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28-01-2020
चार महीने के अंदर भव्य राम मंदिर बनने का काम होगा : अमित शाह

रायपुर। गृहमंत्री अमित शाह छत्तीसगढ़ भाजपा प्रदेश कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में कार्यकर्ताओं को सम्बोधित किए। अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल राम मंदिर के लिए तारीख पर तारीख लेते थे। चार महीने के अंदर भव्य राम मंदिर बनने का काम होगा। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष नहीं हूं कार्यकर्ताओं से कैसे मिलूँगा। लेकिन यहाँ आकर ऐसा लगा कि भाजपा अपने कार्यकर्ताओं को कभी नहीं भूलती। शाह ने कहा कि पार्टी के सिद्धांतों पर जीने का प्रयास किया हूं। भाजपा अकेली पार्टी है, जो विचारधारा के लिए राजनीति में आई है। कम्युनिस्ट पार्टी को छोड़ दिया जाए तो अन्य सभी पार्टी परिवार की पार्टी बनकर आई है।
भाजपा कार्यकर्ता तभी खिलता है जब वह विपक्ष में होता है। जिस प्रकार विकास का काम छत्तीसगढ़ में हुआ ऐसा कभी नही सोचा था। उन्होंने सभा में कहा कि हमें याद रखना चाहिए की हम वो पार्टी हैं,जिसकी संसद में सिर्फ दो सीटें थी, तब कांग्रेस हम पर हंसी थी। आज कांग्रेस की वही स्थिति है। शाह ने कहा कि हमारा समर्पण सच्चा है। हमने आदिवासियों के घर में खुशियां पहुँचाई है। उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस की सरकार को छत्तीसगढ़ की जनता पहचान गई। विधानसभा के बाद हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत हुई। कांग्रेस ने खोखले वादे किए थे शाह ने कार्यकर्ता से आव्हान किया कि आलस्य छोड़कर हमारी उपलब्धियों को जनता के बीच लेकर जाएं। विचारधारा के आधार पर हम दो सीट से दो बार देश में पूर्ण बहुमत से सरकार बनाए हैं। भाजपा का भविष्य कार्यकर्ता तय करते हैं चुनाव में जीत या हार नहीं।

केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार फिसड्डी सरकार है, अपने वादे पूरे नही कर सकी। उन्होंने कहा कि देश की कभी रक्षा नीति नहीं थी,पाकिस्तान से आतंकवादी आकर हमला कर जाते थे। मोदी सरकार के आने के बाद कार्रवाई होने लगी। जनता को विश्वास हुआ भारत अपनी रक्षा कर सकता है। शाह ने कहा कि राहुल बाबा आज भी तंज कसते हैं, उनका काम ही है तंज कसना। शाह ने कश्मीर पर बोलते हुए कहा कि धारा 370 हटाने के लिए कोई अपना वोटबैंक नहीं कम करना चाहता था। यहां हमें एक भी गोली नही चलानी पड़ी। उन्होंने कहा कि कश्मीर में अकेला तिरंगा लहराता देख दिल को सुकून मिला है। भाजपा सरकार ने ट्रिपल तलाक को खत्म कर मुस्लिम महिलाओं को हक़ दिलाया। एनआरसी पर उन्होंने कहा कि भारत में जन्मे किसी भी मुस्लिम नागरिकता जाने का सवाल ही नहीं है। बंटवारे के बाद जो पाकिस्तान में हिन्दू,सिख,जैन, बौद्ध रह गए थे उन पर वहाँ की सरकार ने उनका संरक्षण नहीं किया। दिल्ली के चुनाव पर केजरीवाल पर हमला करते हुए अमित शाह ने कहा कि केजरीवाल हमें देशभक्ति मत सिखाइए। वो पाकिस्तानी नहीं है, जो बटवारे की आपाधापी में वहा रह गए थे। कांग्रेस पार्टी यह ना समझे कि आप इसका राजनीतिक फायदा उठा पाओगे। भाजपा का एक एक कार्यकर्ता जनता के बीच उन्हें समझाएगा। केजरीवाल सरकार को शर्म आनी चाहिए। राहुल और ममता की भाषा अगले दिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बोलते हैं। देश को गुमराह करने वाले जान लें अंतत: जीत सत्य की होती है।

 

 

21-01-2020
दिल्ली विधानसभा चुनाव: प्रशांत किशोर का नाम स्टार प्रचारकों की लिस्ट से गायब

नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए जेडीयू ने स्टार प्रचारकों की लिस्ट जारी कर दी है। इस लिस्ट में प्रशांत किशोर का नाम नहीं शामिल किया गया है। इसके अलावा जेडीयू नेता और पूर्व सांसद पवन वर्मा का भी नाम सूची से गायब है। बिहार में सत्ताधारी भाजपा और जेडीयू अब दिल्ली विधानसभा का चुनाव भी एकसाथ लड़ेंगे। इन दोनों पार्टियों के बीच दिल्ली चुनाव के लिए गठबंधन की घोषणा हो चुकी है। गठबंधन के तहत भाजपा ने दिल्ली की दो सीटें जदयू के लिए छोड़ी है। इनमें संगम बिहार और बुराड़ी की सीटें हैं। बिहार विधानसभा में भाजपा और जेडीयू गठबंधन ने वर्ष 2005 और 2010 में बड़ी जीत हासिल की। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भी बिहार में भाजपा-जदयू-लोजपा के गठबंधन ने भारी जीत दर्ज की थी। हालांकि, हाल के वर्षों में बिहार के अलावा झारखंड-उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में हुए चुनावों में इन दलों का गठबंधन नहीं हुआ था। 

 

26-12-2019
कौन मानेगा कुछ महीने पहले ही भाजपा ने रायपुर, दुर्ग व लोकसभा सीटों से लाखों मतों के अंतर से विजय हासिल की थी

रायपुर। नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा ऐसी दुर्गति होगी किसी को विश्वास भी नहीं रहा होगा। खासकर रायपुर और दुर्ग नगर निगम क्षेत्र में। जहां कुछ महीने पूर्व ही हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों ने लाखों के अंतर से कांग्रेस को पटखनी दी थी। उसी क्षेत्र में ऐसा क्या हुआ कि कुछ ही महीनों में भाजपा औंधे मुंह पड़ी हुई है। दरअसल भाजपा को कांग्रेस ने नहीं खुद भाजपा की गुटबाजी ने हराया है। पहले यह कहा जाता था कि कांग्रेसी ही दुश्मन है कांग्रेस के। वह जुमला अब बदल कर भाजपा के लिए लागू हो गया है। प्रदेश में सीएम भूपेश बघेल के नेतृत्व में कांग्रेस एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरी थी। और कांग्रेस को एकजुटता का फायदा भी मिला। हालांकि उनके कुछ बागी जरूर मैदान में थे लेकिन कांग्रेस ने डैमेज कंट्रोल कर लिया। इसके ठीक विपरीत भाजपा डैमेज कंट्रोल के मामले में फिसड्डी साबित हुई। और कुछ नेताओं के अहंकार के सामने पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं को खामोश रहना पड़ा। जिसका दुष्परिणाम उन की करारी हार के रूप में सामने आ रहा है। भाजपा को अब इस बात को मान लेना चाहिए कि सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भरोसे चुनाव नहीं जीते जा सकते। लोकसभा में तो उनकी वैतरणी नरेंद्र मोदी ने पार करा दी थी। लेकिन उसके ठीक कुछ महीने बाद भाजपा बिना मोदी के सहारे औंधे मुंह पड़ी हुई है। इसके पहले भी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने संगठित और सुनियोजित ढंग से चुनाव लड़ा और भाजपा को करारी शिकस्त दी थी। और इस बार भी कमोबेश यही स्थिति है। दुर्ग और रायपुर लोकसभा सीटें तीन लाख से ऊपर वोटों से जीतने वाली भाजपा दोनों नगर निगम मैं पीछे खड़ी नजर आ रही है। उसकी दुर्दशा के लिए कोई और नहीं अदूरदर्शी नेतृत्व गुटबाजी असंतोष मुट्ठी भर नेताओं का पार्टी पर कब्जा और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की उपेक्षा ही कारण माना जा सकता है। बहरहाल नगर निगम चुनाव में करारी हार को देखते हुए लगता नहीं कि लोकसभा चुनाव में लाखों की जीत मिली होगी।

 

