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28-10-2020
हाथियों के दल ने मचाया उत्पात, फसलों को रौंदा, रतजगा करने को मजबूर ग्रामीण

अंबिकापुर। वन परिक्षेत्र उदयपुर में सात हाथियों ने विगत डेढ़ माह से डेरा जमाए हुए है। बीती रात ग्राम परोगिया में दो मकानों को क्षति पहुंचाई। हाथियों के दल ने धान एवं बाजरा के फसल को नुकसान पहुंचाया। इधर वन अमले के लाख समझाइश के बाद भी लोग हाथी के पीछे पीछे जाना नहीं छोड़ रहे हैं,जिससे जनहानि की आशंका बनी हुई है। हाथियों के डर से ग्रामीण रतजगा करने को मजबूर हैं। हाथियों का दल कब किस ओर जाएगा इसका पता नहीं रहता है। आसपास गांव के लोग वन अमला के साथ मिलकर रात भर हाथियों की निगरानी में लगे हुए हैं। हाथियों से लोगों को बचाने के लिए वन अमला निगरानी में लगा हुआ है। वन अमला जागरूक करने मुनादी करा रहा है तथा लोगों को हाथियों से दूर रहने की सलाह दे रहा है। जंगल किनारे एकांत घरों में रहने वाले लोगों को बस्ती में आकर निजी मकान में रखने की व्यवस्था की जा रही है। हाथियों के निगरानी में गजराज वाहन सुरक्षा उपकरणों के साथ उदयपुर वन अमला जुटा हुआ है।

 

27-10-2020
हाथियों के दल की भानुप्रतापपुर व बालोद सीमा क्षेत्र में चहल कदमी,लोगों में दहशत

कांकेर। हाथियों के दल ने एकबार फिर लोगों में दहशत पैदा कर दी है। भानुप्रतापपुर व बालोद वन मंडल क्षेत्र की सीमा में इनका चहल कदम जारी है, जिससे वन विभाग परेशान हैं। सीमा में स्थित पहाडी के दोनों ओर मौजूद गांवों के लोगों द्वारा लगातार अपने जान माल की सुरक्षा के लिए ढोल नगाडों से शोर शराबा मचाने से हाथियों का यह दल लगातार यहाँ से वहाँ आना जाना कर रहा है। यह दल भानुप्रतापपुर क्षेत्र में प्रवेश करता है और फिर वापस चला जाता है, ऐसा लगभग 6 बार हो चुका है। हाथियों की गतिविधियों से ऐसा लगता है कि यह दल कहीं जाना चाहता है परंतु हर तरफ छोटे छोटे गांव व आबादी होने के हाथियों का यह दल अपने गंतव्य की ओर नहीं जा पा रहे हैं। ऐसे में हाथियों के दल का आक्रामक होना भी एक डर का कारण बना हुआ है। शनिवार को भानुप्रतापपुर वन क्षेत्र में लगभग 4 किलोमीटर अंदर घुस जाने के बाद ग्राम ईरागांव पहुँचा यह दल ग्रामीणों के शोरशराबे से वापस बालोद क्षेत्र में 10 किलोमीटर अंदर तक चला गया था। इसके बाद रविवार रात को दल फिर से भानुप्रतापपुर क्षेत्र में प्रवेश कर गया और रात भर रहने के बाद सुबह फिर से वापस बालोद क्षेत्र में चला गया। इस बार हाथियों के दल ने सीमा क्षेत्र में लगे किसानों के खेतों में लगे धान की फसलों को नुकसान पहुंचाया है। कुछ किसान ऐसे हैं जिनके खेतों से हाथियों का दल लगातार आना जाना कर रहा है, जिसकी वजह से खेत की फसल चौपट हो गई है।

 

26-10-2020
5 महीनों में 14 हाथियों की मौत प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली का निकम्मापन : नारायण चंदेल

