GLIBS
19-05-2020
अशोक चतुर्वेदी को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत, ईओडब्ल्यू एसीबी में हुई दो एफआईआर पर लगा स्टे

रायपुर। सर्वोच्च न्यायालय से आज पाठ्य पुस्तक निगम के महाप्रबंधक अशोक चतुर्वेदी को थोड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने अशोक चतुर्वेदी पर ईओडब्ल्यू एसीबी रायपुर में हुई एफआईआर के विरूद्ध याचिका पर सुनवाई हुई। एफआईआर पर स्टे लगाते हुए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में सुनवाई तक अशोक चतुर्वेदी को परेशान ना करने कहा गया। बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों न्यायमूर्ति एएम खानविलकर, न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना के समक्ष सुनवाई हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर 16/2019 और 19/2020 में स्थगन आदेश दिया है। कहा गया कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में मामले की सुनवाई तक किसी भी प्रकार से याचिका कर्ता को परेशान ना किया जाए।

याचिका कर्ता के वकीलों ने बताया कि राज्य के बड़े उच्चाधिकारियों के दबाव में दुर्भावना वश बार-बार एफआईआर की जा रही है जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने गंभीरता से लेते हुए स्थगन आदेश जारी किया है। यह भी बताया गया कि तीन मामलों में पूर्व में उच्च न्यायालय से अंतरिम राहत दिए जाने के बावजूद अवमानना करते हुए एफआईआर पंजीबद्ध की गई, जिस पर सर्वोच्च न्यायालय ने अवमानना याचिका की बात भी कही। मामले की पैरवी सुप्रीम कोर्ट के सीनियर अधिवक्ता मुकुल रोहोतगी और उनके साथी अधिवक्ता अभिनव श्रीवास्तव, आशुतोष पाण्डेय, शशांक ठाकुर, एव्ही श्रीधर और हिमांशु सिन्हा ने की।

24-04-2020
पत्रकार अर्नब के खिलाफ दर्ज 101 एफआईआर पर रोक, सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश

रायपुर। पत्रकार अर्नब गोस्वामी के लाइव टीवी शो में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी पर की गई टिप्पणी पर प्रदेश में दर्ज कराई गई 101 एफआईआर पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर रोक लगाई गई है। गौरतलब है कि प्रदेशभर से पत्रकार अर्नब गोस्वामी के खिलाफ लगातार कांग्रेस नेताओं ने एफआईआर दर्ज कराए है।बता दें कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष एवं स्वास्थ्य मंत्री ने स्वयं सिविल लाइन पहुंचकर अर्नब गोस्वामी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। सर्वोच्च न्यायालय के नागपुर के मुकदमे को छोड़कर सभी एफआइआर पर रोक लगाने से पूर्व रायपुर की सिविल लाइन थाना पुलिस ने अर्णब को नोटिस भेजकर समाचार से संबंधित तथ्यात्मक जानकारी और सुसंगत दस्तावेज मांगे थे। उन्हें पांच मई को तलब किया था। आर भारत चैनल पर पत्रकार अर्णब ने पालघर में साधुओं की नृशंस हत्या के मामले में एक शो के दौरान कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से सवाल उठाते हुए टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि इस तरह के मामले में सोनिया आखिर चुप क्यों हैं। इसके बाद मामले ने तुल पकड़ा और देश के पांच कांग्रेस शासित राज्यों में कांग्रेस नेताओं ने अर्णब के खिलाफ गैर जमानती धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई थी। छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों में उनके खिलाफ कुल 101 एफआईआर दर्ज की गई थीं।

 

17-03-2020
मध्यप्रदेश में सियासी संकट के बीच आज होगी सुप्रीम सुनवाई

नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में सियासी उठापटक जारी है। भाजपा ने जहां बहुमत परीक्षण कराने के लिए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। वहीं राज्यपाल ने एक बार फिर कमलनाथ को पत्र लिखकर मंगलवार को विधानसभा में बहुमत परीक्षण कराने के लिए कहा है। इससे पहले राज्यपाल के निर्देशानुसार सोमवार को बहुमत परीक्षण होना था लेकिन विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने कोरोना वायरस के चलते विधानसभा की कार्यवाही को 26 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया। आज न्यायालय बहुमत परीक्षण पर सुनवाई करेगा।

