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18-05-2020
कोरोना संकट के बीच पीएम मोदी फिर करेंगे 'मन की बात', ट्विटर पर लोगों से मांगे सुझाव

नई दिल्ली। कोरोना संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महीने की 31 तारीख को देश से अपने मन की बात करेंगे। कोरोना संकट के बीच पीएम मोदी का यह संवाद काफी अहम माना जा रहा है। इससे पहले भी प्रधानमंत्री ने मार्च और अप्रैल महीने में 'मन की बात' की थी। प्रधानमंत्री ने सोमवार को ट्विटर के जरिए लोगों से इस कार्यक्रम को लेकर सुझाव मांगे। उन्होंने कहा कि मैं आप सभी के सुझावों का इंतजार करूंगा। देश में जारी कोरोना संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 मई को रेडियो कार्यक्रम मन की बात के जरिए देशवासियों को संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर लिखा '31 मई को होने वाले मन की बात कार्यक्रम के लिए मैं आपके सुझावों का इंतजार करूंगा। इसके लिए आप 1800-11-7800 पर संदेश रिकॉर्ड करके भेज सकते हैं। साथ ही नमो एप या माईगॉव पर भी लिखकर भेज सकते हैं। बता दें कि कोरोना महामारी के मद्देनजर देश में जारी लॉक डाउन के बीच प्रधानमंत्री तीसरी बार देशवासियों को मन की बात के जरिए संबोधित करेंगे।

17-05-2020
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किया ऐलान, मनरेगा के लिए 40 हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त आवंटन किया जाएगा

नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज की पांचवीं और आखिरी किस्त का ब्योरा दे रही हैं। सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कहा था कि आपदा को अवसर में बदलने की जरूरत है। उसी के मुताबिक ये आर्थिक पैकेज तैयार किया गया है। उन्होंने प्रोत्साहन पैकेज की पांचवीं किस्त की घोषणा करते हुए रविवार को बताया कि मनरेगा के लिए अतिरिक्त 40 हजार करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। इससे गांव वापस जा रहे प्रवासी मजदूरों को काम मिल सकेगा। वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा 'मनरेगा के लिए 40 हजार करोड़ रुपए का आवंटन बढ़ाया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में काम की कमी ना आए और आमदनी का साधन मिले, इसके लिए ऐसा किया जा रहा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में निर्मला सीतारमण ने कहा कि मजदूरों को घर ले जाने के लिए ट्रेनें चलाई गई हैं। मजदूरों को ट्रेनों से ले जाने का 85 फीसदी खर्च केंद्र सरकार ने वहन किया है। 15 फीसदी खर्च राज्य सरकारों ने किया है। श्रमिकों को ट्रेनों में खाना भी उपलब्ध कराया गया। आठ करोड़ प्रवासी मजदूरों के लिए राशन की व्यवस्था की है।

उन्होंने कहा कि पिछले दो माह में कोरोनावायरस से जंग में हेल्थ संबंधी कदमों में राज्यों में 4113 करोड़ रुपए जारी किए गए। जरूरी सामानों पर 3750 करोड़, टेस्टिंग लैब्स और किट्स के लिए 550 करोड़ रुपए की घोषणा की गई। उन्होंने कहा कि पीएम गरीब कल्याण योजना के तहत 20 करोड़ महिला जनधन खाताधारकों के खातों में सीधी मदद भेजी गई। साथ ही निर्माण से जुड़े श्रमिकों के अकाउंट में भी सरकार ने पैसे डाले। जनधन के 20 करोड़ लोगों के खाते में पैसे भेजे गए। मजदूरों के लिए चलाए गए श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में 85 फीसदी पैसे केंद्र सरकार दे रही है। उज्ज्वला योजना के तहत गरीबों को मुफ्त रसोई गैस सिलिंडर दिए गए।
 
जनस्वास्थ्य क्षेत्र के लिए घोषणा :

