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01-07-2020
भोजपुरी अभिनेत्री रानी चटर्जी ने सोशल मीडिया में किया खुलासा, कहा- डिप्रेशन में हूं

मुंबई। भोजपुरी अभिनेत्री रानी चटर्जी ने अपने सोशल मीडिया पोस्‍ट से सबको चौंका दिया है। उन्‍होंने एक शख्‍स का नाम लेते हुए खुलासा किया है कि उसकी वजह से वह अपनी जिदंगी के बुरे दौर से गुजर रही हैं और उनमें बिल्‍कुल भी हिम्‍मत नहीं बची है। रानी ने यह भी कहा कि वह डिप्रेशन में है। रानी चटर्जी ने अपने आधिकारिक इंस्‍टाग्रांम पोस्‍ट पर लिखा,' डिप्रेशन से मैं अब बहुत ज्यादा डिस्‍टर्ब परेशान हो चुकी हूं, मैं अक्सर मजबूत बने रहने की और सकारात्मक बने रहने की बात करती हूं पर अब और नहीं हो पा रहा है। यह आदमी कई सालों से मेरे बारे में न जाने कितनी अभद्र बातें फेसबुक पर लिख रहा है। मैंने इग्‍नोर करने की बहुत कोशिश की।

रानी चटर्जी ने आगे लिखा, मैंने कई लोगों से बात की पर सभी ने कहा कि इग्‍नोर करो पर मैं भी तो इंसान हूं। रानी ने लिखा, 'मैं कई सालों से इस बात को लेकर काफी परेशान हूं, मानसिक तनाव से गुजर रही हूं। शायद वह चाहता है कि में अपनी जान दे दूं इसकी वजह से मेरी निजी जिंदगी में बहुत तनाव है। मुंबई पुलिस से मेरी रिक्‍वेस्‍ट है कि अगर मैं कुछ कर लेती हूं तो इसका जिम्मेदार उक्त व्यक्ति होगा। मैंने साइबर सेल में भी इसकी शिकायत की थी पर वहां पर कहा गया कि इसने मेरा नाम नहीं लिखा है, पर मैं यह जानती हूं यह सिर्फ मेरे लिए लिखता है। रानी चटर्जी का यह पोस्ट तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और लोग जमकर इसपर प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

 

04-06-2020
लॉक डाउन में पैसों की तंगी के कारण डिप्रेशन में चली गई थी यह अभिनेत्री,रखी अपनी बात..

मुंबई। बॉलीवुड से लेकर टीवी इंडस्ट्री तक में काम करने वाले कलाकार लॉक डाउन में काम नहीं मिल पाने के कारण परेशान हैं। बॉलीवुड एक्ट्रेस टिया बाजपेयी भी इन दिनों मुश्किलों से गुजर रही हैं। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति के बारे में बताया। लॉक डाउन में सुसाइड करने वाले कलाकारों के बारे में बात करते हुए उन्होंने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि लॉक डाउन से उन्हें कापी नुकसान हुआ है। लॉक डाउन के पहले सप्ताह के भीतर ही वह डिप्रेशन में चली गईं थी।  टिया ने कहा,'पैसों की तंगी के कारण जो लोग इस समय सुसाइड कर रहे हैं या जो डिप्रेशन के दौर से गुजर रहे हैं, मैं उनका दर्द समझ सकती हूं। लॉक डाउन में मेरे पास भी बिल्कुल सेविंग नहीं बची थी, सारे पैसे खर्च हो चुके थे। ऐसे में कुछ दोस्तों ने मुझे संभाला और अब मैं ऑनलाइन काम करती हूं। काम करने से मुझे राहत मिली और अब मैं खुश हूं और अपने गाने पर काम कर रही हूं। 

 

