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12-09-2020
पुलिस ने 11 सितंबर को पीएम के लिए प्रार्थना पत्र दिए जाने पर उसी दिन किया कोरोना संक्रमित मृत युवती का पोस्टमार्टम


रायपुर। पुलिस द्वारा पोस्टमार्टम के लिए 11 सितम्बर को प्रार्थना पत्र दिए जाने पर उसी दिन डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के शवगृह (Mortuary) में विगत 1 सितम्बर से रखे मंदिरहसौद के रीवां गांव की कोरोना संक्रमित युवती के शव का पोस्टमार्टम किया गया। उल्लेखनीय है कि रीवां गांव की 29 वर्षीया युवती को 1 सितम्बर को रिम्स अस्पताल, गोढ़ी में मृत अवस्था में लाया गया था। वहां डॉक्टरों द्वारा मृत घोषित किए जाने के बाद शव के पंचनामा की कार्यवाही कर पोस्टमार्टम के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आरंग भेजा गया था। मृतका के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद शव आरंग से लाकर रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल में रखा गया था।संयुक्त संचालक एवं डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल के अधीक्षक ने बताया कि शव को रायपुर लाने के बाद संबंधित क्षेत्र के थाने के पुलिस एवं मृतका के परिजनों को शव की पहचान के लिए बुलाया गया तो उन्होंने पहचानने में असमर्थता जताई। परिजनों और पुलिस द्वारा शव की पहचान किए बिना तथा पोस्टमार्टम प्रार्थना पत्र (PM Requisition Letter) के बगैर पोस्टमार्टम नहीं किया जा सकता। तीन दिन पहले जब उन लोगों द्वारा शव की पहचान कर ली गई तब कोरोना पॉजिटिव होने का हवाला देते हुए पुलिस ने पोस्टमार्टम करवाने से इन्कार कर दिया।

अस्पताल अधीक्षक ने बताया कि पोस्टमार्टम नहीं कराने के लिए मंदिर हसौद थाना प्रभारी के माध्यम से 9 सितम्बर को आवेदन दिया गया। इसमें लिखा था कि कोरोना पॉजिटिव केस होने के कारण शव के पोस्टमार्टम कराने की आवश्यकता नहीं है। जबकि शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक कोविड पॉजिटिव मरीजों के मेडिको-लीगल केस या संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु होने पर पोस्टमार्टम अनिवार्य होगा। अंततः पुलिस द्वारा 11 सितम्बर को पोस्टमार्टम के लिए प्रार्थना पत्र दिए जाने के बाद उसी दिन परिजनों के समक्ष पोस्टमार्टम करवाया गया और बिसरा को पुलिस के माध्यम से जांच के लिए भेजा गया। उन्होंने बताया कि संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत में पोस्टमार्टम मेडिको-लीगल केस की अनिवार्य प्रकिया है। यदि बिना पोस्टमार्टम के शव की सुपर्दुगी परिजनों को कर दी जाती तो भविष्य में मृतका से संबंधित चिकित्सकीय-विधिक प्रकरणों की अवमानना होती।

 

06-09-2020
हार्ट, चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभाग में विगत दो वर्षों में 637 से भी ज्यादा सर्जरी

रायपुर। जवाहर लाल नेहरु स्मृति चिकित्सालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के अंतर्गत संचालित एडवांस्ड कार्डियक इंस्टीट्यूट के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने विगत दो वर्षों में 637 से भी अधिक छाती, फेफड़ों एवं खून की नसों से संबंधित सर्जरी करके नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इसमें से 240 केस छाती एवं फेफड़े तथा 379 केस खून की नसों से एवं 18 केस हार्ट सर्जरी से संबंधित हैं। इसी प्रकार कुल 637 सर्जरी में कैंसर के मामले देखें तो 11 नसों से संबंधित कैंसर, 46 केस फेफड़े एवं छाती के कैंसर, 81 केस एक्सीडेंट एवं ट्रामा एवं 55 केस टी.बी. से संबंधित है। जटिल एवं दुर्लभ सर्जरी करने के कारण न केवल छत्तीसगढ़ में वरन् पूरे देश में इस संस्थान की ख्याति फैली है। इस सफलता का श्रेय टीमवर्क को जाता है, जिसमें कार्डियक सर्जरी के अलावा एनेस्थेसिया एवं क्रिटिकल केयर, कार्डियोलॉजी, रेडियोलॉजी, मेडिसिन, जनरल सर्जरी एवं पैथोलॉजी विभाग का योगदान रहा है।

