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06-11-2020
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री से सिंहदेव ने पर्याप्त संख्या में टीके उपलब्ध कराने किया आग्रह,तैयारियों की दी जानकारी 

रायपुर। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन से छत्तीसगढ़ के लिए पर्याप्त संख्या में कोविड-19 के टीके उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। उन्होंने आश्वस्त किया कि प्रदेश में इसके भंडारण, संधारण और वितरण की समुचित व्यवस्था है। डॉ. हर्ष वर्धन ने शुक्रवार को वीडियो कांफ्रेंस से प्रदेश में कोविड-19 से निपटने की व्यवस्थाओं की समीक्षा की। इस दौरान सिंहदेव ने उनसे यह आग्रह किया।  केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कोरोना की रोकथाम के लिए राज्य शासन की ओर से की गई व्यवस्थाओं और उपायों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि यहां इस दिशा में बेहतर काम रहा है। स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन कोरोना पर नियंत्रण के लिए सक्रियता और तत्परता से काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि आगामी कुछ  महीने कोविड-19 संक्रमण की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। सर्दी के मौसम और लगातार त्यौहारों के कारण कोरोना संक्रमण के बढ़ने की संभावना है। इसलिए सचेत रहते हुए कोविड अनुकूल व्यवहारों को गंभीरता से अपनाना जरूरी है। 
स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव ने बताया कि प्रदेश में अभी रोजाना 22 हजार से 25 हजार सैंपलों की जांच हो रही है। कोविड अस्पतालों में ज्यादा से ज्यादा बिस्तरों तक ऑक्सीजन सुविधा उपलब्ध कराने के लिए तत्परता से काम किया गया है। कोरोना संक्रमण के संभावितों का पता लगाने के लिए यहां विगत 2 अक्टूबर से 12 अक्टूबर के बीच घर-घर जाकर गहन सामुदायिक सर्वे किया गया है। स्वास्थ्य सुरक्षा अभियान के अंतर्गत ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मितानिनें सप्ताह में दो दिन भ्रमण कर कोरोना से मिलते-जुलते लक्षण वाले लोगों की पहचान कर उन्हें जांच के लिए प्रेरित कर रही हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा ऐसे सभी संभावित मरीजों की तत्काल जांच के इंतजाम किए गए हैं।
सिंहदेव ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री को जानकारी दी कि कोविड टीकाकरण के लिए भारत सरकार के निदेर्शों के अनुरूप प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थाओं में कार्यरत स्वास्थ्य कार्यकताओं का डॉटा-बेस तैयार किया जा रहा है। टीकों के सुरक्षित संधारण के लिए अभी 530 कोल्ड-चेन (शीत श्रृंखला) प्वाइंट हैं तथा 80 नए कोल्ड-चेन प्वाइंट भी शुरू किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि कोविड अनुकूल व्यवहारों को अपनाने के लिए आईईसी के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। मास्क के इस्तेमाल, शारीरिक दूरी बनाए रखने और हाथों की लगातार साफ-सफाई के लिए उन्हें प्रेरित किया जा रहा है। समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य विभाग की अपर मुख्य सचिव रेणु जी. पिल्लै, आयुक्त डॉ. सीआर प्रसन्ना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला भी शामिल हुईं। नई दिल्ली में डॉ. हर्ष वर्धन के साथ स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव डॉ. राजेश भूषण और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र  के निदेशक डॉ. सुजीत कुमार सिंह भी मौजूद थे।

16-09-2020
राज्य में 23 से 30 तक मनाया जाएगा कृमि-मुक्ति दिवस, 1.14 करोड़ बच्चों को एल्बेंडाजॉल की गोली खिलाने का लक्ष्य

