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21-09-2020
जिला शिक्षा अधिकारियों को सूखा राशन वितरण कराने के निर्देश

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देशानुसार राज्य के सभी स्कूली बच्चों को कोरोना संक्रमण काल में भी मध्यान्ह भोजन योजना के अंतर्गत सूखा राशन का वितरण किया जा रहा है। स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने बताया कि राज्य शासन के निर्णय अनुसार कोविड-19 के संक्रमण के चलते शालाओं के बंद रहने की अवधि 11 अगस्त से 31 अक्टूबर तक कुल 63 दिनों का मध्यान्ह भोजन का सूखा राशन स्कूली बच्चों को खाद्य सुरक्षा भत्ता के रूप में वितरण किया जाएगा। सूखा राशन सामग्री का वितरण सुविधानुसार स्कूल में अथवा घर-घर पहुंचाकर देने के निर्देश दिए गए हैं। वितरण के दौरान बच्चों या पालकों के मध्य सामाजिक दूरी बनाए रखी जाएगी। इस संबंध में संचालक लोक शिक्षण जितेन्द्र शुक्ला ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों दिशा-निर्देश जारी किए हैं। लोक शिक्षण संचालनालय से जिला शिक्षा अधिकारियों को जारी निर्देश में कहा गया है कि भारत सरकार द्वारा 29 अगस्त 2020 में कोरोना वायरस (कोविड-19) के संक्रमण काल में अनलॉक-4 के संबंध में विस्तृत निर्देश जारी किया गया है। इस आदेश में 30 सितम्बर 2020 तक शालाओं को बंद रखे जाने का निर्देश दिया गया है।

अतः खाद्य सुरक्षा भत्ता के रूप में बच्चों को सूखा चावल एवं कुकिंग कास्ट की राशि से अन्य आवश्यक खाद्य सामग्री - दाल, तेल, सूखी सब्जी इत्यादि वितरित किया जाना है। सूखा राशन सामग्री वितरण के लिए जारी निर्देश में कहा गया है कि मध्यान्ह भोजन योजना की गाईडलाइन के अनुसार कक्षा पहली से आठवी तक के उन बच्चों को जिनका नाम शासकीय शाला, अनुदान प्राप्त अशासकीय शाला अथवा मदरसा-मकतबा में दर्ज है, मध्यान्ह भोजन दिया जाए। सूखा राशन वितरण में बच्चों को चावल, दाल एवं तेल की मात्रा भारत सरकार द्वारा निर्धारित मात्रा से कम नहीं होनी चाहिए। बच्चों को प्रदाय की जाने वाली सामग्रियों को पृथक-पृथक सील बंद पैकेट बनाकर प्रति छात्र सभी सामग्रियों का एक बड़ा पैकेट बनाया जाए। वितरित की जाने वाली खाद्य सामग्रियां उच्च गुणवत्ता की होनी चाहिए। गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सामग्रियों की पैकिंग के पूर्व और पैकिंग के बाद के फोटोग्राफ लिए जाए।

सामग्री के ब्रांड से संबंधित फोटोग्राफ और सामग्री नमूनार्थ एक माह तक के लिए रखी जाए। इससे किसी प्रकार की शिकायत होने पर गुणवत्ता के संबंध में जांच की जा सके। सूखा राशन वितरण के संबंध में प्रत्येक शाला में बच्चों को वितरित होने वाली सामग्रियों की गुणवत्ता एवं मात्रा सुनिश्चित करने  के लिए सामग्री वितरण के लिए जिला स्तर पर इस प्रकार कार्ययोजना बनाई जाए जिससे इसकी सूक्ष्म मॉनिटरिंग की जा सके।शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्राथमिक स्कूलों में 63 दिनों के लिए प्रति छात्र चावल 6300 ग्राम, दाल 1260 ग्राम, आचार 500 ग्राम, सोयाबड़ी 630 ग्राम, तेल 315 ग्राम और नमक 400 ग्राम प्रदाय किया जाना है। इसी प्रकार माध्यमिक स्कूलों में 63 दिनों के लिए प्रति छात्र चावल 9450 ग्राम, दाल 1890 ग्राम, आचार 750 ग्राम, सोयाबड़ी 945 ग्राम, तेल 500 ग्राम और नमक 600 ग्राम प्रदाय किया जाना है। स्कूलों के लिए चावल पूर्व की तरह ही उचित मूल्य की दुकान के माध्यम से प्रदाय किया जाएगा

 

07-08-2020
मोहल्ला क्लास में शिक्षक सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर लगा रहे हैं स्कूली बच्चों की कक्षाएं

