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14-11-2020
मुख्यमंत्री ने गोवर्धन पूजा और गौठान दिवस की दी शुभकामनाएं, कहा-365 दिन गायों की सेवा करें

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेशवासियों को 15 नवम्बर को गोवर्धन पूजा और गौठान दिवस की शुभकामनाएं दी है। उन्होंने प्रदेश की सुख, समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना की है। मुख्यमंत्री ने अपने शुभकामना संदेश में कहा है कि गोवर्धन पूजा लोकजीवन से जुड़ा त्यौहार है। दीपावली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा की जाती है, इसे अन्नकूट के रूप में में जाना जाता है। छत्तीसगढ़ में इस दिन गायों की पूजा करने की परंपरा रही है। गायों को सजा-धजा कर उनकी पूजा कर खिचड़ी खिलाई जाती है। गोधन के रूप में अमूल्य चीजों के लिए श्रद्धा और आभार प्रकट किया जाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य सरकार ने गोधन को सहेजने और उसका लाभ लोगों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है। सुराजी गांव योजना के तहत प्रदेश में गौठान बनाए जा रहे हैं, ताकि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के साथ ही फसलों की रक्षा हो सके। पशुपालन को अर्थव्यवस्था से जोड़ने, लोगों को रोजगार दिलाने और जैविक खेती को बढ़वा देने के प्रयास किये जा रहे हैं। गौ पालकों से गोबर खरीद कर वर्मी कम्पोस्ट और दूसरे उपयोगी सामान बनाने की पहल की गई है। इसका फायदा छत्तीसगढ़ के निवासियों को मिलने लगा है। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि गोवर्धन पूजा में खिचड़ी खिलाने की तरह ही हम सभी को साल के 365 दिन गायों के लिए छाया, चारा और पानी की व्यवस्था तय करनी होगी।

25-10-2020
स्व सहायता समूह की महिलाएं तैयार कर रहीं है वर्मी खाद, अर्थव्यवस्था होगी मजबूत

बीजापुर। गौठानों में गोधन न्याय योजना अंतर्गत गोबर खरीदी की जा रही है। इन्हीं खरीदे गए गोबर से स्व सहायता समूह की महिलाएं वर्मी खाद तैयार कर रहीं है। कलेक्टर रितेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में कृषि विभाग और स्व सहायता समूह के समन्वय से वर्मी खाद तैयार करने की कार्ययोजना बनाई गई है। राज्य में ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूती और ग्रामीणों को आजीविका मूलक गतिविधियों से जोड़ने के लिए राज्य शासन ने कई महत्वपूर्ण योजनाओं की घोषणा की है।इन्हीं योजनाओं में से गांव में गौठान का सुचारू रूप से संचालन व गोबर खरीदी कर उसका वर्मी खाद तैयार कर जैविक कृषि को बढ़ावा देते हुए ग्रामीण महिलाओं को आजीविका मूलक गतिविधियों से जोड़ना एक सराहनीय पहल है। ग्राम पंचायत मुरदण्डा के गौठान में गोधन न्याय योजना अंतर्गत अब तक कुल 481.86 क्विंटल गोबर की खरीदी की गई है। इन्हीं गोबर का उपयोग कर स्व सहायता समूह ग्राम पंचायत मुरदण्डा की महिलाएं वर्मी खाद का उत्पादन कर रही है। मिली जानकारी के अनुसार स्व सहायता समूह की महिलाओं ने अभी 40 किलोग्राम केचुआ लाकर वर्मी टैंक में डाला है। इस समूह में 10 सदस्य है, जो कृषि विभाग के देख रेख व तकनीकी मार्गदर्शन में खाद तैयार कर रहीं है। वर्मी खाद तैयार होने के ​बाद खाद को सोसायटी के माध्यम से विक्रय किया जाएगा।

