GLIBS
20-06-2020
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर प्रवासी श्रमिकों के लिए ज़िला व ब्लाक स्तर पर किया जा रहा है हेल्प डेस्क का गठन

रायपुर /राजनांदगांव। प्रवासी मजदूरों की सहायता के लिए हेल्प डेस्क का गठन किया जा रहा है। इसी कड़ी में सर्वाेच्च न्यायालय के निर्देशानुसार कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने जिले के प्रवासी मजदूरों की सहायता के लिए जिला और  विकासखंड स्तर पर हेल्प डेस्क का गठन किया है। जिला स्तर पर जिला पंचायत कार्यालय राजनांदगांव में स्थापित हेल्पडेस्क का दूरभाष क्रमांक 07744-224060 और श्रम पदाधिकारी कार्यालय राजनांदगांव में स्थापित हेल्प डेस्क का दूरभाष क्रमांक 07744-225049 है। इसी तरह विकासखंड स्तर पर तहसीलदार कार्यालयों में प्रवासी मजदूरों की सहायता के लिए हेल्पडेस्क स्थापित किया गया हैं। राजनांदगांव विकासखंड के हेल्पडेस्क का दूरभाष क्रमांक 07744-225403, खैरागढ़ विकासखंड के हेल्पडेस्क का दूरभाष क्रमांक 07820-234230, छुईखदान विकासखंड के हेल्पडेस्क का दूरभाष क्रमांक 07743-263503, डोंगरगांव विकासखंड के हेल्पडेस्क का दूरभाष क्रमांक 07745-271756, अंबागढ़ चौकी विकासखंड के हेल्पडेस्क का दूरभाष क्रमांक 07747-249280, छुरिया विकासखंड के हेल्पडेस्क का दूरभाष क्रमांक 07745-264400, मोहला विकासखंड के हेल्पडेस्क का दूरभाष क्रमांक 07747-249280, डोंगरगढ़ विकासखंड के हेल्पडेस्क का दूरभाष क्रमांक 07823-232244 है।

 

 

16-06-2020
 कोरोना संकट से परेशान जनता को राहत देने की मांग करते हुए वामपंथी दलों ने मनाया विरोध दिवस

कोरबा। मोदी सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ गरीबों और प्रवासी मजदूरों की समस्याओं को केंद्र में रखकर जिले की तीन वामपंथी पार्टियां ने 16 जून को विरोध दिवस मनाया। इसके साथ ही वाम पार्टियां ने जिले के क्वारंटाइन केंद्रों और राहत शिविरों में रखे गए प्रवासी मजदूरों को पौष्टिक आहार देने, चिकित्सा सहित सभी बुनियादी मानवीय सुविधाएं  की भी मांग की।विरोध दिवस के अवसर पर घंटाघर चौक में अम्बेडकर प्रतिमा के सामने तीनों वामपंथी पार्टियों ने नारेबाजी कर विरोध प्रदर्शन कर जिला प्रशासन को प्रधानमंत्री के नाम चार सूत्रीय मांग पत्र सौंपे और माकपा द्वारा गांव गांव में विरोध प्रदर्शन किया गया, जिसमें माकपा पार्षद सुरती कुलदीप, राजकुमारी कंवर प्रमुख रूप से शामिल थे।वाम नेताओं ने कहा कि आज अर्थव्यवस्था जिस मंदी में फंस चुकी है, उससे निकलने का एकमात्र रास्ता यह है कि आम जनता के हाथों में नगद राशि पहुंचाई जाए तथा उसके स्वास्थ्य और भोजन की आवश्यकताएं पूरी की जाए, ताकि उसकी क्रय शक्ति में वृद्धि हो और बाजार में मांग पैदा हो। उसे राहत के रूप में "कर्ज नहीं, कैश चाहिए", क्योंकि अर्थव्यवस्था में संकट आपूर्ति का नहीं, मांग का है। विरोध प्रदर्शन में प्रमुख रूप से जनकदास कुलदीप, जवाहर सिंह कंवर,एसएन बनर्जी, संतोष सिंह, सुनील सिंह, प्रभुनाथ राय शामिल थे।

