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23-05-2020
चीन पर अमेरिका करने जा रहा है एक और बड़ी कार्रवाई, 33 कंपनियों को किया ब्लैकलिस्ट

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कोरोना संक्रमण को लेकर चीन पर लगातार हमलावर बने हुए हैं। अमेरिका ने चीन की 33 कंपनियों और अन्य संस्थानों को इकोनॉमिक ब्लैकलिस्ट में डालने का फैसला किया है। कोरोना वायरस की महामारी के बाद दोनों देशों में तनाव और बढ़ गया है। अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि कोरोना वायरस चीन के लैब में पैदा किया गया है और उनके पास इसे लेकर सबूत भी हैं। कोरोना वायरस को लेकर जारी आरोप-प्रत्यारोप और बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने चीन को झटका दिया है। बता दें कि चीनी स्टॉक मार्केट से अरबों डॉलर के अमेरिकी पेंशन निधि निवेश को वापस लेने के ऐलान के बाद अब अमेरिका चीन की ऐसी 33 कंपनियों और संस्थाओं को ब्लैकलिस्ट करने जा रहा है, जो कथित रूप से चीनी सेना के साथ जुड़ी हैं। ट्रंप लगातार आरोप लगा रहे हैं कोरोना वायरस न सिर्फ वुहान की लैब में पैदा हुआ बल्कि चीन ने जानबूझ कर इसे दुनिया में फैलने दिया।

अमेरिकी वाणिज्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा है सात कंपनियों और दो संस्थानों को लिस्ट में डाला गया क्योंकि वे ऊइगर और अन्य लोगों के मानवाधिकारों के हनन के चीनी अभियान से जुड़ी थीं, जिनके तहत बड़ी तादाद में लोगों को बेवजह हिरासत में लिया जाता है। उनसे बंधुआ मज़दूरी करवाई जाती है और हाई-टेक तकनीक के सहारे उन पर नज़र रखी जाती है। इसके आलावा दो दर्जन अन्य कंपनियों, सरकारी संस्थाओं और व्यावसायिक संगठनों को भी चीनी सेना के लिए सामान की आपूर्ति करने के कारण लिस्ट में डाला गया है।

ब्लैकलिस्ट होने वाली ये कंपनियाँ आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (एआई) और फ़ेशियल रिकोग्निशन जैसी तकनीकों के क्षेत्र में काम करती हैं। बता दें कि अमेरिका की ही कई बड़ी कंपनियों जिनमें इंटेल कॉर्प और एनविडिया कॉर्प शामिल हैं ने इनमें भारी निवेश किया है। चीन की ब्लैकलिस्ट की गई कंपनियों में नेटपोसा का नाम शामिल है।  अमेरिका की ओर से बार-बार ये भी कहा गया है कि हो सकता है वुहान स्थित लैब से कोरोना वायरस फैला। इस मसले पर जांच की बात भी कही गई थी। हालांकि, चीन ऐसे आरोपों को खारिज करता आया है।

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