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17-11-2019
संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार से, नागरिकता विधेयक  पारित कर सकती है सरकार

नई दिल्ली। सोमवार से शुरू होने जा रहे संसद के शीतकालीन सत्र में नागरिकता विधेयक पेश करने की सरकार की योजना, जम्मू कश्मीर की स्थिति, आर्थिक सुस्ती और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव होने की संभावना है।नागरिकता (संशोधन) विधेयक को पारित कराने के अलावा इस सत्र के दौरान दो अहम अध्यादेशों को कानून में परिवर्तित कराना भी सरकार की योजना में शामिल है। बता दें कि आयकर अधिनियम, 1961 और वित्त अधिनियम, 2019 में संशोधन को प्रभावी बनाने के लिए सितंबर में एक अध्यादेश जारी किया गया था जिसका उद्देश्य नई एवं घरेलू विनिर्माण कंपनियों के लिए कॉरपोरेट कर की दर में कमी लाकर आर्थिक सुस्ती को रोकना और विकास को बढ़ावा देना है। दूसरा अध्यादेश भी सितंबर में जारी किया गया था जिसमें ई-सिगरेट और इसी तरह के उत्पाद की बिक्री, निर्माण एवं भंडारण पर प्रतिबंध लगाया गया है।

लोकसभा चुनाव में मिले अपार जनादेश के साथ सत्ता में वापसी करने वाली भाजपा नीत राजग सरकार का यह इस कार्यकाल में दूसरा संसद सत्र है। संसद का पहला सत्र काफी बेहतर रहा। इस सत्र के दौरान फौरी तीन तलाक की प्रथा को दंडनीय बनाने, राष्ट्रीय जांच एजेंसी को और अधिक शक्तियां देने जैसे कई अहम विधेयक दोनों सदनों में पारित हुए। इस दौरान जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे को हटाने और इसे दो केंद्रशासित क्षेत्रों-जम्मू कश्मीर तथा लद्दाख में विभाजित करने का प्रस्ताव भी दोनों सदनों में पारित हुआ। सोमवार से शुरू हो रहे शीतकालीन सत्र में सरकार विवादास्पद नागरिकता (संशोधन) विधेयक को पारित कराने की तैयारी में है जो भाजपा का अहम मुद्दा है। इसका लक्ष्य पड़ोसी देशों से आए गैर-मुस्लिम प्रवासियों को नागरिकता प्रदान करना है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सरकार ने सत्र के दौरान अपनी कार्यसूची में इस विधेयक को सूचीबद्ध किया है। संसद का यह शीतकालीन सत्र 13 दिसंबर तक चलेगा।

14-11-2019
राहुल गांधी का राफेल पर झूठ बेनकाब : सरोज पाण्डेय

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय महामंत्री व सांसद सरोज पाण्डेय ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राफेल पर मोदी सरकार को दिए क्लीन चिट पर कहा कि यह सत्य की जीत है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से फिर यह साबित हुआ है कि कांग्रेस जनता को गुमराह करने के लिए बड़ा से बड़ा भी झूठ बोल सकती है। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के समय कांग्रेस के जिस सबसे भद्दे नारे पर जनता ने तो अपना फैसला सुनाया था, उस नारे पर कोर्ट में भी कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष की माफी स्वीकार होने पर कांग्रेस को देश की जनता से माफी मांगना चाहिए। पाण्डेय ने कहा कि देश की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय छवि तक से ऐसा खिलवाड़ केवल कांग्रेसी ही कर सकती है। आज  न्यायालय के आदेश से स्पष्ट है कि राफेल मामला पुन: सुनवाई लायक नहीं था लेकिन तत्कालीन राष्ट्रीय कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 2019 लोकसभा चुनाव जीतने के लिए मोदी जी पर कीचड़ उछाला, वह निंदनीय है। पाण्डेय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश का मस्तक ऊंचा रखने के लिए अपना एक-एक मिनट देश को समर्पित किया है। उनकी नीति सबके विकास के साथ सबका विश्वास जीतने की रही है। उन्होंने कहा कि जनता ने तो पहले ही राहुल गांधी को नकार दिया था ।अब कांग्रेस पार्टी मूल्यों पर आधारित राजनीति करे अन्यथा उनका नाम लेने वाला भी कोई नहीं होगा। सांसद पाण्डेय ने कहा कि एक बार फिर स्पष्ट हुआ है कि एनडीए सरकार भ्रष्टाचार से मुक्त है। राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा चुनाव जीतने के लिए झूठ का सहारा लिया, वह कृत्य शर्मनाक है।