उदयपुर। अभी तक केवल ऑनलाइन क्लास से बच्चों की पढ़ाई कराई जा रही थी,जिसमें बच्चों का जुड़ाव संतोषजनक नहीं हो पा रहा था। परन्तु अब विगत कुछ दिनों से विकास खण्ड उदयपुर में मोहल्ला क्लास का शुभारंभ किया गया है,जिसका लाभ प्राथमिक विद्यालय के छात्र-छात्राओं को मिल रहा है। ऑफ लाइन के विभिन तरीके अपना कर मोहल्ला कक्षा भी लगाई जा रही है। लंबे समय बाद बच्चों में भी पढ़ाई को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है। ऑफलाइन कक्षा संचालन से मोबाइल नेटवर्क विहीन क्षेत्र में भी अब बच्चे ऑफ़लाइन कक्षा का लाभ ले रहे हैं। बच्चों को शिक्षक घर-घर जाकर निशुल्क पाठय पुस्तक व गणवेश बांट रहे हैं। ऑफ़लाइन कक्षा संचालन में समुदाय के साथ ग्राम के जागरूक शिक्षित लोग व जनप्रतिनिधियों के सहयोग से अध्यापन के लिए पारा मोहल्ला में जगह उपलब्ध कराया जा रहा है। मोहल्ला क्लास संचालन में विकास खंड शिक्षा अधिकारी डॉ.डीएन मिश्रा, विकास खण्ड स्रोत समन्वयक बलबीर गिरी , सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारी हेमप्रकाश साहू तथा संकुल समन्वयक का मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है इनके द्वारा ऑफ़लाइन पढ़ाई का सतत मॉनिटरिंग भी किया जा रहा है।

 

02-08-2020
नई शिक्षा नीति में स्कूली बच्चों को सुबह पौष्टिक नाश्ता का प्रस्ताव, होगी छात्रों की नियमित स्वास्थ्य जांच

नई दिल्ली। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मध्याह्न भोजन के साथ सरकारी या सहायता प्राप्त स्कूलों में बच्चों को नाश्ता मुहैया कराने का प्रावधान रखने का भी प्रस्ताव है। पिछले दिनों केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर की गई इस शिक्षा नीति में कहा गया है कि सुबह के समय पोषक नाश्ता मिलना ज्ञान-संबंधी असामान्य मेहनत वाले विषयों की पढ़ाई में लाभकर हो सकता है। इसी के मद्देनजर नई शिक्षा नीति में प्रस्ताव किया गया है कि मध्याह्न भोजन के दायरे का विस्तार कर उसमें नाश्ते का प्रावधान जोड़ा जाए। शिक्षा नीति में कहा गया, ‘जब बच्चे कुपोषित या अस्वस्थ होते हैं तो वे बेहतर रूप से सीखने में असमर्थ हो जाते हैं। इसलिए, बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य (मानसिक स्वास्थ्य सहित) पर ध्यान दिया जाएगा। पोषक भोजन और अच्छी तरह से प्रशिक्षित सामाजिक कार्यकर्ताओं, काउंसलर, और स्कूली शिक्षा प्रणाली में समुदाय की भागीदारी के साथ-साथ शिक्षा प्रणाली के अलावा विभिन्न सतत उपायों के माध्यम से कार्य किया जाएगा।’ इसमें कहा गया, ‘शोध बताते हैं कि सुबह के समय पोषक नाश्ता ज्ञान-संबंधी असामान्य मेहनत वाले विषयों की पढ़ाई में लाभकारी हो सकता है।

इसलिए बच्चों को मध्याह्न भोजन के अतिरिक्त साधारण लेकिन स्फूर्तिदायक नाश्ता देकर सुबह के समय का लाभ उठाया जा सकता है।’ जिन स्थानों पर गरम भोजन संभव नहीं है,उन स्थानों पर साधारण लेकिन पोषक भोजन मसलन मूंगफली या चना गुड़ और स्थानीय फलों के साथ उपलब्ध कराया जा सकता है।नई शिक्षा नीति में कहा गया है,‘सभी स्कूली छात्रों की नियमित स्वास्थ्य जांच कराई जाए और उनका शत प्रतिशत टीकाकरण हो। इसकी निगरानी के लिए स्वास्थ्य कार्ड भी जारी किए जाएंगे।’ नई नीति में प्रस्ताव किया गया है कि पांच साल की उम्र के पहले सभी बच्चों को ‘प्रारंभिक कक्षा’ या ‘बालवाटिका’ को भेजा जाए। इसमें कहा गया है, ‘प्रारंभिक कक्षा में पढ़ाई मुख्य रूप से खेल आधारित शिक्षा पर आधारित होगी और इसके केंद्र में ज्ञान-संबंधी, भावात्मक और मनोप्ररेणा क्षमताओं के विकास को रखा गया है। मध्याह्न भोजन कार्यक्रम का विस्तार प्राथमिक स्कूलों की प्राक्-प्रवेश कक्षाओं में भी किया जाएगा।’ शिक्षा नीति के तहत पांचवीं कक्षा तक के बच्चों की पढ़ाई उनकी मातृ भाषा या क्षेत्रीय भाषा में होगी, बोर्ड परीक्षाओं के महत्व को इसमें कुछ कम किया गया है।

