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18-06-2020
टिड्डी दल से बचाव के लिए किया गया कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव

कोरिया। विधायक गुलाब कमरो ने आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित सह धान खरीदी केंद्र जनकपुर का निरीक्षण कर खाद बीज वितरण व रख रखाव की ली जानकारी। इसी दौरान  विधायक गुलाब कमरो किसानों से मिलकर वितरण होने वाले बीज खाद की जानकारी लेकर प्रबंधक को आवश्यक निर्देश दिए। विधायक ने कहा कि किसानों को आसानी से खाद बीज की उपलब्धता हो साथ ही सोशल डिस्टनसिंग का भी पालन हो। सीकरी में विधायक गुलाब कमरो ने टिड्डी दल प्रभावित क्षेत्र का भी दौरा किया। भरतपुर विकासखण्ड के ग्राम पंचायत चाटी के डोंगरीटोला में कृषि विभाग की टीम ने टिड्डीयों के दल पर कीटनाशक दवा का छिड़काव किया।

 

 

17-06-2020
टिड्डी दल का जिले में प्रवेश, डीजे बजाकर,फटाका फोड़कर भगाया जा रहा

राजनांदगांव। मध्यप्रदेश के बालाघाट की ओर से टिड्डी दल का छुईखदान ब्लॉक में प्रवेश हुआ है। तेज आवाज में डीजे बजाकर, फटाका फोड़कर व दवा का छिड़काव कर इन्हें भागने का प्रयास वन विभाग, कृषि विभाग व ग्रामीण कर रहे हैं। वन विभाग सल्हेवारा द्वारा कीटनाशक दवा का छिड़काव भाजी डोंगरी नर्सरी में किया जा रहा है,जिसके चलते टिड्डी दल गंडई, कबीरधाम की ओर चले गए हैं।

31-05-2020
छत्तीसगढ़ के धोरधरा में पहुंचा टिड्डी दल, ग्रामीणों को सता रही फसल की चिंता

रायपुर/कोरिया। मध्यप्रदेश की सीमा के दक्षिण से निकली टिड्डियां कोरिया में घुस चुकी है। जानकारी के अनुसार वनांचल क्षेत्र भरतपुर के ग्राम पंचायत चरखर के ग्राम धोरधरा के ज्वारीटोला में टिड्डी पहुंच गई है। इधर कृषि विभाग ने ग्रामीणों को अलर्ट किया है लेकिन टिड्डियां कहीं उनकी फसल चौपट न कर दे इसकी चिंता ग्रामीणों को सता रही है। टिड्डे से फसलों के बचाव के लिए उचित सलाह, मार्गदर्शन और नियंत्रण के लिए कृषि विभाग के उप संचालक के कार्यालय में कंट्रोल रूम बनाया गया है। उपसंचालक ने बताया कि कंट्रोल रूम का दूरभाष क्रमांक 07836-232214 है और यह 24 घंटे संचालित होगा। इसके लिए अधिकारी-कर्मचारियों की ड्यूटी लगा दी गई है।

28-05-2020
भूपेश बघेल ने टिड्डी दल के पहुंचने से पहले ही भगाने की पूरी तैयारी करने कहा, कई जिलों में दस्तक की संभावनाए अधिक

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने टिड्डी दल के संभावित प्रकोप से फसलों के बचाव के लिए समय पूर्व सभी आवश्यक तैयारी करने के निर्देश कृषि, उद्यानिकी, वन विभाग सहित राज्य के जिला कलेक्टरों को दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि टिड्डी दल के छत्तीसगढ़ के जिलों में पहुंचने के पूर्व ही उसे भगाने के लिए सभी आवश्यक उपाय तय किए जाने चाहिए। मुख्यमंत्री ने सीमावर्ती जिलों में टिड्डी दल के आगमन और उनके उड़ान भरने की दिशा पर निरंतर मॉनिटरिंग के भी निर्देश दिए हैं।मुख्यमंत्री बघेल ने टिड्डी दल से बचाव के लिए नियंत्रण कक्ष स्थापित करने और पर्याप्त मात्रा में कीटनाशक दवाईयों की व्यवस्था करने को कहा है। मुख्यमंत्री ने किसानों से कहा है कि फसल या पेड़ों पर टिड्डी या टिड्डी दल दिखे तो कृषि या राजस्व विभाग के अमले या जिला नियंत्रण कक्ष या किसान हेल्पलाइन टोल फ्री नम्बर-18002331850 पर तत्काल सूचना दें, ताकि टिड्डी के प्रकोप की रोकथाम के लिए आवश्यक उपाय तत्परता से किए जा सके।मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग के अधिकारियों को किसानों को टिड्डी दल को भगाने के लिए प्राकृतिक और परंपरागत उपाय अपनाने की समझाइश देने को कहा है। उन्होंने कहा है कि टिड्डी दल को खेत के आस-पास आकाश में उड़ते दिखाई देने पर उनको उतरने से रोकने के लिए तुरंत खेत के आसपास मौजूद घास-फूस को जलाकर धुंआ करना चाहिए। साथ ही ध्वनि विस्तारक यंत्रों के माध्यम से शोरगुल करने से टिड्डी दल खेत में न बैठकर आगे निकल जाता है। केन्द्रीय एकीकृत नाशी जीव प्रबंधन केन्द्र रायपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार टिड्डी दल हवा की बहाव की दिशा में आगे बढ़ता है।