21-09-2020
नक्सली लीडर गणपति के सरेंडर मामले में नक्सलियों ने जारी की प्रेस नोट

रायपुर/दंतेवाड़ा। नक्सली लीडर गणपति के सरेंडर मामले में नक्सलियों ने इसे सरकार की एक मनगढंत कहानी करार देते हुए पूरे मामले को सिरे से खारिज किया है। नक्सलियों का कहना है कि यह एक षडय़ंत्रकारी दुष्प्रचार अभियान है। केन्द्र की मोदी सरकार, तेलंगाना सरकार, केन्द्रीय खुफिया एजेंसी, छत्तीसगढ़ खुफिया एजेंसी और तेलंगाना की खुफिया एजेंसी ने मिलकर यह षडय़ंत्र रचा है। इसकी उन्होंने निंदा की है। माओवादियों की दक्षिण सब जोनल ब्यूरो द्वारा जारी प्रेस नोट में कहा गया है कि जनवरी 2020 में ही विश्व स्वास्थ संगठन ने कोविड-19 के बारे में मोदी सरकार को चेतावनी दी थी। इसके बावजूद सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और डोनाल्ड ट्रम्प की सेवा में डूबी रही। लॉक डाउन कर अर्थव्यवस्था को चौपट करने का नक्सलियों ने आरोप लगाते हुए मोदी सरकार द्वारा मार्च में बिना किसी तैयारी के लॉक डाउन लागू कर दिया गया। इससे देश की अर्थव्यवस्था चौपट हो गई। वहीं दूसरी ओर देश की सम्पति को देशी-विदेशी कारपोरेट कंपनियों को सौंपा जा रहा है। 

नक्सलियों ने प्रेस नोट में लोन वर्राटु अभियान को लेकर टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया है कि इस अभियान के तहत पुलिस द्वारा ग्रामीण जनता को पकड़कर सरेंडर का नाटक किया जा रहा है। नक्सली आत्मसमर्पण के नाम पर पुलिस अधिकारी अपनी जेबें भर रहे हैं। दंतेवाड़ा के एसपी अभिषेक पल्लव ने बताया कि इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि गणपति बूढ़ा और बीमार होने की वजह से सक्रीय नहीं है। उसे नक्सलियों ने किसी शहरी इलाके में रख दिया होगा। जांच एजेंसियों के पास गणपति की लगभग 40 साल पुरानी तस्वीर है। नक्सलियों ने उसे किसी भी शहरी नेटवर्क के व्यक्ति के पास रख दिया होगा। सुरक्षा एजेंसियों की उसकी तलाश है। यदि उसका सरेंडर होता तो नक्सलियों के इंटरनेशनल लिंक, प्रदेश में हुई झीरम जैसी घटनाएं, हथियार की सप्लाय वगैरह की जानकारी मिलती।

कौन है गणपति
गणपति उन नक्सल लीडर्स में से एक है, जिसकी सोच की वजह से ही आज बस्तर और देश के कई नक्सल इलाकों में नक्सली काम करते हैं। उसकी उम्र करीब 80 साल होने का अनुमान है। गणपति पर ढाई करोड़ रुपए का इनाम घोषित है। कोई नहीं जानता कि वह इस वक्त कहां है, किस हाल में है और कैसा दिखता है। माना जाता है कि गणपति अबूझमाड़ के घने जंगलों में 1992 से साल 2018 तक बेहद सक्रीय था।

07-09-2020
आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा, जीडीपी में 23.9 प्रतिशत की गिरावट चिंताजनक

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने चालू वित्त वर्ष की पहली (अप्रैल-जून) तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 23.9 प्रतिशत की गिरावट को चिंताजनक बताया है। उन्होंने कहा है कि नौकरशाही को अब आत्मसंतोष से बाहर निकलकर कुछ अर्थपूर्ण कार्रवाई करनी होगी। उन्होंने कहा कि मौजूदा संकट के दौरान एक अधिक विचारवान और सक्रिय सरकार की जरूरत है। राजन ने कहा,‘दुर्भाग्य से शुरुआत में जो गतिविधियां एकदम तेजी से बढ़ी थीं, अब फिर ठंडी पड़ गई हैं।’ राजन ने अपनी पोस्ट में लिखा है, ‘आर्थिक वृद्धि में इतनी बड़ी गिरावट हम सभी के लिए चेतावनी है। भारत में जीडीपी में 23.9 प्रतिशत की गिरावट आई है। (असंगठित क्षेत्र के आंकड़े आने के बाद यह गिरावट और अधिक हो सकती है)। वहीं कोविड-19 से सबसे अधिक प्रभावित देशों इटली में इसमें 12.4 प्रतिशत और अमेरिका में 9.5 प्रतिशत की गिरावट आई है।’’