 

10-11-2019
बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने पूर्व मंत्री-विधायक समेत 7 नेताओं को पार्टी से निकाला

आगरा। बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमों मायावती ने बड़ी कार्रवाई की है। उन्होंने आगरा के पूर्व एमएलसी सुनील चितौड़, पूर्व मंत्री नारायण सिंह सुमन, पूर्व विधायक कालीचरण सुमन, पूर्व विधायक वीरू सुमन समेत तीन पूर्व जिला अध्यक्षों को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। यह कार्रवाई अनुशासनहीनता के कारण की गई है। इस कार्रवाई से बसपा में खलबली मच गई है। बता दें कि 9 नवबंर को मेरठ की मेयर सुनीता वर्मा और उनके पति और पूर्व विधायक योगेश वर्मा को भी पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने पर हुई कार्रवाई दरअसल, यह कार्रवाई लोकसभा चुनाव 2019 के बाद पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल पाए जाने पर की गई है। बसपा सुप्रीमो मायावती की इस कड़ी कार्रवाई के बाद आगरा के बीएसपी यूनिट में हलचल मच गई है। बीएसपी के जिला अध्यक्ष संतोष कुमार आनंद की तरफ से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, पूर्व विधान परिषद सदस्य सुनील कुमार चित्तौड़, पूर्व मंत्री नारायण सिंह सुमन, उनके पुत्र पूर्व एमएलसी स्वदेश कुमार ऊर्फ वीरू सुमन, पूर्व विधायक कालीचरण सुमन, पूर्व जिलाध्यक्ष भारतेंदु अरुण, मलखान सिंह व्यास, विक्रम सिंह को पार्टी से निष्कासित किया है। हाईकमान ने की कार्रवाई बसपा जिलाध्यक्ष संतोष कुमार आनंद की ओर से जारी पत्र के अनुसार ये सभी नेता पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त थे। पार्टी हित को देखते हुए हाईकमान ने इन नेताओं पर कार्रवाई की है। बता दें कि आगरा के विधायक रह चुके और बसपा सरकार में उद्यान मंत्री का पद संभाल चुके नारायण सिंह सुमन और उनके पुत्र पूर्व एमएलसी वीरू सुमन को वर्ष 2016 में भी बसपा से निष्कासित किया गया था। लोकसभा चुनाव 2019 के बाद जून माह में पिता-पुत्र की बसपा में घर वापसी हुई थी, लेकिन ज्यादा दिन बसपा में टिक नहीं पाए।

 

05-11-2019
देश को चुकानी पड़ी नोटबंदी की भारी कीमत : शत्रुघ्न सिन्हा

नई दिल्ली। सिने अभिनेता और कांग्रेस नेता शत्रुघ्न सिन्हा का कहना है कि नोटबंदी एक तुगलकी फरमान था, जिसकी देश को भारी कीमत चुकानी पड़ी। नोटबंदी के कारण देश के उद्योंगों की हालत खराब हो गई, जिसका खामियाजा आज आर्थिक मंदी के रूप में देश को चुकाना पड़ रहा है। देश में बेरोजगारी की दर बहुत ज्यादा हो गई है और लोगों की नौकरियां खतरे में हैं। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार ने नोटबंदी के पहले आर्थिक जानकारों से राय ली होती तो देश को इतना बड़ा नुकसान नहीं होता। मंगलवार को एक प्रेस कान्फ्रेंस को संबोधित करते हुए शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि केंद्र सरकार के इस फैसले का विरोध करने के कारण उन्हें इसकी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ी। लेकिन यह जानते हुए भी उन्होंने उस फैसले का विरोध किया क्योंकि उनके लिए देश पहले है। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के पहले शत्रुघ्न सिन्हा ने कांग्रेस पार्टी ज्वाइन कर ली थी और वे कांग्रेस के टिकट पर पटना साहिब से चुनाव भी लड़े थे। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा ने कहा कि केंद्र सरकार ने चीन के क्षेत्रीय समग्र आर्थिक साझेदारी पर सहमत होने से इनकार कर दिया है। केंद्र सरकार का यह कदम सोनिया गांधी और राहुल गांधी के दबाव के कारण लिया गया है, क्योंकि कांग्रेस ने इस फैसले पर अपनी असहमित जाहिर कर दी थी। कांग्रेस का मानना था कि यह फैसला देश के किसानों और कामगारों के हितों के खिलाफ था।  

03-11-2019
केंद्रीय मंत्री की कार हुई पंक्चर, लेट पहुंचे सभा में, विधायक ने दी ये चेतावनी...

