5, कोरबा के छुरीकला से 4 और बीजापुर जिले के भैरमगढ़ से 3 विद्यार्थी सफल हुए है। अब ये छात्र 27 सितम्बर को होने वाली जेईई-एडवांस परीक्षा में बैठ सकेंगे। इस परीक्षा में उत्तीर्ण होने वाले छात्रों को आईआईटी में प्रवेश मिलेगा। पिछले शैक्षणिक सत्र 2018-19 में परीक्षा में शामिल 112 विद्यार्थियों में से मात्र 29 विद्यार्थी ही सफल हुए थे। इस वर्ष की परीक्षा में विद्यार्थियों को गत वर्ष की तुलना में लगभग दोगुनी सफलता प्राप्त हुई है।उल्लेखनीय है कि प्रयास आवासीय विद्यालयों के अब तक 52 विद्यार्थी आईआईटी/समकक्ष में, 173 विद्यार्थी एनआईटी/ट्रिपल आईटी/समकक्ष, 35 विद्यार्थी मेडिकल कालेजों में और 695 विद्यार्थी विभिन्न इंजीनियरिंग कालेजों में प्रवेशित हो चुके हैं। जो कि विभाग द्वारा इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सार्थकता को सिद्ध करता है।

 

12-09-2020
एम्स हॉस्पिटल में कोरोना योद्धा कर्मचारियों का शोषण : वीरेन्द्र नामदेव 

रायपुर। इन दिनों कोरोना वायरस के संक्रमण के दौर में एम्स हॉस्पिटल में काम की तत्परता को लेकर एम्स प्रशासन की बड़ी तारीफ हो रही है। परन्तु सेवा कार्य में ईमानदारी और निष्ठा से अपने कर्तव्य पालन करने वाले कोरोना योद्धा कर्मचारियों के प्रति एम्स प्रशासन निष्ठुर बना हुआ है और उनका शोषण करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखते और इसे लेकर वहां के नियमित और संविदा तथा आउट सोर्सिंग के कर्मचारियों में घोर असन्तोष व्याप्त है। नियमित कर्मचारी परिवीक्षा अवधि में होने के कारण तथा संविदा और अन्य सभी शोषण के शिकार होने के बाद भी अनुशासनात्मक कार्यवाही के डर से चुप रहने के लिए मजबूर हैं।

एम्स हॉस्पिटल में ट्रेड यूनियन एक्ट लागू होता है और वहाँ अभी तक कोई भी केंद्रीय ट्रेड यूनियन का पंजीयन और गठन नहीं होने के कारण एम्स प्रशासन के मनमानी पर कोई आवाज उठाने वाला नहीं है। उक्त जानकारी जारी विज्ञप्ति में स्वास्थ्य चेतना विकास समिति छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने दी है। जारी विज्ञप्ति में उन्होंने आगे बताया है कि केन्द्रीय शासन द्वारा संचालित संस्थान होने के कारण एम्स में सारे नियम और सुविधाएं केन्द्र सरकार के ही लागू होते हैं। इसलिए केन्द्र सरकार के द्वारा मिलने वाली सभी सुविधाएं, वेतन भत्ते दिल्ली सहित देश के सभी राज्यों के एम्स हॉस्पिटल में एक समान ही होना है, परन्तु रायपुर एम्स प्रशासन कुछ मामलों में अपने हिसाब से प्रक्रिया करते हैं, जैसे दिल्ली एम्स सहित सभी एम्स हॉस्पिटल में कार्य करने वाले कर्मचारियों के लिये काम के घण्टे एक समान निर्धारित है, परन्तु यहाँ उनसे अलग चल रहे हैं।