26-07-2020
स्कूली बच्चों को मिलेगा 45 दिन का सूखा राशन, जिला शिक्षा अधिकारियों को दिशा-निर्देश

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देशानुसार राज्य के सभी स्कूली बच्चों को कोरोना वायरस के संक्रमण काल में स्कूलों के बंद रहने की अवधि में बच्चों को मध्यान्ह भोजन योजना के अंतर्गत सूखा राशन का वितरण किया जा रहा है। सूखा राशन का वितरण बच्चों के पालकों को स्कूलों में बुलाकर या घर-घर पहुंचाकर दिया जाएगा। स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा कि राज्य शासन के निर्णय अनुसार स्कूली बच्चों को स्कूल बंद रहने की अवधि 16 जून से 10 अगस्त तक 45 दिवस का मध्यान्ह भोजन योजना अंतर्गत सूखा राशन का वितरण किया जाएगा। इस संबंध में संचालक लोक शिक्षण जितेन्द्र शुक्ला ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
लोक शिक्षण संचालनालय से जिला शिक्षा अधिकारियों को जारी निर्देश में कहा गया है कि कोरोना संक्रमण काल में स्कूल बंद रहने की अवधि में बच्चों को मध्यान्ह भोजन अंतर्गत गरम पका भोजन नहीं दिया जा सकता। खाद्य सुरक्षा भत्ता के रूप में बच्चों को सूखा चावल एवं कुकिंग कास्ट की राशि से अन्य आवश्यक सामग्री दाल, तेल, सूखी सब्जी इत्यादि वितरित की जानी है। मध्यान्ह भोजन योजना की गाइडलाइन के अनुसार कक्षा पहली से 8वीं तक के उन बच्चों को जिनका नाम शासकीय शाला, अनुदान प्राप्त अशासकीय शाला अथवा मदरसा-मकतब में दर्ज है, उन्हें मध्यान्ह भोजन दिया जाना है। कक्षा पहली और कक्षा 6वीं में जिन बच्चों का नाम दर्ज हो गया है केवल उन्हीं बच्चों को सूखा राशन वितरण किया जाना है। सूखा राशन सामग्री का वितरण सुविधानुसार शाला में अथवा घर-घर पहुंचाकर दिया जाए। सूखा राशन वितरण में बच्चों को चावल, दाल एवं तेल की भारत सरकार द्वारा निर्धारित मात्रा से कम नहीं होनी चाहिए। सूखा राशन वितरण में खाद्य सामग्रियों की गुणवत्ता और उसकी निर्धारित मात्रा का विशेष ध्यान रखा जाए।
शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्राथमिक स्कूलों में 45 दिनों के लिए प्रति छात्र चावल 4500 ग्राम, दाल 900 ग्राम, अचार 300 ग्राम, सोया बड़ी 450 ग्राम, तेल 225 ग्राम और नमक 250 ग्राम प्रदाय किया जाना है। इसी प्रकार माध्यमिक स्कूलों में 45 दिनों के लिए प्रति छात्र चावल 6750 ग्राम, दाल 1350 ग्राम, आचार 450 ग्राम, सोयाबड़ी 675 ग्राम, तेल 350 ग्राम और नमक 375 ग्राम प्रदाय किया जाना है। स्कूलों के लिए चावल पूर्व की तरह ही उचित मूल्य की दुकान के माध्यम से प्रदाय किया जाएगा। संचालक लोक शिक्षण द्वारा जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया है कि कोरोना वायरस कोविड-19 के संक्रमण काल को ध्यान में रखते हुए निर्धारित सूखी सामग्री का वितरण सुनिश्चित कराएं।