उन्होंने कहा कि इतने खराब जीडीपी आंकड़ों की एक अच्छी बात यह हो सकती है कि अधिकारी तंत्र अब आत्मसंतोष की स्थिति से बाहर निकलेगा और कुछ अर्थपूर्ण गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करेगा। राजन फिलहाल शिकॉगो विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं। उन्होंने कहा कि भारत में कोविड-19 के मामले अब भी बढ़ रहे हैं। ऐसे में रेस्तरां जैसी सेवाओं पर विवेकाधीन खर्च और उससे जुड़ा रोजगार उस समय तक निचले स्तर पर रहेगा, जब तक कि वायरस को नियंत्रित नहीं कर लिया जाता। राजन ने कहा कि सरकार संभवत: इस समय अधिक कुछ करने से इसलिए बच रही है, ताकि भविष्य के संभावित प्रोत्साहन के लिए संसाधन बचाए जा सकें। उन्होंने राय दी की यह आत्मघाती रणनीति है। एक उदाहरण देते हुए राजन ने कहा कि यदि हम अर्थव्यवस्था को मरीज के रूप में लें, तो मरीज को उस समय सबसे अधिक राहत की जरूरत होती है जबकि वह बिस्तर पर है और बीमारी से लड़ रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘बिना राहत या सहायता के परिवार भोजन नहीं कर पाएंगे, अपने बच्चों को स्कूल से निकल लेंगे और उन्हें काम करने या भीख मांगने भेज देंगे। अपना सोना गिरवी रखेंगे।

रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर ने कहा कि अब आर्थिक प्रोत्साहन को ‘टॉनिक’ के रूप में देखें। ‘जब बीमारी समाप्त हो जाएगी, तो मरीज तेजी से अपने बिस्तर से निकल सकेगा। लेकिन यदि मरीज की हालत बहुत ज्यादा खराब हो जाएगी, तो प्रोत्साहन से उसे कोई लाभ नहीं होगा। राजन ने कहा कि वाहन जैसे क्षेत्रों में हालिया सुधार वी-आकार के सुधार (जितनी तेजी से गिरावट आई, उतनी ही तेजी से उबरना) का प्रमाण नहीं है। उन्होंने कहा, ‘यह दबी मांग है। क्षतिग्रस्त, आंशिक रूप से काम कर रही अर्थव्यवस्था में जब हम वास्तविक मांग के स्तर पर पहुंचेंगे, यह समाप्त हो जाएगी।’ राजन ने कहा कि महामारी से पहले ही अर्थव्यवस्था में सुस्ती थी और सरकार की वित्तीय स्थिति पर भी दबाव था। ऐसे में अधिकारियों का मानना है कि वे राहत और प्रोत्साहन दोनों पर खर्च नहीं कर सकते। उन्होंने कहा, ‘यह सोच निराशावादी है। सरकार को हरसंभव तरीके से अपने संसाधनों को बढ़ाना होगा और उसे जितना संभव हो, समझदारी से खर्च करना होगा।’ 

02-09-2020
जीएसटी कलेक्शन में छत्तीसगढ़ देश का अग्रणी राज्य, 6 प्रतिशत की हुई वृद्धि