26-05-2020
डिप्रेशन के चलते टीवी अभिनेत्री प्रेक्षा मेहता ने लगाई फांसी

इंदौर। टीवी अभिनेत्री प्रेक्षा मेहता ने सोमवार रात फांसी लगाकर जान दे दी। प्रेक्षा लॉक डाउन में काम ना मिलने की वजह से परेशान थीं। अभिनेत्री प्रेक्षा मेहता क्राइम पेट्रोल और कई अन्य टीवी शोज में काम कर चुकीं है। लॉक डाउन के दौरान वो इंदौर में रह रहीं थीं। टीवी अभिनेत्री प्रेक्षा मेहता के परिवार का कहना है कि लॉक डाउन में काम ना मिलने की वजह से वो परेशान थीं। इसी से डिप्रेश होकर प्रेक्षा ने आत्महत्या जैसा बड़ा कदम उठाकर अपनी जिंदगी खत्म कर ली।
अभिनेत्री प्रेक्षा मेहता पिछले कुछ टाइम से मुंबई में टीवी सीरियल्स में काम कर रही थीं। वो क्राइम पेट्रोल के कई एपिसोड में नजर आई थीं। हालांकि लॉक डाउन होने के कारण प्रेक्षा अपने घर इंदौर आ गई थीं।एक्ट्रेस प्रेक्षा मेहता वाकई काफी परेशान थीं इस बात का अंदाजा उनके निधन से पहले डाले गए आखिरी स्टेटस से लगाया जा सकता है।

प्रेक्षा ने वाट्सऐप पर अपना आखिरी स्टेटस लिखा था- सबसे बुरा होता है सपनों का मर जाना...। जैसा कि लॉक डाउन में सीरियस की शूटिंग बंद है इस वजह से वो अपने काम को लेकर काफी परेशान थीं। फिलहाल पुलिस ने मौके पर पहुंचकर केस दर्ज कर लिया है और मामले की जांच जारी है। प्रेक्षा के पिता के मुताबिक वे तनाव में थीं और परेशान चल रही थीं। सोमवार रात उन्होंने फांसी लगाकर अपनी जान ले ली। सुबह पिता जब प्रेक्षा को उठाने के लिए गए तो उन्होंने उसे फंदे पर लटका पाया। वे तुरंत अस्पताल ले गए, लेकिन तब तक प्रेक्षा की मृत्यु हो चुकी थी। फिलहाल सुसाइड नोट नहीं मिला है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।प्रेक्षा उभरती हुई कलाकार थीं। उन्होंने कई नाटकों में अभिनय किया और पुरस्कार भी हासिल किए। उनका वीडियो अलबम भी जारी हुआ। अक्षय कुमार की फिल्म 'पैडमैन' में भी उन्हें अभिनय करने का अवसर मिला। कुछ शॉर्ट्स फिल्में भी की। प्रेक्षा 'मेरी दुर्गा' और 'नाल इश्क' जैसे टीवी धारावाहिकों में भी नजर आईं थीं। 

 

23-04-2020
श्रमिकों को दिया तनाव मुक्ति और नशे से उभरने के परामर्श

रायपुर । राजधानी रायपुर के आश्रय स्थलों में ठहरे हुए प्रवासी श्रमिकों को अवसाद, चिंता, बेचैनी और घबराहट से दूर करने के लियें नियमित रूप ज़िला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत परामर्श प्रदान किया जा रहा है ।
अब तक ज़िले के विभिन्न आश्रय स्थलों में रुके छत्तीसगढ के अलावा अन्य राज्यों के लगभग 300 से अधिक प्रवासी श्रमिकों को ज़िला मानसिक स्वास्थ्य द्वारा गठित दल के माध्यम से परामर्श दिया गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मीरा बघेल ने बताया जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत परामर्श तीन सदस्य दल का गठन किया गया है,जो नियमित रुप से प्रवासी श्रमिकों के लियें बने आश्रय स्थलों पर जा कर सेवाएं प्रदान किया जा रहा है। ज्यादातर श्रमिक लॉक डाउन की चिंता को लेकर डिप्रेशन में है।

इसमें सबसे ज्यादा घर जाने की चिंता और नशे की आदत के कारण बेचैनी और घबराहट महसूस कर रहे हैं,जिसको दूर करने के लिए विषय विशेषज्ञों द्वारा उन्हें सलाह दी जा रही है ।मनोचिकित्सक डॉ.अविनाश शुक्ला ने बताया प्रवासी श्रमिकों से सामान्य बातचीत कर उनकी समस्याओं को समझकर उन्हें उचित परामर्श दिया जा रहा है और साथ ही एक साथी को दूसरे साथी की जिम्मेदारी देकर आपसी समन्वय कर व्यवहारिक दोस्ती बनाने की बात समझाई जाती है। सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखकर आपस में अपने अपने अनुभवों को साझा करने की भी सलाह दी जा रही है ताकि आश्रय स्थलों पर स्वस्थ वातावरण बनाया जा सके। प्रवासीजनों के मानसिक स्वास्थ्य की जांच करते हुए उनमें से कुछ आश्रित जनों में अवसाद चिंता एवं मादक पदार्थों के न मिल पाने के कारण होने वाली परेशानियों की जांच की गई एवं उनको उचित परामर्श देते हुए सपोर्टिव साइकोथेरेपी,स्लीपहाइजीन और रिलैक्सेशन के बारे में बताया गया ।मनोवैज्ञानिक ममता गिरी गोस्वामी ने बताया सर्वप्रथम कोरोना वायरस के खतरे और बचाव के विषय में बताया जा रहा है।

