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16-09-2020
लॉक डाउन के दौरान 90 प्रतिशत से अधिक बच्चों को मिला मध्यान्ह भोजन का लाभ, सर्वेक्षण में छत्तीसगढ़ टॉप पर 

रायपुर। कोरोना संकट काल में भी मध्यान्ह भोजन योजना के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल रहा है। प्रदेश में लॉक डाउन के दौरान 90 प्रतिशत से अधिक बच्चों को मध्यान्ह भोजन का लाभ मिला है, जबकि इस दौरान अन्य राज्यों में मध्यान्ह भोजन वितरण की स्थिति काफी खराब रही। आक्सफैम इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार स्कूल बंद होने से देश के 27 करोड़ बच्चे प्रभावित हुए हैं, जबकि नेशनल फूड सिक्यूरिटी एक्ट 2013 के तहत मध्यान्ह भोजन प्रत्येक बच्चे का अधिकार है। लोकसभा में विगत 14 सितंबर को एक प्रश्न के उत्तर में केन्द्र सरकार ने यह माना कि, मध्यान्ह भोजन योजना के लाभ से बहुत से बच्चों को वंचित रहना पड़ा। आक्सफैम इंडिया के सर्वेक्षण में छत्तीसगढ़ का देश में सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा है। छत्तीसगढ़ में 90 प्रतिशत से अधिक बच्चों को मध्यान्ह भोजन योजना का लाभ मिला है।

जबकि उत्तर प्रदेश में 92 प्रतिशत बच्चों को मध्यान्ह भोजन से वंचित रहे। सर्वेक्षण में यह भी बताया गया है कि, उत्तर प्रदेश में जहां खाद्यान्न सुरक्षा भत्ता प्रदान करने पर ध्यान केन्द्रित किया गया। छत्तीसगढ़ में राशन की होम डिलिवरी पर ध्यान केन्द्रित किया गया। लॉक डाउन के दौरान पिछले मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में स्कूलों के बंद होने के बीच मध्यान्ह भोजन की आपूर्ति तय करने के निर्देश दिए थे। इसके तारतम्य में छत्तीसगढ़ ने तत्काल कदम उठाते हुए स्कूली बच्चों को स्कूलों और बच्चों के घरों तक पहुंचाकर मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराने के इंतजाम किए। 

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 21 मार्च को सभी कलेक्टरों और जिला शिक्षा अधिकारियों मध्यान्ह भोजन योजना के तहत स्कूली बच्चों को सूखा राशन वितरण के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए थे। गांव-गांव में इसकी मुनादी कराई गई। देश के अन्य राज्यों में सूखा राशन वितरण की प्रक्रिया काफी बाद में शुरू कराई गई। छत्तीसगढ़ में लॉक डाउन के पहले 40 दिनों के लिए स्कूली बच्चों को सूखा राशन दिया गया। इसके बाद एक मई से 15 जून तक 45 दिनों के लिए, 16 जून से 10 अगस्त तक 45 दिन का सूखा राशन वितरित किया गया। इस प्रकार अब तक 130 दिन का सूखा राशन वितरण किया जा चुका है। इस योजना से राज्य के लगभग 43 हजार स्कूलों में 29 लाख बच्चों को मध्यान्ह भोजन योजना के तहत सूखा राशन वितरण से लाभ मिला है। मध्यान्ह भोजन योजना के तहत सूखा राशन के घर-घर वितरण की व्यवस्था स्कूल शिक्षा विभाग के माध्यम से किया गया।

