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17-03-2020
राज्य सरकार और अभिनेता आमिर खान को हाईकोर्ट का नोटिस, पढ़े क्या है मामला

रायपुर। बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता आमिर खान को पूर्व में दिए उनके विवादित बयान को लेकर दायर याचिका पर सोमवार को जस्टिस संजय के अग्रवाल की एकल पीठ में सुनवाई हुई। एकलपीठ ने आमिर खान और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने को कहा है। बता दें कि हाई कोर्ट में सोमवार को मामले में राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता मतीन सिद्दिकी ने पक्ष रखा। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से वकील अमीयकांत तिवारी ने मामले में पैरवी की। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद जस्टिस संजय के अग्रवाल ने नोटिस जारी कर जवाब पेश करने कहा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 21 दिन बाद होगी। अभिनेता आमिर ने 24 नवंबर 2015 में एक पुरस्कार समारोह में कहा था कि देश में असहिष्णुता का माहौल है, इसलिए वे और उनकी पत्नी देश छोड़कर कहीं और जाने की सोच रहे है। देश अब रहने लायक नहीं रह गया है। याचिकाकर्ता ने विवादित बयान के लिए आमिर खान के खिलाफ भादवि की धारा 153 ए व 153 बी के तहत जुर्म दर्ज करने की मांग की है। रायपुर निवासी दीपक दीवान ने इस बयान के खिलाफ रायपुर के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फास्ट ट्रेक के कोर्ट में परिवाद दायर कर कार्रवाई की मांग की थी। मामले की सुनवाई के बाद जेएमएफसी ने परिवाद को खारिज कर दिया। इसके खिलाफ दीवान ने रिवीजन पेश किया था। रिवीजन बाद भी खारिज हो गया था। इस फैसले को उसने हाई कोर्ट में चुनौती दी है।

 

19-01-2020
हाईकोर्ट ने अंतर जिला तबादले पर लगाई रोक

रायपुर। महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए बिलासपुर हाईकोर्ट ने अंतर जिला तबादले पर रोक लगा दी है। भिलाई निवासी महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता दीप्ति बंछोर ने अपने वकील अभिषेक पांडेय के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने जिला दुर्ग से जिला बालोद तबादला कर दिया है। याचिकाकर्ता ने सरकार की तय स्थानांतरण नीति का हवाला देते हुए कहा है कि महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता वर्ग 3 का पद है। इस पद की वरिष्ठता जिला स्तर पर तय की जाती है। अंतर जिला स्थानांतरण की स्थिति में वरिष्ठता प्रभावित होगी। मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की एकल पीठ में हुई एकल पीठ ने स्थानांतरण आदेश पर रोक लगा दी है।

16-01-2020
हाईकोर्ट का निर्देश अब सीधे नहीं हो पाएगी भ्रूण परीक्षण की शिकायत

रायपुर। जस्टिस संजय के अग्रवाल की एकल पीठ में लिंग परीक्षण की शिकायत पर डॉक्टर दंपत्ति के खिलाफ सीधे दर्ज की गई एफआईआर पर रोग लगा दी है। इसके साथ ही मामले में पुलिस को पीएनडीटी अधिनियम के तहत कोर्ट में परिवाद दायर करने के दिशा निर्देश भी जारी किए है। उल्लेखनीय महासमुंद जिले के सरायपाली बसना के ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी डॉ.रोजेदार ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग हाईकोर्ट में याचिका के माध्यम से लगाई थी। याचिकाकर्ता ने कहा है कि उसके खिलाफ एक महिला ने कलेक्टर से  फर्जी शिकायत की थी। शिकायतकर्ता ने कहा है कि डॉ. रोजेदार और उनकी पत्नी भ्रूण परीक्षण करते हैं। महिला की शिकायत के आधार पर कलेक्टर ने तहसीलदार को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे ।कलेक्टर के निर्देश पर तहसीलदार ने थाने में उसके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया| मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस संजय के अग्रवाल ने चिकित्सक के खिलाफ सीधे दर्ज रोक लगा दी।

 

 

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