12-06-2020
 छत्तीसगढ़ सरकार के पास प्रवासी श्रमिकों के रोजगार और कल्याण की कार्ययोजना नहीं : विष्णुदेव साय

रायपुर। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने प्रवासी मजदूरों की दिक्कतों और बदहाल क्वारेंटाइन सेंटर्स में इन प्रवासी मजदूरों को जबरिया समय-सीमा से अधिक रोके जाने को लेकर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। साय ने कहा है कि कोरोना मोर्चे पर प्रदेश सरकार बुरी तरह विफल रही है। प्रदेश के उच्च न्यायालय ने मजदूरों के लिए बनाई गई योजनाओं का तीन हफ्तों में ब्योरा भी मांगा है। साय ने राजधानी के टाटीबंध में मजदूरों के गुरुवार को हुए प्रदर्शन का जिक्र कर प्रदेश सरकार पर प्रवासी श्रमिकों के प्रति बेरुखी दिखाने का आरोप भी लगाया है। उन्होंने कहा कि क्वारेंटाइन सेंटर्स में अन्य प्रदेशों से आए छत्तीसगढ़ के मजदूरों को निर्धारित 14 दिनों की समय-सीमा से अधिक जबरिया रोका जा रहा है। कतिपय सेंटर्स में इन मजदूरों को 22 दिनों तक महज इसलिए रोका गया है क्योंकि उनके स्वाब सैंपल की जाँच रिपोर्ट अब तक नहीं आई है। साय ने इसे अमानवीय बताया और कहा कि क्वारेंटाइन सेंटर में रोकने के बजाय रिपोर्ट आने तक इन श्रमिकों को होम आइसोलेशन में रखा जाना बेहतर विकल्प हो सकता है। इस तरह क्वारेंटाइन सेंटर्स में निर्धारित समय-सीमा से अधिक उन्हें जबरिया रोकना अपने ही गाँव में एक तरह से कैद में रखे जाने जैसा है।

साय ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री बघेल विभिन्न प्रदेशों से पहुँचे प्रवासी श्रमिकों के कल्याण और रोजगार की बड़ी-बड़ी बातें करके भी अपने झूठ का रायता ही फैलाने में लगे हैं। केंद्रीय श्रम मंत्री ने पिछले अप्रैल माह में प्रदेश के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर सेस फंड का उपयोग निर्माणी मजदूरों को आर्थिक लाभ प्रदान करने और कल्याणकारी योजनाएँ बनाने को कहा था। इसी आशय का पत्र केंद्रीय श्रम सचिव ने राज्यों के मुख्य सचिव को लिखा था। इसके बाद देश के 17 राज्यों ने इस दिशा में कारगर पहल कर इन मजदूरों को लाभ पहुँचाना शुरू कर दिया लेकिन छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने लगभग दो माह बीतने के बाद भी एक तो ऐसी कोई योजना बनाई ही नहीं, दूसरे इस राशि का इस्तेमाल अन्य मदों में कर दिया। अब भी प्रदेश सरकार के पास न तो प्रवासी श्रमिकों के रोजगार और कल्याण की कोई सुस्पष्ट और सुविचारित कार्य योजना है और न ही कोई दृष्टिकोण ही है।

09-06-2020
क्वॉरेंटाइन सेंटर में अव्यवस्था से नाराज श्रमिक भाग रहे थे घर, प्रशासन ने वापस रखा सेंटर में

