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13-01-2021
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के पांच साल पूरे होने पर नरेंद्र मोदी ने लाभार्थी किसानों को दी शुभकामनाएं

रायपुर नई दिल्ली। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के पांच साल पूरा होने के अवसर पर लाभार्थी किसानों को पीएम नरेंद्र मोदी ने बुधवार को बधाई और शुभकामनाएं  दी। मोदी ने ट्वीट कर कहा कि देश के अन्नदाताओं को प्रकृति के प्रकोप से सुरक्षा प्रदान करने वाली पीएम फसल बीमा योजना के आज 5 साल पूरे हो गए हैं। इस स्कीम के तहत नुकसान का कवरेज बढ़ने और जोखिम कम होने से करोड़ों किसानों को लाभ हुआ है। इसके सभी लाभार्थियों को मेरी बहुत बहुत बधाई। बता दें की पीएम मोदी ने 13 जनवरी 2016 को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शुरुआत की थी। इसके अंतर्गत किसानों को प्राकृतिक आपदाओं के कारण होने वाले नुकसान से पूरे फसल चक्र को बीमा.सुरक्षा उपलब्ध करवाई जाती है।

17-12-2020
हाथियों के आतंक से प्रभावित डुबानवासियों को राहत राशि देने पहुंची रंजना साहू

धमतरी। गरियाबंद क्षेत्र से धमतरी जिला में चंदा हाथियों का झुंड विचरण करते हुए डुबान क्षेत्र के विभिन्न गांवों में फसल सहित अन्य क्षति पहुंचाते हुए वहां के रहवासियों का काफी नुकसान पहुंचाया। इसका संज्ञान प्रभावित लोगों के द्वारा विधायक रंजना साहू को दिए जाने पर बीते दिनों प्रभावित क्षेत्र का दौरा भी किया तथा राज्य स्तर पर शासन के जिम्मेदार लोगों एवं प्रशासन के अधिकारीयों, कर्मचारियों को अवगत कराते हुए क्षतिपूर्ति राशि प्रदान करने की मांग की। इस पर त्वरित रूप से अमल करते हुए डुबान क्षेत्र के प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के दृष्टिकोण से विधायक के हाथों वन विभाग ने 71 क्षति पहुंचे परिवार को लगभग 4 लाख 57 की राशि का चेक के माध्यम से प्रदत्त की गई।

राशि वितरण पश्चात विधायक रंजना साहू ने प्रभावित लोगों को ढांढस बंधाते हुए कहां की क्षति के परिपूर्ति पर दी गई राशि पर्याप्त नहीं है लेकिन संकट का यह समय सहयोग प्रदान करने का धेय महत्वपूर्ण है। एक जनप्रतिनिधि के रूप में हर संकट के समय मैं आपके साथ खड़ी रहूंगी। उपस्थित लोगों ने विधायक का आभार मानते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। विधायक के साथ चेक वितरण करने वालों में जिला पंचायत सदस्य खूब लाल ध्रुव, जनपद उपाध्यक्ष अवनेंद्र साहू, नगर निगम पूर्व सभापति राजेंद्र शर्मा,ए पार्षद सरिता आसाई, सरपंच हेमलता तारम, गंगरेल मंडल महामंत्री चंद्रहास जैन, मंडल उपाध्यक्ष अहमद अली खान, परमानंद यादव, सुरेंद्र सिन्हा, राम प्रसाद, पुनीत राम, बिसंबर साहू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

10-12-2020
महानदी में मछली पकड़ना, फसल लगाना मना

जांजगीर-चांपा। कार्यपालन अभियंता जल संसाधन संभाग रायगढ़ ने आम जनता को सूचित किया गया है कि महानदी पर निर्मित कलमा बैराज में 16 अक्टूबर से 15 जून 2021 तक पूर्ण जलभराव स्तर तक जल भरा जाएगा। बैराज के ऊपर से कभी भी अत्यधिक मात्रा में जला सकता है। बैराज में निर्धारित मात्रा से अधिक जलभराव होने पर कभी भी बैराज के गेट खोले जा सकते हैं, जिससे बैराज के नीचे महानदी में जलभराव की मात्रा अचानक अत्यधिक बढ़ सकती है। इसके मद्देनजर बैराज के नीचे महानदी में मछली पकड़ना, फसल लगाना एवं नहाने इत्यादि करना सख्त मना है। यदि  सूचना का पालन नहीं किया जाएगा तो ऐसी स्थिति में होने वाली जनधन हानि होने पर विभाग की कोई जिम्मेदारी नहीं रहेगी।