रायपुर। छत्तीसगढ़ में अर्थव्यवस्था तेजी से गति पकड़ रही हैं। जीएसटी के ताजा आंकड़ों ने एक बार फिर इसकी पुष्टि की हैं। छत्तीसगढ़ में पिछले वर्ष के अगस्त माह के मुकाबले इस वर्ष अगस्त माह में जीएसटी संकलन में 6 प्रतिशत की वृद्धि हुई हैं। पिछले वर्ष अगस्त माह में राज्य में जीएसटी संकलन 1873 करोड़ रुपये था,जो इस अगस्त में बढ़कर 1994 करोड़ रुपये हो गया है। कोरोना संकट के बावजूद राज्य में जीएसटी संकलन में हुई वृद्धि इस बात का प्रतीक हैं कि राज्य सरकार ने आर्थिक क्षेत्र में जो नीतियां अपनाई हैं और जो निर्णय लिए है उससे राज्य की अर्थव्यवस्था को सकारात्मक गति मिली हैं।
प्रदेश सरकार की राजीव गांधी किसान न्याय योजना, गोधन न्याय योजना, तेंदूपत्ता की बेहतर दर पर खरीदी तथा लघु वनोंपजों के दामों में वृद्धि से राज्य के ग्रामीणों, किसानों, आदिवासियों को सीधे फायदा पहुंचा है। इसकी वजह से छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था एवं बाजार कोरोना संक्रमण काल में गतिशील बने रहे। वित्त मंत्रालय भारत सरकार द्वारा अगस्त माह में जीएसटी राजस्व कर के संग्रहण के संबंध में जारी रिपोर्ट के अनुसार पूरे देश में जीएसटी राजस्व संग्रहण में 8 प्रतिशत की कमी अगस्त माह में आई है, जबकि छत्तीसगढ़ राज्य जीएसटी राजस्व संग्रहण के मामले 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज कर देश चौथे नंबर पर है। अगस्त माह में जीएसटी राजस्व संग्रहण के मामले में देश के अन्य राज्यों की स्थिति बेहद कमजोर है। कुछ राज्यों में तो जीएसटी राजस्व संग्रहण में बीते वर्ष की तुलना में इस वर्ष 59 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। अगस्त माह में दिल्ली राज्य में जीएसटी राजस्व संग्रहण 18 प्रतिशत कम हुआ है। इसी तरह मध्यप्रदेश में 2 प्रतिशत, गुजरात में 3 प्रतिशत, असम में 8 प्रतिशत, उड़ीसा में 6 प्रतिशत, गोवा में 38 प्रतिशत, केरल में 28 प्रतिशत, तमिलनाडु में 12 प्रतिशत, आंधप्रदेश में 8 प्रतिशत, तेलंगाना में 9 प्रतिशत तथा कर्नाटक में 11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

31-08-2020
 मोदी सरकार पर राहुल गांधी ने बोला हमला, कहा- भारतीय अर्थव्यवस्था 40 सालों में पहली बार भारी मंदी में

नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं सांसद राहुल गांधी ने एक वीडियो में देश की अर्थव्यवस्था के बारे में बात करते हुए मौजूदा सरकार पर जमकर भड़ास निकाली है। राहुल गांधी ने वीडियो में अर्थव्यवस्था के बारे में बात करते हुए कहा कि, 'जो आर्थिक त्रासदी देश झेल रहा है, उस दुर्भाग्यपूर्ण सच्चाई की आज पुष्टि हो जाएगी। भारतीय अर्थव्यवस्था 40 वर्षों में पहली बार भारी मंदी में है। असत्याग्रही इसका दोष ईश्वर को दे रहे हैं।' राहुल गांधी द्वारा जारी किए गए इस वीडियो में कहा कि'बीजेपी की सरकार ने असंगठित अर्थव्यवस्था पर आक्रमण किया है, और आपको गुलाम बनाने की कोशिश की जा रही है। 2008 में जबरदस्त आर्थिक तूफान पूरी दुनिया में आया। अमेरिका, यूरोप के बैंक गिर गए लेकिन इंडिया को कुछ नहीं हुआ। राहुल गांधी ने कहा कि उस वक्त यूपीए की सरकार थी और मैं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलने गया और पूछा की पूरी दुनिया में आर्थिक नुकसान हुआ है लेकिन इंडिया में क्यों नहीं हुआ? प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा राहुल अगर हिंदुस्तान के अर्थव्यवस्था को समझना चाहते हो तो यह समझना होगा कि भारत में दो अर्थव्यवस्था है।