सूरजपुर। जिला मुख्यालय से लगे ग्राम पर्री में स्थित लाइवलीहुड कॉलेज को  कोविड - 19 माहमारी को लेकर प्रवासी मजदूरों के लिए क्वॉरेंटाइन सेंटर बनाया गया है। इस क्वॉरेंटाइन में करीब दर्जन भर से अधिक प्रवासी मजदूर अव्यवस्था से नाराज होकर अपने घरों के लिए बगैर अनुमति लिए चल पड़े,जिसकी सूचना पर प्रशासन समझाइस देकर पुनः क्वॉरेंटाइन में रखने की बात कही जा रही है।
मिली जानकारी के अनुसार ग्राम पर्री में स्थित लाइवलीहुड कॉलेज में बनाये गए प्रवासी मजदूरों के लिए क्वारेंटाइन सेंटर में उस वक्त हंगामा मच गया जब सेंटर में रखे गए दर्जनों भर प्रवासी श्रमिकों ने क्वारेंटाइन सेंटर में अव्यस्थाओं को लेकर अपने घर जाने के लिए निकल गए। इसके बाद प्रशासन भागे गए मजदूरों को रास्ते में समझाइस देते हुए पुनः क्वॉरेंटाइन सेंटर लाया। मजदूर भागने मेँ तो जरूर नाकाम रहे लेकिन क्वॉरेंटाइन सेंटर मेँ व्यवस्था को लेकर बेहद नाराज दिखे। क्वॉरेंटाइन सेंटर जिसकी देख रेख की जिम्मेदारी प्रशासन के आला अधिकारियों की थी। क्लेक्टर ने क्वारनटाईन सेंटर में तैनात दो पटवारी को निलंबित कर दिया है तो वहीं कटेंनमेंट ज़ोन के नोडल ऑफ़िसर और नायब तहसीलदार समेत तीन आरआई को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इस संबंध में सूरजपुर क्लेक्टर रणबीर शर्मा ने कहा कि सभी मजदूरों को समझाइस देकर पुनः क्वॉरेंटाइन सेंटर में भेज दिया गया है। अव्यवस्था के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि मैं स्वयं क्वॉरेंटाइन सेंटर का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा ले रहा हूं। किसी तरह की कोई अव्यवस्था नहीं है।

 

05-06-2020
महाराष्ट्र, गुजरात,मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और झारखंड से लौटे सभी प्रवासी, भेजा गया कोविड अस्पताल

कोरबा। एक दिन में कोरबा जिले के तीन क्वारेंटाइन सेंटरों में ठहराये गये 40 प्रवासियों की कोरोना जांच रिपोर्ट पाजिटिव प्राप्त हुई है। प्रवासियों की जांच रिपोर्ट में कोरोना संक्रमण की पुष्टि पाये जाते ही अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी संजय अग्रवाल, पुलिस अधीक्षक अभिषेक मीणा सहित स्वास्थ्य विभाग की टीम तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बारी-बारी से तीनों क्वारेंटाइन सेंटरों तक पहुंची। शुक्रवार को कोरबा विकासखंड के शासकीय हाईस्कूल कुदुरमाल में बने क्वारेंटाइन सेंटर से 36 प्रवासी मजदूरों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है। शहर के एक होटल में पेड क्वारेंटाइन में रह रहे दो प्रवासी व्यक्तियों और पोंड़ीउपरोड़ा विकासखंड के जटगा में बनाये गये क्वारेंटाइन सेंटर में ठहरे दो अन्य प्रवासी मजदूरों की कोरोना जांच रिपोर्ट पाजिटिव मिली है। अधिकारियों ने इन तीनों क्वारेंटाइन सेंटरों को कोविड-19 प्रोटोकाल के अनुसार सैनिटाइज करने और मजबूत बेरिकेटिंग कर इलाके में किसी भी प्रकार की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश मौके पर दिये। तीनों सेंटरों से सभी कोरोना पाजिटिवों को एंबुलेंसों से कोरबा जिला मुख्यालय के विशेष कोविड अस्पताल में ईलाज के लिए भेज दिया गया है। कोरोना संक्रमित पाये गये सभी 40 लोग 19 से 55 साल के आयु वर्ग के पुरूष हैं। इनमें से दो 55 एवं 54 साल के बुजुर्गों को स्वास्थ्यगत परेशानी के कारण एम्स रायपुर ईलाज के लिए भेजा गया है।