 

07-12-2020
दूरस्थ अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों की महिलाएं हल्दी और अदरक की फसल लगाकर बनीं आत्मनिर्भर

रायपुर। प्रदेश शासन की विभिन्न रोजगारमूलक योजनाओं से जुड़कर दूरस्थ अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों की महिलाएं भी अब शासन की योजनाओं का फायदा उठाकर आर्थिक उन्नति कर रही हैं। दंतेवाड़ा जिले के कुआकोंडा गांव की 10 महिलाओं के गायत्री स्व-सहायता समूह ने कृषि विभाग के ‘आत्मा‘ योजना से प्रेरित होकर हल्दी और अदरक की खेती करना प्रारम्भ किया है। इससे उन्हें 25 हजार रूपए प्रति फसल मुनाफा हो रहा है। परंपरागत उत्पादन से उबरने में प्रयासरत 10 महिलाओं के कृषक समूह जिसका नाम गायत्री स्वयं सहायता समूह है के पास कुआकोंडा ग्राम में 20 एकड़ जमीन है, जिनमें मरहान, टिकरा, माल और गभार भूमि है। इससे यह सभी अपनी मुख्य फसल देशी धान लगाते थे। जो सिर्फ उनके भरण-पोषण के लिए होती है, बाकी जरूरत के लिए अन्य कार्य या कृषि कार्य किए जाते हैं। जिले के कृषि विभाग के अधिकारियों ने गायत्री स्व-सहायता समूह की महिलाओं से संपर्क कर कृषि विभाग में संचालित आत्मा योजना अंतर्गत फसल प्रदर्शन की जानकारी दी और विभाग के अधिकारियों ने निःशुल्क बीज खाद दवाई और प्रशिक्षण दिया है। फसलों की नई तकनीकी ज्ञान के लिए शैक्षणिक भ्रमण भी करवाया गया ताकि खेती करना भी सीख सकें।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने गायत्री स्व-सहायता समूह को हल्दी अदरक की फसल लगाने के लिए प्रेरित किया है।

हल्दी और अदरक ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में आसानी से बिक जाने वाली फसल है और उनके सही दाम तत्काल मिल भी जाते हैं। अधिकारियों के माध्यम से संबंधी प्रशिक्षण दिए गए,जिससे फसल संबंधी जानकारी मिलती रहे। कृषि विभाग ने गायत्री स्व-सहायता समूह के प्रत्येक महिला कृषक को 10 डीएम प्रदर्शन की दर से 5 कृषक को 40 किलोग्राम प्रदर्शन अदरक और 5 कृषक को 40 किलोग्राम प्रदर्शन हल्दी लगाने के लिए बीज और 10 किलोग्राम प्रति प्रदर्शन खाद उपलब्ध कराई गई और कीटों के प्रकोप से बचाने के लिए जैविक कीटनाशक भी उपलब्ध कराया है। गायत्री स्व-सहायता समूह के माध्यम से लगातार हल्दी और अदरक की फसल देखरेख और बढ़वार को देखते हुए प्रति प्रदर्शन 5 कृषक पैदावार मिलने की संभावना है,जिसे बाजार में बेचकर लगभग 20 से 25 हजार रूपए तक का मुनाफा प्रत्येक किसान आमदनी में इजाफा कर सकते हैं। गायत्री स्व-सहायता समूह के उन्नत खेती प्रबंध के लिए अपने गांव में ख्याति अर्जित कर चुकी है और अन्य कृषकों को अन्य फसल लगाने और कृषि विभाग क मार्गदर्शन लेने के लिएलोगों में रूचि पैदा करने में मिसाल कायम की है। इस समूह ने ग्राम की अन्य महिला और पुरुष कृषकों जैविक खेती के प्रति जागरूक किया है।

 