जनस्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश बढ़ाया जाएगा। इसके लिए रिफॉर्म्स किए जाएंगे। ग्रामीण स्तर पर ऐसी सुविधाएं देने की आवश्यकता है जो महामारी की स्थिति में लड़ने की क्षमता हो। इसके लिए स्वास्थ्य के क्षेत्र में निवेश बढ़ाया जाएगा। ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में वेलनेस सेंटरों को बढ़ावा दिया जाए। सभी जिला स्तर के अस्पतालों में संक्रामक रोगों से लड़ने की व्यवस्था  की जाएगी। लैब नेटवर्क मजबूत किए जाएंगे। सभी जिलों में प्रखंडस्तर पर एकीकृत लैब बनाए जाएंगे।   

दिवालियापन के लिए सीमा 1 लाख से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपए :

जिस तरह एमएसएमई की परिभाषा बदलकर उनके लिए विस्तार का रास्ता खोला। उन पर दिवालियापन की कार्रवाई ना हो इसके लिए न्यूनतम सीमा को एक लाख से बढ़ाकर 1 करोड़ कर दिया गया है। इससे एमएसएमई सेक्टर को फायदा होगा। विशेष दिवालियापन रेज्यूलेशन फ्रेमवर्क को आईबीसी के 240 ए में जोड़ दिया जाएगा। एक साल तक दिवालियापन की कोई कार्रवाई शुरू नहीं होगी।

15-05-2020
निर्मला सीतारमण ने कहा,कृषि के आधारभूत ढांचे के लिए सरकार देगी 1 लाख करोड़

नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को आर्थिक राहत पैकेज की तीसरी किस्त की जानकारी को साझा किया। प्रेस कांफ्रेंस में वित्त मंत्री ने कहा कि देश की बहुत बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है। आज की तीसरी किस्त कृषि, सिंचाई, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी सेक्टर के लिए है। उन्होंने कहा कि तीसरी किस्त में कृषि पर पूरा फोकस है।

वित्तमंत्री की मुख्य घोषणा

— मधुमक्खी पालन के लिए 500 करोड़ की योजना लेकर आएंगे, इसके जरिए मधुमक्खी पालन के लिए आधारभूत संरचना का निर्माण किया जाएगा।
— 15,000 करोड़ रुपए का पशुपालन बुनियादी ढांचा विकास कोष स्थापित किया जाएगा।
— हर्बल खेती को बढ़ावा देने के लिए 4,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। अगले 2 वर्षों में 10 लाख हेक्टेयर जमीन को कवर किया जाएगा। इससे 5,000 करोड़ की आय किसानों को होगी।
— राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम शुरू किया। इसमें लगभग 13,343 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
— प्रधानमंत्री मत्स्य योजना के तहत मछुआरों के लिए 20,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इसमें समुद्री और अंतर्देशीय मत्स्य पालन के लिए और 9,000 करोड़ रुपए इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास में लगाया जाएगा। इस कार्यक्रम से 55 लाख लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है।
— माइक्रो फूड एंटरप्राइजेज के लिए 10,000 करोड़ रुपए की योजना लाई गई। बिहार में मखाना के क्लस्टर, केरल में रागी, कश्मीर में केसर, आंध्र प्रदेश में मिर्च, यूपी में आम से जुड़े क्लस्टर बनाए जा सकते हैं।
— कृषि के आधारभूत ढांचे के लिए 1 लाख करोड़ रुपए सरकार देगी।
— पिछले दो महीनों में मत्स्य पालन के लिए 242 नई श्रिंप हैचरी को रजिस्ट्रशन दिया गया। जिन हैचरी की एक्सपायरी 31 मार्च को हो रही थी उसको तीन महीने का एक्सटेंशन दिया गया है।
— कोरोना संकट के दौरान कई कदम किसानों के लिए उठाए गए। न्यूनतम समर्थन राशि के तहत 74,300 करोड़ रुपये उनकी फसल की खरीद के लिए दिए गए हैं।
— लॉकडाउन के दौरान प्रधानमंत्री किसान फंड में 18,700 करोड़ ट्रांसफर किए गए हैं।
— प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 6,400 करोड़ रुपए किसानों के खातों में भेजे गए हैं।

