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15-12-2019
सावरकर कांग्रेस के लिए गद्दार तो शिवसेना के लिए महान, ये हाल है कॉमन मिनिमम प्रोग्राम का

रायपुर। तेल और पानी के मेल के खेल की पोल आखिर खुल ही गई। शिवसेना कांग्रेसऔर एनसीपी महागठबंधन सावरकर के मुद्दे पर बंटता नजर आ रहा है। राहुल गांधी का बयान कि मैं राहुल सावरकर नहीं हूं शिवसेना के गले की फांस बन गया है। वह शिवसेना के गले उतर नहीं रहा है। शिवसेना की राजनीति सिर्फ और सिर्फ महाराष्ट्र तक ही सीमित है और महाराष्ट्र में सावरकर को स्वातंत्र्य वीर कहा जाता है। ऐसे में राहुल का सावरकर पर हमला कांग्रेस एनसीपी शिवसेना के कॉमन मिनिमम प्रोग्राम की धज्जियां उड़ाता नजर आता है। वैसे भी इस महागठबंधन के अस्तित्व में आने से पहले ही इसके खत्म हो जाने की आशंकाओं पर ज्यादा बात हुई है। सिर्फ और सिर्फ भाजपा को रोकने के लिए इस तरह का गठबंधन कांग्रेस ने कर्नाटक में भी किया था जहां उन्हें मुंह की खानी पड़ी। आज वहां भाजपा की सरकार है। कमोबेश ऐसी ही स्थिति महाराष्ट्र में थी। जहां विपरीत विचार विपरीत ध्रुव की पार्टियां आपस में मिल गई कि उन्हें नरेंद्र मोदी शाह की जोड़ी को रोकना था।भाजपा को सरकार बनाने से रोकना था। देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री बनने से रोकना था। और खुद शिवसेना के सुप्रीमो को मुख्यमंत्री बनाना था। बहरहाल सरकार बने गिनती के दिन बीते हैं और विवाद शुरू हो गया है। यह बता देता है कि पानी और तेल का मेल हो नहीं सकता। और अगर हुआ भी तो उस मेल के खेल की पोल खुलनी तो तय ही है।

12-12-2019
शिवसेना, कांग्रेस, एनसीपी के कामन मिनिमम प्रोग्राम की धज्जियां उड़ा दी नागरिकता संशोधन बिल ने

रायपुर। महाराष्ट्र में कांग्रेस शिवसेना व एनसीपी की मिली जुली सरकार बने ज्यादा समय नहीं हुआ और पहली ही परीक्षा में उनके कॉमन मिनिमम प्रोग्राम की धज्जियां उड़ा दी नागरिकता संशोधन बिल ने। नागरिकता संशोधन बिल पर एनसीपी और कांग्रेस ने जहां लोकसभा में बिल के खिलाफ मतदान किया तो शिवसेना बिल के समर्थन में खड़ी नजर आई। शिवसेना के बदले रुख से नाराज एनसीपी और कांग्रेस ने जब दबाव बनाया तो 2 दिन बाद ही राज्यसभा में नागरिकता संशोधन बिल पेश होने पर शिवसेना ने यु टर्न मार लिया। लोकसभा में बिल के समर्थन में मतदान करने वाली शिवसेना राज्यसभा में मतदान ना कर वाकआउट करते नजर आई। यानी यहां भी उसने इस बिल का समर्थन तो नहीं किया लेकिन बिल का विरोध कर रही कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर विरोध में मतदान भी नहीं किया। कट्टर हिंदुत्व और कथित धर्मनिरपेक्षता की चक्की में शिवसेना बुरी तरह पिस गई है। और महाराष्ट्र की महाआघाड़ी की सरकार का न्यूनतम साझा प्रोग्राम साफ दम तोड़ता नज़र आया। एनसीपी कांग्रेस और शिवसेना के लिए ये बुरा सपना है तो महाराष्ट्र में भाजपा के लिए उम्मीद की किरण बनाता नज़र आ रहा है।

28-11-2019
महाराष्ट्र में गरीब बालिकाओं को मिलेगी फ्री शिक्षा, किसानों का होगा कर्जमाफ

मुंबई। शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के बीच जो कॉमन मिनिमम प्रोग्राम तय हुआ है। उसमें किसानों की कर्जमाफी से लेकर बच्चियों के मुफ्त शिक्षा की बात कही गई है। इसके तहत किसानों के कर्ज तुरंत माफ कर दिए जाएंगे। राज्य सरकार के अंदर आने वाले सभी रिक्त पदों को भरे जाने की बात कही गई है। इसके साथ ही महिला सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। इसमें कहा गया है कि संविधान में जिन धर्मनिरपेक्ष मूल्यों का जिक्र है, उन्हें यह गठबंधन बनाए रखेगा। इसके अलावा कमजोर पृष्ठभूमि से आने वाली बच्चियों को मुफ्त शिक्षा दी जाएगी। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना की तर्ज पर शहरी इलाकों में सड़क के लिए योजना लाई जाएगी। बता दें कि कॉमन मिनिमन प्रोग्राम को लेकर तीनों दलों के बीच लंबी चर्चा चला थी। इसके बाद तीनों दलों को हाई कमान ने इसके फाइनल ड्राफ्ट पर अपनी मुहर लगाई। उद्धव ठाकरे के शपथ ग्रहण से पहले तीनों दलों के कॉमन मिनिमम प्रोग्राम को जारी करते हुए शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे ने कहा कि महा विकास आघाड़ी मजबूत सरकार देने की कोशिश करेगा। हम महाराष्ट्र की जनता के लिए काम करेंगे। ये आम जनता की सरकार है। बेरोजगारी का हल निकालने की कोशिश करेंगे। किसानों की अड़चनों को दूर करेंगे। बारिश से जो उनका नुकसान हुआ है उसका भी समाधान निकालेंगे।

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