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27-08-2020
बृजमोहन ने विधानसभा में उठाया गायों की मौत का मामला, कहा-गौठान को मजाक बना दिया है

रायपुर। प्रदेश के गौठानों में गायों की मौत का मामला विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से गुरुवार को भाजपा विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने 19 जून को कलेक्टरों को रोका छेका के लिए क्या पत्र लिखा है व निर्देश दिया है,जो गायों के मौत का, मैं कहूंगा हत्या का कारण बन रहा है। उन्होंने कहा कि रोका छेका के आदेश के कारण सरपंच गायों को अंधेरे कमरे में बंद कर रहे हैं। गंदगी में बंद कर रहे हैं। आप इससे पाप के भागीदार बनेंगे। बृजमोहन ने कृषि मंत्री को कहा कि आपके इस आदेश के कारण गायों की मौत हो रही है। उन्होंने गायों के मालिकों को मुआवजा देने की मांग भी की। बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि जब रोका छेका पुरानी व्यवस्था है तो आप श्रेय क्यों ले रहे है। जो व्यवस्था पुरानी थी उस पर सर्कुलर जारी कर गायो के मौत का साधन बना दिया है। छत्तीसगढ़ में रोका छेका, गौठान के कारण 1000 से ज्यादा गायों की मौत हुई है। रोका छेका, गौठान को मजाक बना दिया है। वहाँ चारा नहीं है जब तक चारे की व्यवस्था नही करेंगे कहाँ से गौठान में गाये पलेगी। उन्होंने कहा कि आपके रोका-छेका में रोकने वाली गायों, गौठानों की गायों के चारे के लिए गौ सेवा आयोग की 25 रूपये की व्यवस्था है, उसको आप क्यों नहीं दे देते। उसको 50 रूपये करने का निर्णय हुआ था, उसको आप लागू क्यों नहीं कर दे देते? अगर हम सच्चे गौमाता के भक्त, सेवक हैं तो हमको उसके बारे में पर्याप्त व्यवस्था करनी चाहिए। हमारे आधे से ज्यादा गौठान डिफंग पड़े हुए हैं। रोका छेका योजना गावों की स्वतंत्र व्यवस्था थी। निर्देश के कारण गायों को गंदे कमरे में, छोटे-छोटे कमरों में जबरदस्ती बंद किया जा रहा है और उसके कारण गायों की मौत होगी तो हम उसको गौहत्या नहीं कहेंगे तो और क्या कहेंगे? हम चाहेंगे कि सरकार की तरफ से यह आना चाहिए था कि रोका-छेका के तहत गायों को रोकने के लिए उन गायों की हम क्या व्यवस्था करेंगे? गौठानों की गायों के चारे की हम क्या व्यवस्था करेंगे? मैं यह मानता हूँ कि आपकी बुरी नीयत नहीं है। परन्तु आपके निर्देशो को पालन करने के लिए अधिकारी जिस तत्परता से काम करते हैं, उसमें वह सावधानी नहीं रखते, उन असावधानियों के कारण इन गायों की मौत हो रही है, इसको आपको रोकना चाहिए।