ग्वालियर। केंद्रीय मंत्री व क्षेत्रीय सांसद नरेन्द्र सिंह तोमर की कार विजयपुर में पंचर हो गई। पंक्चर जुड़वाने के 15 मिनट बाद वे सभा में पहुंचे तो क्षेत्रीय विधायक ने उन्हें चेतावनी दे ड़ाली कि तोमर साहब... यह सड़क नहीं बनी तो मैं आपके खिलाफ धरने पर बैठ जाऊंगा। इसके बाद उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे सड़क के पैचवर्क का काम इसी हफ्ते शुरू करा देंगे। केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर लोकसभा चुनाव जीतने के बाद पहली बार विजयपुर गांधी संकल्प यात्रा में शामिल होने पहुंचे थे। इसी दौरान बारिश से खस्ताहाल हो चुके धोवनी-टेंटरा रोड पर उनकी लग्जरी कार का टायर पंक्चर हो गया। पंक्चर जोड़ने में करीब 15 मिनट का समय लगा।

इसके बाद वे संकल्प यात्रा के साथ निजी मैरिज गार्डन में पहुंचे तो क्षेत्रीय विधायक सीताराम आदिवासी ने मंच से कहा कि तोमर साहब अब तो आपको पता चल गया होगा कि सड़क कैसी है, क्योंकि आपकी तो गाड़ी भी पंक्चर हो गई। वही उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जनता को आपसे बहुत उम्मीदें हैं, इसलिए आप अभी घोषणा करके जाइए कि सड़क कब बनेगी। तोमर साहब जल्द सड़क का निर्माण नहीं कराया गया तो मैं आपके खिलाफ ही धरना दूंगा । विधायक के बाद मंच पर आए केन्द्रीय मंत्री तोमर ने  सड़क न बनने का दोष प्रदेश की कांग्रेस सरकार को दिया और कहा कि विजयपुर क्षेत्र की जर्जर सड़क को लेकर उन्होंने आज ही केन्द्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से बात की है। यह सड़क नेशनल हाईवे में है, इसके लिए गडकरीजी से मंजूरी जल्द दिलवाएंगे। सड़क की हालत सुधारने के लिए सात दिन में धोविनी-टेंटरा रोड पर मेंटेनेंस शुरू कर दिया जाएगा।

01-11-2019
शिवसेना से ही होगा महराष्ट्र का अगला मुख्यमंत्री : संजय राउत

नई दिल्ली। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव परिणाम को आए आठ दिन बीत चुके हैं लेकिन अब भी यहां नई सरकार को लेकर सस्पेंस बरकरार है। शिवसेना मुख्यमंत्री पद की मांग पर अड़ी है और लगातार बीजेपी को पुराने वादों की याद दिला रही है। शिवसेना सांसद और प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री शिवसेना का ही होगा। उन्होंने तंज भरे लहजे में कहा कि बीजेपी को कोई ‘अल्टीमेटम’ नहीं देंगे, वे बड़े लोग हैं। संजय राउत ने बीजेपी पर इशारों-इशारों में निशाना साधते हुए ट्वीट किया, ''साहिब...मत पालिए, अहंकार को इतना, वक़्त के सागर में कई, सिकन्दर डूब गए..!'' उन्होंने कहा कि सरकार गठन को लेकर बीजेपी और शिवसेना के बीच कोई बातचीत नहीं हो रही।

संजय राउत ने कल ही विपक्ष के नेता एनसीपी प्रमुख शरद पवार से मुलाकात की थी। उन्होंने इस मुलाकात को लेकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शरद पवार का मार्गदर्शन लेते है मैं भी उनसे मिलने गया। संजय राउत ने कहा, ''होटल ब्लू सी में जो बात हुई उसपर शिवसेना कायम है। अगर उद्धव ठाकरे कह रहे कि मुख्यमंत्री शिवसेना का होगा तो शिव सेना का ही होगा। अगर हम चाहें तो दो तिहाई बहुमत से सरकार बना सकते है।''

शिवसेना की क्या है मांग?

