GLIBS
26-07-2020
वन विभाग के अधिकारी सूचना के अधिकार के तहत जानकारी देने में कर रहे टालमटोल

कवर्धा। सूचना के अधिकार के तहत नियम सभी के लिए एक ही होता है। सूचना के अधिकार अधिनियम शासन से पारदर्शिता के लिए बनाया गया है। सभी शासकीय विभाग के लिए एक ही होता है, लेकिन वन विभाग के अधिकारियों के लिए लगता है कोई दूसरा नियम व धाराएं है। इसके कारण वन विभाग के एक अधिकारी उसी विषय के आवेदन को देने डिमांड राशि पटाने कह रहे है। तो दूसरा अधिकारी उसी विषय वही जानकारी को धारा का हवाला देकर जानकारी देना संभव नही है ऐसा बता रहे है।जी हां भोरमदेव अभ्यारण्य व लोहारा परिक्षेत्र में एक ही बिंदु पर एक जैसी जानकारी सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई है।

लेकिन भोरमदेव अभ्यारण्य के जन सूचना अधिकारी ने धारा 8 (1) (¡) के तहत जानकारी देने की छूट जनसूचना अधिकारी को दी गई है। अतः जानकारी नहीं दी जा सकती ऐसा जवाब आवेदक को दिया गया। वही दूसरी ओर वही जानकारी को देने लोहारा वन परिक्षेत्र के जनसूचना अधिकारी ने डिमांड राशि जमा कर जानकारी ले जाने कहा गया है। इस प्रकार एक ही विभाग में सूचना के अधिकार के नियम व धाराएं अलग अलग बता रहा है। जबकि दोनो डिवीजन में एक ही जानकारी मांगी गई है। इस प्रकार अधिकारी सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी देने कतराते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि अपीली लगाकर जानकारी के लिए आवेदन प्रेषित किया जा सकता है।

वर्जन

सूचना के अधिकार के तहत यदि जानकारी नहीं दी जा रही है तो मेरे समक्ष अपील की जा सकती है। एक जानकारी देने को तैयार है एक जानकारी नहीं दे रहा है तो सूचना के अधिकार के नियमों को देखना पड़ेगा।
दिलराज प्रभाकर, वनमंडलाधिकारी वन विभाग कबीरधाम

10-07-2020
मुख्यमंत्री की वन मैन शो की प्रवृत्ति और राज्यपाल का अधिकार छीनना लोकतंत्र व संविधान में अनास्था का प्रतीक : डॉ.रमन

रायपुर। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक पर हस्ताक्षर करने के लिए प्रदेश की राज्यपाल अनुसुईया उईके पर दबाव बनाने की प्रदेश सरकार की कोशिशों को घोर अलोकतांत्रिक, असंसदीय और असंवैधानिक बताते हुए इसकी निंदा की है। रमन सिंह ने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार में न तो राजनीतिक समझ-बूझ है, न ही प्रशासनिक क्षमता दिख रही है और अब वह राज्यपाल पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाने की कोशिश करती है तो एक बार फिर संघीय ढाँचे व संवैधानिक प्रक्रिया का खुला अपमान होगा। रमन सिंह ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का अब तक का कार्यकाल देश के संघीय ढाँचे की अवहेलना और प्राय: हर नाजुक मौकों पर संवैधानिक प्रक्रिया को चुनौती देने में ही जाया हुआ है। अपनी सरकार की सारी शक्तियाँ खुद में केंद्रित करके मुख्यमंत्री जिस तरह का वन मैन शो चला और चलाना चाह रहे हैं, वह उनकी लोकतंत्र में गहरी अनास्था का परिचायक तो है ही, अब राज्यपाल के अधिकार छीनने की यह कोशिश उनके घोर असंवैधानिक आचरण का प्रदर्शन है। देश के इस संवैधानिक ढाँचे की एक निश्चित प्रक्रिया है और प्रदेश सरकार राज्यपाल को संविधान प्रदत्त अधिकार छीनने पर आमादा होकर उस संवैधानिक ढाँचे व प्रक्रिया को अवरुद्ध करने का अलोकतांत्रिक व असंसदीय कार्य कर रही है। यह इस प्रदेश सरकार की गलत परम्परा की मिसाल होगा।

 

