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25-05-2020
ओलंपिक गोल्ड विजेता हॉकी खिलाड़ी बलबीर सिंह सीनियर का निधन

नई दिल्ली। तीन बार के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता महान हॉकी खिलाड़ी बलबीर सिंह सीनियर का सोमवार को निधन हो गया। सुबह करीब 6 बजे उनका देहांत हो गया। भारतीय दिग्गज खिलाड़ी पिछले दो सप्ताह से कई बीमारियों से जूझे रहे थे। 95 वर्षीय बलबीर के परिवार में बेटी सुशबीर और तीन बेटे कंवलबीर, करणबीर और गुरबीर हैं। बता दें कि पूर्व हॉकी कप्तान और तीन बार ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट रहे 96 वर्षीय बलबीर सिंह सीनियर नहीं रहे। बलबीर सिंह सीनियर को गत 8 मई को तबीयत खराब होने के बाद मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बलबीर सिंह सीनियर सेक्टर 36 चंडीगढ़ में अपनी बेटी सुखबीर कौर और नाती कबीर के साथ रहते थे। बलबीर सिंह के तीन बेटे कनाडा में रहते हैं। बलबीर सिंह सीनियर पिछले काफी समय से बीमार चल रहे थे। पिछले साल भी वह पीजीआई में भर्ती रहे थे और उस समय वह जिंदगी की लड़ाई जीत कर वापिस अपने घर भी पहुंच गए थे। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो पाया।

बलबीर सिंह सीनियर की उपलब्धियां :

बलबीर सिंह सीनियर लंदन ओलंपिक 1948, हेलसिंकी ओलंपिक 1952 और मेलबर्न ओलंपिक 1956 में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे हैं। 1956 के ओलंपिक में वह भारतीय हॉकी टीम के कप्तान बने थे। इसके अलावा वह वर्ल्ड कप 1971 में ब्रॉन्ज और वर्ल्ड कप 1975 में गोल्ड जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के मुख्य कोच थे।

13-05-2020
एम्स से कोरोना का एक और मरीज डिस्चार्ज

रायपुर। एम्स से आज एक और मरीज डिस्चार्ज किया गया है। बता दें कि रायपुर एम्स इस बीमारी पर सफलता पाने में कामयाब हुआ है। अब तक 59 मरीजों में 55 ठीक हो चुके हैं अब केवल चार मरीज ही कोरोना के शेष बचे हुए हैं।

09-05-2020
अपने स्वास्थ्य को लेकर अमित शाह ने किया ट्वीट, कहा- मैं स्वस्थ हूं,किसी बीमारी से पीड़ित नहीं

नई दिल्ली। गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को उन सभी अफवाहों पर विराम लगा दिया, जो उनके स्वास्थ्य को लेकर फैलाई जा रही थीं। उन्होंने कहा, पिछले दिनों से कुछ मित्रों की ओर से सोशल मीडिया के माध्यम से मेरे स्वास्थ्य के बारे में कई मनगढ़ंत अफवाहें फैलाई जा रही हैं।अमित शाह ने आगे कहा, “देश इस समय कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से लड़ रहा है और देश के गृह मंत्री के नाते देर रात तक अपने कार्यों में व्यस्त रहने के कारण मैंने इन सब पर ध्यान नहीं दिया। जब यह मेरे संज्ञान में आया तो मैंने सोचा कि यह सभी लोग अपने काल्पनिक सोच का आनंद लेते रहें, इसलिए मैंने कोई स्पष्टता नहीं की।”उन्होंने कहा, "परंतु मेरी पार्टी के लाखों कार्यकर्ताओं और मेरे शुभचिंतकों ने विगत दो दिनों से काफी चिंता व्यक्त की, उनकी चिंता को मैं नजरअंदाज नहीं कर सकता। इसलिए, मैं आज स्पष्ट करना चाहता हूं कि मैं पूर्ण रुप से स्वस्थ हूं और मुझे कोई बीमारी नहीं है।"गृह मंत्री ने आगे कहा, "हिन्दू मान्यताओं के अनुसार ऐसा मानना है कि इस तरह की अफवाह स्वास्थ्य को और अधिक मजबूत करती हैं।