गौरतलब है कि हार्ट, चेस्ट एंड वैस्कुलर सर्जरी विभाग 1 नवंबर 2017 में एस्कॉर्ट हॉस्पिटल के अधिग्रहण के पश्चात् प्रारंभ हुआ था। वर्तमान में यहां पर दो नियमित पूर्णकालिक कार्डियक सर्जन डॉ. कृष्णकांत साहू एवं डॉ. निशांत सिंह चंदेल अपनी सेवाएं दे रहे हैं। डॉ. कृष्णकांत साहू, हॉर्ट चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी के विभागाध्यक्ष हैं। एनेस्थेटिस्ट के रूप में डॉ. ओमप्रकाश सुंदरानी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू के अनुसार, छत्तीसगढ़ की जनता को इस संस्थान से बहुत लाभ हुआ है। जो मरीज पहले इन सभी ऑपरेशन के लिए महानगर जाते थे, अब उनका इलाज इस संस्थान में होने लगा है। महत्वपूर्ण बात यह है कि एसीआई में हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी प्रारंभ हो जाने के बाद बड़े से बड़े ऑपरेशन के लिए शहर या प्रदेश के बाहर से किसी विशेषज्ञ सर्जन को बुलाने की आवश्यकता नहीं पड़ी। यह सब यहां के सर्जन एवं टीमवर्क से संभव हो पाया है। यहां बहुत ही जल्द ओपन हार्ट सर्जरी एवं बाईपास सर्जरी प्रारंभ होने वाली है। कोरोना काल में भी यहां आपातकालीन सर्जरी हुए हैं और लगातार हो रहे हैं। यहां की जाने वाली सभी सर्जरी बहुत विषम परिस्थितियों में हुई है। बाईपास सर्जरी में इसलिए लेट हो रहा है क्योंकि जब एस्कार्ट का अधिग्रहण हुआ था तब एस्कार्ट मैनेजमेंट ओपन हार्ट सर्जरी और बायपास सर्जरी से संबंधित सारे उपकरण अपने साथ ले गए थे परंतु आज सरकार के द्वारा धीरे-धीरे सर्जरी से संबंधित संसाधनों की व्यवस्था की जा रही है।

हार्ट, चेस्ट एंड वैस्कुलर सर्जरी विभाग को प्रारंभ हुए 2 वर्ष पूर्ण हो गये हैं। 1 जनवरी 2018 से 30 जनवरी 2020 तक इन 2 सालों में हार्ट, चेस्ट एंड वैस्कुलर सर्जरी विभाग में 637 केस हुए। वहीं कुल मृत्यु इन 2 सालों में 11 थी जिसका मुख्य कारण मरीजों का बीमारी के बहुत ही एडवांस स्टेज में या बीमारी के बहुत बढ़ जाने के बाद अस्पताल पहुंचना था।

विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू, हार्ट, चेस्ट एंड वैस्कुलर सर्जरी
एसीआई के हार्ट, चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने छाती, फेफड़े एवं खून की नसों की सर्जरी में कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। यहां बहुत से ऐसे केस हुए हैं जो कि छत्तीसगढ़ में प्रथम बार किये गये हैं।

पहले खिलाई आइसक्रीम फिर किया सर्जरी
ट्रामेटिक काइलो थोरेक्स सर्जरी जिसमें दुर्घटना के कारण मरीज के छाती के अंदर काइल डक्ट पूर्णतः क्षतिग्रस्त हो गई थी। इस प्रक्रिया के लिए मरीज को ऑपरेशन के पहले आइसक्रीम खिलाया गया था जिससे थोरेसिक डक्ट को पहचाने में आसानी हुई एवं उसके थोरेसिक डक्ट को रिपेयर किया गया।

बोन सीमेंट से बनाई पसली
पोस्टीरियर मेडिस्टाइनल ट्यूमर एक तरह की छाती का कैंसर है जिसकी सर्जरी छत्तीसगढ़ में प्रथम बार हुई थी। एक बहुत बड़े छाती के ट्यूमर जिसको निकालने के बाद पुनः पसली बनाने के लिए बोन सीमेंट का इस्तेमाल किया गया था। यह अपने आप में बहुत ही अनूठी सर्जरी थी।

