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20-08-2019
चर्चित मौत कांड पंकज बेग के मामले में निलंबित आरक्षक की पत्नी ने लगाई फांसी 

अंबिकापुर। पंकज बेक मौत के मामले में निलंबित आरक्षक की पत्नी ने मंगलवार को बाथरूम के रोशनदान में साड़ी के सहारे फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।महिला नें अपने घर के ऊपरी मंजिल पर निर्मित किराए के कमरे में आत्महत्या की है।घटना के वक़्त मृतिका की सास घर पर थी जबकि उसके दोनों बच्चे स्कूल गए थे। पति मंदिर और ससुर दूध लेने गए थे। काफी देर तक जब वह घर नहीं आई तो ससुर नें फर्स्ट फ्लोर बने कमरे में जाकर देखा। देर तक दरवाजा खटखटाने के बावजूद दरवाजा नहीं खुलने पर उन्होंनें आरक्षक बेटे को सूचना दी। जब आरक्षक ने दरवाजा तोड़ा तो पत्नी को फांसी पर लटके देखा।पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।वहीं एडिशनल एसपी नें कहा है कि मामले की जाँच की जा रही है।अब तक आत्महत्या के कारणों का पता नहीं चला है।

अंबिकापुर के गाड़ाघाट निवासी दीनदयाल सिंह (डीडी सिंह) वर्ष आरक्षक है। वह अपने परिवार सहित ग्राउंड फ्लोर पर रहता है, जबकि ऊपर किराए पर देने के लिए कुछ कमरे बना रखे हैं। मंगलवार की सुबह उसके पुत्र व पुत्री स्कूल और वह मंदिर में पूजा करने गया था। उसके पिता दूध लेने बंगाली चौक गए थे जबकि सास घर पर थी। इसी दौरान आरक्षक की पत्नी ज्योति सिंह 32 वर्ष प्रथम तल पर किराए के खाली मकान में गई थी। ऊपर गए उसे करीब 1 घंटे हो गए थे। इसी बीच ससुर दूध लेकर वापस लौटे तो बहू को न देख पत्नी से पूछा। उन्होंने बताया कि बहू किराए के मकान में काफी देर से गई है। इसके बाद ससुर ऊपर पहुंचे और आवाज लगाई तो बहू ने कोई जवाब नहीं दिया। जब दरवाजा तोडा गया तो आरक्षक की पत्नी को फांसी पर लटके देखा।

 

16-08-2019
पहलू खान के मामले में बोलीं प्रियंका- कोर्ट का फैसला चौंकाने वाला

नई दिल्ली। पहलू खान केस में कोर्ट के फैसले पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने हैरानी जताई है। प्रियंका ने कहा कि पहलू खान मामले में लोअर कोर्ट का फैसला चौंका देने वाला है। हमारे देश में अमानवीयता की कोई जगह नहीं होनी चाहिए और भीड़ द्वारा हत्या एक जघन्य अपराध है। अशोक गहलोत सरकार की तारीफ  करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि राजस्थान सरकार द्वारा भीड़ द्वारा हत्या के खिलाफ  कानून बनाने की पहल सराहनीय है। आशा है कि पहलू खान मामले में न्याय दिलाकर इसका अच्छा उदाहरण पेश किया जाएगा। राजस्थान के पहलू खान मॉब लिंचिंग मामले में अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। अलवर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने सबूतों की कमी के आधार पर आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया है। इस मामले में पीडि़तों के वकील योगेंद्र सिंह खड़ाना ने कहा था कि फैसले की कॉपी मिलने के बाद इसका अध्ययन कर वे इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देंगे। पहलू खान मामले में कुल 9 आरोपी थे। इनमें से 3 आरोपी नाबालिग थे। बुधवार को अदालत ने 6 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए निर्दोष करार दिया था। अदालत ने अपने आदेश में वीडियो फुटेज को सबूत नहीं माना था। कोर्ट ने अपने आर्डर में कहा था कि पुलिस ने वीडियो फुटेज की एफएसएल जांच नहीं कराई। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि पहलू खान के बेटे आरोपियों की पहचान नहीं कर सके। इन्हीं आधारों पर कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया था।

 

 

01-08-2019
मध्यस्थता पैनल ने अयोध्या भूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट को सौंपी स्टेटस रिपोर्ट

