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11-11-2020
भूपेश सरकार ने महापौर परिषद को दिया महत्वपूर्ण अधिकार,मंत्री डॉ.डहरिया ने समीक्षा बैठक में की घोषणा

रायपुर। नगर निगम क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री डॉ.शिवकुमार डहरिया ने बुधवार को महानदी भवन में नगर निगमों के महापौर और आयुक्तों की बैठक में घोषणा की है। सरकार के निर्णयानुसार निर्माण कार्यों में स्थल परिवर्तन के अधिकार और निविदा में कम टेंडर दर प्राप्त होने पर बचत राशि व्यय करने के अधिकार महापौर परिषद को दिए गए हैं। बैठक में महापौरों ने विभिन्न निर्माण कार्यों की समीक्षा के दौरान व्यवहारिक दिक्कतों का उल्लेख करते हुए इन अधिकारों की मांग की थी। नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री डॉ.डहरिया ने बैठक में कहा कि सभी आयुक्त, महापौर एवं जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए निगम की जनता के हित में तेजी से काम करें। उन्होंने शासन की फ्लैगशिप योजनाओं मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना, गोधन न्याय योजना, मुख्यमंत्री वार्ड कार्यालय, पौनी पसारी के साथ साथ मोर जमीन मोर मकान, मोर मकान मोर चिन्हारी, अमृत मिशन, अधोसंरचना तथा राज्य प्रवर्तित योजनाओं की निगमवार विस्तृत समीक्षा की। डॉ.डहरिया ने समीक्षा बैठक में पौनी पसारी योजना में और अधिक प्रगति लाने और सभी निर्माण कार्य पूरी गुणवत्ता के साथ समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। बैठक में नगर निगमवार एक-एक कर निर्माण कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई। डॉ.डहरिया ने निगम करों और यूजर चार्ज की वसूली करते हुए निगमों को सेल्फ सस्टेनेबल बनाने की दिशा में गंभीरतापूर्वक प्रयास करने के निर्देश दिए। बैठक में विभागीय सचिव अलरमेलमंगई डी.,सूडा के एडीशनल सीईओ सौमिल रंजन चौबे और अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में कोरबा, अंबिकापुर और जगदलपुर के महापौर ऑनलाइन जुड़े और अन्य नगर निगमों के महापौर महानदी भवन में आयोजित बैठक में उपस्थित थे।

 

 

31-10-2020
सरदार वल्लभभाई की जयंती और इंदिरा गांधी की शहादत को कांग्रेसियों ने किसान अधिकार दिवस के रूप में मनाया

जगदलपुर। लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती एवं पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की शहादत दिवस पर शनिवार को बस्तर जिला कांग्रेस कमेटी (शहर/ग्रामीण) ने शहीद स्मारक सिरहासार चौक में किसान अधिकार दिवस के रूप में सत्याग्रह का आगाज़ किया।
  जिला कांग्रेस कमेटी के युवा अध्यक्ष राजीव शर्मा ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि विधेयक को लेकर मचे घमासान के बीच इसे किसान विरोधी करार देते हुए केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने ने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों और किसान संगठनों से बिना सलाह मशविरा से यह विधेयक लाया है। केंद्र सरकार के इस फैसले का चौतरफा देश में विरोध हो रहा है। इस विधेयक से मंडियों की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी। महापौर सफिरा साहू ने कहा कि बीते 6 साल से भाजपा की मोदी सरकार देशभर के किसानों के साथ छल कर रही है। स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिश के अनुसार लागत मूल्य का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य देने का वादा कर सत्ता में बैठी मोदी सरकार ने किसानों से किए वादों को पूरा नहीं कर पाई। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के द्वारा लाए गए तीन काले कानून किसानों के लिए काला पानी की सजा का फरमान है। सत्याग्रह को प्रदेश महामंत्री यशवर्धन राव, राजकुमार झा,कौशल नागवंशी,कमल झज्ज, राजेश चौधरी,बालेश दुबे,जावेद खान आदि ने भी सम्बोधित किया। सत्याग्रह में सेवादल,युवक कांग्रेस,महिला कांग्रेस,एनएसयूआई सहित अन्य प्रकोष्ठ एवं विभाग के पदाधिकारी,जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ कांग्रेसी कार्यकर्ता उपस्थित थे। 