दायें पैर की नस को बायें पैर में लगा कर मरीज का पैर कटने से बचा लिया गया

हाथ की नस को पैर की नस से जोड़कर पैर कटने से बचा लिया। इसे मेडिकल भाषा में एक्जिलो फिमोरल बाईपास कहा जाता है। एस्परजिलोमा एक प्रकार का फंगल इंफेक्शन है, जिसमें छाती में गांठ बन जाता है एवं मरीज को खांसी के साथ साथ खून निकलता है। इस बीमारी में फेफड़े में छेद हो जाता है, जिसको ब्रॉन्को प्लूरल फिस्टुला कहा जाता है। इसका भी सफल ऑपरेशन किया गया जिसमें प्…

30-06-2020
एसीआई पहुंचे गृहमंत्री,निर्माण कार्यों को जल्द पूरा करने के पीडब्ल्यूडी को दिए निर्देश

रायपुर। लोक निर्माण, गृह, जेल, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व, पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय स्थित एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट (एसीआई) का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने एसीआई में पीडब्ल्यूडी (लोक निर्माण) विभाग द्वारा किये जाने वाले आवश्यक निर्माण कार्यों को जल्द पूरा करने के निर्देश दिये। मंत्री ताम्रध्वज साहू ने एसीआई के विभागाध्यक्ष डॉ.स्मित श्रीवास्तव को कैथलैब में स्थित सभी अत्याधुनिक मशीनों को अतिशीघ्र चालू करने के निर्देश दिये। साथ ही उन्होंने धड़कन जलाने की इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी मशीन का अवलोकन भी किया। निरीक्षण के दौरान कार्डियो आईसीसीयू में समस्त उपलब्ध बिस्तरों में उपचारार्थ भर्ती मरीजों से मुलाकात कर हालचाल पूछा। ओपीडी का निरीक्षण करते हुए उपचार के लिए आये मरीजों से चर्चा की तथा उपचार के संबध में जानकारी ली। लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा करते हुए मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग के ओटी में एपोक्सी फ्लोर लगाए जाने के लिए तत्काल स्वीकृति प्रदान की। इसके साथ ही एसीआई के जनरल वार्ड एवं बाल हृदय रोग वार्ड के निर्माण के लिए स्वीकृत कार्य को तत्काल प्रारंभ करने के निर्देश दिये। प्रदेश के एकमात्र दिल के सरकारी अस्पताल के सौंर्दयीकरण के लिये अस्पताल परिसर में विद्युत व्यवस्था, गार्डर्निंग, सुव्यवस्थित वाहन पार्किंग तथा पोर्च निर्माण की स्वीकृति तत्काल प्रदान की। साथ ही भविष्य में हृदय के सर्वसुविधायुक्त सात मंजिला ( G+6 ) अस्पताल एडवांस कार्डियक इंस्टिट्यूट बनाने के लिए विस्तार योजना का अवलोकन किया। इसके प्रथम चरण का कार्य तत्काल प्रारंभ करने के निर्देश दिये एवं अन्य चरणों में होने वाले व्यय का विवरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिये। उन्होंने एसीआई विस्तार में होने वाले व्यय की स्वीकृति को वर्षवार उपलब्ध कराये जाने की बात कही। ताम्रध्वज साहू ने देश में एसीआई के अग्रणी संस्थान बनने पर बधाई दी तथा भविष्य में एसीआई को देश के सर्वश्रेष्ठ सेन्टरों में शुमार करने हेतु हर संभव मदद का आश्वासन दिया। निरीक्षण के समय एसीआई के विभागाध्यक्ष डॉ. स्मित श्रीवास्तव, कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू, डॉ. जोगेश,लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता वीके भतपहरी एवं अन्य अधिकारी, कर्मचारी उपस्थित थे।

 

08-06-2020
अम्बेडकर अस्पताल का बाल्य व शिशु रोग विभाग, मातृ-शिशु अस्पताल कालीबाड़ी में स्थानांतरित

