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24-11-2020
टीएस सिंहदेव ने कहा-लॉक डाउन और नाइट कर्फ्यू की आवश्यकता नहीं,कंटेनमेंट जोन पर हो सकता है विचार
 

रायपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्रियों की बैठक के बाद प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने मीडिया से चर्चा की। स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने भी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की बात को दोहराया है कि प्रदेश में कोरोना संक्रमण की स्थिति नियंत्रण में है। प्रदेश में लॉक डाउन या नाइट कर्फ्यू की आवश्यकता नहीं है। प्रदेश के कुछ ही जिलों में अधिक केस आ रहे हैं। इस स्थिति से निपटने कलेक्टरों को अधिकार दिया जा सकता है।स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव ने बताया कि बैठक में प्रदेश के लिए कोरोना वैक्सीन की मांग की गई। वैक्सीन आने के बाद सबसे पहले 50 से 70 आयु वर्ग के लोगों और कोरोना फ्रंट लाइन वर्कर्स को वैक्सिंग लगाए जाने पर विचार चल रहा है। स्वास्थ्य मंत्री सिंहेदेव ने कहा है कि जिन क्षेत्रों में अधिक मरीजों का पहचान हो रही है, वहां कंटेनमेंट जोन बनाए जाने पर विचार किया जा सकता है। जैसे अभी मैनपाट में अधिक केस सामने आए हैं। इसी तरह रायपुर सहित कुल जिलों में कोरोना के अधिक केस आ रहे हैं।  ऐसी स्थिति को कंट्रोल करने संबंधित जिलों के कलेक्टरों को पूर्व की तरह निर्णय लेने का अधिकार दिया जा सकता है।

विदित हो कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार सुबह मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों से चर्चा की। बैठक में विभिन्न प्रदेशों में कोरोना संक्रमण से रोकथाम और बचाव के उपायों की समीक्षा की गई।  निकट भविष्य में आने वाली वैक्सिन लगाने के लिए तैयारियों और कार्य योजना पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी स्पष्ट कहा है कि प्रदेश में कोरोना संक्रमण नियंत्रित है। माह अक्टूबर के बाद कोरोना के नए केसों में गिरावट हुई है। टेस्टिंग में कोई कमी नहीं की गई है। माह जुलाई में प्रदेश में पॉजिटीव केस 4 प्रतिशत थे। अगस्त में 8 प्रतिशत, सितंबर में 15 प्रतिशत, अक्टूबर में 10.5 प्रतिशत, नवंबर में 7 प्रतिशत मिले हैं। माह अक्टूबर-नवंबर में मृत्युदर एक प्रतिशत रही।

 

19-11-2020
होटल मैनेजर कमरे में लगे टीवी बेचकर हो गया फरार, मामला दर्ज  

 

रायपुर। लॉक डाउन के दौरान मैनेजर मालिक को बताये बिना होटल में लगे 6 टीवी बेचकर फरार हो गया। घटना की रिपोर्ट बुधवार को तेलीबांधा थाने में दर्ज की गई है। मिली जानकारी के अनुसार नागपुर निवासी जीतू सावलानी 38 वर्ष ने रिपोर्ट दर्ज करायी है कि प्रार्थी का दो होटल रायपुर व नागपुर में है। वह नागपुर वाले होटल में रहता है तथा रायपुर तेलीबांधा स्थित होटल  की देखभाल के लिये मैनेजर अमित एसकड़े आयु 40 वर्ष निवासी नागपुर को रखा हुआ था। लॉकडाउन होने की वजह से पीडि़त रायपुर स्थित होटल नहीं आ पाया था।

इसी बीच अमित एसकड़े ने मौके का फायदा उठाते हुए बिना बताये होटल में लगे 6 टीवी निकालकर 72 हजार रुपए में बेच दिया व रुपए लेकर फरार हो गया। पीडि़त को नागपुर से रायपुर आने के बाद घटना की जानकारी हुई,जिसके बाद बुधवार को रिपोर्ट दर्ज कराई।  घटना की रिपोर्ट पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अपराध कायम कर मामला दर्ज कर लिया है।

