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11-01-2021
जब छात्र को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दोस्त की तरह दिया जवाब-कुछ दिन रुको यार.

रायपुर। कोरोना के साये में वर्ष 2020 को हमने अलविदा कह दिया। 2021 का स्वागत भी हो गया, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। कोरोना का खतरा अब भी चारों तरफ मंडरा रहा है। ऐसा कोई क्षेत्र न होगा, जो प्रभावित नहीं हुआ हो। बच्चों की पढ़ाई से लेकर बड़ों की कमाई पर असर पड़ा है। इस बीच सोमवार को एक छात्र ने सीधा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को ही ट्वीट कर सवाल पूछा। सवाल का जवाब भी मुख्यमंत्री ने एक दोस्त की तरह ही दिया। दरअसल छात्र ने पूछा कि स्कूल कब से खुलेगी सर ? मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जवाब दिया- कुछ दिन रुको यार। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी छात्र को जवाब देते हुए ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा है कि कुछ दिन रुको यार। अभी कोरोना संकट खत्म नहीं हुआ, घर पर पढ़ाई करो, सब की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हम निर्णय लेंगे।

31-12-2020
नववर्ष पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दी बधाई और प्रदेशवासियों की खुशहाली सुख समृद्धि की कामना की

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेशवासियों को नववर्ष की शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा है कि नया वर्ष सभी लोगों के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली लाए। मुख्यमंत्री बघेल ने आज यहां जारी अपने शुभकामना संदेश में कहा है कि राज्य सरकार किसानों, मजदूरों, गरीबों, युवाओं, महिलाओं सहित सभी वर्गों के हित में कार्य कर रही है। नई सरकार ने कोरोना संकट के बावजूद उद्योग, कृषि के क्षेत्र की रफ्तार कम नहीं होने दी। राज्य सरकार के फैसलों से छत्तीसगढ़ के विकास का पहिया गतिमान रहा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए सुराजी गांव योजना, राजीव गांधी किसान न्याय योजना, गोधन न्याय योजना प्रारंभ की गई है, जिनका सकारात्मक असर दिख रहा है। विगत दो वर्षो में छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी दर को नियंत्रित रखने में सफलता मिली। उद्योग और व्यापार जगत में भी अच्छा वातावरण निर्मित हुआ है। छत्तीसगढ़ को इस अवधि में अनेक क्षेत्रों में राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया है। बघेल ने छत्तीसगढ़ के पूर्वजों की परिकल्पना के अनुरूप अपनी गौरवशाली परम्परा और पहचान को कायम रखते हुए प्रदेश को विकसित और समृद्ध राज्य बनाने के लिए सभी नागरिकों से गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ के सपने को साकार करने के लिए सक्रिय सहयोग का आव्हान किया है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सभी लोगों के लिए मंगलकामना की है।
 

29-12-2020
लघु वनोपज खरीदी से स्व-सहायता समूहों को मिला रोजगार, हो रही आर्थिक स्थिति मजबूत

नारायणपुर। जिले की महिलाओं को सशक्त करने तथा ग्रामीणों को लघु वनोपज का वाजिब दाम दिलाने के लिए सरकार की ओर से महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से लघु वनोपज की खरीदी की जा रही है। इस व्यवस्था से महिलाओं को रोजगार उपलब्ध हो रहा है। साथ ही संग्राहकों को भी फायदा हो रहा है। नोवल कोरोना वायरस के संक्रमण सेे रोकथाम के लिए लगाए गए लॉक डाउन के दौरान लघु वनोपज की खरीदी से ग्रामीणों को जीवन-यापन के लिए बहुत बड़ा सहारा मिला और वे अपनी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा कर सके। कोरोना संकट के समय में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए महिला स्व सहायता समूह के हजारों महिलाओं के माध्यम से संग्राहकों के घर-घर जाकर निर्धारित मानकों का पालन करते हुए कोरोना संकट के समय भी वनोपज की खरीदी की गई।

खरीदी के समय ही वनोपज का नकद भुगतान संग्राहकों को किया गया। जिले के 7 प्राथमिक वनोपज सहकारी समिति के माध्यम से ग्राम स्तर के संग्रहण केन्द्र तथा हॉट-बाजारों के संग्रहण केन्द्रों और वनधन केन्द्रों में महिला स्व-सहायता समूह द्वारा हर्रा, बेहड़ा, इमली, चिरौंजी, आँवला, साल, चरोटा सहित अन्य वनोपजों की 21 हजार 468 क्विंटल खरीदी की गई। इसके एवज में 26 हजार 756 वनोपज संग्राहकों को 5 करोड़ 93 लाख रुपए का भुगतान किया गया। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से लघु वनोपज की खरीदी व्यवस्था से शुरू होने से महिलाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। इससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है।