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने 24 अक्टूबर को चुनाव नतीजे के दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से लोकसभा चुनाव से पहले बैठक हुई थी और इस दौरान अमित शाह ने 50-50 फॉर्मूले की बात कही थी। 50-50 फॉर्मूले का मतलब है कि ढाई साल बीजेपी का और ढाई साल शिवसेना का मुख्यमंत्री होगा। वहीं बीजेपी इससे इनकार कर रही है।

शिवसेना के तीखे तेवरों के बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बीते बुधवार को कहा था कि महाराष्ट्र में बीजेपी के नेतृत्व में ही सरकार बनेगी और मैं पांच साल मुख्यमंत्री रहूंगा। बता दें कि इस विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 17 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा है। इसी मौके को देखते हुए शिवसेना ने मुख्यमंत्री पद की मांग उठा दी है।

26-10-2019
विधायकों ने उद्धव ठाकरे से कहा-भाजपा से लिखित में ले लें आश्वासन

मुंबई। महाराष्ट्र में शनिवार को शिवसेना के नवनिर्वाचित विधायकों ने पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे से मुलाकात की। पार्टी नेता प्रताप सरनाइक ने कहा कि हमारी बैठक में यह फैसला हुआ है कि जैसा अमित शाह ने लोकसभा चुनाव के दौरान 50-50 का फॉर्मूला दिया था। उसी तरह दोनों पार्टियों को ढाई-ढाई साल राज्य में सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए। ऐसे में शिवसेना का भी मुख्यमंत्री होगा। उद्धव को भाजपा से लिखित में आश्वासन लेना चाहिए। इसी बीच ठाकरे आवास मातोश्री के बाहर आदित्य ठाकरे को राज्य का अगला मुख्यमंत्री बनाए जाने को लेकर पोस्टर लगाए गए हैं। जब से आदित्य ने चुनाव लडऩे का फैसला किया था तभी से शिवसैनिकों ने उन्हें अगले मुख्यमंत्री के तौर पर देखना शुरू कर दिया था। यहां तक कि चुनाव के समय खुद उद्धव ठाकरे ने कहा था कि उन्होंने अपने पिता बालासाहेब ठाकरे से वादा किया था कि एक दिन महाराष्ट्र में शिवसेना का मुख्यमंत्री बनेगा।

महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना ने यह विधानसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ा था। जिसमें भाजपा को 105 और शिवसेना के खाते में 56 सीटें गई हैं। इस तरह गठबंधन के पास बहुमत के लिए जरूरी 145 का आंकड़ा तो मौजूद है लेकिन शिवसेना के बदले हुए रुख ने सरकार गठन को लेकर संशय का माहौल बना दिया है। शिवसेना ने जिस तरह के तेवर अपना रखे हैं उससे लग रहा है कि वह भाजपा से अलग राह पकड़ सकती है। भाजपा के पास सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत नहीं है। जिसके कारण शिवसेना किंगमेकर की भूमिका में आ गई है। इसी बीच ठाकरे आवास मातोश्री के बाहर आदित्य ठाकरे को राज्य के भावी मुख्यमंत्री के तौर पर पेश करने वाले पोस्टर लगाए गए हैं। जिन्हें कि शिवसेना समर्थकों ने लगाया है। बता दें कि आदित्य ने पहली बार वर्ली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा है और जीत हासिल की है।

 

23-10-2019
15 दिन के भीतर एनआईए को सौंपें भीमा मंडावी के मौत की फाइल  

रायपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने नक्सली हमले में मारे गए भाजपा विधायक भीमा मंडावी की फाइल 15 दिन के भीतर एनआईए को सौंपने का आदेश दिया है। बता दें कि अपने विधायक की मौत के बाद भारतीय जनता पार्टी ने इसकी जांच  सीबीआई से कराने की मांग की थी। चूंकि राज्य में सीबीआई जांच पर प्रतिबंध है इसलिए केन्द्र सरकार ने 17 मई को एनआईए को जांच का आदेश दिया था। इधर राज्य सरकार ने केन्द्र सरकार को पत्र लिखकर एनआईए जांच पर फिर से विचार करने का आग्रह इस आधार पर किया था कि  मामले में विशेष न्यायिक आयोग का गठन कर जांच कराई जा रही है। उधर एनआईए मामला फाइल कर राज्य सरकार से भीमा मंडावी की मौत से जुड़ी फाइल मांग रही थी। सरकार ने वह फाइल  आयोग द्वारा जांच किये जाने की वजह से एनआईए को नहीं सौंपी थी। एनआईए ने इस पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में राज्य सरकार के खिलाफ  याचिका दाखिल की थी। जस्टिस आरसी सामन्त की बेंच ने याचिका की सुनवाई करते हुए 15 दिन के भीतर एनआईए को फाइल सौंपे जाने का आदेश सरकार को दिया है। ज्ञात हो कि दंतेवाड़ा में लोकसभा चुनाव के दौरान माओवादियों ने विधायक भीमा मंडावी के काफिले पर ब्लास्ट कर दिया था। इस हमले में विधायक भीमा मंडावी सहित पांच पुलिस के पांच जवानों की मौत हो गई थी। भाजपा ने इसे राजनीतिक षडय़ंत्र करार दिया था। 