19-12-2019
नगरपालिका चुनाव में परचम लहराने कांग्रेस ने किया मेगा रोड शो

बीजापुर। नगरीय निकाय चुनाव प्रचार के आखरी दिन बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी सहित कांग्रेसी नेताओं ने गुरूवार को सभी 15 वार्डों में रोड शो के माध्यम से बीजापुर नगर पालिका चुनाव का प्रचार-प्रसार किया। मंडावी ने इस मौके पर जनता से कांग्रेस को जिताने की अपील करते हुए कहा कि बीजापुर से लेकर प्रदेश और देश का विकास केवल कांग्रेस ही कर सकती है। बीजापुर की जनता ने विधानसभा और लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को समर्थन दिया। राज्य की कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में बीजापुर से लेकर बस्तर और समूचे छत्तीसगढ़ का तेजी से विकास कर रही है। पंद्रह साल का अंधेरा एक साल में दूर किया है।

आदिवासियों के हक में फैसला लेकर शोषण से मुक्ति दिलाई है। बीजापुर के सम्पूर्ण विकास के लिए, जनता की सुविधा के लिए कांग्रेस सरकार वचनबद्ध है। अब जनभावना के अनुरूप बीजापुर के चप्पे चप्पे के विकास के लिए बीजापुर की लोकल सरकार भी कांग्रेस की ही बनाना है। बीजापुर नगर के विकास के लिए नगर पालिका चुनाव में कांग्रेस को जिताना है। कांग्रेस का मेगा रोड शो सुबह पनारापारा से शुरू होकर जेलवाड़ा, माँझीपारा, कोकडापारा, अमानपारा, बैदरगुड़ा, संजयपारा, जयनगर शिविर, भट्टीपारा, अटलआवास, रावतपारा पार्टी कार्यालय के पास से होते हुए सभी वार्डों के लिए रवाना हुआ। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष लालू राठौर, अजय सिंह, सत्तार अली, नीना रतिया सहित सभी नेताओं ने रोड शो में भागीदारी की। वार्ड शो को मिले भारी जन समर्थन से कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल रहा।

12-12-2019
छत्तीसगढ़ कांग्रेस सरकार पर भाजपा ने जारी किया वीडियो

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी ने छत्तीसगढ़ कांग्रेस सरकार पर एक वीडियो जारी किया है। वीडियो में भाजपा ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस ने सत्ता में आने के पूर्व जो घोषणाएं की थी उनमें से एक को भी धरातल पर नहीं उतारा। धान का समर्थन मूल्य हो या बेरोजगारी भत्ता किसी भी वादे को कांग्रेस सरकार अब तक पूरा नहीं कर सकी है। वादों को पूरा करने के लिए कांग्रेस के द्वारा गंगाजल की कसम खाने को भी भाजपा ने इस वीडियो में शामिल किया है। वीडियो में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और अन्य मंत्रियों के संबंध में भी टिप्पणियां की गई हैं। गौरतलब है कि राजनीतिक पार्टियां अपने प्रचार के लिए विभिन्न माध्यमों का उपयोग करती रही हैं। इसके पूर्व विधानसभा और लोकसभा चुनाव के पूर्व कांग्रेस की ओर से भाजपा को लेकर वीडियो जारी किए गए थे।  

 

 

12-12-2019
भाजपा ने लगाया आरोप, कांग्रेसियों को सेवा से सरोकार नहीं केवल सत्ता की चाह

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेसियों को जनता की सेवा से कोई सरोकार नहीं है, वह  सिर्फ सत्ता की लोभी है। भाजपा का कहना है कि इस बात का प्रत्यक्ष उदाहरण यह है कि पिछले 5 वर्षों में रायपुर के महापौर प्रमोद दुबे ने शहर की जनता की भलाई के लिए एक भी कार्य नहीं किया। इसका प्रतिफल जनता ने उन्हें लोकसभा चुनाव में लगभग साढ़े तीन लाख मतों से पराजित करके दिया। सफाई के नाम पर पहले किवाड़ और अब रामकी नाम का झुनझुना शहर की जनता को पकड़ाया। गंदी नालियों के बीच ध्वस्त हो चुके शहर के ड्रेनेज सिस्टम और जलभराव से शहर की जनता को मुसीबत में डालने की पूरी जिम्मेदारी कांग्रेस के नगर सत्ता की बनती है।

 