04-06-2020
स्कूली बच्चों को ग्रीष्मावकाश के 45 दिन का मिलेगा सूखा राशन

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देशानुसार राज्य के सभी स्कूली बच्चों को कोरोना वायरस के संक्रमण काल में ग्रीष्म अवकाश में भी मध्यान्ह भोजन योजना के अंतर्गत सूखा राशन का वितरण किया जा रहा है। सूखा राशन का वितरण बच्चों के पालकों को स्कूलों में बुलाकर दिया जाएगा। स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ.प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा कि राज्य शासन के निर्णय अनुसार स्कूली बच्चों को 5 जून से 8 जून तक मध्यान्ह भोजन योजना अंतर्गत सूखा राशन का वितरण किया जाएगा। इस संबंध में संचालक लोक शिक्षण जितेन्द्र शुक्ला ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों दिशा-निर्देश जारी किए हैं। लोक शिक्षण संचालनालय से जिला शिक्षा अधिकारियों को जारी निर्देश में कहा गया है कि स्कूलों के लिए ग्रीष्मावकाश में 45 दिवस और जुलाई में 24 दिन के लिए चावल का आवंटन नागरिक आपूर्ति निगम के पोर्टल में जारी किया जा चुका है। इसके पूर्व 16 से 30 जून के लिए चावल का आवंटन पूर्व में ही जारी हो चुका है। जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि जिला स्तर पर छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम के जिला प्रबंधक से समन्वय स्थापित करते हुए उचित मूल्य में चावल का भण्डारण सुनिश्चित कराते हुए 5 से 8 जून के मध्य बच्चों या उनके पालकों को स्कूल से सूखा राशन का वितरण कर लोक शिक्षण संचालनालय को अवगत कराए।शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्राथमिक स्कूलों में 45 दिनों के लिए प्रति छात्र चावल 4500 ग्राम,दाल 900 ग्राम,आचार 300 ग्राम, सोयाबड़ी 450 ग्राम, तेल 225 ग्राम और नमक 250 ग्राम प्रदाय किया जाना है। इसी प्रकार माध्यमिक स्कूलों में 45 दिनों के लिए प्रति छात्र चावल 6750 ग्राम, दाल 1350 ग्राम, आचार 450 ग्राम, सोयाबड़ी 675 ग्राम, तेल 350 ग्राम और नमक 375 ग्राम प्रदाय किया जाना है। स्कूलों के लिए चावल पूर्व की तरह ही उचित मूल्य की दुकान के माध्यम से प्रदाय किया जाएगा।संचालक लोक शिक्षण द्वारा जिला शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में पूर्व में जारी निर्देश कहा गया है कि कोरोना वायरस कोविड-19 के संक्रमण काल में ग्रीष्मावकाश में भी बच्चों को मध्यान्ह भोजन योजना का सूखा राशन वितरित किया जाना है।

सूखा राशन का वितरण बच्चों के पालकों को स्कूल में बुलाकर दिया जाएगा। जिले वर्तमान परिस्थतियों को ध्यान में रखते हुए निर्धारित सूखी सामग्री का वितरण सुनिश्चित कराएं।राज्य शासन द्वारा ग्रीष्मावकाश में भी बच्चों को मध्यान्ह भोजन दिए जाने का निर्देश दिया गया है। कोरोना संक्रमण से बचाव और उसे फैलने से रोकने के लिए राज्य सरकार ने स्कूल को आगामी आदेश तक बंद रखने का निर्देश दिया है। ऐसी स्थिति में बच्चों को गर्म पका भोजन नहीं दिया जा सकता। खाद्य सुरक्षा भत्ता के रूप में बच्चों को सूखा चावल और कुकिंग कास्ट की राशि से अन्य आवश्यक सामग्री जैसे - दाल, तेल, सूखी सब्जी इत्यादि वितरित की जानी है।जिला शिक्षा अधिकारियों से कहा गया है कि सूखा राशन सामग्री का वितरण सुविधा अनुसार स्कूलों में अथवा घर-घर पहुंचाकर किया जाए। वितरण के दौरान बच्चों या पालकों के मध्य सामाजिक दूरी को बनाएं रखा जाए। सूखा राशन वितरण में बच्चों को चावल, दाल एवं तेल की मात्रा केन्द्र द्वारा निर्धारित मात्रा से कम नहीं होनी चाहिए। बच्चों को प्रदाय किए जाने वाली सामग्रियों को पृथक-पृथक सील बंद पैकेट बनाकर प्रति छात्र सभी सामग्रियों का एक बड़ा पैकेट बनाया जाए। वितरित की जाने वाली खाद्य सामग्रियां उच्च गुणवत्ता की होनी चाहिए। गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सामग्रियों की पैकिंग के पूर्व और पैकिंग के बाद फोटोग्राफ लिए जाए। सामग्री वितरण के लिए प्रति छात्र शासन द्वारा निर्धारित कुंकिंग कास्ट ही प्रदाय की जाए।

 

