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19-09-2020
व्यवस्था पर ध्यान दीजिए साहब,आखिर जमा करने तो निकलना होगा फिर, क्या संक्रमण का खतरा नहीं ?

रायपुर। कान इधर से पकड़ों या उधर से बात तो एक ही होती है। यह शायद पं.रविशंकर विश्वविद्यालय के कुलसचिव भूल रहे हैं। गत दिनों ही परीक्षार्थियों की उमड़ी भीड़ के कारण आयुक्त उच्च शिक्षा की नाराजगी के बाद उन्होंने उत्तरपुस्तिका वितरण पर रोक लगाई थी। अब जो नई व्यवस्था परीक्षा की और उसके बाद उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने की है, वह अभी भी खतरनाक है। विकल्प दिया जाना था, बगैर भीड़ किए यदि महाविद्यालय उत्तर पुस्तिकाएं ले सकते हो तो लेने की व्यवस्था करते। कॉलेजों में एक ड्राप बॉक्स की व्यवस्था होनी चाहिए, जिसमें बच्चे आकर अपना लिफाफा डाल सकें।
बता दें कि परीक्षार्थियों को अपनी उत्तर पुस्तिकाएं स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेजने कहा गया है। अब बात फिर वही आती है कि हर जगह बड़े डाकघर नहीं है और जहां है वहां इतनी जगह नहीं की बच्चों की भीड़ ना लगे। स्थिति वही बनेगी ही,यदि लगभग 2500 बच्चे पांच दिन में ही स्पीड पोस्ट के लिए ऐसे डाकघरों में आते हैं तो औसतन हर दिन 500 लोग केवल इसी काम के लिए इकट्ठा होंगे। मतलब कॉलेज में भीड़ ना होकर डाकघर में हो जाएगी।
इस बात पर भी ध्यान देना होगा कि क्या सही समय पर बच्चों की उत्तर पुस्तिकाएं पहुंच पाएगी। डाक विभाग तो इतनी बड़ी संख्या में स्पीड पोस्ट कर पाने में असमर्थता व्यक्त करेगा। ग्रामीण अंचल में जो डाकघर है वो कम समय तक ही स्पीड पोस्ट का समय देते हैं। क्या इस पर सोचने की आवश्यकता नहीं! अब 21 सितंबर से 28 सितंबर तक रायपुर और बिलासपुर जिले में लॉक डाउन होने के कारण छात्र डाकघर  कैसे जा पाएंगे? ऐसे में क्या ऑनलाइन ही बच्चों से उत्तर पुस्तिकाओं को मंगाना उचित नहीं। लॉक डाउन की अवधि में वृद्धि भी हो सकती है। इस संबध में डाक विभाग पर आश्रित होने के बजाए व्यवहारिक निर्णय होना चाहिए ताकि छात्रों को बाहर निकलने से संक्रमण का खतरा न रहे।

 

19-09-2020
बिल्हा क्षेत्र के पूर्व घोषित अनेक कंटेनमेंट जोन हुए पाबंदियों से मुक्त

रायपुर/बिलासपुर। प्रदेश की राजधानी रायपुर में 21 सितंबर की रात्रि से 7 दिनों के सख्त लॉक डाउन की घोषणा की गई है। वहीं बिलासपुर में ऐसे ही लॉकडाउन की घोषणा संभव बताई जा रही है। ऐसी विपरीत स्थिति में बिल्हा क्षेत्र के लिए एक राहत खबर यह है कि वहां के पूर्व घोषित अनेक कंटेनमेंट जोन को शनिवार को कंटेनमेंट की पाबंदियों से मुक्त कर दिया गया। वही मस्तूरी विकासखंड के एरमशाही गांव में पॉजिटिव मरीज मिलने के कारण संबंधित क्षेत्र को कंटेनमेंट जोन घोषित कर उससे जुड़ी पाबंदियों को सख्ती से लागू कर दिया गया है। बिल्हा विकासखंड में पूर्व घोषित जिन कंटेनमेंट जोन को विमुक्त घोषित करते हुए पाबंदियों से मुक्त किया गया है।

उनमें बोदरी के वार्ड क्रमांक 11, वार्ड क्रमांक 8, वार्ड क्रमांक 3, वार्ड क्रमांक 14 शामिल हैं। वही बोदरी के ही वार्ड क्रमांक 3 और रामावैली एरिया को भी कंटेनमेंट की पाबंदियों से मुक्त किया गया है। इसी तरह बिल्हा नगर पंचायत के वार्ड क्रमांक 14, बिल्हा के ही वार्ड क्रमांक दो और देव किरारी तथा दगौरी व रहंगी के पूर्व घोषित कंटेनमेंट को कंटेनमेंट संबंधित पाबंदियों से मुक्त कर दिया गया है। जबकि मस्तूरी के एरमशाही में पॉजिटिव मरीज पाए जाने के कारण संबंधित क्षेत्र को कंटेनमेंट जोन घोषित किया गया है।