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री व विधायक नारायण चंदेल ने प्रदेश में लगातार हो रही हाथियों की मौत पर प्रदेश सरकार व वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया है।  विधायक चंदेल ने प्रदेश सरकार को वन्य प्रणियों की सुरक्षा के मामले में भी फिसड्डी कहा है। उन्होंने कहा है कि जबसे प्रदेश में कांग्रेस सत्ता में आई है, वन और वन्य प्राणियों पर आफतों का पहाड़ टूट पड़ा है। बावजूद इसके, प्रदेश सरकार इन मामलों को गंभीरता से नहीं ले रही है। विधायक चंदेल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में वन मंत्री के दावों और आदेश के बावजूद लगातार हाथियों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। विधायक चंदेल ने कोरबा में सोमवार सुबह हाथी के एक बच्चे के मिले शव की खबर का हवाला दिया है। उन्होंने कहा है कि महज 5 महीनों में प्रदेश भर में 14 हाथियों की मौत प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली का निकम्मापन तो जाहिर कर ही रहा है, साथ ही इस बात की आशंका को भी बल प्रदान कर रहा है कि प्रदेश में राजनीतिक संरक्षण में कोई तस्कर गिरोह इन वारदातों को इरादतन अंजाम दे रहा है।

वन्य प्राणियों व उनके अंगों की तस्करी कर रहा है।  प्रदेश सरकार के नाकारापन का आलम यह हो चला है कि प्रदेश में अब आम आदमी के साथ-साथ वन्य प्राणी भी सुरक्षित नहीं रह गए हैं। बेखौफ अपराधियों पर नकेल कसने के प्रदेश सरकार के तमाम दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। उन्होंने कहा है कि पूरे प्रदेश में जंगलों का दायरा सिमटता चला जा रहा है। फलस्वरूप वन्य प्रणी खुद को असुरक्षित पाकर जंगल छोड़ कर जा रहे हैं। फिर उन वन्य प्राणियों का अवैध शिकार कर वन्य प्रणियों के अंगों की तस्करी करने वाला गिरोह सक्रिय है। हाल ही एक मादा हाथी के शव से दांत का नहीं मिलना भी इस आशंका को बल प्रदान कर रहा है। इसी प्रकार हाथियों की लगातार मौतों की सामने आईं खबरों में यह तथ्य काफी चिंताजनक है कि मृत हाथियों के शरीर में रासायनिक पदार्थ (जहर) मिला है। विधायक चंदेल ने प्रदेश सरकार को वनों और वन्य प्राणियों की सुरक्षा के मामले में संजीदगी से काम करने की नसीहत दी है। मांग की है कि प्रदेश में लगातार हाथियों की संदिग्ध परिस्थितियों में हो रही मौतों के मामले में इस ताजा और इससे पहले हुई वारदातों की बारीकी से जांच कर दोषियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

 

23-10-2020
हाथियों का दल फिर पहुँचा भानुप्रतापपुर क्षेत्र, 1 दंतैल हाथी भी शामिल,लोगों में दहशत

कांकेर। जिले के भानुप्रतापपुर क्षेत्र में हाथियों का दल एक बार फिर से लौट आया है और इस बार हाथियों की संख्या भी अधिक है। वन विभाग के लोग पिछली रात से लगातार हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं। यह दल सुबह भानुप्रतापपुर क्षेत्र में प्रवेश किया उसके बाद से लगातार पहाड़ी की तलहटी क्षेत्र में आराम फरमाते रहे। अंधेरा होते ही शाम लगभग 6 बजे हाथियों के दल ने भानुप्रतापपुर वन क्षेत्र के और अंदर घुस गया। दल इरागांव बस्ती के किनारे से होता हुआ ग्राम दाबकट्टा व ग्राम भानबेड़ा की ओर बढ़ गए। इस रास्ते में बहुत सी बस्तियां होने से खतरा बढ़ गया है। हाथियों के आने की खबर मिलते ही आसपास के ग्रामीण ढोल नगाड़े बजाना शुरू कर दिया ताकि हाथियों को बस्ती से दूर रख सकें। वन विभाग अमले के अनुसार 18 हाथियों में 2 छोटे व 3 कुछ बड़े बच्चे शामिल है, वही 1 दंतैल हाथी भी दल में शामिल है।