रायपुर। डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय का बाल्य एवं शिशु रोग यानी पीडियाट्रिक विभाग मातृ-शिशु अस्पताल कालीबाड़ी में स्थानांतरित हो गया है। बाल्य एवं शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ.शारजा फूलझेले ने इस सम्बन्ध में जानकारी देते हुए बताया कि कालीबाड़ी मातृ-शिशु अस्पताल में बच्चों का अन्तः रोगी विभाग (आईपीडी), बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) तथा पीडियाट्रिक आईसीयू स्थानांतरित हो गया है। सोमवार को बच्चों की ओपीडी का संचालन यहीं से किया गया। आज से इलाज के लिए बच्चों की भर्ती भी शुरू हो गई है। बच्चों के इलाज की सभी सुविधाएं अब यहीं से प्राप्त होंगी।

 

27-05-2020
अम्बेडकर अस्पताल में ओपीडी, आईपीडी एवं इमर्जेंसी मरीजों के लिए बनाए स्क्रीनिंग काउंटर

 रायपुर। कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर द्वारा कई प्रकार के प्रभावी कदम उठाये जा रहे हैं। इसी क्रम में अस्पताल के दोनों गेट पर डॉक्टरों द्वारा व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण से सुसज्जित होकर चिकित्सालय के विभिन्न विभागों की ओपीडी, आईपीडी एवं इमर्जेंसी में आने वाले मरीजों की स्क्रीनिंग की जाएगी। इस व्यवस्था की शुरूआत आज से हो गई है। स्क्रीनिंग व्यवस्था के सम्बन्ध में जानकारी देते हुए अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ.विनित जैन ने बताया कि ओपीडी समय सुबह 8 से दोपहर 1.30 बजे तक गेट क्र. 1 अर्थात् जहां से मरीजों के लिये नया प्रवेश द्वार बनाया गया है, से ओपीडी मरीजों को प्रवेश दिया जाएगा। इस दौरान पूर्व में ओपीडी जाने का पुराना प्रवेश द्वार बंद रहेगा। मरीज सबसे पहले अस्पताल के गेट क्रमांक 1 से अंदर आएंगें जहां पर 12 डॉक्टरों की टीम द्वारा मरीजों की पूरी हिस्ट्री ली जाएगी। यदि कोविड-19 संक्रमण से सम्बन्धित कोई संभावित लक्षण उनमें पाया जाता है तो उन्हें चिकित्सालय में पृथक रूप से संचालित कफ, कोल्ड ओपीडी भेजा जाएगा और यदि मरीज सामान्य है तभी उन्हें इलाज की पर्ची बनाने के लिये रजिस्ट्रेशन काउंटर 100 नम्बर पर भेजा जाएगा। उसके बाद ही वे सम्बन्धित विभाग में जाकर अपना इलाज करायेंगे। फॉलोअप में आने वाले पुराने मरीजों को नयी पर्ची बनवाने की आवश्यकता नहीं होगी। ओपीडी में मरीजों की भीड़ को देखते हुए डॉक्टरों की ड्यूटी निश्चित दूरी एवं संक्रमण के रोकथाम के मानकों को ध्यान में रखते हुए लगाई गई है।स्क्रीनिंग काउंटर की आवश्यकता इसलिए अम्बेडकर अस्पताल के परिसर में पूर्व में संचालित इंडियन कॉफी हॉऊस बिल्डिंग में कफ,कोल्ड ओपीडी का संचालन चौबीस घंटे नियमित रूप से किया जा रहा है। यहां पर कफ, कोल्ड एवं कोविड-19 के संभावित लक्षण वाले तथा बाहर से आने वाले संदिग्ध मरीज अपना इलाज कराते हैं। इसके बावजूद चिकित्सालय आने वाले कई मरीज ऐसे होते हैं,जिन्हें आंख, कान, नाक, स्त्री रोग, त्वचा, सर्जरी एवं हड्डी रोग इत्यादि से सम्बन्धित समस्या होती है। इन विभागों की ओपीडी में जाने वाले कई मरीज ऐसे होते थे जो बिना सर्दी, खांसी, बुखार का इलाज कराये ही सीधे चिकित्सकों से अपनी दूसरी बीमरियों का इलाज करवाते थे। इलाज में लगे चिकित्सक, नर्सिंग स्टॉफ एवं पैरा मेडिकल स्टॉफ की सुरक्षा के लिये किये गये इस उपाय के जरिये मरीज की हिस्ट्री के आधार पर एवं सावधानी बरतते हुए उन्हें मुख्य समस्या वाले विभागों में भेजा जाएगा।

