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26-12-2020
राम वन पथ गमन रथ का शहर में हुआ स्वागत, निगम क्षेत्र के सभी वार्डों में पहुंची यात्रा

राजनांदगांव।  राम वनपथ गमन यात्रा रथ, जो चंदखुरी स्थित माता कौशल्या के मन्दिर से शुरू हुई है। राजनांदगांव में शनिवार की सुबह आगमन हुआ,जो विभिन्न स्थानों गुजरती हुई शहर के लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती रही। वास्तविक रूप में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम किस मार्ग से होकर वन की ओर प्रस्थान किये थे यह लोगों के जेहन में बसाने का एक सार्थक प्रयास है। शनिवार को नगर की प्रथम नागरिक महापौर हेमा देशमुख सहित निगम निगम परिवार एवं काँग्रेसज़न सहित सभी श्रद्धालुओं ने रथ के साथ नगर भ्रमण किया।

 

 

17-12-2020
शिवरीनारायण पहुँची राम वन गमन पथ की बाइक रैली, चंदखुरी के लिए किया रवाना

जांजगीर-चांपा। जिले के शिवरीनारायण पहुँची राम वन गमन पथ की बाइक रैली को गुरुवार को चंदखुरी के लिए रवाना कर दिया गया है। बता दें कि बुधवार रात रैली बलौदाबाजार जिले के गिधौरी से जांजगीर-चांपा जिले के शिवरीनारायण पहुँची थी। इसे गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष महंत रामसुंदर दास ने पूजा पाठ कर आज शिवरीनारायण से चंदखुरी के लिए रवाना कर दिया है। इस अवसर पर महंत रामसुंदर दास के साथ कलेक्टर, एसपी, जिला पंचायत सीईओ भी मौजूद रहे। बता दें कि राम वन गमन पर्यटन पथ और बाइक रैली प्रदेश की उत्तर व दक्षिण के दोनों छोरों से शुरू की गई है। 4 दिनों तक चलने वाली पर्यटन रथ यात्रा 1575 किलोमीटर की दूरी तक करेगी। राम गमन पथ के दोनों सिरों से क्रमशः उत्तर दिशा स्थित कोरिया जिले के सीतामढ़ी हर चैरा तथा दक्षिण स्थित सुकमा जिले के राम-राम से शुरू की गई है। इस बाइक रैली में सैकड़ों की तादात में लोग शामिल हुए हैं।

05-11-2020
चंदखुरी कौशिल्या माता मंदिर परिसर के विकास कार्यों का टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक ने किया मुआयना

रायपुर। छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की नवनियुक्त प्रबंध संचालक रानू साहू ने गुुरूवार को पदभार ग्रहण करने के पश्चात बोर्ड के अधिकारियों के साथ चंदखुरी स्थित कौशिल्या माता मंदिर परिसर पहुंची और वहां राम वन गमन परिपथ के अंतर्गत कराए जा रहे विकास एवं निर्माण कार्यों का मुआयना किया। प्रबंधक संचालक साहू ने चंदखुरी में विकास कार्यो के अवलोकन किया और विकास कार्यों समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूरा कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राम वन गमन पर्यटन परिपथ, राज्य शासन की महत्वाकांक्षी योजना है। इसमें किसी भी तरह की लेट-लतीफी एवं उदासीनता नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों के साथ ही राम वनगमन पर्यटन परिपथ को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पटल पर पहचान दिलाना उनकी प्राथमिकता होगी। चिन्हांकित 9 धार्मिक स्थलों में लैण्ड स्केपिंग, पौधारोपण की एकरूपता एवं सुंदरता पर विशेष रूप से ध्यान रखा जा रहा है।

 

 