13-05-2020
आर्थिक पैकेज के ऐलान के बाद चढ़ा शेयर बाजार, बढ़त के साथ बंद हुए सेंसेक्स और निफ्टी

मुंबई। प्रधानमंत्री के आर्थिक पैकेज के ऐलान के बाद बुधवार को शेयर बाजार बेतहाशा चढ़ा और बाजार की क्लोजिंग भी शानदार ऊपरी स्तरों पर हुई। शेयर बाजार बुधवार को शुरुआत से ही बड़ी तेजी के साथ कारोबार कर रहा था। सेंसेक्स की शुरुआत 1400 अंकों से ज्यादा के उछाल के साथ हुई और निफ्टी 387 पॉइंट ऊपर खुला था। बुधवार को शेयर बाजार तेजी पर बंद हुआ। दो दिन गिरावट के साथ बंद होने के और आर्थिक पैकेज की घोषणा के बाद सप्ताह के तीसरे दिन कारोबार के दौरान बाजार बढ़त के साथ बंद हुआ। आज के कारोबार में बीएसई का 30 शेयरों वाला इंडेक्स सेंसेक्स 637.49 अंक यानी 2.03 फीसदी की तेजी के साथ 32,008.61 पर जाकर बंद हुआ। एनएसई का 50 शेयरों वाला इंडेक्स निफ्टी 187 अंक यानी 2.03 फीसदी की उछाल के साथ 9383 पर जाकर बंद हुआ।निफ्टी के 50 में से 43 शेयरों में तेजी के साथ बंद हुए और 7 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। 

 

13-05-2020
Video : प्रधानमंत्री ने आर्थिक पैकेज घोषणा करने मेें की देरी : भूपेश बघेल

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि आर्थिक पैकेज पहले ही घोषित हो जाना चाहिए था। विलंब हुआ है लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस पैकेज में क्या-क्या होगा? अब वित्त मंत्री इस बारे में खुलासा करेंगी तो स्पष्ट होगा किन-किन प्रावधानों के तहत सहयोग मिल पाएगा। राज्य सरकारों को भी इसमें कितना मिल पाया है? मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ देशभर के मुख्यमंत्रियों की 6 घंटे तक चर्चा चली थी। मुख्यमंत्री बघेल भी शामिल थे, सभी मुख्यमंत्रियों ने विस्तारपूर्वक चर्चा की। सभी ने अपने प्रदेश की समस्याओं और आवश्यकताओं से प्रधानमंत्री को अवगत कराया। साथ ही विभिन्न मंत्रियों के सामने भी अपनी मांगों को रखा।

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर विशेष पैकेज की मांग की थी। खासकर जो लघु और मध्यम श्रेणी के उद्योग हैं, व्यापार हैं, उन्हें संचालित करने के लिए आर्थिक पैकेज की मांग की गई थी। छत्तीसगढ़ की ओर से भी प्रधानमंत्री को अनेक बार पत्र लिखे गए। मुख्यमंत्री बघेल ने प्रधानमंत्री के साथ हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में भी इस बात का विशेष रूप से उल्लेख किया था कि छत्तीसगढ़ को भी आर्थिक पैकेज 30000 करोड़ रुपए दिया जाए। इससे अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाया जा सके।

13-05-2020
आज शाम चार बजे वित्त मंत्री करेंगी प्रेस कॉन्फ्रेंस, बताएंगी कैसे होगा 20 लाख करोड़ के पैकेज का इस्तेमाल