 

19-09-2020
Video : ग्लिब्स की खरी-खरी पर संज्ञान लिया प्रशासन ने, कलेक्टर ने रायपुर में लॉक डाउन का लिया निर्णय

रायपुर।  ग्लिब्स की खरी-खरी पर रायपुर जिला प्रशासन ने संज्ञान लिया है। ग्लिब्स ने अपने शुक्रवार के खरी-खरी के अंक में रायपुर जिले में बढ़ते कोरोना संक्रमण के मामले पर चिंता जताई थी। इस मामले को प्रमुखता से उठाते हुए प्रदेश के अन्य जिलों के कलेक्टरों की ओर लिए जा रहे लॉक डाउन के निर्णय पर रायपुर जिला प्रशासन और विशेषकर कलेक्टर डॉ. एस. भारतीदासन का ध्यानाकर्षित किया था। आखिरकार कलेक्टर डॉ. एस. भारतीदासन ने रायपुर में कोरोना वायरस की चैन को तोड़ने 1 सप्ताह के लिए रायपुर में तालाबंदी की घोषणा कर दी है। बता दें कि 1 सप्ताह तक पूरा जिला कंटेनमेंट जोन माना जाएगा। इसकी पुष्टि करते हुए संयुक्त कलेक्टर राजीव पाण्डेय ने कहा है कि, 1 सप्ताह के लिए पूरे जिले को कंटेनमेंट जोन मानकर कड़ाई से नियमों को पालन करवाया जाएगा। उन्होंने कहा है कि, लॉकडाउन शब्द का उपयोग तो नहीं लेकिन लॉकडाउन जैसी ही कड़ाई होगी। केवल मेडिकल और दूध की सुुविधा रहेगी। बाकी सभी सुविधा बंद रहेगी। सब्जियों-फल की दुकानें नहीं खुलेंगी। 

बता दें कि, शनिवार को कलेक्टर ने उच्च स्तरीय बैठक लेकर सभी अधिकारियों की सहमति से यह घोषणा की है। 21 सितंबर की रात 9 बजे से 28 सितंबर तक राजधानी में तालाबंदी रहेगी। इस संबंध में जल्द ही आदेश जारी होगा। बता दें कि, शुक्रवार को बालोद जिले में 22 से 30 सितंबर तक लॉकडाउन की घोषणा हुई। इससे पहले मुंगेली, राजनांदगांव, दुर्ग में भी लॉकडाउन करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद से रायपुर जिला प्रशासन के निर्णय का इंतजार था। रायपुर में प्रदेश के सभी जिलों की तुलना में रोजाना बड़ी संख्या में केस आ रहे हैं। इसकों देखते हुए कोरोना की रफ्तार को ब्रेक करने लॉक डाउन का निर्णय जरुरी था।

18-09-2020
लॉक डाउन अवधि में नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थान होंगे 15 दिन तक सील, संचालक पर किया जाएगा जुर्म दर्ज

दुर्ग। जिले में 20 से 30 सितंबर तक लॉक डाउन की घोषणा की गई है। जिले में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले को देखते हुए जिला प्रशासन ने जिले के नगरीय निकाय, दुर्ग-भिलाई, भिलाई-चरोदा, रिसाली, जामुल एवं कुम्हारी क्षेत्रों में लॉक डाउन लगाया है। इस दौरान शराब की समस्त दुकानें पूर्णत: प्रतिबंधित रहेंगी। नगरीय निकाय प्रतिबंधित क्षेत्र के अंतर्गत समस्त साप्ताहिक हॉट बाजार भी बंद रहेेंगे। होटल एवं रेस्टोरेंट को होम डिलीवरी की अनुमति रहेगी। कलेक्टर,डॉ.सर्वेश्वर नरेन्द्र भुरे ने बताया कि जिले में स्थित केंद्र एवं राज्य सरकार के अधीन समस्त शासकीय/अर्धशासकीय/निजी कार्यालय में एक-तिहाई अधिकारी/कर्मचारियों की उपस्थिति के साथ समयावधि में संचालित होंगी। जिले के समस्त शैक्षणिक संस्थान/कोचिंग संस्थान/ ट्युशन क्लासेस बंद रहेंगे, केवल प्रवेश प्रक्रिया एवं ऑनलाइन क्लासेस की अनुमति होगी।