18-06-2020
भूपेश बघेल सरकार बाल अधिकारों के संरक्षण के प्रति सजग : प्रभा दुबे

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के स्थापना दिवस पर वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से आयोग ने एक परिचर्चा की। परिचर्चा में बाल अधिकारों के संरक्षण में आने वाली चुनौतियों का समाधान और बच्चों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के संबंध में विचार-विमर्श किया गया। आयोग की अध्यक्ष प्रभा दुबे ने कहा कि राज्य सरकार बाल अधिकारों के संरक्षण के प्रति सजग है। राज्य सरकार ने अन्य राज्यों से आने वाले श्रमिकों के बच्चों को संक्रमण से बचाते हुए भोजन, आवास, चरण पादुका उपलब्ध कराने के साथ ही उन्हें गंतव्य तक पहुंचाने के लिए आवागमन के साधन भी मुहैय्या कराया है। प्रभा दुबे ने बच्चों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने के प्रयासों को सर्वप्रमुखता से अपनाने की अपील की है। प्रभा दुबे ने कहा कि आयोग की भूमिका सकारात्मक है।

बच्चों के अधिकारों की रक्षा के क्षेत्र में सामने आ रही सभी चुनौतियों को राज्य शासन के समक्ष चर्चा कर समाधान किया जाएगा। उन्होंने आयोग के शुरू किए गए नवीन कार्यक्रमों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि आयोग ने पिछले वर्षों में बाल संरक्षण के विषयों पर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। आयोग की इस उपलब्धि में सरकार व शासकीय अमले का बडा़ योगदान है। आयोग के सचिव प्रतीक खरे ने बच्चों के अधिकारों की रक्षा के क्षेत्र में आ रही नवीन चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित किया। पॉक्सो एक्ट के संदर्भ में भी चर्चा की गई। जिलों से उपस्थित संस्थाओं के अधीक्षकों ने व्यवहारिक कठिनाइयों की ओर ध्यान आकर्षित किया। प्रदेश में बच्चों के लिए नशामुक्ति केन्द्र की आवश्यकता पर भी चर्चा की गई।  परिचर्चा में प्रदेश के जिला बाल संरक्षण अधिकारियों, संस्थाओं के अधीक्षकों ने हिस्सा लिया।

27-05-2020
अधिकार होने का आशय यह नहीं कि प्रदेश सरकार तबादला उद्योग चलाने लग जाए : भाजपा

रायपुर। भाजपा नेता और प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कोरोना-संकट की इस घड़ी में भी किए गए तबादलों पर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। कौशिक ने कहा कि तबादले करना प्रदेश सरकार का अधिकार होने का आशय यह नहीं होता कि प्रदेश सरकार तबादला उद्योग चलाने लग जाए। अधिकारियों के तबादलों की समय-सीमा की अपनी एक मर्यादा होती है, लेकिन ऐसा प्रतीत हो रहा है कि प्रदेश सरकार को जब सनक चढ़ती है, तबादलों की सूची जारी कर देती है। यह क्रम सत्ता में आने के बाद से ही कांग्रेस की सरकार ने चला रखा है।कौशिक ने कहा कि अभी जबकि प्रदेश में कोरोना संक्रमण अपने विस्फोटक स्वरूप में है, प्रदेश सरकार द्वारा 23 कलेक्टर्स को एकाएक एक साथ स्थानांतरित करना प्रशासनिक सूझबूझ का परिचायक तो कतई नहीं माना जा सकता। ये कलेक्टर्स अपने-अपने जिलों में कोरोना के खिलाफ जारी जंग की व्यवस्था सम्हाल रहे थे, राज्य सरकार की ओर से उपलब्ध सीमित संसाधनों के बावजूद कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए मेहनत कर रहे थे और उन्हें अपने जिले की तमाम व्यवस्थाओं की कमी-बेशी का पूरा ध्यान था।कौशिक ने कहा कि ऐसी स्थिति में एकाएक प्रदेश सरकार द्वारा एक उद्योग की शक्ल में 23 कलेक्टर्स को एक जिले से हटाकर दूसरे जिले में भेज देना विवेकसम्मत निर्णय नहीं है। अब ये कलेक्टर्स नए जिलों में जाकर हालात तो समझकर जब तक कोई निर्णय लेने की स्थिति में आएंगे, फैलाव पाकर कोरोना संक्रमण बेकाबू होते देर नहीं लगाएगा।उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सवाल तो यह भी है कि आखिर अभी ऐसा कौन-सा प्रशासनिक संकट आ खड़ा हुआ था,जो प्रदेश सरकार को इतने व्यापक पैमाने पर तबादले करने का अव्यावहारिक व नितांत अदूरदर्शितापूर्ण निर्णय लेना पड़ा?