पीयूष मंडल की रिपोर्ट

23-12-2020
बैंक सखियों के माध्यम से लाकडाउन से अब तक 20 करोड़ 80 लाख का हुआ बैंकिंग लेन देन

रायपुर/कोण्डागांव। बैंकिंग सेवाएं आज हर व्यक्ति के जीवन के अनिवार्य हिस्से में शामिल है और तो और बैंकिंग सेवाओं का विस्तार अब सुदूर बसे गांव गांव में किया जा रहा है ताकि अंतिम छोर में बसे ग्रामीणों को उनके घर के नजदीक ही बैंकिंग सुविधा मुहैया कराई जा सके और इस कार्य में बैंक सखियां बखूबी अपने कार्य को अंजाम दे रहीं है।

बैंक सखी की अवधारणा
कुल मिलाकर बैंक सखी की अवधारणा मूलतः इस बात पर आधारित है कि ग्रामीणों के बीच बैंकिंग लेन देन सरल बने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई गति प्राप्त हो सके। आर्थिक गतिविधियों को सुदृढ़ बनाना इसका प्रमुख उद्देश्य है। इसमें भी महिलाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बनाने के स्व सहायता समूह को जोड़ा गया हैए ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनकर सक्षम बने। जिले में आज भी ऐसे दूरस्थ क्षेत्र हैं जहां ग्रामीणों को बैंक संबंधी छोटे बड़े कार्य के लिए अक्सर मुख्यालयों में आना पड़ता है और इस आने जाने में दिक्कत होना स्वाभाविक है। इस परिस्थिति में बैंक सखी का कॉन्सेप्ट ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हो रहा है। बैंक सखी के लिए ग्रामीण क्षेत्रों की न्यूनतम पढ़ी लिखी महिलाओं का चयन किया जाता है, जिन्हें कम्प्यूटर, लैपटॉप पर बैंक संबंधी सामान्य जानकारी से प्रशिक्षित कर उन्हें बैंकों के माध्यम से एक निश्चित राशि उपलब्ध कराई जाती है और पीओएस के माध्यम से आधारकार्ड के माध्यम से अपने सामान्य आर्थिक जरूरत की राशि त्वरित प्राप्त कर सकते हैं और हर ट्रान्जेक्शन पर बैंक सखियों को एक निर्धारित राशि प्राप्त होती है।

आर्थिक सम्बल साबित हुआ महिलाओं के लिए

कोण्डागांव जिले में कुल 66 बैंक सखियां ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत् है। यह ऐसी ग्रामीण महिलाओं के लिए लाभदायक सिद्ध हुआ,जो शैक्षणिक योग्यता हासिल करने के बाद भी सिर्फ घर गृहस्थी में ही व्यस्त थीं और खेती किसानी करके परिवार का हाथ बटा रहीं थीं। विकासखण्ड बड़ेराजपुर के ग्राम भगदेवा की 35 वर्षीय चंद्रकुमारी यादव ने बताया कि उनके परिवार में सास ससुर और पति सहित तीन साल का पुत्र है, स्नातक होने के बावजूद उन्होंने नौकरी के लिए प्रयास किया था अंत में वर्ष 2018 में वे प्रगति स्व सहायता समूह की सदस्य बनी और छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक के माध्यम से बैंक सखी के रूप में कार्य करना शुरू किया। चूंकि वे पहले से ही कम्प्यूटर साक्षर थीं अतः इस कार्य में उन्हें कभी कोई दिक्कत नही हुई। वे कहती हैं कि बैंक सखी बनने के पश्चात् लोगो के नजरिये में परिवर्तन आया है और सब उन्हें बैंक वाली मैडम के नाम से पुकारते हैं।