19-11-2020
बस्तर आर्ट की तरह कबीरधाम में भी आकर ले रहा लकड़ी से बने समान

कवर्धा। कोरोना संक्रमण काल के दौरान शासन द्वारा लागू किए गए लॉक डाउन ने दुनिया के लोगों के जीने के ढंग से लेकर दिनचर्या तक को भी प्रभावित किया है। ना जाने कितने लोग इस दौरान आर्थिक एवं मानसिक रूप से परेशान हुए वहीं कुछ लोगों ने इस आपदा को अवसर के रूप में तब्दील कर दुनिया के सामने मिशाल बनकर उभरे।उन्हीं में से एक नाम शहनाज कुरैशी भी है, जिन्होंने लॉक डाउन के दौरान घर में चल रहे फर्नीचर के कार्यों से बचे टुकड़ों को एक आर्ट के रूप में तब्दील कर दिया। जो लकड़ी अमूमन बढ़ाई के द्वारा फेंक दिया जाता है उस बेआकार और बेकाम के टुकड़े को तराशकर तरह-तरह के खूबसूरत सामान तैयार कर रही है। देखते ही देखते टाइम पास के लिए जिस काम को शुरू किया गया अब वह शहनाज के लिए जुनून बन चुका है। जल्द ही लकड़ी को तराशकर सजीव रूप देने की कला इनमें है। बस्तर आर्ट ऐसे ही धीरे से शुरू हुआ था जो पूरे विश्व में जाना जाता है और उनका सामान अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बिकता है।कवर्धा निवासी पूर्व विधायक हमीद उल्लाह खान की पुत्री एवं अधिवक्ता अकबर कुरैशी की पत्नी शहनाज कुरैशी महिला सशक्तिकरण के लिए एक मिसाल बनकर उभरी है। अब तक 100 से अधिक अलग-अलग प्रकार के सामानों को अपने असिस्टेंट घनश्याम धुर्वे के साथ मिलकर रंग रूप दे चुकी है,जिसे बड़े बाजार की आवश्यकता है।

लकड़ी के टुकड़ों में कलाकारी कर नया रूप देने वाली शहनाज कुरैशी ने बताया कि लॉक डाउन के दौरान घर में फर्नीचर का कार्य चल रहा था,जहां बढ़ाई के द्वारा लकड़ी के छोटे-छोटे टुकड़ों को जिसमें डिजाइन भी बना हुआ था उसे काम नहीं आने पर फेंक देते थे उन टुकड़ों को देखने में काफी अच्छा लगने पर उठाकर रख ली थी। इन टुकड़ों को देखने पर लगने लगा था कि अगर इसमें जोड़कर कुछ कलाकारी किया जाए तो वेस्टेज सामान को उपयोग में लाया जा सकता है। इसी के चलते छोटे-छोटे लकड़ी के टुकड़ों को फेवीकोल में जोड़कर सबसे पहले फ्लावर प्लाट बनाई,जिसे घरवालों के साथ साथ आस पड़ोस के लोगों ने भी काफी सराहा तथा प्रशंसा भी किए,जिससे हौसला बढ़ गया तब मन में ठाना कि इस तरह के टुकड़ों को समेटकर नया रंगरूप दिया जाए तो घर में सजाने के काम भी आएगा।लकड़ी को तराश कर बनाया 100 से अधिक प्रकार का सामान। लकड़ी के टुकड़ों को एकत्रित कर इसमें कार्य करती गई तो हौसला बढ़ता गया और 100 से अधिक प्रकार के सामान रखने का बना चुकी है। लकड़ी में कलाकारी कर अबतक उनके द्वारा मसाला डब्बा,सौंफ-सुपाड़ी डब्बा, रोटी डब्बा, फ्लावर प्लाट, पेन, पेंसिल, चाबी,पेपरवेट रखने का सामान सहित सभी प्रकार के सूखा सामान रखने के लिए बनाया गया है।

विकसित हो सकता है कबीरधाम का आर्ट

कबीरधाम जिले में कलाकारों की कोई कमी नहीं है बस उन्हें अवसर प्रदान करने के लिए एक मंच की जरूरत है। शासन प्रशासन के द्वारा विभिन्न माध्यमों से कलाकारों को आगे बढ़ावा देने के लिए कार्य करती है। शहनाज कुरैशी के द्वारा लकड़ी के टुकड़ों से जो कलाकारी कर घरेलू व छोटे मोटे सामान रखने के लिए बनाया गया है उसे अगर बड़े बडेÞ शहरों में प्रदर्शनी के रूप में भेजा जाए तो कबीरधाम जिले के का नाम रोशन हो सकता है तथा इस कला को विकसित भी किया जा सकता है।

 