इसलिए, मैं ऐसे सभी लोगों से आशा करता हूं कि वे यह व्यर्थ की बातें छोड़कर मुझे मेरा कार्य करने देंगे और स्वयं भी अपना काम करेंगे।" शाह ने कहा, "मेरे शुभचिंतकों और पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं के मेरा हालचाल पूछने और मेरी चिंता करने के लिए मैं आभार व्यक्त करता हूं। जिन लोगों ने ये अफवाह फैलाई हैं उनके प्रति मेरे मन में कोई दुर्भावना या द्वेष नहीं है।"गृह मंत्री अमित शाह के स्वास्थ्य को फैलाई जा रही अफवाहों को बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने निंदनीय करार दिया। उन्होंने कहा- “गृह मंत्री अमित शाह के स्वास्थ्य को लेकर असंवेदनशील टिप्पणियां घोर निंदनीय है। किसी के स्वास्थ्य के बारे में इस तरह की गलत सूचना फैलाने से ऐसे लोगों की मानसिकता का पता चलता है। मैं इसकी कड़ी भर्त्सना करता हूं और भगवान से प्रार्थना करता हूं कि ऐसे लोगों को सदबुद्धि दें।”

06-05-2020
इस बीमारी की शिकार हुईं नोरा फतेही, कहा-नींद नहीं आती....

मुंबई। कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन को 17 मई तक बढ़ा दिया गया है। इस दौरान आम से लेकर खास लोग घरों में कैद है। ऐसे में बॉलीवुड अभिनेत्री और डांसर नोरा फतेही लॉकडाउन के कारण एक बीमारी का शिकार हो गई है। नोरा फतेही ने हाल ही में यह स्वीकार किया है कि जब भी वह सोने की कोशिश करती हैं, इंसोम्निया (अनिद्रा) उन्हें परेशान करता है।नोरा ने यह खुलासा एक टिकटॉक वीडियो में किया है, जो उन्होंने इंस्टाग्राम पर शेयर की है।नोरा ने वीडियो के कैप्शन में लिखा, "जब भी मैं सोने की कोशिश करती हूं, इंसोम्निया मुझे सोने नहीं देता, क्या और किसी को भी इसका सामना करना पड़ता है? नोरा अब अजय देवगन स्टारर फिल्म 'भुज: द प्राइड ऑफ इंडिया' में नजर आएंगी।

 

 

04-05-2020
सरगुजा जिले में धारा 144 अब 17 मई तक रहेगी, उल्लंघन करने पर होगी कड़ी कार्यवाही

रायपुर/अम्बिकापुर।  कोविड-19 संक्रामक बीमारी पर पूरी तहर काबू नहीं पाया जा सका है। अभी भी संक्रमण की स्थिति कई स्थानों पर संभावित है। इस स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए कलेक्टर और जिला दण्डाधिकारी डॉ.सारांश मित्तर की ओर से संपूर्ण सरगुजा जिले में 3 मई तक लागू दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 की समय-सीमा में वृद्धि कर अब 17 मई तक कर दिया गया है। यह आदेश सरगुजा जिले के संपूर्ण सीमा क्षेत्र के लिए 17 मई या आगामी आदेश, जो पहले आए तक प्रभावशील होगा। आदेश का उल्लंघन करने पर विधि के अंतर्गत सख्त कार्यवाही की जाएगी। आदेश में कहा गया है कि इस आपात स्थिति में व्यवहारिक तौर पर संभव नही है कि जिले मे निवासरत् सभी नागरिकों को नोटिस तामिली कराई जा सके। अतः एकपक्षीय कार्यवाही करते हुए दंड प्रक्रिया संहिता 1973 अंतर्गत सरगुजा जिले में पूर्व से लागू धारा 144 की समय-सीमा मे वृद्धि की गई है। समय-समय पर केेंद्र और राज्य शासन की ओर से कार्यालय, प्रतिष्ठान और सेवाओं इत्यादि को दी गई छूट इस आदेश में भी यथावत रहेगी।

23-04-2020
मौसम के उतार-चढ़ाव से फसलों में बढ़ सकती है बीमारी, कृषि वैज्ञानिक ने किसानों को दी सलाह...