28-10-2020
सुविधा: पुलिस अकादमी में खुला एटीएम,जल्द खुलेगा बैंक

रायपुर। चंदखुरी स्थित पुलिस अकादमी में बुधवार को भारतीय स्टेट बैंक के एटीएम का शुभारंभ हुआ। इसका उद्घाटन पुलिस अकादमी के निर्देशक जीपी सिंह व भारतीय स्टेट बैंक के उप महाप्रबंधक परविंदर भारती ने किया। इस अवसर पर क्षेत्रीय आवश्यकता के मद्देनजर बैंक के शाखा खोलने की मांग परविंदर भारती ने अति शीघ्र सर्वे करवा निर्णय लेने का आश्वासन दिया।बता दें कि पुलिस अकादमी में पदस्थ अधिकारी व कर्मचारी तथा यहां प्रशिक्षण में आने वाले सहित आसपास के ग्रामीणों को नगदी निकालने की सुविधा के लिए चंदखुरी फार्म में एकमात्र पंजाब नेशनल बैंक का एटीएम था। इसकी वजह से रकम निकासी में मुश्किल का सामना करना पड़ता था। इसे देखते हुए पदस्थ आईपीएस डिप्टी डायरेक्टर विजय अग्रवाल काफ़ी समय से यहां एटीएम स्थापित करवाने का प्रयास कर रहे थे,जिन्हें आज सफलता मिली है।

 

13-08-2020
Video : किन कारणों से संघ प्रमुख माता कौशल्या के जन्मभूमि विवाद पर खामोश रहे : विकास तिवारी 

रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता व सचिव विकास तिवारी ने कहा है कि, आगामी दिनों में संघ प्रमुख मोहन भागवत का दो दिवसीय दौरा छत्तीसगढ़ राज्य में है। मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जन्मभूमि विवाद और मंदिर निर्माण का श्रेय लेने की होड़ में शामिल संघ प्रमुख डॉक्टर मोहन भागवत, कौशल्या माता के जन्मभूमि विवाद पर पिछले बीस सालों से खामोश क्यों थे? जबकि उनका लगातार दौरा छत्तीसगढ़ राज्य और राजधानी रायपुर में होता था। किन कारणों से भगवान राम की माता कौशल्या के जन्मभूमि में स्थित मंदिर गर्भ-गृह में लगे ताले पर संघ प्रमुख खामोश थे? अब जब वह दो दिवसीय प्रदेश के दौरे पर आ रहे हैं, तो कांग्रेस पार्टी उनसे पूछना चाहती है कि, क्या डॉक्टर मोहन भागवत भगवान माता कौशल्या के मंदिर चंदखुरी दर्शन के लिए जाएंगे? क्या वह यह जानने का प्रयास करेंगे कि, किन कारणों से पिछले बीस सालों से कौशल्या माता के मंदिर के गर्भ गृह में ताला लगा कर रखा गया था? इस विषय पर संघ समर्थित पूर्ववर्ती भाजपा की रमन सरकार,छत्तीसगढ़ राज्य की आरएसएस इकाई और विश्व हिंदू परिषद इकाई खामोश क्यों थी? इस बात की जानकारी क्या हुआ लेना उचित समझेंगे? 

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा है कि, लगातार आरएसएस हिंदुत्व और भगवान राम जन्मभूमि विवाद की बात करती है,पर छत्तीसगढ़ राज्य में माता कौशल्या जन्मभूमि विवाद और राम वन गमन को हाशिए में रखे जाने के विषय पर चुप्पी साधे रखती है। जबकि पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह खुद एक स्वयंसेवक हैं। लगातार संघ प्रमुख मोहन भागवत के सतत संपर्क में रहते हैं। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा है कि, केंद्र की मोदी सरकार ने रामायण कॉरिडोर योजना की घोषणा की है। छत्तीसगढ़ राज्य के जगदलपुर शहर मात्र को ही इस परियोजना में शामिल किया गया है। जबकि यह सर्वविदित है कि,छत्तीसगढ़ राज्य पूर्व में कौशल राज्य था। माता कौशल्या का मायका था,भगवान राम का ननिहाल था। इसी कौशल राज्य के विभिन्न स्थानों से गुजर कर,रुक कर भगवान राम,माता सीता और  लक्ष्मण बहुत से स्थानों पर रुके। वनवास का समय व्यतीत किया, जो कि समूचे विश्व के राम भक्तों के लिए एक पवित्र तीर्थ स्थल है।

13-08-2020
छत्तीसगढ़ की पावन धरा पौराणिक काल से दुनिया को अपनी ओर खींचती है...