 

19-10-2020
हाथियों के दल ने फिर मचाया उत्पात,किसान का घर तोड़ा,फसलों को रौंदा,रतजगा कर रहे ग्रामीण

अंबिकापुर। वन परिक्षेत्र उदयपुर में सात हाथियों का दल विगत एक माह से भी अधिक समय से उत्पात मचाए हुए हैं। हाथियों ने दावा से होते हुए करमकठरा जंगल मे प्रवेश किया था। विगत दो दिनों में जजगा में एक व्यक्ति के घर को तोड़ा है केदमा रोड में जजगी गांव के मुहाने पर शनिवार को एक स्कूटी,एक बाइक एवं एक साइकिल को क्षतिग्रस्त कर दिया है। हाथियों का दल जजगी से निकलकर रेण नदी को पार करते हुए धान के खेतों की फसल को रौंदते हुए जजगा पहुंचे। पीछे पीछे सैकड़ों ग्रामीण टार्च लेकर उनके पीछे पड़े रहे। एनएच 130 के बगल में रमपुरहिन दाई मंदिर के समीप स्थित कच्चे के मकान के एक हिस्से को गिराया तथा घर में चावल बनाकर रखे बर्तन को खेतों की ओर उठाकर ले गए। पके हुए चावल को खाने के बाद बर्तन को पैरों तले कुचल दिये। हाथी घर जब घर तोड़ने की कोशिश करने लगा तब घर में रह रहे सदस्य घर से भाग गए। हाथियों के जाने के बाद देर रात वापस घर लौटे। एन 130 पर हाथियों के चढ़ने के बाद रोड रोड क्रॉसिंग के उद्देश्य वन अमला द्वारा ट्रैफिक को कुछ देर के लिए रोका गया परंतु सैकड़ों लाइटों एवं उपस्थित लोगों के शोर से हाथी एनएच को क्रास करने की बजाय वापस जजगी रेण नदी किनारे धान के खेतों में और गन्ने की फसलों में पहुंच गए।

वन अमले के लाख समझा समझाइश के बाद भी लोग हाथी के पीछे पीछे जाना नहीं छोड़ रहे हैं, जिससे जनहानि की आशंका बनी हुई है। आसपास 4 से 5 गांव के किसानों के धान की फसल को नुकसान पहुंचाया है। हाथियों के डर से ग्रामीण रतजगा करने को मजबूर हैं। हाथियों का दल कब किस ओर जाएगा इसका पता नहीं रहता है। आसपास के 5 से 6 गांव के लोग वन अमला के साथ मिलकर रात भर हाथियों की निगरानी में लगे हुए रहते हैं। सभी हाथी दिनभर करमकठरा जंगल में  शांत रहने के बाद शाम को बाहर निकलकर पूरी रात अलकापुरी, जजगी, जजगा में घूमकर धान के फसलों को बुरी तरह से रौंदकर और खाकर धान गन्ना, अरहर एवं मक्का की फसल को नुकसान पहुंचाया है। हाथियों से लोगों को बचाने के लिए वन अमला निगरानी में लगा हुआ है । वन अमला द्वारा लोगों को जागरूक करने के लिए मुनादी करा रहा है तथा लोगों को हाथियों से दूर रहने की सलाह भी दी जा रही है। जंगल किनारे एकांत घरों में रहने वाले लोगों को बस्ती में आकर निजी व शासकीय पक्के मकान व छतों में रखने की व्यवस्था की जा रही है। हाथियों के निगरानी में गजराज वाहन सुरक्षा उपकरणों के साथ उदयपुर वन अमला जुटा हुआ है।