12-11-2020
ताकि जलती रहे जीवन-ज्योति : तारन प्रकाश सिन्हा की कलम से 

रायपुर। बेल्जियम, इटली, फ्रांस, चेक गणराज्य, आयरलैंड, पोलैंड, जर्मनी समेत तमाम यूरोपीय देश इस समय कोरोना की दूसरी लहर की चपेट में हैं। कोरोना की पहली लहर के बाद इनमें से ज्यादातर देशों ने उस पर प्रभावी नियंत्रण पा लेने का दावा किया था, बहुत से प्रतिबंध ढीले कर दिए गए थे, ऐसा लग रहा था कि जल्द ही जनजीवन सामान्य हो जाएगा। लेकिन यह एक भ्रम साबित हुआ। हालात एक बार फिर चिंताजनक है और नए सिरे से प्रतिबंधों की घोषणाएं की जा रही हैं। कहीं फिर कर्फ्यू लगाना पड़ रहा है, तो कहीं लॉक डाउन की नौबत है। यह सब इसलिए हुआ क्योंकि संक्रमण-दर में लगातार गिरावट देखकर लोगों ने मान लिया कि वायरस कमजोर हो गया है और महामारी समाप्ति की ओर है। उन्होंने इस तथ्य को भी नजरअंदाज करना शुरु कर दिया कि उनके अनुशासन के कारण ही कोरोना के प्रकोप को कुछ कम किया जा सका था। लोग सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क की अनिवार्यता को भी भूल गए। 

यूरोप में जो कुछ हो रहा है, उसे हमें एक सबक की तरह देखना चाहिए। भारत में इस समय हालात पहले से बेहतर हैं, लेकिन यदि हमने सावधानी नहीं बरती तो यह पहले से बदतर भी हो सकते हैं। संक्रमण-दर पर नियंत्रण का अर्थ यह नहीं होता कि हमने वायरस पर विजय पा लिया। जब तक इसका प्रभावी टीका नहीं आ जाता, तब तक हमें इसके खिलाफ युद्धरत रहना ही होगा। यह महामारी कितनी बुरी है, किस कदर नुकसान पहुंचाती है, किस-किस स्तर पर नुकसान पहुंचाती है, यह हम सबने देखा है। जिन लोगों ने कोरोना से अपने करीबियों को खोया है, अथवा स्वयं संक्रमित हो चुके हैं, उनका अहसास और भी घना है। जो लोग संक्रमण से जो लोग संक्रमण से उबर चुके हैं, वे इसके तरह-तरह के दुष्परिणामों को तब भी झेल रहे हैं।

इस समय त्यौहारी-मौसम है। दो दिनों बाद दीपावली है। तीज-त्यौहार हमें हमारे दुखों को कम करने में मदद करते हैं। नई आशाओं और उत्साह से भर देते हैं। इस बार भी हम सब दीपावली जरूर मनाएंगे। लेकिन हमें इस बात का भी खयाल रखना होगा कि ऐसा हम स्वयं को नई ऊर्जा से भरने के लिए करेंगे। नई मुसीबतों को न्योता देने के लिए नहीं। बाजार सज चुके हैं, रौनक भी है, खरीदारी भी जमकर की जा रही है, दुकानदारों और ग्राहकों दोनों की ही जिम्मेदारी है कि वे कोरोना के संक्रमण से खुद बचें और दूसरों को भी बचाएं। दीपावली पर शुभकामनाएं और आशीर्वाद खूब बांटे बटोरें, लेकिन इस बात पर भरोसा करते हुए कि गले मिलकर और हाथ-मिलाकर दी गई शुभकामनाओं जितना ही असर, हाथ जोड़कर दी-ली गई शुभकामनाओं में भी होता है। जिनके बारे में आप दिल से चाहते हैं कि वे हैप्पी-लाइफ गुजारें, उन्हें हैप्पी दिवाली कहने उनके घर न ही जाएं तो बेहतर। जिंदगी की रौशनी से बढ़कर और कोई रौशनी नहीं होती।
          भीड़-भड़क्का, धुवां-फटाका ले बचके संगवारी।
        मानव सब झन मास्क लगा के मातर अऊ देवारी।।

11-11-2020
सुगम स्वास्थ्य योजना से गर्भवती महिलाओं की राह हुई सुगम, प्रसव कराना हुआ आसान

रायपुर/दंतेवाड़ा। जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई दो अभिनव पहलों के कारण जिले में नक्सल प्रभावित दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं की राह अब सुगम हो गई है। अब उनको एम्बुलेंस के आभाव में अस्पताल न पहुँच पाने के कारण घर पर प्रसव कराने का जोखिम नहीं लेना पड़ रहा है, जिसका असर आंकड़ों में भी साफ़ नजर आ रहा है। पिछले साल के जुलाई, अगस्त और सितम्बर माह के एचएमआईएस (हेल्थ मैनेजमेंट एंड इन्फोर्मेशन सिस्टम) के संस्थागत और घरेलू प्रसव के आंकड़ों की तुलना विभाग द्वारा जारी किए गए इस वर्ष के आंकड़ों से की जाए तो यह ज्ञात होता है कि विगत तीन महीनों में संस्थागत प्रसवों में प्रतिमाह लगभग 14% की औसत दर से वृद्धि हुई है वहीं घरेलू प्रसवों में प्रतिमाह लगभग 33% की औसत दर से कमी दर्ज की गई है। 