24-11-2020
जिले में हल्दी और अदरक की खेती के लिए किसानों का बढ़ रहा रूझान

जांजगीर-चांपा। औषधीय गुणों से युक्त नकद फसल अदरक और हल्दी की खेती के प्रति जिले के किसानों का रूझान बढ़ रहा है। हल्दी और अदरक की फसल कम लागत मे अधिक आय देने वाली होने के कारण किसान अब इन फसलों कों उगाने की ओर प्रेरित हो रहे हैं। कलेक्टर यशवंत कुमार के निर्देश एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत तीर्थराज अग्रवाल के मार्गदर्शन में जिले में हल्दी (मसाले) फसल की खेती को बढावा दिया जा रहा है। जिले के किसान हल्दी (मसाले) फसल खेती के प्रति जागरूक हो रहे हैं। उप संचालक कृषि एमआर तिग्गा ने बताया कि हल्दी एवं अदरक मसाले वाली दो ऐसी फसल है,जिनको जांजगीर-चांपा  जिले में उगाने की अचछी सम्भावनाएं है। इनको उगाने के लिए विशेष देखरेख की भी आवश्यकता नहीं पड़ती है क्योंकि ये हर प्रकार की जमीन में आसानी से उग जाती है।

इनको छायादार स्थानों में तथा बड़े वृक्षों के नीचे,जहां अन्य फसलें नहीं उग पाती वहां भी सफलतापूर्वक उगाई जा सकती है। घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए इन दोनों फसलों को गृह वाटिका में भी उगाया जा सकता है। जिले केे विकासखण्ड-सक्ती के कृषक रामकुमार पटेल (0.15 हेक्टेयर),अश्वनी कुमार पटेल (0.125 हेक्टेयर),बिहारीलाल कंवर (0.10 हेक्टेयर) एवं अन्य किसानों द्वारा हल्दी फसल की खेती की जा रही है। आगे आने वाले वर्षों मे फसल के क्षेत्रफल मे बढोत्तरी की संभावनाएं हैं।

 

09-11-2020
कोरिया जिले का मौसम हल्दी जैसी फायदेमंद फसलों के अनुकूल है, कहा सीईओ तूलिका प्रजापति ने

रायपुर/बैकुण्ठपुर। कोरिया जिले का मौसम हल्दी जैसी मूल्यवान फसलों के लिए अच्छा है, इसके व्यवसायिक उत्पादन से आने वाले समय में गौठान समितियों के लिए आर्थिक उन्नति के नए अवसर बनेंगे। उक्ताषय के विचार जिला पंचायत की मुख्यकार्यपालन अधिकारी तूलिका प्रजापति ने पोड़ी ग्राम पंचायत में गौठान के समीप हल्दी की फसल का अवलोकन करने के बाद व्यक्त किए। जिला पंचायत सीइओ तूलिका प्रजापति ने सोनहत जनपद पंचायत अंतर्गत कई ग्राम पंचायतों का भ्रमण कर गौठानों का निरीक्षण किया। यहां उन्होने कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारियों के साथ हल्दी की फसल का बारीक मुआयना किया और स्थानीय कृषकों से बातचीत की। विदित हो कि सुराजी गांव योजना के तहत ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कृषि आधारित कार्यों को गौठान ग्रामों में विशेष महत्व के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।

इसी अनुक्रम में कोरिया जिले के विभिन्न गौठानों का संचालन करने वाली समितियों की आय बढ़ाने के लिए नगद फसल हल्दी की वृहद स्तर पर बोआई की गई है। इसके साथ ही गौठान ग्रामों में कृषक समूहों को भी इस महती परियोजना से जोड़ा गया है। इसलिए कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के देखरेख में लगभग 50 एकड़ क्षेत्र में इस बार हल्दी की फसल लगाने की पहल की गई है। फलोद्यानों क बीच भी हल्दी की फसल लगाई गई है और टपक सिंचाई योजना के तहत इसे बढ़ाया गया है। फसल का अवलोकन करने के लिए सोनहत जनपद के ग्राम पंचायतों में जाकर सीइओ ने स्थानीय जनों से इस फसल के उत्पादन के बारे मेे बातचीत की।