पहली असंगठित अर्थव्यवस्था और दूसरी संगठित अर्थव्यवस्था। संगठित अर्थव्यवस्था में बड़ी कंपनिया आती हैं, वहीं असंगठित अर्थव्यवस्था में किसान, मजदूर, मीडिल दुकानदार इत्यादि आते हैं। राहुल गांधी ने बताया कि मनमोहन सिंह ने उस वक्त बताया कि जिस दिन तक भारत की असंगठित अर्थव्यवस्था मजबूत है, उस दिन तक हिंदुस्तान को कोई भी आर्थिक नुकसान छू नहीं सकता है। इसके अलावा उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में बीजेपी की तीन नीतियों से असंगठित अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा है। इसमें से उन्होंने बताया कि पहला नोटबंदी दूसरा जीएसटी और तीसरा लॉकडाउन है। इसके अलावा उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री  को सरकार चलाने के लिए मीडिया की जरूरत है, मार्केटिंग की जरूरत है। मीडिया-मार्केटिंग 15-20 लोग करते हैं। इनफॉर्मल सेक्टर में लाखों करोड़ रुपए हैं। इस सेक्टर को तोड़कर ये लोग पैसा लेना चाहते हैं। इसका नतीजा ये होगा कि हिंदुस्तान रोजगार पैदा नहीं कर पाएगा, क्योंकि इनफॉर्मल सेक्टर 90% से ज्यादा रोजगार देता है।'

 

08-07-2020
लघु और मध्यम उद्यम नष्ट हो गए हैं : राहुल गांधी

नई दिल्ली। देश पहले से ही कोरोना वायरस से जंग लड़ रहा है। अब गिरती अर्थव्यवस्था बड़ी चुनौती बनती जा रही है. लॉकडाउन के कारण अर्थव्यवस्था का पहिया थम गया है। इस बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अर्थव्यवस्था को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। राहुल ने कहा कि जब मैंने देश की आर्थिक सुनामी को लेकर चेताया था, तो बीजेपी ने सच बोलने के लिए मेरा मजाक उड़ाया था, मीडिया में भी इसे तवज्जो नहीं दी गई थी। राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा, “लघु और मध्यम उद्यम नष्ट हो गए हैं। बड़ी कंपनियां गंभीर तनाव में हैं। बैंक संकट में हैं। मैंने महीनों पहले कहा था कि एक आर्थिक सुनामी आ रही है। देश की सच्चाई के बारे में चेतावनी देने पर बीजेपी और मीडिया द्वारा उपहास उड़ाया गया था।”

 

03-07-2020
पिछले वर्ष की तुलना में जून माह में 19 प्रतिशत ज्यादा रजिस्ट्रियां,17 प्रतिशत अधिक मिला राजस्व

रायपुर। छत्तीसगढ़ में अनलॉक शुरू होने के बाद लगातार तेज हो रही आर्थिक गतिविधियों का असर दस्तावेजों की रजिस्ट्रियों में भी दिखने लगा है। पिछले साल के जून माह की तुलना में इस साल जून माह में 17 प्रतिशत अधिक राजस्व की प्राप्ति हुई है। दस्तावेजों के पंजीयन में भी 19 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। वर्ष 2019 के जून माह में 107.53 करोड़ रुपए का राजस्व दस्तावेजों के पंजीयन से प्राप्त हुआ था, जबकि इस वर्ष, यानी 2020 के जून माह में 125.74 करोड़ रुपए की राजस्व प्राप्ति शासन को हुआ है। पिछले साल जून महीने में 23,391 दस्तावेजों का पंजीयन हुआ था, जबकि इस साल इस जून माह में 27,759 दस्तावेज पंजीबद्ध किए गए। कोरोना महामारी की वजह से उत्पन्न विषम परिस्थितियों के कारण लॉकडाउन के दौरान अन्य गतिविधियों के साथ-साथ दस्तावेजों के पंजीयन का कार्य भी प्रभावित हुआ था, इसके मद्देनजर पक्षकारों की सुविधा के लिए शासन द्वारा पंजीयन कार्यालयों में विशेष इंतजाम किए गए थे। जून महीने में प्रत्येक तीन घंटे में तीन अप्वाइंमेंट की व्यवस्था दस्तावेजों के पंजीयन के लिए लागू की गई, ताकि दस्तावेजों का पंजीयन तेजी से किया जा सके।