24-11-2019
पवार चाचा-भतीजे के बीच मनमुटाव की ये है बड़ी वजह, पढ़े पूरी खबर

नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में शनिवार को आए 'भूचाल' के बाद मुंबई से लेकर दिल्ली तक की राजनीति गर्म है। शिवसेना जहां कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाने का ख्वाब देख रही थी वहीं भाजपा ने बाजी मारते हुए एनसीपी के अजित पवार के साथ मिलकर सरकार बना ली। आखिर शरद पवार और अजित पवार में विवाद क्यों है...? बता दें कि यह कहानी साल 2004 से शुरू हुई। 2004 में हुए विधानसभा चुनाव में जब एनसीपी को 71 और कांग्रेस को 69 सीटें मिली थी। लेकिन, शरद पवार ने भतीजे अजित के लिए मुख्यमंत्री पद लेने के बजाए कांग्रेस को दे दिया। राज्य में दी गई इस कुर्बानी के बदले शरद पवार को केंद्र में दो कैबिनेट और एक राज्यमंत्री का पद मिला। अजित पवार अपने चाचा के इस कदम से खुश नहीं थे। साल 2009 में विधानसभा चुनाव के दौरान अजित पवार अपने करीबियों को टिकट दिलाना चाहते थे लेकिन शरद पवार ने उनकी एक न सुनी।

2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान अजित अपने बेटे पार्थ को चुनाव लड़ाना चाहते थे लेकिन शरद पवार ने यह मांग पहले ठुकरा दी। बाद में जब अजित पवार ने जिद की तो शरद पवार ने टिकट को दे दिया लेकिन प्रचार से दूर रहे। नतीजन पार्थ चुनाव हार गए। वहीं शरद पवार अपनी बेटी सुप्रिया को चुनाव जिताने के लिए जी-जान से लगे रहे। अजित पवार को यह बात भी खूब खटकी, लेकिन उन्होंने शरद पवार के सामने इसका इजहार नहीं किया। 2019 के विधानसभा चुनाव में भी अजित पवार अपने खेमे के कुछ लोगों को टिकट दिलाना चाहते थे लेकिन शरद पवार ने फिर से उनकी मांगों को अनसुना कर दिया।

शरद पवार ने पोते को दिया टिकट, नहीं सुनी अजित की बात

इसके अलावा विधानसभा चुनाव के दौरान एक बात जो अजित पवार को और बुरी लगी वह अपने पोते रोहित पवार को चुनाव का टिकट देना था। शरद पवार ने अपने पोते रोहित को न केवल विधानसभा का टिकट दिया बल्कि उसे जिताने के लिए खूब प्रचार भी किया। विधानसभा चुनाव से पहले शरद पवार के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एफआईआर दर्ज कर ली। तब उन्होंने ईडी ऑफिस जाने का फैसला किया लेकिन राज्य में चुनाव पूर्व गहमागहमी के माहौल को शांत करने के लिए अजित ने खुद कुर्बानी देने की पेशकश की। अजित ने शरद पवार से फोकस हटाने के लिए विधायक पद से इस्तीफा दे दिया जिससे चर्चा के केंद्र से शरद बाहर निकल गए। लेकिन, जब अजित पवार को ईडी का नोटिस आया तब उनके पक्ष में न तो शरद पवार न ही एनसीपी का कोई नेता सामने आया। बताया जाता है कि राज्य में सरकार गठन की बैठकों के दौर के बीच अजित ने हमेशा उद्धव के मुख्यमंत्री बनने का विरोध किया। लेकिन, शरद पवार ने उनका साथ नहीं दिया। यहां तक की ईवीएम को लेकर आरोप-प्रत्यारोप के बीच जब अजित पवार ने जमीनी स्तर पर काम करने की वकालत की तब भी शरद पवार ईवीएम में गड़बड़ी पर ही अटकें रहे।

 

21-11-2019
रक्षा समिति में शामिल हुई साध्वी प्रज्ञा, कांग्रेस ने कहा - गोड़से भक्तों के दिन...

नई दिल्ली। भोपाल से भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को रक्षा मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति में बतौर सदस्य शामिल किया गया है। बता दें कि साध्वी पर मालेगांव धमाकों में शामिल होने का आरोप है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति में कुल 21 सदस्य हैं जिनमें अब साध्वी प्रज्ञा का नाम भी जुड़ गया है। इस समिति के प्रमुख रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह हैं। इस समिति में सरकार ने विपक्ष के कई नेताओं को शामिल किया है। जिसमें शरद पवार और फारूख अब्दुल्ला प्रमुख हैं। मालेगांव धमाकों में आरोपी होने के कारण साध्वी को इस समिति में शामिल करने पर राजनीतिक माहौल गर्म होने की संभावना है। बता दें कि साध्वी प्रज्ञा ने लोकसभा चुनाव में भोपाल संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को हराया था।