इन दो पहलों से हुई गर्भवती महिलाओं की राह सुगम 

सुगम स्वास्थ्य योजना- बिना समय गंवाए जल्द से जल्द गर्भवती महिलाओं एवं आकस्मिक मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए सुगम स्वास्थ्य योजना की शुरुआत हुई थी। इसमें गांवों में ही उपलब्ध वाहन मालिकों से समन्वय स्थापित कर स्वास्थ्य विभाग द्वारा पंजीयन कराया गया है। यह योजना दूरस्थ व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों जहाँ पर एंबुलेंस नहीं पहुँच सकती है वहां के लिए बहुत ही लाभदायक है, जिसका असर आंकड़ों में भी दिख रहा है। इस योजना के अंतर्गत वाहन मालिकों को मरीजों को अस्पताल पहुँचाने के लिए भाड़ा भी दिया जा रहा है। 

हेल्थ कॉल सेंटर से प्रसूताओं को मिली राहत- जिले में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लॉक डाउन के बीच जुलाई माह में पहला हेल्थ कॉल सेंटर खोला गया था। इस हेल्थ कॉल सेंटर के माध्यम से स्थानीय बोली हल्बी एवं गोंडी में गर्भवती महिलाओं उनके प्रसव से 5 दिन पूर्व ही यह जानकारी दी जाने लगी कि उनकी संभावित प्रसव तिथि नजदीक आ गई है और उनको जल्द ही अस्पताल आना चाहिए इसके द्वारा उन्हें प्रसव के पहले ही अस्पताल लाकर भर्ती कराया जा रहा है। इस व्यवस्था से अब तक कई महिलाओं का सुरक्षित संस्थागत प्रसव हुआ है।

इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. वीरेन्द्र ठाकुर ने बताया, सुगम स्वास्थ्य एवं हेल्थ कॉल सेंटर योजना जिले के लिए काफी लाभप्रद रही है। इसके लागू होने से एंबुलेंस न पहुँच पाने के कारण मरीज़ को होने वाले जोखिम को कम करने में मदद मिली है साथ ही इन दोनों योजनाओं के प्रभाव से संस्थागत प्रसवों में वृद्धि हुई है, जबकि घरेलू प्रसवों की संख्या में लगातार कमी देखी जा रही है। साथ ही शासन की योजनाओं के सफल क्रियान्वयन से भी संस्थागत प्रसव में लगातार वृद्धि हो रही है। इस क्षेत्र में हम लगातार बेहतर कार्य करने का प्रयास कर रहे हैं ताकि माँ एवं बच्चे के स्वास्थ्य को बेहतर किया जा सके जिसमें जिला प्रशासन के साथ ही महिला एवं बाल विकास विभाग का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहता है।

अब तक इतने हुए लाभान्वित 
सुगम स्वास्थ्य के तहत अक्टूबर माह तक निजी वाहनों के द्वारा 104 मरीजों को अस्पताल तक पहुँचाया गया व वाहन मालिकों को इस सेवा कर बदले 29,200 रुपए का भुगतान किया गया है। निजी वाहनों से सर्वाधिक 40 मरीज जिला अस्पताल दंतेवाड़ा लाए गए जबकि कटे कल्याण जैसे दुर्गम व अति संवेदनशील विकासखंड में 22 मरीजों ने इस योजना का लाभ लिया। इसके अतिरिक्त कुआकोंडा विकासखंड में 17, गीदम में 16 व दंतेवाड़ा विकासखंड में 9 मरीज सुगम स्वास्थ्य योजना से लभान्वित हुए।

क्यों जरूरी थी यह पहल : सुगम स्वास्थ्य योजना प्रारंभ करने का प्रमुख कारण दूरस्थ एवं अंदरूनी गाँव तक मरीजों को निजी वाहनों के माध्यम से स्वास्थ्य केंद्र पहुँचाकर संस्थागत प्रसव दर में वृद्धि करना व दुर्घटना, सर्पदंश जैसी आपातकालीन स्थिति में होने वाली मृत्यु के दर में कमी करना है। जिले के अंदरूनी गांवों में समस्या सबसे ज्यादा है। मोबाइल नेटवर्क या मोबाइल के नहीं होने से कई बार ग्रामीण एंबुलेंस के लिए सूचना ही नहीं दे पाते थे। इसलिए यह योजना बेहद कारगर है।

