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11-05-2020
रेरा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से शुरु की प्रकरणों की सुनवाई, दिशा निर्देश जारी

रायपुर। लॉकडाउन के दौरान छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) ने विभिन्न प्रकरणों की सुनवाई शुरु कर दी है। सोमवार से भू-संपदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2016 की धारा 31 के अंतर्गत प्राप्त शिकायतों की जांच के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई शुरु की गई है। रेरा के अध्यक्ष विवेक ढांड और सदस्य आरके टम्टा ने आज सुनवाई की। बताया गया कि आज आवेदक हरिद्वार से और अनावेदक प्रमोटर और अधिवक्ता रायपुर में अपने निवास से सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से शामिल हुए।रेरा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की प्रक्रिया के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिनके अनुसार पक्षकार और अधिवक्तागण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से प्रकरणों की सुनवाई में शामिल हो सकते हैं। अध्यक्ष विवेक ढांड ने बताया कि रेरा की ओर से 11 मई से सुनवाई के लिए नियत प्रकरणों की केस लिस्ट प्राधिकरण के वेब पोर्टल https ://rera.cgstate.gov.in पर उपलब्ध है। वर्तमान परिदृश्य में प्राधिकरण के समक्ष पक्षकारों की उपस्थिति के स्थान पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से उपस्थिति दर्ज की जा सकेगी। केस लिस्ट में उल्लेखित निर्धारित तिथि पर सुनवाई के लिए नियत  प्रकरणों से संबंधित पक्षकारों और अधिवक्तागणों को सुनवाई के एक दिन पूर्व और सुनवाई के एक घंटे पूर्व पुन: उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी पर सूचित किया जाएगा।उन्होंने बताया कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई के लिए सभी पक्षकारों को अपने मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी की जानकारी रेरा की शासकीय मेलडी office.rera.cg@gov.in पर एक सप्ताह के भीतर निर्धारित प्रारूप में भेजने को कहा गया है। इसमें प्रकरण क्रमांक, पक्षकार तथा अधिवक्ता (यदि कोई हो) का नाम, ई-मेल आईडी, मोबाइल नंबर स्पष्ट रूप से लिखा हो। प्राधिकरण की ओर से तीन कार्य दिवसों में ई-मेल प्राप्त होने की पुष्टि की जाएगी। इसमें किसी प्रकार की त्रुटि होने पर पक्षकार या अधिवक्ता प्रकरण की पेशी तिथि के तीन कार्य दिवस पूर्व तक नवीन मेल से सुधरी हुई जानकारी भेज कर प्राधिकरण के टेलीफोन नंबर 0771-4918927 पर सूचित कर सकेंगे।

05-04-2020
कोरोना संक्रमण को देखते हुए 32 विचाराधीन कैदियों को किया रिहा

रायगढ़। छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण उच्च न्यायालय भवन बिलासपुर द्वारा कोरोना वायरस के फैलते संक्रमण को देखते हुए जिला जेल रायगढ़ में परिरुद्ध 32 विचाराधीन बंदियों को अंतरिम जमानत पर रिहा किए जाने का आदेश प्राप्त हुआ। इनमें से 10 ऐसे विचारधीन बन्दी  जिनके परिजन बंदियों को लेने नहीं पहुंचे थे। उन्हें उनके निवास स्थान तक पहुंचाने की सुविधा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष के निर्देशानुसार की गई थी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा वाहन में स्टाफ एवं पुलिस स्टाफ की व्यवस्था की गई थी। सभी रिहा किए गए विचारधीन बन्दियों को उनके घर तक पहुंचाने के लिए पैरालीगल वैलेंटियर्स की ड्यूटी लगाई गई है। यह पीएलवी जेल से बन्दियों को रिहा कर सम्बन्धित थाने लेकर जाएंगे। जंहा से पुलिस की मदद से सभी को उनके घरों तक छोड़ा जाएगा। 22 बंदियों के परिजन को दूरभाष के माध्यम से सूचित किया गया था वह रविवार को सुबह 5 से 9 बजे के बीच जिला जेल में उपस्थित होकर उन्हें घर ले जा सकते हैं। इससे पहले भी अभी कुछ दिन पहले रायगढ़ जेल से करीब 17 बंदियों को और भी रिहा किया गया था। आज रिहा होने वाले सभी विचारधीन बन्दीयों को 1 मई को जिला एवं सत्र न्यायालय में अपनी उपस्थिति देने के लिए निर्देशित किया गया है।

28-03-2020
VIDEO: राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की बैठक में हुआ फैसला, 1500 कैदी किए जाएंगे रिहा