29-05-2020
शीतल की कहानी पढ़कर स्कूल शिक्षा मंत्री ने फोन पर की बात

रायपुर। स्कूली बच्चों में मौलिक लेखन और सृजनात्मक क्षमता के विकास के लिए नई पहल की जा रही है। लॉक डाउन के दौरान स्कूली बच्चों की नियमित पढ़ाई के लिए शुरू किए गए ऑनलाइन पोर्टल ‘पढ़ई तुंहर दुआर’ में एक नया स्तंभ शुरू किया गया है। हमारे नायक नाम से शुरू किए गए स्तंभ प्रतिदिन स्कूली बच्चों की स्व-रचित मौलिक कहानियों का प्रकाशन किया जा रहा है। इससे बच्चों में जहां सृजनात्मक क्षमता को बढ़ावा मिल रहा है। वहीं वे दिन-प्रतिदिन इस वेबसाईट से जुड़कर नयी-नयी चीजें सीख रहे हैं।स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ.प्रेमसाय सिंह टेकाम भी इस पोर्टल के द्वारा दी जा रही ऑनलाइन शिक्षा की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। शुक्रवार को उन्होंने पोर्टल पर जाकर शीतल राजपूत की कहानी पढ़ी और छात्रा से दूरभाष पर चर्चा की। अचानक मंत्री द्वारा फोन पर सीधे बात करने की जानकारी मिलने पर वह बहुत खुश हुई। गरियाबंद जिले में कक्षा 12वीं पढ़ने वाली इस छात्रा ने मंत्री टेकाम को अपनी पढ़ाई-लिखाई के बारे में जानकारी दी। छात्रा ने पढ़ाई के टाइम-टेबल के बारे में बताया और चर्चा के दौरान डॉक्टर बनने की इच्छा जताई। डॉ. टेकाम ने कहा कि वेबसाइट के जरिए उच्च स्तरीय शैक्षणिक सामग्री और वीडियो लेक्चर शिक्षकों के द्वारा तैयार कर दिए जा रहे हैं। उन्होंने इसका मन लगाकर नियमित रूप से अध्ययन करने की समझाइश दी। स्कूल शिक्षा मंत्री ने कहा कि पढ़ाई में लगन के साथ-साथ पूरा ध्यान रखने पर सफलता मिलती है। उन्होंने छात्रा को खूब मेहनत करने के लिए अपना आशीष दिया। उल्लेखनीय है कि शिक्षा विभाग द्वारा ऑनलाइन पढ़ाई के लिए शुरू किए गए इस पोर्टल की लोकप्रियता लगातार बढ़ते जा रही है। लगभग 20 लाख से अधिक विद्यार्थी और शिक्षक जुड़ चुके हैं। इस पोर्टल में ऑनलाइन पढ़ाई के लिए स्तरीय शैक्षणिक सामग्री और वीडियो लेक्चर अपलोड किए गए हैं।

 

28-05-2020
पढ़ई तुंहर दुआर पोर्टल के माध्यम से स्कूली बच्चों को मिल रही स्तरीय शिक्षा

रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्कूली बच्चों ने वर्चुअल क्लास को अपनी पढ़ाई-लिखाई का जरिया बना लिया है। विद्यार्थियों को इस ऑनलाइन पढ़ाई के माध्यम से गणित, भौतिक विज्ञान, जैसे कठिन विषय भी आसानी से समझ आ रही है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा स्कूली शिक्षा विभाग द्वारा लॉकडाउन की अवधि में बच्चों की पढ़ाई निरंतर जारी रखने के लिए शुरू किए गए ‘पढ़ई तुंहर दुआर‘ ऑनलाईन पोर्टल से खासी मदद मिल रही है।कोरोना संकट के समय स्कूली बच्चों की पढ़ाई-लिखाई को शिक्षकों ने भी चुनौती के रूप में लिया और ऑनलाइन कक्षाओं के लिए पूरी तैयारी कर, कठिन विषयों की विषयवस्तु समझाने के लिए वीडियों लेक्चर तैयार किए। ऑनलाइन अध्ययन-अध्यापन से जुड़े शिक्षकों का कहना है कि हर संकट से कुछ नया सीखने को मिलता है, नई जिम्मेदारी मिलती है। स्कूली बच्चों को लॉक डाउन की अवधि में उन्हें पढ़ाई से जोड़े रखने शिक्षकों ने आगे बढ़कर काम किया है। इस दौरान कई शिक्षकों ने विद्यार्थियों के बीच अपनी नई जगह बनायी है।कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण बच्चों की पढ़ाई में हो रहे नुकसान को देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग ने इस समस्या के समाधान के लिए ऑनलाइन शिक्षा पोर्टल ’पढ़ई तुंहर दुआर’ का शुभारंभ किया है। इसके सफल क्रियान्वयन में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अनेक नायक अपना-अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। ये नायक अपने साथी शिक्षकों और विद्यार्थियों को संदेश देना चाहते है कि हर काम को एक चुनौती के रूप में स्वीकार करना चाहिए। हर नई जिम्मेदारी हमें नई सीख देती है और हमारे उन्नति के द्वार खोलती है।