रायपुर। राज्य में 23 सितम्बर से 30 सितम्बर तक कृमि-मुक्ति दिवस का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान मितानिन और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा गृह भ्रमण कर एक से 19 वर्ष तक के बच्चों को कृमि-मुक्ति की दवा (एल्बेंडाजॉल) समुदाय स्तर पर खिलाई जाएगी। राष्ट्रीय कृमि-मुक्ति कार्यक्रम सितम्बर 2020 में 28 जिलों के कुल 1.14 करोड़ बच्चों को एल्बेंडाजॉल की गोली खिलाए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस दौरान सरगुजा और सूरजपुर जिले के 3 ब्लॉक-रामानुजगंज, सूरजपुर एवं प्रेमनगर में फाइलेरिया कार्यक्रम के अंतर्गत भी सभी बच्चों को एल्बेण्डाजॉल की दवा का सेवन कराया जावेगा।

एक से दो वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को एल्बेण्डाजॉल की आधी गोली तथा 3 से 19 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को एक पूरी गोली दी जायेगी। कोविड-19 संक्रमण की व्यापकता को देखते हुए स्कूल, आगनबाड़ी और अन्य शैक्षणिक सस्थान का संचालन नहीं किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम का क्रियान्वयन स्वास्थ्य विभाग तथा महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा सामुदायिक स्तर पर किया जावेगा।

13-09-2020
सर्विलांस दल कर रहा घर घर जाकर स्वास्थ्य जांच,सर्दी, खांसी और बुखार से पीड़ितों को दे रहा दवाई

बीजापुर। जिले कोविड-19 संक्रमण से बचाव एवं रोकथाम के लिए एक्टिव सर्विलांस दलों द्वारा घर-घर जाकर सर्दी, खांसी, बुखार आदि लक्षण वाले व्यक्तियों का सर्वेक्षण करने सहित उनका स्वास्थ्य जांच किया जा रहा है। इसके साथ ही अन्य प्रांत या जिलों से आने वाले लोगों का सर्वेक्षण किया जा रहा है तथा उक्त लक्षण वाले व्यक्तियों की कोरोना जांच की जा रही है। इसी कड़ी में जिले में कुल 4660 परिवारों का घर-घर जाकर सर्वेक्षण किया गया, जिसमें 181 लोगों में सर्दी, खांसी तथा बुखार के लक्षण पाये गये। इन सभी लोगों का जांच कर उन्हें दवाई उपलब्ध करायी गयी। एक्टिव सर्विलांस दलों द्वारा नगरपालिका परिषद बीजापुर में 590, नगरपंचायत भैरमगढ़ में 99 तथा नगर पंचायत भोपालपटनम में 66 परिवारों का घर-घर जाकर सर्वेक्षण किया गया। वहीं भोपालपटनम ब्लाक में 1753, बीजापुर ब्लाक में 392, भैरमगढ़ में  1345 तथा उसूर ब्लाक में 415 परिवारों का डोर-टू-डोर सर्वे किया गया। उक्त सर्वेक्षित सभी परिवारों के लोगों को कोविड-19 के संक्रमण से बचाव एवं रोकथाम के लिए परामर्श दी गई।

कलेक्टर रितेश कुमार अग्रवाल ने जिले में कोविड-19 के संक्रमण से बचाव एवं रोकथाम सम्बन्धी दिशा-निर्देशों का अनुपालन करने का आग्रह जनसाधारण करते हुए कहा है कि जिले के किसी भी नागरिक को सर्दी, खांसी, बुखार और सांस लेने में दिक्कत आदि लक्षण दिखायी देने पर तुरंत अस्पताल पहुंच कर कोरोना की जांच करायें। कोरोना वायरस के अन्य लक्षण भी संक्रमित होने के बाद आमतौर पर 2 दिन से लेकर 14 दिन के भीतर उभरने लगते हैं,जिसमें बुखार या ठंड लगना, थकान, शरीर में दर्द, सिर दर्द, स्वाद व सुगंध का न आना, गले में खराश, नाक बहना, उल्टी एवं दस्त का होना भी कोरोना वायरस के लक्षण हैं। इस प्रकार के लक्षण दिखायी देने पर तुरंत नजदीकी कोरोना जांच केन्द्र में पहुंचकर कोरोना जांच करायें। कोरोना संक्रमण से मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, बचाव ही सबसे आसान तरीका है। इस दिशा में मास्क पहनें, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें और बहुत जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें। भीड़ वाले जगहों में जाने से बचें और सजगता के साथ अपने आप का बचाव करें। कोरोना के लक्षण दिखायी देने पर बिना किसी भय के तत्काल अपना परीक्षण अवश्य करवायें।