रायपुर/सुकमा। कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए घोषित लाॅक डाउन में शासन की ओर से कृषि एवं कृषि से संबंधित कार्यों पर ढील देते हुए संक्रमण की रोकथाम के लिए जारी एडवाइजरी का पालन करते हुए कृषि कार्य करने की अनुमति प्रदान की गई है। कृषि विज्ञान केंद्र सुकमा के वरिष्ठ वैज्ञानिक राजेंद्र प्रसाद कश्यप ने इस संबंध में किसानों को आवश्यक एवं उपयोगी जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि इस संक्रमण की रोकथाम के लिए किसान और कृषि से संबंधित मजदूर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें और कम से कम 1 मीटर की दूरी बनाकर कार्य करें एवं मुंह को गमछा या रुमाल से ढक कर काम करें। साथ ही हाथ में सैनिटाइजर लगाएं या बार-बार साबुन से हाथ को अच्छी तरह से धोएं। कृषि वैज्ञानिक कश्यप ने बताया कि फसल की कटाई के बाद फसल अवशेष को जलाने के बजाय उसमें वेस्ट डीकंपोजर का छिड़काव कर नष्ट करना चाहिए।

फसलों की कटाई कार्य में मशीनों की सहायता ली जा सकती हैं। उन्होंने बताया कि मौसम के उतार-चढ़ाव से सब्जियों एवं फलों में प्रकोप बढ़ने की आशंका है जिससे उत्पादन में विपरित प्रभाव पड़ सकता है। सब्जियों या फलों में किसी भी प्रकार के कीड़े या बीमारी का संक्रमण होने पर उन्होंने किसानों को तुरंत कृषि विज्ञान केंद्र सुकमा से संपर्क करने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि तापमान बढ़ने के साथ ही धनिया की फसल में पाउडरी मिल्डयू नामक बीमारी का प्रकोप बढ़ सकता है। इसके नियंत्रण के लिए घुलनशील गंधक 3 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर 15 दिनों के अंतराल में छिड़काव करना चाहिए। इसी प्रकार सब्जियों में रस चूसक कीटों का प्रकोप दिखाई दे तो इसके नियंत्रण के लिए इमपीडकिलोप्रड दवा 1 से 2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी के हिसाब से घोल बनाकर 12 से 15 दिनों के अंतराल में छिड़काव करना चाहिए।

11-04-2020
महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या पहुंची 1600 के पार, आज 92 नए मामले आए सामने

नई दिल्ली। महाराष्ट्र में भी कोविड-19 से हाहाकार मच गया है। यहां दिन प्रतिदिन कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। महाराष्ट्र स्वास्थ्य विभाग के अनुसार राज्य में शनिवार को कोरोना पॉजिटिव के 92 नए मामले दर्ज किए गए। इसके बाद राज्य में पॉजिटिव कोरोना वायरस मामलों की कुल संख्या 1666 हो गई है। महाराष्ट्र इस वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित है। यहां संक्रमितों की संख्या में 27 दिन में 100 गुना से ज्यादा हो गई है। राज्य में 14 मार्च को कोरोना के 14 मरीज थे, जो 10 अप्रैल को 1 हजार 666 हो गए। यहां इस बीमारी से अब तक 110 लोगों की मौत हो चुकी है।

09-04-2020
कोरोना पीड़ितों को नहीं करें बदनाम, बीमारी से उबरने वालों की कहानी लोगों से करें साझा