यहाँ काम करने वाले कुछ पदों के कर्मचारियों को हॉस्पिटल केयर एलाउंस का एरियर नहीं दे रहे है और ड्रेस एलाउंस के पात्रता होने के बावजूद उसे भी देने में अनाकानी किया जा रहा है। जबकि सभी जगह दिये जा रहे हैं। एम्स हॉस्पिटल रायपुर में मेन पावर की कमी के कारण कर्मचारियों से उनके पद के अलावा दूसरे अन्य कर्मचारियों के काम भी करने को मजबूर किये जाते हैं। पद स्वीकृत होने के बावजूद रिक्त पदों की पूर्ति में कोई रुचि एम्स प्रशासन द्वारा नहीं लेने के कारण कर्मचारियों में काम का दबाव कोरोना काल मे बहुत ज्यादा बढ़ गया है। कोरोना संक्रमण काल में कर्मचारी जनहित में अपनी समस्या को अलग रख कर निरन्तर सेवा कार्य को ईमानदारी से अंजाम दे रहे हैं। जारी विज्ञप्ति में नामदेव ने एम्स प्रशासन रायपुर से कहा है कि वे कोरोना काल के आड़ में कर्मचारियों के सब्र का इम्तिहान न ले और उनके जायज एरियर, भत्ते का भुगतान कर दे और केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित समय अनुसार कार्य ले तथा स्वीकृत रिक्त पदों पर तुरन्त भर्ती हेतु आवश्यक कार्यवाही करें अन्यथा एम्स रायपुर के एकजुट होकर आन्दोनात्मक कार्यवाही के लिए बाध्य होंगे, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी एम्स प्रशासन की होगी।

09-09-2020
Breaking : भूपेश सरकार स्कूलों को खोलने केन्द्र की गाइडलाइन पर कर रही विचार, जल्द सामने आएगा फैसला

रायपुर। अनलॉक-4 के लिए केन्द्र सरकार की ओर से जारी किए गए दिशानिर्देशों में स्कूलों को खोलने की अनुमति भी दी गई है। इसके बाद अब छत्तीसगढ़ में भी स्कूलों को खोलने पर जल्द ही भूपेश सरकार निर्णय ले सकती है। प्रदेश में कोरोना महामारी के कारण बंद पड़े स्कूलों को खोलने की पूरी तैयारियों के संबंध में जल्द निर्णय लिया जाएगा। बता दें कि, राज्य सरकार ने 30 सितंबर तक स्कूलों और कॉलेजों को बंद रखने का निर्देश जारी किया था। अब केन्द्र सरकार की ओर से आई गाइडलाइन में 21 सितंबर से स्कूलों के संबंध में जो बात कही गई है, तो राज्य सरकार इस पर विचार करने जरुर उच्चस्तरीय बैठक लेकर निर्णय ले सकती है। 

बुधवार को राज्य सरकार ने इस संबंध में कहा है कि, केंद्र सरकर ने 30 सितंबर तक स्कूल बंद रखने का आदेश दिया है, परंतु 21 सितंबर से 50 प्रतिशत शिक्षकों को स्कूल बुलाने के अनुमति दी है। कक्षा 9 से 12 के विद्यार्थियों को उनके अभिभावकों की लिखित सहमति प्राप्त होने पर स्वेच्छा से स्कूल आकर शिक्षकों से शंका समाधान कराने की अनुमति देने का अधिकार राज्यों को दिया है। छत्तीसगढ़ में अभी इस संबंध में विचार चल रहा है। उच्च स्तर पर योग्य निर्णय लिया जाएगा।

03-09-2020
केन्द्र को कोरोना केस के साथ रिकवरी और डेथ रेट को भी प्रमुखता से शुरू से ही बताना था : विकास उपाध्याय 