सुभाष रतनपाल की रिपोर्ट

11-10-2020
किसानों को न्याय, स्वाभिमान और स्वावलंबन की जिंदगी देना प्रदेश सरकार का लक्ष्य: भूपेश बघेल

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रविवार को अपनी रेडियो वार्ता लोकवाणी की 11वीं कड़ी में ‘‘नवा छत्तीसग, हमर विकास-मोर कहानी’’ विषय पर अपने विचार रखें। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को न्याय, स्वाभिमान और स्वावलंबन की जिंदगी देना राज्य सरकार का लक्ष्य है। इसके लिए राज्य सरकार ने धान का दाम 2500 रुपये क्विंटल, कृषि ऋण माफी, सिंचाई कर माफी, रियायती बिजली, अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के किसानों को खेती के लिए निःशुल्क बिजली जैसी योजनाएं लागू की, ताकि किसानों के चेहरे पर मुस्कुराहट लौट आए। बघेल ने रेडियो वार्ता में नई सरकार द्वारा पौने दो वर्ष में शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीणों-किसानों की आय में वृद्धि, छत्तीसगढ़ी संस्कृति को प्रोत्साहन के लिए लागू की गई योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। लोकवाणी में रेडियो श्रोताओं ने राज्य सरकार की योजनाओं की मुक्तकंठ से सराहना की।

‘मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना’ से लाभान्वित दो जरुरमंदों ने लोकवाणी में बघेल को दिया धन्यवाद : गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए राज्य सरकार की ‘मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना’ संजीवनी बूटी साबित हो रही है। बिलासपुर के तिफरा के राजेन्द्र कुमार सोनी ने लोकवाणी के माध्यम से बताया कि उनके 8 वर्षीय पुत्र कुणाल सोनी को ब्लड कैंसर के इलाज के लिए ‘मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना’ से 20 लाख रुपए की सहायता मिली, जिससे उनके पुत्र का बोन मेरो ट्रांसप्लांट हो गया है। इसी तरह जिला जांजगीर-चांपा की तहसील जैजेपुर के ग्राम बेथिया के अजीत कुमार जांगड़े ने बताया की उनके 14 वर्षीय बेटे लक्की जांगड़े को मेजर थैलेसिमिया नाम की बीमारी हो गई है। इसी योजना से मिली 14 लाख रुपए की सहायता से उनके बेटे का बोन मेरो ट्रांसप्लांट हो गया है। सोनी और जांगड़े ने अपने बेटे का इलाज सीएमसी हॉस्पिटल वेल्लोर में कराया। दोनों ने ‘मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना’ से मिली सहायता के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार प्रकट करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया।   

मुख्यमंत्री ने बड़ी ही विनम्रता के साथ इस संबंध में कहा कि निश्चित तौर पर संवेदना के स्तर पर मैं ऐसे हर परिवार के साथ जुड़ा हूं जिन्हे इलाज के लिए मदद की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कृपया कोई यह न समझे कि हमने किसी पर कोई उपकार किया है। यह सुविधा मिलना आपका हक था जो हमने आपको आदर, विनम्रता और गरिमा के साथ दिया है। बघेल ने कहा कि ‘डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना’ के अंतर्गत 9 माह में 2 लाख 71 हजार लोगों को 50 हजार रुपए तक इलाज की सुविधा निःशुल्क दी गई है। वहीं मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत 9 माह में 315 लोगों को 20 लाख रुपए तक उपचार की सुविधा दी गई है। सिर्फ इन दो योजनाओं में ही लगभग 350 करोड़ रुपए खर्च किए गए। स्वास्थ्य सुविधाओं को हर समुदाय और घरों तक पहुंचाया जा रहा है। हाट-बाजार क्लीनिक योजना, शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना की अपार सफलता और लाखों लोगों के उपचार से प्रेरित होकर अब ‘डॉ. राधाबाई डायग्नोस्टिक सेंटर योजना’ की शुरुआत की जा रही है।