रायपुर। कोरोना जैसे अति संक्रामक रोग के प्रकोप के दौरान आम लोगों में भय एवं चिंता का पैदा होना लाजिमी है। लेकिन ऐसे मुश्किल हालातों में लोगों को एकजुट होकर कोरोना के खिलाफ़ मजबूती से लड़ने की भी जरूरत है। जो लोग कोविड-19 से उबर चुके हैं, उन्हें भी इस तरह के भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, कुछ समुदायों और क्षेत्रों को विशुद्ध रूप से सोशल मीडिया और अन्य जगहों पर फ़ैल रही झूठी रिपोर्टों के आधार पर लेबल किया जा रहा है। इस तरह के पूर्वाग्रहों का मुकाबला करने की आवश्यकता है,जो स्वास्थ्य साक्षरता के साथ सशक्त हो और इस प्रतिकूलता का सामना करने के लिए तैयार भी हो। शायद यह विरोध लोगों में संक्रमण की सही जानकारी नहीं होने एवं असुरक्षा के भाव के कारण देखने को मिल रहे हैं। इसको लेकर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने एडवाइजरी जारी कर इस संबंध में जरुरी दिशा निर्देश दिया है।
विकट स्थिति में काम करने वाले प्रशंसा के पात्रडॉक्टरों, नर्सों, और संबद्ध और स्वास्थ्य पेशेवरों सहित हेल्थकेयर कार्यकर्ता संकट की इस स्थिति में देखभाल और चिकित्सा/ नैदानिक सहायता प्रदान करने के लिए अपनी सेवाओं को अथक रूप से प्रदान कर रहे हैं। स्वच्छता कार्यकर्ता और पुलिस भी निस्वार्थ सेवा कर रहे हैं और कोविड-19 संक्रमण से हमारी सुरक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वे सभी हमारे समर्थन और प्रशंसा के पात्र हैं।
संक्रमित के प्रति दुर्भावना नहीं रखेंसभी सावधानियों के बावजूद, यदि कोई कोरोना से संक्रमित होता है, तो यह उनकी गलती नहीं है। संकट की स्थिति में रोगी और परिवार को सहायता और सहयोग की आवश्यकता होती है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि हालत ठीक है और ज्यादातर लोग इससे उबर जाते हैं। हालांकि कोविड-19 एक अत्यधिक संक्रामक बीमारी है, जो तेजी से फैलती है और हम में से किसी को भी संक्रमित कर सकती है। लेकिन हम सामाजिक दूरी अपनाकर, नियमित रूप से हाथ को धोकर और खांसने और छींकने के के शिष्टाचार का पालन कर खुद को संक्रमण से सुरक्षित रख सकते हैं।
ये जरुर करें• आवश्यक सेवाएं प्रदान करने वाले लोगों के प्रयासों की सराहना करें और उनके परिवारों के प्रति सहानभूति रखें।
• केवल स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की वेबसाइट एवं विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसे अन्य प्रमाणिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी ही कहीं साझा करें।
• सोशल मीडिया पर किसी भी संदेश को फॉरवर्ड करने से पहले विश्वसनीय स्रोतों से कोविड-19 से संबंधित जानकारी को जरुर क्रॉस चेक करें।
• कोरोना संक्रमण से उबरने वाले लोगों की सकारात्मक कहानियां साझा करें।
ये नहीं करें• सोशल मीडिया पर कोरोना से प्रभावित या क्वारंटाइन में रह रहे या उनके इलाके के लोगों के नाम या पहचान न फैलाएं।
• कोरोना को लेकर डर और दहशत फैलाने से बचें।
• हेल्थकेयर और सैनिटरी वर्कर्स या पुलिस को निशाना न बनाएं। वे वहां आपकी मदद करने के लिए हैं।
• कोविड-19 के प्रसार के लिए किसी समुदाय या क्षेत्र को लेबल न करें।
• उपचार में रह रहे लोगों को कोविड पीड़ित के रूप में संबोधित करने से बचें। उन्हें कोविड से ठीक होने वाले लोगों के रूप में संबोधित करें।
• आवश्यक सेवा प्रदाताओं और उनके परिवारों को लक्षित करना कोविड-19 के खिलाफ हमारी लड़ाई को कमजोर करेगा और पूरे देश के लिए गंभीर रूप से हानिकारक साबित हो सकता है।