इसके अलावा आस.पास के रिश्तेदार और घर वाले भी उन्हें पहले कहा करते थे कि पढ़ी लिखी होने के बावजूद वह घर तक ही सीमित रहती है। इस प्रकार बैंक सखी ने उन्हें एक नई पहचान देने में मदद की है। इस क्रम में एक अन्य बैंक सखी विकासखण्ड केशकाल के ग्राम मस्सूकोकोड़ा की रहने वाली लता पाण्डे ने भी अपने विचार व्यक्त किये। उन्होंने बताया कि 12वीं पास होने के पश्चात् में उन्होंने कम्प्यूटर एप्लीकेशन में डिप्लोमा हासिल किया था उनके पति एक मैकेनिक का कार्य करते हैं। उन्होंने भी जय बालेश्वरी स्व सहायता समूह के माध्यम से बैंक सखी के रूप में वर्ष 2018 से अपनी सेवाएं दे रहीं है और अब तक वे हितग्राहियों के 45 बैंक खाता तथा कुल 19 करोड़ का ट्रान्जेक्शन कर चूकीं है और महिने में लगभग 4 हजार रूपए कमा लेतीं है। उनके पास लगभग प्रतिदिन 50 से 80 बैंक ग्राहक आते हैं। इस प्रकार उन्हें आमदनी का नया जरिया मिलने से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरी है। उनका कहना है कि बैंक सखी बनने से पूर्व उन्हें गांव में कोई नहीं जानता था परन्तु आज उन्हें पूरा गांव जानता है और सभी सम्मान करते हैं। वे यह भी कहतीं है कि वे कभी भी बैंक में काम करना बंद नहीं करेंगी और यह उनका पसंदीदा कार्य है।

जैसा की सभी जानते हैं कि कोरोना संकट की वजह से लॉकडाउन के कारण वाणिज्यक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई थीं और दूरस्थ क्षेत्रों में बैंको से नगद निकासी एक बड़ी समस्या बन गई थी, ऐसे विकट समय में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के अंतर्गत बैंक सखियों के माध्यम से न केवल वनांचल क्षेत्रों में नगद निकासी की समस्या को हल किया गया बल्कि बुजुर्गो, दिव्यांगों और अन्य असहाय लोगों के घरों तक पहुंच कर अपनी सेवाएं दी गई। उल्लेखनीय है कि लॉकडाउन से अब तक की अवधि में जिले में 20 करोड़ 80 लाख का वित्तीय लेन.देन बैंक सखियों के माध्यम से किया गया।

07-12-2020
कोरोना संकट के बावजूद प्रदेश में दस्तावेजों के पंजीयन में 30 और राजस्व प्राप्ति में 26 प्रतिशत हुई वृद्धि

रायपुर। कोरोना संकट के बावजूद छत्तीसगढ़ में माह-दर-माह राजस्व दस्तावेजों के पंजीयन और इससे मिलने वाले राजस्व में लगातार वृद्धि हो रही है। राजस्व दस्तावेजों के पंजीयन और राजस्व प्राप्ति में पिछले वर्ष नवम्बर माह की तुलना में इस वर्ष नवम्बर माह में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2019 के नवम्बर माह में 14 हजार 510 दस्तावेजों का पंजीयन हुआ था, जबकि वर्ष 2020 के नवम्बर माह में 18 हजार 926 दस्तावेजों का पंजीयन हुआ है, जो गत वर्ष के नवम्बर माह से 30 प्रतिशत अधिक है। इसी तरह वर्ष 2019 के नवम्बर माह में दस्तावेजों के पंजीयन से 93 करोड़ 42 लाख रूपए का राजस्व प्राप्त हुआ था, जबकि वर्ष 2020 के नवम्बर माह में दस्तावेजों के पंजीयन से 117 करोड़ 99 लाख रूपए का राजस्व प्राप्त हुआ है। यह राशि वर्ष 2019 के नवम्बर माह की तुलना में 26 प्रतिशत अधिक है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा छत्तीसगढ़ में 5 डिसमिल से छोटे भू-खण्डों की खरीदी-बिक्री में लगी रोक को हटाने, सम्पत्ति की शासकीय गाइड लाइन दरों में और पंजीयन शुल्क में कमी जैसे- अनेक जनहितैषी निर्णय लिए गए, जिससे विशेषकर प्रदेश के मध्यम वर्ग के लोगों को राहत मिली है, इन निर्णयों से रियल स्टेट सेक्टर को भी बढ़ावा मिला है। इससे दस्तावेजों के पंजीयन और प्राप्त होने वाले राजस्व में लगातार वृद्धि हो रही है।माह अक्टूबर 2020 में भी वर्ष 2019 के अक्टूबर माह की तुलना में राजस्व दस्तावेजों के पंजीयन और राजस्व प्राप्ति में भी वृद्धि दर्ज की गई थी। वर्ष 2019 के अक्टूबर माह की तुलना में वर्ष 2020 के अक्टूबर माह में 13.63 प्रतिशत अधिक दस्तावेजों का पंजीयन हुआ था। इसी प्रकार वर्ष 2019 के अक्टूबर माह की तुलना में वर्ष 2020 के अक्टूबर माह में दस्तावेजों के पंजीयन से 8.71 प्रतिशत अधिक राजस्व प्राप्त हुआ था।