08-09-2020
विकास उपाध्याय प्रदेश के पहले 'फीवर क्लीनिक' का कल करेंगे शुभारंभ,एलईडी से लैस 5 गाड़ियां करेंगी लोगों को जागरुक  

रायपुर।। संसदीय सचिव विकास उपाध्याय रायपुर में बढ़ते कोविड-19 संक्रमण से बचाव के लिए हर स्तर पर इसे रोकने काम कर रहे हैं। उन्होंने मंगलवार को 5 एलईडी से लैस 5 गाड़ियों की जागरुकता लाने झंडी दिखाकर शुरुआत की। विकास उपाध्याय पूरे प्रदेश में पहले फीवर क्लीनिक की शुरुआत अपने विधानसभा से बुधवार से करने जा रहे हैं। इस क्लीनिक में कोविड-19 के प्रारंभिक लक्षण से संबंधित जांच कर मुफ्त में दवाई का वितरण किया जाएगा। इसकी शुरुआत पहले 2 वार्डों से की जा रही है,इसके बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से इसके सार्थक परिणाम की चर्चा कर पूरे वार्डों में शुरुआत करने की योजना है। इस क्लीनिक में सर्दी,जुकाम व बुखार की जांच की जाएगी। विकास उपाध्याय ने ई-रिक्शा के माध्यम से आयुर्वेद काढ़ा वितरण का काम भी सोमवार से ही शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि इस क्लीनिक में प्रारंभिक जांच से कोई व्यक्ति संक्रमित है या संक्रमित होने की स्थिति में आ गया है,उसे बुखार या सर्दी जुकाम है,पता चलने पर दवाई दी जाएगी। सामान्य व्यक्ति जिसे थोड़ी भी अपनी शारीरिक स्वस्थता को लेकर बदलाव महसूस कर रहा है वह इस क्लिनिक में आकर दवाई मुफ्त में ले सकता है।

विकास उपाध्याय ने कहा कि सरदार वल्लभ भाई पटेल वार्ड क्रमांक 25 के साहू भवन और ठक्कर बापा वार्ड क्रमांक17 कर्मा विद्यालय, दीक्षा नगर, गुढ़ियारी में क्लिनिक की शुरुआत की जा रही है। इसकी सारी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। इस फीवर क्लीनिक में वार्ड का कोई भी व्यक्ति जिसे बुखार, सर्दी जुकाम की आशंका हो आवश्यक जांच कराकर संक्रमण को रोकने जरूरी दवाई ले सकता है। अपने तरह के इस  फीवर क्लीनिक में जांच को लेकर लैब के साथ आक्सीमीटर, थमार्मीटर, पीपीई कीट और इसके रोकथाम के लिए आवश्यक दवाईयां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहेंगी। इस क्लीनिक में आने वाले सभी व्यक्तियों की जांच करने विशेषज्ञ, चिकित्सक और लैब टैक्निशियन मौके पर ही पूरे समय उपलब्ध रहेंगे। विकास उपाध्याय ने कहा कि उन सभी व्यक्तियों को इसका लाभ मिलेगा, जिनकों यह शिकायत है कि उनकी शिकायतों पर स्वास्थ्य विभाग ध्यान नहीं देता। संबंधित चिकित्सक किसी तरह की जांच करने से बचते हैं। इस तरह के जांच से प्रारंभिक लक्षण वाले मरीजों को चिन्हांकित करने मदद मिलेगी, जिन्हें आवश्यक संक्रमण पूर्व दवाई के आवश्यक डोज देकर रोकने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि, इसके सार्थक परिणाम आते हैं, तो मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को रिपोर्ट प्रस्तुत कर पूरे 70 वार्डों में इसकी शुरुआत अविलंब की जाएगी।