23-05-2020
हाईकोर्ट ने कहा सरकार को जांच का पूरा अधिकार, अमन सिंह की याचिका रद्द

रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व प्रमुख सचिव अमन सिंह को हाईकोर्ट बिलासपुर से करारा झटका लगा है। स्वयं के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी जांच और ईओडब्ल्यू द्वारा की जा रही जांच को रोकने अमन सिंह ने बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। अमन सिंह के खिलाफ दिल्ली निवासी विजया मिश्रा ने आरटीआई से प्राप्त जानकारी के आधार पर प्रधानमंत्री कार्यालय को शिकायत की थी कि आरईएस से पीआरएस लेने के बाद, तत्कालीन सरकार द्वारा अमन सिंह को संविदा नियुक्ति दी गई थी तथा संविदा नियुक्ति हेतु अमन सिंह ने कनार्टक में पदस्थापना के दौरान उसके विरुद्ध भ्रष्टाचार की जांच होने व उसके विरुद्ध चार्जशीट जारी होने के तथ्य को छिपाया था। पीएमओ द्वारा विजया मिश्रा की शिकायत जांच एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु राज्यशासन को भेजे जाने पर छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जांच के लिए एसआईटी गठित किया गया।

अमन सिंह द्वारा पूर्व जांच में आरोप निराधार पाए जाने का हवाला देते हुए पुन: जांच के लिए एसआईटी गठनन को नियम विरुद्ध बताते हुए हाईकोर्ट की शरण ली थी। जस्टिस पी. सैम कोशी की सिंगल बैंच ने दिनांक 28 फरवरी 2020 को सुनवाई पूर्ण की कर निर्णय सुरक्षित रख लिया था। दिनांक 21 फरवरी 2020 को पारित निर्णय में ललिता कुमारी विरुद्ध उप्र शसन एवं अन्य, तेलंगाना शासन विरुद्ध मानाजीपेत एलियाज, जयललिता एवं अन्य विरुद्ध कर्नाटक राज्य एवं अन्य प्रकरणों में हुए पूर्व निर्णयों (लैण्ड मार्क डिसीजन) का हवाला देते हुए राज्य शासन द्वारा विजया मिश्रा की शिकायत जांच हेतु एसआईटी जांच गठन को उचित ठहराते हुए याचिकाकर्ता अमन सिंह द्वारा राज्य शासन पर पूर्वाग्रह एवं दुर्भावनावश कार्यवाही करने के आरोप को निराधार होना माना है। कोर्ट ने अपने निर्णय में यह भी उल्लेखित किया है कि याचिकाकर्ता अमन सिंह, शासन पर लागए गए अपने आरोपों को प्रमाणित करने में असफल रहे। हाईकोर्ट ने अमन सिंह के उस तर्क को भी नहीं माना कि राज्य शासन द्वारा उसे पूर्व में नोटिस जारी कर जवाब लिया गया था व उसे क्लीन चीट दे दी गई थी। इसे कार्यवाही न मानते हुए अपने निर्णय में जांच कराने का अधिकार राज्य शासन के पास सुरक्षित होना एवं किसी जांच में संतुष्ट न होने की स्थिति में राज्य सरकार को दोबारा जांच कराने का पूर्ण अधिकार होना माना है। हाईकोर्ट के इस निर्णय को पूर्व प्रमुख सचिव अमन सिंह की करारी हार के रूप में देखा जा रहा है।

12-05-2020
व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर स्वतंत्र निर्णय का अधिकार केन्द्र सरकार से राज्य को मिले : दीपक बल्लेवार