 

06-10-2020
पंडो परिवार के मकान को हाथियों ने तोड़ा, वन कर्मियों ने घर करा दिया था खाली

कोरबा। कटघोरा वन मंडल के पसान रेंज के अंतर्गत तनेरा सर्किल के पंडोपारा बस्ती में रात्रि को हाथियों का दल घनी आबादी में प्रवेश कर गया। वन विभाग ने लोकेशन के आधार पर तत्काल पंडो बस्ती पहुंचकर लाउडस्पीकर के माध्यम से सभी को सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील की।वाहन से बच्चे,बूढ़ों को वनकर्मियों ने शासकीय स्कूल में ठहराया गया। इस बीच हाथियों का दल   बस्ती में पहुंचकर जमकर उत्पात मचाया। केंदई, गांव में निवासरत पंडो समुदाय की संख्या अधिक होने के कारण शासन प्रशासन तथा उनके समस्या को लेकर वन विभाग के उच्च अधिकारियों ने तत्परता दिखाते हुए तत्काल मौके पर पहुंच कर हाथियों के आने के पहले ही  रेस्क्यू कर सभी बच्चे बड़ों को बाहर निकाल कर उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।

 

25-09-2020
हाथियों के दल ने किसानों के घर तोड़े, फसलों को किया बर्बाद,वन अमला सुरक्षा के लिए करा रहा मुनादी

अंबिकापुर। सरगुजा जिले के वन परिक्षेत्र उदयपुर में 7 हाथियों के दल ने एक बार फिर उत्पात मचाया। हाथियों के दल ने एक किसान का घर तोड़ा दिया और खड़ी फसल भी रौंदकर बर्बाद कर दिया। हाथियों के उत्पात की सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम गांव में पहुंचकर ग्रामीणों को जागरूक करते हुए मुनादी करा रही है। दरअसल हाथियों का दल पिछले एक सप्ताह से उत्पात मचाया हुआ हैं। हाथियों का दल ग्राम दावा से होते हुए करमकठरा जंगल में प्रवेश किया है। बीती रात लक्ष्मणगढ़ जंगल किनारे स्थित एक किसान के घर को तोड़कर कर क्षतिग्रस्त कर दिया।

कई किसानों के धान और मक्का की फसल को बुरी तरह से रौंदकर करीब 1.3 हेक्टेयर धान की फसल नष्ट कर दिया। हाथियों का दल अभी भी महेशपुर लक्ष्मणगढ़ के जंगल में डेरा जमाए हुआ है। हाथियों से लोगों को बचाने के लिए वन अमला, वन परिक्षेत्र अधिकारी के नेतृत्व में बुधवार सुबह से ही इनकी निगरानी में लगा हुआ है। वन विभाग लोगों को जागरूक करने के लिए मुनादी करा रहा है और लोगों को हाथियों से दूर रहने की सलाह भी दी जा रही है। जंगल किनारे एकांत घरों में रहने वाले लोगों को बस्ती में निकालकर शासकीय स्कूल आंगनबाड़ी केंद्र इत्यादि पक्के मकानों में रखने की व्यवस्था की जा रही है। हाथियों की निगरानी में गजराज वाहन सुरक्षा उपकरणों के साथ वन अमला जुटा हुआ है।

 

