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08-09-2020
विकास उपाध्याय प्रदेश के पहले 'फीवर क्लीनिक' का कल करेंगे शुभारंभ,एलईडी से लैस 5 गाड़ियां करेंगी लोगों को जागरुक  

रायपुर।। संसदीय सचिव विकास उपाध्याय रायपुर में बढ़ते कोविड-19 संक्रमण से बचाव के लिए हर स्तर पर इसे रोकने काम कर रहे हैं। उन्होंने मंगलवार को 5 एलईडी से लैस 5 गाड़ियों की जागरुकता लाने झंडी दिखाकर शुरुआत की। विकास उपाध्याय पूरे प्रदेश में पहले फीवर क्लीनिक की शुरुआत अपने विधानसभा से बुधवार से करने जा रहे हैं। इस क्लीनिक में कोविड-19 के प्रारंभिक लक्षण से संबंधित जांच कर मुफ्त में दवाई का वितरण किया जाएगा। इसकी शुरुआत पहले 2 वार्डों से की जा रही है,इसके बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से इसके सार्थक परिणाम की चर्चा कर पूरे वार्डों में शुरुआत करने की योजना है। इस क्लीनिक में सर्दी,जुकाम व बुखार की जांच की जाएगी। विकास उपाध्याय ने ई-रिक्शा के माध्यम से आयुर्वेद काढ़ा वितरण का काम भी सोमवार से ही शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि इस क्लीनिक में प्रारंभिक जांच से कोई व्यक्ति संक्रमित है या संक्रमित होने की स्थिति में आ गया है,उसे बुखार या सर्दी जुकाम है,पता चलने पर दवाई दी जाएगी। सामान्य व्यक्ति जिसे थोड़ी भी अपनी शारीरिक स्वस्थता को लेकर बदलाव महसूस कर रहा है वह इस क्लिनिक में आकर दवाई मुफ्त में ले सकता है।

विकास उपाध्याय ने कहा कि सरदार वल्लभ भाई पटेल वार्ड क्रमांक 25 के साहू भवन और ठक्कर बापा वार्ड क्रमांक17 कर्मा विद्यालय, दीक्षा नगर, गुढ़ियारी में क्लिनिक की शुरुआत की जा रही है। इसकी सारी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। इस फीवर क्लीनिक में वार्ड का कोई भी व्यक्ति जिसे बुखार, सर्दी जुकाम की आशंका हो आवश्यक जांच कराकर संक्रमण को रोकने जरूरी दवाई ले सकता है। अपने तरह के इस  फीवर क्लीनिक में जांच को लेकर लैब के साथ आक्सीमीटर, थमार्मीटर, पीपीई कीट और इसके रोकथाम के लिए आवश्यक दवाईयां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहेंगी। इस क्लीनिक में आने वाले सभी व्यक्तियों की जांच करने विशेषज्ञ, चिकित्सक और लैब टैक्निशियन मौके पर ही पूरे समय उपलब्ध रहेंगे। विकास उपाध्याय ने कहा कि उन सभी व्यक्तियों को इसका लाभ मिलेगा, जिनकों यह शिकायत है कि उनकी शिकायतों पर स्वास्थ्य विभाग ध्यान नहीं देता। संबंधित चिकित्सक किसी तरह की जांच करने से बचते हैं। इस तरह के जांच से प्रारंभिक लक्षण वाले मरीजों को चिन्हांकित करने मदद मिलेगी, जिन्हें आवश्यक संक्रमण पूर्व दवाई के आवश्यक डोज देकर रोकने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि, इसके सार्थक परिणाम आते हैं, तो मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को रिपोर्ट प्रस्तुत कर पूरे 70 वार्डों में इसकी शुरुआत अविलंब की जाएगी।

 

26-04-2020
कोरोना संक्रमण के नियंत्रण के लिए एक और पहल, शुरू हुए फीवर क्लीनिक 

कोरबा। कोरोना संक्रमण को बढ़ने से रोकने के लिए जिला प्रशासन द्वारा हर संभव प्रयास और नवाचार लगातार किए जा रहे हैं। कलेक्टर किरण कौशल की पहल पर जिले में एक और नवाचार फीवर क्लीनिक शुरू किया गया है। जिले के सरकारी अस्पतालों में कोरोना संदिग्ध और सामान्य मरीजों का अलग-अलग इलाज करके संक्रमण को फैलने से रोकना इस नवाचार का प्रमुख उद्देश्य है। कोरोना का हॉटस्पॉट बन चुके कोरबा के कटघोरा मेें स्थितियां अब नियंत्रण में हैं और पिछले नौ दिनों से कोई भी नया संक्रमित इलाके में नहीं मिला है। जिले की सभी सरकारी अस्पतालों और कोरबा मुख्यालय में स्थित इंदिरा गांधी जिला चिकित्सालय में सर्दी, खांसी, बुखार के साथ सांस की बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए इलाज की अलग व्यवस्था फीवर क्लीनिक संचालित की जा रही है। कलेक्टर किरण कौशल ने इस विषय में बताया कि अस्पतालों की सामान्य ओपीडी में इनफ्लूएंजा या फ्लू जैसी बीमारियों के लक्षण सर्दी, खांसी, बुखार वाले मरीजों का इलाज अन्य रोगों से पीड़ित मरीजों के साथ ही किए जा रहे थे।

कोरोना वायरस के संक्रमण के प्रारंभिक लक्षण भी इसी तरह के हैं। इसलिए ऐसे लक्षणों वाले मरीजों को अन्य रोगों के मरीजों से अलग कर जांच एवं इलाज की व्यवस्था जिला अस्पताल सहित सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में शुरू की गई है। कलेक्टर ने बताया कि इससे कोरोना के संदिग्ध मरीजों की पहचान में आसानी होगी और ऐसे संदिग्ध मरीजों को पहचान कर तत्काल उनका कोरोना टेस्ट कराया जाएगा। टेस्ट में पॉजिटिव आने पर समय रहते ऐसे संक्रमित मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा। इसके साथ ही ऐसे मरीजों के संपर्क में आने से दूसरे मरीजों को भी संक्रमित होने से बचाया जा सकेगा। 
       
कलेक्टर ने बताया कि जिला अस्पताल में बने नये भवन में फीवर क्लीनिक शुरू किया गया है। यहां डाक्टरों की ड्यूटी निर्धारित कर सर्दी, खांसी, बुखार के मरीजों का अलग से उपचार करने के साथ-साथ कोरोना संक्रमण का संदेह होने पर मरीजों का कोरोना टेस्ट कराने की व्यवस्था भी की गई है। फीवर क्लीनिक तक आने-जाने और मरीजों के बैठने की भी अलग व्यवस्था की गई है। डाक्टरों को भी क्लीनिक में सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखते हुए सर्दी, खांसी, बुखार सांस में तकलीफ वाले मरीजों की जांच और इलाज के निर्देश दिए गए हैं।

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