 

06-09-2020
स्वास्थ्य और पोषण सेवाएं देने कल से खुलेंगे आंगनबाड़ी केन्द्र, यूनिसेफ के राज्य प्रमुख ने की सराहना

रायपुर। छत्तीसगढ़ में बच्चों और गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य और पोषण सेवाएं देने और गरम भोजन प्रदान करने 7 सितम्बर से आगनबाड़ी केन्द्र खोले जाएंगे। ऐसे आंगनबाड़ी केन्द्र जो कंटेनमेन्ट जोन में आते हो या जिन क्षेत्रों को जिला प्रशासन ने बंद रखने का निर्णय लिया गया है, वहां केन्द्र संचालित नहीं होंगे। कोविड-19 संक्रमण को देखते हुए शासन ने आंगनबाड़ी केन्द्रों को प्रारंभ करने के पहले आवश्यक सावधानियों के संबंध में सभी संभागीय आयुक्तों, कलेक्टरों और महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारियों को विस्तृत दिशा निर्देश दिए गए हैं। इसके परिपालन में आंगनबाड़ियों में सैनिटाइजेशन का काम शुरू कर दिया गया है। पालकों और पंचायत प्रतिनिधियों से चर्चा कर उनकी राय और सहमति ली जा रही है। केन्द्रों को शुरू करने के पहले पर्यवेक्षकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की गई है। 

छत्तीसगढ़ सरकार के पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आंगनबाड़ी खोलने के कदम की यूनिसेफ के राज्य प्रमुख जाॅब जकारिया ने भी ट्वीट कर सराहना की है। उल्लेखनीय है कि, विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ जैसी अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों का मानना है कि, कोविड-19 के कारण कुपोषण में बढ़ोत्तरी हो सकती है। अतः कुपोषण की रोकथाम के लिए कारगर कदम उठाने की जरूरत है। कोविड-19 के कारण 14 मार्च से प्रदेश की आंगनबाड़ी केन्द्रों का संचालन बंद है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की ओर से हितग्राहियों को घर पहुंचाकर सूखा राशन प्रदान किया जा रहा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 के अनुसार छत्तीसगढ़ में बच्चों में कुपोषण की दर 37 प्रतिशत रही है। अतः कुपोषण की रोकथाम के लिए कारगर कदम उठाने की आवश्यकता को देखते हुए आंगनबाड़ी केन्द्र सीमित समय के लिए खुलेंगे। इससे 3 से 6 वर्ष के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को गर्म पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जा सके। साथ ही स्वास्थ्य और पोषण दिवस के तहत बच्चों को टीकाकरण और गर्भवती महिलाओं कोे स्वास्थ्य जांच की सेवाएं प्रदान की जा सकें। 

जिला कलेक्टरों की ओर से जिन आंगनबाड़ियों में गरम भोजन वितरण पर रोक लगाई जाएगी, वहां साप्ताहिक आधार पर रेडी टू ईट का वितरण करने कहा गया है। जो हितग्राही आंगनबाड़ी केन्द्र नहीं आना चाहते उन्हें पूर्व के अनुसार रेडी टू ईट वितरण किया जा सकेगा। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से आंगनबाड़ी संचालन के दौरान सामाजिक दूरी का पालन, मास्क पहनने, साबुन से हाथ धोने सहित सभी सावधानियां बरतने के दिशा-निर्देश जारी किये गए हैं। केन्द्रों को खोलने से पहले 3 से 6 सितम्बर के दौरान उन्हें पूरी तरह से साफ और सेनिटाइज करने कहा गया है। केन्द्र के अंदर हितग्राहियों को अनुमति देने से पहले साबुन से हाथ धोने और स्क्रीनिंग को अनिवार्य किया गया है। हितग्राहियों को अलग-अलग समूहों में बुलाने के निर्देश दिए गए हैं। एक समय में अधिकतम 15 लाभार्थियों को ही प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। गरम भोजन के लिए पात्र हितग्राही 3-6 वर्ष के बच्चे,गर्भवती महिलाएं और सुपोषण अभियान के हितग्राहियों को ही केन्द्र में आने की अनुमति होगी। 