रायसेन से खंडवा होते हुए मोरसी अमरावती महाराष्ट्र से 27 मई को ग्राम टेंमनी तालुका तुमसर जिला भंडारा के आस पास पहुंच चुका है। 28 मई को टिड्डी दल तुमसर महाराष्ट्र से खैरलांजी बालाघाट की ओर बढ़ रहा है। इस टिड्डी दल का छत्तीसगढ़ की सीमावर्ती जिले राजनांदगांव, कबीरधाम की ओर बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा टिड्डी का दूसरा दल सिंगरौली मिजार्पुर की ओर बढ़ गया है। दोनों टिड्डी दलों का छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती जिलों में आने की आशंका है। छत्तीसगढ़ राज्य के मुंगेली, बिलासपुर, गौरेला पेड्रा मरवाही, कोरिया, सूरजपुर और बलरामपुर जिले की सीमाएं मध्यप्रदेश से लगी होने के कारण संवेदनशील है।मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रधान मुख्य वन रक्षक ने छत्तीसगढ़ के वनमण्डाधिकारियों एवं मुख्य वन संरक्षकों को टिड्डी दल की सत्त निगरानी करने तथा आक्रमण होने पर तुरंत सूचना देने के साथ ही नियंत्रण की समुचित कार्यवाही तत्काल करने को कहा है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने टिड्डी दल के नियंत्रण के लिए उपयोगी विभिन्न दवाईयों के संबंध में वन विभाग के समस्त क्षेत्रीय अमले को अवगत कराने को कहा है।

बताया गया कि वन विभाग के क्षेत्रीय अमले द्वारा टिड्डी दल की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन से समन्वय स्थापित कर सत्त निगरानी की जा रही है।संचालक कृषि की ओर से टिड्डी दल की निगरानी एवं नियंत्रण के लिए राज्य, संभाग एवं जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष एवं नोडल अधिकारी की नियुक्ति की गई है। छत्तीसगढ़ में जायद की फसलें, सब्जियां एवं फल आदि लगी हुई है। जिन्हें टिड्डी दल से नुकसान की संभावना है। कृषि संचालक ने जिलों के सभी कृषि उप संचालकों को नोडल अधिकारी नियुक्त कर कीट नियंत्रण करने के निर्देश दिए है। राज्य में टिड्डी दल के प्रवेश की संभावना को ध्यान में रखते हुए राज्य के कृषकों को सूचित किया गया है कि टिड्डी दल ग्रीष्म कालीन फसलों को भारी मात्रा में नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके साथ ही फलों और सब्जियों की नर्सरियों के लिए भी हानिकारक है।

 

 

28-05-2020
जिले में टिड्डी दल के आक्रमण की संभावना को देखते हुए अलर्ट जारी

 राजनांदगांव। टिड्डी दल को नियंत्रित करने दवा छिड़काव करने की व्यवस्था करने के दिए निर्देशजिला प्रशासन ने दिया है। फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले टिड्डी दल का प्रकोप राजस्थान होते हुए मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र राज्य तक पहुंच गया है। छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र राज्य होने के कारण भविष्य में टिड्डी दल के आक्रमण की संभावना है। वर्तमान में टिड्डी दल दोपहर 2 बजे मध्यप्रदेश राज्य के बालाघाट जिले के ग्राम कटोरी तक पहुंच चुका है।
प्रभारी कलेक्टर तनुजा सलाम ने जिले के मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र के समीपवर्ती तहसील को अलर्ट जारी किया है। मध्यप्रदेश की सीमा से लगे विकासखंड खैरागढ़, डोंगरगढ़, छुईखदान को सतर्क रहने कहा गया है।

 

28-05-2020
टिड्डी दल के संभावित आक्रमण को लेकर कृषि विभाग ने दी समसामयिक सलाह....