इमर्जेंसी मरीजों के लिये ओपीडी गेट रहेगा चौबीस घंटे चालू

मरीजों के इतर अनावश्यक लोगों की आवाजाही को कम करने के लिए अम्बेडकर के ओपीडी गेट से केवल इमर्जेंसी मरीजों को ही आने दिया जाएगा। सुबह ओपीडी समय में यह गेट सामान्य लोगों के लिये बंद रहेगा। यहां पर दोपहर 2 बजे से रात्रि 8 बजे तक तीन डॉक्टरों की टीम स्क्रीनिंग के लिये बैठेगी। वहीं रात्रि 8 से सुबह 8 बजे तक चार डॉक्टरों की टीम आपात् मरीजों के स्क्रीनिंग के लिये बैठेगी। मरीजों को असुविधा न हो इसका पूरा ध्यान रखा जाएगा।

 

21-03-2020
 31 मार्च तक अम्बेडकर अस्पताल की ओपीडी और आईपीडी सेवा में किए गए परिवर्तन

रायपुर। कोविड-19 के संभावित खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार एवं संचालक चिकित्सा शिक्षा छत्तीसगढ़ के निर्देशानुसार अस्पतालों और चिकित्सा शिक्षा संस्थानों के लिए जारी एडवाइजरी (सलाह) के परिपालन में डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर में अंतः रोगी विभाग (आईपीडी) एवं बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) के सामान्य संचालन में कुछ आवश्यक परिवर्तन किये जा रहे हैं जो निम्नानुसार हैः-

01. कोविड - 19 से निपटने के लिए भविष्य की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए 31 मार्च 2020 तक गैर आवश्यक ऐच्छिक सर्जरी या पूर्व निर्धारित ऑपरेशन को स्थगित करते हुए केवल इमर्जेंसी ऑपरेशन ही किये जाएंगे। चिकित्सा आपातकाल सेवा पूर्ववत् जारी रहेंगी।

02. इस एडवाइजरी का कड़ाई से पालन करते हुए सभी रोगियों एवं उनके परिजनों को मीडिया के माध्यम से यह सूचना एवं सलाह दी जाती है कि अगर अति आवश्यक न हो तब तक ओपीडी में नियमित रूप से आने से बचें।

03. किसी भी निकटवर्ती आपात स्थिति की संभावना को ध्यान में रखते हुए चिकित्सालय में अनावश्यक भीड़ की स्थिति निर्मित न हो इसके लिये एक मरीज के साथ केवल एक परिजन ही रहें।

04. आपातकालीन एवं अपरिहार्य परिस्थितियों को छोड़कर जहां तक हो सके सामान्य सर्दी, खांसी, बुखार के लिये नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में दिखाने को प्राथमिकता देवें।

05. पुरानी बीमारियों एवं अन्य कोई छोटी समस्या उत्पन्न हो तो तृतीयक देखभाल केंद्रों  के बजाय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी), कम्युनिटी हेल्थ केयर सेंटर (सीएचसी) देखभाल सुविधाओं की ओपीडी में जाने को प्राथमिकता देंवें।

16-03-2020
कोविड-19 के प्रबंधन के लिये राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन

रायपुर। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के टेलीमेडिसीन हॉल में 'स्टेट लेवल ओरियेंटेंशन ट्रेनिंग फॉर हेल्थकेयर स्टॉफ ऑन कोविड-19 केस मैनेजमें' अर्थात् स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए कोरोना वायरस डिसीज-19 के प्रकरणों के प्रबंधन एवं उन्मुखीकरण को लेकर राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग छ.ग. शासन निहारिका बारिक सिंह के निर्देश पर आयोजित इस कार्यशाला में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा स्वास्थ्य सेवा प्रदाता (हेल्थकेयर प्रोवाइडर) को नोवेल कोरोना वायरस रोग ( COVID-19  ) के संदिग्ध एवं पीड़ित रोगियों के उपचार, उपचार के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों एवं सार्वभौमिक एहतियात (यूनिवर्सल प्रोटोकाल) के दिशानिर्देश को लेकर प्रशिक्षण एवं जानकारी दी गई।