जिले के प्रतिबंधित शहरी क्षेत्रों में परिवहन सेवा, टैक्सी, ऑटोरिक्शा, ई-रिक्शा प्रतिबंधित रहेेगी।  जिला एवं अंतर्राज्जीय बस परिवहन सेवा चालू रहेगी। मास्क, सैनिटाईजर, दवाईयाँ, एटीएम वाहन, एलपीजी गैस सिलेण्डर, ऑक्सीजन सिलेण्डर परिवहन करने वाले वाहनों को अनुमति रहेगी। अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, क्लीनिक संचालित होंगे। जिले के प्रतिबंधित नगरीय निकाय क्षेत्रों में समस्त ढाबा पूर्णत: बंद रहेंगे। होटलों में लॉजिंग एवं बोर्डिंग की सुविधा उपलब्ध रहेगी। पूर्व में जारी विवाह हेतु प्राप्त अनुमति मान्य होगी। कलेक्टर ने बताया कि प्रतिबंधित क्षेत्रों में सब्जी, मटन, मछली, फल सुबह 5 बजे से सुबह 10 बजे तक, डेयरी केवल दूध व्यवसाय, सुबह 6 से 8 बजे तक, शाम को 5 से 7 बजे तक, रेस्टोरेन्ट, होटल में होम डिलीवरी सुबह 10 से रात्रि 10 बजे तक डीजल, पेट्रोल, एलपीजी एवं सीएनजी सांय 3 बजे तक, दवा दुकानें, मेडिकल स्टोर्स, चश्मा दुकानों को समय की पाबंदी से छूट रहेगी। घर पर जाकर दूध बाँटने के लिए सुबह 6 से प्रात: 9:30 बजे तक, शाम को 5 बजे से 7 बजे तक किया जा सकता है। कलेक्टर ने बताया कि यदि किसी भी व्यवसायी द्वारा उपरोक्त शर्तों में से किसी एक या एक से अधिक शर्तों का उल्लंघन किया तो तत्काल प्रभाव से 15 दिनों के लिए संस्थान सील कर दिया जायेगा। जिले के नगरीय निकाय, भिलाई 3, चरोदा, दुर्ग, भिलाई, रिसाली, जामुल, कुम्हारी क्षेत्रों में आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति संस्था, प्रतिष्ठान पर भारतीय दंड संहिता 1860 के धारा 188 के तहत दंडनीय अपराध होंगे।

 

17-09-2020
Breaking: जिले में 20 से 30 सितंबर तक लगेगा लॉक डाउन

दुर्ग। जिले में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए जिला प्रशासन ने 20 से 30 सितंबर तक लॉक डाउन का निर्णय लिया है। इस संबंध में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, व्यापारिक संगठनों की ओर से भी आग्रह किया गया था। स्थितियों पर विचार कर जिला प्रशासन ने लॉक डाउन लगाने का निर्णय किया है। कलेक्टर डॉ.सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने सभी नागरिकों से आह्वान किया है कि लॉकडाउन का पूरी तरह से पालन करें। इस समय असावधानी बरती गई तो कोरोना संक्रमण की स्थिति को नियंत्रित करने में गंभीर परेशानी हो सकती है। कलेक्टर ने कहा है कि लॉक डाउन का उद्देश्य कोरोना संक्रमण को रोकना है। इस समय नागरिकों की भी बड़ी जिम्मेदारी है कि वे संयम का परिचय देते हुए लॉक डाउन को सफल बनायें ताकि जिले को संक्रमण से मुक्त करने की बड़ी लड़ाई में सफलता मिल सके।

 

16-09-2020
लॉक डाउन के दौरान 90 प्रतिशत से अधिक बच्चों को मिला मध्यान्ह भोजन का लाभ, सर्वेक्षण में छत्तीसगढ़ टॉप पर 