नई दिल्ली। कोरोना संकटकाल में मंदी से जूझ रही अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत अभियान का आगाज किया है। बता दें कि कल सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 लाख करोड़ के राहत पैकेज का ऐलान किया था। इस राहत पैकेज के इस्तेमाल के बारे में अब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण विस्तार से बताएंगी। वित्त मंत्री आज यानी बुधवार को शाम चार बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगी। बता दें कि सोमवार को पीएम मोदी ने लॉक डाउन 4.0 का भी ऐलान किया। ये बिल्कुल नए रंग रूप में होगा। वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि आज सोमवार की शाम चार बजे निर्मला सीतारमण प्रेस कान्फ्रेंस करेंगी। भारतीय अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए पीएम मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर भारत को आत्म-निर्भर बनाने में मदद के लिए मंगलवार को कुल 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज की घोषणा की और स्थानीय कारोबारों को प्रोत्साहित करने की वकालत की। प्रधानमंत्री ने बड़े आर्थिक सुधारों का संकेत देते हुए कहा कि आर्थिक पैकेज के बारे में विस्तृत ब्योरा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बुधवार से अगले कुछ दिनों तक देंगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘‘यह आर्थिक पैकेज हमारे श्रमिकों, किसानों, ईमानदार करदाताओं सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों और कुटीर उद्योगों के लिये होगा।

पैकेज में भूमि, श्रम, नकदी और कानून सभी क्षेत्रों पर ध्यान दिया गया है। यह पैकेज भारतीय उद्योग जगत के लिए है, उसे बुलंदी पर पहुंचाने के के लिए है। कुल 20 लाख करोड़ रुपए के पैकेज में आरबीआई द्वारा अब तक कोविड-19 संकट से निपटने के लिए घोषित उपाय भी शामिल हैं। हालांकि इस बारे में कोई स्पष्टता नहीं है कि यह राशि कहां से आएगी और इससे देश की राजकोषीय सेहत पर क्या असर पड़ सकता है। इस कदमों की श्रृंखला में वित्त मंत्रालय ने गरीबों, बुजुर्गों और किसानों के लिए 1.74 लाख करोड़ रुपए के राहत पैकेज की घोषणा की थी।

12-05-2020
प्रधानमंत्री के संबोधन में ठोस जमीनी सोच, चिंतन नदारद था : मोहन मरकाम

रायपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के देश के नाम संदेश पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने प्रतिक्रिया व्यक्त की है। मरकाम ने कहा कि राष्ट्र के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज की घोषणा तो की हैै लेकिन लॉक डाउन को भी आगे बढ़ाने की घोषणा की है। इस घोषणा से देश की आम जनता को, किसानों को, पैदल जैसे-तैसे घर पहुंच रहे मजदूरों को, बंद पड़े उद्योगों को क्या मिलेगा? यह आने वाले दिनों में पता चलेगा? लॉक डाउन के चौथे संस्करण में क्या खुलेगा और क्या बंद रहेगा यह भी अभी पता नहीं है? फिलहाल तो यह दिखता है कि कोरोना संकट की भयावहता से जूझने के उपायों पर, इसके लिए देश की तैयारियों पर उनके पास कहने को कुछ नहीं था। बेरोजगार होकर घर लौट रहे श्रमिकों को फिर से रोजगार कैसे मिलेगा इस पर भी वे चुप ही रहे। जिस भाषा में उन्होंने राष्ट्र को संबोधित किया है और जिस विषय पर उन्होंने अपनी बात रखी उससे जाहिर है वे श्रमिकों, किसानों और गरीबों को संबोधित नहीं कर रहे थे। वे महात्मा गांधी के स्वदेशी के एजेंडे पर लौटते हुए दिखे पर विडंबना है कि इसमें अंतिम पंक्ति का व्यक्ति शामिल नहीं दिखा।