कोरोना से बचने करें सुरक्षा उपायों का पालन : 
मुख्यमंत्री ने रेडियो वार्ता के माध्यम से प्रदेशवासियों से कहा कि कोरोना को देखते हुए हमें बड़े और भीड़ वाले कार्यक्रमों से बचना है। इसलिए न खुद ऐसे आयोजन करना है और न भीड़ में शामिल होना है। उन्होंने प्रदेशवासियों से यह अनुरोध भी किया कि सभी मास्क के उपयोग सहित सुरक्षा उपायों का पालन करें और घर में रहकर परिवार के साथ खुशियाँ मनाएं। मुख्यमंत्री ने लोकवाणी में प्रदेशवासियों को नवरात्र, दशहरा, अग्रसेन जयंती, ईद-मिलादुन्नबी की शुभकामनाएं दी।

बाजार और कम्पनियों को भी करनी होगी छत्तीसगढ़ी में अपनी बात : 
रायपुर की दक्षश्री साहू ने लोकवाणी के माध्यम से मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि छत्तीसगढ़ियां लोगों की चिन्हारी छत्तीसगढ़ी भाषा को भी उचित स्थान मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम छत्तीसगढ़ी भाषा की जितनी सेवा करेंगे, जितना उपयोग और प्रचार करेंगे, उतना ही हमारी संस्कृति और भाषा का विकास होगा। बाजार और कम्पनियों को भी छत्तीसगढ़ी में बात करनी होगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए विधानसभा में संकल्प पारित कराके, केन्द्र सरकार को भेजा गया है। हम अपनी ताकत से छत्तीसगढ़ी भाषा को सिरमौर बना सकते हैं। मुख्यमंत्री ने रेडियो वार्ता के माध्यम से किसानों द्वारा राज्य सरकार की योजनाओं की सराहना के संबंध में कहा कि आप लोगों की बातें सुनकर मुझे काफी संतोष का अनुभव हो रहा है। किसानों के लिए हम जो करना चाहते थे उसमें सफल हुए हैं। ‘राजीव गांधी किसान न्याय योजना’ के तहत 5 हजार 700 करोड़ रुपए देने का वायदा, आधा से ज्यादा पूरा हो चुका है। शेष राशि भी आपको जल्दी ही मिल जाएगी। अनेक श्रोताओं ने लोकवाणी के माध्यम से बस्तर क्षेत्र के दूरस्थ अंचलों में सोलर लाईट, मुख्यमंत्री सुपोषण योजना, वनोपज संग्रहण से महिला स्व सहायता समूहों को मिल रहे लाभ से आ रहे बदलाव और कोरोना काल में आमचो रेडियो योजना के माध्यम से बच्चों को स्कूलों से जोड़े रखने में मिल रही सफलता की जानकारी दी।

बिजली ही नहीं, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाओं की रौशनी भी पहुंची बस्तर : 
मुख्यमंत्री ने इस संबंध में कहा कि हमने वायदा किया था कि बस्तर में विकास की जो नई शुरुआत होगी, वह आपसी समझ, आपसी विश्वास की बुनियाद पर होगी। घर और गांव रोशन हो गये हैं, तो मन को बहुत संतोष हुआ। बस्तर के दूरस्थ अंचल में 11 हजार 886 घरों में क्रेडा द्वारा बिजली पहुंचायी गई। बिजली ही नहीं, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाओं की रौशनी भी बस्तर अंचल में पहुंचाई गई है। सुकमा जिले के जगरगुंडा नक्सल प्रभावित गांव में 13 साल बंद स्कूल चालू हो गए। बस्तर ने कुपोषण मुक्ति की अलख जगाई। मुख्यमंत्री सुपोषण योजना बनाई गई और एक साल में पूरे प्रदेश में कुपोषण की दर 13.79 प्रतिशत कम हुई। तेंदूपत्ता संग्रहण पारिश्रमिक बढ़ाने के साथ लघु वनोपज खरीदने का दायरा 7 से बढ़ाकर 31 किया। इससे छत्तीसगढ़ देश में सर्वाधिक वनोपज खरीदने वाला राज्य बन गए। मनरेगा कोरोना काल में तो यह लाइफ-लाइन बन गई और इसमें भी देश में सर्वाधिक काम देने का कीर्तिमान बना।