गांवों में सुविधा विहीन गौठानों की व्यवस्था

बृजमोहन अग्रवाल ने ध्यानाकर्षण में कहा कि ‘रोका-छेका’ फ्लेगशीप प्रोग्राम के चलते प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों के सख्त निर्देश एवं धमकी के कारण गांव-गांव में मवेशियों को खुले में चरने पर रोक लगा दी गई है। सभी सरपंचों ने रोका-छेका के तहत ऐसे मवेशियों को किसी भवन/जगह में अवरूद्ध करने के निर्देश दिये गये, जिसके भयावह परिणाम हुए है। इसी के चलते 25 जुलाई 2020 को बिलासपुर जिले के तखतपुर के ‘मेड़पार’ गांव में 50 से अधिक गायों की हत्या एक ही रात में हो गई। सरपंच ने इन गायों को रोका-छेका के तहत पुराने एवं जर्जर भवन में ठूंस कर रख दिया था। गायों को ऐसा भरा गया था कि वहां एक आदमी के खड़े होने लायक जगह नहीं थी। भवन के दरवाजे एवं खिड़कियों को बंद कर दिया गया था। गायों के लिए ‘चारा’ की व्यवस्था तो दूर पानी पीने की व्यवस्था नहीं थी। गायों को किसी कसाई खाने से भी बदतर हालत में रखा गया था। अचरज की बात तो ये है कि ऐसा कृत्य प्रदेश के लगभग सभी ग्रामों में हो रहा है। प्रदेश के 20 हजार से अधिक गांवो में से मात्र 2500 गांवो में ही आधे-अधूरे, सुविधा विहीन गोठानों की व्यवस्था की गई है। ऐसे ही बिलासपुर नगर निगम के मोपका स्थित गौठान में जुलाई माह में 200 मवेशियों को कीचड़ सने गौठान में रखा गया, जहां चारा एवं पानी की व्यवस्था भी नहीं है, जिसके चलते वहां पर 7 से अधिक गायों की मौत हुई। यही हाल रायगढ़ शहर के भीतर स्थित 2 गौठानों का है, यहाँ पशुओं को रखने की कोई व्यवस्था नहीं है, बिना चारा एवं पानी के उन्हें भूखा मारा जा रहा है। बलौदाबाजार जिले में भी अव्यवस्थाओं चलते गौठान में गायों की मौत हो गई। जिला कलेक्टर्स ने मुख्यमंत्री के निर्देश को पालन करने के निर्देश गांव-गांव में दिये है। इन बातों को ध्यान में ही नही रखा कि कितने गांवो में गायों एवं अन्य मवेशियों को रखे जाने की व्यवस्था है ? सरकार ने रोका-छेका गोठान की जिम्मेदारी पंचायतों को सौंपकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली है। पंचायतों के लिए न तो इन कामों के लिए समुचित व्यव्स्था की गई और न ही राशि उपलब्ध कराई गई है। इससे प्रदेश के सभी 20 हजार से अधिक गांवों मे गौ-पालको के मन में राज्य सरकार के खिलाफ भारी रोष एवं आक्रोश व्याप्त है।

मंत्रीजी व्यवस्था सुधारने की जरूरत है

बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि मंत्रीजी आप व्यवस्था सुधारिए। आपके निर्देशों के कारण कितने सरपंच मरेंगे, छोटे-छोटे अधिकारी मरेंगे। आपके निर्देशों का पालन करने के कारण इसलिए आपको व्यवस्था सुधारने की जरूरत है, आप इस व्यवस्था को सुधारें और जहां तक हमारे सरकार के समय की बात है तो वह निजी लोगों के गौशालाओं में मृत्यु हुई थी, आज आपके तो सरकारी निर्देश के कारण मृत्यु हो रही है इसलिए मैं इसको गौहत्या कह रहा हूँ। अग्रवाल ने कहा कि वहां 50 से ज्यादा जानवरों की मृत्यु हुई है, गायों की मृत्यु हुई है और उन किसानों की रोजी-रोटी वही थी, और वह सरकार के निर्देशों के कारण हुई है तो आप किसी योजना में नहीं तो कम से कम मुख्यमंत्री सहायता कोष से उन किसानो को राशि दे दें। मंत्री सहायता कोष में दे दें। गौसेवा आयोग में पैंसा है, उसमें से पैसा दे दें।