रायपुर। छत्तीसगढ़ की पावन धरा पौराणिक काल से दुनिया को अपनी ओर खींचती रही है। मर्यादा पुरूषोत्तम राम का ननिहाल चंदखुरी छत्तीसगढ़ में है। राम छत्तीसगढ़ियों की जीवन-शैली और दिनचर्या का अंग हैं। प्रातः छत्तीसगढ़ के लोग उठकर एक-दूसरे से राम-राम कह कर अभिवादन करते हैं। छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति में हर मामा अपने भान्जे को राम मानता है, आस्था से उसके पैर पड़ता है। पुरातन काल से छत्तीसगढ़ में राम लोगों के मानसपटल पर भावनात्मक रूप से जुड़े हैं। वहीं पर भगवान राम ने 14 वर्ष वनवास के दौरान लम्बा समय छत्तीसगढ़ की धरा पर गुजारा था। वनवास के दौरान श्रीराम छत्तीसगढ़ के जिन स्थानों से गुजरे थे उसे राम वन गमन पथ के रूप में विकसित करने कार्य योजना बनाई गई, जिसकी शुरुआत चंदखुरी से हो चुकी हैं।

राम वन गमन पर्यटन परपिथ के अंतर्गत जांजगीर चांपा जिले में शिवरीनारायण, बलौदा बाजार में तुरतुरिया, रायपुर में चंदखुरी और गरियाबंद के राजिम में परिपथ के विकास कार्यों की शुरुआत हो चुकी है। इसी तरह से राम वन गमन पर्यटन परिपथ में कोरिया जिले में सीतामढ़ी हर-चौका, सरगुजा में रामगढ़, धमतरी में सप्तऋषि आश्रम, बस्तर में जगदलपुर, सुकमा में रामाराम सहित करीब 75 स्थलों को चिन्हांकित कर लिया गया है। अब मुख्यमंत्री के निर्देशन में छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना राम वन गमन परिपथ को विकसित करने का कार्य प्रारंभ हो गया है। इस योजना से लोगों की आस्था के अनुरूप राम की यादों को पौराणिक धार्मिक कथाओं से सुनते आ रहे लोग इन पौराणिक महत्व के स्थल को देख सकेगें। छत्तीसगढ़ की पावन भूमि पर्यटन तीर्थ स्थल के रूप में विकसित होने के साथ यहां रोजगार के साधनों का विकास होगा। अंदरूनी दुर्गम वन क्षेत्रों में सड़क परिवहन भी विकसित होगा जिससे कई आर्थिक गतिविधियों का स्वयं संचालन होने लगेगा। देश और दुनिया के आस्थावान लोग रामायण सर्किट की धार्मिक तीर्थ यात्रा पर निकलेंगे तो भगवान राम के ननिहाल के दर्शन करेंगे।

 

05-08-2020
देश दुनिया के लोग रामायण सर्किट की तीर्थ यात्रा पर निकलेंगे तो भगवान राम के ननिहाल छत्तीसगढ़ का दर्शन करेंगे

रायपुर। मर्यादा पुरूषोत्तम राम का ननिहाल चंदखुरी छत्तीसगढ़ में है। राम छत्तीसगढ़ियों की जीवन-शैली और दिनचर्या का अंग हैं। प्रातः छत्तीसगढ़ के लोग उठकर एक-दूसरे से राम-राम कह कर अभिवादन करते हैं। छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति में हर मामा अपने भान्जे को राम मानता है, आस्था से उसके पैर पड़ता है। पुरातन काल से छत्तीसगढ़ में राम लोगों के मानसपटल पर भावनात्मक रूप से जुड़े हैं। वहीं पर भगवान राम ने 14 वर्ष वनवास के दौरान लम्बा समय छत्तीसगढ़ की धरा पर गुजारा था। वनवास के दौरान श्रीराम छत्तीसगढ़ के जिन स्थानों से गुजरे थे उसे राम वन गमन पथ के रूप में विकसित करने कार्य योजना बनाई गई, जिसकी शुरूआत चंदखुरी से हो चुकी हैं।राम वन गमन पर्यटन परपिथ के अंतर्गत जांजगीर चांपा जिले में शिवरीनारायण, बलौदा बाजार में तुरतुरिया, रायपुर में चंदखुरी और गरियाबंद के राजिम में परिपथ के विकास कार्यों की शुरूआत हो चुकी है।