दन्तेवाड़ा में बनेगा मल्टीस्किल सेंटर : 
लोहाण्डीगुड़ा में आदिवासी किसानों की जमीन वापसी से उपजा उत्साह प्रदेश में 200 फूड पार्क स्थापित करने का माध्यम बन गया। 101 फूडपार्क के लिए जमीन चिन्हांकित हो चुकी है। जेल में बंद करीब 900 आदिवासियों की मुक्ति सुनिश्चित की गई है। अब तो आमचो बस्तर की धमक भी सुनाई पड़ रही है। इमली, हल्दी, काजू, कॉफी को आप लोगों ने बस्तर ब्रांड बना दिया है। हम बोधघाट बहुद्देशीय परियोजना बनाएंगे और इंद्रावती नदी को बचाएंगे। भोपालपटनम में बांस आधारित कारखाना लगाएंगे। कोंडागांव में मक्का प्रसंस्करण करेंगे। दन्तेवाड़ा में मल्टीस्किल सेंटर स्थापित करेंगे। बस्तर कुपोषण मुक्त होगा, मलेरिया मुक्त होगा और हर तरह के अन्यायों से भी मुक्त होगा, यह मेरा वायदा है। नारायणपुर में उच्च क्षमता का ‘मोबाइल-टॉवर’ और जगदलपुर से हैदराबाद-रायपुर की हवाई कनेक्टिविटी से हालात और तेजी से बदलेंगे। अब बदलता हुआ बस्तर सब के सामने है और आप लोगों की आवाजों की चहक, इसका सबसे बड़ा प्रमाण है।

वन अधिकार पत्र मिलने से वनांचल क्षेत्र में विकास की नई शुरूआत : 
अनेक रेडियो श्रोताओं ने बताया कि वनांचल क्षेत्रों में वनवासियों को वन अधिकार पत्र और सामुदायिक वन अधिकार पत्र मिलने से वनांचल क्षेत्र में विकास की नई शुरूआत हो रही है। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में कहा कि वन अधिकार पत्र के दावों को खारिज करके जो अन्याय किया गया था, सरकार में आते ही उस पर कार्यवाही का निर्णय लिया गया। निरस्त दावों में से 40 हजार से ज्यादा लोगों को व्यक्तिगत पट्टे और 46 हजार सामुदायिक पट्टे दिए गए। सामुदायिक पट्टे देने के मामले में तो यह एक नई क्रांति हुई है। इस प्रकार प्रदेश में 4 लाख 87 हजार भू-अधिकार पट्टों के माध्यम से 51 लाख एकड़ भूमि का पट्टा दिया जा चुका है, जो देश में सर्वाधिक है। यह कार्य सिर्फ बस्तर ही नहीं, बल्कि प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में हुआ है। इन वन अधिकार पट्टों से मिली जमीनों में, अब दर्जनों गांवों में खेती, पशुपालन, मछलीपालन तथा आजीविका के नए-नए काम हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री बघेल ने लोकवाणी के माध्यम से बच्चों को कोरोना काल में नवाचारों के जरिए शिक्षा दे रहे समस्त शिक्षकों और शिक्षिकाओं को साधुवाद दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई सरकार ने 14 हजार 850 स्थाई शिक्षकों की भर्ती, पहिली तथा दूसरी कक्षा के बच्चों को 20 बोली-भाषाओं में द्विभाषी पाठ्यपुस्तकों का वितरण, स्वामी आत्मानंद शासकीय इंग्लिश मिडियम स्कूल योजना के तहत 51 सरकारी आदर्श अंग्रेजी मीडियम स्कूल खोलने जैसे बड़े निर्णय लिए। शिक्षाकर्मियों का संविलियन 2 वर्षों में पूरा करने का वायदा भी निभाया है। सीएम बघेल ने कहा कि कोरोना संकट काल में बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए पहले ‘पढ़ाई तुंहर द्वार’ योजना शुरू की। जिसमें 22 लाख बच्चे और 2 लाख शिक्षक-शिक्षिकाएं जुड़े। जहां इंटरनेट कनेक्टीविटी को लेकर समस्याएं आईं तो ‘पढ़ाई तुंहर पारा’ योजना शुरू की।