नाथूराम गोडसे के भक्तों के अच्छे दिन आ गए : कांग्रेस

कांग्रेस नेता जयवीर शेरगिल ने ट्वीट किया कि भाजपा सरकार ने राष्ट्रवाद को नया मॉडल दिया है, बम ब्लास्ट मामले में ट्रायल पर चल रहीं नेता को डिफेंस मामलों की कमेटी में शामिल किया गया। चिंता की कोई बात नहीं, भारत माता की जय। उन्होंने लिखा कि कुछ महीनों पहले पीएम ने 'मन से माफ ना करने' की बात कही थी, लेकिन अब संदेश साफ है कि नाथूराम गोडसे के भक्तों के अच्छे दिन आ गए हैं। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा, ‘यह देश का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि आतंक फैलाने का आरोप झेल रही सांसद को रक्षा संबंधी समिति का सदस्य बना दिया।’ उन्होंने प्रधानमंत्री पर कटाक्ष करते हुए कहा कि मोदी जी इन्हें ‘मन से माफ नहीं कर पाए।’ लेकिन देश की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर जिम्मेदारी दे दी। इसीलिए तो मोदी है तो मुमकिन है।

कांग्रेस की नासमझी का सबसे बड़ा प्रमाण : राकेश सिन्हा

भाजपा ने कांग्रेस की आपत्ति और इसे सुरक्षा बलों का अपमान बताए जाने को नासमझी का सबसे बड़ा प्रमाण करार दिया है। भाजपा प्रवक्ता और राज्यसभा सदस्य राकेश सिन्हा ने कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी की नासमझी का यह सबसे बड़ा प्रमाण है। प्रज्ञा ठाकुर भोपाल से चुनाव जीतकर आई हैं। वह सांसद हैं। सांसद होने के नाते समितियों में सदस्य चुना जाना उनका अधिकार है। नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को आरोपी बनाए जाने का हवाला देते हुए सिन्हा ने कहा, ‘सांसद होने के नाते प्रज्ञा ठाकुर के वही अधिकार हैं जो सोनिया और राहुल गांधी के हैं। प्रज्ञा ठाकुर और सोनिया गांधी में अगर अंतर करेंगे तो मैं यही कह सकता हूं कि सोनिया गांधी नेशनल हेराल्ड मामले में जमानत पर हैं, क्या वह सभी संसदीय समितियों से इस्तीफा देंगी।’

21-11-2019
इन तीन दलों को मिली बड़ी राहत, निर्वाचन आयोग ने टाला राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा वापस लेने का फैसला

नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने भाकपा, तृणमूल कांग्रेस और राकांपा को दी गई राष्ट्रीय पार्टी की मान्यता वापस लेने के अपने फैसले को टाल दिया है। मई 2019 में हुए लोकसभा चुनावों में इन दलों के खराब प्रदर्शन के मद्देनजर यह फैसला लिया जाना था। सूत्रों के अनुसार इन दलों ने अपनी याचिका में चुनाव आयोग से कहा था कि आने वाले दिनों में लगातार विभिन्न राज्य विधानसभाओं के चुनाव होने हैं, जिसमें निश्चित रूप से उनके प्रदर्शन में सुधार होगा। निर्वाचन आयोग ने याचिका को स्वीकार कर लिया है और निर्णय को टाल दिया है। “राष्ट्रीय पार्टी” की मान्यता पाने के लिए जरूरी है कि उस दल को कम से कम चार राज्यों में “राज्य पार्टी” का दर्जा हासिल हो। चुनाव चिन्ह (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के अनुसार किसी राजनीतिक दल को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा तभी दिया जाएगा जबकि लोकसभा या विधानसभा चुनावों के दौरान उसके प्रत्याशियों को चार या अधिक राज्यों में कुल मतदान का कम से कम छह प्रतिशत वोट मिला हो। इसके अलावा उस दल के पास कुल लोकसभा सीटों के मुकाबले कम से कम दो प्रतिशत सीटें होनी चाहिए और उसके उम्मीदवार कम से कम तीन राज्यों से होने चाहिए। तीनों दलों ने चुनाव आयोग से कहा कि वे काफी पुराने दल हैं और राष्ट्रीय राजनीति में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसलिए उनका दर्जा हाल के चुनावी प्रदर्शन पर आधारित नहीं होना चाहिए।

 

17-11-2019
संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार से, नागरिकता विधेयक  पारित कर सकती है सरकार