ग्राम पंचायत पोड़ी और कुषहा मे सीइओ जिला पंचायत के भ्रमण के दौरान हल्दी फसल की देखरेख कर रहे। किसानों ने बताया कि इस बार फसलों की स्थिति काफी अच्छी है। गौठान समितियों के साथ इसे लगाने वाले आदिवासी कृषकों का अच्छा आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है। ग्रामीणों से चर्चा करने के बाद जिला पंचायत सीइओ ने बताया कि गौठान ग्राम क्रमशः सोरगा, जामपानी, कोडिमार छरछा, रोझी, कुशाह व अमहर में गौठान समितियों दवारा चयनित शासकीय भूमि के साथ साथ ग्राम उमझर, दुधनिया, बरबसपुर इत्यादि में कृषकों की सामूहिक बाड़ियों में भी हल्दी की फसल लगाई गई है। जिला पंचायत सीइओ के साथ भ्रमण में उपस्थित कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक  राजपूत के अनुसार 50 एकड़ क्षेत्रफल में अच्छी फसल होने से लगभग 360 से 400 टन तक हल्दी बीज और प्रकंद प्राप्त होने का अनुमान है। इससे प्राप्त उपज का दो तिहाई हिस्सा बीज के रूप में विक्रय कर 60 से 70 लाख रुपए की आमदनी हो सकेगी। साथ ही अगले वर्ष 140 से 150 हेक्टेयर क्षेत्रफल में अन्य गौठान समितियों में भी इसे रोपित कर व्यापक स्तर पर हल्दी उत्पादन किया जा सकेगा। इसके अलावा पत्तियों से भी तेल निकाल कर अतिरिक्त लाभ की ओर समितियां बढ़ रही हैं। बाजार में हल्दी के तेल की कीमत 500 से 600 रुपए प्रतिकलोग्राम होती है। एक हेक्टेयर से 130 से 150 किलो पत्तियां प्राप्त होंगी और जब इसकी पत्तियां पीली पड़ जाती है, तभी इसका तेल निकाला जाएगा। भ्रमण के दौरान जनपद पंचायत के कार्यक्रम अधिकारी, एनआरएलएम की ब्लाक कोआर्डिनेटर सहित अन्य अधिकारी कर्मचारी व स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

06-11-2020
खेतों में फसल अवशेष जलाने पर लगेगा अर्थदण्ड, कलेक्टर ने की गौठानों में पैरा दान करने की अपील

कोरबा। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण द्वारा खेतों में फसलों के कटने के बाद बचे अवशेषों को जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। खेतों में बचे फसल अवशेषों को जलाने से पर्यावरण को होने वाले नुकसान को संज्ञान में लेते हुए ट्रीब्यूनल द्वारा यह आदेश जारी किया गया है। आदेश में किसानों द्वारा खेतों में फसल अवशेष जलाने पर दण्ड का भी प्रावधान किया गया है। उप संचालक कृषि शुक्ला ने आज यहां बताया कि नेशनल ग्रीन ट्रीब्यूनल के आदेश के अनुसार यदि कोई कृषक अपने खेतों में फसल अवशेष जलाते हुए पाये जाते हैं तो दो एकड़ रकबा वाले कृषकों से दो हजार 500 रूपए, दो से पांच एकड़ वाले कृषकों से पांच हजार रूपए एवं पांच एकड़ से अधिक रकबा वाले कृषकों से 15 हजार रूपए दण्ड वसूलने का प्रावधान किया गया है। उप संचालक ने बताया कि फसल अवशेष को जलाने से खेत की छह इंच परत जिसमें विभिन्न प्रकार के लाभदायक सूक्ष्मजीव जैसे राइजोबियम, एजेक्टोबैक्टर, नील हरित काई के साथ ही मित्र कीट के अण्डें भी नष्ट हो जाते हैं एवं भूमि में पाये जाने वाले ह्यूमस, जिसका प्रमुख कार्य पौधों की वृद्धि पर विशेष योगदान होता है, वो भी जल कर नष्ट हो जाते हैं, जिससे आगामी फसल उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। साथ ही भूमि की उर्वरा शक्ति भी अवशेष जलाने से नष्ट होती है। फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन जैसे फसल कटाई उपरांत अवशेषों को इकठ्टा कर कम्पोस्ट गड्ढे या वर्मी कम्पोस्ट टांके में डालकर कम्पोस्ट बनाया जा सकता है अथवा खेत में ही पड़े रहने देने के बाद जीरों सीड कर फर्टिलाइजर ड्रील से बोनी कर अवशेष को सडने के लिए छोड़ा जा सकता है। इस प्रकार खेत में अवशेष छोडने से नमी संरक्षण, खरपतवार नियंत्रण एवं बीज के सही अंकुरण के लिए मलचिंग का कार्य करता है। उप संचालक ने बताया कि एक टन पैरा जलाने से तीन किलो पर्टिकुलेट मैटर (पीएम), 60 किलो कार्बन मोनो आक्साइड, एक हजार 460 किलो कार्बन डाइ आक्साइड, दो किलो सल्फर डाइ आक्साइड जैसे गैसों का उत्सर्जन तथा 199 किलो राख उत्पन्न होती है। अनुमान यह भी है कि एक टन धान का पैरा जलाने से मृदा में मौजूद 5.5 किलोग्राम सल्फर नष्ट हो जाता है।