पशुओं के नियंत्रण के लिए रोका छेका प्रथा प्रचलित : चौबे

ध्यानाकर्षण के जवाब में पशुपालन मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य में फसल बुवाई कार्य के पूर्व कर रहे पशुओं के नियंत्रण के लिए रोका छेका प्रथा प्रचलित है,जिससे फसल बुवाई को बढ़ावा देने तथा पशुओं के चरने से फसल को होने वाले हानि से बचाने के लिए पशुपालक तथा ग्रामवासियों द्वारा पशुओं के बांधकर रखने अथवा पहटिया की व्यवस्था इत्यादि कार्य किया जाता है। उक्त प्रयास से न ही कृषक शीघ्र बोवाई कार्य पूर्ण कर पाते है, अपितु द्वितीय फसल लेने के लिये भी प्रेरित होते हैं। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा समस्त जिला कलेक्टर को यहा निर्देश दिये गये थे कि 19 जून 2020 को रोका छेका कार्यक्रम आयोजित कर ग्राम स्तर पर बैठक आयोजित कर ग्राम सरपंच, पंच जनप्रतिनिधि तथा ग्रामीण रोका-छेका प्रथा अनुसार पशुओं को बांध कर रखने, पशुओं के नियंत्रण से फसल बचाव की शपथ दिलाई जावे। गौठानों में पशुओं के प्रबंधन, रख रखाव की उचित व्यवस्था के लिए गौठान प्रबंधन समिति की बैठक आयोजित की जावे। पहटिया/चरवाहे की व्यवस्था से पशुओं का गौठानों में व्यवस्थापन सुनिश्चित करावें। खुले में विचरण कर रहे पशुओं का नियंत्रण व गौठानों में संधारण करावे। गौठानों में पशु चिकित्सा एवं स्वास्थ्य शिविर का आयोजन करावे। वर्षा के मौसम में गौठनों में पशुओं के सुरक्षा के लिए व्यापक प्रबंधन किया जावे।

दम घुटने से पशुओं की मृत्यु हुई

मंत्री ने कहा कि बिलासपुर जिला विकासखण्ड तखतपुर के ग्राम मेड़पार गांव में कुल 45 मवेशियों की मृत्यु हुई है। उक्त ग्राम में ग्रामीणों द्वारा मेड़पार बाजार केे आवारा पशुओं को पुराने पंचायत भवन में दिनांक 24 जुलाई 2020 को रख जाकर 25 जुलाई 2020 को जंगल में छोड़ जाने के उद्देश्य से रखा गया था, ताकि खड़ी फसलों को नुकसान से बचाया जा सके। पशुओं को रखे गये कमरे का आकार छोटा होने एवं पशुओं की संख्या अधिक होने से पशुओं के सींग आदि से कमरो का खिड़की दरवाजा बंद होने तथा पशुओं के गोबर व मूत्र विसर्जन करने से उत्पन्न होने वाले गैस के कारण दम घुटने से पशुओं की मृत्यु हुई। उक्त घटना के लिए अज्ञात व्यक्तियों के नाम पर थाना हिर्री, जिला बिलासपुर में प्राथमिक सूचना रिपोर्ट 0110 दिनांक 25.07.2020 दर्ज हुई है, जिसकी विवेचना जारी है।