स्टेट सर्विलांस ऑफिसर, आईडीएसपी डॉ. धर्मेन्द्र गहवई ने कोविड - 19 केस की विस्तृत व्याख्या एवं वातावरण को संक्रमणमुक्त करने के तरीकों एवं जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन के बारे में बताया। डब्ल्यूएचओ से सब-रीजनल टीम लीडर डॉ. प्रणित फटाले ने बताया कि लोगों को कोरोना वायरस रोग को लेकर अनावश्यक डरने या घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि इस रोग से पीड़ित केवल 1 से 2 प्रतिशत लोगों को ही आईसीयू की जरूरत पड़ती है। वहीं 84 प्रतिशत माइल्ड डिसीज और 14 से 15 प्रतिशत केस ही सीवियर होते हैं। कोरोना वायरस पोरस सरफेस (सरन्ध्र या छिद्रयुक्त सतह) पर लगभग 8 से 12 घंटे, नॉन पोरस सरफेस (समतल सतह) जैसे - कुर्सी, टेबल इत्यादि पर लगभग 1 से 2 दिन तक जीवित रह सकते हैं इसलिए ऐसे स्थानों को संक्रमणमुक्त करना जरूरी हो जाता है।

एम्स रायपुर में वायरल रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लेबोरेटरिज (वीआरडीएल) की नोडल ऑफिसर एवं माइक्रोबायोलॉजी की प्रोफेसर डॉ. अनूदिता भार्गव ने कोविड 19 के संक्रमण की रोकथाम एवं इसके मानक एवं अतिरिक्त सावधानियों के बारे में बताया। साथ ही “डॉन एंड डॉफ” पर पॉवर प्वाइंट प्रेंजेंटेंशन दिया। अम्बेडकर अस्पताल में मेडिसीन के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुरेश चंद्रवंशी ने उपचार की प्राथमिकता, उपचार का क्रम, अधिक संख्या में रोगियों के आने पर उनके त्वरित प्रबंधन, आइसोलेशन एवं अस्पताल की तैयारियों एवं शीघ्र प्रतिक्रिया (रेपिड रिस्पांस) के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस कार्यक्रम में राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान (स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर) के संचालक डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव, उप संचालक डॉ. वाई एस. ठाकुर, अम्बेडकर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. विनित जैन, मेडिसीन रोग विशेषज्ञ डॉ. डीपी लकड़ा उपस्थित रहीं।

 

04-02-2020
अम्बेडकर अस्पताल में हुई पीडियाट्रिक आंकोसर्जरी की विशेष ओपीडी की शुरूआत

रायपुर। डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के सर्जरी विभाग द्वारा बच्चों व किशोरों के लिये विशेष रूप से पीडियाट्रिक आंकोसर्जरी ओपीडी की विधिवत् शुरूआत विश्व कैंसर दिवस के उपलक्ष्य में 4 फरवरी से की गई। पीडियाट्रिक आंकोसर्जरी ओपीडी, सर्जरी ओपीडी क्रमांक 67 के अंदर कक्ष क्रमांक 51 में संचालित है। पहले दिन ओपीडी में विभागाध्यक्ष डॉ.शिप्रा शर्मा ने मरीजों का इलाज किया। डॉ.शिप्रा शर्मा ने बताया कि पहले दिन कैंसर सर्जरी के विशेष केस के रूप में सरगुजा जिले के पवनपुर गांव से एक तीन वर्षीय मासूम इलाज के लिये पहुंचा। मासूम के दाईं ओर गले के पीछे एक ट्यूमर है, जिसका आकार 6 सेंमी.के आसपास है। मासूम मरीज की सारी जांच आज ही हो गई तथा बायोप्सी जांच के लिये नमूना भेज दिया गया है। बायोप्सी रिपोर्ट आने के बाद आगे के उपचार की दिशा-निर्देश तय की जाएगी। मासूम को अभी अस्पताल में भर्ती किया गया है।