कुदुरमाल के हायर सेकेण्डरी स्कूल के क्वारेंटाइन सेंटर में गुजरात, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश से पिछले महिने लौटे 63 प्रवासी मजदूरों को रखा गया था। इनमें से 22 मई को पहले 12 प्रवासी मजदूरों की कोरोना जांच रिपोर्ट पाजिटिव आई थी,जिनका इलाज बिलासपुर और रायपुर के विशेष कोविड अस्पतालों में चल रहा है। इनमें से तीन संक्रमित व्यक्ति ईलाज के बाद पूरी तरह ठीक भी हो गये हैं। उस दौरान अन्य सभी प्रवासी मजदूरों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई थी। कुदुरमाल क्वारेंटाइन सेंटर में एक साथ 12 संक्रमित मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पुनः अन्य प्रवासी मजदूरों का सेम्पल जांच के लिए भेजा था,जिसमें से आज 36 अन्य प्रवासी श्रमिक पाजिटिव मिले हैं। कुदुरमाल क्वारेंटाइन सेंटर में ठहरे अन्य 15 श्रमिकों को अब वहां से हटाकर चचिया के क्वारेंटाइन सेंटर में शिफ्ट किया जा रहा है। कुदुरमाल क्वारेंटाइन सेंटर में आज मिले 36 कोरोना संक्रमितों में से 16 लोग गुजरात से, 19 महाराष्ट्र से एवं एक मध्यप्रदेश से वापस कोरबा लौटे हैं।

 कोरबा शहर के  होटल में बनाये गये पेड क्वारेंटाइन सेंटर में अन्य प्रांतो से आये 43 प्रवासी लोगों को 14 दिन के क्वारेंटाइन में रखा गया है। यहां ठहरे दो युवकों की भी कोरोना जांच रिपोर्ट पाजिटिव आई है। इनमें से एक 35 वर्षीय युवक लखनउ से दिल्ली होकर हवाई जहाज से रायपुर पहुंचा था और रायपुर हवाई अड्डे से निजी टैक्सी द्वारा कोरबा आया था। प्रशासन ने उसे कोरबा पहुंचने पर क्वारेंटाइन किया था। इसी प्रकार झारखंड के गिरीडीह से राताखार निवासी एक अन्य 23 वर्षीय युवक भी निजी वाहन से कोरबा पहुंचा था। उसे भी प्रशासन ने पेड क्वारेंटाइन में रखा था। इस युवक की जांच रिपोर्ट भी पाजिटिव आई है। इन दोनों युवकों को भी ईलाज के लिए कोरबा कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसी प्रकार जटगा के हायर सेकेण्डरी स्कूल में बनाये गये क्वारेंटाइन सेंटर में 47 प्रवासी श्रमिकों को प्रशासन ने ठहराया है। इसमें से दो युवकों के कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि जांच रिपोर्ट से हुई है। दोनों युवक केरल से कोरबा लौटे हैं। 

 

05-06-2020
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को दिए निर्देश, श्रमिकों को घरों तक पहुंचाने के लिए 15 दिन का दिया समय

नई दिल्ली। प्रवासी मजदूरों की दुर्दशा पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई की। अदालत ने कहा कि लॉक डाउन की वजह से पलायन कर रहे कामगारों को उनके पैतृक स्थानों तक पहुंचाने के लिए केंद्र और राज्यों को 15 दिन का समय देने पर वह विचार कर रहा है। इसके साथ ही अदालत ने राज्यों को प्रवासी मजदूरों को रोजगार मुहैया कराने के भी निर्देश दिए हैं। अदालत में अगली सुनवाई मंगलवार को होगी। शुक्रवार को याचिका पर सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अभी तक करीब एक करोड़ प्रवासी मजदूरों को उनके घर तक पहुंचाया गया है। उन्होंने शीर्ष अदालत को बताया कि इनमें से करीब 41 लाख मजदूरों को सड़क मार्ग और 57 लाख मजदूरों को ट्रेनों से उनके गृह राज्य भेजा गया है। मेहता ने कहा कि अधिकतर ट्रेनों का संचालन उत्तर प्रदेश और बिहार की तरफ हुआ है। उन्होंने अदालत को बताया कि इन कामगारों को उनके पैतृक स्थान पहुंचाने के लिए तीन जून तक 4200 से ज्यादा श्रमिक ट्रेनें चलाई गईं।सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि हम राज्यों से संपर्क में हैं और राज्य सरकारें ही अदालत को प्रवासियों की सही संख्या के बारे में बता सकती हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें अदालत को बता सकती हैं कितने प्रवासियों को अभी घर पहुंचाना है और इसके लिए कितनी ट्रेनों की आवश्यकता पड़ेगी। राज्यों ने एक चार्ट तैयार किया है, क्योंकि वे ऐसा करने के लिए सबसे अच्छी स्थिति में थे। देश की शीर्ष अदालत ने राज्यों द्वारा तैयार चार्ट को देखने के बाद कहा कि इसके अनुसार महाराष्ट्र की तरफ से केवल एक चार्ट की मांग की गई है। इसके जवाब में मेहता ने कहा कि महाराष्ट्र से हमने पहले ही 802 ट्रेनों को संचालित किया है। फिलहाल एक ट्रेन के लिए अनुरोध किया गया है। सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि किसी भी राज्य द्वारा ट्रेनों की मांग किए जाने पर केंद्र सरकार 24 घंटे के भीतर ट्रेनों को वहां भेजेगी। इस पर कोर्ट ने कहा कि हम सभी राज्यों से कहेंगे कि वह अपनी ट्रेनों की मांग को रेलवे को सौंपे।बता दें कि शीर्ष अदालत ने 28 मई को निर्देश दिया था कि अपने पैतृक स्थान जाने के इच्छुक सभी प्रवासी कामगारों से ट्रेन या बसों का किराया नहीं लिया जाए। अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि रास्ते में फंसे श्रमिकों को संबंधित प्राधिकारी नि:शुल्क भोजन और पानी मुहैया कराएंगे।