रायपुर। संसदीय सचिव व विधायक विकास उपाध्याय ने मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि, सरकार जिस तरह से अपनी प्राथमिकता में बदलाव लाई है, इस वजह से लोगों में दहशत का माहौल निर्मित हुआ है। शुरू में केन्द्र सरकार संक्रमण के मामले बताकर डर पैदा करते रही और अब जब लग रहा है कि, अर्थव्यवस्था को बचाना जरूरी है, जो वाकई में जरूरी भी है, तो रिकवरी रेट और डेथ रेट कम होने की बात पर केंद्रित हो गई है। जबकि होना यह चाहिए था कि, संक्रमण के मामलों के साथ-साथ उसकी रिकवरी रेट और डेथ रेट को भी उतनी ही प्रमुखता से शुरू में ही बताना चाहिए था। उपाध्याय ने कहा है कि,जिस गति से भारत में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं, इससे साफ जाहिर है मोदी सरकार इसे रोक पाने पूरी तरह असफल हुई है। उन्होंने कहा है कि, पिछले 5 दिनों में एक दिन में सबसे ज्यादा संक्रमण के मामलों में भारत पूरे विश्व में पहले स्थान पर पहुंच चुका है। एक दिन में सबसे अधिक संक्रमण के मामले अब तक किसी भी देश में भारत के आंकड़े के बराबर नहीं पहुंचे हैं। उन्होंने आशंका जाहिर की है कि, आने वाले दिनों में कुल संक्रमण के मामले में भी भारत पहले स्थान पर न पहुंच जाए, जो आज पूरे विश्व में तीसरे स्थान पर है।

विकास ने कहा है कि, छत्तीसगढ़ में बीजेपी के तमाम नेता अपने घरों में बैठकर सिर्फ आरोप प्रत्यारोप में लगे हुए हैं। जबकि उनकी भी मानवीय दृष्टिकोण से ये जिम्मेदारी बनती है कि, जनता के बीच जाएं और जागरुकता लाएं। अन्य राज्यों के आंकड़े बता कर घर बैठे राजनीति करने से कुछ नहीं होना है। छत्तीसगढ़ में देश भर से सबसे ज्यादा मजदूर अपने घरों में लौटे हैं। छत्तीसगढ़ में संक्रमण की मुख्य वजह भी यही है। बावजूद भूपेश सरकार पूरे दम खम के साथ इसका डट कर मुकाबला कर रही है।

03-09-2020
यूरिया खाद बांटने में गड़बड़ी, एक सहकारी समिति और 7 निजी विक्रेताओं का पंजीयन प्रमाण पत्र निलंबित

जांजगीर-चांपा। कलेक्टर यशवंत कुमार के मार्गनिर्देशन मे यूरिया खाद बांटने वाले सहकारी समिति एवं निजी विक्रेताओं की जांच की गई। जांच में गड़बड़ी पाये जाने पर एक सहकारी समिति और सात निजी विक्रेताओं के पंजीयन प्रमाण पत्र को निलंबित कर दिया गया है। उपसंचालक कृषि एम.आर. तिग्गा ने बताया कि केन्द्र सरकार ने जिले के टॉप 20 यूरिया विक्रेताओं के संस्थानो की जांच के निर्देश दिए गए थे। कलेक्टर के निर्देश पर जांच के लिए जांजगीर, पामगढ़ और सक्ती के अनुविभागीय अधिकारी कृषि की टीम बनाकर जांच की गई। इसमें सहकारी समिति बिर्रा, बंसल ट्रेडर्स सक्ती, योगेश कुमार अग्रवाल फगुरम, जिन्दल सेल्स बाराद्वार, प्रकाश खाद भण्डार बाराद्वार, दिशा सेल्स चांपा, उदित नारायण विश्वनाथ सुलतानिया शिवरीनारायण और आर के ट्रेडर्स अकलतरा की जांच में अनियमितता पाए जाने पर कारण बताओ सूचना जारी कर जवाब प्राप्त किया गया। जांच के दौरान भूमिहीन किसानों, कम रकबा वाले किसानों तथा निजी स्टाक के नाम पर खाद वितरण की जानकारी पोर्टल पर अपडेट की गई थी। जवाब संतोषप्रद नही होने पर उक्त प्रतिष्ठानो के उर्वरक पंजीयन प्रमाण पत्र को निलंबित कर दिया गया है। इन प्रतिष्ठानों में उर्वरक व्यवसाय प्रतिबंधित किया गया है।

03-09-2020
कोरोना से सारे देश में आर्थिक गतिविधियां ठप मगर छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के प्रयासों से अर्थ व्यवस्था मजबूत

