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16-09-2020
फूलोदेवी नेताम ने केन्द्रीय इस्पात मंत्री को लिखा पत्र, नगरनार स्टील प्लांट के संबंध में पुनर्विचार करने किया आग्रह

रायपुर। सांसद फूलोदेवी नेताम ने नगरनार इस्पात संयंत्र के संबंध में इस्पात मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को पत्र लिखा है। सांसद ने लिखा है कि, भारत सरकार इस्पात मंत्रालय के अधीन नवरत्न सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम एनएमडीसी लिमिटेड की ओर से लगभग 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की लागत पर बस्तर में नगरनार स्टील प्लांट लगाया जा रहा है। अभी यह प्रोजेक्ट पूरा भी नहीं हुआ है, लेकिन केन्द्र सरकार ने बस्तर के इस स्टील प्लांट का निजीकरण करने का निर्णय कर लिया है।

यह अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है कि, छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचल में सार्वजनिक क्षेत्र के प्रस्तावित स्टील प्लांट का निजीकरण किया जा रहा है। इससे लाखों आदिवासियों की उम्मीदों और आकांक्षाओं को गहरा आघात पहुंचा है। आदिवासी समुदाय आंदोलित हो रहे हैं। सांसद ने सरकार से आग्रह किया है कि, केन्द्र सरकार नगरनार स्टील प्लांट के निजीकरण के निर्णय पर पुन: विचार करें और इसे सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम के रूप में ही बनाए रखा जाए।

13-05-2020
 भूपेश बघेल ने केन्द्रीय इस्पात मंत्री को लिखा पत्र, आयरन ओर के मूल्य में अप्रत्याशित वृद्धि को वापस लेने किया आग्रह

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केन्द्रीय इस्पात मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को पत्र लिखकर जनवरी 2020 में लौह अयस्क में की गई मूल्यवृद्धियों को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की है। भूपेश बघेल ने आग्रह किया कि राज्य के लौह खनिज आधारित लघु उद्योगों और स्पंज आयरन उद्योगों को दीर्घकालिक रियायती दर पर लौह अयस्क उपलब्ध कराया जाए। भूपेश बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य के दंतेवाड़ा में लौह अयस्क की खदानें एनएमडीसी की ओर से संचालित हैं। इन खदानों में से चार खदानों का 20 वर्ष के लिए अवधि का विस्तार राज्य शासन की ओर से इस शर्त के आधार पर किया गया था कि यहां से राज्य के लौह और आयरन इस्पॉत उद्योग को उनकी आवश्यकता के अनुरूप लौह अयस्क की निरंतर आपूर्ति की जाएगी।

एनएमडीसी की ओर से खनिज आयरन ओर लम्प (डीआरसीएलओ) के मूल्य में अप्रत्याशित वृद्धि किए जाने के कारण प्रदेश के स्पंज आयरन और स्टील उद्योगों के संचालन में दिक्कत आ रही है जिसकी वजह से इस्पॉत का उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। मुख्यमंत्री ने इस्पात मंत्री को इस संबंध में पूर्व में प्रेषित अपने पत्र का भी उल्लेख करते हुए कहा है कि एनएमडीसी द्वारा लौह अयस्क की मूल्य वृद्धि को तत्काल वापस लिए जाने के साथ ही राज्य के लौह उद्योगों को दीर्घकालिक रियायती दर पर लौह अयस्क की आपूर्ति के लिए विशेष पहल किए जाने का आग्रह किया था। इस संबंध में आपके द्वारा की गई कार्रवाई अपेक्षित है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि स्पंज आयरन एसोशिएसन के माध्यम से यह जानकारी मिली है कि एनएमडीसी द्वारा खनिज आयरन ओर लम्प (डीआरसीएलओ) के मूल्य में 470 रुपए प्रतिटन की वृद्धि की गई है। इस प्रकार खनिज आयरन ओर लम्प के बेसिक मूल्य में कुल 700 रुपए की वृद्धि की गई है।

इस पर रॉयल्टी और अन्य कर को मिलाकर आयरन ओर की कीमत बढ़कर 875 रूपए प्रतिटन हो गई है। फलस्वरूप आयरन ओर के मूल्य में अप्रत्याशित वृद्धि के कारण उत्पादित इस्पॉत का मूल्य बढ़कर 2000 रूपए प्रतिटन हो गया है। जिसके कारण प्रदेश के स्पंज आयरन एवं स्टील उद्योगों के संचालन में दिक्कत आने के साथ ही इस्पात का उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। मुख्यमंत्री ने वैश्विक महामारी कोविड-19 के संक्रमण के कारण लॉक डाउन से प्रभावित छत्तीसगढ़ के उद्योगों का हवाला देते हुए कहा है कि लौह अयस्क आधारित उद्योगों को रियायती दर पर लौह अयस्क की आपूर्ति नहीं होने के कारण इनके बंद होने की नौबत आ गई है, जिसके कारण बेरोजगारी और पलायन की स्थिति भी बनी है। उन्होंने केन्द्रीय इस्पात मंत्री से उक्त परिस्थतियों को ध्यान में रखते हुए राज्य के लौह अयस्क आधारित उद्योगों और स्पंज आधारित उद्योगों को दीर्घकालिक रियायती दर का निर्धारण कर उनकी आवश्यकता के अनुरूप लौह अयस्क की आपूर्ति करने के लिए विशेष पहल के साथ कार्रवाई किए जाने का आग्रह किया है।

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