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02-08-2020
नई शिक्षा नीति में स्कूली बच्चों को सुबह पौष्टिक नाश्ता का प्रस्ताव, होगी छात्रों की नियमित स्वास्थ्य जांच

नई दिल्ली। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मध्याह्न भोजन के साथ सरकारी या सहायता प्राप्त स्कूलों में बच्चों को नाश्ता मुहैया कराने का प्रावधान रखने का भी प्रस्ताव है। पिछले दिनों केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर की गई इस शिक्षा नीति में कहा गया है कि सुबह के समय पोषक नाश्ता मिलना ज्ञान-संबंधी असामान्य मेहनत वाले विषयों की पढ़ाई में लाभकर हो सकता है। इसी के मद्देनजर नई शिक्षा नीति में प्रस्ताव किया गया है कि मध्याह्न भोजन के दायरे का विस्तार कर उसमें नाश्ते का प्रावधान जोड़ा जाए। शिक्षा नीति में कहा गया, ‘जब बच्चे कुपोषित या अस्वस्थ होते हैं तो वे बेहतर रूप से सीखने में असमर्थ हो जाते हैं। इसलिए, बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य (मानसिक स्वास्थ्य सहित) पर ध्यान दिया जाएगा। पोषक भोजन और अच्छी तरह से प्रशिक्षित सामाजिक कार्यकर्ताओं, काउंसलर, और स्कूली शिक्षा प्रणाली में समुदाय की भागीदारी के साथ-साथ शिक्षा प्रणाली के अलावा विभिन्न सतत उपायों के माध्यम से कार्य किया जाएगा।’ इसमें कहा गया, ‘शोध बताते हैं कि सुबह के समय पोषक नाश्ता ज्ञान-संबंधी असामान्य मेहनत वाले विषयों की पढ़ाई में लाभकारी हो सकता है।

इसलिए बच्चों को मध्याह्न भोजन के अतिरिक्त साधारण लेकिन स्फूर्तिदायक नाश्ता देकर सुबह के समय का लाभ उठाया जा सकता है।’ जिन स्थानों पर गरम भोजन संभव नहीं है,उन स्थानों पर साधारण लेकिन पोषक भोजन मसलन मूंगफली या चना गुड़ और स्थानीय फलों के साथ उपलब्ध कराया जा सकता है।नई शिक्षा नीति में कहा गया है,‘सभी स्कूली छात्रों की नियमित स्वास्थ्य जांच कराई जाए और उनका शत प्रतिशत टीकाकरण हो। इसकी निगरानी के लिए स्वास्थ्य कार्ड भी जारी किए जाएंगे।’ नई नीति में प्रस्ताव किया गया है कि पांच साल की उम्र के पहले सभी बच्चों को ‘प्रारंभिक कक्षा’ या ‘बालवाटिका’ को भेजा जाए। इसमें कहा गया है, ‘प्रारंभिक कक्षा में पढ़ाई मुख्य रूप से खेल आधारित शिक्षा पर आधारित होगी और इसके केंद्र में ज्ञान-संबंधी, भावात्मक और मनोप्ररेणा क्षमताओं के विकास को रखा गया है। मध्याह्न भोजन कार्यक्रम का विस्तार प्राथमिक स्कूलों की प्राक्-प्रवेश कक्षाओं में भी किया जाएगा।’ शिक्षा नीति के तहत पांचवीं कक्षा तक के बच्चों की पढ़ाई उनकी मातृ भाषा या क्षेत्रीय भाषा में होगी, बोर्ड परीक्षाओं के महत्व को इसमें कुछ कम किया गया है।

31-07-2020
विष्णुदेव साय ने नई शिक्षा नीति को बताया सदियों से मानसिक गुलामी से आजादी दिलाने वाला एक ऐतिहासिक कदम

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई ने केंद्र सरकार की ओर से घोषित राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2019 का स्वागत किया है। भाजपा की प्रदेश इकाई ने कहा है कि यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारतवर्ष को समय के साथ कदमताल करने की ऊर्जा प्रदान करेगी वहीं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की अवधारणा को एक नया आयाम प्रदान कर देश के शैक्षिक जगत में क्रांतिकारी व युगानुकूल परिवर्तन लाने वाली सिद्ध होगी। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने कहा कि केन्द्रीय मंत्रिमण्डल द्वारा नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को स्वीकृति प्रदान करना महज एक फैसला नहीं है अपितु यह सदियों से विदेशी मानसिकता की गुलामी से आजादी दिलाने वाला एक ऐतिहासिक कदम है। स्वतंत्र भारत की यह तीसरी शिक्षा नीति है किन्तु जहाँ पहले की दोनों शिक्षा नीतियाँ केवल शिक्षा के प्रसार के लिए केवल इसके संख्यात्मक पक्ष पर ही जोर दे रहीं थीं वहीं यह नीति शिक्षा के गुणात्मक पक्ष पर भी जोर दे रही है। इसीलिये एक ओर जहाँ यह नीति स्कूलों में शत-प्रतिशत नामांकन के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ने की बात करती हैं तो दूसरी ओर पाठ्यचर्या और पाठ्यक्रम को विषय केन्द्रित न रखते हुए केवल मूल सिद्धान्तों को सिखाने की दृष्टि से पुन: गढ़ने की बात करती है।