इसी तरह से राम वन गमन पर्यटन परिपथ में कोरिया जिले में सीतामढी हर-चौका, सरगुजा में रामगढ़, धमतरी में सप्तऋषि आश्रम, बस्तर में जगदलपुर, सुकमा में रामाराम सहित करीब 75 स्थलों को चिन्हांकित कर लिया गया है। अब मुख्यमंत्री के निर्देशन में छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना राम वन गमन परिपथ को विकसित करने का कार्य प्रारंभ हो गया है। इस योजना से लोगों की आस्था को और बल मिल सकेगा और राम की यादों को पौराणिक धार्मिक कथाओं से सुनते आ रहे लोग इन पौराणिक महत्व के स्थल को देख सकेगें। छत्तीसगढ़ की पावन भूमि पर्यटन तीर्थ स्थल के रूप में विकसित होने के साथ यहां रोजगार के साधनों का विकास होगा। अंदरूनी दुर्गम वन क्षेत्रों में सड़क परिवहन भी विकसित होगा,जिससे कई आर्थिक गतिविधियों का स्वयं संचालन होने लगेगा। देश और दुनिया के आस्थावान लोग रामायण सर्किट की धार्मिक तीर्थयात्रा पर निकलेंगे तो भगवान राम के ननिहाल के दर्शन करेंगे।

05-08-2020
Video: अपने ननिहाल चंदखुरी में माता कौशल्या की गोद में विराजमान हैं रामलला

रायपुर। छत्तीसगढ़ के चंदखुरी में भगवान राम का ननिहाल है। चंदखुरी स्थित कौशल्या मंदिर में रामलला अपनी माता की गोद में विराजमान है। माता कौशल्या परिसर के सौंदर्यीकरण और विकास का कार्य इसी अगस्त माह के अंतिम सप्ताह से शुरू हो जाएगा। 15 करोड़ 75 लाख रुपए की लागत से होने वाले इस कार्य के लिए बीते दिसंबर माह में भूमिपूजन किया गया था। चंदखुरी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की महत्वाकांक्षी राम वन गमन पथ परियोजना में शामिल है। इसके तहत कोरिया से सुकमा तक प्रभु राम से संबंधित 75 स्थानों को चिन्हित किया गया है। प्रथम चरण में इनमें से 9 स्थानों का सौंदर्यीकरण और विकास 137 करोड़ 45 लाख रुपए की लागत से किया जा रहा है।

 

02-08-2020
माता कौशल्या की जन्मभूमि की तरह महर्षि वाल्मिकी के आश्रम तुरतुरिया को विकसित करने को तैयार भूपेश सरकार

रायपुर। छत्तीसगढ़ में न केवल प्रभु राम की माता कौशल्या का जन्म हुआ, रामायण के माध्यम से रामकथा को दुनिया के सामने लाने वाले महर्षि वाल्मिकी ने भी इसी भूमि पर आश्रम का निर्माण कर साधना की। प्रदेश की भूपेश बघेल सरकार ने कौशल्या के जन्म-स्थल चंदखुरी की तरह तुरतुरिया के वाल्मिकी आश्रम को भी पर्यटन-तीर्थ के रूप में विकसित करने के लिए कार्य की रूपरेखा तैयार कर ली है। इसी तरह रामकथा से संबंधित एक और महत्वपूर्ण स्थल शिवरीनारायण के विकास के लिए कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। शिवरीनारायण वही स्थान है जहां माता शबरी ने प्रभु राम को जूठे बेर खिलाए थे।तुरतुरिया की ही तरह शिवरीनारायण भी एक सुंदर जगह है। जांजगीर-चांपा जिले में महानदी, जोंक और शिवनाथ नदियों के संगम पर स्थित धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व का यह स्थान रामकथा से संबंधित होने के साथ-साथ भगवान जगन्नाथ से भी संबंधित है। मान्यताओं के अनुसार यह शहर चारों युगों में विद्यमान रहा और अलग-अलग नामों से जाना गया।