ब्रेस्ट क्लीनिक में महिलाओं को वीडियो के माध्यम से किया जागरूक
सर्जरी विभाग में विगत तीन वर्षों से महिलाओं के लिये विशेष रूप से ब्रेस्ट क्लीनिक चलाई जा रही है। सप्ताह के चार दिन सर्जरी विभाग में महिलाओं के लिए विशेष रूप से ब्रेस्ट क्लीनिक ओपीडी की सुविधा उपलब्ध है, जिसमें दो महिला डॉक्टर व सर्जरी विशेषज्ञ डॉ.मंजू सिंह व डॉ.अंजना निगम महिलाओं के स्तनों से सम्बन्धित समस्याओं की जांच व उपचार करते हैं। विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर इस वर्ष की थीम: आई एम एंड आई विल यानी मैं हूं और मैं रहूंगी/रहूंगा को ध्यान में रखते हुए ब्रेस्ट क्लीनिक में इलाज के लिए पहुंची महिलाओं को स्तन कैंसर के स्वतः जांच व परीक्षण की विधि को वीडियो के माध्यम से दिखाया गया। महिलाओं को स्तन कैंसर के सेल्फ एक्जामिनेशन के तरीकों की जानकारी देते हुए डॉ.मंजू सिंह व डॉ. अंजना निगम ने कहा कि महिलाओं के स्तनों में होने वाले बदलावों की समय रहते पहचान होना जरूरी है, इसके लिए प्रत्येक महिला को सेल्फ ब्रेस्ट एक्जामिनेशन आना चाहिए। इसके संकतों को यानी वार्निंग साइन्स को पहचान कर समय रहते इसका इलाज कर सकते हैं।

 

02-02-2020
जिस आंख से देख सकने की उम्मीद न थी, उसी में ऑपरेशन के बाद आयी रोशनी

रायपुर। डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर के नेत्र रोग विभाग के नेत्र व रेटिना विशेषज्ञ डॉ. संतोष सिंह पटेल ने एक मरीज की सफल सर्जरी कर खो चुकी आंखों की दृष्टि या यूं कहें रोशनी को वापस लाया है। यह ऑपरेशन इसलिए विशेष है कि मरीज रेटिना की बीमारी में दायीं आंख की रोशनी गंवा चुका था जिसमें रोशनी के वापस आने की कोई उम्मीद नहीं थी। उसके बाद दुर्भाग्यवश बायीं आंख, जो थोड़ी-बहुत ठीक थी जिसमें ऑपरेशन से रोशनी दुबारा वापस आ सकती थी उसे भी बाथरूम में गिरकर गंवा दी। परिणाम स्वरूम मरीज की दोनों आंखें खराब हो गईं। डॉ. संतोष सिंह पटेल ने रिस्क लेते हुए दायीं आंख का एक के बाद एक तीन चरणबद्ध ऑपरेशन किये। नेत्र ज्योति लौटाने के लिये 27 जनवरी को मरीज का अंतिम ऑपरेशन किया जिसके बाद दायीं आंख में 6 /18 दृष्टि है। मरीज अभी चिकित्सालय के नेत्र रोग वार्ड में भर्ती है तथा डिस्चार्ज लेकर घर जाने को तैयार है।  

रेटिना की बीमारी के इलाज के लिये पहुंचा था मरीज

बिलासपुर, अशोक नगर निवासी 71 वर्षीय मरीज मनबहल सिंह ठाकुर सबसे पहले सिम्स हॉस्पिटल बिलासपुर में 1 नवंबर को दिखाया जहां पर रेटिना की बीमारी के इलाज के लिए डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेज अस्पताल रायपुर रेफर किया। मेकाहारा में रेटिना विशेषज्ञ डॉ. संतोष सिंह पटेल ने 2 नवंबर को जाँच की तब उस वक्त उनके दायीं आंख में हैंड मूवमेंट (केवल हाथ का लहराना देख पाने) के आस-पास ही दृष्टि थी तथा रेटिना में समस्या थी। वहीं बायीं आंख की जांच करने पर उसमें 1 मीटर के आस-पास तक ही दृष्टि थी और इस आंख में रेटिना थोड़ा ठीक था इसलिए मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए कहा गया। चूंकि दायीं आंख में कोई रोशनी आने की उम्मीद नहीं थी इसलिए बायीं आंख के ऑपरेशन की सलाह दी गयी। बायीं आंख में यदि दृष्टि लौट आती है तो बाद में दायीं आंख का रेटिना का ऑपरेशन करके एक प्रयास करने की बात कही गयी।