वितरित किए गए सूखा राशन पैकेट में चावल, तेल, सोयाबीन, दाल, नमक और अचार शामिल हैं। राज्य सरकार ने स्थानीय स्तर पर स्कूली बच्चों और पालकों की सुविधा को देखते हुए यह व्यवस्था भी की गई कि, यदि माता-पिता पैकेट लेने के लिए स्कूल नहीं जा सकते हैं तो स्व-सहायता समूह और स्कूल स्टाफ के माध्यम से घर घर जाकर सूखा राशन के पैकेटों की होम डिलवरी की जाए। खाद्य सुरक्षा भत्ता के रूप में बच्चों को सूखा चावल और कुकिंग कास्ट की राशि से अन्य आवश्यक सामग्री दाल, तेल, सूखी सब्जी इत्यादि वितरित की गई। मध्यान्ह भोजन योजना की गाइडलाइन के अनुसार कक्षा पहलीं से आठवीं तक के उन बच्चों को जिनका नाम शासकीय शाला, अनुदान प्राप्त अशासकीय शाला अथवा मदरसा-मकतब में दर्ज है, उन्हें मध्यान्ह भोजन दिया गया।

15-09-2020
संसद में दूसरे दिन उठा फिल्म इंडस्ट्री का मुद्दा, जया बच्चन ने सरकार से लगाई गुहार

नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन ने संसद के मॉनसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को राज्यसभा में कहा कि फिल्म इंडस्ट्री एक बुरे दौर से गुजर रही है। लेकिन सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है। सांसद जया बच्चन ने कहा कि बॉलीवुड को बदनाम करने की साजिश की जा रही है। कोरोना संकट के दौर में हो रहे संसद के सत्र में आज पहले राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई। सांसद जया बच्चन ने 'फिल्म इंडस्ट्री को बदनाम करने की कथित साजिश' को लेकर राज्यसभा में शून्यकाल नोटिस दिया। उन्होंने बॉलीवुड इंडस्ट्री का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस जगत को बदनाम करने की साजिश हो रही है और को सरकार हमारे समर्थन में आना चाहिए।

जिन लोगों ने फिल्म इंडस्ट्री में अपना नाम बनाया है उन्होंने इसे गटर बुलाया, मैं पूरी तरह इससे असहमत हूं। मैं उम्मीद करती हूं कि सरकार इन लोगों को बताए जिन्होंने इससे अपना नाम और प्रसिद्धि कमाई कि ऐसी भाषा का इस्तेमाल करना बंद करें। जया बच्चन ने कहा कि मैं बहुत शर्मिंदा थी कि कल हमारे एक सांसद ने लोकसभा में फिल्म इंडस्ट्री के खिलाफ बोला, जो खुद इंडस्ट्री से हैं। ये शर्म की बात है, 'जिस थाली में खाते हैं उसमें छेद करते हैं।' गलत बात है, इंडस्ट्री को सरकार का समर्थन चाहिए।

12-09-2020
जेईई मेन परीक्षा में सफलता हासिल कर विद्यार्थियों ने जिले का बढ़ाया गौरव   

बीजपुर। जिला प्रशासन बीजापुर द्वारा संचालित महत्वाकंक्षीय परियोजना छू लो आसमान कोचिंग संस्था ने कोरोना संकट काल में भी प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी प्रतियोगी परीक्षा में उत्कृष्ट परिणाम देते हुए जिले का गौरव बढ़ाया है। राष्ट्रीय स्तर के आयोजित प्रवेश परीक्षा जेईई मेन 2020 का परिणाम 11 सितंबर को घोषित किया गया। इसमें संस्था के 33% विद्यार्थीयों ने क्वालीफाई किया। इस परीक्षा में संस्था के कक्षा बारहवीं, गणित संकाय के अध्ययनरत 10 विद्यार्थी शामिल हुए थे। इसमें 3 विद्यार्थी भार्गव साहू, मुरलीधर कावटी और हंसा मारपल्ली ने कामयाबी हासिल की है। अवगत हो कि यह परीक्षा केंद्र सरकार की राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा प्रतिवर्ष में दो बार जनवरी माह तथा अप्रैल माह में आयोजित कराई जाती है।