साथ ही श्रमिकों की काउंसलिंग कर उन्हें आश्रय स्थल में साफ सफाई सोशल डिस्टेंसिंग और आपसी व्यवहारिक वातावरण बनाने की सलाह दी जा रही है। मुख्य रूप से लोगों में परिवार से मिलने के प्रति चिंता ज्यादा है,जिसको समझाइश देकर और वीडियो कॉलिंग पर बात करवा कर उनके तनाव को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।सोशल वर्कर तम्बाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ कि नेहा सोनी ने बताया ज्यादातर श्रमिक नशे की आदत के कारण बेचैनी से परेशान है। नशे की आपूर्ति न होना से भी उनको अवसाद हो रहा है।

16-04-2020
फुटबॉल-बैडमिंटन से राहत शिविर में डिप्रेशन दूर कर रहे मजदूर

नारायणपुर। लॉकडाउन के चलते छत्तीसगढ़ के सभी 28 जिलों में प्रवासी मजदूरों के लिए राहत शिविर बनाए गए हैं। स्थानीय प्रशासन के कंधों पर इन शिविरों में रहने वाले मजदूरों की पूरी जिम्मेदारी है। एक तरफ कोरोना की दहशत, दूसरी तरफ लॉकडाउन की बंदिशें, आवागमन के सभी साधन बंद और अपने घरों से दूर अजीबो गरीब माहौल में फंसे प्रवासी मजदूर। लॉकडाउन के बाद से ही नारायणपुर के पाँच राहत शिविरों में लगभग 93 मजदूर रह रहे हैं। इस दौरान डिप्रेशन से बचने के लिए फुटबॉल और बैडमिंटन सहित अन्य खेल खेलते नजर आ रहे हैं।कलेक्टर पीएस एल्मा ने बताया कि दूसरे जिलों से आये मजदूर अपने घर और घर वालों को याद करके डिप्रेशन का शिकार न हो इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम को सजग रहने कहा गया है। शासन की गाइड लाइन और नियमों का पालन करते हुए नारायणपुर में इन मजदूरों के लिए मनोरंजन की गतिविधियाँ शुरू की गई है। इसमें खेल सामग्री उपलब्ध कराई गई है। सामाजिक दूरी बना कर वे खेल कर तनाव दूर कर सकें। ऐसा ही नजारा नारायणपुर के समीप स्थित इंडोर स्टेडियम माहका में देखने को मिला। यहां तमिलनाडू, रायपुर और बेमेतरा जिले से काम करने आये मजदूर आपस में फुटबॉल खेलते नजर आए। उनसे बातचीत करने पर बेमेतरा निवासी बसंतराम साहू ने बताया कि वे 20 मार्च से इंडोर स्टेडियम में ही रूके हुए हैं। यहां जिला प्रशासन की ओर से उन्हें खाने-पीने, रहने की सुविधा के साथ-साथ मनोरंजन के लिए बैडमिंटन, फुटबॉल सहित अन्य खेल सामग्री दी गई है। खाली समय में वे सभी आपस में मिलकर सामाजिक दूरी और जिला प्रशासन की ओर से दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए अपना मनोरंजन करते हैं।शिविर में मजदूरों को यहां कोई समस्या न हो इसके लिए प्रशासन सतर्क हो गया है। बहुत से मजदूर मौजूदा हालातों को पूरी तरह समझ नहीं पा रहे हैं।

 

16-10-2019
पीएमसी बैंक घोटाला : महिला खाताधारक ने की खुदकुश़ी? पुलिस जुटी जांच में