 

10-10-2019
इस कांग्रेस नेता ने कहा- प्रियंका गांधी को सलाह देने की मेरी हैसियत नहीं

बलिया। कांग्रेस के पूर्व सांसद राजेश मिश्रा ने पार्टी को देश के मौजूदा राजनीतिक परिवेश में आत्ममंथन करने की सलाह देते हुए महासचिव प्रियंका गांधी के सलाहकार का दायित्व संभालने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी को सलाह देने की उनकी हैसियत नहीं है। वाराणसी से कांग्रेस के सांसद रहे और लोकसभा चुनाव (2019) में सलेमपुर सीट से पार्टी प्रत्याशी रहे वरिष्ठ नेता राजेश मिश्रा ने कहा कि उन्होंने अपने फैसले से कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के कार्यालय को अवगत करा दिया है। उन्होंने लखनऊ कैंट सीट के प्रभारी का पद संभालने से भी मना कर दिया है। सलाहकार का पद निर्वाह न करने को लेकर पूछे जाने पर उन्होंने स्पष्ट किया कि वह प्रियंका गांधी को सलाह देने की स्थिति में नहीं हैं। उनको जो समझ में आया, उसके अनुसार उन्होंने यह कदम उठाया है। यह पूछे जाने पर कि क्या उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की नवगठित कार्यकारिणी से नाराज होकर उन्होंने यह कदम उठाया है, मिश्रा ने कहा कि बहुत सी चीजें गलत हैं, लेकिन यह पार्टी का अंदरूनी मामला है। अगर पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी या महासचिव प्रियंका गांधी उन्हें बुलाकर बात करेंगे तब वह उनके सामने सारी बातें रखेंगे। राजेश मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस को जमीनी, निष्ठावान, मेहनती और विशुद्ध कांग्रेसी लोगों को आगे बढ़ाना चाहिए। पार्टी की अनुशासन समिति, दल के वरिष्ठ नेताओं और दल के राज्य प्रभारियों को पार्टी नेताओं की अनावश्यक बयानबाजी का संज्ञान लेकर स्थिति को सामान्य करने के लिए कदम उठाना चाहिए। 

10-10-2019
राहुल गांधी की सूरत कोर्ट में पेशी आज, मोदी उपनाम पर कसा था तंज

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2019 के प्रचार अभियान के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उपनाम ‘मोदी’ को लेकर दिए गए विवादास्पद बयान को लेकर किए गए मानहानि के मामले में आज कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी सूरत के एक कोर्ट में पेश होंगे। गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष अमित चावड़ा ने कहा कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी 10 अक्टूबर को अदालत में पेशी के लिए सूरत आएंगे। इसी साल लोकसभा चुनाव के दौरान एक भाषण में उन्होंने टिप्पणी की थी कि ‘सभी चोरों के उपनाम मोदी क्यों हैं?’ इस मामले में राहुल गांधी के खिलाफ स्थानीय भाजपा विधायक पूर्णेश मोदी ने आपराधिक मानहानि का केस दर्ज कराया था। अपनी शिकायत में उन्होंने कहा था कि राहुल गांधी ने पूरे मोदी समुदाय को बदनाम किया है। सूरत की एक अदालत ने इस आपराधिक मानहानि मामले में राहुल गांधी को निजी उपस्थिति से छूट दे दी थी, लेकिन बाद में कोर्ट ने इस निष्कर्ष पर राहुल गांधी को समन भेजा था कि उनके खिलाफ पहली नजर में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 500 के तहत आपराधिक मानहानि का मामला बनता है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट बीएच कपाडि़या ने मई में गांधी के खिलाफ समन जारी किया था। राहुल इस मामले में गुरुवार को कोर्ट में अपना पक्ष रखेंगे। दरअसल, लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान राहुल गांधी ने विवादित बयान दिया था। राहुल गांधी ने कहा था कि ‘सभी चोरों का उपनाम मोदी क्यों होता है।’ इस मामले में राहुल गांधी के खिलाफ स्थानीय भाजपा विधायक पूर्णेश मोदी ने आपराधिक मानहानि का केस दर्ज कराया था।

 

 

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