इस योजना में 22 हजार 916 शिक्षकों द्वारा 34 हजार 917 बसाहटों के पारे मोहल्लों में कक्षायें संचालित की जा रही है। जिसमें 7 लाख 48 हजार से ज्यादा बच्चे भौतिक दूरी और सुरक्षा के साथ पढ़ाई कर रहे हैं। 2 हजार 278 शिक्षक, 4 हजार 298 दुर्गम स्थानों में 72 हजार से अधिक बच्चों को पढ़ाई करा रहे हैं। इंटरनेट सुविधाविहीन स्थानों में ब्ल्यूटूथ के माध्यम से शिक्षण सामग्री प्रदाय किया गया है। बुल्टू के बोल के माध्यम से 26 हजार 522 लोगों को 55 हजार 748 आडियो सामग्री पढ़ाई के लिए भेजे गए। पारा-मोहल्ला में पढ़ाने वाले शिक्षकों को मिस्डकॉल गुरुजी, मोटरसायकल पर सिनेमा वाले बाबू जैसे नामों से लोकप्रियता मिल रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को नए अवसर दिलाने के लिए प्रदेश में इंटरनेट ऑफ थिंग्स तथा रोबोटिक की प्रयोगशालाएं, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का पाठ्यक्रम सहित अनेक नये स्कूल-कॉलेज खोले गए हैं। कॉलेजों में भी स्थायी शिक्षकों की भर्ती की जा रही है। मेरा विश्वास है कि टीचर्स और बच्चे मिलकर प्रदेश में उपयोगी तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की नई क्रांति लाएंगे। एक श्रोता ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश में ‘महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय’ की स्थापना के लिए बघेल को बधाई दी।

08-10-2020
अतिक्रमण के दो आरोपी पहुंचे जेल...

रायपुर/गरियाबंद। वन अधिकार पट्टा की लालच में आज हर जंगल में लोगों ने अतिक्रमण कर जंगलों की कटाई कर अपना कब्जा बना रहे हैं। इसमें गरियाबंद वन परिक्षेत्र के बारुका सर्कल के ग्राम घुतकुनवापारा के दो आरोपियों को सहायक वन परिक्षेत्र अधिकारी लोकेश चौहान ने पकड़कर जेल भेजा ​है। मिली जानकारी के अनुसार ग्राम घुतकुनवापारा निवासी खिलावन ध्रुव और बाल कृष्ण निषाद ने संरक्षित वन भूमि कक्ष क्रमांक 539 में अतिक्रमण करने के उद्देश्य से वन भूमि में लगे पौधों और झाड़ियों को काटा गया था। इसकी जानकारी होते ही वन मण्डलाधिकारी मयंक अग्रवाल से दिशा निर्देश लेते हुए अतिक्रमण करने वाले आरोपियों को छत्तीसगढ़ वन अधिनियम के तहत कार्यवाही करते हुए जेल भेजा गया।

30-09-2020
फूलोदेवी ने कहा- तथ्यों को दबाकर परिवार से अंतिम संस्कार का अधिकार तक छीन लिया, ये कैसी क्रूरता है?