 

08-04-2020
चलना संभल-संभल के जनसंपर्क आयुक्त तारण प्रकाश सिन्हा की कलम से

ऐसा उल्लेख मिलता है कि वर्ष 1918 में स्पेनिश फ्लू से दुनियाभर में 5 करोड़ से ज्यादा मौतें हुईं थीं। भारत में ही करीब डेढ़ करोड़ लोगों ने अपनी जानें गंवा दी थीं। तब महात्मा गांधी भी इस बीमारी की चपेट में आकर बीमार हो गए थे। यह वह दौर था जब न तो चिकित्सा विज्ञान इतना उन्नत था और न ही तकनीक। तब भी मनुष्य ने उस भयंकर महामारी से डटकर मुकाबला किया और अंततः विजय हासिल की। सिर्फ स्पेनिश फ्लू ही क्यों, उसके भी पहले, और बाद में, न जाने कितनी ही ऐसी ही महामारियों को हमने हराया है। कोविड-19 पर भी हम विजय हासिल करेंगे, यह तय है। कोविड-19 वायरस पर दुनियाभर में तेजी से रिसर्च हो रहा है। प्रभावी दवाओं की खोज हो रही है। टीके इजाद किए जा रहे हैं। विभिन्न स्रोतों से नतीजों की जो जानकारियां सामने आ रही हैं, वे उत्साह बढ़ाने वाली हैं। चिकित्सा विज्ञानियों को इस दिशा में लगातार सफलताएं मिल रही हैं। इन अनुसंधानों के बीच कोविड-19 से संक्रमित लोगों का उपचार जारी है।

मौतों की शुरुआती बढ़त के बाद अब इस वायरस से मुक्त होकर स्वस्थ होने वाले लोगों का बढ़ता आंकड़ा उम्मीदें जगा रहा है। छत्तीसगढ़ का ही उदाहरण लें, यहां इस महामारी से अब तक एक भी जान नहीं गई है, जबकि जिन 10 लोगों का उपचार किया गया, उनमें से 9 पूरी तरह स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं। कुल मिलाकर यह कि तब के स्पेनिश फ्लू की तुलना में आज कोविड-19 से हम ज्यादा बेहतर तरीके से लड़ रहे हैं। वैश्विक-रूप से हम तब की तुलना में ज्यादा अच्छी तरह एकजुट हैं। अनुभवों और उपलब्धियों की साझेदारी कहीं ज्यादा अच्छी है। इसलिए कोविड-19 पर अपेक्षाकृत जल्दी काबू पा लेने की सुनिश्चितता कहीं ज्यादा है। लेकिन इन सबके बावजूद संघर्ष कड़ा है। सबसे बड़ी चुनौती कोविड-19 से होने वाली क्षति को कम से कम करना है। तकनीक और विज्ञान के विकास ने जहां हमें हौसला दिया है, वहीं वैश्विक-संपर्कों को सघन कर दिया है।