कलेक्टर ने की पैरा दान करने की अपील

इस संबंध मे कलेक्टर किरण कौशल ने जिले के सभी किसानों से फसल कटने के बाद गौठानों में अधिक से अधिक पैरा दान करने की अपील की है, ताकि गौठानों में आने वाले पशुओं को साल भर पर्याप्त भोजन मिल सके। उन्होंने जिले के सभी सरपंचों से भी मुनादी कराकर किसानों से गौठानों में पैरा दान करने का आग्रह करने की अपील की है। कलेक्टर ने यह भी बताया है कि पैरे को जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है। ऐसा करने पर छत्तीसगढ़ ग्राम पंचायत स्वच्छता सफाई एवं न्यूसेंस का निराकरण तथा उपशमन नियम 1999 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। कलेक्टर ने यह भी अपील की है कि सभी सरपंच अपने-अपने गांवों में धान कटाई के बाद बचे हुए फसल अवशेष पैरे को किसानों को जलाने नहीं देवें। कलेक्टर किरण कौशल ने कृषि विभाग के मैदानी अमले को निर्देशित किया है कि धान कटाई के बाद के फसल अवशेष नरई को जलाने की जगह उससे खाद बनाने के तरीके किसानों को बतायें और शासकीय योजना का लाभ उठाने के लिये प्रेरित करें।

 

06-11-2020
कीटनाशक दवाई दुकानों की जांच जारी, दस्तावेजों में अनियमितता पाए जाने पर कारण बताओ नोटिस जारी

जांजगीर चांपा। कलेक्टर यशवंत कुमार के मार्गनिर्देशन में किसानों को फसल के लिए बाजार मे उपलब्ध कीटनाशकों और दवाइयों की गुणवत्ता पर सतत निगरानी के लिए जांच की कार्रवाई की जा रही है। कलेक्टर ने अमानक कृषि आदान व गैर पंजीकृत संस्थानों पर कार्रवाई करने के सख्त निर्देश दिए हैं। उप संचालक कृषि ने बताया कि कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा जांच के लिए टीम बनाई गई है। इसके द्वारा सतत जांच एवं कार्रवाई की जा रही है। खरीफ वर्ष 2020-21 में कीटनाशक अधिनियम 1968 के नियम 1971 का क्रियान्वयन एवं किसानों को कृषि आदान सामग्री पौध संरक्षण दवाई की गुणवत्तायुक्त उपलब्धता समय पर कराने के निर्देश दिए गए है।

बाजार मे उपलब्ध 53 कीटनाशकों का सैंपल जांच के लिए कीटनाशक गुण नियंत्रक प्रयोगशाला जिला राजनांदगांव एवं केंद्रीय कीटनाशक गुण नियंत्रण प्रयोगशाला फरीदाबाद भेजे गए हैं। इनमें से 26 सैंपल मानक स्तर के पाए गए और 27 की जांच रिपोर्ट अप्राप्त है। जिला स्तरीय टीम और कृषि विभाग के अनुविभागीय अधिकारियों के द्वारा सक्ती और पामगढ़ क्षेत्र के खाद-बीज विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों की जांच की गई। अदान सामग्रियों के क्रय-विक्रय एव भण्डारण संबंधित दस्तावेजों में अनियमितता पाए जाने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। इसी प्रकार सामग्रियों का बिना अधिकार पत्र के विक्रय करने एवं भण्डारित करने पर जब्ती की कार्रवाई की गई।

04-11-2020
धान खरीदने 29 हजार 906 किसानों का पंजीयन पूरा, दस नवंबर तक जारी रहेगा पंजीयन