कोविड 19 महामारी के कारण अप्रैल माह की परीक्षा को तिथि को आगे बढ़ाकर इसी माह के 1 से 6 सितंबर को आयोजित किया गया था। कोरोना महामारी की मार छात्र मुरलीधर कावटी को झेलनी पड़ी जो सितंबर माह की परीक्षा देने जाने के लिए रायपुर के लिए निकला तो जरूर था, पर कोरोना पॉजिटिव होने के कारण परीक्षा देने से वंचित हो कर बीच रस्ते से वापस आना पड़ा तथा इसका परिणाम केवल जनवरी माह के परीक्षा के आधार पर घोषित किया गया अन्यथा छात्र को और बेहतर परिणाम की अपेक्षा थी। संस्था के प्राचार्य अंगनपल्ली बसमैया द्वारा चयनित विद्यार्थियों तथा शिक्षकगणों को सफलता के लिए बधाई देते हुए बताया कि, संस्था, आदिवासी अंचल के अभावग्रस्त दूर-दराज गांव के होनहार बच्चों के सपनों को पंख देने के उद्देश्य से संचालित किया जाता है।

जंहा राष्ट्रीय व राजकीय स्तर के विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के साथ-साथ शैक्षणिक पढ़ाई कराई जाती है। यंहा कक्षा नौवीं से 12वीं की कक्षाएं लगाई जाती है। साथ ही इस परियोजना व अन्य शिक्षा क्षेत्र में कार्यो के लिए जिला शिक्षा अधिकारी व जिला प्रशासन की सरहाना की हैं। प्राचार्य यह भी जानकारी दी कि अभी संस्था में आठ विषय-विशेषज्ञों की कार्यकुशल समूह में गुंजन सिंह (बायो), रामहरि साहू (गणित), दिग्विजय साहू (गणित), कुलदीप कुमार (रसायन), अजय कुमार वर्मा (भौतिकी), हेमंत साहू (भौतिकी), अनिल शर्मा (अंग्रेजी), तथा हेमचंद जंघेल (हिंदी) कार्यरत है, जिनकी उचित मार्गदर्शन से बच्चों का सर्वांगीण विकास हो रहा है।

06-09-2020
ऑनलाइन प्रतियोगिता के जरिए लोगों को जोड़ा संगीत से ताकि दूर रहे डिप्रेशन,वायएमएस यूथ फाउंडेशन के नतीजे घोषित

रायपुर। कोरोना संकट के बीच समाज में नकारात्मक को दूर करते हुए लोगों को रचनात्मकता से जोड़ने का प्रयास वायएएमएस यूथ फाउंडेशन ने किया। वायएमएस फाउंडेशन के अध्यक्ष बॉबी सिंह होरा रविवार को ऑनलाइन सिंगिंग स्टार प्रतियोगिता के विजेताओं की घोषणा की गई। वर्चुअली आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंस में प्रदेश के कई जिलों से लोग जुड़े। करीब 1 महीने तक प्रतिभागियों ने अपने सिंगिंग टैलेंट के वीडियो वायएमएस टीम को भेजे। फाउंडेशन के उपाध्यक्ष डॉ.यूसुफ मेमन ने बताया कि इस प्रतियोगिता में कुल 310 लोगों ने भाग लिया और 14 लोग प्रतियोगिता के विजेता रहे।
संस्था के सिद्धार्थ पारेख ,सुरेश छाबड़ा ने बताया कि ऑनलाइन आयोजित इस प्रतियोगिता से ना सिर्फ नए कलाकारों को मंच मिला बल्कि लोगों का तनाव दूर करते हुए एक मजेदार एक्टिविटी से उन्हें जोड़ा गया। कार्यक्रम का संचालन अमित जैन,महेंद्र सिंह होरा,अशोक श्रीवास्तव और जशवीर सिंह होरा ने किया।  प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल में पद्मश्री मदन मोहन, राग एकेडमी की विभागाध्यक्ष जयश्री एवं गुरुकुल संगीत एकेडमी के डायरेक्टर संजय गीजरे थे।