रायपुर। राज्यसभा सांसद व महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष फूलोदेवी नेताम ने उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने कहा है कि सुबह-सुबह ढाई बजे, जिस तरह से उत्तरप्रदेश की सरकार ने हाथरस की बेटी के साथ अन्याय किया है। मुख्यमंत्री का ट्वीट आया, उन्होंने एसआईटी का गठन किया। फूलोदेवी ने पूछा कि क्या इस एसआईटी के पास वो पावर है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को बुलाया जाए एसआईटी में? आज अपराधियों की गिरफ्तारी तो हुई पर अब मुख्यमंत्री को एसआईटी के सामने जवाब देना चाहिए  उन्हें बताना चाहिए कि जिस बच्ची का इस तरह से बलात्कार हुआ, जिसकी रीढ़ की हड्डी टूटी, जिसकी जीभ को काट कर फेंक दी गई,आपने उस बच्ची को पहले डिस्ट्रिक्ट अस्पताल में रखा, आपने उसको फिर अलीगढ़ के एक अस्पताल में रखा। 8 दिन एक नोर्मल वार्ड में रखा और सफदरजंग अस्पताल में आपने तब पहुंचाया जब शायद उसका अंतिम वक्त आ चुका था। इसका दायित्व कौन लेगा? इसका दायित्व, इसकी जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को लेनी चाहिए। फूलोदेवी ने कहा है कि एसआईटी काफी नहीं है,फास्ट ट्रैक कोर्ट काफी नहीं है, सिर्फ अरेस्ट काफी नहीं है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को जवाब देना चाहिए कि आपने 8 दिन तक एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की? आपने 6 दिन नोर्मल वार्ड में उस बच्ची को क्यों रखा? और सबसे बड़ा सवाल कि जब उस बच्ची ने अपनी आखिरी सांस ली, आप रात के अंधेरे में उस बच्ची को एंबुलेंस में डालकर उसके गांव लेकर गए और रात में ही अंतिम संस्कार क्यों किया? इसकी जांच कौन करेगा? बलात्कारियों की जांच एसआईटी करेगी पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की इस निर्दयता और षड़यंत्र की जांच कौन करेगा, प्रधानमंत्री जवाब दें? फूलोदेवी ने कहा है कि सुशासन की बात करने वाले मुख्यमंत्री के रहते, जो आज बच्ची का क्रियाक्रम हुआ,किसी रीति रिवाज को नहीं माना गया। ढाई बजे रात को जिस तरह से किया गया भाजपा की उत्तरप्रदेश की सरकार क्या छुपा रही है? आपकी नाकामी आज साबित नहीं हुई, जबसे आप मुख्यमंत्री के पद पर बैठे हैं, तब से आपकी नाकामी बार-बार साबित हुई है। जो कल या आज सुबह हाथरस की बेटी के साथ किया गया, आपने हर हद को पार किया, हर सीमा को पार किया। फूलोदेवी ने कहा कि महिला कांग्रेस मांग करती है कि एक ही तरीका है इस मामले में न्याय करने का कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को अपनी गद्दी छोड़नी चाहिए। नरेन्द्र मोदी  का नारा था बेटी बचाओ का,आज देश के बेटियां असुरक्षित है और आप इस पर मौन है । देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं, जो सिर्फ झूठे भाषण देते हैं और एक निकम्मे मुख्यमंत्री को उत्तर प्रदेश में बिठा रखा है।

 

 

26-07-2020
वन विभाग के अधिकारी सूचना के अधिकार के तहत जानकारी देने में कर रहे टालमटोल

कवर्धा। सूचना के अधिकार के तहत नियम सभी के लिए एक ही होता है। सूचना के अधिकार अधिनियम शासन से पारदर्शिता के लिए बनाया गया है। सभी शासकीय विभाग के लिए एक ही होता है, लेकिन वन विभाग के अधिकारियों के लिए लगता है कोई दूसरा नियम व धाराएं है। इसके कारण वन विभाग के एक अधिकारी उसी विषय के आवेदन को देने डिमांड राशि पटाने कह रहे है। तो दूसरा अधिकारी उसी विषय वही जानकारी को धारा का हवाला देकर जानकारी देना संभव नही है ऐसा बता रहे है।जी हां भोरमदेव अभ्यारण्य व लोहारा परिक्षेत्र में एक ही बिंदु पर एक जैसी जानकारी सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई है।