विभाग ने यह तय करने के लिए कहा है कि, भोजन सुरक्षित रूप से पकाया जाए। साफ बर्तनों में परोसा जाए और जगह को अच्छी तरह से साफ किया जाए। इस संबंध में विस्तृत निर्देश जारी किए गए हैं। इसके अनुसार आंगनबाड़ी भवनों में प्रवेश के पहले प्रत्येक हितग्राही की स्क्रीनिंग की जाएगी। इस दौरान बीमारियों के प्रारंभिक लक्षण का आंकलन भी किया जाएगा। बीमार व्यक्तियों के प्रबंधन और किसी बच्चे या स्टाफ में संक्रमण की पुष्टि होने की स्थिति के लिए भी गाइडलाइन जारी की गई हैं। किसी हितग्राही या स्टाफ के संक्रमित पाए जाने पर केन्द्र 3 दिनों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा।

23-08-2020
कोरोना रथ से किया जाएगा जागरूक,सत्यनारायण शर्मा के साथ संगठनों के पदाधिकारियों ने कलेक्टर को दी जानकारी 

रायपुर। कोविड-19 संक्रमण की रोकथाम के लिए जिला प्रशासन के जन-जागरुकता कार्यक्रम में सहभागिता प्रदान करने रायपुर ग्रामीण विधायक सत्यनारायण शर्मा की पहल पर संगठन आगे आए हैं। रविवार को विधायक शर्मा के साथ रोटरी, लायंस व जेसीज जैसे सामाजिक संगठन के पदाधिकारी कलेक्टर डॉ. एस भारतीदासन के साथ बैठक किए। अपनी भावी गतिविधियों की रूपरेखा से अवगत कराया।  इन संगठनों ने अधिकाधिक कोविड परीक्षण करने पर्याप्त मात्रा में एन्टीजन किट, ऑक्सी पल्स मीटर भी जिला प्रशासन को उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। बैठक में पीसीसीएफ राकेश चतुर्वेदी भी साथ थे। इन संगठनों की ओर से कोरोना जागरुकता रथ में मास्क वितरण के साथ ही गिलोय, अडूसा जैसे वनौषध पौधों का वितरण भी किया जाएगा। ये पौधे शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक हैं। जिला पंचायत के सीईओ डॉ. गौरव कुमार सिंह के सुझाव पर ये संगठन हर वार्ड में जाकर सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क लगाने, अस्वस्थता की स्थिति में तत्काल चिकित्सक से परामर्श लेने लोगों को समझाइश देंगे। 
बता दें कि, कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए गत दिवस हुई मंत्री स्तरीय बैठक में व्यापक जन-जागरुकता पर विशेष जोर दिया गया था। बैठक में संगठनों ने निर्णय लिया है कि,वे वार्डवार जिम्मेदारी लेकर जिला प्रशासन के जन-जागरुकता कार्यक्रम को घर-घर तक पहुंचाएंगे। बैठक में डीएफओ बीएस ठाकुर, अपर कलेक्टर एनआर साहू, रायपुर स्मार्ट सिटी के महाप्रबंधक जनसंपर्क आशीष मिश्रा, सहायक परियोजना अधिकारी चुन्नीलाल शर्मा, जेसी राजेश अग्रवाल, डॉ. एसके शर्मा, डीके मोहंती, बीएन राव, दीपक श्राफ, शशि बरवंडकर, राज दुबे, सुबोध तोले, विश्वनाथ मुखर्जी, अनूप चंद, अभिषेक सरावगी, मुनीश सग्गर, रिदुल शर्मा, अमित अग्रवाल सहित संस्थाओं के पदाधिकारी भी उपस्थित थे।