इन लोगों ने जीती प्रतियोगिता
1 से 10 वर्ष की आयु कैटेगिरी में प्रथम अब्दुल राजिक खान, द्वितीय पुरस्कार के विजेता रहे हार्दिक जैन, तृतीय पुरस्कार के विजेता रही अलीना परसाई।
11 से 20 वर्ष की आयु कैटेगिरी में प्रथम अनिंदया सक्सेना,द्वितीय पुरस्कार के विजेता रहे अमृतांश श्रीवास्तव, तृतीय पुरस्कार के विजेता रहे अंकिता दुबे।
21 से 40 वर्ष की आयु  कैटेगिरी में प्रथम अनुभव भारती, द्वितीय अभिनव तिवारी, तृतीय पुरस्कार की विजेता रहीं अदिति भटनागर।
41 से 60 वर्ष की आयु कैटेगिरी में प्रथम जितेंद्र गजेन्द्र ,द्वितीय पुरस्कार की विजेता रहीं शीतल जैन,तृतीय पुरस्कार के विजेता रहे डॉ.संजय लालवानी।
61 से 80 वर्ष की आयु कैटेगिरी में भिकी बाई लुंकड (धमतरी) और डॉ.कृष्णकांत दुबे विजेता रहे।

 

05-09-2020
बृजमोहन अग्रवाल ने बढ़ते कोरोना संकट के संबंध में मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से की चर्चा, पत्र लिखकर दिए सुझाव