लेकिन भोरमदेव अभ्यारण्य के जन सूचना अधिकारी ने धारा 8 (1) (¡) के तहत जानकारी देने की छूट जनसूचना अधिकारी को दी गई है। अतः जानकारी नहीं दी जा सकती ऐसा जवाब आवेदक को दिया गया। वही दूसरी ओर वही जानकारी को देने लोहारा वन परिक्षेत्र के जनसूचना अधिकारी ने डिमांड राशि जमा कर जानकारी ले जाने कहा गया है। इस प्रकार एक ही विभाग में सूचना के अधिकार के नियम व धाराएं अलग अलग बता रहा है। जबकि दोनो डिवीजन में एक ही जानकारी मांगी गई है। इस प्रकार अधिकारी सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी देने कतराते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि अपीली लगाकर जानकारी के लिए आवेदन प्रेषित किया जा सकता है।

वर्जन

सूचना के अधिकार के तहत यदि जानकारी नहीं दी जा रही है तो मेरे समक्ष अपील की जा सकती है। एक जानकारी देने को तैयार है एक जानकारी नहीं दे रहा है तो सूचना के अधिकार के नियमों को देखना पड़ेगा।
दिलराज प्रभाकर, वनमंडलाधिकारी वन विभाग कबीरधाम

10-07-2020
मुख्यमंत्री की वन मैन शो की प्रवृत्ति और राज्यपाल का अधिकार छीनना लोकतंत्र व संविधान में अनास्था का प्रतीक : डॉ.रमन

रायपुर। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक पर हस्ताक्षर करने के लिए प्रदेश की राज्यपाल अनुसुईया उईके पर दबाव बनाने की प्रदेश सरकार की कोशिशों को घोर अलोकतांत्रिक, असंसदीय और असंवैधानिक बताते हुए इसकी निंदा की है। रमन सिंह ने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार में न तो राजनीतिक समझ-बूझ है, न ही प्रशासनिक क्षमता दिख रही है और अब वह राज्यपाल पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाने की कोशिश करती है तो एक बार फिर संघीय ढाँचे व संवैधानिक प्रक्रिया का खुला अपमान होगा। रमन सिंह ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का अब तक का कार्यकाल देश के संघीय ढाँचे की अवहेलना और प्राय: हर नाजुक मौकों पर संवैधानिक प्रक्रिया को चुनौती देने में ही जाया हुआ है। अपनी सरकार की सारी शक्तियाँ खुद में केंद्रित करके मुख्यमंत्री जिस तरह का वन मैन शो चला और चलाना चाह रहे हैं, वह उनकी लोकतंत्र में गहरी अनास्था का परिचायक तो है ही, अब राज्यपाल के अधिकार छीनने की यह कोशिश उनके घोर असंवैधानिक आचरण का प्रदर्शन है। देश के इस संवैधानिक ढाँचे की एक निश्चित प्रक्रिया है और प्रदेश सरकार राज्यपाल को संविधान प्रदत्त अधिकार छीनने पर आमादा होकर उस संवैधानिक ढाँचे व प्रक्रिया को अवरुद्ध करने का अलोकतांत्रिक व असंसदीय कार्य कर रही है। यह इस प्रदेश सरकार की गलत परम्परा की मिसाल होगा।

 

18-06-2020
भूपेश बघेल सरकार बाल अधिकारों के संरक्षण के प्रति सजग : प्रभा दुबे

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के स्थापना दिवस पर वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से आयोग ने एक परिचर्चा की। परिचर्चा में बाल अधिकारों के संरक्षण में आने वाली चुनौतियों का समाधान और बच्चों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के संबंध में विचार-विमर्श किया गया। आयोग की अध्यक्ष प्रभा दुबे ने कहा कि राज्य सरकार बाल अधिकारों के संरक्षण के प्रति सजग है। राज्य सरकार ने अन्य राज्यों से आने वाले श्रमिकों के बच्चों को संक्रमण से बचाते हुए भोजन, आवास, चरण पादुका उपलब्ध कराने के साथ ही उन्हें गंतव्य तक पहुंचाने के लिए आवागमन के साधन भी मुहैय्या कराया है। प्रभा दुबे ने बच्चों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने के प्रयासों को सर्वप्रमुखता से अपनाने की अपील की है। प्रभा दुबे ने कहा कि आयोग की भूमिका सकारात्मक है।