आज के संबोधन से एक बात जरूर रेखांकित हुई है वो यह कि नरेंद्र मोदी ने पहली बार स्वीकार किया कि आजादी के बाद देश लगातार आत्मनिर्भर हुआ है। इस तरह से देखें तो यह बात आज खत्म हो गई कि पिछले 70 सालों में कुछ नहीं हुआ। मरकाम ने कहा है कि देश प्रधानमंत्री के आज के संबोधन की ओर बड़ी आशा भरी निगाहों से देख रहा था, लेकिन उन्होंने बड़ी-बड़ी बातें तो की लेकिन देश में सबको निराश किया। लॉक डाउन के परिणाम स्वरूप भूख प्यास रहने की जगह, इलाज और अपने घर गांव प्रदेश पंहुचने की जद्दोजहद में लगे मजदूरों की घर वापसी तक के लिये मोदी के संबोधन में कुछ भी नहीं था। प्रधानमंत्री से आज रात के संबोधन में सड़कों पर चलते लाखों श्रमिक भाइयों-बहनों को उनके घरों तक सुरक्षित पहुंचाने की घोषणा की अपेक्षा भी मोदी ने पूरी नहीं की। इसके साथ ही इस संकट के समय में सहारा देने के लिए सभी मजदूरों के खातों में कम से कम 7500 रुपए का सीधा हस्तांतरण पर भी कोई भी ठोस घोषणा नहीं की।

11-05-2020
प्रधानमंत्री मुख्यमंत्रियों से आज की बातचीत को मन की बात न बनाएं : कांग्रेस

रायपुर। प्रधानमंत्री की सोमवार को मुख्यमंत्रियों से वीडियो कांफ्रेंसिंग से कोरोना पर हुई बातचीत पर कांग्रेस ने कहा है कि कोरोना महामारी से सबको साथ लेकर ही लड़ा जा सकता है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा कि बातचीत होनी चाहिए कि कैसे हम सब साथ मिलकर कोरोना की समस्या का समाधान करें। बातचीत एकतरफा नहीं हो सकती है। जरूरी है कि आज की बातचीत में प्रधानमंत्री सब की बात सुने और न केवल सुने उस पर कार्य भी करें। जरूरत इस बात की है कि प्रधानमंत्री मोदी आज की बातचीत को मन की बात न बनाएं।त्रिवेदी ने कहा है कि जीएसटी के मनरेगा के पैसे बकाया हैं, राज्य सरकारों के संसाधनों पर रोक लगाई गई है।

आज राज्य सरकारों को कोरोना से लड़ने के लिए अधिक संसाधनों की जरूरत है लेकिन उन्हें सामान्य रूप से जो संसाधन मिलते थे वह भी नहीं मिल पा रहे हैं। राज्य सरकारों के सीमित संसाधन होते हैं और लॉक डाउन के कारण आर्थिक गतिविधियां शून्य हो गई है। देश की सभी राज्य सरकारें लगातार केंद्र सरकार को लिख रही कि हमें सहायता चाहिए हमारे पास संसाधन नहीं है हमारे पास राशि नहीं हैं, हमें ये दिक्कतें हैं। केंद्र सरकार ने इस बारे में अब तक कुछ भी नहीं किया है। राज्य सरकारों को कोरोना से लड़ने के लिए अब तक सहायता राशि भी नहीं दी गई है।

 

 

11-05-2020
प्रधानमंत्री ने भूपेश बघेल से की चर्चा, उपस्थित थे टीएस सिंहदेव, ताम्रध्वज साहू सहित अधिकारी

रायपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को देशभर के मुख्यमंत्रियों  से चर्चा की। कोरोना संक्रमण से बचाव और रोकथाम पर चर्चा के लिए वीडियो कांफ्रेंसिंग में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल शामिल हुए। साथ ही पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टीएस सिंहदेव, गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, मुख्य सचिव आरपी मंडल, पुलिस महानिदेशक डीएम अवस्थी, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, सचिव स्वास्थ्य निहारिका बारीक सिंह, उप सचिव मुख्यमंत्री सचिवालय सौम्या चौरसिया सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

 

 

11-05-2020
प्रधानमंत्री ने की मुख्यमंत्रियों से चर्चा,मजदूरों के पलायन पर कहा-मानवीय स्वभाव है कि हम घर जाना चाहते हैं