रायपुर। भाजपा विधायक व पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने रायपुर में बढ़ते कोरोना संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री व अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य से चर्चा की।  उन्होंने तत्काल आवश्यक कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कुछ  सुझाव भी दिए हैं। इससे प्रदेश भर में मरीजों के इलाज के लिए बिस्तरों की कमी को दूर किया जा सके और सक्रंमण को रोका जा सकें। अग्रवाल ने पत्र में कहा है कि,राजधानी सहित पूरे छत्तीसगढ़ में कोविड-19 ने अपना पैर पसरा लिया है। दिन ब दिन कोविड-19 पर नियंत्रण के बजाए ये स्थिति भयावह और विकराल होते जा रही है। मरीजों की संख्या में लगातार गुणात्मक वृद्धि होती जा रही है, तो वहीं मौत का आंकड़ा भी रूकने का नाम नहीं ले रहा है। कोविड-19 के मरीज अब अस्पतालों में बेड न होने के कारण इलाज के लिए भटक रहे हैं। अब तो कोविड-19 को रोकने के लिए अभियान में लगे शासकीय कर्मचारी/अधिकारी भी कोविड-19 से पीड़ित होकर अपनी जान गवा रहे हैं। बृजमोहन अग्रवाल ने रायपुर सहित छत्तीसगढ़ में बढ़ रहे भयावह कोविड-19 के मरीजों को देखते हुए उनके दिए बिन्दुओं के साथ अन्य विषयों पर तत्काल कदम उठाने की मांग की है।
पत्र के माध्यम से बृजमोहन दिए ये सुझाव : 
(1) रायपुर में 500 बिस्तर कर 1 विशेष कोविड-19 हॉस्पिटल निर्माण करने का निर्णय लिया गया था, मेरी जानकारी में रिम्स मेडिकल कॉलेज/ हॉस्पिटल परिसर को ही अस्पताल बनाना था, जिसे बाद में प्राइवेट कॉलेज/हॉस्पिटल होने के कारण खर्च करने के निर्णय को वापस ले लिया गया था। इस कॉलेज/ हॉस्पिटल में पूरा इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्मित, मौजूद है।  तुरंत निर्माण किया जाना चाहिए,जिससे रायपुर के लोगों को 500 बिस्तर की सुविधा तत्काल मिल सकेंगी।
(2) रायपुर के अलावा दुर्ग, भिलाई, राजनांदगांव, रायगढ़, बिलासपुर, कोरबा, अंबिकापुर, जगदलपुर जैसे बड़े-बड़े शहरों सर्वसुविधा युक्त नर्सिंग होम, सुपर स्पेशलिटी  अस्पताल उपलब्ध है, जहां पर आॅक्सीजन और वैंटिलेंटर की सुविधाएं भी उपलब्ध है। ऐसे अस्पतालों से तत्काल बातचीत कर एक निर्धारित रेत में कोरोना मरीजों के ईलाज के लिए इन्हें अनुमति दी जाए, जिससे राजधानी रायपुर के अस्पतालों में पड़ने वाली भार को कम किया जा सके। 
(3) प्रदेश में जितने छोटे सुपर स्पेशलिटी  हॉस्पिटल या नर्सिंग होम है,जहां 25 बेड से अधिक की सुविधा आक्सीजन सहित है, जहां पर 2000-3000 से 5000 रुपए तक की प्रतिदिन में इलाज की सुविधा उपलब्ध हो सकती है। उन सभी अस्पतालों में शासकीय खर्च पर कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज करवाया जाए व पूरा खर्च राज्य सरकार की ओर से वहन किया जाएं। देश के अनेक राज्यों ऐसी व्यवस्थाएं की गई है। अगर ऐसी व्यवस्थाएं कर दी जाती है तो गंभीर किस्म के मरीजों के लिए अस्पतालों में बिस्तर की कमी नही होगी। 
(4) रायपुर और प्रदेश के अन्य बड़े शहरों में स्थिति 25 कमरे से अधिक के धर्मशाला, सार्वजनिक भवन, सामाजिक भवनों को भी समाजो/ट्रस्टों से चर्चा कर अधिग्रहित किया जाना चाहिए। इसमें सम्पुर्ण व्यवस्था कर  ए सिम्टम्स मरीजों को जिसमें किसी प्रकार के लक्षण नहीं दिख रहे है। उनकों वहां पर आइसोलेट/क्वारांटिन किया जाना चाहिए। इससे जिनके घरों में सुविधा नहीं ह,उन सब मरीजों को इन स्थानों पर लाकर रखकर इलाज किया जा सके व संक्रमण को बड़ने से रोका जा सकें।
(5) बहुत से राज्यों ने व्यापक स्तर पर इसके बचाव के लिए दवाईयां/ काढ़ा/आयुर्वेदिक-होम्योपेथिक/इन्जेक्शन बड़े स्तर पर वितरण भी किया है। छत्तीसगढ़ में भी उन शहरों में जहां कोरोना के प्रकरण भारी संख्या में निकल रहे है। वहाँ पर इस प्रकारण का वितरण का अभियान चलाया जाना चाहिए। 
(6) सभी शासकीय जिला अस्पतलों/प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के साथ ही निजी छोटे अस्पतालों को भी मास्क, हेंड ग्लब्स, पी.पी.ई.किट, सेनेटाईजर व कोडिव-19 के मरीजों से संबंधित दवाएं भी उपलब्ध कराए जाएं, जिससे की प्रारंभिक रूप से प्रारंभिक लक्षण वाले मरीजों को वे दवाएं दे सके और देख सकें।
(7) प्रदेश के स्वास्थ्य कर्मियों को एम्स और अन्य  हॉस्पिटलों के विशेषज्ञों से आनलाईन ट्रेनिंग की व्यवस्था की जानी चाहिए,जिससे वे भी अपने स्तर पर सावधानी पूर्वक लोगो के इलाज में हाथ बटा सकें।

 

 

 

03-09-2020
आंगनबाड़ी खोलने के आदेश ने बढ़ाई चिंता, कैसे बच्चों को कराएंगे नियमों का पालन, कार्यकर्ता और सहायिकाएं हैरान

महासमुंद। कोरोना संकट के बीच आंगनबाड़ी खोलने के आदेश से कार्यकताओं की चिंता बढ़ गई है। दरअसल बच्चों को स्थास्थ्य एवं पोषण दिवस के लिए गरम भोजन प्रदान करने केन्द्र खोले जाने के आदेश के बाद से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। जिले में लगातार कोरोना के केस में दिन प्रतिदिन बढ़ोत्तरी हो रही है। कलेक्टर कार्यालय के डिप्टी कलेक्टर, अपर कलेक्टर कोरोना संक्रमित हो गए हैं। महासमुन्द के विधायक व संसदीय सचिव भी चपेट में आ गए हैं। बावजूद इसके आंगनबाड़ी केन्द्र में गरम भोजन प्रदाय करने बच्चों का हुजुम लगाना कहा तक उचित होगा। शासन के आदेश में हालांकि कहा गया है कि, आंगनबाड़ी केन्द्र को खोलने से पूर्व सेनेटाइज किया जाएगा। कंटेनमेंट जोन में आने वाले केन्द्र को बंद रखा जाएगा।