पहले क्या थी स्थिति :  एंबुलेंस के नहीं पहुंचने पर पहले मरीजों को खाट में ही लेकर ग्रामीण कई किमी पैदल निकल जाते थे। अस्पतालों से गांवों की दूरी अधिक हो जाने के कारण ऐसे मरीजों की हालत और भी ज्यादा बिगड़ जाती थी। इस योजना की शुरुआत हो जाने से ऐसे मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। साथ ही गाड़ी का किराया भी प्रशासन के द्वारा वहन किया जा रहा है, ताकि मरीज के परिजनों पर आर्थिक दबाव न पड़े। साथ ही अब मरीज को अस्पताल तक पैदल लेकर जाने की जरूरत भी नहीं पड़ रही है।

 

08-11-2020
भूपेश बघेल ने कहा- खिलखिलाता बचपन हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि, बच्चे शिक्षा, हुनर और खेलकूद से बनाएं विशिष्ट पहचान

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल मासिक रेडियोवार्ता लोकवाणी की 12वीं कड़ी में रविवार को बच्चों से रूबरू हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों की सेहत और ये खुशी देखकर मुझे बहुत अच्छा लगा। खिलखिलाता हुआ बचपन हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है। हम चाहेंगे कि छत्तीसगढ़ के बच्चे अपनी सेहत, शिक्षा, हुनर, खेलकूद के कौशल, लगन, संस्कार के लिए अलग से पहचान बनाएं। देश-दुनिया में अपनी अलग और विशिष्ट पहचान बनाएं। राज्य सरकार बच्चों की अच्छी सेहत, उनकी बेहतर शिक्षा, हुनर विकसित करने, खेल कौशल को उत्कृष्ट बनाने के लिए अनेक योजनाएं संचालित कर रही है। इसके साथ ही साथ छत्तीसगढ़ की संस्कृति को सहेजने और उसके संवर्धन, संरक्षण के हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने आज लोकवाणी में ‘बालक-बालिकाओं की पढ़ाई, खेलकूद, भविष्य’ विषय पर बच्चों और प्रदेशवासियों के साथ अपने विचार साझा किए।

प्रदेश के विभिन्न जिलों के बच्चों ने रेडियोवार्ता की 12वीं कड़ी के लिए पढ़ाई, खेलकूद से संबंधित अनेक प्रश्न रिकार्ड करवाए थे। 14 नवम्बर को दीवाली के साथ बच्चों के प्यारे चाचा नेहरू का जन्मदिवस ‘बाल दिवस‘ भी है। इसलिए चाचा नेहरू से जुड़े बाल सुलभ रोचक प्रश्न भी बच्चों ने मुख्यमंत्री से पूछे। ‘मुख्यमंत्री ने सिलसिलेवार जवाब दिया। साथ ही उन्होंने स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के व्यक्त्वि, कृतित्व, उनके विचारों और व्यक्त्वि के रोचक पहलुओं से भी परिचित कराया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित नेहरू कितने उदार थे। पूरी दुनिया का कल्याण चाहते थे और यह भी सोचते थे कि हमें उसमें अपनी भूमिका खोजनी और निभानी चाहिए। किस तरह नेहरू बच्चों को सच्चाई और भलाई के रास्ते पर ले जाना चाहते थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि मैंने बहुत से बच्चों को देखा है जो अपने हिस्से का टिफिन किसी अन्य बच्चे को खिलाकर खुश होते हैं। मैंने बहुत से बच्चों को देखा है कि वे किसी गरीब बच्चे के प्रति कितना प्यार और करुणा का भाव रखते है। जब कोई अन्य बच्चा या उनका कोई मित्र भूख, बीमारी या किसी भेदभाव से पीड़ित होता है तो हमारे प्यारे बच्चे उसकी मदद के लिए अपने माता-पिता को राजी करते हैं। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी कोरोना काल में लॉक डाउन के दौरान ही ऐसे कितने उदाहरण सामने आए। जब हमारे प्यारे बच्चों ने अपने जेब खर्च से बचाकर जो राशि जमा की थी उसे जरुरतमंदों की मदद के लिए मुख्यमंत्री सहायता कोष में दान किया। या अपने आसपास के गरीबों को मदद करने के लिए खर्च कर दी। किसी एक नाम लेने से न्याय नहीं होगा इसलिए मैं सारे बच्चों को ऐसे नेक कामों के लिए बधाई देता हूं। मैं सभी पालकों से यह अपील करता हूं कि हो सकता है कि आपके पास साधन सीमित हो, लेकिन जब आपके बच्चे का हाथ किसी की मदद के लिए आगे बढ़ता है तो उसे रोकें नहीं।