रायगढ़। कोरोना महामारी की आशंका को देखते हुए जेलों से 1500 कैदी रिहा किए जाएंगे। यह फैसला राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की टेली कांफ्रेंसिंग के माध्यम से छत्तीसगढ़ शासन के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में लिया गया। तिहाड़ जेल दिल्ली के बाद छत्तीसगढ़ दूसरा राज्य है, जहां ऐसा फैसला लिया गया है। राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त मुख्य सचिव सुब्रत साहू, जेल विभाग के प्रमुख सचिव एम के चंद्रवंशी और जेल विभाग के अतिरिक्त महानिदेशक संजय पिल्ले इस टेली कांफ्रेंसिंग में शामिल हुए। प्रदेश की जेलों में बंद छत्तीसगढ़ राज्य के निवासी ऐसे कैदी जिनको किसी मामले में अधिकतम सात साल की सजा हो सकती है या दी गई है, उन्हें कुछ शर्तों के साथ जेलों से रिहा करने का निर्णय लिया गया। ऐसे बंदी जिनके मामले की सुनवाई चल रही हो उन्हें 30 अप्रैल तक की निजी मुचलके पर अंतरिम जमानत दे दी जाएगी। ऐसे बंदी जिन्हें सात साल तक की सजा सुनाई जा चुकी है और जेल में तीन माह या उससे अधिक की अवधि व्यतीत कर चुके हों उन्हें 30 अप्रैल तक पैरोल पर छोड़ दिया जायेगा।

इन बंदियों को अपना आवेदन अपने जिलों के विधिक सेवा प्राधिकरण में जिला जज की ओर से नियुक्त किए गए विशेष जजों के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। इसके बाद रिहा करने की कार्रवाई की जाएगी। प्रदेश में इस फैसले से लाभान्वित होने वाले बंदियों की संख्या लगभग 1500 बताई गई है। इसी कड़ी में रायगढ़ जिला जेल से भी जिला विधिक सेवा प्रधिकरण के निर्देश पर लगभग 17 कैदी आज रायगढ़ से भी रिहा किए गए, जिसमें की कुछ कैदी रायगढ़ शहर के थे तो कुछ दूरदराज ग्रामीण इलाकों के। दूरदराज ग्रामीण इलाकों के कैदियों के सही सलामत घर पहुंचने की व्यवस्था भी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा की गई थी। इनके लिए विशेष वाहन की व्यवस्था कर इनको अपने घर तक छोड़ा गया और साथ ही सभी कैदियों को प्रमाण पत्र भी वितरण किया गया। जैसे ही आज 17 कैदी रिहा हुए जेल से सभी के चेहरे खिल उठे सभी ने दोबारा किसी प्रकार की गलती ना कर दोबारा जेल ना आने का भरोसा भी जेलर को दिलवाया साथ ही साथ कोरोना वायरस के मद्देनजर मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग एवं लॉक डाउन का पालन करने का भी भरोसा जेलर को दिया, वहीं आसपास के कैदियों को लेने के लिए उनके परिवारजन भी पहुँचे थे।

15-11-2019
रेरा ने पीआरटी कन्स्ट्रक्शन के खिलाफ आदेश किया पारित, प्रोजेक्ट में क्रय-विक्रय पर रोक

रायपुर। छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) द्वारा 'उषा किरण परिसर' भाठागांव रायपुर प्रोजेक्ट के निवासियों की शिकायत पर प्रकरण की विवेचना कर अनावेदक पीआरटी कन्स्ट्रक्शन सुंदर नगर कारगिल चौक रायपुर के विरूद्ध आदेश पारित किया गया है। आनावेदक द्वारा पारित आदेशों का पालन नहीं किया जाता तब तक प्रोजेक्ट में क्रय-विक्रय पर रोक लगायी गई है। अनावेदक को प्रोजेक्ट का तत्काल पंजीयन कराने के आदेश दिए गए हैं। आदेश के पालन के लिए जिला पंजीयक और कलेक्टर रायपुर को भी निर्देशित किया गया है। रेरा के अध्यक्ष विवेक ढाँड द्वारा पारित आदेश में पी.आर.टी. कन्स्ट्रक्शन को अधिनियम की धारा-56(1) के तहत अधिरोपित शास्ती की राशि 10 लाख रूपए 15 दिवस के भीतर प्राधिकरण में जमा कराने और सीसीटीवी स्थापना के लिए राशि, रखरखाव के लिए प्राप्त राशि और सुरक्षा निधि-सदस्यता शुल्क के रूप में प्राप्त राशि दो लाख 45 हजार रूपए अर्जित ब्याज सहित उषा किरण परिसर सहकारी समिति को 15 दिवस के भीतर हस्तांतरित करना सुनिश्चित करने कहा गया है। अनावेदक द्वारा जब तक इन तीनों आदेशों का पालन नहीं किया जाता है, तब तक प्रोजेक्ट में क्रय-विक्रय पर रोक लगायी गई है। इसके अलावा प्राधिकरण के आदेशों का पालन नहीं करने के कारण अनावेदक पर 21 नवम्बर 2018 से वसूली तिथि तक 500 रूपए प्रति दिवस की शास्ति अधिरोपित की गई है। पारित आदेश के अनुसार यदि अनावेदक द्वारा उपरोक्त सभी राशि निर्धारित समयावधि में जमा नहीं की जाती तो आर.आर.सी. के माध्यम से अनावेदक से यह राशि ब्याज सहित वसूल कर प्राधिकरण में जमा किए जाने के लिए रायपुर कलेक्टर को आदेशित किया गया है।