बलौदाबाजार जिले में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चांपा में भौतिकी विषय के व्याख्याता कौशिक मुनी त्रिपाठी के द्वारा ली जा रही ऑनलाईन कक्षा में बड़ी संख्या में विद्यार्थी भाग लेते हैं। त्रिपाठी प्रदेश में सबसे अधिक वर्चुअल क्लास लेने वाले शिक्षक है। इसी प्रकार बलौदाबाजार-भाटापारा जिले की उच्च प्राथमिक शाला खमरिया की शिक्षिका सीमा मिश्रा राज्य में वर्चुअल क्लास संचालन करने के माध्यम में दूसरे नंबर पर हैं। इनके साथ 50 हजार से अधिक बच्चे जुड़े हुए हैं।
वर्चुअल क्लास के दौरान स्कूली बच्चों को होमवर्क तथा विभिन्न प्रोजेक्ट भी दिए जा रहे है तथा इनकी ऑनलाईन जांच भी की जा रही है। इससे विद्याथियों में पढ़ाई के प्रति रूझान लगातार बढ़ते जा रहा है। उन्हें हमेशा कुछ नया करने की ललक बने रहती है। वर्चुअल क्लास के जरिए बच्चों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया जा रहा है। इसके अलावा उन्हें स्तरीय पाठ्य सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है।

 

15-05-2020
पढ़ाई के सथ विभिन्न कलाओं के गुर भी सिखेंगे बच्चें, डॉ. प्रेमसाय सिंह ने शुरू किया ''आई एम द वन कार्यक्रम''

रायपुर। पढ़ई तुहंर दुआर वेबपोर्टल को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के मंशानुरूप शिक्षा विभाग ने और वृहद स्वरूप दे दिया है। इस पोर्टल में आई एम द वन कार्यक्रम को भी अब शामिल किया गया है। इसके जरिए स्कूली बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ अब विभिन्न कलाओं की भी शिक्षा दी जाएगी। बच्चे अपनी रूचि के अनुसार इस वेबपोर्टल के माध्यम से अपनी कला-प्रतिभा को भी निखार सकेंगे। स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने शुक्रवार को अपने निवास कार्यालय में आई एम द वन कार्यक्रम का शुभारंभ किया। स्कूल शिक्षा विभाग की इस पहल से स्कूली बच्चें ग्रीष्म अवकाश में पढ़ाई के साथ ही मनोरंजक ढंग विभिन्न कलाओं को सीख सकेंगे।  

इस कार्यक्रम के ऑनलाईन प्रोग्राम में देश के प्रसिद्ध क्रिकेटर वीवीएस लक्षमण, फोटोग्राफर डब्बू रत्नानी, किशनगढ़ शैली के चित्रकार पद्मश्री तिलक गीताई, योग गुरू आचार्य प्रतिष्ठा और कोरियोग्राफर सुमीत नामदेव के दिशा-निर्देशन में स्कूली बच्चे, क्रिकेट, योग, कोरियोग्राफी, पेंटिंग, फोटोग्राफी आदि के गुर सीख सकेंगे। स्कूल शिक्षा मंत्री ने कहा कि पढ़ई तुंहर दुआर वेबपोर्टल में पाठ्यपुस्तकों के अलावा अब बच्चों को मनोरंजक ढंग से विभिन्न कलाओं की शिक्षा के लिए शॉर्ट-टर्म कोर्स उपलब्ध होंगे। डॉ.टेकाम ने छत्तीसगढ़ के सभी शिक्षकों, पालकों और बच्चों से अपील की है कि लॉक डाउन के समय और बाद में भी अपने बच्चों को नई चीजें सीखने के लिए प्रेरित करें। इससे बच्चों की रूचि, जिज्ञासा एवं बौद्धिक विकास में वृद्धि होगी।

डॉ.प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा कि राज्य में स्कूल 20 मार्च से बंद हैं। इतनी लंबी अवधि तक बच्चों का घर पर रहना एक बहुत मुश्किल काम है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विगत माह 7 अप्रैल को बच्चों की पढ़ाई जारी रखने ऑनलाईन व्यवस्था पढ़ई तुंहर दुआर के नाम से शुरू की। इस योजना के राज्य में उत्साहजनक नतीजे मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि अभी तक 20 लाख से अधिक बच्चे और एक लाख 80 हजार से अधिक शिक्षक इस कार्यक्रम से जुड़ गए हैं। इसके अलावा महाविद्यालयीन विद्यार्थी और प्राध्यापक भी इससे जुड़ते जा रहे हैं।