थोड़ी-बहुत कमी-बेसी को परिस्थितियों के अनुसार समझें और उसके अनुरूप निर्णय लें। लेकिन बच्चों की यह भावना जिन्दा रहे और उन्हें इस सुख का एहसास हो, यह वातावरण बनाए रखना बहुत जरूरी है। बच्चों में करुणा होगी तो समाज भी बहुत खूबसूरत होगा। मुख्यमंत्री ने बच्चों के पूछे गए प्रश्नों के जवाब में बताया कि छत्तीसगढ़ में कक्षा 12वीं तक निःशुल्क पढ़ाई की व्यवस्था की गई है। खेलों के संबंध में मुख्यमंत्री ने बताया कि नारायणपुर जिले में खेलो इंडिया केन्द्र प्रारंभ करने का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा गया है। मल्लखम्भ अकादमी के लिए भूमि उपलब्ध कराकर आवश्यक सामग्रियों की व्यवस्था करायी जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोनाकाल में हम स्कूलों में बच्चों को सूखा राशन दे रहे थे और आंगनबाड़ियों में हमने गर्म खाना देना शुरू किया है। इस दिशा में हमारी योजनाएं और नवाचार लगातार जारी रहेंगे। एक बार फिर दीपावली और बाल दिवस की शुभकामनाएं।

02-11-2020
मछुआरों की समस्याओं को लेकर हुई बैठक, दिया जाएगा आर्थिक सहयोग

रायपुर। मछुआरों की समस्या को लेकर छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी मत्स्य महासंघ बोर्ड की बैठक तेलीबांधा स्थित मछली पालन विभाग परिसर में हुई। इसमें लॉक डाउन को लेकर मछुआरों को हुई हानि को लेकर चर्चा हुई। संचालक मंडल में यह निर्णय लिया गया कि मछुआरों को आर्थिक सहयोग दिया जाएगा। उनकी रोजी रोटी की व्यवस्था भी की जाएगी। बैठक में छत्तीसगढ़ मत्स्य महासंघ के अध्यक्ष रामकृष्ण धीवर, उपाध्यक्ष प्रकाश धीवर, मत्स्य बोर्ड के संचालक कृष्णा चंपालाल हिरवानी, फूलचंद धीवर, मोहन राज, राम बहादुर थापा, गायत्री गायकवाल एवं एमडी नाग व पीके भारती उपस्थित हुए।

01-11-2020
अनलॉक 6.0 शुरू,हॉल में अधिकतम 200 लोगों के इकट्ठा होने की अनुमति, मुंबई में दौड़ेगी लोकल ट्रेनें

नई दिल्ली। देश में अनलॉक 6.0 की 1 नवंबर से शुरुआत हो गई है। राज्यों में कंटेनमेंट जोन के बाहर अन्य गतिविधियों को बढ़ाने के साथ देश में अनलॉक की शुरुआत हो चुकी है। इस सप्ताह की शुरुआत में गृह मंत्रालय ने कहा था कि कोई और ढील नहीं दी जाएगी और पिछले महीने जारी किए गए अनलॉक 5.0 दिशानिर्देश 30 नवंबर तक लागू रहेंगे। हालांकि केंद्र सरकार ने इसे लेकर कोई नई गाइडलाइंस जारी नहीं की है। गृह मंत्रालय के अनुसार कन्टेन्मेंट जोन में 30 नवंबर तक लॉक डाउन सख्ती के साथ लागू रहेगा।गृह मंत्रालय की तरफ से जारी दिशा-निर्देश में कहा गया है कि केंद्र की मंजूरी को छोड़कर अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर पांबदी जारी रहेगी, जबकि राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को चरणबद्ध तरीके से स्कूलों और कोचिंग संस्थानों को खोलने पर फैसला करने की अनुमति प्रदान की गई है। दिशा-निर्देश के मुताबिक स्थिति के आकलन और कुछ शर्तों के साथ, संबंधित स्कूलों और संस्थानों के प्रबंधन के साथ विचार-विमर्श कर इस बारे में फैसला किया जाए।कन्टेन्मेंट जोन के बाहर सीटों की 50 प्रतिशत क्षमता के साथ सिनेमा, थिएटर और मल्टीप्लेक्स, व्यापार प्रदर्शनी, खिलाड़ियों के प्रशिक्षण के लिए स्विमिंग पूल, मनोरंजन पार्क और इसी तरह के स्थानों पर गतिविधियों की अनुमति जारी रहेगी। हालांकि इस दौरान कोविड से जुड़े दिशा निर्देशों का पालन करना होगा।