आवश्यक मूलभूत सुविधाएं के साथ प्रदेश में बनाए गए 3149 गौठान

प्रदेश में कुल 5826 गौठान स्वीकृत हुए है,जिसमें से 3149 गौठान निर्मित हो चुके हैं, जिसमें आवश्यक मूलभूत सुविधाएं प्रदाय की गई। इन गौठानों में औसतन 4.35 लाख पशु प्रतिदिन आते हैं। जिनको मूलभूत एवं पशु चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती है। गौठानों में पैरादान से प्राप्त धान पैरा अथवा गौठान के पास विकसित चारागाह से उत्पादित हरे चारे को काटकर पशुओं को खिलाया जाता है। साथ ही गौठानों में प्राकृतिक रूप से उगे घास/झाड़ियों को गौठानों में आने वाले पशुओं को चराया जाता है। बिलासपुर नगर निगम के मोपका स्थिति गौठान में जुलाई से केवल 02 कमजोर एवं वृद्ध गायों की मृत्यु हुई है। उक्त गौठान में पशु शेड में पानी व चारे के कोटने निर्मित हैं। पशुओं के विचरण हेतु सुरक्षित खुले क्षेत्र में वर्षा से बहकर मिट्टी आने से कीचड़ हुआ है, जिसका उपयोग प्रतिबंधित है। रायगढ़ में सड़को पर विचरण करने वाले पशुओं को ट्रांसपोर्ट नगर के पास निर्मित कांजी हाउस को अस्थायी तौर पर गौठान के रूप में संचालित किया जा रहा है, जिसमें पशुओं को रखा गया है, जहां पर पशुओं के लिए चारा पानी आदि समुचित व्यवस्था की गई है। गौठान निर्माण के लिये निगम क्षेत्र में 4-5 कि.मी. दूर स्थित ग्राम सम्बलपुर में जमीन का चिन्हांकन किया गया है। बलौदाबाजार जिले के गौठानों में गायों की मौत की कोई सूचना नहीं है। शासन द्वारा रोका-छेका कार्यक्रम के तहत् ग्रामवासियों को किसी भी प्रकार का दबाव नहीं डाला गया है। शासन द्वारा गौठान संचालन की जिम्मेदारी गौठान प्रबंधन समिति को दी गयी है। इस के लिए गौठान प्रबंधन समिति को अनुदान के रूप में प्रतिमाह राशि 10 हजार दिये जाने का प्रावधान किया गया है। अतः प्रदेश के गौपालकों के मन में राज्य सरकार के प्रति रोष एवं आक्रोष व्याप्त नहीं है।

 

27-07-2020
कौशिक ने तखतपुर के मेड़पार में ग्रामीणों से की मुलाकात,कहा जिम्मेदार लोगों पर नहीं हो रही कार्यवाही

रायपुर। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने तखतपुर के मेड़पार गांव जाकर गायों की मौत को लेकर स्थानीय लोगों से भेंट कर उचित कार्यवाही का भरोसा दिलाया है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले में निर्दोष लोगों पर कार्यवाही करके प्रदेश सरकार दोषियों को बचाना चाहती है। घटना के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होने से सब में असंतोष है। पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। इस मामले में कार्यवाही को लेकर जो औपचारिकता की जा रही है,जिसकी हम निंदा करते हैं। उन्होंने कहा कि पूरे मसले में कुछ लोगों को जांच के नाम पर परेशान नहीं किया जाना चाहिए। प्रदेश सरकार को पूरे मामले की सूक्ष्मता से एक स्वतंत्र कमेटी गठित करके जांच करानी चाहिये ताकी वस्तुस्थिति स्पष्ट हो पाये। इस मौके पर सांसद अरुण साव, विधायक व पूर्व मंत्री डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी, विधायक रजनीश सिंह,भाजपा जिला अध्यक्ष रामदेव कुमावत,प्रदेश प्रवक्ता भूपेंद्र सवन्नी,राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष हर्षिता पांडेय, जिला उपाध्यक्ष घनश्याम कौशिक, कृष्ण कुमार कौशिक सहित स्थानीय नागरिक,पार्टी कार्यकर्ता व पदाधिकारी मौजूद थे।

 

27-07-2020
गायों की मौत के लिए सरपंच-सचिव पर जिम्मा थोपकर सरकार का अपनी जवाबदेही से मुँह मोड़ना शर्मनाक : भाजपा

