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17-08-2020
चीन को झटका,दो दर्जन कंपनियां लगाएगी भारत में मोबाइल फोन यूनिट, करेगी 1.5 अरब डॉलर निवेश

नई दिल्ली। मोदी सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने वाली कंपनियों के लिए मार्च में कई तरह के प्रोत्साहनों की घोषणा की थी। इसका नतीजा यह हुआ कि करीब दो दर्जन कंपनियों ने भारत में मोबाइल फोन यूनिट लगाने के लिए 1.5 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया है। सैमसंग के अलावा फॉक्सकॉन के नाम से जानी जाने वाली कंपनी विस्ट्रॉन कॉर्प (Wistron Corp.) और पेगाट्रॉन कॉर्प (Petatron Corp.) ने भी भारत ने निवेश में दिलचस्पी दिखाई है। भारत ने साथ ही फार्मास्युटिकल सेक्टर के लिए भी इसी तरह के इंसेंटिव की घोषणा की है। साथ ही कई अन्य सेक्टरों में भी इसे लागू किया जा सकता है। इनमें ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल और फूड प्रोसेसिंग शामिल है।

मोदी सरकार को उम्मीद है कि भारत में अगले 5 साल में 153 अरब डॉलर का इलेक्ट्रॉनिक्स सामान बनाया जा सकता है और इससे करीब 10 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे। नीलकंठ मिश्रा का अगुवाई में क्रेडिट सुइस ग्रुप के विश्लेषकों का मानना है कि इससे अगले 5 साल में देश में 55 अरब डॉलर का अतिरिक्त निवेश आएगा,जो देश के इकॉनमिक आउटपुट में 0.5 फीसदी की बढ़ोतरी करेगा। इससे अगले 5 साल में ग्लोबल स्मार्टफोन प्रोडक्शन का अतिरिक्त 10 फीसदी भारत शिफ्ट हो सकता है।

04-08-2020
चीन को बड़ा झटका, वीवो नहीं होगा आईपीएल 13वें सीजन का स्पॉन्सर

नई दिल्ली। चीनी मोबाइल कंपनी वीवो इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के अगले सीजन  में स्पॉन्सर नहीं होगी। देश में भारी विरोध के बाद वीवो कंपनी की तरफ से यह फैसला मंगलवार को लिया गया। जून में पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई भिड़ंत के बाद से ही कई लोगों ने चीनी सामानों का बहिष्कार करने की बात कही थी। इसके अलावा आईपीएल गवर्निंग काउंसिल ने जब स्पॉन्सर रिटेन करने की बात कही थी, तो भी सोशल मीडिया पर लोगों ने इस पर विरोध जताया था। सूत्रों के मुताबिक, कंपनी अगले साल यानी 2021 में स्पॉन्सर रहेगी,जो डील 2023 तक चलेगी। इस साल के लिए नए स्पॉन्सर का ऐलान जल्द किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक एक भारतीय कंपनी के साथ बीसीसीआई की बातचीत चल रही है। रेस में एक अमेरिकी कंपनी भी है। बता दें कि इंडियन प्रीमियर लीग के 13वें सीजन का आयोजन 19 सितंबर से यूएई में होने जा रहा है। टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला 10 नवंबर को खेला जाएगा। भारत और चीन के बीच इस समय विवाद चल रहा है।

 

01-07-2020
चीन को झटका, नितिन गडकरी ने कहा- हाइवे प्रॉजेक्ट्स में चीनी कंपनियों की एंट्री होगी बंद