यहीं से भगवान जगन्नाथ का विग्रह ओडिशा के पुरी स्थित मंदिर में ले जाकर स्थापित किया गया। हर साल माघ पूर्णिमा को भगवान जगन्नाथ शिवरीनारायण में विराजते हैं। इस स्थान को गुप्त-तीर्थ तथा छत्तीसगढ़ के जगन्नाथ-पुरी के नाम से भी जाना जाता है। छत्तीसगढ़ शासन ने शिवरीनारायण के भी सौंदर्यीकरण और विकास की कार्ययोजना तैयार की है। यहां भी पर्यटन सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।रायपुर जिले के चंदखुरी की तरह तुरतुरिया और शिवरीनारायण भी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की महत्वाकांक्षी राम वन गमन पथ परियोजना में शामिल हैं। 137.45 करोड़ रुपए की इस परियोजना के पहले चरण में 9 स्थानों को विकास और सौंदर्यीकरण के लिए चिन्हिंत किया गया है। प्रदेश में कुल 75 ऐसे स्थानों की पहचान की गई है, जहां अपने वनवास के दौरान भगवान राम या तो ठहरे थे, अथवा जहां से वे गुजरे थे। दिसंबर माह में चंदखुरी स्थित माता कौशल्या मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण व विस्तार के कार्य के शिलान्यास के साथ ही राम वन गमन पथ में स्थित सभी 9 चिन्हिंत स्थानों के भी सौंदर्यीकरण व विस्तार के कार्य की शुरुआत की जा चुकी है।

29-07-2020
माता कौशल्या की सपत्नीक पूजा की भूपेश बघेल ने,मांगा राज्य की खुशहाली का वरदान,चंदखुरी में जल्द बनेगा भव्य मंदिर

रायपुर। राजधानी के समीप माता कौशल्या की जन्मभूमि चंदखुरी में जल्द ही भव्य मंदिर का निर्माण शुरू हो जाएगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज धर्मपत्नी मुक्तेश्वरी बघेल और परिवार के सदस्यों के साथ चंदखुरी पहुंचकर वहां स्थित माता कौशल्या के प्राचीन मंदिर में पूजा-अर्चना की और प्रदेश की खुशहाली और समृद्धि की कामना की। उन्होंने मंदिर के सौन्दर्यीकरण और परिसर के विकास के लिए तैयार परियोजना की विस्तृत जानकारी ली। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार राम वन गमन पथ पर पड़ने वाले महत्वपूर्ण स्थलों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर रही है। इसकी शुरूआत चंदखुरी स्थित माता कौशल्या के मंदिर के सौंदर्यीकरण कार्य के बीते 22 दिसम्बर को भूमि-पूजन के साथ कर दी गई है। भव्य मंदिर की निर्माण की कार्ययोजना में परिसर में विद्युतीकरण,तालाब का सौंदर्यीकरण,घाट निर्माण,पार्किंग,परिक्रमा पथ का विकास आदि कार्य शामिल किए गए हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ भगवान राम का ननिहाल है। यहां कण-कण में भगवान राम बसे हुए हैं। भगवान राम ने वनवास का बहुत सा समय यहां व्यतीत किए हैं। छत्तीसगढ़ सरकार भगवान राम के वन गमन मार्ग को पर्यटन परिपथ के रूप में विकसित कर रही है ताकि इन स्थलों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति मिल सके। बघेल ने कहा कि चंदखुरी में 15 करोड़ की लागत से सौन्दर्यीकरण का कार्य कराया जाएगा। उन्होंने इस अवसर पर यहां तालाब के बीच से होकर गुजरने वाले पुल की मजबूती के साथ ही यहां परिक्रमा पथ, सर्वसुविधायुक्त धर्मशाला और शौचालय बनाने कहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सौन्दर्यीकरण कार्य का भूमिपूजन हो गया है यहां अगस्त के तीसरे सप्ताह से निर्माण कार्य प्रारंभ हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर ग्रामीणों की मांग पर मंदिर के पास से बायपास सड़क की स्वीकृति प्रदान करते हुए आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए। वहीं ग्राम वासियों की सहुलियत को देखते हुए चंदखुरी में राष्ट्रीयकृत बैंक की शाखा खोलने के निर्देश जिला अधिकारियों को दिए है।  बघेल ने इस अवसर पर मंदिर परिसर पर बेल और उनकी धर्मपत्नी ने महुआ का पौधा भी रोपा। इसके साथ ही परिसर में आवंला, पीपल, अमरूद और करंज आदि के पौधे भी लगाए गए। इस अवसर पर नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ.शिव कुमार डहरिया, जनपद पंचायत आरंग के अध्यक्ष खिलेश देवांगन, ग्राम पंचायत चंदखुरी की सरपंच मालती धीवर और कौशल्या माता समिति के अध्यक्ष देवेन्द्र वर्मा और ग्रामीणजन उपस्थित थे।