इसी सघनता ने स्पेनिश फ्लू की तुलना में कोविड-19 के प्रसार के लिए ज्यादा अनुकूलताएं निर्मित कर दी हैं। इसी वजह से देखते ही देखते यह बीमारी ने दुनियाभर में फैल गई और लगभग सभी देशों को अपनी चपेट में ले लिया। भारत में भी तेजी से पांव पसार रही है। तमाम शोधों की अच्छी प्रगति के बावजूद कोविड-19 के खिलाफ अभी लंबी लड़ाई लड़नी होगी। इसमें खूब सारी ऊर्जा, खूब सारे संसाधनों और खूब सारे समय की जरूरत होगी। जब तक कारगर हाथियार हाथ नहीं आ जाता, तब तक हमें अपनी हर सांस को सहेजे रखकर मोर्चे पर डटे रहना होगा। कोविड-19 की सबसे बड़ी ताकत है उसकी आक्रामक संक्रामकता। बस इसी पर चोट करनी है। सघन संपर्कों से निर्मित अनुकूलता को खत्म करना है। छोटा सा मंत्र याद रखना है- एचएमएस। एच यानी हाथ बार-बार अच्छी तरह से धोते रहें। एम यानी मास्क पहन कर रखें। एस यानी सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेंन करें, घर पर रहें। स्पेनिश फ्लू के समय महात्मा गांधी ने इसी मंत्र को अपना कर तब उस महामारी से मुक्ति पाई थी। तब उन्होंने भी एकांतवास, संयम और आहार के सूत्र पर भरोसा किया और जल्द स्वस्थ हो गए। सिर्फ वे ही नहीं, उनके आश्रम के सभी लोगों ने नियमों का पालन कर महामारी से खुद को बचा लिया।

07-04-2020
बागपत में भर्ती कोरोना का मरीज अस्पताल से फरार जमाती मरीज का मकसद क्या? क्या कोरोना फैलाना चाहता है वो?

रायपुर। बागपत के अस्पताल में कोरोना का इलाज करा रहे मरीज के फरार होने की हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। फरार होने वाला मरीज जमात का बताया जा रहा है। मरीज के फरार होने से हड़कंप मच गया है। क्योंकि उसके संपर्क में आने वाले लोगों को कोरोना अपना शिकार बना सकता है। अब सवाल यह उठता है की इलाज के लिए धर पकड़ कर अगर अस्पताल में एक जमात के लोगों को भर्ती कराया जा रहा है तो वे इलाज में सहयोग क्यों नहीं कर रहे हैं? और फिर अस्पताल से फरार हो जाना? उसके पीछे की मंशा क्या है? आखिर क्यों वे लोग अपनी बीमारी को अभी तक छुपाते आये  है? और बीमार होने के बावजूद क्यों हुए एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश भटक रहे हैं? आखिर उद्देश्य क्या है उनका? क्या वे खुद को जिंदा बम बना कर दूसरे प्रदेश के लोगों की जिंदगी हराम कर रहे हैं? और अगर उन्हें पकड़कर इलाज के लिए भर्ती भी कराया जा रहा है वहां से भाग क्यों रहे है? क्या उन्हें इस बीमारी से मुक्ति नहीं चाहिए? या फिर वे इस बीमारी से जकड़े रहना चाहते हैं और इस बीमारी को अपने साथ लेकर सारे देश में फैलाना चाहते हैं? अगर उनका यह मकसद है तो यह बेहद खतरनाक है। इस पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए। इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए और ऐसे लोगों के साथ सहानुभूति का रवैया न अपनाकर उनके साथ सख्ती से निपटा जाना चाहिए।

02-04-2020
हैदराबाद में डॉक्टर को पीटा, डॉक्टरों ने सुरक्षा न मिलने पर काम बंद की चेतावनी दी, क्या यही मकसद है कुछ लोगों का

रायपुर/हैदराबाद। कोरोना के एक मरीज की मौत के बाद उसी अस्पताल में भर्ती मृतक के रिश्तेदार मरीजों ने डॉक्टर को पीट दिया और अस्पताल में तोड़फोड़ की। इस बात से नाराज डॉक्टरों ने सुरक्षा की मांग की है। उन्होंने सुरक्षा ना मिलने पर काम बंद कर देने की चेतावनी दी है। इस स्थिति से सारा प्रशासन हिल गया है, मुख्यमंत्री से लेकर गृहमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ने भी इस मामले में दखल दिया है। पुलिस के तमाम बड़े अफसर अस्पताल पहुंच गए हैं। मारपीट करने वाले लोगों को तो फिलहाल अस्पताल में अलग-अलग रखा गया है। उनकी गिरफ्तारी कागजों पर कर ली गई है, चूंकि वे अस्पताल में इलाज करा रहे हैं, इसलिए उन्हें अस्पताल में ही रखा गया है।