रायपुर। कोविड-19 के कारण पूरे देश में आर्थिक गतिविधियों पर विपरीत असर पड़ा है, लेकिन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के प्रयासों से छत्तीसगढ़ में आर्थिक गतिविधियों को बल मिला है व इन गतिविधियों से पूरे देश को लाभ पहुंच रहा है। केन्द्र सरकार ने अगस्त 2020 में केन्द्र और विभिन्न राज्यों के जीएसटी व सुसंगत करों के संग्रहण के आंकड़े जारी किये हैं। इन करों में सीजीएसटी, एसजीएसटी, आईजीएसटी और सीईएसएस मुख्य घटक हैं। अगस्त 2020 के उपरोक्त राजस्व संग्रहण से माह अगस्त 2019 की तुलना करने पर देश में 5 राज्य ऐसे हैं, जहां अगस्त माह में कुल जीएसटी संबंधी राजस्व संग्रहण में वृद्धि हुई है। यह राज्य क्रमशः नागालैण्ड में 17 प्रतिशत, उत्तराखण्ड में 7 प्रतिशत, छत्तीसगढ़ में 6 प्रतिशत, उत्तरप्रदेश में 2 प्रतिशत एवं राजस्थान में एक प्रतिशत है, शेष सभी राज्यों में राजस्व संग्रहण में कमी हुई है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बताया है कि जीएसटी संबंधी उक्त राजस्व संग्रहण में 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आईजीएसटी, सीईएसएस और सीजीएसटी का है। सीजीएसटी केन्द्र के खजाने में जाती है, आईजीएसटी केन्द्र तथा उपयोगकर्ता राज्यों के मध्य वितरित होती है और सीईएसएस से सभी राज्यों के जीएसटी संग्रहण में कमी पर क्षतिपूर्ति की जाती है। बघेल ने बताया कि छत्तीसगढ़ में अगस्त 2020 की अवधि में पिछले अगस्त की तुलना में एसजीएसटी की प्राप्ति में लगभग 10 प्रतिशत की कमी रही है। फिर भी राज्य की आर्थिक नीतियां जैसे समय पर औद्योगिक वाणिज्यिक गतिविधियां प्रारंभ करना, राजीव गांधी न्याय योजना, गोधन न्याय योजना और लघु वनोपज के समर्थन मूल्य पर क्रय के माध्यम से प्रदेश ने कठिन परिस्थितियों में भी आर्थिक गतिविधियों को जारी रखा गया है।

इसका परिणाम यह है कि छत्तीसगढ़ में एकत्रित होने वाले आईजीएसटी तथा सीईएसएस से देश के अन्य राज्यों को भी राशि प्राप्ति का लाभ होगा। बघेल ने बताया कि जीएसटी की संरचना के कारण छत्तीसगढ़ जैसे उत्पादक राज्य को राजस्व की हानि होती है और अधिक जनसंख्या वाले उपयोगकर्ता राज्यों को छत्तीसगढ़ में होने वाले उत्पादक गतिविधियों से संग्रहित राजस्व की प्राप्ति होती है। भूपेश बघेल ने इस दृष्टि से केन्द्र सरकार से पुनः अपील की है कि जीएसटी क्षतिपूर्ति की राशि केन्द्र शासन से ऋण/अपने संसाधनों के जरिये ही राज्य को प्रदाय की जावे और इसका ऋणभार राज्य पर न डाला जावे।

31-08-2020
महिलाओं को प्रधानमंत्री से बड़ी उम्मीद,लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगती है : वंदना राजपूत

रायपुर। वंदना राजपूत प्रदेश प्रवक्ता एवं महिला कांग्रेस ने कहा है कि, बेलगाम महंगाई चिंताजनक है। वंदना ने आरोप लगाया है कि, प्रधानमंत्री ने ना कभी इस पर चिंता की और ना बढ़ती हुई महगांई को रोकने आवश्यक कदम उठाए। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मन की बात की 68वीं कड़ी में एक बार भी बढ़ती महगांई के मुद्दे का जिक्र नहीं किया।वंदना ने कहा है कि, प्रधानमंत्री के मन की बात का आयोजन जब-जब होता है, तब-तब महिलाओं को लगता है कि अब शायद प्रधानमंत्री महगांई के मुद्दे पर चर्चा करेंगे। महगांई से थोड़ा बहुत निजात दिलाएंगे, लेकिन हर बार महिलाओं के हाथ निराशा लगती है। बढ़ती महगांई के कारण रसोई का बजट बिगड़ गया है। वंदना ने कहा है कि, बेशक भारत की जनता बहुत सहनशील और भावनात्मक है, लेकिन 80-90 रुपए लीटर के भाव का डीजल- पेट्रोल बेचकर कब तक प्रधानमंत्री जनता के भावनाओं से खिलवाड़ करेंगे।