भोजन पकाने के बर्तनों को उपयुक्त  पाउडर और गरम पानी से साफ कराया जाएगा। भोजन परोसते समय थाली में पत्तल, केला पत्ता रखा जाएगा। एक समय में 15 से अधिक व्यक्ति भवन में नहीं होंगे। हितग्राहियों के मध्य 6 फीट की दूरी होगी। बच्चों को मास्क पहनने के संबंध में भारत सरकार के दिशा निर्देश का पालन किया जाएगा इत्यादि। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि, कोविड के बावजूद कार्यकर्ता लगातार काम कर रही हैं। घर-घर पहुंच कर गर्भवती महिलाओं को दवाईयां खिलाई जा रही है। साथ ही आंगनबाड़ी में दर्ज बच्चों को घर तक रेडी टू इट पहुंचाया जा रहा है। जब से कोविड-19 की शुरुआत हुई,तब से लेकर अब तक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता लगातार काम कर रही है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानना है कि, केन्द्र में पहुंचने वाले बच्चे 6 साल तक के होते हैं और बच्चों में इस बात का बिलकुल भी ज्ञान नहीं है कि, वह सोशल और फिजिकल डिस्टेंस का पालन कर सकें। वर्तमान में कोरोना का प्रकोप बढ़ता चला जा रहा है। बावजूद इसके आंगनबाड़ी की महिलाएं काम कर रही है। 7 सितम्बर से केन्द्र खोले जाने के बाद बच्चे एक दूसरे के सम्पर्क में आएंगे और कोरोना का खतरा बड़ जाएगा।

कार्यकर्ताओं का कहना है कि,सरकार एक तरफ बच्चों और बजुर्गों को घर में रहने की सलाह दे रही है और एक तरफ स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस और गरम भोजन प्रदान करने के लिए आंगनबाड़ी केन्द्र खोलने के आदेश जारी करता है।  सरकार के आदेश के बाद से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर रोष देखा जा रहा है। हालांकि अभी तक कार्यकर्ताओं ने इस विषय पर शासन प्रशासन के सामने अपना विरोध दर्ज नहीं कराया है, लेकिन आने वाले दिनों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रणनीति तैयार कर पूरे प्रदेश में इसका विरोध कर सकती हैं। यह बात तो एकदम साफ है कि, कोरोना किसी भी उम्र के व्यक्ति को संक्रमित कर सकता है। यह वायरस बच्चों और बुजुर्गों के लिए अधिक खतरनाक माना जा रहा है क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता युवाओं से कम होती है। आदेश की कॉपी देखने के लिए यहां क्लिक करें...

 

30-08-2020
भाजपा ने जांच रिपोर्ट की सत्यता पर उठाया सवाल,शिवरतन ने कहा-घोर लापरवाही और मनमर्जी चल रही