परिवार में शादी के कारण नहीं कराया ऑपरेशन

डॉ. संतोष सिंह पटेल ने मरीज को पूरी वस्तुस्थिति से अवगत कराने के बाद उसी दिन यानी 2 नवंबर को ही भर्ती कर बायीं आंख के ऑपरेशन की बात कही लेकिन परिवार में शादी होने के कारण मरीज भर्ती नहीं हुआ। 2 व 3 नवंबर की दरमियानी रात 1.30 मिनट पर मरीज बाथरूम में गिर गया और चोट लगने के कारण जो आँख (बायीं आंख) अच्छी थी एवं जिसका ऑपरेशन करके ज्यादा रोशनी की उम्मीद थी उसी में गंभीर चोट आ गयी। बायीं आंखें में ग्लोब रप्चर, लेंस डिस्लोकेशन, हाइफेमा, रेटिना डिटैचमेंट हो गया जिससे पूरी तरह से बायीं आंख से दिखना बंद हो गया।

बायीं आंख में गंभीर चोट के कारण नहीं आयी रोशनी

अब मरीज मेकाहारा इमरजेंसी में रात को 3 नवंबर को आंख के गंभीर चोट के साथ भर्ती हुआ। उसके बाद चोटिल बायीं आंख को ऑपरेशन करके ठीक किया गया। इस तरह से बायीं आंखों के समय-समय पर दो ऑपरेशन किये गए लेकिन रेटिना के पूरी तरह ठीक हो जाने के बाद भी चोट के गंभीर होने के कारण रोशनी नहीं आ पायी। अब मरीज को दोनों आँखों से कुछ नहीं दिखता था वो पूरी तरह से घर वालों पर निर्भर हो गया। मरीज की देख पाने की रही-सही उम्मीद भी जाती रही।

नयी पद्धति रेट्रोफिक्सेटेड आईओल का इस्तेमाल

मरीज दोबारा फॉलोअप में जनवरी में आया। दुबारा कुछ हो सकता है कि, आस में दोबारा जाँच की गयी एवं इस बार दायीं आंख के ऑपरेशन की प्लानिंग की गयी। बहुत कम उम्मीद में दायीं आंख के रेटिना एवं लेंस का दोबारा ऑपरेशन किया गया। इस आँख का पूर्व में बिलासपुर में मोतियाबिंद का ऑपरेशन होने के बाद से रेटिना की बीमारी के कारण से दिखना बंद हो गया था। 27 जनवरी को मेकाहारा में दायीं आंख का कॉम्प्लेक्स ऑपरेशन, जिसमें रेटिना एवं रेट्रोफिक्सेटेड आईओल (लेंस को आईरिस के पीछे से हुक करके बिठाने की तकनीक) किया गया। वर्तमान में अब मरीज को लगभग तीन महीने के बाद फिर से दिखना चालू हो गया है। उसके दायीं आंख में अब 6 /18 रोशनी है।

मेकाहारा में किये गये ऑपरेशन (चरणबद्ध)

1. सबसे पहले बायीं आंख का चोट के बाद ग्लोब रप्चर का रिपेयर किया गया। इसके बाद विट्रियस हेमरेज (नेत्र गुहा के भीतर लगे चोट) एवं रेटिना का ऑपरेशन किया गया।
2. फिर बायीं आंख के रेटिना का ऑपरेशन किया गया ।
3. इसके बाद दायीं आंख का रिकंस्ट्रक्शन, विट्रेक्टॉमी (आंख के ठोस चिपचिपे घोल को हटाने की सर्जरी) के बाद रेट्रोफिक्सेटेड सेकंडरी आई. ओ. एल किया गया जो कि पिछली मोतियाबिंद सर्जरी के बाद से एंटीरियर सीनेकीआ, पोस्टीरियर सीनेकीआ तथा अफेकिआ रेटिना प्रॉब्लम के कारण से ख़राब हो गयी थी।

विशेषज्ञों की टीम

विभागाध्यक्ष डॉ. एम. एल. गर्ग के मार्गदर्शन में हुये इस ऑपरेशन में एसोसिएट प्रोफेसर व रेटिना स्पेशलिस्ट डॉ. संतोष सिंह पटेल, डॉ. डॉ. राजेश, डॉ. कमलेश, डॉ. विनीत, डॉ. बलवंत, डॉ. मानसी, एनेस्थेसिया से डॉ. जया लालवानी की विशेष भूमिका रही।

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