वंदना ने कहा है कि, कोरोना काल में लोगों की आमदनी कम हो गई है। जिसके पास रोजगार था वह भी छिन गया। आमदनी चव्वनी और खर्चा रुपया हो गया है। केन्द्र सरकार प्रमुख मुद्दे को छोड़ बाकी सभी विषयों पर बात करती है, लेकिन अपनी जिम्मेदारियों से भाग रही है।पिछले 6 साल में मंदी ने भारत की अर्थव्यवस्था की हालत खराब कर दी है। मंदी के इस दौर में पहले नरेन्द्र मोदी ने नोटबंदी की और फिर जीएसटी। रही-सही असर कोरोना ने पूरी कर दी। बेहतर होगा कि, केंद्र सरकार संघीय ढांचे और उसमें मुखिया की अपनी भूमिका को समझें।  कोरोना ने आज पूरे भारत में पांव पसार लिया है।  प्रधानमंत्री यदि समय रहते आवश्यक कदम उठाते तो कोरोना के मरीजों की संख्या 35 लाख के पार नहीं होती।

27-08-2020
कोरोना से लड़ाई हम सबकी लड़ाई है, केन्द्र सरकार के निर्देशों के अनुसार संकट से निपटने किए गए सभी जरूरी इंतजाम: भूपेश

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के सदन में आज प्रदेश में कोरोना संक्रमण की स्थिति, रोकथाम और बचाव तथा प्रबंधन पर विपक्ष द्वारा लाए गए स्थगन प्रस्ताव पर सदन में 4 घंटा 40 मिनट तक चर्चा की गई। सदन में समवेत स्वर में कोरोना वारियर्स की कर्त्तव्य निष्ठा की सराहना करते हुए उनके प्रति आभार प्रकट किया गया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि सदन में हुई चर्चा में आए महत्वपूर्ण सुझावों से प्रदेश में कोरोना संक्रमण को रोकने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि मैं अपनी ओर से और सदन की ओर से सभी कोरोना वारियर्स की कर्त्तव्य निष्ठा की सराहना करता हूं और उन्हें सम्मानित करना चाहता हूं। 

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि कोरोना से लड़ाई हम सबकी लड़ाई है। हम सभी इसे लेकर चिंतित हैं। पक्ष-विपक्ष के सदस्य कोरोना संक्रमण से बचाव और रोकथाम तथा प्रबंधन के संबंध में जो सुझाव देंगे, उन्हें केन्द्र सरकार को भेजा जाएगा। उन सुझाव को मानना या न मानना केन्द्र सरकार पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में नेशनल डिजास्टर एक्ट प्रभावी है। राज्य सरकार केन्द्र सरकार द्वारा तय दिशा-निर्देशों के अनुसार कोविड-19 संक्रमण से निपटने के लिए कार्य कर रही है। हम केन्द्र सरकार के निर्देशों का पालन कर रहे हैं और भविष्य में भी करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा क्वारेंटाइन सेंटरों की व्यवस्था, आइसोलशन सेंटर और अस्पतालों की व्यवस्था तथा प्रवासी मजदूरों के संबंध में जो निर्देश जारी किए थे, राज्य सरकार उसका पालन कर रही है। सैम्पलों की टेस्टिंग भी केन्द्र की गाइडलाइन के अनुसार की जा रही है।