रायपुर। प्रदेश में बढ़ते कोरोना संकट के बीच भाजपा प्रवक्ता शिवरतन शर्मा व भाजपा नेता अमित चिमनानी ने रविवार को ऑनलाइन पत्रकारवार्ता ली। शिवरतन शर्मा ने कहा है कि एक तरफ जहां निजी अस्पताल मनमानी वसूली कर रहे हैं। साथ ही  जांच सेंटर 7-7 दिन में भी रिपोर्ट नहीं दे रहे। कोरोना में जांच रिपोर्ट का जल्द से जल्द आना बहुत जरूरी है, नहीं तो रिपोर्ट आते तक कोरोना मरीज न जाने कितनों को संक्रमण फैला चुका होता है, ये पता ही नहीं चलता। शर्मा ने कहा कि जांच रिपोर्ट देर से मिलना ही अपने आप में कोरोना को मदद करने जैसा है। लगातार ऐसी खबरें आने के बाद भी सरकार ने प्राइवेट लैब्स पर कोई नियंत्रण नहीं रखा है।
अमित चिमनानी ने कहा है कि, प्राइवेट लैब्स में घोर लापरवाही सामने आई है। इससे प्राइवेट लैब्स की ओर से दी जाने वाली रिपोर्ट्स की सत्यता पर ही संदेह हो चला है। उन्होंने अपना अनुभव बताते हुए कहा कि, चिमनानी का भतीजा, जिसकी जांच रिपोर्ट आई है, उसकी उम्र 14 वर्ष है। उसके नाम के अलावा बाकी सारी जानकारियां रिपोर्ट और फॉर्म में गलत है। जैसे उम्र रिपोर्ट में  56 वर्ष लिखी है, जबकि 14 वर्ष। सैम्पल लेने की तारीख 28 अगस्त लिखी है,जबकि सैंपल 24 तारीख को लिया गया था। पता सूरजपुर लिखा गया है व आधार नंबर भी गलत है। चिमनानी ने पूछा है कि ऐसी रिपोर्ट्स से कोरोना कैसे कंट्रोल होगा। नेगेटिव को पॉजिटिव बता देने से मरीज और उनका परिवार परेशान होगा। साथ ही लाखों रुपए खर्च भी होते हैं। इसी तरह पॉजिÞटिव को नेगेटिव बताया तो संक्रमण तेज गति से औरों में भी फैलेगा।कुल मिलाकर ऐसी संकट के समय इस प्रकार की लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। दुर्भाग्य है कि, सरकार का कोई नियंत्रण इन प्राइवेट जांच केंद्रों में नहीं है। नेताद्वय ने शासन से आग्रह किया कि शासन की ओर से किए जा रहे तमाम आवश्यक-अनावश्यक कार्यों को छोड़ कर, कोरोना के खिलाफ लड़ाई को सर्वोच्च प्राथमिकता दे। अन्यथा यह वैश्विक महामारी छत्तीसगढ़ में और ज्यादा बेकाबू हो जायेगी।

24-08-2020
धमतरी साउंड एवं लाइट एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

धमतरी। कोरोना संक्रमण के कारण डीजे, साउंड, डेकोरेशन सहित कलाकरों के कामकाज पूरी तरह से ठप पड़े हुए है। काम बंद होने से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर हो चुकी है। वही अनलॉक के दौरान मन्दिर से लेकर समारोह के लिए परमिशन दिया गया है। लेकिन कार्यक्रम में डीजे, साउंड, डेकोरेशन सहित कलाकरों के लिए अब भी प्रतिबंध लगा हुआ है। इससे परेशान डीजे, साउंड, डेकोरेशन सहित कलाकर संघ ने रैली निकालकर शासन-प्रसाशन से डीजे, साउंड, डेकोरेशन सहित कलाकरों के काम शुरू करने की मांग की है। धमतरी साउंड एवं लाइट एसोसिएशन के सदस्यों ने बताया कि कोरोना संकट के चलते विगत पांच माह से लाइट एवं साउंड कार्य पूरी तरह से बंद है। इससे उन्हें अब परिवार के भरण पोषण करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अधिकांश साउंड एवं लाइट आपरेटर लोन लेकर कार्य शुरू किये है। लेकिन लंबे समय से लाइट तथा साउंड कार्यों का संचालन बंद होने से वे समय पर ऋण नहीं पटा पा रहे हैं। वही पूर्व में कई बार अपनी समस्या को लेकर ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री, सांसद, विधायक एवं कलेक्टर को अवगत कराया गया था, लेकिन अभी तक सरकार और शासन द्वारा कोई पहल नहीं किए गया। इसको लेकर आज घड़ी चौक से कलेक्ट्रेट परिसर तक रैली निकालकर मुख्यमंत्री एवं जिले के कलेक्टर के नाम से ज्ञापन सौंपा गया।

23-08-2020
जन्मदिन पर भूपेश बघेल ने राजधानीवासियों को दिया रिटर्न गिफ्ट,कोरोना संकट में साबित होगा फायदेमंद