सुप्रीम कोर्ट आज करेगा सुनवाई

राज्य में जारी सियासी घमासान के बीच सोमवार को भाजपा ने मुख्यमंत्री कमलनाथ, विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति और मुख्य सचिव के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। भाजपा ने अपनी याचिका में अदालत को बहुमत परीक्षण कराने का निर्देश देने को कहा है। जिसपर अदालत सुनवाई के लिए तैयार है और आज कोई अहम फैसला सुना सकती है।

राज्यपाल ने कमलनाथ को लिखा पत्र

लालजी टंडन ने सोमवार को कमलनाथ को लिखे पत्र में कहा, 'यह खेद की बात है कि आपने मेरे द्वारा दी गई समयावधि में बहुमत सिद्ध करने की जगह, पत्र लिखकर विधानसभा में शक्ति परीक्षण कराने में असमर्थता व्यक्त की/आनाकानी की, जिसका कोई औचित्य और आधार नहीं है। आपने अपने पत्र में शक्ति परीक्षण नहीं कराने के जो कारण लिए हैं, वे आधारहीन तथा अर्थहीन हैं।'

राज्यपाल ने कहा, 'आपने पत्र में सर्वोच्च न्यायालय के जिस निर्णय का जिक्र किया है वह वर्तमान परिस्थितियों और तथ्यों में लागू नहीं होता। जब यह प्रश्न उठे कि किसी सरकार को सदन का विश्वास है या नहीं, तब सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कई निर्णयों में निर्विवाद रूप से स्थापित किया गया है कि इस प्रश्न का उत्तर सदन में शक्ति परीक्षण के से ही हो सकता है। आपसे पुन: निवेदन है कि सांविधानिक एवं लोकतंत्रीय मान्यताओं का सम्मान करते हुए 17 मार्च तक बहुमत सिद्ध करें, अन्यथा माना जाएगा कि वास्तव में आपको विधानसभा में बहुमत प्राप्त नहीं है।'

07-03-2020
त्वरित न्याय दिलाने में आपसी समझौता महत्वपूर्ण, छत्तीसगढ़ पहला प्रदेश जहां है कमर्शियल कोर्ट 

रायपुर। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधिपति एवं पूर्व मुख्य न्यायाधीश छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय नवीन सिन्हा ने कहा है कि लोगों को त्वरित न्याय मिले। इसके लिए जरूरी है कि छोटे-छोटे मामलों को आपसी समझौते से निराकरण किया जाए। उन्होंने कहा कि न्यायालयीन प्रकरणों के निपटारे के लिए न्यायाधीशों को बेहतर तैयारी करनी चाहिए, जिससे वे प्रकरणोें पर अपने निर्णय शीघ्रता से दे सके। इसके साथ ही उन्होंने न्यायालयीन प्रकरणों के तेजी से निपटारे के लिए नई तकनीक के इस्तेमाल और वकीलों के प्रशिक्षण के लिए अकादमी प्रारंभ करने की आवश्यकता पर बल दिया। सिन्हा आज 'भारतीय न्यायालयों में लम्बित प्रकरणों के कारणों का विश्लेषण एवं उनके निदान के चरण' पर आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन महाधिवक्ता कार्यालय के द्वारा उच्च न्यायालय के ऑडिटोरीयम में किया गया। 

 न्यायाधीश सिन्हा ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार न्यायालयों की अधोसंरचना विकास के लिए कदम उठा रही है। छत्तीसगढ़ पहला प्रदेश है, जहां कमर्शियल कोर्ट स्थापित किया गया है, जहां आनलाइन फाइलिंग की सुविधा दी जा रही है। न्यायालयीन प्रकरणों को तेजी से निपटारे के लिए न्यायाधीशों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि न्यायालय में कोई मामला लंबित होता है तो इसके प्रक्रियागत व्यावहारिक, सामाजिक, प्रोफेशनल, लीगल सहित कई पहलू होते हैं। सिन्हा ने कहा कि न्यायालयों में लंबित मामले के संबंध में यह भी विचारणीय है कि क्या न्यायालयों की संख्या कम है। न्यायाधीशों एवं वकीलों के प्रशिक्षण की जरूरत है, इन सभी मुद्दों पर विचार करना होगा। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पीआर रामचंद्र मेनन ने भी अपने विचार व्यक्त किए। महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा ने मुख्यअतिथि का परिचय देते हुए उनके द्वारा विभिन्न महत्वपूर्ण निर्णयों का उल्लेख किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायाधीश प्रशांत मिश्रा, न्यायाधीश मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव सहित सभी न्यायाधीश, अतिरिक्त महाधिवक्ता विवेक रंजन तिवारी, आलोक बक्शी, फौजिया मिर्जा,  अमृतो दास, सभी उप महाधिवक्तागण, शासकीय अधिवक्ता, पैनल लायर्स, स्टेट बार काउन्सिल एवं हाईकोर्ट बार काउन्सिल के पदाधिकारी, हाईकोर्ट रजिस्ट्री अधिकारी आदि बड़ी संख्या में उपस्थित थे। 