बघेल ने कहा कि कोरोना महामारी के प्रबंधन के लिए सभी मंत्रियों की जिम्मेदारी तय की गई कि कौन किस राज्य और किन कलेक्टरों से बात करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रवासी श्रमिकों से आने से प्रदेश में संक्रमण नहीं बढ़ा है, बल्कि हवाई अड्डे और सड़क मार्ग खोलने से संक्रमण बढ़ रहा है। अधिकतर मजदूर गांवों में हैं। ग्रामीणों ने संक्रमण रोकने की बड़ी अच्छी व्यवस्था की है। बाहर से आने वालों को क्वारेंटाईन सेंटरों में रखा जा रहा है। इससे हमारे गांव बचे हुए हैं।

स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने चर्चा के जवाब में कहा कि प्रदेश में एक सितम्बर से प्रतिदिन 20 हजार सैम्पलों की टेस्टिंग का लक्ष्य है। वर्तमान में 10 से 12 हजार सैम्पलों की टेस्टिंग की जा रही है। अधिक संक्रमण वाले क्षेत्रों में सिंगल सैम्पल की टेस्टिंग की जा रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल प्रतिदिन प्रदेश में कोरोना संक्रमण की स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं। अभी कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है। राज्य सरकार द्वारा संक्रमित लोगों के इलाज की सभी व्यवस्थाएं की जा रही है। भविष्य में सुविधाएं बढ़ने के साथ-साथ सैम्पलों की टेस्टिंग की संख्या भी बढ़ायी जाएगी। उन्होंने कहा कि अन्य प्रदेशों की तुलना में छत्तीसगढ़ बेहतर स्थिति में है, जल्द ही बेहतर परिणाम आएंगे। उन्होंने कोरोना संक्रमण से बचने के लिए गाईडलाइन का कड़ाई से पालन करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने पक्ष-विपक्ष से इस विश्वव्यापी संकट से निपटने के लिए सुझाव देने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि पर्याप्त संख्या में बिस्तरों और वेंटिलेटर की व्यवस्था है, जरूरत के अनुसार इसमें इजाफा किया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि ने कहा कि राजधानी रायपुर के मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में 80 बिस्तरों का आईसीयू जल्द ही तैयार हो जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 22 हजार 375 क्वारेंटाईन सेंटर बनाए गए, जिनमें 778 शहरी क्षेत्रों में हैं। क्वारेंटाइन सेंटरों में 7 लाख 7 हजार 286 लोगों को रखा गया और उनके लिए सभी के सहयोग से दिन-रात मेहनत कर सभी जरूरी व्यवस्थाएं की गई। वर्तमान में क्वारेंटाइन सेंटर में 2422 लोग हैं। मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री सहित पक्ष-विपक्ष के सदस्यों ने कोरोना वारियर्स, स्वास्थ्य, पुलिस, राजस्व, शहरी विकास विभागों सहित सभी विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों, समाजसेवी संस्थाओं, पंचायत प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों और कोरोना संकट के दौर में कार्य करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार प्रकट किया।

26-08-2020
कोरोना संक्रमण पर स्थगन प्रस्ताव, विधानसभा में हुई चर्चा, 1 सितंबर से रोज होगी 20 हजार सैंपलों की टेस्टिंग