मुंबई। पीएमसी बैंक के एक खाताधारक की दिल का दौरा पड़ने से मौत के 24 घंटे के भीतर ही एक अन्‍य महिला खाताधारक ने आत्महत्या कर ली। महिला का नाम निवेदिता बिजलानी (39) है। निवेदिता मुंबई के अंधेरी इलाके में रहती थीं और पेशे से डॉक्‍टर थीं। निवेदिता का पीएमसी बैंक में अकाउंट जरूर था लेकिन पुलिस इस मामले को पीएमसी घोटाले की वजह से आत्महत्या नहीं मान रही है। पुलिस की मानें तो निवेदिता काफी संपन्न घर से थीं और आर्थिक रूप से काफी मजबूत थीं। इस मामले की जांच कर रही वर्सोवा पुलिस के मुताबिक निवेदिता ने पीएमसी बैंक की वजह से आत्महत्या नहीं की हैं। निवेदिता ने नींद की गोलियों का ओवरडोज़ लिया था। दरअसल निवेदिता की पहली शादी साल 2001 में हुई थी। इसके बाद उनकी दूसरी शादी साल 2017 में एक अमेरिकी नागरिक से हुई थी। पहली शादी से निवेदिता को एक 17 साल की बेटी है। निवेदिता खुद एक डॉक्टर थीं और अमेरिका में प्रैक्टिस करती थीं। निवेदिता के पिता ने पुलिस को दिए गए बयान में कहा है कि मार्च 2018 में उसने अमेरिका में भी आत्महत्या करने की कोशिश की थी। उसके बाद वो डिप्रेशन का शिकार हो गई थीं। इस घटना के बाद वो भारत आकर रहने लगीं और एक डॉक्टर से डिप्रेशन का इलाज करवाने लगीं थी। 

 

21-06-2019
रिपोर्ट : बांझपन के खिलाफ हथियार बना योग, पुरुषों की क्षमता बढ़ी और महिलाओं में रुका गर्भपात

 

नई दिल्ली। योग गर्भपात को रोकने के साथ पुरुषों की प्रजनन क्षमता बढ़ाता है। साथ ही आनुवांशिक कारणों से होने वाले डिप्रेशन में एक थैरेपी की तरह काम करता है। हाल ही में योग से जुड़ी दो रिसर्च के ये नतीजे सामने आए हैं। दोनों रिसर्च में शामिल रहीं एम्स, नई दिल्ली के एनाटॉमी डिपार्टमेंट की प्रोफेसर डॉ. रीमा दादा से भास्कर ने बात की और जाना बांझपन, आनुवांशिक डिप्रेशन और रुमेटाइड आर्थराइटिस के मामलों में योग कैसे एक थैरेपी की तरह काम करता है और शोध में कौन सी नई बातें सामने आईं।

योग से इनफर्टिलिटी का संबंध जानने के लिए शोध किया गया। यह स्टडी उन महिलाओं के पतियों पर की गई, जिनका प्रेग्नेंसी के 20 सप्ताह के अंदर तीन या फिर उससे ज्यादा बार गर्भपात हो गया था। रिसर्च 30 पुरुषों पर 21 दिन तक की गई। शोध की नतीजों में चौंकाने वाले परिणाम सामने आए। नतीजों से पता चला कि पुरुष के योग और मेडिटेशन करने का सकारात्मक असर उनके खराब होते डीएनए, आरएनए, प्रोग्रेसिव मोटेलिटी (शुक्राणु) पर पड़ता है। ये ऐसे फैक्टर हैं जिसका संबंध महिलाओं की प्रेग्नेंसी से है। रिसर्च में प्रोग्रेसिव मोटेलिटी में बढ़ोतरी के साथ ही डीएनए और आरएनए में सुधार दिखाई दिया। 

शोध के दौरान चुने गए 30 पुरुषों को 21 दिन तक रोजाना 1 घंटा अलग-अलग योगासन और मेडिटेशन कराया गया। इनमें 10 आसन और 5 तरह के प्राणायाम शामिल थे। स्टडी के दौरान पुरुषों से सूर्य नमस्कार, ताड़ासन, अर्ध चक्रासन, वृक्षासन, पादहस्तासन, पश्चिमोत्तानासन, भुजंगासन, मत्यासन, कपालभाती, भ्रामरी और शवासन कराए गए थे। आसनों की मदद से स्पर्म काउंट बढ़ने पर महिला के गर्भवती होने की संभावना बढ़ी। स्टडी के बाद 7 महिलाओं ने सामान्य तरीके से स्वस्थ बच्चे को जन्म भी दिया। 

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