डॉ. टेकाम ने कहा कि छत्तीसगढ़ में इसके लिए आइडिया टेक्नोवेशन ने इस अवधि में राज्य में बच्चों के लिए उनका विशेष कार्यक्रम आई एम द वन के निशुल्क उपयोग किए जाने का प्रस्ताव दिया है। इस कार्यक्रम में बच्चों और बड़ों के लिए बहुत सारे आकर्षक और उपयोगी ऑनलाइन कोर्सेस हैं, जो बहुत अच्छी गुणवत्ता के बनाए गए हैं। इस कार्यक्रम से सहजता से जुड़ा जा सकता है। स्कूल शिक्षा विभाग की वेबसाईट cgschool.in (सीजीस्कूलडॉटइन) पर मोबाइल से इसमें पंजीयन कर सीधे जुड़ सकते हैं और विभिन्न कोर्सेस में से अपनी इच्छा के कोर्स में शामिल होकर सुविधानुसार निर्धारित समय में इसे पूरा कर सकते हैं।

20-04-2020
स्कूली बच्चों की ऑनलाइन क्लास का स्कूल शिक्षामंत्री द्वारा मॉनिटरिंग

रायपुर। कोरोना संक्रमण और लॉक डाउन के कारण राज्य के स्कूली बच्चों को ऑनलाइन अध्ययन-अध्यापन की सुविधा के लिए स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शुरू किए गए ‘‘पढ़ई तुंहर दुआर’’ पोर्टल की गतिविधियों की मॉनिटरिंग स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम खुद कर रहे हैं। मंत्री डॉ. टेकाम अपने बंगले से ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से न सिर्फ शिक्षकों द्वारा पढ़ाए जा रहे विषयों और पाठों का अवलोकन कर रहे हैं, बल्कि इस पोर्टल से शिक्षा प्राप्त कर रहे स्कूली बच्चों से चर्चा कर उनकी समझ और समस्याओं का भी आंकलन व निदान कर रहे हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. टेकाम ने आज अपने रायपुर स्थित बंगले से अपरान्ह 3 बजे ऑनलाइन क्लास का अवलोकन किया। विद्यार्थियों और शिक्षकों से चर्चा की और उनकी दिक्कतों का निदान करने के निर्देश अधिकारियों को दिए।डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम द्वारा आज बिलासपुर जिले के शिक्षक नितेश सिंगरौल द्वारा कक्षा आठवीं में विज्ञान के पाठ आकाश दर्शन के अध्यापन का ऑनलाइन अवलोकन किया। इस दौरान ऑनलाइन क्लास से प्रदेश के विभिन्न जिलों से विद्यार्थी एवं शिक्षक जुड़े हुए थे।

स्कूल शिक्षा मंत्री को अचानक अपनी ऑनलाइन कक्षा में देखकर सभी बहुत खुश हुए। डॉ. टेकाम ने ऑनलाइन अध्ययन-अध्यापन की शैली का जायजा लिया और कक्षा संपन्न होने के बाद आधे घंटे का अतिरिक्त समय लेकर विद्यार्थियों एवं शिक्षकों से चर्चा की।मंत्री टेकाम ने आकाश दर्शन पाठ अध्ययन के मद्देनजर विद्यार्थियों से कई रोचक सवाल भी पूछे, जिसमें एक सवाल यह भी था कि आजकल आसमान कैसा दिख रहा है। विद्यार्थियों ने आसमान साफ दिखाई देने की बात बताई। मंत्री डॉ. टेकाम ने आकाश दर्शन पाठ में उल्लेखित ध्रुव तारा एवं सप्तऋषि तारों को आज रात्रि में आसमान की ओर देखकर ढूंढने और पहचानने की बात कही। शिक्षकों ने इस कार्यक्रम को बहुत प्रभावी बताया और शुरुआती तकनीकी जानकारियों पर समझ बन जाने पर आगे इस माध्यम से अध्ययन-अध्यापन में सहूलियत होगी, यह उम्मीद जताई।स्कूल शिक्षामंत्री ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा शुभारंभ किए गए इस कार्यक्रम का लाभ अन्य राज्यों को लेने के संबंध में जारी पत्र की जानकारी देते हुए कार्यक्रम का लाभ सभी बच्चों को लेने के लिए आग्रह किया गया। डॉ. टेकाम ने यह भी आश्वासन दिया कि शीघ्र ही इस योजना के अंतर्गत ऐसी सुविधाएं उपलब्ध करवाने के प्रयास किए जाएंगे जिससे इन्टरनेट सुविधा नहीं होने के बावजूद बच्चे कक्षा को अपने साधारण मोबाइल में भी सुन सकेंगे।