रायपुर। विधानसभा के सदन में बुधवारक को प्रदेश में कोरोना संक्रमण की स्थिति, रोकथाम और बचाव तथा प्रबंधन पर विपक्ष द्वारा लाए गए स्थगन प्रस्ताव पर सदन में 4 घंटा 40 मिनट तक चर्चा की गई। सदन में समवेत स्वर में कोरोना वारियर्स की कर्त्तव्य निष्ठा की सराहना करते हुए उनके प्रति आभार प्रकट किया गया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ.चरणदास महंत ने कहा कि सदन में हुई चर्चा में आए महत्वपूर्ण सुझावों से प्रदेश में कोरोना संक्रमण को रोकने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि मैं अपनी ओर से और सदन की ओर से सभी कोरोना वारियर्स की कर्त्तव्य निष्ठा की सराहना करता हूं और उन्हें सम्मानित करना चाहता हूं।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि कोरोना से लड़ाई हम सबकी लड़ाई है। हम सभी इसे लेकर चिंतित हैं। पक्ष-विपक्ष के सदस्य कोरोना संक्रमण से बचाव और रोकथाम तथा प्रबंधन के संबंध में जो सुझाव देंगे, उन्हें केन्द्र सरकार को भेजा जाएगा। उन सुझाव को मानना या न मानना केन्द्र सरकार पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में नेशनल डिजास्टर एक्ट प्रभावी है। राज्य सरकार केन्द्र सरकार द्वारा तय दिशा-निर्देशों के अनुसार कोविड-19 संक्रमण से निपटने के लिए कार्य कर रही है। हम केन्द्र सरकार के निर्देशों का पालन कर रहे हैं और भविष्य में भी करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा क्वारेंटाईन सेंटरों की व्यवस्था, आइसोलशन सेंटर और अस्पतालों की व्यवस्था तथा प्रवासी मजदूरों के संबंध में जो निर्देश जारी किए थे, राज्य सरकार उसका पालन कर रही है। सैम्पलों की टेस्टिंग भी केन्द्र की गाइडलाइन के अनुसार की जा रही है। भूपेश बघेल ने कहा कि कोरोना महामारी के प्रबंधन के लिए सभी मंत्रियों की जिम्मेदारी तय की गई कि कौन किस राज्य और किन कलेक्टरों से बात करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रवासी श्रमिकों से आने से प्रदेश में संक्रमण नहीं बढ़ा है, बल्कि हवाई अड्डे और सड़क मार्ग खोलने से संक्रमण बढ़ रहा है। अधिकतर मजदूर गांवों में हैं। ग्रामीणों ने संक्रमण रोकने की बड़ी अच्छी व्यवस्था की है। बाहर से आने वालों को क्वारेंटाईन सेंटरों में रखा जा रहा है। इससे हमारे गांव बचे हुए हैं।

स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने चर्चा के जवाब में कहा कि प्रदेश में एक सितम्बर से प्रतिदिन 20 हजार सैम्पलों की टेस्टिंग का लक्ष्य है। वर्तमान में 10 से 12 हजार सैम्पलों की टेस्टिंग की जा रही है। अधिक संक्रमण वाले क्षेत्रों में सिंगल सैम्पल की टेस्टिंग की जा रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल प्रतिदिन प्रदेश में कोरोना संक्रमण की स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं। अभी कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है। राज्य सरकार द्वारा संक्रमित लोगों के इलाज की सभी व्यवस्थाएं की जा रही है। भविष्य में सुविधाएं बढ़ने के साथ-साथ सैम्पलों की टेस्टिंग की संख्या भी बढ़ायी जाएगी। उन्होंने कहा कि अन्य प्रदेशों की तुलना में छत्तीसगढ़ बेहतर स्थिति में है, जल्द ही बेहतर परिणाम आएंगे। उन्होंने कोरोना संक्रमण से बचने के लिए गाइडलाइन का कड़ाई से पालन करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने पक्ष-विपक्ष से इस विश्वव्यापी संकट से निपटने के लिए सुझाव देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पर्याप्त संख्या में बिस्तरों और वेंटिलेटर की व्यवस्था है, जरूरत के अनुसार इसमें इजाफा किया जाएगा।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि ने कहा कि राजधानी रायपुर के मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में 80 बिस्तरों का आईसीयू जल्द ही तैयार हो जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 22 हजार 375 क्वारेंटाईन सेंटर बनाए गए, जिनमें 778 शहरी क्षेत्रों में हैं। क्वारेंटाईन सेंटरों में 7 लाख 7 हजार 286 लोगों को रखा गया और उनके लिए सभी के सहयोग से दिन-रात मेहनत कर सभी जरूरी व्यवस्थाएं की गई। वर्तमान में क्वारेंटाईन सेंटर में 2422 लोग हैं। मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री सहित पक्ष-विपक्ष के सदस्यों ने कोरोना वारियर्स, स्वास्थ्य, पुलिस, राजस्व, शहरी विकास विभागों सहित सभी विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों, समाजसेवी संस्थाओं, पंचायत प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों और कोरोना संकट के दौर में कार्य करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार प्रकट किया।    

 

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