धमतरी। जिले में टिड्डी दल के संभावित प्रकोप को दृष्टिगत करते हुए कृषि विभाग द्वारा बचाव की सलाह दी गई है। उप संचालक कृषि ने बताया कि रात्रि के समय में ये टिड्डी दल खेतों में रूककर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। जमीन में लगभग 500 से 1500 अण्डे प्रति मादा कीट देकर सुबह तक उड़कर दूसरी ओर चले जाते हैं, जहां लाखों की संख्या में पेड़-पौध एवं अन्य वनस्पति को खाकर आगे बढ़ जाते हैं। उन्होंने इसके नियंत्रण के लिए सलाह दी है कि कृषक अपने स्तर पर गांव में समूह बनाकर खेतों में रात्रिकालीन समय में निगरानी रखें। यदि टिड्डी दल का प्रकोप हो तो शाम सात से रात नौ बजे के मध्य यह दल विश्राम के लिए बैठते हैं, जिनकी पहचान करने के लिए सतत् निगरानी रखें। जैसे ही किसी गांव में टिड्डी दल के आक्रमण की जानकारी मिलती है तो इसकी जानकारी कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केन्द्र से को तत्काल दें। उन्होंने बताया कि टिड्डियों का हमला होने पर कृषक टोली बनाकर परंपरागत उपाय जैसे ढोल, डीजे बजाकर अथवा डिब्बे आदि के माध्यम से शोर मचाकर, ध्वनि विस्तारक यंत्रों का प्रयोग कर तेज आवाज के जरिए खेतों से भगाया जा सकता है। यदि शाम के समय टिड्डी दली का प्रकोप हो गया हो तो दल के विश्राम अवस्था में सुबह तीन से पांच बजे के बीच तुरंत क्लोरोपाइरीफाॅस 20 ई.सी. 200 एमएल या लेंब्डासायहेलोथ्रिन 5 ईसी 400 एमएल या डायफ्लूबेंजूसन 25 डब्ल्यूटी 240 ग्राम प्रति हेक्टेयर 500 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। साथ ही कीटनाशक पावडर फेनबिलरेट 0.4 प्रतिशत 20-25 किग्रा या क्यूनाॅलफास 0.5 प्रतिशत 25 कि.ग्रा. प्रति हेक्टेयर का भी भुरकाव किया जा सकता है।

 

27-05-2020
तीन जिलों से छत्तीसगढ़ में प्रवेश कर सकता है टिड्डी दल, अलर्ट जारी होते ही रायपुर सहित सभी जिलों में तैयारियां तेज

रायपुर। टिड्डी दल राजस्थान होते हुए मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र राज्य तक पहुंच गया है। छत्तीसगढ़ में प्रवेश की संभावना को देखते हुए कृषि विभाग ने अलर्ट जारी किया है। कृषि विभाग के अधिकारियों को टिड्डी दल के प्रकोप की रोकथाम के लिए किसानों को आवश्यक मार्गदर्शन और दवाओं के छिड़काव के बारे में भी जानकारी देने के कहा गया है। संचालक कृषि टामन सिंह सोनवानी ने बताया कि 27 मई को सुबह सवा 4 बजे टिड्डी दल सिंगरौली की तरफ बढ़ा है, जो छत्तीसगढ़ राज्य के सीमावर्ती जिले कोरिया, सूरजपुर और बलरामपुर की ओर से छत्तीसगढ़ राज्य में प्रवेश कर सकता है। उन्होंने सभी जिला कलेक्टरों को टिड्डी दल के नियंत्रण के लिए आपदा प्रबंधन मद से आवश्यक व्यवस्था करने को कहा है। टिड्डी दल के संबंध में सूचनाओं के आदान-प्रदान और इनके नियंत्रण के लिए कृषकों को आवश्यक सलाह दिए जाने के लिए जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष भी स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।