कोरबा। प्रदेश सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी के लिये किसानों के पंजीयन की अवधि दस नवंबर तक बढ़ानेे के बाद जिले में अभी तक नये-पुराने मिलाकर 29 हजार 906 किसानों का पंजीयन पूरा कर लिया गया है। इन पंजीकृत किसानों का धान फसल का रकबा 44 हजार 481 हेक्टेयर है। जिले में इस वर्ष अभी तक समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिये तीन हजार 773 नये किसानों ने सहकारी समितियों में अपना पंजीयन करा लिया है। पिछले वर्ष धान खरीदी के लिये जिले में 27 हजार 694 किसानों ने पंजीयन कराया था, जिनमें से इस वर्ष रकबा सत्यापन के बाद 691 किसानों का पंजीयन निरस्त हुआ है और 870 किसानों की रकबा सत्यापन के बाद खसरा प्रवृष्टि बाकी है। जिसे अगले दो दिनो में पूरा कर लिया जायेगा। अभी तक पिछले वर्ष के पंजीयन अनुसार 26 हजार 133 किसानों के धान के रकबे के सत्यापन के बाद 40 हजार 516 हेक्टेयर रकबे की सोसाइटी माॅड्यूल में खसरा प्रवृष्टि कर ली गई है। इसी प्रकार तीन हजार 773 नये पंजीकृत किसानों के तीन हजार 965 हेक्टेयर धान के रकबे की इंट्री सोसाइटी माॅड्यूल में हो चुकी है।

कलेक्टर किरण कौशल ने शेष बचे किसानों के धान के रकबे के सत्यापन काम में तेजी लाकर पांच नवम्बर तक सत्यापन का काम पूरा करने के निर्देश सभी अनुविभागीय राजस्व अधिकारियों, तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों सहित पटवारियों को दिये हैं।उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्णय के बाद राज्य में धान और मक्का खरीदी के लिये किसानों के पंजीयन की अवधि दस दिन बढ़ा दी गई है। अब खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 के दौरान समर्थन मूल्य पर धान एवं मक्का बेचने वाले नये किसानों का पंजीयन दस नवम्बर तक किया जा रहा है। पहले किसानों के पंजीयन की तिथि 31 अक्टूबर निर्धारित थी। नये किसानो को पंजीयन के लिए क्षेत्र की सहकारी समिति से आवेदन प्राप्त कर निर्धारित प्रारूप में आवेदन भरकर संबंधित दस्तावेजों के साथ तहसील कार्यालय में जमा करना होगा। आवेदन में उल्लेखित भूमि, धान-मक्का के रकबे एवं खसरे का पटवारी द्वारा राजस्व रिकाॅर्ड के अनुसार सत्यापन किया जाएगा। सत्यापन के लिए राजस्व विभाग के भुईयां डाटा बेस का भी उपयोग किया जाएगा। संबंधित रिकाॅर्ड को तहसीलदार के द्वारा परीक्षण करने के बाद नये किसान का पंजीयन किया जाएगा।

पंजीयन के दौरान सभी किसानों का आधार नंबर उनकी सहमति से दर्ज किया जाएगा। आधार नंबर नहीं होने के कारण किसी भी किसान को पंजीयन से वंचित नहीं किया जाएगा।धान एवं मक्का खरीदी के लिये जिन किसानों ने खरीफ वर्ष 2019-20 में पंजीयन करा लिया था, उन्हें नए पंजीयन की जरूरत नहीं है। पिछले सीजन में पंजीकृत किसानों की दर्ज भूमि, धान और मक्के के रकबे और खसरे को राजस्व विभाग द्वारा अद्यतन किया किया जा रहा है। खरीफ वर्ष 2020-21 में किसान पंजीयन के लिए पिछले वर्ष 2019-20 में पंजीकृत किसानों का डाटा कैरी-फाॅरवर्ड किया गया है। धान और मक्का बेचने के इच्छुक नए किसान दस नवम्बर तक पंजीयन के लिए आवेदन कर सकते हैं। धान-मक्का बेचने वाले नए किसान पंजीयन के लिए संबंधित दस्तावेजों के साथ तहसील कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं। पुराने पंजीकृत किसान अपने पंजीयन में संशोधन कराना चाहते हैं तो समिति माॅड्युल के माध्यम से संशोधन करने की सुविधा दी जा रही है।

03-11-2020
पूर्ण जलभराव स्तर के नीचे अनधिकृत रूप से ली गई फसल के लिए शासन जिम्मेदार नहीं: कार्यपालन अभियंता