12-06-2019
​कैबिनेट के तीन अहम फैसले, पीएससी से डिप्टी कलेक्टर पद बाहर, प्राधिकरण का नाम बदला

रायपुर। राज्य सरकार ने बुधवार को कैबिनेट की बैठक में कई अहम निर्णय लिए। सुबह से शुरू हुई कैबिनेट की बैठक में जहां किसानों, छात्रों के हित में महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। वहीं कैबिनेट ने आज की बैठक में अहम फैसला लिया है। कैबिनेट ने डिप्टी कलेक्टर पद को राज्य प्रशासनिक सेवा से बाहर कर दिया है। इससे नक्सली हमले का शिकार हुए कांग्रेस के दिवंगत नेता महेंद्र कर्मा के बेटे आशीष कर्मा को डिप्टी कलेक्टर बनाए जाने का रास्ता साफ हो गया है। एक अन्य निर्णय में कैबिनेट ने महाधिवक्ता पद पर सतीशचंद्र वर्मा की नियुक्ति का अनुमोदन किया है। अटल नगर विकास प्राधिकरण के नाम में परिवर्तन किया गया है। कैबिनेट के निर्णय अनुसार अब नवा रायपुर विकास प्राधिकरण कर दिया गया है। 

04-06-2019
मुख्यमंत्री ने लगाई चौपाल, ग्रामीणों को समझाया नरवा, गरुवा, घुरवा और बाड़ी योजना का महत्व

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मंगलवार को सरगुजा संभाग के सुदूरवर्ती सूरजपुर जिले के ग्राम पंचायत केशवनगर पहुंचकर यहां बनाये गए ‘हमर गांव-हमर गौठान‘ का अवलोकन किया। उन्होंने गौठान में बनाये गए पैरा कट्टी शेड, वेटनरी हेल्प डेस्क, चारागाह, बाड़ी सहित विभिन्न घटकों का अवलोकन किया। इसी तरह स्व-सहायता समूहों के द्वारा तैयार किए गए उत्पादों का भी अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने यहां पशुओं को पहचान पट्टा पहनाया और चारा खिलाया। 
उल्लेखनीय है कि यह गौठान लगभग 8 एकड़ क्षेत्र में बनाया गया है। यहां पर 640 पशु रखे गए है। गौठान के बगल से बहने वाली रेण नदी में उपलब्ध पानी से यहां सौर सामुदायिक सिंचाई परियोजना संचालित है। 73 एकड़ में यहां 5 एचपी क्षमता वाले कुल 60 पम्प लगाये गये है। इससे लगभग 144 किसान लाभान्वित होंगे।
मुख्यमंत्री ने यहां चौपाल लगाकर ग्रामीणों की समस्याओं से रूबरू हुए। मुख्यमंत्री ने नरवा, गरुवा, घुरवा और बाड़ी योजना के संबंध में गांव वालो से उनका सुझाव लेते हुए इसके महत्व और उद्ेश्य से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए मील का पत्थर साबित होगी। गौठान से पशुओं को एक स्थान पर रखा जा सकेगा। एक से अधिक फसल लेने में सुविधा होगी। कृषि लागत में कमी आयेगी एक ओर जहॉ पशुओं के देखरेख एवं खानपान का उचित अवसर मिलेगा, वहीं गायों के गोबर से कम्पोस्ट खाद एवं गोबर का उत्पादन होगा। केशवनगर गौठान को विकसित करने के लिये 20 लाख रुपए की स्वीकृत की गई है। कम्पोस्ट खाद बनाने में रोजगार के अवसर पैदा होगें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गौठान सरकार नहीं चलाएगी बल्कि उसे किसानों की समिति चलाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य शासन द्वारा विभिन्न तरीकों जैसे ऋण माफी, 2500 हजार रुपये प्रति क्विटंल में धान खरीदी आदि के द्वारा मदद की जा रही है। मुख्यमंत्री ने यहां वन अधिकार मान्यता पत्र के तहत् प्रतीकात्मक स्वरुप वनवासियों को वन अधिकार पत्र प्रदान किया। यहां पर कुल 1057 हितग्राहियों को वनाधिकार पट्टे का वितरण किया गया। 
स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि नरवा, गरुवा, घुरुवा और बाड़ी योजना के तहत गांव-गांव में गौठान का निर्माण किया जा रहा है। गौठान से पशु संवर्धन और सुरक्षा का कार्य होगा, खेती-किसानी को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और उनकी आय में वृद्धि होगीं। 
इस अवसर पर स्कूल शिक्षामंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, सरगुजा विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष खेलसाय सिंह, विधायक गुलाब कमरो, मुख्य सचिव सुनील कुजूर और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव आरपी मण्डल, आईजी सरगुजा केसी अग्रवाल, कलेक्टर दीपक सोनी, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अश्वनी देवांगन सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