 

04-06-2020
प्रवासी मजदूरों की नहीं हो रही पूछपरख

रायपुर/सरगांव। शासन एक ओर प्रवासी मजदूरों के लिए अनेक व्यवस्था करने की बात करती है और अपने अधिकारियों कर्मचारियों की ड्यूटी क्वारेंटाइन सेंटरो मे लगाई है। मुंगेली जिले की सरगांव नगर पंचायत में बनाए गए शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक शाला,सरस्वती शिशु मंदिर,त्रिमूर्ति पब्लिक स्कूल,शासकीय महाविद्यालय कस्तूरबा गांधी विद्यालय को क्वारेंटाइन सेंटर बना कर प्रभारी नियुक्त किए गए हैं। यहाँ सरगांव के आसपास के गांव में आने वाले प्रवासी मजदूरों को ठहराया जा रहा है पर बुधवार 3 जून रात 8 बजे ग्राम बावली के 14 मजदूर अपने 4 बच्चों के साथ सरगांव बाइपास मोहभट्ठा चौक में बस से उतरे पर इनकी पूछपरख लेने वाला कोई नहीं था। वहां से गुजर रहे जोगेन्दर सिंह खालसा, बलदाऊ यादव, पार्षद एजाज़ अहमद ने रोककर अधिकारियों को फोन कर सूचित करना चाहा पर किसी ने फोन नहीं उठाया तब तीनों ने प्रवासी मजदूरों को कन्या शाला क्वारंटाइन सेंटर पंहुचाया। इसी प्रकार अपने खर्च पर गांव आने वाले मजदूरों की कोई खबर नहीं ले रहा है। इससे अनेक मजदूरों को भटकते देखा जाता है। 

31-05-2020
क्वारेंटाइन सेंटर्स में बुनियादी सुविधाएं, लोगों के स्वास्थ्य की नियमित जांच