गौरतलब है कि कोरोना काल में पंजीयन कार्यालय लॉकडाउन के कारण लंबी अवधि तक बंद रहे अथवा कम क्षमता और कोरोना गाइड लाइन प्रतिबंधों के साथ संचालित हुए, बावजूद इसके दस्तावेजों के पंजीयन और राजस्व प्राप्ति में वृद्धि दर्ज की गई। राज्य सरकार द्वारा रियल सेक्टर को प्रोत्साहित करने के लिए अनेक निर्णय लिए गए छोटे भू-खण्डों की खरीद बिक्री से रोक हटाई गई, सम्पत्ति की गाइड लाइन दरों में 30 प्रतिशत की कमी की गई, भूमि नामंतरण और डाइवर्सन की प्रक्रिया सरल की गई। इसके साथ ही रजिस्ट्री शुल्क 4 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत किया गया और दस्तावेजों के पंजीयन के लिए सिंगल विन्डो प्रणाली से सभी प्रकार की अनुमति और अनापत्ति प्रमाण पत्र देने की प्रक्रिया आसान बनाई गई। प्रदेश में कोरोना संक्रमण को देखते हुए दस्तावेजों के पंजीयन ऑनलाइन ई-पंजीयन प्रणाली से किए जा रहे हैं। कोविड-19 से संक्रमण की सुरक्षा को देखते हुए पंजीयन हेतु ऑनलाइन अपॉइंटमेंट स्लॉट बुकिंग को अनिवार्य किया गया है।

 

14-11-2020
प्रधानमंत्री ने दी दिवाली पर शुभकामनाएं, कहा-समृद्ध और स्वस्थ रहें

नई दिल्ली। कोरोना संकट के बीच देशभर में दिवाली के इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को बधाई दी है। प्रधानमंत्री मोदी ट्वीट करते हुए लिखा कि सभी देशवासियों को दीपावली की हार्दिक मंगलकामनाएं। उन्होंने लिखा, रोशनी का यह उत्सव हम सभी के जीवन में नया प्रकाश लेकर आए और सभी लोग समृद्ध और स्वस्थ रहें। वहीं,राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी देश की जनता को दिवाली की बधाई दी। उन्होंने लिखा, दीवाली के शुभ अवसर पर, मैं सभी देशवासियों और विदेश में बसे सभी भारतीयों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। मेरी कामना है कि खुशियों और प्रकाश का यह महापर्व, देश के हर घर में सुख, शांति और समृद्धि का संचार करे। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा, यह पर्व हमें मानवता की सेवा की ओर अग्रसर होने के लिए प्रेरित करता है।

आइए संकल्‍प करें कि जिस प्रकार एक जलता हुआ दीपक अनेक दीपकों को प्रज्‍ज्‍वलित कर सकता है, उसी प्रकार से हम समाज के निर्धन, बेसहारा और जरूरतमंद लोगों के जीवन में खुशियां बांटते हुए आशा एवं समृद्धि का दीप बनें। दीवाली स्‍वच्‍छता का भी उत्‍सव है इसलिए हम प्रदूषण से मुक्‍त, पर्यावरण के अनुकूल और स्‍वच्‍छ दीवाली मनाकर प्रकृति का भी सम्‍मान करें। गृहमंत्री अमित शाह ने भी ट्वीट कर बधाई देते हुए कहा, दीपावली का यह पवित्र पर्व सभी देशवासियों के जीवन में सुख और समृद्धि लाए, सभी के उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूं। दीपोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं।

 

09-11-2020
दीपावली के बाद कर्मचारियों को दफ्तर में देनी होगी उपस्थिति....