इसके लिए जारी एसओपी का खास ध्यान रखना होगा।दूसरी तरफ चुनावी राज्य बिहार और उपचुनाव वाले निर्वाचन क्षेत्रों में राजनीतिक जमावड़े में बंद जगहों या हॉल में अधिकतम 200 लोगों के इकट्ठा होने की अनुमति होगी। राजनीतिक सभा कन्टेन्मेंट जोन के बाहर ही हो सकती है।बयान में कहा गया कि अधिकतर गतिविधियों को मंजूरी दी जा चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोगों के जमा होने से जुड़ी कुछ गतिविधियों को कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी गई और एसओपी का पालन करने को कहा गया है। इन गतिविधियों में मेट्रो रेल, शॉपिंग मॉल, होटल, रेस्तरां और आतिथ्य सेवाएं, धार्मिक स्थल, योग और प्रशिक्षण संस्थान, जिम, सिनेमा हॉल, मनोरंजन पार्क आदि शामिल हैं। गृह मंत्रालय ने कहा कि चरणबद्ध तरीके से खोले जाने और गतिविधियों की बहाली से आशय आगे बढ़ने से है। हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि महामारी खत्म हो गई है और रोजाना की दिनचर्या में कोविड-19 के संबंध में उचित व्यवहार का पालन करने के साथ सावधानी बरतने की जरूरत है। अन्य आदेशों के अनुसार, 1 नवंबर से दिल्ली में बसें पूरी क्षमता के साथ चलेंगी और पश्चिम रेलवे मुंबई में अतिरिक्त लोकल ट्रेनें भी चलाएगा। इनके अलावा, गोवा में आज से कैसिनों खोले जाएंगे। उत्तर प्रदेश में दुधवा टाइगर रिजर्व पर्यटकों के लिए फिर से खुल जाएगा। इसके साथ-साथ असम में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान हाथी सफारी और जम्मू-कश्मीर में वैष्णो देवी मंदिर फिर से शुरू करेगा और अधिक तीर्थयात्रियों को अनुमति देगा। कोविड-19 महामारी के कारण महीनों तक बंद रहने के बाद केरल के मनोरम समुद्री तट रविवार से पर्यटकों के लिए खोल दिये गए हैं।दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) ने शादी समारोह में केवल 50 मेहमानों के प्रतिबंध को हटाकर लोगों को एक बड़ी राहत दी। मुख्य सचिव विजय देव द्वारा जारी देर रात को आए आदेश में डीडीएमए ने मेहमानों की संख्या को ध्यान में रखते हुए बैंक्वेट हॉल में 200 व्यक्तियों या शादियों के लिए बंद स्थानों की अनुमति दी। हालांकि, अंतिम संस्कार के लिए मेहमानों की संख्या में प्रतिबंध 20 तक जारी रहेगा।

 

20-10-2020
लॉक डाउन चला गया लेकिन वायरस नहीं गया, जब तक वैक्सीन नहीं तब तक ढिलाई नहीं बरते: नरेंद्र मोदी

नई दिल्ली। देशवासियों को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन भले ही चला गया हो लेकिन वायरस नहीं गया है। उन्होंने कहा कि बीते सात आठ महीने में हर भारतीय प्रयास से आज देश जिस संभली स्थिति में है उसे बिगड़ने नहीं देना है और अधिक सुधार करना है। मोदी ने कहा कि देश में आज रिकवरी रेट अच्छी है, मृत्युदर कम है। उन्होंने कहा कि प्रति दस लाख पर पांच हजार लोगों को कोरोना हुआ है। जबकि अमेरिका और ब्राजील जैसे देशों में यह आंकड़ा 25 हजार के पास है। भारत में प्रति दस लाख पर मौत 83 है जबकि अमेरिका सहित अन्य देशों में यह 600 के पार है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर बिना मास्क निकल रहे हैं तो अपने परिवार को, अपने बुजुर्गों की जान को खतरे में डाल रहे हैं। उन्होंने कहा, संत कबीरदास ने कहा है- पक्की खेती देख के, गरब किया किसान, अजहू जोला बहुत है, गर आवे तब जान।