गौरतलब है कि त्रेतायुगीन छत्तीसगढ़ का प्राचीन नाम दक्षिण कोसल एवं दण्डकारण्य के रूप में विख्यात था। प्रभु श्रीराम ने उत्तर भारत से छत्तीसगढ़ में प्रवेश के बाद विभिन्न स्थानों पर चौमासा व्यतीत करते हुए दक्षिण भारत में प्रवेश किया गया था। छत्तीसगढ़ में कोरिया जिले की गवाई नदी से होकर सीतामढ़ी हरचौका नामक स्थान से प्रभु श्रीराम ने छत्तीसगढ़ में प्रवेश किया था। इस दौरान उन्होंने 75 स्थलों का भ्रमण करते हुए सुकमा जिले के रामाराम से दक्षिण भारत में प्रवेश किया था। उक्त स्थलों में से 51 स्थल ऐसे है, जहां प्रभु श्रीराम ने भ्रमण के दौरान रूक कर कुछ समय व्यतीत किया था। प्रथम चरण में इनमें से 9 स्थलों को विकसित किया जाएगा। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राम वन गमन पथ का पर्यटन की दृष्टि से विकास की योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य राज्य में आने वाले पर्यटकों, आगन्तुकों के साथ-साथ देश और राज्य के लोगों को भी राम वन गमन मार्ग व स्थलों से परिचित कराना एवं इन ऐतिहासिक स्थलों के भ्रमण के दौरान पर्यटकों को उच्च स्तर की सुविधाएं भी उपलब्ध कराना है। छत्तीसगढ़ में राम वन गमन पर्यटन परिपथ को विकसित करने के उद्देश्य से प्रथम चरण में 09 स्थलों का चयन किया गया है। इन स्थलों में सीतामढ़ी-हरचौका (कोरिया), रामगढ़ (अम्बिकापुर), शिवरीनारायण (जांजगीर-चांपा), तुरतुरिया (बलौदाबाजार), चंदखुरी (रायपुर), राजिम (गरियाबंद), सिहावा-सप्तऋषि आश्रम (धमतरी), जगदलपुर (बस्तर), रामाराम (सुकमा) शामिल हैं। राम वन गमन पर्यटन परिपथ में प्रस्तावित 09 स्थलों को लेते हुए पर्यटन विभाग द्वारा एक कॉन्सेप्ट प्लान तैयार किया गया है, जिसकी लागत 137.45 करोड़ रूपए है। राम वन गमन पर्यटन परिपथ हेतु राज्य शासन द्वारा गत वर्ष (2019-20) राशि 5 करोड़ रूपए और इस वर्ष (2020-21) 10 करोड़ रूपए का प्रावधान बजट में किया गया है। इस तरह कुल राशि रूपए 15 करोड़ राज्य शासन ने स्वीकृति दी ।

10-07-2020
चंदखुरी और सेमरिया गांव के लिए मुख्यमंत्री समग्र विकास योजना के तहत 20 लाख मंज़ूर, डॉ. डहरिया की पहल

रायपुर। नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ.शिवकुमार डहरिया की पहल पर आरंग विकासखण्ड के ग्राम चंदखुरी और सेमरिया में मुख्यमंत्री समग्र विकास योजना के तहत 20 लाख 80 हजार रूपए की स्वीकृति प्रदान की गई है। योजना के तहत चंदखुरी में 3 सीसी रोड़ निर्माण के लिए प्रत्येक सीसी रोड़ 2 लाख 60 हजार रूपए की मांग से 7 लाख 80 हजार रूपए की मंजूरी मिली है। इसी तरह पंचायत भवन के पास रंगमंच निर्माण के लिए 6 लाख 50 हजार रूपए की स्वीकृति दी गई है। इसी तरह आरंग विकासखण्ड के ही ग्राम सेमरिया में मुख्यमंत्री समग्र विकास योजना के तहत सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 6 लाख 50 हजार रूपए की स्वीकृति दी गई है।