20-08-2020
सदभावना दिवस पर नगर पालिका अध्यक्ष सहित अधिकारी-कर्मचारियों ने ली शपथ

महासमुन्द। सदभावना दिवस के अवसर पर नगर पालिका परिसर में गुरुवार को नगर पालिका अध्यक्ष प्रकाश चंद्राकर, सीएमओ सहित अधिकारी कर्मचारियों ने जाति, संप्रदाय अथवा भाषा का भेदभाव किए बिना एकता और सदभावना के साथ कार्य करने की शपथ ली है। नगर पालिका अध्यक्ष चंद्राकर ने कहा कि कोविड-19 संक्रमण में निरंतर बढ़ोत्तरी हो रही है, और ऐसे संकट के दौर में पालिका कर्मचारियों द्वारा बिना किसी भेदभाव के निस्वार्थ भाव से अपनी सेवा दे रहे हैं। सदभावना दिवस पर ली गई शपथ का सही मायनों में अक्षरश पालन पालिका के अधिकारी, कर्मचारियों ने किया है। इस अवसर पर पालिका कर्मचारी संघ के अध्यक्ष रामकुमार लोधी, सब इंजीनियरी दिप्ती कुर्रे, ललित चंद्राकर, रामशरण शर्मा, इंदर सिंह ठाकुर,सीताराम तेलक, विजय श्रीवास्तव, खेमराव बंजारी, गुमान सिंह ध्रुव, जय सोनी, सेवा राम शर्मा, चंद्रशेखर पाटकर, भागवत पेंदरिया, ललित साहू, जितेन्द्र महंती सहित सहित समस्त कर्मचारी उपस्थित थे।

 

12-07-2020
वेल्यू एडिशन के क्षेत्र में काम करने के इच्छुक एनजीओ को मिलेगा हरसंभव सहयोग : भूपेश बघेल

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि खाद्य प्रसंस्करण, लघु वनोपजों और वनौषधियों के वेल्यू एडिशन और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं के कौशल उन्नयन के क्षेत्र में काम करने की इच्छुक गैर सरकारी संगठनों को राज्य सरकार हर संभव सहयोग देगी। मुख्यमंत्री रविवार को अपने निवास कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेन आईआईटी ग्लोबल ई-कॉनक्लेव में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में इन क्षेत्रों में काम करने की काफी संभावनाएं हैं। इन क्षेत्रों में काम करने की इच्छुक संस्थाओं का छत्तीसगढ़ में स्वागत है। कॉन्क्लेव में राज्यसभा सांसद जयराम रमेश के साथ चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के 44 प्रतिशत भू-भाग में वन हैं। यहां लघु वनोपजों और वनौषधियों की विपुल संपदा है। छत्तीसगढ़ में इनके अलावा फल-फूल, कृषि और उद्यानिकी फसलों का अच्छा उत्पादन होता है। कोदो-कुटकी सहित अनेक ऐसे उत्पाद हैं, जिनकी पूरी दुनिया में मांग है, यदि छत्तीसगढ़ के इन उत्पादों में वेल्यू एडिशन होता है तो स्थानीय युवाओं, महिलाओं को रोजगार के अच्छे अवसर मिलेंगे और उत्पादकों को उनकी कीमत का अच्छा मूल्य मिलेगा। मुख्यमंत्री बघेल ने वेल्यू एडिशन और तैयार उत्पादों की मार्केटिंग में भी पेन आईआईटी संस्थाओं से सहयोग का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री बघेल ने कोविड-19 संक्रमण से बचाव और रोकथाम के उपायों, लॉक डाउन के दौरान आर्थिक गतिविधियों को चलाए रखने, मनरेगा और लघु वनोपजों के संग्रहण से मजदूरों और वनवासियों को रोजगार और आय का जरिया मुहैया कराने, नक्सली चुनौती से निपटने की राज्य सरकार की रणनीति पर विस्तार से जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ के कृषि-उद्यानिकी, लघु वनोपजों और वनौषधियों के व्यापार को प्रोत्साहन देने के लिए राज्य सरकार की ओर से बायर्स-सेलर्स मीट का आयोजन किया गया था, जिसमें अनेक देशों की 128 संस्थाओं ने हिस्सा लिया। राज्य सरकार की ओर से रायपुर में कार्गो परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए केन्द्रीय उड्डयन मंत्रालय से पहल की है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में लाख का उत्पादन भी बड़े पैमाने पर होता है। इसे और अधिक बढ़ावा देने के लिए लाख उत्पादन को खेती का दर्जा दिया गया है। राज्य सरकार कोसा उत्पादन को भी कृषि का दर्जा देने पर गंभीरतापूर्वक विचार कर रही है। धान और गन्ना से एथेनॉल के उत्पादन के लिए प्लांट लगाने के लिए निविदा भी बुलाई गई है। प्रदेश में आज भी 70 प्रतिशत लोग खेती पर निर्भर हैं। प्रदेश के सभी विकासखण्डों में खाद्य प्रसंस्करण और वेल्यू एडिशन के लिए संयंत्र लगाने की काफी संभावना है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉक डाउन के दौरान भी छत्तीसगढ़ में जरूरी आर्थिक गतिविधियों को चालू रखा गया। मनरेगा के काम बड़े पैमाने पर प्रारंभ किए गए, जिनमें अधिकतम 26 लाख लोगों को काम मिला। लघु वनोपजों के संग्रहण का काम भी चलता रहा, 2500 रुपए में धान खरीदी, किसानों की ऋण मुक्ति जैसे उपायों से विश्वव्यापी मंदी का असर छत्तीसगढ़ में नहीं पड़ा। राज्य सरकार का यह प्रयास रहा कि लोगों के पास पैसा आए।