05-03-2020
मध्यप्रदेश में भाजपा विधायक संजय पाठक की दो खदानों को किया गया सील

नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में सियासी गलियारों में अफरा-तफरी मची हुई है। कांग्रेस ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि भाजपा नेता विधायकों के खरीद-फरोख्त करने की कोशिश में लगी है। वहीं बीजेपी की पूर्ववर्ती सरकार में मंत्री रह चुके विधायक संजय पाठक की दो खदानों को बुधवार को सील कर दिया गया है। संजय पाठक खनन के बड़े कारोबारी है। बता दें कि पाठक पर आरोप है कि उसने कमलनाथ के नेतृत्व वाली मध्यप्रदेश की कांग्रेस नीत सरकार को गिराने के लिए कुछ विधायकों को बहलाया फुसलाया और हरियाणा की एक होटल में ले जाने के लिए किए गए चार्टेड प्लेन एवं वहां ठहरने के लिए पैसे का बंदोबस्त किया। मध्य प्रदेश बीजेपी के प्रवक्ता हितेश बाजपेयी ने कहा कि आदेश में कहा गया है 4 मार्च 2020 को सर्वोच्च न्यायालय के अनुपालन में जबलपुर जिले की सिहोरा तहसील के ग्राम अगरिया खसरा नंबर 1093 और दुबियारा खसरा नंबर 628/1, पर मेसर्स निर्मला मिनरल्स को स्वीकृत आयरन ओर की खदानों को फिर से बंद करने के आदेश जारी कर दिया गया है।

04-03-2020
सूचना आयुक्त समाज का प्रख्यात व्यक्ति होना जरुरी, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों से अवगत करने सीएम को लिखा पत्र

रायपुर। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद हाल ही में छत्तीसगढ़ राज्य शासन द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग में सूचना आयुक्त की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी कर आवेदन आमंत्रित किए हैं। अंतिम तिथि 10 फरवरी थी। आवेदन प्राप्त होने उपरांत चयन प्रक्रिया की जानी है। इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा समय-समय पर जारी किए गए निर्देशों से मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष को अवगत करने के लिए सूचना का अधिकार के जानकार और ‘जानिए अपना सूचना का आधिकार‘ पुस्तक के लेखक नितिन सिंघवी ने पत्र लिखा है। पत्र में बताया गया है कि सर्वोच्च न्यायालय ने यूनियन ऑफ इंडिया विरुद्ध अमित शर्मा रिव्यू पिटिशन सिविल 2309-2012 में आदेशित किया है कि सिर्फ समाज में प्रख्यात व्यक्ति,जिन्हें निर्धारित फील्ड में व्यापक ज्ञान और अनुभव हो का ही चयन सूचना आयुक्त के लिए किया जाये एवं सूचना आयुक्त के चयन के लिए गठित चयन समिति,राज्यपाल को नियुक्ति की अनुशंसा करते वक्त अनिवार्य रूप से यह बताएगी की वह व्यक्ति जिसका चयन किया गया है। उसका व्यापक नॉलेज और अनुभव क्या है तथा वह समाज में प्रख्यात व्यक्ति क्यों पाया गया।