12-04-2020
पढ़ई तुंहर दुआर, अब शिक्षकों को भी दिया जायेगा ऑनलाइन प्रशिक्षण

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्कूली बच्चों को घर पर ही रहकर पढ़ने के लिए देश के सबसे बड़े ऑनलाईन शिक्षा पोर्टल में से एक ’पढ़ई तुंहर दुआर’ का शुभारंभर 7 अप्रैल को किया था। इस पोर्टल के जरिए लाखों छात्र बिना किसी शुल्क के ऑनलाईन पढ़ाई की सुविधा शासन ने उपलब्ध कराए जाने की व्यवस्था की गई है। यह शिक्षा पोर्टल लॉकडाउन के साथ ही आने वाले समय में बच्चों को निरंतर पढ़ाई के लिए उपयोगी होगा। इस ई-लर्निंग प्लेटफार्म में ऑनलाईन इंटरएक्टिव कक्षाओं के जरिए शिक्षक और बच्चे अपने-अपने घरों से ही वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अध्ययन-अध्यापन करा सकेंगे। यह छत्तीसगढ़ राज्य के छात्रों सहित हिन्दी भाषी राज्यों के लिए भी बहुत लाभदायक होगा। स्कूल शिक्षा विभाग की वेबसाइट सीजीस्कूलडॉटइन (cgschool.in) पर कक्षा पहलीं से 10वीं तक विद्यार्थियों के अध्ययन के लिए पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराई गई है।

इस पोर्टल का विस्तार आगे की कक्षाओं के लिए किया भी जा रहा है। भविष्य में 11वीं व 12वीं के विद्यार्थी भी इसका लाभ उठा सकेंगे है। प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा विभाग ने संचालक लोक शिक्षण को निर्देशित किया है कि अधिक से अधिक शिक्षकों और विद्यार्थियों को इससे जोड़ा जाए। इसके साथ ही योजना की सतत मॉनिटरिंग के भी निर्देश दिए गए है। मिशन संचालक समग्र शिक्षा को इस योजना को वार्षिक कार्ययोजना में शामिल करने के निर्देश दिए है। संचालक राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद को इस योजना के पाठ्य सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा इसकी सतत् मॉनिटरिंग के साथ ही शिक्षकों को शैक्षणिक वीडियो, ऑडियो एवं अन्य शैक्षिक सामग्री बनाने सहयोग करने के निर्देश दिए है साथ ही प्रमुख सचिव ने राज्य के शिक्षकों के लिए ऑनलाईन प्रशिक्षण आयोजित करने के निर्देश दिए है।सभी संभागीय आयुक्त और कलेक्टरों को योजना की सतत मॉनिटरिंग करने कहा गया है। सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि जिले के सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों को इस योजना में जोड़ने का प्रयास करें।

03-04-2020
स्कूली बच्चों को मध्यान्ह भोजन का सूखा राशन वितरण शुरू

कांकेर। कोरोना वैश्विक महामारी को ध्यान में रखते हुए लॉक डॉउन के दौरान सभी शासकी स्कूलों की छुट्टी की घोषणा के बाद कोई भी बच्चा भूखा न रहे इसी के तहत राज्य शासन द्वारा दिए गए निर्देशानुसार प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में अध्ययनरत विद्यार्थियों को मध्यान्ह भोजन के सूखा राशन का वितरण आज से शुरू हो गया है। शिक्षकों द्वारा घर-घर जाकर अथवा स्कूलों में विद्यार्थियों के पालकों को 40 दिन का सूखा राशन का वितरण किया जा रहा है। गौरतलब है कि जिले के 1596 प्राथमिक शालाओं के 52 हजार 361 बच्चों को प्रति छात्र 4 किलो ग्राम चावल एवं 800 ग्राम दाल तथा 615 माध्यमिक शाला के 32 हजार 951 बच्चों को 6 किलो ग्राम चावल और 01 किलो 200 ग्राम दाल का वितरण किया जा रहा है।

 

03-04-2020
स्कूली बच्चों को मध्यान्ह भोजन बांटने के बाद अब शिक्षकों को करना होगा कोरोना पीड़ितों की पहचान 

रायपुर/बिलासपुर। कोरोना वायरस और लॉकडाउन के बीच राज्य सरकार ने स्कूली बच्चों को मध्यान्ह भोजन के तहत राशन बांटने की जिम्मेदारी शिक्षकों को दी है। इसके कारण लॉकडाउन के बीच भी शिक्षकों को घरों से निकलना पड़ रहा है। अब सरकार ने शिक्षकों से कोरोना पीड़ितों की पहचान करने के लिए कहा है, जिससे शिक्षक संगठनों में नाराजगी का माहौल है। अब शिक्षकों को राशन बाटने के बाद कोरोना पीड़ितों की भी पहचान करनी होगी।

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