बच्चों के अधिकारों की रक्षा के क्षेत्र में सामने आ रही सभी चुनौतियों को राज्य शासन के समक्ष चर्चा कर समाधान किया जाएगा। उन्होंने आयोग के शुरू किए गए नवीन कार्यक्रमों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि आयोग ने पिछले वर्षों में बाल संरक्षण के विषयों पर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। आयोग की इस उपलब्धि में सरकार व शासकीय अमले का बडा़ योगदान है। आयोग के सचिव प्रतीक खरे ने बच्चों के अधिकारों की रक्षा के क्षेत्र में आ रही नवीन चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित किया। पॉक्सो एक्ट के संदर्भ में भी चर्चा की गई। जिलों से उपस्थित संस्थाओं के अधीक्षकों ने व्यवहारिक कठिनाइयों की ओर ध्यान आकर्षित किया। प्रदेश में बच्चों के लिए नशामुक्ति केन्द्र की आवश्यकता पर भी चर्चा की गई।  परिचर्चा में प्रदेश के जिला बाल संरक्षण अधिकारियों, संस्थाओं के अधीक्षकों ने हिस्सा लिया।

27-05-2020
अधिकार होने का आशय यह नहीं कि प्रदेश सरकार तबादला उद्योग चलाने लग जाए : भाजपा

रायपुर। भाजपा नेता और प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कोरोना-संकट की इस घड़ी में भी किए गए तबादलों पर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। कौशिक ने कहा कि तबादले करना प्रदेश सरकार का अधिकार होने का आशय यह नहीं होता कि प्रदेश सरकार तबादला उद्योग चलाने लग जाए। अधिकारियों के तबादलों की समय-सीमा की अपनी एक मर्यादा होती है, लेकिन ऐसा प्रतीत हो रहा है कि प्रदेश सरकार को जब सनक चढ़ती है, तबादलों की सूची जारी कर देती है। यह क्रम सत्ता में आने के बाद से ही कांग्रेस की सरकार ने चला रखा है।कौशिक ने कहा कि अभी जबकि प्रदेश में कोरोना संक्रमण अपने विस्फोटक स्वरूप में है, प्रदेश सरकार द्वारा 23 कलेक्टर्स को एकाएक एक साथ स्थानांतरित करना प्रशासनिक सूझबूझ का परिचायक तो कतई नहीं माना जा सकता। ये कलेक्टर्स अपने-अपने जिलों में कोरोना के खिलाफ जारी जंग की व्यवस्था सम्हाल रहे थे, राज्य सरकार की ओर से उपलब्ध सीमित संसाधनों के बावजूद कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए मेहनत कर रहे थे और उन्हें अपने जिले की तमाम व्यवस्थाओं की कमी-बेशी का पूरा ध्यान था।कौशिक ने कहा कि ऐसी स्थिति में एकाएक प्रदेश सरकार द्वारा एक उद्योग की शक्ल में 23 कलेक्टर्स को एक जिले से हटाकर दूसरे जिले में भेज देना विवेकसम्मत निर्णय नहीं है। अब ये कलेक्टर्स नए जिलों में जाकर हालात तो समझकर जब तक कोई निर्णय लेने की स्थिति में आएंगे, फैलाव पाकर कोरोना संक्रमण बेकाबू होते देर नहीं लगाएगा।उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सवाल तो यह भी है कि आखिर अभी ऐसा कौन-सा प्रशासनिक संकट आ खड़ा हुआ था,जो प्रदेश सरकार को इतने व्यापक पैमाने पर तबादले करने का अव्यावहारिक व नितांत अदूरदर्शितापूर्ण निर्णय लेना पड़ा?

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