सर्वोच्च न्यायालय ने अंजलि भारद्वाज विरुद्ध यूनियन ऑफ इंडिया रिपीटेशन सिविल क्रमांक 436-2018 में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति सिर्फ सरकारी अधिकारियों या सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारियों के लिए आरक्षित नहीं है। न्यायालय ने आदेशित किया है कि सर्च कमेटी कैंडिडेट की शॉर्ट लिस्टिंग क्राइटेरिया को पब्लिक करेगी। नमित शर्मा विरुद्ध यूनियन ऑफ इंडिया रिट पिटिशन सिविल 210-2012 में आदेशित किया है कि प्रख्यात व्यक्ति ऐसा होना चाहिए,जिसकी पब्लिक इमेज ऐसी हो,जिससे पता चले कि उसने समाज के लिए कुछ योगदान किया हो। ऐसे व्यक्ति को पब्लिक इंटरेस्ट की पब्लिक के भले की समझ होनी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण है कि उसने समाज को सामाजिक कार्यों द्वारा या समान कार्यो द्वारा योगदान दिया हो।

पत्र में बताया गया है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों से यह स्पष्ट हो जाता है कि कोई भी सरकारी कर्मचारी भले उसे निर्धारित फील्ड में व्यापक नॉलेज और अनुभव हो, उसके समाज में प्रख्यात होने की संम्भावना नगण्य है। सरकारी अधिकारी या हाल ही में सेवानिवृत हुए अधिकारी समाज में प्रख्यात नहीं हो सकते क्यों कि वह वेलफेयर के कार्य शासन की स्कीम और योजना के अनुसार कराते है,जिसके लिए शासन उसे तनखा देती है वे अपने मन से कोई भी वेलफेयर की स्कीम नहीं चला सकते। अतः वे किसी जगह पर फेमस तो हो सकते हैं परन्तु समाज में प्रख्यात नहीं। सबसे महत्वपूर्ण शर्त जो कोर्ट ने बताई है कि प्रख्यात व्यक्ति वही होगा,जिसने समाज को सामाजिक कार्यो द्वारा योगदान किया हो यह शर्त शासकीय सेवक या पूर्व शासकीय सेवक के रूप में पूरी किया जाना असंभव है। पत्र में कोर्ट के आदेशों का पालन करने के लिए निवेदन किया गया है। गौरतलब है कि सूचना आयुक्त की नियुक्ति की चयन समिति में मुख्यमंत्री अध्यक्ष,नेता प्रतिपक्ष और मुख्यमंत्री द्वारा नामित केबिनेट मंत्री सदस्य होता। राज्य मुख्य सूचना और राज्य सूचना आयुक्त विधि, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, समाजसेवा, प्रबंध, पत्रकारिता, जनसंपर्क माध्यम या प्रशासन और शासन में व्यापक ज्ञान और अनुभव वाले समाज में प्रख्यात व्यक्ति हो सकते।

 

22-02-2020
23 फरवरी को गांधी मैदान में कांग्रेस का प्रदेश स्तरीय धरना प्रदर्शन

रायपुर। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार एससी,एसटी और ओबीसी नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए रविवार 23 फरवरी को सुबह 11 बजे कांग्रेस भवन, गांधी मैदान में कांग्रेस प्रदेश स्तरीय एकदिवसीय धरना प्रदर्शन करेगी। प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री गिरीश देवांगन ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी और संघ परिवार की विचारधारा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग को दिए गए आरक्षण का विरोध कर रही है। भाजपा पिछले कई वर्षों से अपने बयानों और कार्यों के जरिए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्ग के समुदायों को दिये गए आरक्षण पर सुनियोजित तरीके से हमला कर रही है। अपने इसी एजेण्डे पर आगे बढ़ते हुए भारतीय जनता पार्टी सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में असंवैधानिक रूख अपनाया है-सार्वजनिक पदों पर नियुक्तियों में आरक्षण का दावा करना मौलिक अधिकार नहीं है। आरक्षण देना राज्य सरकार का संवैधानिक कर्तव्य नहीं है। गिरीश देवांगन ने कहा कि इन सब पर भाजपा को बेनकाब करने के लिए एकदिवसीय धरना दिया जाएगा।

 

30-01-2020
भूपेश बघेल के सीएए वापस लेने लिखे पीएम को पत्र का कांग्रेस ने किया स्वागत