रायपुर। कोरोना संकट काल में भी मध्यान्ह भोजन योजना के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल रहा है। प्रदेश में लॉक डाउन के दौरान 90 प्रतिशत से अधिक बच्चों को मध्यान्ह भोजन का लाभ मिला है, जबकि इस दौरान अन्य राज्यों में मध्यान्ह भोजन वितरण की स्थिति काफी खराब रही। आक्सफैम इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार स्कूल बंद होने से देश के 27 करोड़ बच्चे प्रभावित हुए हैं, जबकि नेशनल फूड सिक्यूरिटी एक्ट 2013 के तहत मध्यान्ह भोजन प्रत्येक बच्चे का अधिकार है। लोकसभा में विगत 14 सितंबर को एक प्रश्न के उत्तर में केन्द्र सरकार ने यह माना कि, मध्यान्ह भोजन योजना के लाभ से बहुत से बच्चों को वंचित रहना पड़ा। आक्सफैम इंडिया के सर्वेक्षण में छत्तीसगढ़ का देश में सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा है। छत्तीसगढ़ में 90 प्रतिशत से अधिक बच्चों को मध्यान्ह भोजन योजना का लाभ मिला है।

जबकि उत्तर प्रदेश में 92 प्रतिशत बच्चों को मध्यान्ह भोजन से वंचित रहे। सर्वेक्षण में यह भी बताया गया है कि, उत्तर प्रदेश में जहां खाद्यान्न सुरक्षा भत्ता प्रदान करने पर ध्यान केन्द्रित किया गया। छत्तीसगढ़ में राशन की होम डिलिवरी पर ध्यान केन्द्रित किया गया। लॉक डाउन के दौरान पिछले मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में स्कूलों के बंद होने के बीच मध्यान्ह भोजन की आपूर्ति तय करने के निर्देश दिए थे। इसके तारतम्य में छत्तीसगढ़ ने तत्काल कदम उठाते हुए स्कूली बच्चों को स्कूलों और बच्चों के घरों तक पहुंचाकर मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराने के इंतजाम किए। 

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 21 मार्च को सभी कलेक्टरों और जिला शिक्षा अधिकारियों मध्यान्ह भोजन योजना के तहत स्कूली बच्चों को सूखा राशन वितरण के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए थे। गांव-गांव में इसकी मुनादी कराई गई। देश के अन्य राज्यों में सूखा राशन वितरण की प्रक्रिया काफी बाद में शुरू कराई गई। छत्तीसगढ़ में लॉक डाउन के पहले 40 दिनों के लिए स्कूली बच्चों को सूखा राशन दिया गया। इसके बाद एक मई से 15 जून तक 45 दिनों के लिए, 16 जून से 10 अगस्त तक 45 दिन का सूखा राशन वितरित किया गया। इस प्रकार अब तक 130 दिन का सूखा राशन वितरण किया जा चुका है। इस योजना से राज्य के लगभग 43 हजार स्कूलों में 29 लाख बच्चों को मध्यान्ह भोजन योजना के तहत सूखा राशन वितरण से लाभ मिला है। मध्यान्ह भोजन योजना के तहत सूखा राशन के घर-घर वितरण की व्यवस्था स्कूल शिक्षा विभाग के माध्यम से किया गया।

वितरित किए गए सूखा राशन पैकेट में चावल, तेल, सोयाबीन, दाल, नमक और अचार शामिल हैं। राज्य सरकार ने स्थानीय स्तर पर स्कूली बच्चों और पालकों की सुविधा को देखते हुए यह व्यवस्था भी की गई कि, यदि माता-पिता पैकेट लेने के लिए स्कूल नहीं जा सकते हैं तो स्व-सहायता समूह और स्कूल स्टाफ के माध्यम से घर घर जाकर सूखा राशन के पैकेटों की होम डिलवरी की जाए। खाद्य सुरक्षा भत्ता के रूप में बच्चों को सूखा चावल और कुकिंग कास्ट की राशि से अन्य आवश्यक सामग्री दाल, तेल, सूखी सब्जी इत्यादि वितरित की गई। मध्यान्ह भोजन योजना की गाइडलाइन के अनुसार कक्षा पहलीं से आठवीं तक के उन बच्चों को जिनका नाम शासकीय शाला, अनुदान प्राप्त अशासकीय शाला अथवा मदरसा-मकतब में दर्ज है, उन्हें मध्यान्ह भोजन दिया गया।

16-09-2020
यह पहला मौका नहीं, जब मोदी सरकार ने बर्दाश्त न होने वाला झूठ बोला है : शैलेश नितिन त्रिवेदी

रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संचार विभाग के प्रमुख शैलेश नितिन त्रिवेदी ने केन्द्र की मोदी सरकार को घेरा है। त्रिवेदी ने कहा है कि, केंद्र सरकार का बयान स्वीकार्य नहीं है कि, लॉक डाउन के दौरान घर लौटते गरीब मजदूरों की मौतों का कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस गैरजिम्मेदाराना रवैये के लिए देश से माफी मांगनी चाहिए। त्रिवेदी ने कहा है कि, जिस समय मजदूर पैदल घर लौटने को मजबूर हुए, उस समय देश में आपदा प्रबंधन कानून लागू था। केंद्र सरकार हर फैसले खुद ले रही थी। करोड़ों लोगों का रोजगार छिन गया और आज सरकार कह रही है कि, उसके पास कोई जानकारी नहीं है। यह पहला मौका नहीं है, जब नरेंद्र मोदी की सरकार ने ऐसा बर्दाश्त न होने वाला झूठ बोला है।