नई दिल्ली। अयोध्या भूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट को मध्यस्थता पैनल ने स्टेटस रिपोर्ट सौंप दी है। इसमें हर एक पक्षकार के रुख और दलीलों का विस्तृत ब्यौरा दिया गया है। अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर कल सुनवाई करेगा और फाइनल रिपोर्ट देखने के बाद रोजाना सुनवाई की जानी है या नहीं, इस पर फैसला करेगा। राम जन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित मध्यस्थता कमेटी की आखिरी कवायद पूरी हो गई है। दिल्ली में स्थित उत्तरप्रदेश सदन में मध्यस्थता कमेटी की बैठक खत्म हो गई है, जिसमें बात बनती नजर नहीं आई। अयोध्या भूमि विवाद को आपसी रजामंदी से हल करने को लेकर कमेटी की यह आखिरी कोशिश थी। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई में सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच 2 अगस्त को इस मामले की सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने 18 जुलाई को मध्यस्थता कमेटी को हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच सहमति बनाने के लिए 31 जुलाई तक बातचीत जारी रखने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने 31 जुलाई तक मध्यस्थतों से अदालत की निगरानी में गोपनीय रूप से प्रक्रिया जारी रखने का अनुरोध किया था, जिससे स्टेटस रिपोर्ट सौंपने के बाद कोर्ट प्रत्यक्ष रूप से मामले में आगे आदेश दे सकेगा। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 8 मार्च को बड़ा कदम उठाते हुए विवादित भूमि के सभी पक्षों से बात करने के लिए तीन सदस्यों वाली मध्यस्थता कमेटी का गठन कर इस विवाद को सुलझाने की कोशिश की थी। इस कमेटी के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस एफएमआई खलीफुल्ला हैं। दो अन्य सदस्य आध्यात्मिक गुरु और आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर और वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पांचू हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित की गई मध्यस्थता कमेटी पर राम जन्मभूमि न्यास ने असहमति जताई थी।

30-07-2019
परिवार अदालत में चले तीन तलाक के मामले में: कांग्रेस

नई दिल्ली। कांग्रेस ने मंगलवार को राज्यसभा में कहा कि तीन तलाक (तलाक ए बिद्दत) से संबंधित मामलों की सुनवाई परिवार अदालतों में होनी चाहिए ताकि समझौते की गुंजाइश बन सके और पीड़ित महिलाओं की गरिमा और प्रतिष्ठा बनी रह सके। कांग्रेस की ऐमी याज्ञनिक ने मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक 2019 पर चर्चा शुरू करते हुए कहा कि यह विधेयक केवल महिला के सशक्तिकरण से ही संबंधित नहीं है बल्कि इससे पूरा परिवार जुड़ा है। इस विधेयक से उसके पति और बच्चें भी प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार को महिलाओं की गरिमा और प्रतिष्ठा को ध्यान में रखना चाहिए। विधेयक के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार तीन तलाक से संबंधित मामले आपराधिक अदालतों में चलेंगे। इसका तात्पर्य है कि न्याय पाने के लिए महिलाओं को अपराधियों की तरह अदालत में पेश होना पड़ेगा और अपराधियों की पंक्ति में खड़ा होना होगा।

उन्होंने कहा कि तीन तलाक से संबंधित मामले में परिवार अदालतों में चलायें जाने चाहिए और ये परिवारों से संबंधित हैं। इससे परिवारों में समझौते की संभावना बनी रहेगी और महिलाओं को अपराधियों की तरह खड़ा नहीं होना पड़ेगा। संबंधित मामलों का निपटारा भी जल्दी हो सकेगा। सुश्री याज्ञनिक ने कहा कि सरकार को समाज की मानसिकता समझनी चाहिए। तलाक से पीडित महिलाओं को समाज पहले ही दोषी मान चुका होता है। इसलिए प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिससे महिलाओं को कम से कम आघात लगे। महिलाओं को आर्थिक रुप से सशक्त बनाने की वकालत करते हुए कांग्रेस सदस्य ने कहा कि सरकार को केवल मुस्लिम महिलाओं के बारे में ही नहीं बल्कि सभी वर्गों की महिलाओं के बारे में सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रवासी भारतीयों द्वारा अपनी पत्नियों को छोड़ने की घटनाओं पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को सुपर पावर बनाने के लिए महिलाओं को सुपर वूमेन बनाना होगा। महिलाओं को आर्थिक रुप से सशक्त बनाया जाना चाहिए।