06-06-2020
राम वनपथ गमन के सौंदर्यीकरण के पहले चरण में चंदखुरी के कौशल्या माता मंदिर का होगा कायाकल्प

रायपुर। पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू ने राम वनपथ गमन पर्यटन परिपथ के पहले चरण में चयनित 9 स्थलों में से चंदखुरी के विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन के प्रस्तुतीकरण का अवलोकन किया। उन्होंने चंदखुरी में माता कौशल्या की मंदिर और वहां के तालाबों,घाटों की नैसर्गिक सुंदरता को ध्यान में रखकर सौंदर्यीकरण का कार्य कराए जाने की बात कही। ज्योति कलश कक्ष को एक विशेष आकार देकर आकर्षक बनाने, ताकि कम स्थान में अधिक से अधिक दीप प्रज्वलित किए जा सके।  मंदिर परिसर में चारों ओर औषधीय और फलदार पौधे लगाने और मंदिर परिसर के पुल का चौड़ीकरण के निर्देश दिए। साहू ने राजिम में किए जाने वाले पर्यटन विकास के कार्यों का स्वयं स्थल निरीक्षण करने को कहा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जिन पर्यटन स्थलों में विकास कार्य किए जाने हैं उन स्थलों का निरीक्षण करने के बाद ही वहां की विशेषता, महत्ता और आवश्यकता को ध्यान में रखकर निर्माण कार्य किए जाये। ताकि धन का अपव्यय न हो और कम लागत में महत्वपूर्ण सुविधाओं का विस्तार हो सके।बता दें कि छत्तीसगढ़ में राम वनपथ गमन पर्यटन परिपथ विकसित करने के लिए प्रदेश के 9 स्थलों का चयन करते हुए 137 करोड़ 45 लाख रूपए की लागत का एक कॉन्सेप्ट प्लान तैयार किया गया है। इन स्थलों को केन्द्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना के तहत पर्यटकों की सुविधा के लिए विश्वस्तरीय अधोसंरचनाएं विकसित करने का प्रावधान है।

चयनित स्थलों में सीतामढ़ी-हरचौका जिला कोरिया, रामगढ़ जिला सरगुजा, शिवरीनारायण जिला जांजगीर-चांपा, तुरतुरिया जिला बलौदाबाजार, चंदखुरी जिला रायपुर, राजिम जिला गरियाबंद, सिहावा-सप्तऋषि आश्रम जिला धमतरी, जगदलपुर जिला बस्तर और रामाराम जिला सुकमा शामिल हैं। राम वनपथ गमन पर्यटन परिपथ के लिए राज्य शासन ने गत वित्तीय वर्ष 2019-20 में 5 करोड़ और चालू वित्तीय वर्ष 2020-21 में 10 करोड़ रूपए का प्रावधान बजट में किया है।पर्यटन मंत्री ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्थित पर्यटन स्थलों-पहाड़ों, झरनों, जलाशयों, एतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के स्थलों के आसपास पर्यटकों खास कर बच्चों के लिए गार्डन,झूले और वरिष्ठ नागरिकों के लिए पाथ आदि निर्माण कर प्रारंभिक स्तर पर कराने को कहा। उन्होंने कहा कि जैव विविधता और उन पर्यटन स्थल की प्राकृतिक सुंदरता को ध्यान में रखकर ड्राइंग और डिजाइन तैयार करें, ताकि वे अपने वास्तविक रूप में प्राकृतिक सौंदर्य के साथ पर्यटकों को आकर्षित कर सकें। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण के समय इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखा जाए कि उस स्थान विशेष से संबंधित कथाओं, संगीत, भजन आदि को समावेश करते हुए रिकॉर्डिंग तैयार की जाए,जिससे कि पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं को उन स्थानों की विशेषता के बारे में भी जानकारी मिल सके और उन स्थानों की महत्ता भी प्रतिपादित हो सके।

 

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