रायपुर। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता सच्चिदानंद उपासने ने तखतपुर ब्लॉक के ग्राम मेड़पार बाजार में हुई गोधन की मौत की दुखद घटना के परिप्रेक्ष्य में प्रदेश सरकार की ओर से सरपंच और पंचायत सचिव पर जिम्मा थोपे जाने और अपनी जवाबदेही से मुँह मोड़ने पर के कृत्य को शर्मनाक बताया है। कर इस पूरे मामले की ईमानदारी से जाँच कराने की जरूरत पर बल दिया है। उपासने ने कहा कि राज्य सरकार इस तरह अपनी नाकामी का ठीकरा दूसरों के सिर फोड़कर अपनी जवाबदेही से पल्ला नहीं झाड़ सकती। राज्य सरकार गायों की मौत पर मुआवजा की घोषणा कर गो-पालकों को फौरी राहत दें। उपासने ने कहा कि मेड़पार बाजार की दुखद घटना ने न केवल प्रदेश की ग्राम्य-संस्कृति और परंपराओं का कांग्रेसीकरण कर उसे बदनाम करने की घिनौनी मानसिकता को बेनकाब किया है, अपितु मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सत्तालोलुपता से उपजी सियासी लफ्फाजियों के चलते प्रदेश की जनभावनाओं से हो रहे खिलवाड़ पर से पर्दा हटाया है। उपासने ने कहा कि गौठानों के नाम पर मुख्यमंत्री बघेल ने जितनी ऊर्जा शोर मचाने में खर्च की है, उसकी आधी ऊर्जा भी यदि वे इन गौठानों की अच्छी व्यवस्था बनाने में खर्च करते तो पशुधन की लगातार हो रहीं मौतें प्रदेश को चिंतित और विचलित नहीं करतीं। सरकार से ब्लू प्रिंट की जानकारी मांगने पर विपक्ष को ब्लैक प्रिंट की धमकी देकर आवाज दबाने की नाकाम कोशिश की जाती है। उपासने ने चेतावनी दी कि विपक्ष को ब्लैक प्रिंट की धमकी देने के बजाय मेड़पार बाजार में लगभग 70 से अधिक गायों की मौत की सूचना पर कारगर कार्रवाई करे और अपनी जवाबदेही स्वीकार कर सरपंच-सचिव पर अपने नाकारेपन का ठीकरा फोड़ने से बाज आए।

 

26-07-2020
बृजमोहन ने कहा, गायों की मौत नहीं यह गौ हत्या है, गौठान रोका छेका से लेकर गोधन योजना को बताया सुपर फ्लॉप

रायपुर। विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने बिलासपुर जिले के तखतपुर ब्लाक में मेडापार गांव में गायों की दम घुटने से हुई दर्दनाक मौत को सीधा सीधा गौ हत्या करार दिया है। बृजमोहन ने कहा कि सरकार के रोका छेका के निर्देश के बाद बिना किसी तैयारी के इनके धरातल पर लाने प्रशासनिक आतंक के चलते रोका छेका के नाम पर गांव गांव में यही हाल है। ये तो एक गांव है हाल सामने आया है,पूरे प्रदेश के गांवों का यही हाल है। जिस गांव में गौठान नहीं है, जहां कांजी हाउस नहीं है, वहां रोका छेका का निर्देश किसका था।  चारे की कहीं व्यवस्था नहीं है पानी की कहीं व्यवस्था नहीं है बरसात में गायों को रखने की व्यवस्था नहीं है वहां पर सैकड़ों गायों को कमरे में ठूंसकर रखा गया। भोजन, पानी, हवा न होने के कारण, गायों की मौत दम घुटने से तड़प तड़प कर हुई है। यह मौत नहीं सीधा सीधा गौ हत्या है।

सरकार स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर एफआरआई कराकर गौ हत्या के इस पाप से बच नहीं सकती।अग्रवाल ने कहा कि सरकार की सभी योजनाएं एक एक कर सुपर फ्लॉप रही है। गोधन न्याय योजना गोधन अन्याय योजना में परिवर्तित हो गई है। सरकार ने रोका छेका के तहत रखने वाले गायों के चारे की व्यवस्था ही नहीं की,गांव में गायों को रोका छेका कर रखने की उचित जगह ही नहीं है, गांव गांव में जो आदर्श गौठान बनाये गए हैं,उसमें ज्यादातर तो कागजों में बने हैं।अग्रवाल ने मांग की है कि सरकार को गौठान से लेकर रोका छेका व गोधन न्याय योजना की एक बार हर स्तर पर समीक्षा होनी चाहिए। जब तक गायों की रखने की व्यवस्था, चारे की समुचित व्यवस्था,पानी की समुचित व्यवस्था न हो इस योजना को तब तक के लिए स्थगित कर देना चाहिए।