रायपुर। देश के विभिन्न हिस्सों से छत्तीसगढ़ लौटे प्रवासी श्रमिकों के लिए प्रदेश भर में 20 हजार से अधिक क्वारेंटाइन सेंटर्स बनाए गए हैं। इन सेंटर्स में तीन लाख 48 हजार लोगों को रखा गया है। 14 दिनों की क्वारेंटाइन अवधि पूरी कर 25 हजार मजदूर अपने घरों में लौट चुके हैं। घर में इन्हें सात से दस दिनों तक होम-क्वारेंटाइन में रहने के निर्देश दिए गए हैं। गांवों में स्थापित क्वारेंटाइन सेंटर्स का संचालन एवं नियंत्रण संबंधित जिला प्रशासन द्वारा किया जा रहा है। इनके संचालन में ग्राम पंचायतें, जनपद पंचायतें और जिला पंचायतें सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं। राज्य शासन द्वारा प्रवासी मजदूरों के प्रदेश लौटने की व्यवस्था करने के बाद युद्धस्तर पर बहुत कम समय में करीब-करीब प्रत्येक ग्राम पंचायत में क्वारेंटाइन सेंटर स्थापित किए गए हैं। इन सेंटर्स में रह रहे प्रवासी मजदूरों को आवास और भोजन सहित सभी बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। अस्थायी शौचालयों, पुरूषों एवं महिलाओं के लिए अलग-अलग स्नानगृहों, स्वच्छ पेयजल, लाइट एवं पंखों की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर इन सेंटर्स में टेलीविजन एवं रेडियो जैसे मनोरंजन के साधनों की व्यवस्था की जा रही है। क्वारेंटाइन सेंटर्स में रह रहे लोगों के स्वास्थ्य पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। अस्वस्थ लोगों को इलाज और दवाईयां मुहैया कराई जा रही है। संक्रमण की संभावना और लक्षण वाले व्यक्तियों के तत्काल सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा जा रहा है। क्वारेंटाइन सेंटर्स में खाने-पीने के लिए पर्याप्त संख्या में दोना-पत्तल एवं डिस्पोजेबल गिलास के इंतजाम किए गए हैं। बार-बार हाथ धोने के लिए साबुन और पानी के साथ ही हैंड-सेनिटाइजर भी उपलब्ध कराया जा रहा है। मुंह ढंकने के लिए मास्क एवं गमछा भी दिया जा रहा है।

क्वारेंटाइन सेंटर्स में भोजन बनाने के सभी इंतजामों के साथ सोने के लिए गद्दा, दरी और चादर उपलब्ध कराया जा रहा है। इन सेंटर्स में साफ-सफाई की भी अच्छी व्यवस्था की गई है। इसके लिए सभी सेंटरों को पर्याप्त मात्रा में डस्ट-बिन, झाड़ू, फिनाइल एवं बाल्टियां दी गई हैं। लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने क्वारेंटाइन सेंटर्स में योग और प्राणायाम कराए जा रहे हैं। महिलाओं को माहवारी स्वच्छता के लिए सेनेटरी पैड भी वितरित किए जा रहे हैं।
अवशिष्ट सामग्रियों के सुरक्षित निपटान के लिए बायो-मेडिकल वेस्ट प्रबंधन नियम-2016 का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। स्थानीय प्रशासन द्वारा प्रत्येक सेंटर में एक कमरा पृथक से आइसोलेशन के लिए सुरक्षित रखे जाने के भी निर्देश दिए गए हैं। क्वारेंटाइन सेंटर्स की व्यवस्था राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जिलों को जारी आपदा राहत निधि तथा ग्राम पंचायतों को उपलब्ध कराए गए चौदहवें वित्त आयोग व मूलभूत की राशि से की जा रही है। वर्तमान में क्वारेंटाइन सेंटर्स में रह रहे तीन लाख 48 हजार प्रवासी श्रमिकों के अलावा अभी करीब एक लाख 70 हजार मजदूरों की प्रदेश वापसी अनुमानित है। राज्य सरकार सभी लोगों को सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उनकी सहूलियत और सेहत की रक्षा के लिए सभी तरह के संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। प्रदेश की लगभग सभी पंचायतों में बेहद कम समय में क्वारेंटाइन सेंटर के लिए संसाधन जुटाए गए हैं। प्रदेश में वैश्विक महामारी कोविड-19 पर नियंत्रण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में है और इसके लिए ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों में प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।

 

30-05-2020
क्वारेंटाइन सेन्टरों में प्रवासी मजदूरों के लिए बेहतर व्यवस्था, लोगों की किया जा रहा शिक्षित