नई दिल्ली। पीएम मोदी ने एक बार फिर राज्यों के मुख्यमंत्रियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात की। पीएम मोदी ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में राज्य सरकारों के योगदान की तारीफ की।कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए देशभर में 17 मई तक लॉकडाउन लागू है। तीसरे चरण का लॉकडाउन खत्म होने से करीब एक सप्ताह पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर राज्यों के मुख्यमंत्रियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात की। पीएम मोदी ने बैठक में कहा कि सरकार को आगे बढ़ने के बारे में सोचना होगा और समग्र दृष्टिकोण के बारे में बात करनी होगी। बैठक में गृहमंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे।पीएम मोदी ने कहा, "इस पूरी लड़ाई में दुनिया ने कहा है कि हम कोविड-19 वैश्विक महामारी के खतरे से लड़ने में सफल रहे हैं। इस लड़ाई में राज्य सरकारों ने प्रमुख भूमिका निभाई है।

उन्होंने अपनी जिम्मेदारी को समझा और इस खतरे का मुकाबला करने में अपनी भूमिका निभाई।" उन्होंने प्रवासी मजदूरों के पलायन पर कहा, "हमने जोर देकर कहा कि लोगों को वहीं रहना चाहिए जहां वे हैं, लेकिन यह मानवीय स्वभाव है कि हम घर जाना चाहते हैं और इसलिए हमें अपने निर्णयों को बदलना होगा। इसके बावजूद, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि यह बीमारी न फैले और गांवों में ना पहुंच जाए, यह हमारे लिए बड़ी चुनौती है।"बैठक में मौजूद गृह मंत्री अमित शाह ने आरोग्य सेतु मोबाइल एप्लिकेशन के महत्व पर प्रकाश डाला और मुख्यमंत्रियों से इसके डाउनलोड को लोकप्रिय बनाने का आग्रह किया, क्योंकि इससे वायरस के प्रसार पर नजर रखने में मदद मिलेगी। राज्य के मुख्यमंत्रियों के साथ प्रधानमंंत्री नरेन्द्र मोदी की बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केन्द्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण भी मौजूद रहीं।

09-05-2020
भूपेश ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर दोहराई मांग, कहा- सुझावों को शीघ्र स्वीकृत करें

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर 30 हजार करोड़ रुपए का पैकेज शीघ्र स्वीकृत करने का पुनः अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि यदि यह आर्थिक पैकेज स्वीकृत नहीं किया जाता तो आर्थिक संकट के कारण राज्य के सामान्य काम-काज का संचालन भी संभव नहीं हो सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था को पुनः पटरी पर लाने के लिए इस पैकेज में से 10 हजार करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता तत्काल दी जानी चाहिए। मुख्यमंत्री बघेल ने लिखा है कि केन्द्र और राज्य सरकारों के पूर्ण एकजुटता के साथ कोविड 19 की गंभीर आपदा से निपटने के लिए हर संभव प्रयत्न किए जा रहे हैं। राज्य में 8 मई तक पूर्ण लाॅक डाउन के 48 दिन पूर्ण हो चुके हैं। अभी भी कोविड-19 वायरस के नए संक्रमितों की संख्या निरंतर बढ़ने से यह प्रतीत होता है कि निकट भविष्य में इस महामारी के पूर्ण नियंत्रित होने या समाप्त होने की संभावनाएं अत्यंत क्षीण है। लाॅक डाउन की लंबी अवधि के कारण राज्य में सभी प्रकार की आर्थिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे लाखों परिवारों के सामने आजीविका का संकट उत्पन्न हो गया है।