धमतरी। कार्यपालन अभियंता जल प्रबंध संभाग रूद्री कोड क्रमांक-38 यूडी रामटेककर ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि जल संसाधन विभाग द्वारा पूर्ण जल भराव स्तर से ऊपर की खाली जमीन एक वर्ष के लिए लीज पर दी जाती है। उन्होंने यह स्पष्ट किया है कि जलाशय का जलस्तर कम या ज्यादा होने से यदि ली गई भूमि से फसल को किसी प्रकार का नुकसान होता है तो शासन की कोई जवाबदारी नहीं होगी तथा इसके एवज में किसी प्रकार का मुआवजा देय नहीं होगा, इस शर्त के साथ भूमि लीज पर दी जाती है। किन्तु कतिपय लोगों के द्वारा चेतावनी का उल्लंघन करते हुए प्रतिवर्ष अनधिकृत रूप से अतिक्रमण कर पूर्ण जल भराव स्तर (एफआरएल) के नीचे की जमीन पर फसल ली जाती है। कार्यपालन अभियंता ने बताया कि इस साल गंगरेल जलाशय का जलस्तर पूर्णरूप से भर गया है, इस कारण अनधिकृत रूप से ली गई फसलें प्रभावित हुई हैं। उन्होंने बताया कि चेतावनी के बाद भी जमीन पर फसल लगाने के कारण फसलों के नुकसान के लिए विभाग उत्तरदायी नहीं है। साथ यह भी बताया गया कि जिला जल उपयोगिता समिति की बैठक सात अक्टूबर को आयोजित की गई थी, जिसमें 26500 हेक्टेयर ग्रीष्मकालीन धान में पानी देने का निर्णय लिया गया है। यदि बांध से नदी में पानी छोड़ा जाता है तो ग्रीष्मकालीन धान लगाने वाले हकदार किसानों को नुकसान होगा। वर्तमान में 500 क्यूसेक पानी विद्युत उत्पादन कर नदी में एवं रायपुर नगर निगम के लिए दिया जा रहा है,जिससे धीरे-धीरे जल स्तर घटता जा रहा है।

 

02-11-2020
Video: कलेक्टर ने कहा डुबान क्षेत्र की फसलों का किसानों को न मुआवजा मिलेगा,न किसी प्रकार की राहत

धमतरी। बारिश का मौसम इस समय अत्यधिक लंबा होने तथा अंतिम दिनों तक बारिश होने के कारण गंगरेल बांध प्रभावित गांव में जो किसान धान का फसल लगाए थे उनकी फसल आज भी 3 फीट पानी में डूबी हुई है। यहां तक की फसल पक कर तैयार हो गई है काटने की स्थिति में वहां के कृषक कमर तक के पानी में घुसकर धान की कटाई कर रहे हैं। कई बार उन्होंने शासन प्रशासन का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया कि गंगरेल बांध का गेट खोल कर पानी को कम किया जाए तो उन्हें फसल काटने में सुविधा मिल जाएगी तथा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। उक्त समस्याओं से विधायक रँजना साहू को अवगत कराया। विधायक ने खुद गांव पहुंचकर समस्या देखी और अधिकारियों को उक्त समस्याओं को अवगत कराते हुए के कृषकों को राहत देने के लिए आवश्यक पहल करने की बात कही।

इस सम्बंध में कलेक्टर जयप्रकाश मौर्य ने साफ कहा है कि डब्ल्यूआरडी विभाग के द्वारा गंगरेल डैम के भरने पर डुबान क्षेत्र का चिन्हाअंकित किया जाता है। किसानों द्वारा जिस जमीन पर धान की फसल लगाई गई है वह जमीन डुबान क्षेत्र में आती है, डुबान में फसल लेने का नियम नहीं है,जिसके कारण किसानों को ना ही मुआवजा मिलेगा न ही किसी भी प्रकार रिलीफ दिया जाएगा। वही आगे कलेक्टर ने कहा कि अगर अभी पानी छोड़ दिया जाता है तो आगे रबी की फसल के समय पानी छोड़ना संभव नहीं होगा,जिससे किसानों को परेशानियां होंगी। वहीं डुबान क्षेत्र के किसानों की समस्या को देखते हुए कलेक्टर कहा कि  गंगरेल डैम के पेनिस टॉप गेट से 2500 क्यूसेक पानी बिजली उत्पादन एवं अन्य संसाधनों के लिए छोड़ा गया है।

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