18-06-2019
बीजापुर इंन्दिरावती टाईगर रिजर्व मामले में शासन को नोटिस जारी कर 3 सप्ताह में जवाब तलब करने निर्देश

बिलासपुर। बीजापुर इंद्रावती टाईगर रिजर्व के बफर जोन एरिया कम किए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सीजे रामचंद्र मेनन व जस्टिस गौतम भादुड़ी की युगलपीठ राज य शासन को नोटिस जारी कर 3 सप्ताह में जवाब तलब किया है।

सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने एडिशनल एजी फौजिया मिर्जा से पूछा कि आखिर किस आधार पर राज्य शासन ने बफर एरिया कम किए जाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा । इस मामले शासन से जानकारी लेकर तीन सप्ताह में जवाब पेश करें।

बस्तर के बीजापुर इंद्रावती टाईगर रिजर्व के बफर जोन को कम किए जाने का प्रस्ताव राज्य शासन ने केंद्र को भेजा है । इसके खिलाफ लक्ष्मी चौहान व अशोक मिश्रा ने अधिवक्ता सुदीप अग्रवाल माध्यम से जनहित याचिका लगाई है । याचिका में राज्य शासन आरोप लगाते हुए कहा गया है कि शासन द्वारा जंगल के पर्यावरण के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है । एनटीसीए की अनुमति के बगैर टाईगर रिजर्व के बफर जोन एरिया को कम नहीं किया जा सकता सरकार ने इस मामले में विशेषज्ञों की टीम बनाई और उसकी रिपोर्ट को केंद्र शासन के पास अनुशंसा के लिए भेज दिया है । बफर एरिया कम किए जाने के प्रस्ताव पर अविलंब रोक लगाई जाए । मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद युगलपीठ ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

17-06-2019
असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति मामले में हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला, हटाई रोक 

जबलपुर। मध्यप्रदेश में असिस्टेंट प्रोफेसर्स की ज्वाइनिंग को लेकर लगाई रोक को हाईकोर्ट ने हटा ली है। अब ढाई हजार से अधिक प्रोफेसर्स की ज्वाइनिंग का रास्ता साफ हो गया है। उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने यह जानकारी ट्वीट के माध्यम से दी है। बता दें कि वर्ष 2018 में 2536 पदों पर हुई नियुक्ति प्रक्रिया न्यायिक दांवपेंच मे फंसी थी। अगस्त 2018 में तत्कालीन प्रदेश सरकार ने पीएससी के जरिए भर्ती प्रक्रिया करवाकर 2536 असिस्टेंट प्रोफेसरों को चुना था। चयन प्रक्रिया के लिए पिछली सरकार के कार्यकाल में बार-बार नियमों में बदलाव लाए गए। आरक्षण और आयुसीमा में भी बदलाव हुए, जिससे पात्र उम्मीदवारों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर निशक्त आरक्षण के कोटे के नियम और अनुपात को चुनौती दे दी थी। इसके बाद से ही ये मामला कोर्ट में अटका हुआ था। सुनवाई के दौरान सरकार ने अदालत मे नियुक्ति प्रक्रिया मे गड़बड़ी की बात को स्वीकारा है। सोमवार को मामले का निपटारा करते हुए अदालत ने पीएससी को नई मैरिट लिस्ट नियम के अनुसार जारी करने के आदेश दिए है।
उच्च शिक्षामंत्री जीतू पटवारी ने कहा कि "मुख्यमंत्री कमलनाथ के सकारात्मक प्रयासों से महाविद्यालयो में सहायक प्राध्यापकों की भर्ती और नियुक्ति का रास्ता उच्च न्यायालय ने साफ कर दिया है। 