 


 

 
21-06-2020
कलेक्टर, शक्कर कारखाना के एमडी सहित अधिकारी-कर्मचारियों ने किया योगाभ्यास

कवर्धा। कबीरधाम कलेक्टर रमेश कुमार शर्मा, भोरमदेव शक्कर कारखाना के एमडी भूपेंद्र सिंह ठाकुर ने आज अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर विभिन्न मुद्राओं में योगाभ्यास किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिकों को अपने स्वास्थ्य जीवन, तन और मन के लिए नियमित रूप से योग करना चाहिए। योगाभ्यास से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। उन्होंने आज सुबह योगाभ्यास करते हुए अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की बधाई दी।

उन्होंने कहा कि योग भारत की प्राचीनतम विद्या है। इसकी साधना वस्तुतः शरीर, मन और आत्मा को शुद्ध करने की एक प्रक्रिया है। स्वस्थ, तनावमुक्त और अनुशासित जीवन के लिए योग का महत्व आज पूरा विश्व समझ रहा है। भारत में कोविड-19 संक्रमण को देखते हुए तथा निर्देशों का पालन करते हुए छठवें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सामूहिक कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया जा रहा है और इसे डिजिटल प्लेटफार्म पर मनाया जा रहा है। इस अवसर पर जिले के पुलिस अधीक्षक केएल ध्रुव, अपर कलेक्टर जेके ध्रुव, जिला पंचायत सीईओ विजय दयाराम और जिले के सभी अधिकारियों ने अपने-अपने घर पर योगाभ्यास किया।

08-06-2020
मरीजों की सुरक्षा के लिए अम्बेडकर अस्पताल को बांटा गया तीन जोन में

रायपुर। कोविड-19 संक्रमण के फैलाव की रोकथाम को दृष्टिगत रखते हुए डॉ.भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर को तीन जोन में बांटा गया है। इस व्यवस्था के अंतर्गत चिकित्सालय के विभिन्न वार्डों को तीन जोन में विभक्त करते हुए एक-दूसरे से अलग कर दिया है। एक जोन के लोग दूसरे जोन में नहीं जा सकेंगे। पहले ज़ोन में कन्फर्म कोविड-19 केस मरीजों को रखा गया है। इस जोन में सामान्य लोगों की आवाजाही पूर्णतः प्रतिबंधित है ताकि किसी भी प्रकार के संक्रमण के प्रसार का खतरा न हो। दूसरे जोन में सस्पेक्टेड केस हैं,जिसमें मरीजों को कोविड के संभावित लक्षण तो हैं लेकिन इनकी कोविड सैम्पल जांच की रिपोर्ट आना बाकी है।