नई दिल्ली। सोमवार से शुरू होने जा रहे संसद के शीतकालीन सत्र में नागरिकता विधेयक पेश करने की सरकार की योजना, जम्मू कश्मीर की स्थिति, आर्थिक सुस्ती और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव होने की संभावना है।नागरिकता (संशोधन) विधेयक को पारित कराने के अलावा इस सत्र के दौरान दो अहम अध्यादेशों को कानून में परिवर्तित कराना भी सरकार की योजना में शामिल है। बता दें कि आयकर अधिनियम, 1961 और वित्त अधिनियम, 2019 में संशोधन को प्रभावी बनाने के लिए सितंबर में एक अध्यादेश जारी किया गया था जिसका उद्देश्य नई एवं घरेलू विनिर्माण कंपनियों के लिए कॉरपोरेट कर की दर में कमी लाकर आर्थिक सुस्ती को रोकना और विकास को बढ़ावा देना है। दूसरा अध्यादेश भी सितंबर में जारी किया गया था जिसमें ई-सिगरेट और इसी तरह के उत्पाद की बिक्री, निर्माण एवं भंडारण पर प्रतिबंध लगाया गया है।

लोकसभा चुनाव में मिले अपार जनादेश के साथ सत्ता में वापसी करने वाली भाजपा नीत राजग सरकार का यह इस कार्यकाल में दूसरा संसद सत्र है। संसद का पहला सत्र काफी बेहतर रहा। इस सत्र के दौरान फौरी तीन तलाक की प्रथा को दंडनीय बनाने, राष्ट्रीय जांच एजेंसी को और अधिक शक्तियां देने जैसे कई अहम विधेयक दोनों सदनों में पारित हुए। इस दौरान जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे को हटाने और इसे दो केंद्रशासित क्षेत्रों-जम्मू कश्मीर तथा लद्दाख में विभाजित करने का प्रस्ताव भी दोनों सदनों में पारित हुआ। सोमवार से शुरू हो रहे शीतकालीन सत्र में सरकार विवादास्पद नागरिकता (संशोधन) विधेयक को पारित कराने की तैयारी में है जो भाजपा का अहम मुद्दा है। इसका लक्ष्य पड़ोसी देशों से आए गैर-मुस्लिम प्रवासियों को नागरिकता प्रदान करना है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सरकार ने सत्र के दौरान अपनी कार्यसूची में इस विधेयक को सूचीबद्ध किया है। संसद का यह शीतकालीन सत्र 13 दिसंबर तक चलेगा।

14-11-2019
राहुल गांधी का राफेल पर झूठ बेनकाब : सरोज पाण्डेय

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय महामंत्री व सांसद सरोज पाण्डेय ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राफेल पर मोदी सरकार को दिए क्लीन चिट पर कहा कि यह सत्य की जीत है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से फिर यह साबित हुआ है कि कांग्रेस जनता को गुमराह करने के लिए बड़ा से बड़ा भी झूठ बोल सकती है। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के समय कांग्रेस के जिस सबसे भद्दे नारे पर जनता ने तो अपना फैसला सुनाया था, उस नारे पर कोर्ट में भी कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष की माफी स्वीकार होने पर कांग्रेस को देश की जनता से माफी मांगना चाहिए। पाण्डेय ने कहा कि देश की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय छवि तक से ऐसा खिलवाड़ केवल कांग्रेसी ही कर सकती है। आज  न्यायालय के आदेश से स्पष्ट है कि राफेल मामला पुन: सुनवाई लायक नहीं था लेकिन तत्कालीन राष्ट्रीय कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 2019 लोकसभा चुनाव जीतने के लिए मोदी जी पर कीचड़ उछाला, वह निंदनीय है। पाण्डेय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश का मस्तक ऊंचा रखने के लिए अपना एक-एक मिनट देश को समर्पित किया है। उनकी नीति सबके विकास के साथ सबका विश्वास जीतने की रही है। उन्होंने कहा कि जनता ने तो पहले ही राहुल गांधी को नकार दिया था ।अब कांग्रेस पार्टी मूल्यों पर आधारित राजनीति करे अन्यथा उनका नाम लेने वाला भी कोई नहीं होगा। सांसद पाण्डेय ने कहा कि एक बार फिर स्पष्ट हुआ है कि एनडीए सरकार भ्रष्टाचार से मुक्त है। राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा चुनाव जीतने के लिए झूठ का सहारा लिया, वह कृत्य शर्मनाक है।

 

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