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रविवार को अपने जन्मदिवस पर मानों राजधानीवासियों को रिटर्न गिफ्ट दिया है। उन्होंने नगर निगम रायपुर की अत्याधुनिक चिकित्सीय सुविधाओं से युक्त एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर लोकार्पित किया। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा है कि, यह अत्याधुनिक एम्बुलेंस कोरोना संकट के इस दौर में प्रदेशवासियों के लिए हितकारी होगी। रायपुर नगर निगम की ओर से वाहन का क्रय पुणे स्थित फोर्स कंपनी से किया गया है। इसकी कीमत लगभग 16 लाख 25 हजार रुपए है। यह एम्बुलेंस अत्याधुनिक चिकित्सीय सुविधाओं से युक्त है। यह पहला ऐसा पूर्णत: वातानुकूलित एम्बुलेंस है, जिसमें वेंटिलेटर की भी सुविधा उपलब्ध है। एम्बुलेंस में लगा आटोमैटिक स्ट्रैचर आवश्यकतानुसार बिस्तर में भी परिवर्तित किया जा सकता है। आकार में बड़ा होने के कारण गंभीर अवस्था वाले मरीजों की देखरेख के लिए परिजन भी इस एम्बुलेंस में सहजता से आ सकते हैं। इस दौरान कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, उद्योग मंत्री कवासी लखमा, छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष कुलदीप जुनेजा, महापौर एजाज ढेबर, सभापति प्रमोद दुबे और जिला प्रशासन और नगर निगम के अधिकारी उपस्थित थे।

21-08-2020
कोरोना संकट: कलेक्टर ने कहा, जन जागरूकता से ही इस जंग में मिलेगी कामयाबी  

कोरिया। कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए कलेक्टर एसएन राठौर ने कलेक्टर निवास कार्यालय में एसडीएम बैकुंठपुर, सीएमचओ एवं एसईसीएल के जीएम  के साथ बैठक कर अग्रिम तैयारियां रखने के संबंध में चर्चा की। कलेक्टर राठौर ने बैठक में कहा कि शिवपुर-चरचा में कोरोना के बढ़ते केस को देखते हुए ज़रूरी व्यवस्था का विस्तार करना होगा। उन्होंने कहा कि इस स्थिति से निपटने के लिए पूर्व तैयारी बेहद ज़रूरी है। पूर्व तैयारी का ही परिणाम है कि चरचा में कोविड हॉस्पिटल की शुरुआत हो गई है। यहां पॉजिटिव मरीजों का इलाज भी किया जा रहा है। उन्होंने सीएमएचओ से बैकुंठपुर एवं चरचा क्षेत्र में कार्यरत मेडिकल स्टॉफ के लिए संबंधित क्षेत्रों में ही रुकने की व्यवस्था कराने पर चर्चा की। सीएमएचओ ने चरचा कॉलरी में कर्मचारियों की रैंडम सैंपलिंग कराने का सुझाव दिया,जिससे संक्रमण की समय रहते पहचान की जा सके। इसके साथ ही कलेक्टर ने एसईसीएल के हॉस्पिटल एवं गेस्ट हाउस को भी तैयार रखने पर जीएम से चर्चा की। उन्होंने एसडीएम बैकुंठपुर से लोगों द्वारा कड़ाई से नियमों का पालन कराने के निर्देश दिये एवं सतत निगरानी बनाये रखने को कहा। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर नये आइसोलेशन सेंटर बनाये जाने की पूर्व तैयारी रखने के भी निर्देश दिये। कलेक्टर राठौर ने जनता से अपील की है कि कोविड-19 संबंधी बचाव नियमों का पालन ज़रूर करें। मास्क पहनें, सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें तथा बार-बार हैंडवाश करते रहे। सार्वजनिक स्थानों पर जाने से बचें। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए प्रशासन का सहयोग करें। आपसी सहभागिता और जागरूकता से हम इस जंग में ज़रूर कामयाब होंगे।

 

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