12-06-2019
भरी कचहरी में यूपी बार काउंसिल की अध्यक्ष को मार दी गोली  

आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में यूपी बार काउंसिल की अध्यक्ष दरवेश यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई। दो दिन पहले ही दरवेश यादव को इस पद पर चुना गया था। हत्या की इस वारदात को उस वक्त अंजाम दिया गया, जब दीवानी कचहरी में उनका स्वागत समारोह चल रहा था। इस दौरान एक दूसरा अधिवक्ता भी गोली लगने से घायल हो गया। आगरा की दीवानी कचहरी में स्वागत समारोह के दौरान हुए इस गोली कांड से अफरा-तफरी मच गई। बताया जा रहा है कि अधिवक्ता मनीष ने समारोह के दौरान अचानक पिस्तौल निकाली और यूपी बार काउंसिल की नवनिर्वाचित अध्यक्ष दरवेश यादव पर गोली चला दी। उसने दरवेश को तीन गोली मारी और इसके बाद खुद को भी गोली मार ली। आरोपी दरवेश यादव का पूर्व सहयोगी बताया जा रहा है। घटना के बाद फौरन मनीष शर्मा को सिकंदरा हाइवे स्थित रेनबो अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है। जबकि दरवेश को पुष्पांजलि अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद अस्पताल में वकीलों की भीड़ जमा हो गई है। पुलिस के आला अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए हैं। वारदात थाना न्यू आगरा इलाके के न्यायालय परिसर में हुई है। अभी तक इस घटना के पीछे की वजह साफ नहीं है। पुलिस ने मामले की छानबीन कर शुरू कर दी है। आगरा जोन के एडीजी अजय आनंद समेत अन्य आला अफसर और वरिष्ठ अधिवक्ता मौके पर जा पहुंचे। मामले की तफ्तीश की जा रही है।

10-06-2019
पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जरदारी को इस जुर्म के लिए किया गया गिरफ्तार 

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति आसिफ  अली जरदारी को एनएबी ने फेक बैंक अकाउंट केस में गिरफ्तार किया है। नेशनल एकाउंटिबिलिटी ब्यूरो (एनएबी) की 15 सदस्यीय टीम ने पुलिस कर्मियों के साथ पीपीपी के सह-अध्यक्ष आसिफ  अली जरदारी को सोमवार को इस्लामाबाद में उनके आवास से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के कुछ घंटे पहले ही इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने फर्जी खातों के मामले में जरदारी और उसकी बहन फरयाल तालपुर की गिरफ्तारी की अवधि बढ़ाने की मांग की अर्जी को खारिज कर दिया था। कोर्ट के फैसले के बाद महिला अधिकारी सहित पुलिस कर्मी पूर्व राष्ट्रपति के घर में घुसे। इससे पहले पुलिस ने उनके आवास की तरफ  जाने वाली सभी सड़कों को ब्लॉक कर लिया। दो सदस्यी बैंच, जिसने याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था, ने मौखिक रूप से ये आदेश दिया। फैसला सुनाए जाने से पहले जरदारी और उनकी बहन कोर्ट से चले गए थे। जरदारी के खिलाफ  रविवार को वारंट जारी किए गए थे।

20-05-2019
फिल्म अभिनेता जितेंद्र को राहत, यौन उत्पीडऩ मामले की याचिका रद्द 

शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बॉलीवुड अभिनेता रवि कपूर उर्फ  जितेंद्र के खिलाफ  दर्ज यौन उत्पीडऩ के मामले को लेकर प्राथमिकी को रद्द कर दिया है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने अभिनेता जितेंद्र की ओर से दायर याचिका के तथ्यों व इस मामले से जुड़े रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद यह फैसला सुनाया। याचिका में दिए गए तथ्यों के अनुसार गत 16 फरवरी को महिला पुलिस थाना शिमला के समक्ष भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत प्रार्थी अभिनेता के खिलाफ  प्राथमिकी दर्ज की गई थी। एफआईआर में प्रार्थी अभिनेता की चचेरी बहन ने 47 साल पहले घटी घटना को लेकर यौन उत्पीडऩ के आरोप लगाए थे। प्रार्थी ने हाईकोर्ट के समक्ष याचिका दायर कर इस प्राथमिकी को रद्द करने की गुहार लगाई  थी। प्रार्थी की ओर से यह दलील दी गई थी कि यह प्राथमिकी उसे ब्लैकमेल करने के इरादे से दर्ज की गई है। कथित घटना के 47 वर्ष बाद दर्ज इस प्राथमिकी में देरी के कारणों का कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। प्रार्थी ने कहा था कि एफआईआर में न तो शिमला में की गई फिल्म की शूटिंग के नाम का व होटल का उल्लेख किया गया है। दो सह अभिनेताओं के नाम भी प्राथमिकी में नहीं लिखे गए हैं। प्रार्थी के अनुसार उसके खिलाफ  झूठे आरोप लगाए गए हैं। इस कारण प्रार्थी ने यह एफआईआर रद्द करने की गुहार लगाई थी। न्यायालय ने प्रार्थी की दलीलों को कानूनन न्यायसंगत पाते हुए उपरोक्त फैसला सुनाया।

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