16-09-2020
डुबान क्षेत्र के गांवों में पहुंचा हाथियों का दल

धमतरी। 21 हाथियों का दल डुबान क्षेत्र की ग्राम पंचायत अरौद के आसपास गांवों के जंगल में मंडरा रहा है। पिछले समय डुबान के ग्राम मोंगरी के पास बांध किनारे दलदल में फंसने से एक तीन साल के हाथी की मौत हुई थी। अब फिर से 21 हाथियों का दल इसी क्षेत्र में मंडराने लगे हैं, ऐसे में हाथियों पर फिर से खतरा मंडराने लगा है। 16 सितंबर को हाथियों का दल ग्राम पंचायत अरौद डुबान के आश्रित ग्राम बरबांधा,कलारबाहरा की जंगल से गंगरेल बांध की ओर बढ़ने लगे हैं। लेकिन रात तक हाथियों का लोकेशन ग्राम मुरूमतरा में बताया गया है। क्षेत्र के किसान धान फसल बचाने के लिए हाथियों के दल को खदेड़ने से पीछे नहीं हट रहे हैं। डुबान क्षेत्र के किसान भी हाथियों को खदेड़ने हुए नजर आए हैं। ऐसे में किसानों के जान पर भी अब खतरा मंडराने लगा है। हालांकि वन विभाग की टीम इन हाथियों पर नजर रखे हुए हैं।


 

16-06-2020
21 हाथियों के दल में से अलग हुए नन्हे हाथी की दलदल में फंसने से मौत

धमतरी। गरियाबंद जिले से भटक कर सिंगपुर, केरेगांव वन परिक्षेत्र से होते धमतरी वन परिक्षेत्र के गंगरेल डूबान पहुंचे 21 हाथियों के दल में से एक बच्चा हाथी की दलदल में फंसने से मौत हो गई। उल्लेखनीय है कि चंदा हाथी का यह दल पिछले 7 दिनों से गंगरेल बांध के डुबान के जंगल में विचरण कर रहा था। इस बीच ग्राम उरपुटी-मोंगरी के नाले के दलदल में फंसने से एक बच्चा हाथी की मौत हो गई। इसकी खबर पाकर वन विभाग का अमला डीएफओ अमिताभ बाजपेई के साथ मौके पर पहुंचा। बताया गया है कि शेष हाथी का दाल अभी ग्राम कलारबहरा के सागौन प्लाट क्लास में है।

02-05-2020
राजिम के नजदीक पहुंचा 23 हाथियों का दल, इस वक्त महानदी में मौजूद

गरियाबंद। महासमुंद से हाथियों का दल गरियाबंद जिले में प्रवेश कर गया है। आज यानि शनिवार सुबह हाथियों के दल को राजिम के पास धमनी-कुम्ही गांव के खार में देखा गया है। हाथियों की संख्या दो दर्जन के करीब बताई जा रही है। सबसे अहम बात यह है कि हाथियों का ये दल बड़ी तेजी से आगे बढ़ रहा है। राजिम एसडीएम जीडी वाहिले के अनुसार 23 हाथियों का दल है जो जिले की सीमा में प्रवेश किया है। कल शाम 6 बजे इनके दल को महासमुंद के बम्हनी गांव में देखा गया था और आज सुबह ये जिले की सीमा में प्रवेश किए है। अभी इनकी लोकेशन राजिम के नजदीक अरण्ड और कुम्ही गांव के बीच बताई जा रही है।

उन्होंने बताया कि हाथी का दल बड़ी तेजी से आगे बढ़ गया है। किसानों की फसल के नुकसान की जानकारी भी सामने आई है। वे अपनी पूरी टीम के साथ इस पर निगरानी रखे हुए है। हाथियों के दल की जानकारी मिलते ही वन अमला भी सतर्क हो गया है। आसपास सभी गांवों में हाथी के आने की जानकारी दे दी गई है। मुनादी के जरिए लोगों को सतर्क रहने की जानकारी दी गई है। डीएफओ मंयक अग्रवाल ने बाताया कि अमला पूरी तरह सतर्क है और लोगों से घरों में रहने की समझाईश दी गई है। उन्होंने बताया कि महासमुंद से हाथियों को कैसे निकाला गया। इसका अनुभव उनके पास है। इसलिए गरियाबंद जिले से भी हाथियों को जल्द ही आगे बढ़ा दिया जाएगा।

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