भारत सरकार के स्तर से विभिन्न जोनों के निर्धारण में व्यावहारिक कठिनाई यह है कि जोन निर्धारण के तत्काल बाद ग्रीन जोन में नए संक्रमितों के मिलने की पूर्ण संभावना है। ऐसी स्थिति में यदि उसे पुनः रेड जोन में लाया जाएगा तो जो थोड़ी बहुत आर्थिक गतिविधियां आरंभ हुई थी वह पुनः बंद हो जाएंगी। लम्बे इंतजार के बाद एक बार किसी आर्थिक गतिविधि को यदि पुनः बंद किया गया तो उससे असंतोष बढ़ेगा और अनिश्चितता की स्थिति बनी रहेगी। वर्तमान में यह अनिश्चितता भी बनी हुई है कि 17 मई के पश्चात लाॅक डाउन के संबंध में क्या स्थिति रहेगी। इन सब अनिश्चितताओं को समाप्त करने के लिए आवश्यकता इस बात की है कि हम सभी संभव सावधानियां बरतते हुए आर्थिक गतिविधियों को क्रमशः आरंभ करें। ऐसी स्थिति में यह उचित होगा कि राज्य के अन्दर विभिन्न आर्थिक गतिविधियां के संचालन करने के संबंध में पूर्ण अधिकार राज्यों को सौंप दिए जाएं।

मुख्यमंत्री ने यह भी लिखा है कि उन्होंने पूर्व में भी यह अनुरोध किया गया है कि यदि राज्य को आगामी 3 माहों में 30 हजार करोड़ रुपए का पैकेज स्वीकृत नहीं किया गया तो आर्थिक संकट के कारण राज्य के सामान्य काम-काज का संचालन संभव नहीं हो सकेगा। राज्य की अर्थव्यवस्था को पुनः पटरी पर लाने के लिए उपरोक्त पैकेज में से 10 हजार करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता तत्काल दी जाना चाहिए ताकि राज्य स्तर पर ही यह निर्णय लिया जा सके कि उद्योगों, व्यवसायों, कामगारों, कृषकों और अन्य गतिविधियों को कितनी-कितनी आर्थिक सहायता दी जाए। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी से पुनः अनुरोध किया है कि राज्य की ओर से दिए गए सुझावों पर शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने का कष्ट करें ताकि शीघ्र अति शीघ्र सामान्य जन-जीवन बहाल हो सके।

07-05-2020
विशाखापट्टनम में रासायनिक गैस के रिसाव से 8 की मौत, सैकड़ों प्रभावित, प्रधानमंत्री ने बुलाई एनडीएमए की आपात बैठक

रायपुर/विशाखापट्टनम। आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में गैस लीक की घटना ने लोगों को भोपाल गैस त्रासदी की याद दिला दी। गुरुवार अल सुबह आरआर वेंकटपुरम स्थित एलजी पॉलिमर उद्योग में रासायनिक गैस के रिसाव से इलाके में स्थिति खराब हो चुकी है। गैस के सम्पर्क में आने वाले सैकड़ों लोग इससे प्रभावित हो चुके हैं। अब तक 8 की मौत हो गई है वहीं 170 लोगों को विशाखापट्टनम में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एनडीएमए की आपात बैठक बुलाकर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। बता दें कि आंध्रप्रदेश के विशाखापट्टनम में आरआर वेंकटपुरम स्थित एलजी पॉलिमर उद्योग में रासायनिक गैस लीक होने का मामला सामने आया है। गुरुवार सुबह हुई इस घटना में 8 लोगों की मौत होने की बात सामने आ रही है।

हालात अभी भी नियंत्रण में नहीं हैं। स्थानीय प्रशासन और नेवी ने फैक्ट्री के आस पास के गांवों को खाली करा लिया है। वहीं गैस के सम्पर्क में आने वाले 170 से अधिक प्रभावितों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। गैस रिसाव से फैक्ट्री के पास का 3 किमी का इलाका प्रभावित है। फिलहाल गैस के रिसाव पर काबू पा लिया गया है। स्थिति की गम्भीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एनडीएमए की आपात बैठक बुलाई है। गृहमंत्री अमित शाह और राजनाथ सिंह भी मौजूद हैं। मामले की कड़ी निगरानी की जा रही है। आंध्र प्रदेश के डीजीपी ने कहा है कि अल सुबह हुई इस घटना में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रभावितों को बचाने के लिए अभियान जारी है।

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