20-05-2019
जेलबंदियों के परिवारवालों के लिए विशेष अभियान का शुभारंभ

 

कोरबा। जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोरबा राकेश बिहारी घोरे के मार्गदर्शन में बंदियों के परिवारजनों को विधिक सहायता उपलब्ध कराने संबंधी विशेष अभियान चलाया जा रहा है। प्रथम चरण में जिला जेल कोरबा में सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोरबा एवं  लीगल एड क्लीनिक के पैनल अधिवक्ता जनक राम देवांगन, विधि के छात्रों द्वारा बंदियों से मुलाकात कर निर्धारित प्रपत्र में उनके परिवार के सदस्यों की समस्या, विधि सेवा सहायता की आवश्यकता, विधवा पेंशन, बच्चों की छात्रवृत्ति, राजकीय कल्याणकारी योजनाओं का लाभ, स्वास्थ्य सुविधाएं, बैंक खाता, आधार कार्ड, राशन कार्ड, बीपीएल कार्ड दिव्यांग, प्रमाण पत्र इत्यादि बनाने की आवश्यकता के संबंध में पूछताछ की गई। इस संबंध में सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोरबा द्वारा बताया गया कि उक्त अभियान प्रथम चरण मई से व द्वितीय चरण 1 जून से प्रारंभ होगा। इसके तहत प्रत्येक बंदी से व्यक्तिगत संपर्क  करने का प्रयास पैरा लीगल वालंटियर पैनल अधिवकता के माध्यम से किया जाएगा। बंदी के जेल में निरुद्ध रहने के दौरान उसे स्वयं अथवा उसके परिवार को किसी प्रकार की विधिक सहायता की आवश्यकता तो नहीं है। इस संबंध में बंदियों के  परिजनों की आजीविका, बंदियों के बच्चों की शिक्षा व स्वास्थ्य संबंधी समस्या, बंदी के परिवार में महिलाओं के उत्पीडऩ संबंधी समस्या, बंदी के परिवार में वृद्धावस्था पेंशन एवं शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाने हेतु उनसे चर्चा कर प्रत्येक बंदी से जानकारी एकत्र की जाएगी। इस अवसर पर उप जेल कटघोरा रवी दत्ता एवं रामायण दास महंत, लीगल एड क्लीनिक के अधिवक्ता शामिल रहे। इसके अलावा ज्योति भूषण, प्रताप सिंह विधि महाविद्यालय के इंटर्नशिप करने वाले विधि के छात्र गीता दास, किरण, निशा पासवान, निवेदिता सिंह, रश्मि गनवानी, शिवकुमार साहू, अमित शर्मा, हर्षा साहू, पंकज शर्मा एवं  रश्मि पासवान शामिल रही।

06-05-2019
विधिक सेवा प्राधिकरण ने कराई पति और पत्नी के बीच सुलह

कोरबा। पति और पत्नी के बीच विवाद का आपसी सुलह और समझौता कराकर निराकरण सोमवार को तालुका विधिक सेवा प्राधिकरण कटघोरा में किया गया। इसमें विवाहित जोड़े रामकुमार और साधना के बीच सुलह कराई गई। इसमें तालुका विधिक सेवा प्राधिकरण कटघोरा के अध्यक्ष थॉमस एक्का व पैरा लीगल वॉलिंटियर विजयलक्ष्मी सोनी, रविशंकर,आरती मंगेशकर ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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