 

25-07-2020
गोधन की मौतों का यह सिलसिला प्रदेश सरकार को काफी महंगा पड़ेगा:विष्णुदेव साय

रायपुर। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने बिलासपुर के तखतपुर में बड़ी संख्या में गायों की मौत को प्रदेश सरकार की कलंकपूर्ण कार्यप्रणाली बताया है। साय ने कहा कि मवेशियों की मौत के इस ताजे मामले से यह स्पष्ट हो चला है कि नरवा-गरुवा-घुरवा-बारी का नारा देने और गो-धन न्याय योजना का ढोल पीटने वाली प्रदेश की कांग्रेस सरकार गौठानों की कोई पुख्ता इंतजाम तक नहीं कर पा रही है। जिन पर गौठानों के संचालन का जिम्मा थोप दिया गया है, वे भी कुछ कर पाने में खुद को असहाय पा रहे हैं। मूक पशुधन अकाल मौत के मुंह में समा रहे हैं। गोधन की मौतों का यह सिलसिला प्रदेश सरकार के लिए काफी महंगा पड़ेगा।
साय ने कहा कि प्रदेश सरकार काम करने के बजाय दिखावे में ज्यादा यकीन कर रही है। गौठान बने नहीं हैं,जो बने हैं उनमें चारा-पानी तक का कोई इंतजाम नहीं है, गौठानों की बदइंतजामी-बदहाली के कई जमीनी सच से यह प्रदेश रूबरू हो चुका है और मेड़पार बाजार की यह घटना प्रदेश सरकार के नाकारेपन की इंतिहा दर्शाने वाली है। यही कारण है कि उसकी रोका-छेका योजना भी दीगर योजनाओं की तरह सुपर फ्लॉप शो साबित हो रही है। साय ने कहा कि अपनी वाहवाही कराने में मशगूल इस प्रदेश सरकार ने रोका-छेका योजना का नारा तो दे दिया पर उसके लिए आवश्यक संसाधनों को जुटाने पर उसका ध्यान ही नहीं है। आधी-अधूरी तैयारियों के साथ प्रदेश सरकार झूठे आँकड़ों के सहारे नवा छत्तीसगढ़ गढ़ने का सिर्फ जुबानी जमाखर्च कर रही है। नरवा-गरुवा-घुरवा-बारी योजना के बुरे हश्र के बाद प्रदेश सरकार को मान लेना चाहिए कि उसमें प्रशासनिक सूझबूझ और नेतृत्व की क्षमता नहीं है और इसके कारण सरकार की नीयत और नीति सवालों में घिर गई है।

 

25-07-2020
50 गायों की दमघुटने से मौत, घटना के बाद आला-अधिकारी मौके पर पहुंचे

रायपुर/बिलासपुर। तखतपुर ग्राम पंचायत में 50 गायों की मौत से हड़कंप मच गया है। बता दें कि घटना मेड़पार बाजार गांव की है। जानकारी के मुताबिक पुराने पंचायत भवन में करीब 100 गायों को एक साथ रखा गया था। भवन में एक साथ इतनी गायों को रखने के कारण दमघुटने से 50 गायों की मौत की आशंका व्यक्त की जा रही है। इतना ही नहीं सूत्रों की माने तो गायों के लिए खाने-पीने के साथ हवा की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। घटना के बाद अब प्रशासन के आला-अधिकारी मौके पर पहुंच गए है।

01-12-2019
तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आई 3 गाय, मामला दर्ज