रायपुर। सीएए वापस लेने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा प्रधानमंत्री को लिखे पत्र का कांग्रेस ने स्वागत किया। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मांग पर केंद्र सरकार को तत्काल विचार करना चाहिए, सीएए छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश के लिए हानिकारक है। देश की जनता मोदी - शाह के क्रोनोलॉजी को समझ चुकी है। सीएए के बाद एनपीआर और एनआरसी को लेकर देश के जन-जन में भय असुरक्षा का वातावरण निर्मित हो चुका है। भाजपा के द्वारा चलाए जा रहे सीएए के समर्थन के प्रोपोगंडा से देश में तनाव है।

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि 21 राज्यों के 42 लाख परिवार जो अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति से आते हैं जो पैतृक रूप से वन भूमि में रहने के बावजूद अपना अधिकार साबित नहीं कर पाए वह कैसे एनआरसी में स्वयं की नागरिकता प्रमाणित करेंगे? निश्चित तौर पर सीएए, एनआरसी, एनपीआर देश की अधिकांश वर्ग के लिए खतरनाक है। केंद्र सरकार तत्काल इस नियम को वापस ले। देश के 21 राज्यों के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं पारम्परिक रूप से वनों में रहने वाले 42 लाख परिवार माननीय सर्वोच्च न्यायालय में वन अधिकार अधिनियम 2006 के अंतर्गत वनभूमि में अपना अधिकार साबित नहीं कर पाए और माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें वहां से बेदखल करने का आदेश दिया। तब केंद्र सरकार 13 फरवरी को माननीय सर्वोच्च न्यायालय में आदेश में सुधार की अपील करती है और कहती है कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पारंपरिक वनवासी परिवार निरक्षर है, गरीब हैं, कानूनी रूप से वे अपने अधिकार को साबित नहीं कर पा रहे हैं। वन अधिकारों की मान्यता कानून, 2006 लाभ देने संबंधी कानून है और बेहद गरीब और निरक्षर लोगों, जिन्हें अपने अधिकारों और कानूनी प्रक्रिया की जानकारी नहीं है की मदद के लिए इसमें उदारता अपनायी जानी चाहिए।

15-01-2020
एनआईए को चुनौती देने वाली याचिका का कांग्रेस ने किया स्वागत

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से एनआईए के क्षेत्राधिकार को चुनौती देने वाली याचिका सर्वोच्च न्यायालय में दायर किए जाने का स्वागत कांग्रेस ने किया है। प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि यह मामला गंभीर संवैधानिक विषयों के साथ-साथ संवेदना एवं जनहित से जुड़ा विषय भी है। यह मामला केंद्र सरकार के द्वारा लगातार संघीय अवधारणा के खिलाफ काम करने से जुड़ा हुआ है। इस मामले में गंभीरता से विचार करने के बाद इस याचिका की आवश्यकता पड़ी है ताकि राज्यों के अधिकारों पर एनआईए एक्ट की आड़ लेकर जो अतिक्रमण केंद्र सरकार के द्वारा किया जा रहा है भविष्य में न किया जा सके।

त्रिवेदी ने कहा है कि जीरम मामले में एनआईए को जब जांच सौंपी गई थी उस समय राज्य सरकार के भाजपा सरकार के नोडल अफसरों ने लगातार जांच में बाधाये डाली और जब केंद्र में मोदी सरकार बनी तो जांच की दिशा ही बदल गई। हमने 2018 का विधानसभा चुनाव जीरम के जांच के मुद्दे पर लड़ा था। शहीदों के परिजन चाहते है कि मामले की जांच हो। राज्य के मतदाता चाहते है कि जीरम मामले की जांच हो। कांग्रेस को जनादेश मिला है,लेकिन एनआईए के द्वारा फाइल नहीं दी जा रही है, वो भी तब जब कानून व्यवस्था राज्य का विषय है। अगर कोई जांच होती है तो राज्य सरकार की अनुशंसा पर होनी चाहिए। राज्य सरकार की अनुमति से होना चाहिए। राज्य सरकार की सहमति से होना चाहिए। राज्य सरकार के संज्ञान में होना चाहिए,लेकिन एनआईए की ओर से ऐसा नहीं किया गया और इस परिप्रेक्ष्य में राज्य और राज्य की जनता के व्यापक हित में कांग्रेस की सरकार ने इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय जाने का फैसला लिया है।


 