कई बार हम पक्की हुई फसल देखकर ही अति आत्मविश्वास से भर जाते हैं कि अब तो काम हो गया। लेकिन, जब तक फसल घर न आ जाए तब तक काम पूरा नहीं मानना चाहिए। यानी, जब तक सफलता नहीं जाए लापरवाही नहीं करना चाहिए। जब तक इसकी वैक्सीन नहीं मिल जाती, कोरोना के खिलाफ लड़ाई को कमजोर नहीं पड़ने देना है। उन्होनें कहा कि मानव को बचाने के लिए पूरी दुनिया लगी हुई है। भारत में अभी कोरोना वैक्सीन पर कई काम चल रहा है। कोरोना की वैक्सीन जब भी आएगी, प्रत्येक भारतीय तक जल्द कैसे पहुंचे इसकी तैयारी जारी है। इसके लिए तेजी के साथ काम हो रहा है।

 

17-10-2020
छत्तीसगढ़ ने लॉक डाउन में प्रवासी श्रमिकों को दी बेहतर सुविधाएं, आईएसएसआरएफ के सर्वे में देशभर में अव्वल

रायपुर। लॉक डाउन के दौरान लौटे प्रवासी श्रमिकों को सुविधाएं देने के मामले में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल राज्य रहा है। यह निष्कर्ष इंटरफेरेंशियल सर्वे स्टेटिक्स एंड रिसर्च फाउंडेशन (आईएसएसआरएफ) की ओर से किए गए सर्वे में सामने आया है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर राज्य में प्रवासी श्रमिकों को विभिन्न प्रकार की सुविधा देने के लिए तेजी से कदम उठाए और अनेक श्रमिक हितैषी निर्णय लिए गए। इंटरफेरेंशियल सर्वे स्टेटिक्स एंड रिसर्च फाउंडेशन ने देश के 6 प्रमुख प्रवासी श्रमिकों की वापसी वाले राज्यों छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में सर्वे किया। जो लॉक डाउन के दौरान प्रवासी श्रमिकों को उपलब्ध कराई गई आजीविका, शिक्षा, स्वास्थ्य सहित विभिन्न बुनियादी सुविधाओं पर केन्द्रित रहा। 

छत्तीसगढ़ में लौटे शत-प्रतिशत प्रवासी श्रमिकों को क्वारेंटाइन की सुविधा उपलब्ध कराई गई। 97.80 प्रतिशत प्रवासी श्रमिकों को पात्रतानुसार नि:शुल्क और रियायती दरों पर राशन दिया गया। इसी तरह श्रमिक परिवारों को एलपीजी कनेक्शन, नगद सहायता, कृषि और मनरेगा में रोजगार और कृषि ऋण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई। छत्तीसगढ़ श्रमिकों को नि:शुल्क एलपीजी कनेक्शन देने के मामले में सर्वेक्षित राज्यों में पहले स्थान पर है। यह सर्वे बिलासपुर, दंतेवाड़ा, जशपुर, महासमुंद और राजनांदगांव की 99 ग्राम पंचायतों में किया गया। इसमें 5 सौ से अधिक प्रवासी श्रमिकों को शामिल किया गया है। छत्तीसगढ़ में किए गए सर्वे में बिलासपुर जिले की 28, दंतेवाड़ा की 15, जशपुर की 20, महासमुंद की 19 और राजनांदगांव की 17 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इन ग्राम पंचायतों में 30 जून से 28 जुलाई के बीच सर्वेक्षण किया गया। 

सर्वे के अनुसार छत्तीसगढ़ के श्रमिकों को दो श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है। पहली श्रेणी में गैर कृषि कार्य में संलग्न श्रमिक, जो 52.98 प्रतिशत स्किल्ड हैं और दूसरी श्रेणी में आयरन और वेल्डिंग, फेब्रीकेशन कार्यों में 40.43 प्रतिशत स्किल्ड हैं। कुशल श्रमिकों में छत्तीसगढ़ का योगदान एक तिहाई है। छत्तीसगढ़ से 63.94 प्रतिशत श्रमिक कंस्ट्रक्शन, पाइंप कटिंग वर्क में स्किल्ड हैं। आईएसएसआरएफ की ओर से ऑन माइग्रेन वर्कस विषय पर किए गए सर्वे में शहरों से गांव में लौटने वाले प्रवासी श्रमिकों पर लॉक डाउन के दौरान उनकी आजीविका और उनकी स्थित पर पड़ने वाले प्रभावों का छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के 34 जिलों में अध्ययन किया गया। सर्वे रिपोर्ट देखने यहां क्लिक करें...

 

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