तीसरे में नान कोविड मरीज हैं,जो दूसरी बीमारियों का इलाज कराने के लिये चिकित्सालय में भर्ती हुए है। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ.विनित जैन ने इस नई व्यवस्था की जानकारी देते हुए बताया अस्पताल को तीन अलग-अलग हिस्सों में बांटने का सबसे बड़ा फायदा होगा कि डॉक्टर, पूरे स्टॉफ तथा चिकित्सालय में इलाज कराने आने वाले लोगों को यह जानकारी रहेगी कि कौन से मरीज का इलाज कहां चल रहा है। एक-हिस्से को दूसरे से बिल्कुल पृथक कर दिया गया है। जोन के रूप में अस्पताल का विभाजन केवल लोगों की सुरक्षा के लिये किया गया है। मरीज एवं उनके परिजन एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में न जायें इसके लिए जगह-जगह डिस्प्ले बोर्ड लगाए गए हैं।

 

22-04-2020
भूपेश ने पीएम को कहा -सीएसआर की राशि का व्यय कोविड-19 रोकने ही किया जाना है, तो राज्य शासन यह तय करेगी...

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ की खनन परियोजनाओं और औद्योगिक इकाईयों की ओर से प्रधानमंत्री केयर फंड में जमा की गई सीएसआर की राशि को शीघ्र राज्य सरकार को अंतरित करने के लिए निर्देश देने अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि यदि इस राशि का व्यय कोविड-19 के संक्रमण को रोकने या उससे निपटने के लिए ही व्यय किया जाना है, तो राज्य शासन यह तय करेगी कि सीएसआर मद की राशि उन्हीं जिलों में व्यय की जाएगी, जो खनन या औद्योगिक परियोजनाओं से प्रभावित है या कोविड-19 के संक्रमण से प्रभावित है। मुख्यमंत्री बघेल ने पत्र में लिखा है कि खनन परियोजनाओं या औद्योगिक इकाईयों की स्थापना से इकाईयों के निकटवर्ती क्षेत्रों में रहने वालों को भूविस्थापन, प्रदूषण और अन्य कारणों से होने वाली कठिनाईयों को देखते हुए सीएसआर फंड की स्थापना की गई है। प्रधानमंत्री से कहा कि आप अवगत ही होंगे कि सीएसआर मद से खनन परियोजनाओं और उद्योगों के आसपास के क्षेत्रों में प्रतिवर्ष मूलभूत सुविधाओं के विकास एवं संचालन का कार्य किया जाता है।

सीएसआर मद का सर्वाधिक महत्वपूर्ण उद्देश्य औद्योगिक इकाईयों की स्थापना से प्रभावित व्यक्तियों को राहत देना है। मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा कि कोविड-19 वायरस के संक्रमण की स्थिति में केन्द्र सरकार ने सभी खनन परियोजनाओं और औद्योगिक इकाईयों को यह निर्देश दिए गए हैं कि वे सीएसआर मद की राशि सीधे प्रधानमंत्री केयर फंड में जमा करें। इकाईयों ने इन निर्देशों का पालन भी शुरू कर दिया है। केन्द्र सरकार के इस निर्णय से खनन परियोजनाओं और औद्योगिक इकाईयों की स्थापना से प्रभावित व्यक्तियों में असंतोष व्याप्त है। केन्द्र सरकार के इस निर्णय से खनन इकाईयों के आसपास के नागरिकों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहना पड़ेगा।

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