फिलहाल अब सवाल यह उठता है कि आखिर डॉक्टरों से मारपीट क्यों की गई? सिर्फ हैदराबाद नहीं इंदौर में भी सैंपल लेने गई जांच टीम पर पथराव किया गया। इसके अलावा देश के कुछ अन्य हिस्सों में भी कोरोना की जांच का विरोध हुआ है और डॉक्टरों पर हमले हुए हैं। क्या यह कोरोना के खिलाफ बेहद सुनियोजित ढंग से जारी जंग को असफल करने की साजिश नहीं? क्या यह कोरोना से लड़ रहे डॉक्टरों को धमकाने की साजिश तो नहीं? क्या ये जांच टीम को जांच से रोकने कि अप्रत्यक्ष धमकी तो नहीं? सारे सवाल कहीं ना कहीं एक षड्यंत्र की ओर इशारा करते हैं, जो देश को स्थिर होता नहीं देख पा रहे हैं। उन्हें अस्थिरता चाहिए। उन्हें देश की मजबूती शायद पसंद नहीं है और संकट की इस घड़ी में जिस तेजी से जिस मजबूती से देश कोरोना के खिलाफ उठ खड़ा हुआ और लड़ रहा है। वह शायद ऐसे तत्वों को पच नहीं रहा है। ऐसे तत्वों के खिलाफ तत्काल कठोर कार्रवाई किया जाना बहुत जरूरी है अन्यथा कोरोना से ज्यादा गंभीर यह गद्दारी की बीमारी अन्य प्रदेशों में भी फैल सकती है।

02-04-2020
कोरोना की जांच क्यों नहीं चाहते कुछ लोग? क्यों जांच टीम पर हमले हो रहे? कश्मीर की पत्थरबाजी इंदौर कैसे पहुंची?

रायपुर/इंदौर। कोरोना की जांच के लिए इंदौर के एक इलाके में गई टीम पर वहां के लोगों ने पथराव किया। जांच टीम को जान बचाकर भागना पड़ा। अकेले इंदौर की यह बात नहीं है। देश में दो और इलाकों में जांच टीम पर हमले हुए हैं उनमें से एक हैदराबाद भी शामिल है। इंदौर और हैदराबाद जैसे विकसित शहर में इस तरह की दकियानूसी घटना होना अच्छे संकेत नहीं है। फिर इंदौर में जिस तरह से जांच टीम पर पथराव हुआ लोगों ने उन पर पत्थर बरसाए और छतों से भी जो पत्थर बरसे वह एक मानसिकता का सबूत है। इस तरह की पत्थरबाजी सिर्फ कश्मीर में और दिल्ली में देखने को मिलती थी। वह इंदौर तक पहुंच गई यह चिंता का विषय है।

आखिर दिक्कत क्या है उस इलाके के लोगों को कोरोना की जांच कराने में? जांच टीम कुछ लोगों का सैंपल लेने गई थी लेकिन उन्हें जान बचाकर वापस भागना पड़ा। इस तरह की हरकत अगर कुछ और जगह होगी तो कैसे देश कोरोना के खिलाफ जंग लड़ पाएगा? कैसे जांच टीम सैंपल लेने जा पाएगी कैसे कोरोना के संक्रमण को रोकने में कामयाबी मिलेगी? जांच टीम को पथराव कर भगा देना तो इस बात का ही सबूत है कि वे लोग कोरोना के खिलाफ लड़ाई में सहयोग नहीं कर रहे हैं और वे नहीं चाहते कि कोरोना की जांच हो। उस पर नियंत्रण लगे या उसका संक्रमण रुके। ऐसे लोगों को देश प्रेमी तो कतई नहीं माना जा सकता। हां उन पर देश के साथ गद्दारी का शक़ जरूर होता है। ऐसे लोगों के खिलाफ तत्काल देशद्रोह का मामला दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी की जानी चाहिए ताकि पथराव की बीमारी और दूसरे शहरों में न पहुंचे।
 

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