इससे पहले नोटबंदी में भी सरकार ने देश के करोड़ों लोगों को बैंकों के सामने कतार में खड़ा कर दिया और सैकड़ों लोगों की जानें गईं। प्रधानमंत्री ने कहा था कि, 50 दिन में सब कुछ ठीक न हुआ तो फांसी चढ़ा देना। न कालाधन आया, न आतंकवाद और न नक्सलवाद खत्म हुआ। लाखों व्यापारियों का कारोबार मंदी की चपेट में जरूर चला गया। त्रिवेदी ने कहा है कि, दूसरी आजादी की तरह जश्न मनाकर जीएसटी लागू किया गया, लेकिन आज पता चल रहा है कि दुनिया का सबसे जटिल और निरर्थक जीएसटी लागू करके प्रधानमंत्री ने देश के मंझोले और छोटे उद्योग और कारोबार की कमर तोड़ कर रख दी है। यही वजह है कि, कोरोना के बाद देश की अर्थव्यवस्था 40 प्रतिशत तक सिकुड़ गई है। ऐसा लगने लगा है कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अच्छे दिन का वादा करके देशवासियों को सबसे बुरे दिन दिखा रहे हैं।

16-09-2020
आबकारी विभाग के उडऩदस्ता टीम ने की 20 होटल-ढाबों की आकस्मिक जांच 

रायपुर। आबकरी मंत्री कवासी लखमा के निर्देश पर लॉक डाउन समाप्ति के पश्चात प्रदेश में होटल एवं ढाबे संचालित होना प्रारम्भ हो गए हैं। विभिन्न होटल एवं ढाबों में अवैध रूप से शराब की बिक्री एवं सेवन को रोकने के लिए आबकारी आयुक्त निरंजन दास तथा प्रबंध संचालक मार्केटिंग कारपोरेशन एपी त्रिपाठी के निर्देशन पर राज्य स्तरीय उडऩदस्ता, संभागीय उडऩदस्ता तथा जिला रायपुर की टीमों द्वारा 14 सितंबर को अनेक ढाबों और होटलों की जांच की गई। जांच टीमों द्वारा सबेरा होटल, सांकरा, मीनू ढाबा सिलतरा, राजस्थानी ढाबा, धरसीवां, अन्नपूर्णा ढाबा, सड्डू, जी अम्बे ढाबा, सड्डू, हाईवे ढाबा, भूमिया, न्यू उमेश ढाबा, बेमता, ताज ढाबा, बेमता, रॉयल ढाबा, अवरेठी, ताज ढाबा, सिमगा, बलबीर ढाबा, ग्रीन लाइट ढाबा, प्रिंस ढाबा, बंटी ढाबा, राजू ढाबा, अन्ना पंजाबी ढाबा, पिंटू ढाबा, होटल खानसामा, रायपुर फैमिली ढाबा, खाना-कोठी होटल, सहित कुल 20 होटल/ढाबों की कल रात जांच की गई।

इस जांच का मुख्य उद्देश्य अवैध कारोबार न पनपने देने का था। 20 स्थानों में जांच पर कहीं भी अवैध मदिरा का विक्रय अथवा सेवन का मामला सामने नहीं आया। केवल एक स्थान पर बैठ कर मदिरा सेवन की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्यवाही कर प्रकरण कायम किया गया। यह कार्यवाही निरंतर जारी रहेगी तथा अन्य स्थानों और जिलों पर भी जांच की जाएगी ताकि अवैध मदिरा का विक्रय और सेवन को रोका जा सके।

14-09-2020
Video: नगरवासी कर रहे शहर को लॉक डाउन करने की मांग

जांजगीर चाम्पा। शिवरीनारायण में कोरोना का कहर पिछले महीने से जारी है। नगर के एक डॉक्टर और सरकारी खाद गोदाम के कर्मचारी की मौत कोरोना से हुई। इसके बाद नगरवासी कुछ दिनों के लिए शहर को लॉक डाउन करने की मांग कर कर रहे,जिससे कोरोना संक्रमण पर काबू पाया जा सके। 

 

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