रायपुर। दीपावली के बाद सभी कर्मचारियों को दफ्तर में उपस्थिति देनी होगी। इससे पहले कोरोना संकट के कारण कर्मचारियों की 50 प्रतिशत उपस्थिति का ही निर्देश था। अब राज्य सरकार ने दिवाली के बाद 17 नवंबर से कर्मचारियों की कार्यालय में उपस्थिति के निर्देश दिये हैं।राज्य में अनलॉक की प्रक्रिया निरंतर जारी है। इसे ध्यान में रखकर मंत्रालय और विभागाध्यक्ष कार्यालयों में कार्य संचालन के दृष्टिकोण से सभी अधिकारियों व कर्मचारियों की उपस्थिति शत प्रतिशत करते हुए उनके कार्य संचालित करेंगे। यह व्यवस्था 17 नवंबर से प्रभावशील होगी।

राज्य सरकार ने कोरोना को देखते हुए कर्मचारियों को निर्देश दिए है की कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग जरूरी है, अधिकारियों-कर्मचारियों को आगाह किया जाता है कि यथासंभव निजी वाहनों से ही कार्यालय आये। क्योंकि बस से सोशल डिस्टेंसिंग बनाये रखना व्यावहारिक नहीं हो पायेगा। अत: उल्लेख किया जाता है कि यथासंभव अधिकारी-कर्मचारी निजी वाहनों से कार्यालय पहुंचे।

 

08-11-2020
सरोज पांडेय ने कहा-आत्मनिर्भर भारत की पुन: शुरुआत भाजपा ने की,कोरोना संकट में भी नहीं रूकी मोदी की मुहिम 

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी की पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री और संसद सदस्य (राज्यसभा) डॉ.सरोज पांडेय ने कहा है कि आत्मनिर्भर भारत की पुन: शुरुआत भाजपा ने की है। भाजपा और जनसंघ प्रारंभ से ही स्वदेशी के पक्षधर रही है। 1954 में जनसंघ ने इस विषय को उठाया परंतु उस समय की सरकार को स्वदेशी का महत्व समझ नहीं आया। आतंकवादी गतिविधियों का समर्थक पाकिस्तान है और पाकिस्तान का समर्थन चीन करता है। बालाकोट से लेकर हर मोर्चे पर पाकिस्तान ने मुंह की खाई है। चीन ने भी दु:साहस किया और उसे भी मुंह की खानी पड़ी। डॉ. पांडेय रविवार को भाजपा के तीन दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग को संबोधित कर रही थीं। प्रशिक्षण वर्ग का समापन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय के संबोधन से हुआ। डॉ.पांडेय ने कहा कि कोरोना महामारी संकट में भी मजबूती के साथ हमने लड़ाई लड़ी और भारत को आत्मनिर्भर बनाने की नरेंद्र मोदी की मुहिम नहीं रुकी। पूरा विश्व थम-सा गया था, ऐसे समय में भी हम मजबूती से आत्मनिर्भर भारत बनाने की दिशा में अग्रसर हुए हैं। इंटरनेट प्रणाली और सुरक्षा को लेकर भी देश के सामने संकट थे। चीन जैसे देशों के ऐप पर प्रतिबंध लगाने का काम मोदी ने मजबूती के साथ करते हुए कहा कि न हम रुके हैं, न रुकेंगे, हम आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ रहे हैं। हमारी सैन्य शक्ति को मजबूत करने के लिए हमने लगातार सुरक्षा उपकरण खरीदे हैं। यह जरूरी भी था परंतु हजारों करोड़ों डॉलर देश के बाहर जाता रहा और देश की सरकारों ने उस पर ध्यान नहीं दिया। मोदी ने आत्मनिर्भरता के लिए मजबूती से आगे बढ़ने का काम किया है और वोकल फॉर लोकल का नारा दिया। उन्होंने लोकल फॉर ग्लोबल और मेक फॉर द वर्ल्ड का नारा देकर स्पष्ट कर दिया कि आत्मनिर्भरता के साथ भारत विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए भी तैयार हैं। डॉ. पांडेय ने कहा कि नक्सलवाद एक बड़ी चिंता का विषय रहा है। नक्सलवाद वह वाद रहा, जिसकी शुरुआत शोषण रोकने के नाम पर हुई परंतु यह कब रेड कॉरिडोर में बदल गया, पता ही नहीं चला। नक्सलवाद के साथ मजबूती से लड़ने का काम यदि किसी ने किया तो हमारी पूर्ववर्ती प्रदेश सरकार ने छत्तीसगढ़ में डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में किया। झीरम घाटी की घटना घटी, वह बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण है। परंतु, उस समय बड़े बड़े आरोप लगाने वाले कांग्रेस के नेता कहते थे, हमारी सरकार आने दीजिए, हमारी जेब में सबूत हैं, तो अब क्या हो गया? अब कांग्रेस के नेता सबूत क्यों नहीं निकालते? प्रदेश सरकार ने नक्सलियों के सामने घुटने टेक दिए हैं। नक्सलवाद पर इस सरकार ने राजनीति की है, जिसके दुष्परिणाम हम सभी को आने वाले समय मे भोगने पड़ेंगे।