अधिकारियों के कहा कि यह आंकड़े बताते हैं कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य सरकार की ओर से कोरोना संक्रमण काल के दौरान किए गए उपायों से छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था गतिशील बनी रही। संकट काल में भी राज्य ने कृषि क्षेत्र में तेज आर्थिक वृद्धि दर्ज की, जिसकी सराहना रिजर्व बैंक आफ इंडिया ने भी की थी। रोजगार के क्षेत्र में मनरेगा के जरिये गांवों में वृहद पैमाने पर रोजगार मूलक कार्यों का संचालन और नियमित भुगतान की वजह से आम लोगों के बीच धन-राशि का प्रवाह निरंतर बना रहा। इसी दौरान राजीव गांधी किसान न्याय योजना के जरिए राज्य के किसानों को सीधे मदद पहुंचाई गई। प्रदेश सरकार ने कोरोना संकट के दौरान उद्योगों को भी संचालन में रियायतें दीं। खेती-किसानी पर आधारित व्यावसायिक गतिविधियां भी निरंतर जारी रहीं। जिसकी वजह से राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रही।

02-07-2020
कैट के अभियान को मिल रहा अच्छा रिस्पॉन्स, भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों ने एक साथ मिलाया हाथ

रायपुर। कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के 10 जून से जारी चीनी सामान के बहिष्कार के राष्ट्रीय अभियान ''भारतीय सामान- हमारा अभिमान'' में किसान, ट्रांसपोर्ट,लघु उद्धयोग, उपभोक्ता आदि वर्ग के लोगों ने समर्थन दिया है। कैट के साथ इस अभियान में जुड़ने वाले महत्वपूर्ण संगठनों में इंडियन सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन, राष्ट्रीय किसान मंच, कंज्यूमर ऑनलाइन फाउंडेशन, ऑल इंडिया ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन , इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज, एमएसएम ईडेवलपमेंट फोरम,ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन, ऑल इंडिया कॉस्मेटिक्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ,नॉर्थ ईस्ट डेवलपमेंट फोरम , वुमन एंटरप्रीनियोर एसोसिएशन ऑफ इंडिया आदि शामिल हैं। इन सभी संगठनों ने संयुक्त रूप से एक मंच के रूप में और अपने स्वयं के क्षेत्रों में चीनी वस्तुओं के बहिष्कार के राष्ट्रीय अभियान का समर्थन और नेतृत्व करने का निर्णय लिया है। विभिन्न वर्गों के नेताओं ने सर्वसम्मति से कहा है कि चीन को जवाब देने के लिए स्थानीय संसाधनों के विकास को बढ़ावा देने के लिए सभी प्रयास किए जाएंगे।

एक स्वर में इसके प्रति प्रतिबद्दता जाहिर करते हुए सभी ने कहा की चीनी वस्तुओं के बहिष्कार और भारतीय वस्तुओं के उपयोग को हम इसे करने और भारत में यह बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसी क्रम में आगे कैट देश भर में अन्य सामाजिक और धार्मिक संगठनों , बुद्धिजीवियों के समूह आदि को भी इस अभियान से जोड़ेगा । कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों  ने चीनी सामान के बहिष्कार के लिए एक साथ हाथ मिलाया है। यह तय किया जा सके कि भारत किसी भी तरह से चीन पर निर्भर न रहे और अपने बल पर ही देश में प्रतिस्पर्धी मूल्य पर गुणवत्ता के सामान के उत्पादन में निर्भर ही सके। देश में पर्याप्त भूमि और कामगार संसाधन और प्रौद्योगिकी बहुतायत में है, जिसका उपयोग देश में भारतीय वस्तुओं के उत्पादन के लिए एक अल्पावधि, मध्यावधि और दीर्घकालिक रणनीतिक नीति के तहत काम किया जाना जरूरी है। कैट इस मुद्दे पर एक ओर व्यापार और उद्योग को प्रेरित करेगा, दूसरी ओर सरकार से भी आवश्यक सहूलियतें प्रदान करने का आग्रह करेगा।

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