13-12-2019
ट्रांसजेंडर बच्चे को देखें तो उसके अंदर आत्मविश्वास पैदा करें, दोस्त बनाएं : विद्या राजपूत 

रायपुर।  महिला उत्पीड़न शिकायत कमेटी और राष्ट्रीय सेवा योजना के संयुक्त तत्वाधान में दुर्गा महाविद्यालय में शुक्रवार को तृतीय लिंग समुदाय के लिए संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में मुख्यअतिथि वक्ता के रूप में विद्या राजपूत, सदस्य तृतीय लिंग कल्याण बोर्ड और रवीना बरिहा सदस्य तृतीय लिंग कल्याण बोर्ड, छत्तीसगढ़ शासन उपस्थित थे। एलजीबीटी सामाजिक कार्यकर्ता सिद्धांत कुमार बेहरा और अंकित दास भी विशेष वक्ता के रूप में कार्यशाला में उपस्थित हुए। रवीना बरिहा ने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से  तृतीय लिंग समुदाय का इतिहास, सर्वोच्च न्यायालय का दिशा-निर्देश, वैज्ञानिक प्रमाण और छत्तीसगढ़ के शासन के दिशा निर्देशों को अवगत कराया।  इसी तरह विद्या राजपूत ने बचपन से लेकर युवावस्था और वृद्धावस्था तक होने वाले किन्नर समुदाय के समस्याओं से उपस्थित विद्यार्थियों और शिक्षकों जानकारी प्रदान की। विद्या राजपूत में शिक्षकों और छात्रों से आह्वान किया कि यदि वह कोई ट्रांसजेंडर बच्चे को देखें तो उसके अंदर आत्मविश्वास पैदा करने की कोशिश करें और उसे अपना सबसे अच्छा दोस्त बनाए।
सामाजिक कार्यकर्ता सिद्धांत कुमार बेहरा ने तृतीय लिंग समुदाय के व्यक्ति को स्कूल और कॉलेज में होने वाली समस्याओं के बारे में बताया। सिद्धांत ने सेक्सुअल डायवर्सिटी और जेंडर डायवर्सिटी को विस्तार से समझाया। अंकित दास ने बताया कि  एक  तृतीय समुदाय का बच्चा भेदभाव और स्वीकार्यता नहीं मिलने के कारण बचपन में बहुत ज्यादा मानसिक तनाव से गुजरता है। यदि हम बचपन से ही ट्रांसजेंडर बच्चे को सपोर्ट करें तो उसका भविष्य निश्चित रूप से बहुत अच्छा बनेगा। अंकित दास ने कहा कि जब से वह अपने आप को स्वीकारा है तब से वह बहुत आत्मविश्वास के साथ जी रहा है। कार्यशाला के अंत में दुर्गा महाविद्यालय के शिक्षकों और छात्रों ने अपने विचार रखें। छात्रों के मन में उठने वाले सवालों का भी जवाब अतिथि वक्ताओं ने दिया। कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने समुदाय के सभी लोगों का मोमेंटो देकर स्वागत किया और अच्छे भविष्य के लिए बधाई दी।

24-11-2019
नरेंद्र मोदी ने की अपील, सभी स्कूलों में मनाया जाए फिट इंडिया सप्ताह

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 59वीं बार देशवासियों से मन की बात की।उन्होंने कहा कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने फिट इंडिया सप्ताह की एक सराहनीय पहल की है। इसके तहत स्कूल दिसम्बर महीने में कभी भी फिट इंडिया सप्ताह मना सकते हैं। इसमें फिटनेस को लेकर कई प्रकार के आयोजन किए जाने हैं। इनमें क्विज, निबंध, लेख, चित्रकारी, पारंपरिक और स्थानीय खेल, योगासन, नृत्य एवं खेलकूद प्रतियोगिताएं शामिल हैं। उन्होंने कहा,फिट इंडिया सप्ताह में विद्यार्थियों के साथ-साथ उनके शिक्षक और माता-पिता भी भाग ले सकते हैं। लोगों को यह नहीं भूलना चाहिए कि फिट इंडिया का मतलब सिर्फ दिमागी कसरत, कागजी कसरत या लैपटॉप या कंप्यूटर पर या मोबाइल पर फिटनेस का एप देखते रहना है। जी नहीं पसीना बहाना है। खाने की आदतें बदलनी है। अधिकतम गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करने की आदत बनानी है।”