रायपुर। छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स और कैट व्यापारियों की समस्या को लेकर हमेशा जागरूक रहते हैं। कैट का प्रयास रहता है कि अपने स्तर पर भरपूर प्रयास से व्यापारियों को उनके व्यापार में कोई परेशानी का सामना ना करना पड़े। छत्तीसगढ़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स के उपाध्यक्ष दीपक बल्लेवार ने कहा कि  कोरोना वायरस संक्रमण सामने आने  और लाकडाउन होने के बाद व्यापारियों की दुकानें बंद हैं। राज्य सरकारों को केंद्र सरकार ने कोई अधिकार नहीं दिया है। केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय की ओर से समय-समय पर एडवाइजरी जारी करने के बाद ही उस एडवाइजरी के आधार पर छत्तीसगढ़ की राज्य सरकार आदेश जारी करती है। दीपक बल्लेवार ने कहा कि छत्तीसगढ़ में और केंद्र में अलग-अलग पार्टी की सरकार होने के बाद काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दोनों व्यापारिक संगठनों में कांग्रेस और भाजपा से जुड़े लोग भी शामिल हैं लेकिन वह हमेशा व्यापारी हित की बात करते हैं।

पिछले कुछ दिनों से भाजपा के सांसद व प्रदेश प्रवक्ता और भाजपा के अन्य वक्ता अनावश्यक रूप से व्यापारियों के मामले में मदद करना तो दूर विवाद की स्थिति निर्मित हो ऐसा प्रयास करते हैं। राज्य सरकार के विरुद्ध अनर्गल प्रलाप करते हैं व्यापारी जब व्यापार करता है तो वह सिर्फ व्यापारी होता है। दीपक ने कहा कि छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स के उपाध्यक्ष के रूप में वे केंद्र सरकार से मांग करते हैं कि वह राज्य सरकार को पूर्ण अधिकार दे कि व्यापारी प्रतिष्ठान के मामले में स्वतंत्र निर्णय ले सके कौन सी दुकान कब खुलेगी, कितने समय खुलेगी, इसका पूरा अधिकार राज्य सरकार को देना चाहिए। जिससे राज्य सरकार व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल से चर्चा कर जनता के हित में और व्यापारियों के हित में जो उचित होगा उसका निर्णय कर सके। दीपक बल्लेवार ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि भाजपा के सांसद और अन्य नेतागण जिनकी केंद्र में सरकार है वह पत्र वहां लिखें और राज्य सरकार को अधिकार देने के बारे में व्यापारियों के हित के लिए दबाव डालें जिससे छत्तीसगढ़ में व्यापारी अपना व्यवसाय कर सकें।

07-05-2020
आरोग्य सेतु एप से निजता के अधिकार को खतरा : घनश्याम राजू तिवारी

रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी प्रवक्ता घनश्याम राजू तिवारी ने मोदी सरकार पर आरोग्य सेतु एप से भारत की जनता पर उत्पन्न खतरे की आशंका को लेकर निशाना साधा है। कहा है कि आरोग्य सेतु एप में निजता के उल्लंघन के गंभीर मुद्दे हैं। हम सब जानते हैं कि, भारत में निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है, जैसा सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है। आरोग्य सेतु एप के बारे में एक एथिकल हैकर ने अपने ट्विटर हैंडल पर बताया कि किस प्रकार से इसमें निजता के अधिकार के उल्लंघन का मुद्दा है, जिसे आईसीसी पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी उठाया था और वे सही थे। उन्होंने पुन: ट्वीट कर ये बताया कि भारत सरकार की जो कंप्यूटर एमरजेंसी रिस्पोंस टीम है, जो सर्ड या सीईआरडी कहते हैं, उन्होंने उन तथ्यों के बारे में उनसे जानकारी ली। ये अपने आप में सबूत है कि आरोग्य सेतु एप निजता के अधिकार का उल्लंघन करती है। तिवारी ने आरोग्य सेतु एप की गंभीरता पर सवाल उठाया है कि आरोग्य सेतु से यह जानकारी हैकरों तक पंहुच रही है। सारा डेटा चुराने जानकारियां सरकार तक पहुंचाने का खेल मात्र है। आरोग्य सेतु एप जब थर्ड पार्टी आरोग्य सेतु को हैक कर ले रही है, तो यह डाटा तो देश के दुश्मनों तक भी पहुंचने में देर नहीं लगेगी। एक हैकर ने आरोग्य सेतु को हैक करके यह जानकारी प्राप्त कर ली कि, पीएम आफिस में देश की संसद में और सेना में कितने लोगों को कोरोना है। आरोग्य सेतु एप में तो यह भी जानकारी है कि डाउनलोड करने वाला कहां कहां गया। सेना, संसद, प्रधानमंत्री कार्यालय की यह जानकारियां दुश्मन देशों तक पहुंचेंगे तो क्या होगा? तिवारी ने कहा कि, जिन मजदूरों को खाने के राशन के लाले पड़े हुए हैं, रहने के लिए जगह नहीं है,मोबाइल और मोबाइल चार्जिंग की कोई व्यवस्था नहीं है उन्हें आरोग्य सेतु एप डाउनलोड करने के लिए प्रेरित करने के लिए कहना जले पर नमक छिड़कने की तरह है।