रायपुर। सड़क किनारे बैठे तीन गायों को तेज रफ्तार ट्रक ने अपनी चपेट में ले लिया। इसके कारण घटनास्थल पर ही तीनो गायों की मौत हो गई। मिली जानकारी अनुसार जोरापारा डीडीनगर निवासी राजा नेताम ने रिपोर्ट दर्ज कराई है कि शनिवार को रिंग रोड-1 जायका आटो के सामने तेज रफ्तार ट्रक क्रमांक 22 एम 5102 का चालक ने सड़क किनारे बैठे तीन गाय को अपनी चपेट में ले लिया। इसके चलते घटनास्थल पर ही तीनों गायों की मौत हो गई। घटना की रिपोर्ट पर पुलिस ने ट्रक चालक के खिलाफ धारा 279 के तहत अपराध कायम कर मामला दर्ज कर लिया है।

 

11-11-2019
भिलाई में 14 गायों की मौत से मचा हड़कंप! दो दिनों से जारी है मौतों का सिलसिला

भिलाई। रिसाली के दशहरा मैदान में एक कार्यक्रम के आयोजन के बाद अचानक गायों की मौतों से इलाके में सनसनी फैल गई।  5 गायों की मौत 10 नवम्बर को हुई जबकि 9 गायों की मौत  11 नवम्बर को हुई है। इससे इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। जानकारी के अनुसार अभी तक 14 गायों की मौत हो चुकी है। प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार गायों की मौतें बचा हुआ खाना खाने से हुई। मृत गायों को नगर निगम की टीम ने डिस्पोज करने के लिए भेजा है। जानकारी के अनुसार दशहरा मैदान में भागवत कथा का आयोजन किया गया था  जिसमें भंडारे के कार्यक्रम के बाद बचा खाना खुले में फेंक दिया गया था। नगर पालिक निगम भिलाई के रिसाली जोन आयुक्त का कहना है कि उन्हें भी ऐसी सूचना मिली है कि गायों की मौत तो हुई है पर किन कारणों से हुई है यह स्पष्ट नहीं है। डॉक्टर के द्वारा सभी मृत गायों का पोस्टमार्टम किया गया है और उसकी रिपोर्ट आने के बाद ही कारण का पता चल पाएगा। वहीं प्राथमिक तौर पर यह जरूर माना जा रहा है कि खुले में पड़े भोजन को खाने से ही गायों की मौत हुई है। वही इस मामले में पुलिस ने गायों का पोस्टमार्टम कराने की बात कही हैं।

 

08-11-2019
भूख से चार गायों की मौत दु:खद है : सुन्दरानी

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक श्रीचंद सुन्दरानी ने भूख से हुई चार गायों की मौत के लिए प्रदेश सरकार की गौठान योजना की विफलता को दोषी ठहराया है। सुन्दरानी ने कहा कि गौठान योजना का ढिंढोरा पीटती प्रदेश सरकार मवेशियों के लिए चारा-पानी और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम तक नहीं कर पा रही है जिसके कारण गौवंश अकारण मौत के मुंह में जा रहा है।  सुन्दरानी ने कहा कि राजधानी से सटे ग्राम भरेंगाभाठा में निर्माणाधीन एनआईटी आवासीय परिसर में लगभग 300 गायों को जुलाई माह से बंधक बनाकर रखा जाना अमानवीयता की पराकाष्ठा है। इन बंधक गायों के लिए चारे-पानी का पर्याप्त इंतजाम तक नहीं किया गया था, जिसके कारण चार गायों की भूख से मौत हो गई और तीन गायों की दशा बेहद गंभीर है। गौठान योजना की ढिंढोरची प्रदेश सरकार और उसके कारिन्दों पर सवाल दागते हुए सुन्दरानी ने पूछा कि आखिर किसके कहने पर किसने इन गायों को कैद किया था? और, बंधक गायों के चारे-पानी का इंतजाम क्यों नहीं हुआ था? लगभग साढ़े चार माह से बंधक बनाकर रखी गई इन गायों की सुध लेने की जरूरत क्यों महसूस नहीं की गई? सुन्दरानी ने इस मामले को बेहद संवेदनशील बताते हुए इसे प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली की घोर विफलता का परिचायक बताया है और इस मामले की सूक्ष्म जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

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