 

11-01-2020
जवाहर नवोदय विद्यालय में प्रवेश परीक्षा हुई सम्पन्न

प्रेमनगर। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 के अंतर्गत ऐसे आवासीय विद्यालयों की परिकल्पना की गई है, जिन्हें जवाहर नवोदय विद्यालय का नाम दिया गया है और ये सर्वश्रेष्ठ ग्रामीण प्रातिभाओं को आगे लाने में यथा संभव प्रयास करेंगे। यह महसूस किया गया है कि विशेष प्रतिभाशाली बच्चों की फीस देने की क्षमता को ध्यान में न रखते हुए उन्हें गुणात्मक शिक्षा उपलब्ध कराकर समुचित अवसर प्रदान किये जायें ताकि वे अपने जीवन में तेजी से आगे बढ़ सके। ऐसी शिक्षा इन ग्रामीण विद्यार्थियों को अपने समकक्ष शहरी विद्यार्थियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सहायक होगी। भारत तथा अन्यत्र दी जाने वाली स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में नवोदय विद्यालय प्रणाली एक अनूठा प्रयोग है। इस प्रयोग की महत्ता ग्रामीण प्रतिभाशाली बच्चों को लक्ष्य में रखकर किये गए चयन तथा उन्हें आवासीय स्कूल प्रणाली कर अंतर्गत दी जाने वाली सर्वश्रेष्ठ शिक्षा के समान गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने के प्रयास में निहित है। इस परीक्षा का केंद्र प्रेमनगर के बालक उ0 मा0 विद्यालय और कन्या उच्च्तर माध्यमिक विद्यालय में बनाया गया था। यह क्षेत्र वनांचल क्षेत्र है जहां पिछले वर्ष 319 छात्र परीक्षा में शामिल हुए थे इस वर्ष दोनों केंद्र मिलाकर 733 पिछले वर्ष की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा छात्र इस परीक्षा में शामिल हुए हैं। आज के इस परीक्षा में बालक उ0 मा0 विद्यालय में कुल 362 जिसमें 77 छात्र अनुपस्थित थे और कन्या उ0 मा0 विद्यालय में कुल 371 थे जिसमें 92 छात्र अनुपस्थित हुए।

इस परीक्षा को सुचारू रूप से संचालित करने के लिये प्रेमनगर तहसीलदार अंकिता तिवारी और विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी आलोक सिंह के द्वारा समय समय पर निरीक्षण करते रहे। बालक उ0 मा0 विद्यालय में नवोदय विद्यालय से सेंट्रल लेवल ऑब्जर्वर कामिल खलखो ब्लॉक् से ऑब्जर्वर बी आर सी राजेश कुजूर और कन्या में सेंट्रल लेवल ऑब्जर्वर एस0 के0 सुमन और सहायक विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी प्रताप पैंकरा को बनाया गया था। जिसके कारण यह परीक्षा शांतिपूर्ण सम्पन्न हुई। इस परीक्षा में ग्रामीण होनहार छात्र छात्राओं ने अपने प्रतिभा को प्रस्तुत करने शामिल हुए। इन केंद्रों से हर साल होनहार बच्चे नवोदय विद्यालय में प्रवेश लेते हैं। इस परीक्षा बालक उ. मा. विद्यालय प्राचार्य रामजी लहरे, कन्या प्राचार्य गंगा राम बघेल, व्याख्याता विपिन पाण्डेय, रामबरन सिंह, ललित रात्रे, कृष्ण कुमार ध्रुव, सुकुल सिंह राठिया, पीताम्बर सिंह, विराज खलखो, पूरन सिंह, ज्योति साव, विनोद रावत, रमेश साहू, नीता रजक, घूरन राम, संदीप एक्का, बीरबल यादव, गौरी शंकर साहू, दिनेश कुमार प्रजापति ,आभा सिंह ,कुमार सिंह मार्तण्ड, गोपाल मैत्री, नर्मदा चौहान,सिजुवेंद्र साव,राकेश कैवर्त आदि ने पर्यवेक्षक के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सम्पन्न कराया। इसकी जानकारी व्याख्याता कृष्ण कुमार ध्रुव ने दिया।

 

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