प्रधानममंत्री ने सभी राज्यों के स्कूल बोर्ड और स्कूलों के प्रबंधन से अपील करते हुए कहा कि प्रत्येक स्कूल में दिसम्बर में फिट इंडिया सप्ताह मनाया जाए। इससे फिटनेस की आदत हम सभी की दिनचर्या में शामिल होगी। फिट इंडिया आंदोलन में फिटनेस को लेकर स्कूलों की रैंकिंग की व्यवस्था भी की गई हैं। इस रैंकिंग को हासिल करने वाले सभी स्कूल 'फिट इंडिया लोगो' और फ्लैग का इस्तेमाल भी कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि फिट इंडिया पोर्टल पर जाकर स्कूल स्वयं को फिट घोषित कर सकते हैं। फिट इंडिया थ्री स्टार और फिट इंडिया फाइव स्टार रेटिंग भी दी जाएगी। उन्होंने सभी स्कूलों से फिट इंडिया रैंकिंग में शामिल होने का अनुरोध किया। मोदी ने कहा कि फिट इंडिया एक जनांदोलन बने और जागरूकता आए, इसके लिए प्रयास करना चाहिए।

मैं भी एनसीसी का कैंडिडेट रहा हूं: मोदी

मोदी ने कहा कि नवंबर महीने का चौथा रविवार हर साल एनसीसी डे के रूप में मनाया जाता है। मैं भी आप ही की तरह कैडेट रहा हूं और आज भी मन से खुद को कैडेट मानता हूं। दुनिया के सबसे बड़े यूनिफॉर्म्ड यूथ ऑर्गनाइजेशन में भारत की एनसीसी एक है। इसमें सेना, नौ-सेना, वायुसेना तीनों शामिल हैं। उन्होंने कहा कि मेरा भी सौभाग्य रहा कि मैं भी बचपन में मेरे गांव के स्कूल में एनसीसी कैडेट रहा, तो मुझे ये अनुशासन, ये गणवेश मालूम है और उसके कारण आत्मविश्वास का स्तर भी बढ़ता है।

अयोध्या फैसले पर लोगों ने देशहित को सर्वोपरि माना

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि अयोध्या मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद देश में जिस प्रकार की प्रतिक्रिया देखने को मिली उससे साबित हो गया कि देशवासियों ने देशहित को सर्वोपरि माना। मोदी ने कहा 'पिछले ‘मन की बात’ में मैंने 2010 में अयोध्या मामले में आये इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के बारे में चर्चा में कहा था कि देश ने तब किस तरह से शांति और भाई-चारा बनाये रखा था। निर्णय आने के पहले भी, और, निर्णय आने के बाद भी। इस बार भी, जब, नौ नवम्बर को उच्चतम न्यायालय का फैसला आया, तो 130 करोड़ भारतीयों ने फिर से साबित कर दिया कि उनके लिए देशहित से बढ़कर कुछ नहीं है। देश में, शांति, एकता और सद्भावना के मूल्य सर्वोपरि हैं। राम मंदिर पर जब फ़ैसला आया तो पूरे देश ने उसे दिल खोलकर गले लगाया। पूरी सहजता और शांति के साथ स्वीकार किया।' उन्होंने कहा, देशवासियों को साधुवाद और धन्यवाद देता हूं। उन्होंने, जिस प्रकार के धैर्य, संयम और परिपक्वता का परिचय दिया है, उसके लिए विशेष आभार प्रकट करना चाहता हूँ। एक ओर जहाँ लम्बे समय के बाद कानूनी लड़ाई समाप्त हुई है वहीं दूसरी ओर न्यायपालिका के प्रति देश का सम्मान और बढ़ा है। सही मायने में यह फैसला हमारी न्यायपालिका के लिए भी मील का पत्थर साबित हुआ है। सर्वोच्च न्यायालय के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब देश नई उम्मीदों और नई आकांक्षाओं के साथ नए रास्ते पर, नये इरादे लेकर चल पड़ा है। नया भारत इसी भावना को अपनाकर शांति, एकता और सद्भावना के साथ आगे बढ़े यही हम सबकी कामना है।

Advertise, Call Now - +91 76111 07804