23-10-2020
Video: अनुसुइया उइके पहुंचीं माँ बम्लेश्वरी के दरबार, प्रदेश के विकास और खुशहाली के लिए प्रार्थना की

राजनांदगांव। राज्यपाल अनुसुइया उइके शुक्रवार को माँ बम्लेश्वरी के दरबार में दर्शन करने पहुंची।   राज्यपाल ने मां बम्लेश्वरी की पूजा—अर्चना की। उन्होंने प्रदेश के विकास और खुशहाली के लिए प्रार्थना की। उन्होंने कोरोना संकट काल और महामारी से जल्द मुक्ति के लिए भी मां बम्लश्वारी के दरबार में माथा टेककर प्रार्थना की। राज्यपाल का कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा व पुलिस अधीक्षक डी. श्रवण सहित अन्य अधिकारियों व मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया।

20-10-2020
रावण दहन को लेकर समितियां जुटी तैयारियों में, शासन की गाइडलाइन का पालन किया जाएगा रावण दहन में

रायपुर। कोरोना संकट काल के बीच राजधानी के रावण भाठा में रावण दहन किया जाएगा। इस संबंध मंगलवार को रावण भाठा मैदान समिति के कार्यकर्ताओं की बैठक हुई। समिति के अध्यक्ष मनोज वर्मा ने बताया की है कोरोना वायरस के रोकथाम के लिए शासन ने जो गाइडलाइन जारी है उसके अनुसार हम दशहरा पर्व मनाएंगे। इस बार केवल 10 फीट का ही रावण का पुतला बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि पिछले कई वर्षों से रावण भाटा मैदान में रावण दहन किया जा रहा है। लोग यहां दूरदराज से रावण दहन देखने आते थे। इस बार कोरोना वायरस की महामारी को देखते और इसके प्रसार को रोकने के लिए शासन की दी गई गाइडलाइन के अनुसार रावण दहन किया जाएगा।

 

18-10-2020
Video: डोंगरगढ़ में इस बार नहीं लगेगा मेला, ट्रेनों का स्टापेज भी बंद

राजनांदगांव। नवरात्रि पर डोंगरगढ़ में मेला नहीं लगेगा। ट्रेनों के स्टापेज पर रोक लगा दी गई है। माँ बम्लेश्वरी माई के दरबार में हर साल नवरात्रि पर बड़े पैमाने पर मेला लगता ​है। लेकिन इस बार कोरोना संकट काल के कारण रोक लगा दी गई हैं। इस बार नवरात्रि के दौरान डोंगरगढ़ में ट्रेनों का विशेष स्टापेज नहीं होगा। दर्शनार्थियों को बम्लेश्वरी मंदिर में प्रवेश नहीं मिलेगा। वहीं डोंगरगढ़ के लिए बिलासपुर से चलने वाली स्पेशल ट्रेनें भी नहीं चलेंगी।

कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने बिलासपुर, रायपुर, जांजगीर चांपा, कोरबा और रागयढ़ के कलेक्टरों को पत्र लिखकर सूचित कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि कोविड-19 के कारण मंदिर में मेला और बड़े पैमाने पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। इसे रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन ने कुछ कड़े फैसले किए हैं। इसे अमल में लाने के लिए अन्य जिलों के अधिकारियों से सहयोग की अपील की गई है। बता दें कि हर साल नवरात्रि में रेल और अन्य माध्यमों से दर्शनार्थी मां बम्लेश्वरी का दर्शन करने डोंगरगढ़ पहुंचते हैं। इनकी संख्या लाखों में होती है। इस बार कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए कलेक्टर ने सरकारी निर्देशों का हवाला देते हुए इस बार सारी गतिविधियों पर रोक लगाने की बात कही है।

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