नई दिल्ली। चीन के खिलाफ आर्थिक कार्रवाई की दिशा में भारत तेजी से बढ़ रहा है। पहले 59 चाइनीज ऐप्स बैन किए गए। अब हाइवे प्रॉजेक्ट में भी चीनी कंपनियों की एंट्री बंद की जाएगी। परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को कहा कि भारत हाइवे प्रॉजेक्ट्स में चीनी कंपनियों की एंट्री को बंद करेगा।गडकरी ने कहा कि अगर कोई चाइनीज कंपनी जॉइंट वेंचर के रास्ते भी हाइवे प्रॉजेक्ट्स में एंट्री की कोशिश करेगी तो उसे भी रोक दिया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने कहा कि सरकार यह भी सुनिश्चित करेगी कि एमएसएमई सेक्टर में चाइनीज इन्वेस्टर्स को एंटरटेन नहीं किया जाए।गडकरी ने कहा कि बहुत जल्द एक पॉलिसी लाई जाएगी,जिसके आधार पर चाइनीज कंपनियों की एंट्री बंद होगी और भारतीय कंपनियों के लिए नियम आसान बनाए जाएंगे। भारतीय कंपनियों को पार्टिसिपेशन का ज्यादा से ज्यादा मौका मिले, इस पहलू को पॉलिसी बनाते समय ध्यान में रखा जाएगा।

हाइवे प्रॉजेक्ट्स में वर्तमान में चाइनीज निवेश को लेकर गडकरी ने कहा कि कुछ ही ऐसे प्रॉजेक्ट्स हैं, जिनमें चाइनीज निवेश शामिल हैं। ऐसे में उन्होंने वर्तमान में इश्यू टेंडर को लेकर कहा कि अगर चाइनीज वेंचर होगा तो टेंडर की प्रक्रिया दोबारा अपनाई जाएगी। नए नियम को लेकर उन्होंने कहा कि यह वर्तमान और आने वाले टेंडर पर लागू होंगे।गडकरी ने कहा कि हमने फैसला किया है कि हाइवे प्रॉजेक्ट्स में भारतीय कंपनियों को बेहतर मौका मिले, इसके लिए नियम आसान किए गए हैं। इसके लिए हाइवे सक्रेटरी और एनएचएआई की एक संयुक्त बैठक होगी, जिसमें टेंडर को लेकर टेक्निकल और फाइनेशल नॉर्म्स आसान किए जाने पर चर्चा होगी। उन्होंने साफ-साफ कहा कि नियम इस तरह बनाए जाएंगे कि भारतीय कंपनियों को टेंडर हासिल करने के लिए विदेशी कंपनियों का सहारा नहीं लेना पड़े।

 

18-06-2020
चीन को झटका: रेलवे ने किया चीनी कंपनी को दिया कॉन्ट्रेक्ट रद्द

नई दिल्ली। रेलवे की कंपनी डीएफसीसीआईएल ने चाइना की कंपनी बीजिंग नेशनल रेलवे रिसर्च एंड डिजाइन ऑफ सिग्नल एंड कम्युनिकेशन ग्रुप को दिए कॉन्ट्रेक्ट को रद्द कर दिया है। इस कंपनी के साथ कानपुर-दीन दयाल उपाध्याय रेलवे सेक्शन के 417 किलोमीटर के सिग्नलिंग और टेलीकॉम का 471 करोड़ रुपए का कॉन्ट्रेक्ट था। ये चीन की कंपनी को यह कॉन्ट्रेक्ट वर्ष 2016 में दिया गया था लेकिन 4 साल बीत जाने के बाद भी सिर्फ 20 प्रतिशत ही काम हो पाया था। ऐसे में रेलवे ने चीन की कंपनी का कॉन्ट्रेक्ट रद्द कर दिया है।चीन की कंपनी इस कॉन्ट्रेक्ट के मिलने के बावजूद काम में लापरवाही दिखा रही थी, कॉन्ट्रेक्ट एग्रीमेंट के तहत जरूरी तकनीकी दस्तावेंजों को लेकर लापरवाह हो गई ती। इसके अलावा काम की जगह पर कई बार चीनी कंपनी के इंजीनियर अनुपस्थित पाए गए थे। चीन की कंपनी ने स्थानीय एजेंसियों के साथ करार नहीं किया था,जिस वजह से काम आगे नहीं बढ़ पा रहा था। इतना ही नहीं, चीन की कंपनी काम के लिए जरूरी सामान की खरीद भी नहीं कर पायी थी। चीनी कंपनी के अधिकारियों के साथ हर मुलाकात में इस बात को उठाया जा रहा था लेकिन इसके बावजूद काम आगे नहीं बढ़ पा रहा था। 4 साल बीतने के बाद भी सिर्फ 20 प्रतिशत ही काम हो पाया था। 

 

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