 

 

23-04-2020
अन्य प्रदेशों से मजदूर बुलाकर वनवासियों का अधिकार न छीने सरकार : देवजी भाई पटेल

रायपुर। वन मंत्री के एक बयान के बाद भाजपा नेता और पूर्व विधायक देवजी भाई पटेल ने कांग्रेस सरकार पर पलटवार किया है। पूर्व विधायक पटेल ने कहा कांग्रेस सत्ता में आने से पहले जो जन घोषणा पत्र जारी किया था वो मात्र दिखावा है। प्रदेश के वन मंत्री कह रहे है कि अब तेंदूपत्ता तोड़ने के लिए बाहर से करीब 12 सौ लोग प्रदेश में आएंगे। तेंदूपत्ता संग्रहण बस्तर समेत अन्य जिलों के वासियों का अधिकार है और यह कोई अभी का काम नहीं है यह शुरू से चला आ रहा है, पूर्व सरकारों की मंशा रही है कि आदिवासी क्षेत्र के उनके अधिकारों को सुरक्षित रखना है। अब अन्य प्रदेश से जो मजदूर आएंगे वह कौन से प्रदेश से आएंगे? क्या इस प्रदेश में तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए लोगों की कमी है? पटेल ने कहा कि प्रदेश के आदिवासी तेंदूपत्ता तोड़ कर अपने आर्थिक स्थिति को मजबूत करते हैं। यह उनके आय का एक प्रमख साधन है। अगर बाहर से तेंदूपत्ता तोड़ने वाले लोगों के माध्यम से तेंदू पत्ता तोड़वाया जाएगा तो वनांचल के आदिवासी भाई-बहनों व गरीब लोगों की रोजी-रोटी छीन जाएगी। कोरोना संकट के चलते वर्तमान समय रोजगार की भी कमी हो गई है। ऐसे में बाहर के मजदूरों को रोजगार देने से अच्छा है कि वनांचल क्षेत्र के भाई-बहनों को रोजगार दें।

30-03-2020
भूपेश बघेल ने कहा - कलेक्टर को जिले में चिकित्सक और विशेषज्ञों की अस्थाई संविदा नियुक्ति का अधिकार...

रायपुर। कोरोना वायरस (कोविड-19) महामारी की रोकथाम के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर राज्य सरकार की ओर से एक बड़ा निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि कोरोना महामारी के नियंत्रण के लिए जिलों में आवश्कतानुसार चिकित्सक एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों की अस्थाई संविदा नियुक्ति का अधिकार जिला कलेक्टरों को सौंपा गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन छत्तीसगढ़ की ओर से इस संबंध में जारी आदेश के तहत कोरोना महामारी के नियंत्रण के लिए जिलों में आवश्यकतानुसार अधिकतम पांच चिकित्सक और तीन विशेषज्ञ चिकित्सकों की अस्थाई संविदा नियुक्ति आगामी तीन माह के लिए करने के अधिकार जिला कलेक्टरों को प्रत्यायोजित किया गया है

। जिलों में संविदा नियुक्ति के लिए विशेषज्ञों की अनुपलब्धता की स्थिति में विशेषज्ञों के उपलब्ध तीन पदों के विरूद्ध तीन अतिरिक्त चिकित्सा अधिकारी की नियुक्ति की जा सकेगी। किसी जिले में इसके अतिरिक्त भी चिकित्सों की आवश्यकता हो तो वे इसके लिए मिशन संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन नवा रायपुर अटल नगर को कलेक्टर सूचित करेंगे। आदेश में कहा गया है कि आरओपी वर्ष 2019-20 में स्वीकृति अनुसार नर्सिंग स्टाफ और अन्य पैरा मेडिकल की स्टाफ नियुक्ति के लिए निर्देश पूर्व में भेजे जा चुके हैं। कलेक्टरों को जिला स्तर पर संविदा नियुक्ति के संबंध में की गई कार्यवाही की अद्यतन जानकारी मिशन संचालक को तत्काल उपलब्ध कराने को कहा गया है।

 

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