रायपुर में जिला स्तरीय दल का गठन, नंबर जारी
रायपुर जिले के प्रभारी कलेक्टर एवं नगर निगम रायपुर के आयुक्त सौरभ कुमार के निर्देश पर जिले में टिड्डी दल के प्रकोप से बचाव के लिए जिला स्तरीय दल का गठन किया गया है। इसी तारतम्य में बुधवार को जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ.गौरव कुमार सिंह ने कृषि विभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर जिले में टिड्डी दल के प्रकोप से सुरक्षा के व्यापक व्यवस्था के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिले में भी  टिड्डियों के समूह आने की संभावना है। पेस्टीसाइड और स्प्रेयर की व्यवस्था के संबंध में जिले में समन्वय स्थापित करने कहा है। टिड्डी दल के प्रकोप से बचाव के लिए जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। जिला स्तर पर नोडल अनुविभागीय कृषि अधिकारी दीपक कुमार नायक को नियुक्त किया गया है। इसी तरह विकासखंड स्तर पर धरसींवा विकासखंड के लिए बीआर धृतलहरे,आरंग के लिए एमएल थावरे, अभनपुर के लिए एचसी साहू और तिल्दा के लिए जीएस यादव को नोडल अधिकारी बनाया गया है। टिड्डी दल के किसी भी प्रकार की जानकारी या सूचना नियंत्रण कक्ष के दूरभाष नंबर 0771-2439497 या टोल फ्री नंबर 1800-233-1850  पर दिया जा सकता है।

टिड्डी दल को नियंत्रित करने किसान कर सकते हैं ये प्रयास
उप संचालक कृषि आरएल खरे ने बताया कि टिड्डी दल नियंत्रण के लिए किसान दो प्रकार के साधन अपना सकते हैं। इसमें भौतिक साधन से किसान टोली बनाकर विभिन्न प्रकार के परंपरागत उपयोग शोर मचाकर,ध्वनि वाले यंत्रों को बजाकर,डराकर भगाया जा सकता है। इसके लिए ढोलक,ट्रैक्टर,मोटर साइकल का साइलेंसर, खाली टीन डिब्बे, थाली इत्यादि से ध्वनि की जा सकती है। टिड्डी दल के उपचार के लिए ट्रेक्टर स्प्रेयर धारक किसानों से ट्रेक्टर स्प्रेयर की व्यवस्था की जा रही है। इसके अतिरिक्त सभी छोटे स्प्रेयर वाले किसानों को फसलों के बचाव करने  के लिए सभी किसानों को तैयार रहने की जानकारी दी गई है।

कीट नाशक दवाओं के छिड़काव से रूकता है टिड्डों का प्रकोप
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि टिड्डा कीट लगभग दो से ढाई इंच लंबा होता है। टिड्डा कीट हमेशा समूह में रहते हैं। टिड्डी दल जब भी समूह में खेत के आसपास आकाश में उड़ते दिखाई दे, तो उनको उतरने से रोकने के लिए तुरंत खेत के आसपास मौजूद घास-फूस को जलाकर धुंआ करना चाहिए। इससे टिड्डी दल खेत में न बैठकर आगे निकल जाएगा। कृषि विभाग ने टिड्डी दल के प्रकोप की रोकथाम के लिए किसानों को रासायनिक उपचार के बारे में भी आवश्यक जानकारी दी है। टिड्डी दल शाम को 6 से 7 बजे के आसपास जमीन में बैठ जाता है और सुबह 8 से 9 बजे के करीब उड़ता है। रासायनिक यंत्रों के लिए इस अवधि में इनके ऊपर ट्रेक्टर चलित स्पेयर की मदद से कीट नाशक दवाईयों का छिड़काव करके इनकों मारा जा सकता है। दवाओं का छिड़काव का सबसे उपयुक्त समय रात्रि 11 बजे से सुबह 8 बजे तक होता है। टिड्डी के नियंत्रण के लिए डाईफ्लूबेनज्यूरान 25 प्रतिशत घुलनशील पावडर 120 ग्राम या लैम्बडा-साईहेलोथ्रिन 5 प्रतिशत ईसी 400 मिली या क्लोरोपायरीफॉस 20 ईसी 200 मिली प्रति हेक्टेयर कीटनाशक का छिड़काव किया जाना चाहिए। कृषि विभाग ने किसानों से टिड्डी दल के दिखाई देते ही तत्काल अपने इलाके के कृषि विभाग के अधिकारी, किसान मित्रों, सलाहकारों या कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ.चंद्रमणी साहू अथवा किसान हेल्प लाईन टोल फ्री नंबर 18002331850 पर संपर्क किया जा सकता है।

 

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