रायपुर। राज्य शासन द्वारा लॉकडाउन के कारण वापस आए श्रमिकों को कोरोना वायरस से सुरक्षा की दृष्टि से 14 दिनों तक क्वारंटाइन सेंटरों में रहने की व्यवस्था की गई है। इन प्रवासी श्रमिकों के लिए सभी सेंटरों में बेहर इंतजाम किया गया है। बेमेतरा जिले में अन्य राज्यों से आए 25 हजार 505 प्रवासी मजदूर जिले के एक हजार 26 क्वारंटाइन सेन्टरों में ठहरे हुए हैं। इन प्रवासी मजदूरों की स्वास्थ्य जांच, खान-पान के अतिरिक्त एवं मनोरंजन की व्यवस्था की जा रही है। 14 दिनों के क्वारंटाइन काल में मजदूरों का मानसिक तनाव को कम करने के लिए योग, खेल गतिविधयों एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जा रहा है। क्वारंटाइन सेंटरों में पौधारोपण, पुस्तक पाठन, निरक्षर महिलाओं एवं बच्चों को पढ़ना-लिखना सिखाया जा रहा है। जिले में ग्राम पंचायतों द्वारा क्वारंटाइन सेन्टरों में पुस्तक मैग्जीन की व्यवस्था की गई है। पौधारोपण कर गांवों को हराभरा करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। क्वारेंटाइन सेंटर से जाने के पश्चात सभी प्रवासी मजदूरों को अपने घरों में पौधारोपण करने करने प्रेरित कर वन-धन की महत्ता से अवगत कराया जा रहा है। इसी क्रम में ग्राम मटका के क्वारंटाइन सेन्टर में नीम, आम, अशोक, अमरूद आदि वृक्षारोपण किया गया।

 

30-05-2020
प्रवासी मजदूरों के बच्चों को मिलेगा स्कूलों में मिलेगा प्रवेश, पढ़े खबर..

रायपुर। छत्तीसगढ़ में कोविड-19 के संक्रमण के कारण प्रवासी मजदूरों को क्वारेंटाइन सेंटर में रखा गया है। इनके साथ केन्द्रों में उनके बच्चे भी रह रहे हैं। राज्य सरकार ने इन प्रवासी मजदूरों के बच्चों की नियमित शिक्षा की व्यवस्था के लिए उन्हें स्कूलों में प्रवेश दिलाने का निर्णय लिया है। स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ.आलोक शुक्ला ने इस संबंध में कार्यवाही के लिए जिला कलेक्टरों को निर्देशित किया है।प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा ने जिला कलेक्टरों से कहा है कि प्रवासी मजदूरों के बच्चों के नियमित शिक्षा के लिए उनकी जानकारी निर्धारित प्रपत्र में एकत्रित किया जाना आवश्यक है। इस प्रपत्र में बच्चे का नाम, आयु, जन्मतिथि, लिंग, पिता का नाम, माता का नाम, कहां से छत्तीसगढ़ वापस आए हैं, निवास  स्थान का पूरा पता। ग्रामीण क्षेत्र के लिए - गांव, पंचायत, विकासखण्ड,जिला तथा शहरी क्षेत्र के लिए मकान नंबर, मोहल्ला, वार्ड, शहर, जिला, बच्चा कितने वर्ष का और किस कक्षा में पढ़ता है, इस वर्ष किस कक्षा में प्रवेश लेना है, माता-पिता छत्तीसगढ़ में रहेंगे अथवा काम के लिए बाहर जाएंगे, बच्चा छत्तीसगढ़ में रहेगा अथवा माता-पिता के साथ बाहर जाएगा कि जानकारी एकत्र की जाए। जिला कलेक्टरों से कहा गया है कि क्वारेंटाइन सेंटर छोड़ने के पूर्व प्रत्येक क्वारेंटाइन सेंटर में प्रपत्र अनुसार जानकारी एकत्र करा ली जाए। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शीघ्र ही इस जानकारी की ऑनलाइन एन्ट्री के लिए साफ्टवेयर उपलब्ध कराया जाएगा। तब तक यह जानकारी प्रत्येक क्वारेंटाइन सेंटर में एक पंजी में तैयार कराएं। जिला कलेक्टरों से कहा गया है कि यह सुनिश्चित करें कि सभी की जानकारी तैयार हो जाए। इससे कोई भी बच्चा स्कूल में प्रवेश से वंचित न रह जाए। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारियों को भी आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

Advertise, Call Now - +91 76111 07804